निशंक ने रोजगार परक शिक्षा से देश की बेरोजगारी को खत्म करने पर दिया जोर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नई दिल्ली में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक की। केन्द्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे कार्यक्रमों एवं प्रगति की समीक्षा की। केन्द्रीय मंत्री ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में अवस्थापना एवं रख रखाव से संबंधित आवश्यकताओं की भी समीक्षा की तथा मंत्रालय का सहयोग सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
डॉ. निशंक ने सभी केंद्रीय विश्विद्यालयों में खाली पड़े पदों पर चिंता जाहिर की और यूजीसी को निर्देश दिया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को शीघ्र भरने का खाका तैयार किया जाए ताकि नई पीढ़ी को गुणवत्तापरक शिक्षा का लाभ मिल सके। डॉ. निशंक ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विश्व रैंकिंग में सुधार लाने के लिए रोडमैप तैयार करने को कहा। मंत्री जी ने उम्मीद जताई कि हम कठिन परिश्रम, गुणवत्तापरक शिक्षा और शोध पर बल देकर शीघ्र ही विश्व के शीर्ष संस्थानों में अपना नाम दर्ज करा पाएंगे।

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संस्कृत भाषा को नए आयाम दिलाने के लिए और प्रयास करने होंगेः निशंक

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय देश में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा देने के सबसे सशक्त माध्यम हैं। मंत्री जी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विश्वास दिलाया कि शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मंत्रालय की तरफ से जो भी सहयोग चहिए उसे पूरा किया जाएगा।
डॉ. निशंक ने बैठक के दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों को रोजगार परक शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि रोजगार परक शिक्षा के माध्यम से देश में व्याप्त बेरोजगारी की समस्या से भी निपटा जा सकता है।

संस्कृत भाषा को नए आयाम दिलाने के लिए और प्रयास करने होंगेः निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने केंद्रीय भाषायी संस्थानों के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक की। डॉ. निशंक ने संस्कृत, हिंदी, उर्दू, सिन्धी, तमिल सहित भारतीय भाषाओं के लिए समर्पित संस्थानों को अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाओं को सशक्त करना हमारा लक्ष्य है इसके लिए रिक्त पदों को शीघ्रातिशीघ्र भरना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए। मंत्री जी निर्देश दिया कि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ केंद्रीय भाषायी संस्थानों के प्रमुखों की लगातार समीक्षा बैठक होती रहनी चाहिए जिससे भारतीय भाषाओं के विकास को लगातार गति मिल सके।
डॉ. निशंक ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक प्रशिक्षित संस्कृत अध्यापकों की संख्या को बढ़ावा देने का लक्ष्य होना चाहिए ताकि संस्कृत भाषा को नया आयाम मिल सके। इसके माध्यम से हम दुनिया तक संस्कृत को पंहुचा सकते हैं। डॉ. निशंक ने संस्कृत पर विशेष बल देते हुए कहा कि संस्कृत संस्थानों को अपने आस पास कम से कम दो गांवों को संस्कृत भाषी बनाने का लक्ष्य रखना चाहिये।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के बारे में नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है। भारतीय भाषाओं मे नए शोध की आवश्यकता है साथ ही साथ इन्हें वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान किये जाने की भी आवश्यकता है जिससे ये भाषाएँ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जगत में अपनी पहचान बना सके। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाओं के सहित्य को एक दूसरी भाषा में अनुवाद होना चाहिए ताकि सभी को श्रेष्ठ साहित्य उपलब्ध हो सके और राज्यों में आपसी तालमेल स्थापित हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि हिंदी प्रचारिणी सभाओं और स्थानीय भाषाओं के बीच में बेहतर समन्वय से सभी भारतीय भाषाओं का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने आने वाले वर्षों में एक भाषा भवन के निर्माण का लक्ष्य रखा जिसमे सभी भारतीय भाषाओं को संवर्धित करने वाले विभागों को एक साथ लाया जायेगा जिससे सभी भारतीय भाषाओं में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

केन्द्र सरकार जागरुकता के लिए मीडिया संस्थानों को करेगी पुरस्कृत

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आशा व्यक्त की है कि इस वर्ष 21 जून को योग दिवस पर बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में जावडेकर ने कहा कि योग भारत की अपनी विरासत है साथ ही यह अच्छे स्वास्थ्य के लिए विश्व को उपहार भी है। प्रकाश जावडेकर ने कहा कि इस वर्ष योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न मीडिया संस्थानों को पुरस्कृत किया जायेगा।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर झारखण्ड के रांची में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें लगभग तीस हजार लोगों के भाग लेने की आशा है। इसमें योग संगठन और योग गुरूओं के अलावा राज्य की जानी-मानी हस्तियां भी शामिल होंगी।

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अब हिंदी अनिवार्य नही, मोदी सरकार का बड़ा फैसला

सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर दिया है। अब हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। संशोधित मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले के तहत छात्र अब कोई भी तीन भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि इनमें एक साहित्यिक भाषा जरूरी होगी। पुराने मसौदे में हिंदी, अंग्रेजी के साथ कोई एक स्थानीय भाषा पढ़ने का प्रावधान था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में यह बदलाव सोमवार को गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों, से उठ रहे विरोध के सुर को देखते हुए किया गया है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से हुई थी, जहां द्रमुक सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए थे।

द्रमुक के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। हालांकि, सरकार ने कहा था कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यह अभी एक शुरुआती मसौदा है। सभी पक्षों से सलाह के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।
संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लचीला कर दिया गया है। अब इनमें किसी भी भाषा का जिक्र नहीं है। छात्रों को कोई भी तीन भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से दो भाषा पढ़ाई जा रही है। इनमें एक स्थानीय और दूसरी अंग्रेजी है। हालांकि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में यह साफ कहा गया है कि स्कूली छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी।

नई शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर यह विवाद तब खड़ा हुआ है, जब सरकार ने इसे 31 मई को जारी कर लोगों से सुझाव मांगे। इसके तहत कोई भी व्यक्ति 30 जून तक अपने सुझाव दे सकता है। शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर मिल रहे सुझावों पर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नीति तैयार करने वाली कमेटी भी पैनी नजर रख रही है।

जमीन के नाम पर की 22 लाख की ठगी

ऋषिकेश के तपोवन में जमीन दिलाने के नाम पर 22 लाख रूपए की ठगी का मामला सामने आया है। यहां जमीन के नाम पर देहरादून निवासी एक युवक पर दिल्ली के व्यापारी से 22 लाख रुपए ठगने का आरोप लगा है। जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के बाद व्यापारी को अपने साथ धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसकी शिकायत टिहरी जिले के कप्तान डॉ. वाईएस रावत को पत्र भेजकर की गई है। व्यापारी ने रकम वापस दिलाने के साथ जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। वहीं, कप्तान डॉ. वाईएस रावत ने मामले की जांच मुनिकीरेती थानाध्यक्ष राम किशोर सकलानी को सौंप दी है।

टिहरी कप्तान को भेजे पत्र में दिल्ली निवासी व्यापारी राजकुमार आनंद ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनकी पहचान देहरादून निवासी एक युवक से हुई थी। उक्त युवक ने उन्हें तपोवन में व्यापार के लिए एक जमीन सस्ते में दिलाने का ऑफर दिया। उन्होंने बताया कि जमीन देखने के बाद उन्होंने बयाने के तौर पर किश्तों में 22 लाख रुपये भी युवक को दे दिए। कब्जा दिलाने और रजिस्ट्री कराने के समय युवक आनाकानी करने लगा। लंबे समय तक कब्जा नहीं मिलने पर उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी का एहसास हुआ।

उन्होंने दी गई रकम वापस मांगी तो वह उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी। इस संबंध में राजकुमार आनंद ने टिहरी कप्तान डॉ. वाईएस रावत से आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। मुनिकीरेती थानाध्यक्ष राम किशोर सकलानी ने बताया कि मामले की जांच टिहरी कप्तान की ओर से उन्हें मिल गई है। इसमें जांच शुरू कर दी गई है।

परिजनों ने की रोहित शेखर की अस्थियां गंगा में प्रवाहित

उत्तर प्रदेश सहित उत्तराख्ंाड के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की हुई अचानक मौत के बाद शुक्रवार को परिजनों ने गंगा में उनकी अस्थियां प्रवाहित की। इस दौरान उनकी मां उज्जवला और पत्नी अपूर्वा भी मौजूद रहीं।

शुक्रवार शाम रोहित शेखर तिवारी की मां उज्ज्वला तिवारी और पत्नी अपूर्वा तिवारी परिजनों के साथ रोहित की अस्थियां लेकर सती घाट पहुंची। रोहित की मंगलवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। अस्थि विसर्जन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान दिल्ली में हत्या का मुकदमा दर्ज होने पर उज्ज्वला तिवारी ने कहा कि मैं इस रहस्य से अनभिज्ञ हूं। मुझे कुछ नहीं पता है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई साजिश हुई है तो सबके सामने आनी चाहिए और हमें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं किसी निर्दोष का नाम नहीं लेना चाहती। रोहित को लेकर उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के आदर्शों पर आगे बढ़ रहे थे। सामाजिक सरोकारों से जुड़ रोहित युवाओं के लिए प्रेरणस्रोत बनते जा रहे थे, लेकिन ईश्वर को शायद यह मंजूर नहीं था। कहा कि मैं गंगा मां से प्रार्थना करती हूं कि वह जहां भी रहे सुखी रहे।

महज 3 मिनट में सेटेलाइट को नष्ट करने की तकनीक अब हमारे पास भी

अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल करते हुए भारत दुनिया की नई महाशक्ति बन गया है। भारत की एंटी सैटेलाइट ए-सेट मिसाइल ने महज 3 मिनट में अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ आर्बिट में एक पुराने लाइव सैटेलाइट को मार गिराया। यह क्षमता अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए देश के नाम एक संदेश जारी किया। वही, भारत की सफलता से पाकिस्तान में खलबली मच गई है, उसने दुनिया से अपील की है कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे ऐसे परीक्षण को देखें। मिशन शक्ति के तहत उड़ीसा के बालासोर स्थित डीआरडीओ परीक्षण केंद्र से बुधवार सुबह 11:16 पर ए-सेट लांच किया गया। लांचिंग के ठीक 3 मिनट बाद इसने चक्कर लगा रहे सेटेलाइट को नष्ट कर दिया। इस सेटेलाइट को कई साल पहले ही से हटा लिया गया था। परीक्षण के लिए एलईओ ने सैटेलाइट को इसलिए चुना गया था कि उसका मलबा अंतरिक्ष में ना रह जाए। परीक्षण के लिए ए-सेट के साथ बैलेस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर तकनीक का विकास भारत में ही किया गया। यह भारत की मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है। इस तकनीक को अंतरिक्ष हथियार की भाषा में काइनेटिक किल के नाम से जाना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ को शुभकामना देते हुए कहा कि भारत ने अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर अपना नाम दर्ज कर लिया है। परीक्षण किसी के खिलाफ नहीं है ना ही इससे किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। हमें भावी चुनौती का सामना करने और अपने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना होगा।

पिछले 16 माह में देश में 2 करोड रोजगार का हुआ सृजन

देश में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं ऐसे में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के आंकड़े मोदी सरकार के आत्मविश्वास को और मजबूत कर सकते हैं। देश में पिछले 16 माह के दौरान (सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक) करीब दो करोड़ रोजगार सृजित हुए हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के पास उपलब्ध कंपनियों के ‘वेतन भुगतान’ संबंधी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) तथा पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने वाले लोगों की संख्या के आधार पर रोजगार को लेकर रिपोर्ट जारी करता है। ईएसआईसी के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़े भी इनमें से एक हैं जिन्हें सीएसओ अपनी रिपोर्ट में जारी करता है।

ईएसआईसी अपने पास पंजीकृत लोगों को स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सेवायें उपलब्ध कराता है। इसमें वे सभी प्रतिष्ठान शामिल होते हैं जिसमें 20 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं तथा जिनका वेतन 21,000 रुपये तक है। ईएसआईसी की इस योजना से सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 1.96 करोड़ नये अंशधारक इस योजना से जुड़े। वहीं ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि संगठित क्षेत्र में दिसंबर 2018 में 7.16 लाख रोजगार सृजित हुए जो एक साल पहले इसी महीने में 2.37 लाख के मुकाबले लगभग तीन गुना है।
इसके अनुसार सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 72.38 लाख लोग ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े। ईपीएफओ के दायरे में वे सभी कंपनियां आती हैं जहां 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये मासिक तक है, वे अनिवार्य रूप से योजना के दायरे में आते हैं।
इसी अवधि में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़ने वाले अंशधारकों की संख्या 9,66,381 रही। एनपीएस के अंतर्गत केंद्रीय तथा राज्य सरकार के कर्मचारी आते हैं। आम लोग भी इसे स्वेच्छा से अपना सकते हैं। इसमें कहा गया है कि मौजूदा रिपोर्ट संगठित क्षेत्र में रोजगार के बारे में जानकारी देती है और समग्र रूप से रोजगार का आकलन नहीं करती है।

आर्थिक आरक्षण पर केंद्र के फैसले को चुनौती नहीं

उच्चतम न्यायालय ने सवर्ण जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केन्द्र के निर्णय को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर केन्द्र से शुक्रवार को जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यह स्पष्ट किया कि सवर्ण जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों और दाखिले में आरक्षण देने के केन्द्र के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। उच्चतम न्यायालय इससे पहले इसी प्रकार की याचिकाओं पर केन्द्र को नोटिस जारी कर चुका है। उसने तहसीन पूनावाला की ओर से दाखिल नयी याचिका को लंबित याचिकाओं में जोड़ने का शुक्रवार को आदेश दिया।
केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं ‘जनहित अभियान’ और एनजीओ ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी’ सहित अनेक पक्षकारों ने दाखिल की हैं। यूथ फॉर इक्वेलिटी ने अपनी याचिका में विधेयक को रद्द करने की मांग की है। एनजीओ के अध्यक्ष कौशल कांत मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि आरक्षण के लिए केवल आर्थिक कसौटी ही आधार नहीं हो सकता और यह विधेयक संविधान के बुनियादी नियमों का उल्लंघन करता है।
क्योंकि आर्थिक आधार पर आरक्षण को सामान्य वर्ग तक ही सीमित नहीं किया जा सकता और कुल 50 प्रतिशत की सीमा को भी पार नहीं किया जा सकता। वहीं व्यावसायी पूनावाला की ओर से दाखिल नयी याचिका में विधेयक को रद्द करने की मांग करते हुए कहा गया है कि आरक्षण के लिए पिछड़ेपन को केवल ‘‘आर्थिक स्थिति से’’ परिभाषित नहीं किया जा सकता।

परेड में शामिल होकर एनसीसी कैडेट्स ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हाॅल में गणतंत्र दिवस परेड में प्रतिभाग करने वाले एनसीसी कैडेटों ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परेड भाग लेने वाले एनसीसी केडैट्स को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेटों का गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर आयोजित होने वाली गरिमामय परेड के लिए चयनित होना गर्व एवं सम्मान की बात है। यह उनके जीवन का भी यादगार पल है। ऐसे मौके हर किसी को नही मिलते हैं। इस परेड के अनुभव उन्हें देश सेवा के लिये भी प्रेरित करते रहेंगे। एनसीसी अनुशासन का भी पर्याय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही प्रदेश में एनसीसी अकादमी की स्थापना की जायेगी। एनसीसी अकादमी के लिए भूमि का चयन किया जा चुका है, जल्द ही इसका शिलान्यास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि एनसीसी अकादमी के समीप 6.5 करोड़ की लागत से एक झील का निर्माण भी किया जायेगा। इस एकेडमी की स्थापना से एनसीसी केडेटों को और बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा आवश्यक सुविधाएं भी मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि एनसीसी का प्रशिक्षण उन्हें सैन्य बलों में अपनी सेवा देने में भी मददगार रहता है।
गौरतलब है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के लिए उत्तराखण्ड से कुल 111 एनसीसी कैडेट्स का चयन हुआ था। जिन्होंने अपनी प्रतिभा से प्रदेश का भी नाम रोशन किया है।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा डाॅ.भूपिन्दर कौर औलख, महानिदेशक शिक्षा ज्योति यादव, निदेशक एनसीसी ब्रिगेडियर वहल, ब्रिगेडियर एस. मुखर्जी, एस.पी.सिंह, जे.एस.नेगी आदि उपस्थित थे।