करवा चौथ पर चांद का दीदार कर महिलाओं ने खोला व्रत

जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे
जो तुमको …

चाहेंगे, निभाएंगे, सराहेंगे आप ही को
आँखों में दम है जब तक, देखेंगे आप ही को
अपनी जुबान से आपके जजबात कहेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे
जो तुमको हो पसंद …

कदाचित् इस गीत की पंक्ति आज हर सुहागिनी महिला को अपने पति की ओर से सुनने को मिली होगी। करवा चौथ की सांझ को सुहागिनियों ने चांद का दीदार कर पति की दीर्घायु और सर्व गुण संपन्न होने की कामना की। तो वहीं, पतियों ने भी उन्हें हर समय साथ रहने और प्रत्येक परिस्थिति में साथ निभाने का वायदा किया। आज तीर्थनगरी के बाजारों में सिर्फ जोड़े ही देखने को मिले। एक साथ तीर्थनगरी के बाजारों में सुहागिनी महिलाओं को यूं सजा संवरा देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों देवी और देवता एक साथ आ पहुंचे। इस मौके पर फोटोग्राफरों की भी धूम रहीं। ग्रुप फोटों खींच कर देकर उन्होंने भी चांदी बटोरी।

कोरोना काल पर सुहागिनियों की जीत हुई। तीर्थनगरी में वही जज्बे, उत्साह और उत्सव की भांति करवा चौथ का पर्व मनाया गया। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान आदि कर निर्जल व्रत धारण किया। दोपहर बाद सामूहिक रूप से करवा चौथ की कथा, पार्वती माता, चैथ माता की कथा का श्रवण किया।

शाम ढलते ही सुहागिनियों ने दुल्हन की भांति तैयार और उनके पतियों ने दुल्हे की तरह परिधान पहने। इसके बाद गंगा तट पर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां सामूहिक रूप से ग्रुप फोटो खिंचवाई। इसके बाद चांद आने पर छलनी की मदद से पति का चेहरा देखा। इसके बाद पतियों ने अपनी पत्नियों को जल पिलाकर व्रत खुलवाया। इसके बाद पूर्ण रूप से व्रत खोला गया। व्रती महिलाओं ने पति सहित परिवार के सभी बड़े लोगों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। साथ ही चांद से पति की लंबी उम्र की कामना भी की।

केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मंदिर के नव निर्माण में मुंबई के दानी मनोज सोलंकी ने जताई इच्छा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड की बैठक हुई। बैठक में बोर्ड के संचालन से सम्बन्धित विषयों के साथ ही बोर्ड द्वारा तैयार किये विभिन्न ड्राफ्ट रूल को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे शासन को उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें पुजारियों, न्यासी, तीर्थ पुरोहितो, पण्डो व हक हकूक धारियों के अधिकारों का विनिश्चय एवं संरक्षण से सम्बन्धित नियमावली भी शामिल है। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के लोगो (प्रतीक चिन्ह्) की डिजाइनों पर भी चर्चा हुई। जिनमें कतिपय संशोधन के पश्चात अन्तिम निर्णय लिया जायेगा।
बैठक में श्री बद्रीनाथ धाम में मन्दिर एवं समीपवर्ती स्थलों के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया कि बद्रीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या में प्रतिवर्ष हो रही वृद्धि के कारण इस क्षेत्र का विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण आवश्यक है ताकि भविष्य में यात्रियों को दर्शन, यातायात एवं ठहरने की समुचित व्यवस्था हो सके इसके लिए देवस्थानम बोर्ड को इसकी व्यवस्था सौंपे जाने पर विचार किया गया। बोर्ड के स्तर पर इससे सम्बन्धित कार्यवाही सुनिश्चित कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित करने पर सहमति बनी। बोर्ड अपने स्तर पर इसके लिये तकनीकि एवं विषय विशेषज्ञों की व्यवस्था भी कर सकेगा। इसके साथ ही बैठक में तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मन्दिर एवं सभा मण्डप आदि के जीर्णोद्धार पर भी सहमति बनी इसके लिये यू.एस.ए. के दानी पंकज कुमार द्वारा धनराशि व्यय करने की इच्छा जतायी है।
केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मन्दिर के नव निर्माण के लिये भी स्वीकृति प्रदान की गई इस मन्दिर के निर्माण के लिये मुम्बई के दानी मनोज सोलंकी ने इच्छा व्यक्त की है। श्री केदारनाथ मन्दिर के पूरब द्वार की मरम्मत पर भी सहमति बनी जिसके लिये धनराशि दानी हरियाणा के श्री यतिन घई ने दान की सहमति दी है।

बैठक में केदारनाथ मे रावल पुजारी आदि के कक्षों की मरम्मत भविष्य में ऊखीमठ मन्दिर के जीर्णोद्वार, बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को डिजिटाइल किये जाने, कार्तिक स्वामी मन्दिर को देवस्थानम बोर्ड के अधीन लाये जाने तथा थैलीसैण्ड स्थित विन्देश्वर मन्दिर के जीर्णोद्वार किये जाने पर सहमति प्रदान की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष, उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड त्रिवेन्द्र ने यात्रा मार्गो सहित मन्दिर परिसरो में देवस्थानम बोर्ड के साइनेज होर्डिंग आदि लगाये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ मन्दिरों के पुजारियों, पण्डों, पुरोहितों, वाद्य यंत्र वादको आदि का विवरण तैयार किया जाय ताकि जरूरत पड़ने पर इन लोगों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा सके। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी संस्कृति के संवाहक हैं।
उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि 25 अक्टूबर तक चारधाम में 1.72 लाख यात्री दर्शनार्थ आये हैं तथा 2 लाख द्वारा रजिस्ट्रेशन किया गया है, जबकि बद्रीनाथ मन्दिर को 7.55 करोड़ तथा केदारनाथ मन्दिर को 75 लाख की आय हुई है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड सतपाल महाराज, विधायक महेन्द्र भट्ट, गोपाल रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, सचिव वित्त श्रीमती सौजन्या, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह, देवस्थानम बोर्ड के अनिल ध्यानी, प्रमोद नोटियाल, डॉ0 हरीश गौड आदि उपस्थित थे।

दर्जाधारी राज्यमंत्री ने पारम्परिक लोक गीत ’झुमका’ का किया लोकार्पण

उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाता प्रसिद्ध लोक नृत्य गीत झुमैला का अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा की ओर से लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वीडियो गीत को दर्जाधारी राज्यमंत्री भगतराम कोठारी व महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजे नेगी ने संयुक्त रूप से किया।

गीत में अपनी आवाज लोकगायक अजय नौटियाल और गायिका पूनम सती ने दी है। महासभा के अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने बताया कि युवा गीतकार कमल जोशी व अजय नोटियाल द्वारा इस लोकगीत को पुनर्रचित कर और परिष्कृत व रुचिकर बनाने का प्रयास किया है। निर्माता दौलत राणा व एसडीई प्रोडक्शन के बैनर तले बने इस गीत का निर्देशन अंकुश सकलानी फिल्मांकन एवं सम्पादन रज्जी गोसाईं ने किया है। अभिनय फौजी जवान तारा सिंह व अभिनेत्री शालिनी सुंदरियाल ने किया है। लोक गायक अजय ने बताया कि यह गीत उत्तराखण्डी संस्कृति को गौरवपूर्ण रूप से दर्शाता है इसमें नायक नायिका के बीच बेहद दिलचस्प संवाद हैं कि नायिका झुमैला खेलना (पारंपरिक सामूहिक नृत्य करना) तो चाहती है लेकिन क्योंकि उनके जेठ भी झुमैला देख रहे हैं तो वो नृत्य में प्रतिभाग नही कर सकती। आज भी उत्तराखंड के गांवों में पति के बड़े भाई यानी जेठ से बहुओं का पर्दा करने की परंपरा है जिसे गढ़वाली में छौं भचना कहते हैं, यह संयुक्त परिवारों के ताने बाने को बनाये रखने के लिए परिवार के बड़ों को छोटों द्वारा सम्मान देने का एक बेहतरीन तरीका था। मौके पर लोक गायक कमल जोशी, समाजसेवी नरेंद्र मैठाणी, जगदीश कोठारी, प्रियांशु कोठारी, मयंक भट्ट आदि मौजूद रहे।

‘आखर’ के शब्दकोष से क्षेत्रीय भाषा और बोली में युवाओं का बढ़ेगा रूझान

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में कर्नल (रिटा.) डॉ. डीपी डिमरी एवं उनके सहयोगियों द्वारा उत्तराखण्ड की तीन क्षेत्रीय भाषाओं गढ़वाली, कुमांऊनी और जौनसारी पर बनाये गये मोबाईल ऐप ‘आखर’ शब्दकोष का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा एवं बोलियों के प्रति लोगों का रूझान बढ़े, इस दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है। हमें अपनी भाषा, बोलियों एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए निरन्तर प्रयास करने होंगे। किसी भी क्षेत्र की बोली, भाषा एवं संस्कृति ही उस क्षेत्र की विशिष्टता बताती है।

डॉ. डीपी डिमरी ने कहा कि यह प्रयास क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने के इच्छुक युवाओं व इन भाषाओं में रूचि रखने वाले लोगों के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय भाषाओं पर कई विस्तृत शब्दकोष उपलब्ध हैं। लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उनका शीघ्र उपलब्ध हो पाना कठिन होता है। इसलिए लघु रूप में डिजिटल शब्दकोष उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। डॉ. डिमरी ने बताया कि इस शब्दकोष को बनाने में उनकी टीम के सदस्यों अरूण लखेड़ा, पूरन कांडपाल, नूतन पोखरियाल, उर्मिला सिंह एवं रेखा डिमरी का सहयोग रहा है।

हिमालय दिवस पर बोले सीएम, हिमालय के संरक्षण की पहली जिम्मेदारी हमारी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिमालय दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में कहा कि हिमालय न केवल भारत बल्कि विश्व की बहुत बड़ी आबादी को प्रभावित करता है। यह हमारा भविष्य एवं विरासत दोनों है, हिमालय के सुरक्षित रहने पर ही इससे निकलने वाली सदानीरा नदियां भी सुरक्षित रह पायेंगी, हिमालय की इन पावन नदियों का जल एवं जलवायु पूरे देश को एक सूत्र में पिरोता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारे जीवन के सरोकारों से गहनता से जुड़ा हुआ है, अतः हिमालय के संरक्षण की पहली जिम्मेदारी भी हमारी है। हिमालय के संरक्षण के लिए इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, नदियों एवं वनों का भी संरक्षण आवश्यक है, इसीलिए जल संरक्षण, संवर्धन तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यही नहीं हिमालय संरक्षण के लिए हमने राष्ट्रीय स्तर पर मुहिम भी चलाई, विगत में मसूरी में आयोजित हिमालय कॉन्क्लेव इसका प्रमाण है, इसमें लगभग सभी हिमालयी राज्यों द्वारा हिमालय के पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति मसूरी संकल्प पारित कर हिमालय को बचाने का संकल्प भी लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, प्रकृति प्रदत्त जैव विविधता, ग्लेशियर, नदियों, झीलों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी पहल की आवश्यकता है। हमें हिमालय को उसके व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा, राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर इस दिशा में विभिन्न कार्य योजनाओं के माध्यम से कई स्तरों पर विचार गोष्ठियों एवं जन जागरूकता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। फिर भी इस व्यापकता वाले विषय पर सभी बुद्धिजीवियों, विषय विशेषज्ञों, प्रकृति प्रेमियों, हिमालय पर उसकी समग्रता का अध्ययन करने वाले अध्येताओं को एक मंच पर आकर संजीदगी के साथ इस दिशा में आगे आना होगा, इसके लिए राज्य सरकार हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारे स्वभाव में है, हरेला जैसे पर्व प्रकृति से जुड़ने की हमारे पूर्वजों की दूरगामी सोच को दर्शाती है। वनों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन भी प्रकृति की प्रेरणा से संचालित हुआ है। पर्यावरण में हो रहे बदलावों, ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही जल जंगल जमीन से जुड़े विषयों पर समेकित चिंतन की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, सामाजिक चेतना तथा समेकित सामूहिक प्रयासों से ही हम इस समस्या के समाधान में सहयोगी बन सकते हैं। रिस्पना, कोसी जैसी नदियों के पुनर्जीवीकरण करने के लिए प्रयास किए जाने के साथ ही गंगा, यमुना व उनकी सहायक नदियों की स्वच्छता के लिए कारगर प्रयास किए जा रहे हैं। नदियों का स्वच्छ पर्यावरण भी हिमालय के पर्यावरण को बचाने में मददगार होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य सरकार हिमालय के पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सदैव दृढ़ संकल्पित रही है, इस संबंध में समय-समय पर किए गये अध्ययनों आदि पर तत्परता से कार्य योजना के निर्माण के प्रति ध्यान दिया गया है। प्रतिवर्ष हिमालय दिवस का आयोजन किया जाना इस विषय पर गंभीरता के साथ चिंतन करने के प्रयासों को प्रकट करता है।

कैबिनेट बैठकः केदारनाथ में हेलीपैड का विस्तार, वायुसेना का चिनूक हेलीकाॅप्टर लाएगा भारी भरकम मशीनें

उत्तराखंड में कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इसमें युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए यह निर्णय लिया गया कि उपनल के माध्यम से पूर्व सैनिकों के साथ ही सिविल लोगों को भी नौकरी दी जाएगी। पड़ोसी देशों से सीमा मसले में चीन व नेपाल सीमा से सटे सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क को मजबूत किए जाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए कपंनियों को सरकार एकमुश्त राशि देगी। इसी के साथ ही सरकार केदारनाथ नव निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए यहां हेलीपैड का विस्तार करने जा रही है। इसके बाद यहां वायुसेना का चिनूक हेलीकाॅप्टर आ सकेगा। जो भारी भरकम मशीनों को लाने में सक्षम है।
राज्य कैबिनेट ने शुक्रवार को केदारनाथ हेलीपैड विस्तार की योजना पर मुहर लगाई है। योजना के तहत अभी धाम में मौजूद 40 मीटर चैड़ा और 50 मीटर लंबा हेलीपैड को, 100 मीटर लंबा और 50 मीटर चैड़ा किया जाना है। इसके लिए कुछ भवनों को भी ध्वस्त किया जाएगा, जिससे हेलीपैड के सामने पचास मीटर और खुली जगह उपलब्ध हो पाएगी।

सरकार ने कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया कि उपनल में अब पूर्व सैनिकों के साथ सिविल वालों को भी नौकरी का मौका मिलेगा। मगर, नौकरी पर पूर्व सैनिकों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 को लाने पर मंजूरी हुई है। कोरोनाकाल में विधायकों के वेतन कटौती को लेकर सरकार विधानसभा में विधेयक लाएगी। राजकीय महाविद्यालयों में 257 संविदा-गेस्ट टीचरों की अवधि एक साल तक बढ़ाई गई।

मेडिकल कॉलेज में मेडिकल सोशल वर्कर्स सेवा नियमावली को भी मंजूरी दी गई है। उत्तराखण्ड नागरिक सुरक्षा क और ख नियमावली में संशोधन किया गया है, कृषि विभाग का शासन स्तर में अनुभाग एक हुआ, पहले चार अनुभाग थे। हरिद्वार स्थित माया देवी व जूना अखाड़ा की ऊंचाई की परमिशन कैबिनेट ने दी ।

सतर्कता विभाग को आरटीआई के नियम से बाहर किया है। प्रदेश में 25 किलोवाट के सौर्य मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना को मंजूरी दी गई है साथ ही स्टाम्प पेपर में 100 प्रतिशत की छूट। देहरादून के मेहर गांव में शहीद के नाम पर बनने वाले पेट्रोल पंप में नियमों में दी गई छूट गई है। पर्यटन को बढावा देने के लिए पर्यटक प्रोत्साहन कूपन योजना को शुरू किया गया, ई-बुकिंग करने वाले पर्यटकों को पर्यटक स्थलों पर 3 दिन रहने पर 1000 रूपए की छूट मिलेगी।

सिंचाई विभाग में निर्माण कार्यों में छोटे ठेकेदारों के लिए रास्ता तलाशने के लिए सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। यह समिति नहरों के निर्माण, बाढ़ सुरक्षा, रिवर ट्रेनिंग आदि कामों में टेंडर की वर्तमान शर्तों शिथिलता का अध्ययन करेगी। राज्य के छोटे ठेकेदारों की सुविधा के लिए सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने इसका प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए थे।

देहरादून। सीएम सोलर स्वरोजगार योजना में स्टांप ड्यूटी पूरी तरह माफ कर दी गई है। इसमें दो लाख रुपये तक सब्सिड़ी मिलेगी और भूउपयोग परिवर्तन की जरूरत नहीं होगी। इस तरह सरकार ने 25 किलोवॉट के सोलर प्लांट के जरिए राज्य के दस हजार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट में गुणवत्ता, गति व पारदर्शिता का रखा जाए विशेष ख्यालः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलाधिकारियों से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन निर्माण के प्रगति के सम्बन्ध में समीक्षा की। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के साथ समन्वय बनाकर हर तरह की प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएं। उन्होंने सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिये कि अवशेष कार्य को जल्द से जल्द टाईमलाईन सहित पूर्ण कर लिया जाए साथ ही कार्यों में गुणवत्ता, गति एवं पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाय। मुख्य सचिव ने आर.वी.एन.एल. के अधिकारियों से कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जायेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि जल संस्थान जल्द से जल्द पाईप लाइन शिफ्टिंग का कार्य पूर्ण कर लें उसमें आ रही समस्याओं से समय-समय पर शासन को अवगत कराया जाए ताकि समस्याओं का निराकरण हो। रेल लाइन से संबंधित भूमि अधिग्रहण के कार्य के पश्चात् भूमि मुआवजा सम्बन्धी कार्य प्राथमिकता के आधार पर किये जाए। टनल निर्माण एवं अन्य निर्माण से होने वाले मलबा के निस्तारण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को अवशेष निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने निर्देश दिये कि रेलवे लाइन में बनने वाले टनलों में विशेषकर जो वन क्षेत्र में हो उन टनलों में सेंसरयुक्त गेट लगाये जाएं जिससे जंगली जानवरों के टनल में जाने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सके। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 के 03 स्थानों ब्यासी डायवर्जन, नरकोटा डायवर्जन व सुमेरपुर डायवर्जन के प्रकरणों पर भी चर्चा की गई।

टिहरी डीएम ने जताई नाराजगी, बोले छोटे कस्बों के शुरू और अंतिम छोर पर पसरा रहता है कूड़ा

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में गंगा समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने एएमए जिला पंचायत को निर्देश दिए कि जनपद के छोटे कस्बों में कूड़े के निस्तारण के लिए ठोस कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके लिए पर्यावरण मित्रों की दो अलग-अलग टीमों के गठन के निर्देश दिए हैं। जिसमें से एक टीम डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन वह दूसरी टीम कूड़े के पृथकीकरण का कार्य करेगी। जिलाधिकारी ने एएमए को यह भी निर्देश दिए कि कूड़े के पृथकीकरण के बाद जैविक कूड़े से कमपोस्ट बनाई जा सके इस हेतु कंपोस्टिंग पीटो का निर्माण भी प्राथमिकता के आधार पर हो।
जिलाधिकारी ने नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा वे गंगा प्रहरियों की बैठक तत्काल करते हुए बैठक के मिनट्स को उपलब्ध कराएं। जिलाधिकारी ने कहा कि कंडिसौड़, जाखणीधार व केम्पटी के जैसे बड़े कस्बो में कूड़ा के प्रबंधन की ठोस रूपरेखा तैयार करते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि जनपद हर छोटे कस्बों के शुरू एवं समाप्ति पर कूड़े के ढेर प्राय देखने को मिलते हैं जो कि निराशाजनक है। कहा कि कस्बो में पसरे कूड़े का निस्तारण करना अनिवार्य है ताकि जनपद को साफ और स्वच्छ रखा जा सके। इसके अलावा उन्होंने उपजिलाधिकारियों को कूड़े के सोर्स पृथकीकरण के दौरान नगर पालिकाओं-पंचायतो में उपस्थित रहते हुए लोगो में जागरूक करने के निर्देश दिए है। बैठक में डीएफओ कोको रोसे, परियोजना निदेश डीआरडीए भरत चंद्र भट्ट, ईई राजकीय सिंचाई, ऐ सी एम ओ डॉ० दीपा रुबाली, ऐ एमए जिला पंचायत आदि उपस्थित थे।

जिलेवार गंगा स्वच्छता समितियों की बैठक हर माह आयोजित करने के निर्देश

सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव ओम प्रकाश की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय गंगा समिति की नवीं बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि गंगा में ड्रेनेज का अशोधित जल नहीं जाना चाहिए, साथ ही ऐसे स्थल जो सीवर लाइन से जुड़े नहीं हैं, का सेप्टेज मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने देवप्रयाग, गंगोत्री, बदरीनाथ में भी सेप्टेज मैनेजमेंट की तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन नगरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था नहीं है उनमें सॉलिड वेस्ट के लिये ट्रांसपोर्टेशन एवं प्रोसेसिंग की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाय।
मुख्य सचिव ने पुराने कूड़े को प्रोसेसिंग कर उसके निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित नगर निकायों को दिये। मुख्य सचिव ने समस्त जिला विकास समितियों को एनजीटी की गाइड लाइन के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चत करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने प्रदेश की नदियों में सफाई व्यवस्था बनाये रखने तथा जनपद गंगा समितियों की बैठक नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, रूद्रप्रयाग, चमोली, हरिद्वार के जिलाधिकारियों को दिये, तथा उनकी समस्याओं को भी सुना।
बैठक में अपर सचिव उदयराज सिंह ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि प्रदेश में 32 एस.टी.पी. में से 29 एस.टी.पी का निर्माण हो चुका है जिनमें सीवरेज ट्रीटमेंट चल रहा है। अवशेष 1 परियोजना जोशीमठ तथा 2 श्रीकोट में निर्माणाधीन है। इन परियोजनाओं की सीवरेज शोधन क्षमता 129 एम.एल.डी है।
मुख्य सचिव ने सीवरेज के शोधन की क्षमता परियोजना की क्षमता के अनुरूप विस्तार करने के निर्देश दिये। वर्तमान में इन परियोजनाओं से 27 एम.एल.डी पानी का शोधन हो रहा है। बैठक में प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव नितेश झा, अपर सचिव उदयराज, सदस्य सचिव उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एस.पी. सुबुद्धि उपस्थित थे।

हमारी गौरव परंपराओं को संजोये रहा नगर निगम क्षेत्र

तहसील चैक जल्द ही गौरा देवी चौक के नाम से जाना जायेगा। नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर के चौराहों के कराए जा रहे सौंदर्यीकरण अभियान के तहत गौरा देवी चौक का निर्माण कार्य पूर्ण करने की कवायद अब अपने अंतिम चरण में चल रही है। ऋषिकेश हरिद्वार बाइपास मार्ग स्थित तहसील चौक पर गौरा देवी की बेहद खूबसूरत प्रतिमा लगाए जाने के साथ खूबसूरत लाइटिंग एवं झरनों से निर्माणाधीन स्थल को सुसज्जित किया जा रहा है।
निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंची नगर निगम महापौर अनिता ममगाई ने बताया कि गौरादेवी चौक का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। जल्द ही एक समारोह के माध्यम से इसका लोकार्पण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन शहर के महापुरुषों के नाम पर महत्वपूर्ण स्थलों एवं चौराहों के सौंदर्यीकरण के लिए कटिबद्ध होकर कार्य कर रहा है। चिपको आंदोलन के लिए अपनी एक विशिष्ट पहचान रखने वाली गौरा देवी के नाम पर बेहद खूबसूरत चौक का निर्माण करा कर नगर निगम प्रशासन उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। साथ ही चौक के जीर्णोद्धार के बाद यहां होने वाले सड़क हादसों पर भी अंकुश लग सकेगा।
इस दौरान एई आनंद मिश्रवाण, जेई उपेंद्र गोयल, पार्षद राकेश मिया, पार्षद विजेंद्र मोघा, पार्षद विजय बडोनी, पार्षद राजेन्द्र प्रेम सिंह बिष्ट, पार्षद विजय लक्ष्मी, परीक्षित मेहरा, रंजन अंथवाल, सुजीत यादव, विजय बिष्ट आदि मोजूद रहे।