भारत पर्व में उठाइए उत्तराखंड के लजीज व्यंजनों का स्वाद

“ऐतिहासिक लाल किला मैदान में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित “भारत पर्व” में उत्तराखण्ड राज्य की झांकी, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प एवं पारम्परिक व्यंजनों का होगा प्रदर्शन।”
दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में आयोजित “भारत पर्व” के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के हस्तशिल्प लोक संस्कृति एवं खान-पान को प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखण्ड राज्य की झांकी “अनासक्ति आश्रम” को समारोह स्थल में प्रदर्शित किया किया गया है।
महोत्सव में आज उत्तराखण्ड राज्य का मुख्य आकर्षण “लाइव फूड डिमोन्सट्रेशन” रहा, जिसमें उत्तराखण्ड के पारम्परिक व्यंजनों (भटट का हलवा, नन्दा थाली, झंगोरें की खीर) को शेफ द्वारा प्रदर्शित किया गया जिसका भारत पर्व में आये दर्शकों ने पारम्परिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया एवं दर्शकों द्वारा बहुत सराहा गया।

“भारत पर्व” में 28 और 30 जनवरी, 2019 को सांय 4 बजें उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों द्वारा होलिया नृत्य, छपेली एवं झोडा, चाँचरी नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि “भारत पर्व” का आयोजन पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस वर्ष “महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती” थीम पर आधारित है। भारत पर्व आयोजन में उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद्, संस्कृति विभाग, हस्तशिल्प उद्योग विभाग द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है।

“अनासक्ति आश्रम” की झांकी करेगी उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ, नई दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति माटामेला सिरिल रामफोसाइज की विशेष उपस्थिति में आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में उत्तराखण्ड राज्य की ओर से कौसानी स्थित “अनासक्ति आश्रम” की झांकी प्रस्तुत की जायेगी।
देवभूमि उत्तराखण्ड में कौसानी, जिसको महात्मा गांधी जी ने “भारत का स्विटरजलैण्ड” कहा था, में स्थित ’अनासक्ति आश्रम’ बहुत ही शांतिपूर्ण स्थान है। महात्मा गांधी जी ने वर्ष 1929 में कौसानी का भ्रमण किया था तथा इसी स्थान पर उन्होेंने गीता पर आधारित अपनी प्रसिद्व पुस्तक ’अनासक्ति योग’ की प्रस्तावना लिखी थी। इस आश्रम का संचालन गांधी स्मारक निधि द्वारा किया जाता है। आश्रम में प्रतिदिन सुबह व शाम प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है तथा आश्रम को पुस्तकालय, वाचनालय व प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। इस आश्रम में गांधी दर्शन पर शोधकर्ताओं, दार्शनिकों एवं पर्यटकों के लिए ग्रन्थ भी उपलब्ध है।
उत्तराखण्ड राज्य की झांकी के अग्रभाग में अनासक्ति योग लिखते हुए महात्मा गांधी जी की बडी आकृति को दिखाया गया है। मध्य भाग में कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम को दिखाया गया है तथा आश्रम के दोनों ओर पर्यटक योग व अध्ययन करते हुए नागरिकों व पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत को महात्मा गांधी जी से वार्ता करते हुए दिखाया गया है। झांकी के पृष्ठ भाग में देवदार के वृक्ष, स्थानीय नागरिकों व ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं को दिखाया गया है। साइड पैनल में उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, जागेश्वर धाम, बद्रीनाथ तथा केदारनाथ मंदिर को दर्शाया गया है।
उत्तराखण्ड राज्य के झांकी के टीम लीडर के एस चैहान ने बताया कि राष्ट्र इस वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है, इसलिये गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ में भाग लेने वाली सभी झांकियों की थीम “महात्मा गांधी जी के जीवन दर्शन” पर आधारित है। 

मोदी ने क्यों कहा, राम मंदिर कानून से ही बनेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समाचार एजेंसी को आज इंटरव्यू दिया है। मोदी ने राम मंदिर से लेकर नोटबंदी तक कई सवालों के जवाब दिये हैं. राम मंदिर के सवाल पर मोदी ने कहा कि राम मंदिर पर कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अध्यादेश पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया में कांग्रेस ने अड़ंगा लगाया है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि राम मंदिर कानून से ही बनेगा. उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव जनता बनाम महागठबंधन में होगा।

नोटबंदी नहीं था झटका
पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर कहा है कि यह फैसला जोखिम भरा था. उन्होंने कहा कि जवानों की सुरक्षा को लेकर फिक्र थी. पीएम मोदी ने ये भी कहा है कि एक लड़ाई से पाकिस्तान नहीं सुधरेगा. नोटबंदी पर उन्होंने कहा है कि यह झटका नहीं था. हमने एक साल पहले से लोगों को आगाह किया था कि अगर आपके काला धन है तो आप इसे जमा करा सकते हैं।

उर्जित पटेल 6-7 महीने पहले देना चाहते थे इस्तीफा
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से उर्जित पटेल के इस्तीफे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का आरबीआई पर कोई दबाव नहीं है और उर्जित पटेल ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है. पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं पहली बार यह बता रहा हूं कि वह 6-7 महीने पहले से मुझे इस्तीफे की बात कह रहे थे. यहां तक कि उन्होंने ऐसा लिखित में दिया था. उन्होंने अच्छा काम किया है और राजनीतिक दबाव का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

गांधी परिवार पर पीएम मोदी का अटैक
गांधी परिवार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की चार पीढ़ियों ने देश चलाया है और ऐसा परिवार अब वित्तीय अनियमितता के चलते जमानत पर बाहर है.
सीमा पार से पाकिस्तान की हरकतों पर पीएम मोदी ने कहा कि ये सोचना बहुत बड़ी गलती होगी कि पाकिस्तान एक लड़ाई से सुधर जाएगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सुधारने में अभी और समय लगेगा।

बीएसएफ फिर चर्चा में, जवान को मिली सजा जरा हट के

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में एक जवान को पीएम मोदी के नाम के आगे माननीय या श्री न लगाकर संबोधित करना भारी पड़ गया। इसकी कीमत उसे सात दिन के वेतन के रूप में गवानी पड़ी। बताया जा रहा है कि बीएसएफ ने इसे पीएम का अपमान मानते हुये सात दिन का वेतन काट लेने की सजा दी।

21 फरवरी को बीएसएफ के 15वें बटालियन के मुख्यालय महतपुर, नाडिया (पश्चिम बंगाल) में एक जवान संजीव कुमार ने एक रिपोर्ट देते हुए मोदी कार्यक्रम शब्द का इस्तेमाल किया।

बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कमांडेंट अनूप लाल भगत इससे काफी नाराज हुए और उन्होंने संजीव कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

संजीव के खिलाफ संक्षिप्त सुनवाई हुई और उन्हें बीएसएफ एक्ट की धारा 40 (व्यवस्था के प्रति पक्षपात और बल का अनुशासन) के तहत दोषी पाया गया।

बीएसएफ के कई अधिकारियों ने इस सजा को थोड़ा सख्त बताया और कहा कि इसकी जरूरत नहीं थी।

भारत और कनाडा आंतक के विरूद्ध एक साथ

भारत और कनाडा आतंकवाद और अलगाववादी ताकतों से साथ मिलकर लड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की बातचीत के बाद दोनों देशों की ओर से जारी साझा बयान में ये प्रतिबद्धता जताई गई।

साझा बयान में कहा गया है कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि आतंकी संगठन में भर्ती रोकी जाए, उनके पास पैसा पहुंचने के रास्ते बंद किए जाए। उनके ठिकानों को ध्वस्त किया जाए और उन्हें कहीं पनाह न मिले, इसका इंतजाम किया जाए।

साझा बयान में भारत और कनाडा ने जिन आतंकवादी संगठनों से लड़ने की बात कही है उनमें अलकायदा, आईएसआईएस, हक्कानी नेटवर्क, एलईटी, जैश-ए-मोहम्मद, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन शामिल है। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रुडो की मुंबई यात्रा के दौरान जिस जसपाल अटवाल की तस्वीर ने तूल पकड़ा था वो इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन से ही जुड़ा रहा है।

कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को लेकर वहां की सरकार के नरम रवैये की वजह से जस्टिन ट्रूडो की यात्रा को लेकर भारत सरकार ने पहले से ही कोई ज्यादा जोश नहीं दिखाया था। बात तब और बिगड़ गई जब पता चला कि ट्रुडो की यात्रा के दौरान खालिस्तानी आतंकवादी जसपाल अटवाल न सिर्फ भारत आ गया है बल्कि मुंबई के एक कार्यक्रम में ट्रूडो की पत्नी के साथ फोटो भी खिंचवा चुका है। उसे कनाडा के उच्चायुक्त के घर डिनर में आने का निमंत्रण भी मिल चुका था जिसमें ट्रूडो को शामिल होना था, लेकिन जब भारत ने इसका जोरदार विरोध कराया तब जाकर उसका निमंत्रण रद्द किया गया।

अपनी भारत यात्रा के छठे दिन शुक्रवार को ट्रुडो की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई। इस मौके पर मोदी और ट्रुडो गले भी मिले, लेकिन हैदराबाद हाउस में जब दोनों नेता द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा बताने के लिए प्रेस से मुखातिब हुए तो साफ दिखा कि उनकी मुलाकात में गर्मजोशी नहीं है।

कनाडा के प्रधानमंत्री की बातों से ऐसा लग रहा था कि वो बोल तो दिल्ली में रहे हैं लेकिन उनका ध्यान कनाडा के लोगों पर ही है और वो उन्हीं को खुश करने में लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में मजबूती से आतंकवाद और कनाडा में खालिस्तान समर्थकों पर लगाम लगाने का मामला उठाया।

मोदी ने कहा, आतंकवाद और उग्रवाद भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक, बहुलवादी समाजों के लिए खतरा हैं। इन ताकतों का मुकाबला करने के लिए हमारा साथ आना महत्वपूर्ण है। संप्रदाय का राजनीतिक उद्देश्य के लिए दुरूपयोग करने वालों और बंटवारे की खाई खोदने वालें के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हमारे देशों की संप्रभुता, एकता और अखंडता को चुनौती देने वालों को भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

ट्रूडो ने मोदी को कनाडा आने का न्यौता भी दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रुडो सपरिवार भारत की एक हफ्ते लंबी यात्रा के दौरान कई मौकों पर भारतीय परिधान पहने ही दिखे।

अब घर बुक करने पर बिल्डर नहीं दे पाएगा इनकम की गांरटी

अब रिएल एस्टेट और ज्वेलरी कारोबार में पॉंजी स्कीमों जैसे चलने वाले कारोबार को भी पॉंजी स्कीम माना जाएगा। साथ ही इन्हें रेगुलेट भी किया जायेगा। इसके लिये केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करने को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इसे संसद में पेश किया जाएगा।

धोखाधड़ी को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने पॉन्जी स्कीम के दायरे में रिएल एस्टेट और ज्वेलर्स को भी शामिल किया है। पिछले दिनों देश के विभिन्न भागों में ऐसी घटनाएं सामने आई जिनमें गैर-कानूनी तरीके से जमा राशि लेने की योजनाओं के जरिए लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई। इस तरह की योजनाओं के सबसे अधिक शिकार गरीब और ऐसे लोग हुए जिनको वित्तीय मामलों की जानकारी नहीं थी और ऐसी योजनाएं अनेक राज्यों में चल रही थीं।

केन्द्र सरकार का मानना है कि यदि कोई बिल्डर कुछ वर्षों में निश्चित रिटर्न के नाम पर लोगों को घर या प्रॉपर्टी बेचता है तो ऐसे ऑफर्स को पॉन्जी स्कीम की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं देश में कई ज्वेलर्स ग्राहकों को निवेश के लिए यह ऑफर के साथ उकसाते हैं कि यदि कोई ज्वेलरी खरीदने के लिए वह 11 इन्सटॉलमेंट भरते हैं तो 12 इन्सटॉलमेंट कंपनी की तरफ से भरा जाएगा। ऐसी स्थिति में भी ज्वेलर्स के ये ऑफर्स पॉन्जी स्कीम के दायरे में रहेंगे और केन्द्र सरकार का प्रस्तावित कानून इन्हें रेगुलेट करने के लिए सक्षम होगा।

गौरतलब है कि इस विधेयक पर फैसले से पहले अपने वित्त वर्ष 2017-18 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की थी कि गैर-कानूनी जमा योजनाओं की बुराइयों को कम करने के लिए एक विधेयक का मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा और उसे अंतिम रूप देने के बाद जल्द ही पेश किया जाएगा। इसी बजट भाषण को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार ने पॉन्जी स्कीमों के खिलाफ नए कानून का ऐलान किया है।

संशोधन के बाद इस तरह बदल जाएगी जमा योजना

पहला विधेयक में तीन अलग-अलग प्रकार के अपराध निर्धारित किए गए हैं, जिनमें अनियमित जमा योजनाओं को चलाना, नियमित जमा योजनाओं में धांधली और अनियमित जमा योजनाओं को गलत तरीके से प्रोत्साहन।

दूसरा, विधेयक में बचाव कार्य करने के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है।

तीसराविधेयक में ऐसे मामलों में जमाराशि को निकालने अथवा उसकी अदायगी के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए है, जहां ऐसी योजनाओं के लिए अवैध तरीके से जमा राशि जुटाने में सफलता मिल जाती है।

चौथा, विधेयक में सक्षम प्राधिकार द्वारा संपत्तियों व परिसंपत्तियों को कुर्क करने और जमाकर्ताओं को अदायगी के लिए सम्परत्ति की अनुवर्ती वसूली का प्रावधान किया गया है।

पांचवा, संपत्ति की कुर्की और जमाकर्ताओं को धनराशि लौटाने के लिए स्पष्ट समय निर्धारित किया गया है।

छठां, विधेयक में एक ऑनलाइन केन्द्रीय डेटाबेस तैयार करने की व्यवस्था है जिससे देश में जमा करने की धनराशि लेने की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं एकत्र करने और उन्हें साझा करने की व्यवस्था होगी।

सातवां, विधेयक में “जमाराशि लेने वाले” और “जमाराशि” को विस्तार से परिभाषित किया गया है।

आठवां, “जमाराशि लेने वालों” में धनराशि लेने वाली अथवा मांगने वाली सभी संभावित कंपनियां (व्यक्तियों सहित) शामिल होंगी। इनमें केवल उन विशिष्ट कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिन्हें कानून द्वारा शामिल किया गया है।

नवां, “जमाराशि” को इस तरीके से परिभाषित किया गया है कि जमा राशि लेने वालों पर प्राप्तियों के रूप में जनता की जमा राशि को छिपाने से रोक होगी और साथ ही अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान किसी प्रतिष्ठान द्वारा धनराशि स्वीकार करने से रोक होगी।

दसवां, एक विस्तृत केन्द्रीय कानून होने के कारण विधेयक में कानून की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाया गया है साथ ही कानून के प्रावधानों को लागू करने की प्रमुख जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी गई है।

छापेमारी में नीरव मोदी के ठिकानों से हुयी 5100 करोड़ की संपत्ति जब्त

पंजाब नेशनल बैंक में हुये महाघोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी का भारत को छोड़ अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप व दुनिया के कई जगहों में कारोबार है। पीएनबी महाघोटाला प्रकाश में आने पर प्रवर्तन निदेशालय ने गुरूवार को अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के भारतीय ठिकानों पर छापेमारी की गयी।


एक्शन में आने के बाद ईडी ने बताया कि इस घोटाले की रकम हांगकांग से निकाली गई थी। अब ईडी हांगकांग के अधिकारियों के साथ संपर्क कर जानने की कोशिश कर रही है कि इस रकम का क्या हुआ। ईडी ने नीरव मोदी और मेहुल चोकसी समेत इस घोटाले के चार आरोपियों को पूछताछ के लिए समन भी जारी किया है।

गुरुवार को ईडी ने नीरव मोदी के जयपुर, सूरत, दिल्ली समेत कुल 17 स्थानों पर छापेमारी की। नीरव मोदी के दफ्तरों, शोरूम और वर्कशाप पर छापेमारी के दौरान करीब 5,100 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की।

पीएनबी में 11,360 करोड़ रुपये के घपले में नीरव मोदी की कंपनियों और बैंक की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस शाखा के कुछ अन्य खातों की संलिप्तता उजागर होने के एक दिन बाद बड़े स्तर कार्रवाई शुरू की गई है। पीएनबी के कम से कम 10 बैंक कर्मियों को निलंबित किया गया है, लेकिन पीएनबी की कर्ज अनुमति कमेटी या निदेशक मंडल से कोई इनमें शामिल है या नहीं, यह अभी साफ नहीं हुआ है।

सीबीआई ने पिछले सप्ताह मोदी और उनकी पत्नी एमी और भाई निशाल व मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इससे पहले पीएनबी ने 29 जनवरी को 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को लेकर इन चारों के खिलाफ शिकायत की थी।

यह धोखाधड़ी का मामला साल 2011 का है. बताया जाता है कि नीरव मोदी ने पीएनबी और अन्य बैंकों को लिखा था कि वह बकाए की वापसी कर देंगे। मालूम हो कि नीरव मोदी का कारोबार भारत के अलावा यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन, मध्यपूर्व और सुदूर पूर्व में भी है।

आपको बता दें कि इस घोटाले की रकम विजय माल्या के 9,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने से मुकरने से बड़ी है। बैंकों को चूना लगाने के ये मामले तब उजागर हो रहे हैं जब बैंकों के डूबे हुए कर्ज को लेकर भारतीय बैंकिंग प्रणाली सवालों के दौर से गुजर रही है।

पढ़िये, आम बजट से कहां करना पड़ेगा ज्यादा खर्च

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मोदी सरकार के अंतिम वर्ष का बजट पेश कर दिया है। बजट में जेटली में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिये कुछ खास नहीं किया है, बल्कि इस बजट से आम आदमी के घर का बजट गड़बड़ाने की ज्यादा आशंका है। इसका कारण आयकर के मोर्चे पर राहत न मिलना और महंगाई बढ़ने की आशंका है।
आइए जानते हैं कैसे देश के आम बजट ने आपका खर्च बढ़ाने का काम किया है। इसके साथ ही जानिए कहां-कहां आपको ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

पड़ेगी महंगाई की मार

आम बजट में सरकार ने किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए एग्री उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना इजाफा करने का फैसला लिया है। आर्थिक जानकारों का दावा है कि इस फैसले से देश में महंगाई को दस्तक देने से कोई नहीं रोक सकता।

बिगड़ेगा रसोई का बजट

समर्थन मूल्य बढ़ाने से देश में फसल उत्पाद की कीमतों में इजाफा हो जाता है जिसके चलते महंगाई बढ़ना तय हो जाता है। दरअसल अधिक समर्थन मूल्य के इस नीतिगल फैसले से केंद्र सरकार के खजाने पर बोझ पड़ेगा और आम आदमी को गेंहू, चावल, दाल और तिलहन तय निर्धारित कीमतों से अधिक पर उपलब्ध होगा। इस असर के चलते आम आदमी की रसोई का बजट तो बिगड़ना तय है।

मोबाइल-टीवी हुआ महंगा

बजट में सरकार ने मोबाइल फोन समेत आयात किए जाने वाले अन्य कई उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है। इसे टीवी के कुछ पार्ट्स पर 15 फीसदी किया गया है। वहीं, मोबाइल पर यह 20 फीसदी कर दिया गया है। कस्टम ड्यूटी बढ़ने का नुकसान आम आदमी को झेलना पड़ सकता है।

दरअसल कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी होने से भारत में आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। कंपनियां इस लागत का भारत आम आदमी पर डालती है। इसका नुकसान ये होगा कि आपके लिए टीवी-फ्रिज और मोबाइल फोन समेत अन्य होम एप्लायंसेज खरीदना महंगा हो सकता है।

टैक्स के मोर्चे पर भी राहत नहीं

केंद्र सरकार ने आम बजट में टैक्स के मोर्चे पर भी कोई राहत नहीं दी है। आम आदमी को उम्मीद थी कि उसे इस बजट में टैक्स के मोर्चे पर कम से कम 50 हजार रुपये की राहत मिलेगी। लेकिन सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है और इन्हें पुराने टैक्स स्लैब में ही रखा है।

ये है टैक्स रेट

मौजूदा समय में आपको आपकी इनकम के मुताबिक 5 से 30 फीसदी तक टैक्स चुकाना पड़ता है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए अगर आपकी इनकम 2.5 लाख रुपये तक है, तो कोई टैक्स नहीं देना होगा। 2.5 से 5 लाख पर 5 फीसदी, 5 लाख-10 लाख पर 20 फीसदी और 10 लाख से अधिक पर आपको 30 फीसदी टैक्स देना पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा टैक्स स्लैब

अगर आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और 80 साल से कम है, तो आपके लिए अन्य के मुकाबले टैक्स रेट अलग हैं। इसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। इनके लिए 3 लाख तक कोई टैक्स नहीं। 3 से 5 लाख पर 5 फीसदी, 5 से 10 लाख पर 20 और 10 लाख से अधिक पर आपको 30 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा।

महिलायें शी-बॉक्स के जरिये कर सकेंगी यौन उत्पीड़न की शिकायत

अब केंद्रीय महिला कर्मचारी ऑफिसों में यौन उत्पीड़न की शिकायत शी-बॉक्स के जरिए कर सकेंगी। इसके लिये केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने केंद्र सरकार में काम कर रही महिला कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन प्लैटफॉर्म शी-बॉक्स लॉन्च किया है।

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि शी-बॉक्स फिलहाल केंद्र सरकार की कर्मचारियों के लिए है। बाद में इसका विस्तार किया जाएगा और इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया जाएगा। ऑफिस और कामकाज की जगह पर होने वाले उत्पीड़न की प्रकृति के लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वे कराने की बात भी मेनका गांधी ने कही है।

शी-बॉक्स का मतलब है सेक्सुअल हैरसमेंट इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स। इसमें आई कोई भी शिकायत सीधे संबंधित मंत्रालय, विभाग की इंटरनल कंप्लेन कमेटी के पास भेज दिया जाएगा, जिसके पास इसकी जांच का अधिकार होगा। इंटरनल कंप्लेन कमेटी नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगी और शिकायत की स्थिति भी पीड़ित को बताती रहेगी।

अभी केंद्र सरकार में करीब 30.87 लाख कर्मचारी हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की कर्मचारियों के लिए हैं जिसमें करीब 10.93 प्रतिशत महिला हैं। मेनका गांधी के मुताबिक पोर्टल में कैसी हरकतें यौन उत्पीड़न मानी जाएंगी यह भी बताया गया है। फर्जी शिकायतें ना आएं इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।

जीएसटी दर घटने से आम जनता को मिली राहत

जीएसटी परिषद की बैठक में आम आदमी को राहत मिली है। गुरुवार को हुई बैठक में 29 चीजों और 53 सेवाओं पर जीएसटी को घटाकर शून्य फीसदी कर दिया है। जिन उत्पादों पर जीएसटी कम किया गया है, उनमें ज्यादा हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही परिषद ने 39 चीजों पर जीएसटी कम करके 5 फीसदी और 12 फीसदी कर दिया है।

फिलहाल जीएसटी रिटर्न भरने के लिए फॉर्म का सरलीकरण करने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बारे में 10 दिन बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से फिर से बैठक होगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि बैठक में रिटर्न फाइल को सरल करने पर चर्चा हुई और नंदन नीलेकणि और सुशील मोदी ने इस पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी है।

यह हुए अहम फैसले

जीएसटी परिषद की बैठक में 29 सामान और 53 सेवाओं पर से स्वीकार किया गया। बोतलबंद पानी पर जीएसटी 18 से 12 फीसदी कर दी गई है। इसके अलावा 40 हैंडीक्राफ्ट वस्तुओं की कीमत तय की जाएगी। जिन वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी में राहत दी गई है, उनके नए रेट 25 जनवरी से जीएसटी के नए रेट लागू हो जाएंगे। इसके अलावा एक फरवरी से ई-वे बिल भी लागू हो जाएगा।

पेट्रोलियम पदार्थों पर होगा फैसला

बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि गुरुवार की बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में लाने पर बात नहीं हो सकी। हालांकि, उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की अगली मीटिंग में पेट्रोलियम पदार्थों के साथ ही दूसरे पदार्थों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने पर बात की जाएगी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोल की कीमत फिर 80 रुपये के करीब पहुंच गई है। वहीं, कई राज्यों में डीजल 65 का आंकड़ा पार कर चुका है।

आम लोगों के लिए एक और राहत संभव

इसके अलावा रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाने पर भी कोई फैसला इस बैठक में नहीं हो सका। हालांकि इस पर चर्चा जरूर हुई है। रियल इस्टेट के जीएसटी के दायरे में आने से आम लोगों को स्टांप ड्यूटी समेत कई चीजों पर होने वाले खर्च से निजात मिल सकती है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बैठक में जीएसटी परिषद रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में ला सकती है। इसकी वजह यह थी कि समय-समय पर वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत सरकार के कई नेता रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाने की बात कई बार कह चुके हैं।