’’चैंपियन के जवाब देने पर कार्रवाई करने का’’ नया बयान आने से भाजपा की फजीहत

उत्तराखंड भाजपा ने खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के निष्कासन के संबंध में अपने ही प्रभारी का बयान पलट दिया है। पार्टी ने कहा कि चैंपियन को अभी निष्कासित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें निष्कासन का नोटिस दिया गया है। उन्हें 10 दिन में नोटिस का जवाब देना है।
जवाब प्राप्त होने के बाद केंद्रीय नेतृत्व कार्रवाई तय करेगा। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रभारी श्याम जाजू ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से चैंपियन के निष्कासन की सिफारिश की थी, जिसे मान लिया गया। उन्होंने दावा किया था कि चैंपियन को निष्कासित कर दिया गया है। हालांकि पार्टी ने अपना बयान बदला है। लेकिन कई बड़े नेता दबी जुबान से चैंपियन की पार्टी से बर्खास्तगी तय मान रहे हैं।
शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रमुख डॉ. देवेंद्र भसीन ने प्रदेश पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में चैंपियन के निष्कासन से इनकार किया। उन्होंने दोहराया कि चैंपियन के नए वीडियो के संबंध में पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।

जवाब मिलने के बाद संगठन लेगा निर्णय
नोटिस में उनसे पूछा गया है कि वीडियो के संदर्भ में क्यों न पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए। नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया गया है। जवाब प्राप्त होने या न प्राप्त होने की दशा में संगठन अपना निर्णय लेगा। कार्रवाई की जो भी स्थिति बनेगी, उसे केंद्रीय नेतृत्व को संस्तुति भेजेगा। विधायक चैंपियन का तीन माह का निलंबन अनिश्चितकाल के लिए कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने भी अपने स्तर पर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय नेतृत्व से विधायक चैंपियन के निष्कासन की सिफारिश की है। किसी विधायक या सांसद को पार्टी से निष्कासित करने का अंतिम अधिकार केंद्रीय नेतृत्व को है। इसीलिए पार्टी केंद्रीय नेतृत्व से कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

चैंपियन का निष्कासन तय …
सूत्रों की मानें तो भाजपा से चैंपियन का निष्कासन तय है। यही वजह है कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने उनके निष्कासन की घोषणा करने में कोई संकोच नहीं किया। लेकिन संगठन स्तर पर किसी जनप्रतिनिधि के निष्कासन की एक प्रक्रिया है। पार्टी अपनी इस संविधानिक प्रक्रिया से बंधी है। इसके अनुसार, किसी सांसद या विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पार्टी को उसे 10 दिन का नोटिस देना आवश्यक है। जवाब प्राप्त होने के बाद पार्टी एक्शन ले सकती है।

भाजपा ने निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्हें समय दिया गया है। उन्हें जवाब देना है। लेकिन ये स्पष्ट है कि इस तरह की भाषा बोलने वाले और उत्तराखंड को गाली देने वाले के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है।
– अनिल बलूनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व राज्यसभा सांसद

हिमालयन कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों के विकास पर मंथन

हिमालयी संस्कृति, आर्थिकी व पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी हिमालयी राज्य एक मंच पर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर हो रहे हिमालयन कान्क्लेव में भारत के सभी हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ व हिमालय के संरक्षण पर मंथन करेंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी इसमें शामिल होने पर अपनी सहमति दी है। शासन द्वारा 28 तारीख को मसूरी में प्रस्तावित हिमालयन कान्क्लेव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ‘‘हिमालयन कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों की समस्याओं व उनके समाधान के लिए गहनता से मंथन किया जाएगा। यह मंथन भविष्य में हिमालयी राज्यों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगा। इससे नीति आयोग व वित्त आयोग को हिमालयी राज्यों की वास्तविक स्थिति को जानने में आसानी रहेगी।’’

उत्तराखण्ड में पहली बार हो रहा है हिमालयी राज्यों का कान्क्लेव
उत्तराखण्ड में पहली बार हिमालयी सरोकार से जुड़े कान्क्लेव का आयोजन हो रहा है जिसमें तमाम हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रशासकों, अधिकारियों व विशषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा। इसमें मुख्यतः उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, आसाम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम व मणिपुर राज्यों के मुख्यमंत्री व प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे। व्यापक विचार विमर्श के बाद एक हिमालयन ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा जो कि नीति आयोग को प्रेषित किया जाएगा।

ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय के इको सिस्टम का संरक्षण
बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारतीय संस्कृति व सभ्यता के मूल स्त्रोत हिमालय व यहां की जीवनदायिनी नदियों पर संकट मंडरा रहा है। हिमालयी इकोलॉजी की रक्षा के साथ कैसे विकास का लाभ यहां के लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, कान्क्लेव का मुख्य एजेंडा रहेगा। हिमालय के संसाधनों का उपयोग कैसे यहां की अर्थव्यवस्था को उन्नत करने में किया जा सकता है ताकि यहां के युवा को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। हिमालय भारतीय सभ्यता का केंद्र बिंदु तो है ही, इसका सामरिक महत्व भी काफी ज्यादा है। सभी हिमालयी राज्यों की सीमाएं दूसरे देशों से जुड़ी हुई हैं। इस दृष्टि से भी कान्क्लेव में चर्चा की जा सकती है।

जल संरक्षण व जल संवर्धन पर भी रहेगा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलशक्ति मंत्रालय बनाकर जल संरक्षण व जल संवर्धन की बड़ी पहल की है। इसमें हिमालयी राज्यों की सहभागिता बहुत जरूरी है। ग्लेशियरों, नदियों, झीलों, तालाबों व वनों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाना भी कान्क्लेव का प्रमुख एजेंडा रहेगा।

सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बनेगी कार्ययोजना
एक ओर जहां हिमालय का संरक्षण जरूरी है वहीं यहां के दूरदराज के गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका उपलब्ध करवाना भी आवश्यक है। इसके लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देना होगा। कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों में सतत विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।

नीति आयोग को सौंपा जाएगा ड्राफ्ट
हिमालयन कान्क्लेव में वैचारिक मंथन के बाद प्राप्त निष्कर्षों को एक ड्राफ्ट का रूप देते हुए नीति आयोग को सौंपा जाएगा। इससे नीति आयोग को हिमालयी राज्यों के लिए नीति निर्धारण करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग को हिमालयी राज्यों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं व क्षमताओं के बारे में पता चलेगा।

ई वाहन और स्टार्ट अप पर फोकस, आयकर में कोई बदलाव नही

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश किया। बजट में उन्होंने गरीबों को काफी तोहफे दिए। वहीं अमीरों पर टैक्स की दर बढ़ा दी है। इसके अलावा मध्यम वर्ग के लिए टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि मध्यम वर्ग के घर खरीदने के सपने को सरकार पूरा करेगी। घर खरीदने के लिए कर्ज पर मिलने वाली छूट को दो लाख से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख कर दिया गया है। पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा होगा क्योंकि अब इस पर एक-एक रुपये का सेस लगेगा।

सोना, तंबाकू, पेट्रोल-डीजल महंगा
बजट में सोने पर लगे शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है। तंबाकू पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। वहीं पेट्रोल-डीजल पर एक-एक रुपये का अतिरिक्त सेस लगाया गया है। जिससे अब वाहन चालकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।

जितनी कमाई, उतना टैक्स
मोदी सरकार ने ज्यादा कमाई करने वालों को झटका दिया है। दो करोड़ तक के टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं किया है लेकिन सालाना दो से पांच करोड़ रुपये कमाने वालों को तीन फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा। वहीं पांच करोड़ से ज्यादा की कमाई वालों पर सात प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है।

ज्यादा पैसे निकालने पर लगेगा टैक्स
यदि कोई शख्स बैंक से एक साल में एक करोड़ से ज्यादा की राशि निकालता है तो उसे दो फीसदी का टीडीएस देना होगा। मतलब एक करोड़ से ज्यादा की राशि निकालने पर आपके खाते से दो लाख रुपये टैक्स के तौर कट जाएंगे।

आधार के जरिए भी दे सकते हैं टैक्स
मोदी सरकार ने आयकर रिटर्न को लेकर बड़ा एलान किया है। रिटर्न भरने के लिए अब पैन कार्ड जरूरी नहीं है। करदाता आधार कार्ड के जरिए भी टैक्स का भुगतान कर सकते हैं। वित्तमंत्री ने ईमानदार करदाताओं को धन्यवाद दिया।

मध्यम वर्ग को हाउसिंग लोन पर छूट
मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग के अपना घर खरीदने के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा एलान किया है। अब 45 लाख रुपये तक का घर खरीदने पर अतिरिक्त डेढ़ लाख रुपये की छूट मिलेगी। यानी घर के लिए यदि आपने कर्ज लिया है तो आपको साढ़े तीन लाख रुपये की छूट मिलेगी जो पहले दो लाख थी। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर ढाई लाख की छूट दी जाएगी।

सरकार लाएगी नए सिक्कों की सीरिज
वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषणा की कि विनिवेश के जरिए एक लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। एयर इंडिया में भी विनिवेश किया जाएगा। कर्ज देने वाली कंपनियों को अब सीधे रिजर्व बैंक नियंत्रित करेगा। सरकार एक से 20 रुपये के सिक्कों की नई सीरिज जारी करेगी।

नारी तू नारायणी
वित्त मंत्री ने महिलाओं को नारी तू नारायणी बताते हुए कहा कि उसके बिना देश का विकास नहीं हो सकता है। जनधन महिला खाताधारकों को पांच हजार रुपये ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी जाएगी। महिलाओं के अलग से एक लाख रुपये का मुद्रा लोन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 36 करोड़ एलईडी बल्ब बांटे हैं जिसके जरिए देश के सालाना 18431 करोड़ रुपये बचते हैं। रेलवे स्टेशनों का बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

कंपनियों को देना होगा 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स
वित्त मंत्री ने कहा कि 400 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। देश की 99 फीसदी कंपनियां इसके अंतर्गत आ जाएंगी। ईलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाली जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर पांच किया जाएगा। स्टार्टअप्स के लिए बड़ी छूट का एलान किया गया है। स्टार्टअप्स को एंजल टैक्स नहीं देना होगा। आयकर विभाग इनकी जांच नहीं करेगा।

एफडीआई को लेकर एलान
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि मीडिया, एविएशन, एनिमेशन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई पर भी विचार किया जा रहा है। अतंरिक्ष के क्षेत्र में भारत एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है। हमारी सरकार इस ताकत को और बढ़ाना चाहती है। सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता को बढ़ाया जाएगा।

छोटे दुकानदारों को मिलेगी पेंशन
मोदी सरकार छोटे दुकानदारों को 60 साल की आयु के बाद पेंशन देगा। वहीं उनके कर्ज को 59 मिनट में मंजूरी देनी होगी। इस योजना का लाभ तीन करोड़ से ज्यादा दुकानदारों को मिलेगा। सरकार सभी को 2022 तक घर देने की योजना बना रही है।

सभी को मिलेगा स्टैंडअप इंडिया का लाभ
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि स्टैंडअप इंडिया योजना के तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों को लाभ मिलेगा। स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शन पर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।

पांच ट्रिलियन डॉलर की होगी इकोनॉमी
वित्त मंत्री का कहना है कि आगामी पांच सालों में भारत की इकोनॉमी पांच ट्रिलियन डॉलर की होगी। वहीं इसी साल भारत तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। आगामी वर्षों में सरकार द्वारा और फेसिलिटेशन सेंटर खोले जाएंगे।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति
मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार है। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के लिए कई प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही नई शिक्षा नीति लाएगी। देश में शोध की गुणवत्ता सुधारने और प्रौद्योगिकी समेत अन्य क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा।

खेल में करियर
सरकार राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड का गठन करेगी। ताकि जो बच्चे, युवा खेल में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें मदद मिल सके। उच्च शिक्षा और शीर्ष संस्थानों के लिए बजट में 400 करोड़ रुपये खर्च किये जाने का प्रावधान किया गया है। देश में स्किल्ड मैनपावर बढ़ाने के लिए एक करोड़ युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन कोर्स चलाने पर फोकस किया जाएगा। ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने या किसी अन्य कारण से किसी की पढ़ाई न रुके। स्टडी इंडिया रू स्टडी इंडिया प्रोग्राम चलाया जाएगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा विदेशी छात्र-छात्राओं को भारत में पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।

रेल इंफ्रा के लिए सरकार खर्च करेगी 50 लाख करोड़ रुपये
भारतीय रेलवे के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पीपीपी मॉडल लाया जाएगा। 12 साल में सरकार रेल इंफ्रा के लिए 50 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। 2019 में मेट्रो की लंबाई बढ़ेगी।

किसान को क्या मिला
10 हजार नए किसान उत्पादक संगठनों का अगले पांच साल में निर्माण किया जाएगा। जीरो बजट खेती पर जोर दिया जाएगा। खेती के बुनियादी तरीकों पर लौटना इसका उद्देश्य है। इसी से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा होगा।

सफाई और गांवों पर सरकार का जोर
साल 2014 के बाद 9.6 करोड़ शौचालय का निर्माण किया गया है। 5.6 लाख गांव आज देश में खुले से शौच से मुक्त हो गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड को मिली मायूसी, महाकुंभ और राष्ट्रीय खेल के लिए बजट में नही हुआ प्रवाधान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में ग्रीन बोनस मिलने का सपना टूट गया है। बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत नीति आयोग के समक्ष ग्रीन बोनस की जोरदार पैरोकारी कर आए थे।
नीति आयोग ने भी पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में हिमालयी राज्यों को वित्तीय अनुदान दिए जाने पर अपनी सहमति जताई थी। लेकिन शुक्रवार को पेश हुए बजट में ग्रीन बोनस का जिक्र तक नहीं हुआ। इतना ही नहीं भौगोलिक कठिनाइयों और पर्यावरणीय दबावों के बीच विकास की चुनौती का सामना कर रहे उत्तराखंड को निराशा हुई कि 2021 में प्रस्तावित हरिद्वार महाकुंभ और राष्ट्रीय खेलों के लिए बजट में प्रावधान नहीं हुआ। लेकिन प्रदेश को अधिक झटका ग्रीन बोनस न मिलने से लगा। पिछले करीब एक दशक से प्रदेश में काबिज रही सरकारों ने इस मांग को केंद्र से बेहद गंभीरता के साथ उठाया। हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने की पैरोकारी करने वालों में केंद्र में कैबिनेट मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल रहे हैं।
राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी भी ग्रीन बोनस की लगातार वकालत कर रहे हैं। मगर पर्यावरणीय संरक्षण के दबाव में विकास की भारी कीमत चुका रहे उत्तराखंड पर फिलहाल केंद्र की कृपा दृष्टि नहीं पड़ी। ऐसे में अब उत्तराखंड की उम्मीदें नीति आयोग और 15वें वित्त आयोग पर टिक गई हैं। ये दोनों आयोग हिमालयी राज्यों को पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में केंद्रीय सहायता दिए जाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।

विजयवर्गीय की मौजूदगी में पीएम ने दुव्र्यवहार बर्दाश्त नही करने की चेतावनी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता पुत्रों के दुर्व्यवहार पर मंगलवार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो भी हो, चाहे वह किसी का भी बेटा हो, मनमानी नहीं चलेगी। इस तरह का अक्खड़पन, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों और उनका समर्थन करने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने बीते दिनों इंदौर में नगर निगम के एक अधिकारी को क्रिकेट बैट से पीटा था। इस पर कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
सत्रहवीं लोकसभा में संसदीय दल की पहली बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। चाहे वह किसी का बेटा हो, सांसद हो अहंकार नहीं होना चाहिए। ठीक से व्यवहार करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका सीधा इशारा आकाश विजयवर्गीय की घटना की तरफ था। बैठक में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे।
सदस्यता मुहिम का जिक्र करते हुए मोदी ने सांसदों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने को कहा। उन्होंने कहा कि हर बूथ पर पांच पेड़ लगाएं। उन्होंने इसे पंचवटी अभियान का नाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह जुलाई को वाराणसी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तेलंगाना से इसकी शुरुआत करेंगे।
मोदी ने कहा कि सांसद का चुनाव आसान नहीं होता है। जीत के बाद जवाबदेही बनती है। नए सांसदों के लिए संसद सीखने का सबसे बड़ा मंच है। उन्हें सदन में रहकर चर्चा में सक्रियता से हिस्सा लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने तीन तलाक विधेयक के मौके पर लोकसभा में सांसदों की कम उपस्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, उपस्थिति को लेकर सतर्क रहें।

जय प्रकाश के आंदोलन से जुड़े और शुरु हुआ जे पी नड्डा का राजनैतिक सफर

जे पी नड्डा का पूरा नाम जगत प्रकाश नड्डा। लो-प्रोफाइल रहकर विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के हाई-प्रोफाइल नेता बनने का उनका सफर काफी लंबा रहा है। जेपी आंदोलन से प्रभावित होकर राजनीति में कदम रखने वाले नड्डा ने अपनी छवि एक प्रभावी और कुशल रणनीतिकार की बनाई। भाजपा का नेतृत्व बदलता रहा लेकिन पार्टी में उनकी हैसियत कभी नहीं बदली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संगठन में उनकी पैठ बढ़ती रही। वह पुराने नेतृत्व के भी करीब रहे तो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी भरोसेमंद माने गए। अब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद यह कहना मुनासिब ही होगा कि वे भाजपा की ताकतवर तिकड़ी का हिस्सा बन गए हैं।
बिहार में जन्मे नड्डा को किशोयरअवस्था में ही पता लग गया था कि वह राजनीति के लिए बने हैं और राजनीति उनके लिए। जब 16 बरस के थे तो जेपी आंदोलन से जुड़ गए। लिहाजा, राजनीति का ककहरा मंझे राजनेताओं के दौर में सीखने को मिला। इसके बाद सीधे छात्र राजनीति से जुड़ गए। उनकी काबिलियत देखते हुए ही 1982 में उन्हें उनकी पैतृक जमीन हिमाचल में विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बनाकर भेजा गया। वहां छात्रों के बीच नड्डा ने ऐसी लोकप्रियता हासिल कर ली थी कि उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश विवि के इतिहास में पहली बार एबीवीपी ने जीत हासिल की।
1983-84 में वे विवि में एबीवीपी के पहले अध्यक्ष बने। 1977 से 1990 तक करीब 13 साल के लिए एबीवीपी समेत कई पदों पर रहे। 1989 में तत्कालीन सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार की लड़ाई के लिए राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा बनाया। 1991 में 31 साल की उम्र में भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर उभरे। छात्र राजनीति में तप चुके नड्डा 1993 में पहली बार हिमाचल प्रदेश में विधायक बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री रहे तो वन एवं पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री का जिम्मा भी संभाला।
2012 में राज्यसभा पहुंचे और कई संसदीय समितियों में रहे। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की टीम में राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता रहे। अपने सौम्य स्वभाव, सादगी और मेहनतकश छवि से उन्होंने भाजपा में अलग नाम बनाया है। संगठन से लेकर चुनाव मैनेजमेंट में उन्होंने महारत हासिल कर ली है। आगे अगर वह अमित शाह की जगह लेने जा रहे हैं तो इसके पीछे उनके द्वारा शाह जैसा कारनामा कर दिखाना भी बड़ी वजह है। बीते पांच बरसों में भाजपा में नड्डा ने कई जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक निभाई हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी मुख्यालय से देशभर में पार्टी के अभियान की निगरानी की थी तो 2019 में उनके पास उत्तर प्रदेश का प्रभार था। जाहिर है जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी, जिसमें वे सफल भी रहे। सपा-बसपा गठबंधन के बाद जहां भाजपा को यूपी में आधी सीटें मिलने के आसार जताए जा रहे थे, वहां पार्टी ने 62 सीटें जीतीं। इस चुनाव में वह फिर से कुशल रणनीतिकार साबित हुए और पार्टी को 49.6 फीसदी वोट दिलाने का करिश्मा कर दिखाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ नड्डा के नजदीकी रिश्ते रहे हैं। मोदी जब हिमाचल के प्रभारी हुआ करते थे तब से दोनों के बीच अच्छे समीकरण बने रहे हैं। दोनों अशोक रोड स्थित भाजपा मुख्यालय में बने आउट हाउस में रहते थे। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्रालय भी संभाला।
इस बार जब उन्होंने शपथ नहीं ली तो लगभग तय माना जा रहा था कि पार्टी अध्यक्ष का पद जगत प्रकाश नड्डा के लिए ही रखा गया है, जिस पर सोमवार को मुहर भी लग गई। एक नई पारी के साथ 59 वर्षीय नड्डा सबसे शक्तिशाली दल के शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उनके लिए पहली सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में भाजपा के सरकार बनाने के मिशन को पूरा करना रहेगी।

मुख्यमंत्री ने की देहरादून से काठगोदाम के बीच सुबह के समय एक ट्रेन चलाने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से भेंट कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन की स्वीकृति वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली व हल्द्वानी के मध्य एक विशेष रेलगाड़ी व देहरादून से काठगोदाम के लिए सुबह के समय एक शताब्दी या जनशताब्दी गाड़ी प्रारम्भ करने के साथ ही रूड़की-देवबंद परियोजना के अवशेष कार्यों का वित्त पोषण रेल मंत्रालय भारत सरकार से किए जाने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर-बागेश्वर नई रेल लाईन एक महत्वपूर्ण प्रस्तावित रेल परियोजना है। वर्तमान में टनकपुर तक रेल लाईन स्थापित है। परंतु कुमायूं मण्डल के अन्य जनपद पिथौरागढ़, बागेश्वर पूर्ण रूप से पर्वतीय होने के कारण यहां आवागमन कठिन है। इस क्षेत्र के सामाजिक व आर्थिक विकास की प्रक्रिया को तेज करने, पर्यटक स्थलों का विकास करने व स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग करने के लिए टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना अति आवश्यक है। राज्य की सीमाएं नेपाल व चीन से लगी होने के कारण इसका सामरिक महत्व भी है। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन की स्वीकृति इसी वित्तीय वर्ष 2019-20 में किए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री को अवगत कराया कि देहरादून व कुमायूं क्षेत्र जिसका अंतिम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है के मध्य वर्तमान में सुबह व दोपहर के समय कोई भी सीधी रेल सेवा नहीं है। देहरादून व कुमायूं के मध्य काफी संख्या में पर्यटकों व यात्रियों की आवाजाही रहती है। सुबह के समय कोई रेलगाड़ी न होने के कारण लोगों को शाम तक इंतजार करना पड़ता है। इसलिए जनता के हित में देहरादून से हल्द्वानी/काठगोदाम के मध्य सुबह 5 से 6 बजे के बीच एक शताब्दी या जनशताब्दी गाड़ी की सेवा तुरंत प्रारम्भ की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली से हल्द्वानी के मध्य रेलगाड़ियों की संख्या यात्रियों व पर्यटकों के दृष्टिगत काफी कम है। इसलिए दिल्ली व हल्द्वानी के मध्य एक विशेष रेलगाड़ी की सेवा प्रारम्भ की जाए तो इससे पर्यटकों को भी काफी सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में रेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा रूड़की-देवबंद परियोजना की लागत 791.39 करोड़ रूपए पुनर्निधारित की गई है। साथ ही इस रेल परियोजना की लागत का वहन रेल मंत्रालय व उत्तराखण्ड राज्य के मध्य 50ः50 के अंशदान में किए जाने पर सहमति प्रदान की गई थी। रूड़की-देवबंद परियोजना की कुल लम्बाई 27.45 किमी है। इसके तहत उत्तर प्रदेश का लगभग 94 हेक्टेयर व उत्तराखण्ड का लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र आ रहा है। वर्तमान में रेल मार्ग द्वारा देवबंद (सहारनपुर) से रूड़की (हरिद्वार) आने के लिए अनावश्यक रूप से लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। प्रस्तावित रूड़की-देवबंद रेल लाईन के निर्माण से यात्रियों के समय की बचत होगी और यातायात सुगम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में परियोजना की कुल लागत 791.39 करोड़ रूपए है। इसके सापेक्ष उत्तराखण्ड राज्य द्वारा 240 करोड़ रूपए का अंशदान परियोजना में किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए रूड़की-देवबंद परियोजना में उत्तराखण्ड द्वारा वर्तमान तक दिए गए अंशदान को पर्याप्त मानते हुए प्रोजेक्ट के अवशेष कार्यों का वित पोषण रेल मंत्रालय भारत सरकार से करवाया जाए।

रैंजर्स कालेज मैदान की भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित करने की मांग

वन भूमि हस्तांतरण में 5 हैक्टेयर तक की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए। राज्य सरकार की परियोजनाओं में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड को अनुमन्य किया जाए। सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भेंट कर उत्तराखण्ड से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कैम्पा के अंतर्गत 2019-20 की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित करने, रैंजर्स कालेज मैदान की रिक्त भूमि को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आपदा क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों की तात्कालिकता, चारधाम आलवेदर रोड़, पीएमजीएसवाई, ग्रामीण विद्युतिकरण आदि महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण विषयों पर जल्द निर्णय लिए जाने की आवश्यकता होती है। इसलिए कार्यहित में 5 हैक्टेयर तक के प्रकरणों में स्वीकृति का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीआरओ की सड़क परियोजनाओं, केंद्र सरकार व केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की परियोजनाओं के लिए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण, डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड पर किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है। परंतु केंद्र पोषित परियोजनाओं व राज्य सरकार की समस्त परियोजनाओं में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए दोगुनी मात्रा में सिविल भूमि की अनिवार्यता की गई है। राज्य में अधिकांश भाग वनाच्छादित व पर्वतीय है। यहां सिविल भूमि की सीमितता को देखते हुए केंद्र पोषित, बाह्य सहायतित व राज्य पोषित समस्त परियोजनाओं के लिए भी डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड पर क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की अनुमति प्रदान की जाए।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भारत सरकार से कार्ययोजना के प्राविधानों के अनुसार 1000 मीटर से ऊपर स्थित प्रौढ़ वृक्षों के पातन का समय-समय पर अनुरोध किया गया है। वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून द्वारा भी एक वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ऐसे पातन के लिए संस्तुति की गई है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से इसकी अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों पर वाटर सैस एकत्र कर भारत सरकार के कोष में जमा किया जाता था, जिसका 80 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा राज्य प्रदूषण बोर्ड को उपलब्ध कराया जाता था। परंतु जीएसटी एक्ट के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो गई है। इससे राज्य सरकार को औसतन 3 करोड़ 25 लाख रूपए की वार्षिक आय बंद हो गई है। भारत सरकार के निर्देशानुसार राज्य के 5 नगरों में नियमित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, एनवायरमेंटल डाटा सेंटर व एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के लिए 142 अतिरिक्त स्टेशन स्थापित करने के लिए कुल 20 करोड़ रूपए की लागत संभावित है। यह राशि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाए।
देहरादून में रेंजर्स कालेज का संचालन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के अधीन है। यहां काफी रिक्त भूमि है जिसका उपयोग निकट भविष्य में स्मार्ट सिटी देहरादून की योजना को क्रियान्वित करने, नेशनल गेम्स आदि कार्यक्रम आयोजित करने में किया जा सकता है। इसलिए रेंजर्स कालेज की रिक्त भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित की जाए।

मुख्यमंत्री ने की केंद्र को प्रेषित प्रस्तावों को जल्द स्वीकृत करने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट कर नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत केंद्र को भेजे गए विभिन्न प्रस्तावों को जल्द स्वीकृत करने का अनुरोध किया। इनमें केदारपुरी क्षेत्र में 67 करोड़ 64 लाख रूपए लागत से सीवेज प्रबंधन, गंगा की सहायक नदियों सुसवा, कोसी, ढ़ेला, कल्याणी, भेला, पिलाखर, नन्दौर व किच्छा में गिरने वाले नालों के प्रदूषित जल के उपचार के लिए 545 करोड़ 14 लाख रूपए लागत की आठ परियोजनाएं, काशीपुर आई.एण्ड डी व एसटीपी की 97 करोड़ 79 लाख रूपए लागत की परियोजना, केदारनाथ यात्रा के दृष्टिगत महत्वपूर्ण 21 करोड़ 62 लाख रूपए लागत की गौरीकुण्ड सीवेज परियोजना, अगस्तमुनि की 27 करोड़ 17 लाख रूपए लागत की आईएंडडी व एसटीपी परियोजना व शारदा नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए 43 करोड़ 49 लाख रूपए लागत की टनकपुर सीवेज आईएंडडी व एसटीपी परियोजना शामिल हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी की निर्मलता व अविरलता भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। वर्तमान में नमामि गंगा के अंतर्गत प्रथम चरण में गंगा नदी में विभिन्न नालों व सीवर के पानी से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए उत्तराखण्ड राज्य के चिन्हित 15 प्राथमिकता के नगरों में 1005.11 करोड़ लागत की कुल 21 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके सापेक्ष वर्ष 2017-18 में स्वीकृत की गई 18 योजनाओं में से 8 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, 6 योजनाएं अगस्त 2019 तक, 3 योजनाएं दिसम्बर 2019 तक व 1 योजना फरवरी 2020 तक पूरी कर ली जाएंगी। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में स्वीकृत की गई 03 योजनाओं के संबंध में निविदा प्रक्रिया गतिमान है। इन प्राथमिकता के नगरों में चिन्हित 135 नालों में से 70 नालों को टैप किया जा चुका है और शेष 65 नालों में 61 नालों के लिए इंटरसेप्शन एंड डाईवर्जन की योजनाएं नमामि गंगे परियोजना के तहत स्वीकृत की गई है। इनमें से भी 30 नालों को टैप किया जा चुका है।

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय मंत्री शेखावत से सिंचाई विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य की केन्द्र पुरोनिधानित निर्माणाधीन योजनाओं को पूर्ण करने के लिए अवशेष केन्द्रांश 142 करोड़ 52 लाख रूपए व लघु सिंचाई विभाग की केन्द्र पोषित योजनाओं को पूर्ण करने के लिए अवशेष धनराशि 63 करोड़ 57 लाख रूपए यथाशीघ्र अवमुक्त करने के साथ ही लघु सिंचाई विभागके अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं के कार्यों को पूर्ण कराए जाने की समयावधि 31 मार्च 2020 तक विस्तारित करने का भी अनुरोध किया।

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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा केंद्र को नमामि गंगे योजना में प्रेषित प्रस्तावों की शीघ्र स्वीकृति के लिए मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री द्वारा इस पर जल्द समुचित कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया गया।

मुख्यमंत्री ने की मांग, मिड-डे-मील में परम्परागत अनाज शामिल होने से मिलेगा स्वरोजगार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रतिभाग किया। हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल, केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना, चारधाम महामार्ग परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना व नमामि गंगे परियोजना के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड को अपनी पर्यावरणीय सेवाओं के लिए प्रोत्साहन के रूप में वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। मिड-डे मील में मंडुवा, झंगौरा भी शामिल किए जाएं। उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों में रोड़ कनेक्टिविटी के साथ एयर व रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जाएं।

उत्तराखण्ड को मिले ईको-सिस्टम सर्विसेज के बदले प्रोत्साहन राशि
बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य द्वारा अपने दो-तिहाई भू-भाग पर वनों का संरक्षण सुनिश्चित करके राष्ट्र को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवायें (ईको-सिस्टम सर्विसेज) प्रदान की जा रही है। इन पर्यावरणीय सेवाओं के लिए हमें अपने विकास के अवसरों का परित्याग करना पड़ रहा है। अतः भारत सरकार से अनुरोध है कि क्षतिपूर्ति अथवा प्रोत्साहन के तौर पर समुचित वित्तीय सहायता राज्य को उपलब्ध करायी जाये। राज्यों की परम्परागत फसलों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि मिड-डे-मील में चावल एवं गेहूँ के अतिरिक्त राज्यों की परम्परागत फसलें जैसे मंडुवा, झिगौरा इत्यादि को शामिल करना चाहिए।

हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल, केदारनाथ पुनर्निर्माण, चारधाम परियोजना, नमामि गंगे के लिए प्रधानमंत्री का आभार
हिमालयी राज्यों की विशिष्ट भू-भौगोलिक परिस्थितियों पर विचार करने तथा इनकी कठिनाइयों के सम्यक् समाधान के लिए नीति आयोग के अन्तर्गत हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल का गठन किए जाने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी आभार व्यक्त किया। केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना, चारधाम महामार्ग परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के लिए भी उत्तराखण्ड की ओर से प्रधानमंत्री जी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनायें राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए बहुत उपयोगी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नमामि गंगे योजना के माध्यम से गंगा व उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में प्रधानमंत्री ने अभूतपूर्व पहल की है। गंगोत्री से लक्ष्मण झूला-ऋषिकेश तक गंगा के जल की गुणवत्ता को क्लास वन में वर्गीकृत किया गया है, जो हमारे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तराखण्ड में अभी तक 14545 करोड़ का निवेश हो चुका है
उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा अक्टूबर 2018 में प्रथम बार निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें निवेशकों को आकर्षित करने हेतु कई नीतियों प्रख्यापित की गई हैं। अब तक कुल 600 एम.ओ.यू., जिनकी लागत रूपये एक लाख चैबीस हजार करोड़ है, हस्ताक्षरित किये जा चुके हैं। अब तक कुल 109 एम.ओ.यू. के सापेक्ष रू0 चैदह हजार पांच सौ पैंतालिस करोड़ का निवेश हो चुका है।

सौंग बांध से देहरादून को 30 वर्ष तक होगी अबाध जलापूर्ति
राज्य सरकार द्वारा वर्षा जल संवर्द्धन के लिए विभिन्न जनपदों में जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है। जनपद देहरादून में आगामी 30 वर्षों से भी अधिक समय तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित किये जाने के लिए सौंग बाँध पेयजल परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2022 तक 5000 समस्याग्रस्त प्राकृतिक जल स्त्रोत को पुनर्जीवित एवं सवंर्दि्धत करने का कार्य किया जायेगा। राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2018-19 में वर्षा जल संचय हेतु कुल 19.22 लाख संरचनायें निर्मित की गयी, जिसमें 11,730 लाख लीटर जल संचय की क्षमता विकसित हुयी है। राज्य सरकार द्वारा बिल्डिंग बाईलॉज में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया गया है। कुपोषण की समस्या दूर करने के लिए महिलाओं के द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से स्थानीय उपज मंडुवा, चैलाई, झिंगौरा इत्यादि से विनिर्मित पोषक आहार ’’ऊर्जा’’ को जनपदों में ही तैयार करके, अतिकुपोषित बच्चों को पूरक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना से होगा कृषि में आमूलचूल परिवर्तन
कृषि सैक्टर के आमूलचूल परिवर्तन हेतु संरचनात्मक सुधारों व कृषकों की आमदनी दोगुनी करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी परियोजना ’राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना’ का शुभारम्भ प्रधानमंत्री के कर कमलों से रूद्रपुर में किया गया। रू0 3340 करोड़ की इस परियोजना से बेमौसमी सब्जी उत्पादन, फल उत्पादन, फल उत्पादन, सगन्ध पौधों की खेती, भैंस पालन, भेंड एवं बकरी पालन तथा शीत जल मात्स्यकी आदि क्षेत्रों को विशेष रूप से बढ़ावा मिलेगा।

रूरल ग्रोथ सेंटर से होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत
राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने हेतु ’’रूरल ग्रोथ सेन्टर्स’’ पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक न्याय पंचायत क्षेत्र में, उस क्षेत्र की मुख्य आर्थिकी के अनुरूप नियोजित आर्थिक विकास किया जायेगा। कृषि के क्षेत्र में कई अभिनव प्रयोग जैसे ट्राउट फार्मिंग, हैम्प कल्टिवेशन एवं प्रोडक्शन, एकीकृत फार्मिंग मॉडल, फार्म मशीनरी बैंक एंव कस्टम हायरिंग सेन्टर्स इत्यादि के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। परम्परागत कृषि विकास योजना के अन्तर्गत प्रथम चरण में 3900 जैविक क्लस्टर स्वीकृत किये गये हैं। समस्त पर्वतीय विकास खण्डों को अगले पाँच वर्षों में आर्गेनिक विकास खण्डों में परिवर्तित किया जायेगा।

मृदा कार्ड व डीबीटी से खाद इन्पुट सब्सिडी में 140 करोड़ की बचत
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में मृदा कार्ड में दी गयी संस्तुतियों एवं डी.बी.टी. योजना संचालन के उपरान्त उर्वरक खपत में अनुमानतः 20 प्रतिशत तक इनपुट लागत में गिरावट आयी है और खाद की इनपुट सब्सिडी में 140 करोड़ रूपए की बचत हुई है। राज्य सरकार द्वारा, कृषि, औद्यानिकी व उनकी सह-गतिविधियों के लिए 30 वर्ष तक लीज पर भूमि दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। साथ ही समस्त कृषि ऋण एवं कृषि गतिविधियों के लिए कृषकों को एक लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है।

एपीएमसी एक्ट व आवश्यक वस्तु अधिनियम में परिवर्तन पर विचार हो
उत्तराखण्ड राज्य में कृषि व बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखण्ड मण्डी अधिनियम में माडल एक्ट के सापेक्ष निजी मण्डी, संविदा कृषि, कृषक-उपभोक्ता बाजार की व्यवस्था, मण्डी अधिनियम में की गयी है। कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के सम्बन्ध में कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एपीएमसी एक्ट तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों में मूलभूत परिवर्तन किए जाने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति आयोग द्वारा विचारोपरान्त एक चर्चा पत्र तैयार कर राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना श्रेयस्कर रहेगा।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रोड़, रेल व एयर कनेक्टिविटी को विकसित करने पर बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की अन्तर्राष्ट्रीय सीमायें चीन तथा नेपाल से लगी है। सीमावर्ती एवं दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से पलायन राज्य सरकार के समक्ष गम्भीर चुनौती है एवं इस हेतु अवस्थापना सुविधायें जैसे कि सड़क, पानी, बिजली एवं विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए निवेश करने की आवश्यकता है। इन सीमान्त क्षेत्रों में रोड़ कनेक्टिविटी के साथ रेल व एयर कनेक्टिविटी को भी विकसित करना होगा।