देश के इतिहास में 3 सर्वोच्च पद पर संघ विचारधारा के लोग

एनडीए के उम्मीद्वार वेंकैया नायडू को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। वो भारत के 15वें उपराष्ट्रपति कार्यकाल को संभालेंगे। इनसे पहले हामिद अंसारी लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे थे। यह पहली बार है जब भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर संघ से जुड़े व्यक्ति आसीन हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संघ से काफी पुराना नाता है और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी छात्र जीवन में संघ से जुड़ गए थे। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं। गौरतलब है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा था, आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब भारत के सभी सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर एक ही विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति आसीन हैं।
उपराष्ट्रपति नायडू छात्र जीवन के समय 70 के दशक में आरएसएस से जुड़े थे। इस दौरान उनकी पहचान बतौर आंदोलनकारी छात्र के रूप में हो गयी थी। वेंकैया ने 1972 में जय आंध्र आंदोलन में भाग लिया था। इसके बाद 1973 से 74 तक आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे थे। बता दें कि नायडू बतौर स्वंय सेवक दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। उनसे पहले भैरोसिंह शेखावत 2002 से 2007 तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

आधार के बिना अब नही बनेगा डेथ सर्टिफिकेट

अब आधार कार्ड भी हमारे जीवन के साथ-साथ जीवन के बाद भी जरुरी होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि एक अक्टूबर से डेथ सर्टिफिकेट के लिए आधार नंबर दर्ज करना होगा, तभी डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया। सरकार का दावा है कि इससे कदम से फर्जीवाड़े पर अंकुश लग सकेगा। गृह मंत्रालय का यह नया फरमान पहली अक्टूबर से पूरे देश में लागू होगा। जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय को इससे फिलहाल दूर रखा गया है। डेथ सर्टिफिकेट हासिल करने वाले को मृतक का आधार नंबर या फिर आधार का पंजीकरण दर्ज कराना होगा। जिसके पास आधार नंबर नहीं है उस पर गृह मंत्रालय का कहना है कि ऐसे में डेथ सर्टिफिकेट में यह दर्ज रहेगा कि मृतक का आधार कार्ड नहीं है। इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि इस बारे में कोई भी गलत जानकारी देना एक अपराध माना जाएगा। मृतक के आधार के साथ-साथ उसके करीब सदस्य जैसे, पति-पत्नी, माता-पिता या फिर बेटा-बेटी का भी आधार नबंर डेथ सर्टिफिकेट के लिए दर्ज कराना होगा।
गृह मंत्रालय के तहत कार्य करने वाले रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने कहा कि आधार का उपयोग रिश्तेदारों या आश्रितों या मृतकों की परिचितों के परिजनों द्वारा दिए गए विवरण की सटीकता सुनिश्चित करने में होगा। यह पहचान धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक प्रभावी तरीका प्रदान करेगा। यह मृत व्यक्ति की पहचान दर्ज करने में भी मदद करेगा। इसके अलावा, यह मृत व्यक्ति की पहचान को साबित करने के लिए कई दस्तावेज तैयार करने की आवश्यकता को खत्म कर देगा।

टमाटर के बाद अब प्याज की कीमतें भी रुलायेंगी

टमाटर की कीमतों के बाद प्याज की कीमतें भी आम आदमी को परेशान कर सकती है। पिछले एक महीने में प्याज की कीमतों में तीन गुना वृद्धि हुई है और आने वाले दिनों में ये कीमतें और भी बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके पीछे नासिक में प्याज की थोक मंडियों में प्याज की कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। नासिक के लासलगांव मे प्याज के प्रति कुंतल दाम 1,240 रू से बढ़कर 2,340 रू प्रति कुंतल तक पहुंच गए हैं।
एशिया की सबसे बड़ी थोक सब्जी मंडी आजादपुर मंडी में पिछले एक महीने में प्याज की कीमतें तिगुनी हो चुकी हैं। व्यापारियों का कहना है कि सबसे अधिक प्याज नासिक से आता है। लेकिन इस बार ये प्याज बाढ़ग्रस्त इलाको में और दक्षिण भारतीय राज्यों में चला गया है। जिस वजह से वहां पर भी दाम बढ़ गए हैं और आने वाले वक्त में आम आदमी को प्याज की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

फसल का सीधा भुगतान अब खातों में आयेगा

उत्तराखंड में देहरादून सहित प्रदेशभर की 10 मंडियों में फसलों के दाम अब ऑनलाइन ही तय होंगे। क्योकि अब ये मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से जुड़ जाएंगी। देश की मंडियों को जोड़ने के लिए 14 अप्रैल, 2016 को ई-नाम की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में राज्य की 5 मंडियों को आपस में जोड़ा गया था।
दूसरे चरण में देहरादून के अलावा रुड़की, विकासनगर, रामनगर, हल्द्वानी, खटीमा, जसपुर, टनकपुर, बाजपुर और मंगलौर मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेज दिया है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून की निरंजनपुर सब्जी मंडी से 4,000 से ज्यादा व्यापारी और 10,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। मंडी के साथ ये लोग अब ई-नाम से भी जुड़ जाएंगे। ई-नाम के जरिए किसानों को उनके उत्पादों से संबंधित जानकारियां मोबाइल मैसेज के जरिए मिला करेंगी। इसके अलावा मंडी में आने वाले उत्पादों की जांच मंडी लैब में ही होगी और किसानों को फसल का सीधा भुगतान उनके खातों में आएगा।
दून मंडी समिति ने ई-नाम के लिए मंडी में सर्वर रूम भी तैयार कर लिया है। केंद्र से बजट मिलते ही निरंजनपुर मंडी ई-नाम से जुड़कर काम करना शुरू कर देगी। जिसका सीधा फायदा किसानों और व्यापारियों को मिलेगा।

देश की सबसे लंबी सुरंग कहलायेगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन

ऋषिकेश एशिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेलवे के खाते में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ ही एक उपलब्धि और जुड़ जाएगी। प्रस्तावित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर देश में अब तक की सबसे लंबी सुरंग बनने जा रही है। जिसकी लंबाई 15 किलोमीटर होगी। अभी तक भारतीय रेलवे जम्मू-कश्मीर में ही सबसे लंबी रेल सुरंग बना पाया है, जो सवा ग्यारह किलोमीटर लंबी है।
भारतीय रेलवे की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अपने आप में कई मायनों में अनूठी है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर कुल 16 सुरंगें और 16 पुल बनने हैं। बड़ी बात यह कि इस रेल लाइन पर देश में अब तक की सबसे लंबी सुरंग बनने जा रही है। जिसकी लंबाई 15.100 किलोमीटर होगी। देश में अब तक सबसे लंबी रेल सुरंग उत्तर रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2013 में तैयार की थी। जबकि, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की बात करें तो यहां प्रस्तावित 16 सुरंगों में से पांच सुरंग नौ किलोमीटर से भी लंबी हैं। इसके अलावा छह सुरंगें छह से नौ किलोमीटर तक लंबाई की हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर इसी वर्ष नंवबर-दिसंबर में काम शुरू होने की उम्मीद है।

छह किमी से लंबी सुरंग में बनेगी निकासी सुरंग
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की एक और खासियत यह है कि इस पर रेल सिर्फ 20 किलोमीटर का सफर ही खुले आसमान के नीचे तय करेगी। बाकी रेल लाइन का 105 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इस रेल लाइन पर छह किलोमीटर व इससे अधिक लंबाई की प्रत्येक सुरंग पर एक निकासी सुरंग भी बनाई जाएगी। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच प्रस्तावित 18 सुरंगों में से 11 सुरंगों की लंबाई छह किलोमीटर से अधिक है। इन सभी के साथ निकासी सुरंगें बनाई जानी हैं, जो आपात स्थिति में काम आएंगी।

रेल यात्रियों को महसूस नहीं होगी घुटन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर जब यात्री 105 किलोमीटर का सफर 18 सुरंगों से तय करेंगे तो यहां उन्हें किसी भी तरह की घुटन महसूस नहीं होगी। रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि इन सुरंगों में वेंटीलेशन की पर्याप्त व्यवस्था होगी। वेंटीलेशन सिस्टम पूरी तरह से आधुनिक व तकनीकी से लैस होगा। प्रत्येक सुरंग का डायमीटर आठ से दस फीट का होगा।

देश की सबसे लंबी पांच रेल सुरंग
टनल का नाम-जगह-लंबाई
पिर पंजल-जम्मू कश्मीर-11.215 किमी
करबड़े-महाराष्ट्र-6.506 किमी
नाथूवाड़ी-महाराष्ट्र-4.389 किमी
टाइक-महाराष्ट्र-4.077 किमी
बर्डेवाड़ी-महाराष्ट्र-4.000 किमी

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर प्रस्तावित सुरंग
ढालवाला से शिवपुरी-10.850 किमी
शिवपुरी से गूलर-6.470 किमी
गूलर से व्यासी-6.720 किमी
व्यासी से कौड़ियाला-2.200 किमी
कौड़ियाला से बागेश्वर-9.760 किमी
राजचौरा से पौड़ी नाला-220 मीटर
पौड़ी नाला से सौड़ (देवप्रयाग)-1.230 किमी
सौड़ से जनासू-15.100 किमी
लछमोली से मलेथा-2.800 किमी
मलेथा से नैथाणा (श्रीनगर)-4.120 किमी
श्रीनगर से परासू (धारी)-9.000 किमी
परासू से नरकोट-7.080 किमी
नरकोट से तिलनी-9.420 किमी
तिलनी से घोलतीर-6.460 किमी
घोलतीर से गोचर-7.160 किमी
रानो से सिवई-6.400 किमी

सुरंगों के लिए हो चुका भूगर्भीय सर्वेक्षण
रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओम प्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर 18 सुरंगों के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण हो चुका है। सुरंग निर्माण के लिए टीबीएम (टनल बोङ्क्षरग मशीन) व एनएटीएम (न्यू आस्ट्रीयन टनलिंग मैथड) से काम किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में अब तक की सबसे बड़ी रेल सुरंग का निर्माण करने वाले इंजीनियर व विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

नीतीश कुमार को लेकर शाह का बयान अहम माना जा रहा

बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड की गठबंधन सरकार में जारी अंर्तकलह के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के एक बयान से राजनीति सरगरमी तेज हो सकती है। उन्होंने जदयू-बीजेपी गठबंधन सरकार के दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके नेतृत्व की तारीफ की है। अमित शाह ने कहा, 1980 के दशक में अर्थशास्त्रियों ने बीमारू स्टेट शब्द का प्रयोग किया था, जिन राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई थी, जिसके चलते वहां की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई थी, ऐसे ही राज्यों को बीमारू राज्य कहा गया। बीमारू राज्य में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश। उन्होंने आगे कहा, बिहार में नीतीश कुमार जबतक बीजेपी के साथ सरकार चला रही थी, वहां विकास हो रहा था, देश-दुनिया के अर्थशास्त्री मानते हैं कि उस दौर में बिहार बिमारू राज्य से बाहर होने की कगार पर पहुंच गया था।
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 13 साल से बीजेपी की सरकार है, ये दोनों राज्य विकसित राज्य बनने की कगार पर हैं, राजस्थान भी बीमारू राज्य से बाहर है। यूपी में हमें अभी जनादेश मिला है, पांच साल बाद इस इस राज्य की भी हालत बदल जाएगी।
नीतीश कुमार को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के इस बयान को कई मायने में अहम माना जा सकता है। दरअसल, हाल ही में लालू प्रसाद यादव के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। जदयू और राजद नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों में कई बार जुबानी जंग भी हुए। इसी बीच बिहार के राजनीति गलियारे में ये भी चर्चा है कि जदयू और सीएम नीतीश कुमार लगातार तेजस्वी यादव पर मंत्रिमंडल से बाहर होने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने तेजस्वी के इस्तीफे से साफ मना कर दिया है। इसी राजनीतिक गहमागहमी के बीच बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा था कि अगर आरजेडी नीतीश कुमार का साथ छोड़ती है तो बीजेपी बाहर से समर्थन कर सरकार गिरने नहीं देगी।
वहीं अमित शाह का ताजा बयान लालू प्रसाद यादव की चिंता बढ़ा सकती है। अमित शाह दिल्ली में जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर लिखी किताब (श्यामा प्रसाद मुखर्जी- हिज विजन ऑफ एजुकेशन) का उद्घाटन करने पहुंचे थे, यहीं उन्होंने नीतीश कुमार और बीजेपी-जदयू सरकार के कार्यकाल की तारीफ की। कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि इसने देश भर में परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति की, जिसका खामियाजा देश के लोगों को भुगतना पड़ा। जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण का खात्मा हो गया।

एनआईए ने पाकिस्तान से व्यापार बंद करने की सिफारिश की

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सिफारिश की है कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर पाकिस्तान के साथ व्यापार बंद किया जाना चाहिए। एनआईए ने गृह मंत्रालय को भेजे अपनी सिफारिश में कहा है कि जम्मू कश्मीर के पुंछ और उरी से होने वाले व्यापार को तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सीमा पार व्यापार के बहाने पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए धन भेजते हैं। बता दें कि भारत पाकिस्तान के बीच अच्छे रिश्ते बहाल करने के लिए साल 2008 में उरी-पुंछ समेत कुछ जगहों से पाकिस्तान के साथ व्यावसायिक रिश्तों की शरूआत की गई थी। इस कदम का मकसद था कि जम्मू-कश्मीर के व्यापारी कम दूरी पर पाकिस्तान से बिजनेस कर सकें। लेकिन बाद में पता चला कि आतंकी और आतंकी समूह इस बिजनेस गतिविधि का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग के लिए कर रहे हैं।
हाल ही में हुर्रियत के कुछ नेताओं को भी केन्द्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसमें दूसरे अलगाववादी संगठन के नेता भी शामिल थे। इन नेताओं ने एक स्टिंग ऑपरेशन में स्वीकार किया था कि उन्हें हवाला के माध्यम से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से फंडिंग मिल रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पर व्यापार की आड़ में आतंकवाद और कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके पीछे पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन और एजेंसियां काम कर रही हैं। एनआईए का मानना है कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में घाटी में हवाला के जरिए काफी धन पहुंचाया है।
भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार में 21 वस्तुओं की सूची तैयार की गई थी, जिनका व्यापार होना था। इनमें चमड़े का सामान, सूखे मेवे, सर्जिकल उपकरण, कपास, प्लास्टिक, सूखी सब्जियां, कृत्रिम फाइबर, टायर, अशुद्ध गहने, जस्ता, तेल के बीज और बुने हुए कपड़े जैसी चीजें शामिल थी। एक आंकड़े के मुताबिक रोजाना दोनों देशों के बीच 40 से 50 ट्रक सामान लेकर गुजरते हैं।

पनामा पेपर्सः 500 भारतीय हस्तियों के नामों पर कब होगी कार्रवाई

पनामा पेपर्स में 500 भारतीय हस्तियों के नामों का खुलासा हुआ जिन्होंने टैक्स चोरी और काला धन सफेद करने के लिए टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों में धन का निवेश किया। इस सूची में देश के कई जानेमाने उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और खिलाड़ियों का भी नाम आया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, पंचकूला, देहरादून, वडोदरा और मंदसौर के व्यापारियों के नाम भी दस्तावेजों में हैं।

कई विदेशी हस्तियों के भी नाम
पनामा की विधि फर्म मोजैक फोंसेका के लीक हुए टैक्स दस्तावेजों से दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों के नाम हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबियों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (दोषी करार), मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो, लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी समेत कई हस्तियों के नाम हैं।
सउदी अरब के किंग सलमान बिन और अजरबैजान के राष्ट्रपति के बच्चों ने भी टैक्स बचाने के लिए ऑफशोर देशों में कंपनियां बनाई हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के परिवार का ऑफशोर खातों से संबंध है। इसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पिता का भी इसी तरह के खातों से संबंध है।

खुलासा दर खुलासा
1.15 करोड़ टैक्स दस्तावेज लीक हुए हैं पनामा पेपर्स के
128 बड़े नेताओं ने अपनी संपत्ति छुपाने और कर बचाने के लिए टैक्स हैवेन देशों की मदद ली।
35 देशों में दफ्तर हैं मोसैक फॉन्सेका लॉ फर्म के जो लीक दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
78 देशों की 109 मीडिया कंपनियों के पत्रकारों ने दस्तावेजों की जांच की है।
2.6 टेराबाइट डेटा सामने आया है पेपर लीक में जो लगभग 600 डीवीडी में आ सकता है।
1977 से लेकर 2015 तक लगभग 40 वर्षों का डाटा जांच में सामने आया है।

पनामा में विदेशी निवेश पर टैक्स नहीं

पनामा जैसे देश में विदेशी निवेश पर कोई टैक्स नहीं लगता। पनामा में दो तरह के कर वसूले जाते हैं। एक टेरेट्रियल टैक्स सिस्टम दूसरा है कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम। रेसिंडेंट और नॉन रेसिडेंट कंपनियों से तभी टैक्स वसूला जाता है, जब आय देश में ही हुई हो।

40 लाख जनसंख्या है पनामा देश की राजधानी पनामा सिटी है।
3.50 लाख से ज्यादा गोपनीय कंपनियां हैं स्थापित की गई हैं पनामा में
25 फीसदी टैक्स लगता है कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम में।
1.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा टैक्सेबल रेवेन्यू उन पर अल्टरनेटिव टैक्स लग सकता है।
1.168 फीसदी टैक्स लगेगा उनके कुल टैक्सेबल आय पर ज्यादा से ज्यादा।
25 फीसदी टैक्स लग सकता है नेट टैक्सेबल आय पर।

ट्रेन की टिकट सस्ती होने के आसार

रेलवे में खाने को लेकर आए दिन कोई न कोई शिकायत मिलती रहती है। ऐसे में बहुत से यात्री चाहते थे कि टिकट के साथ खाना लेना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अगर आप भी ऐसे लोगों में से हैं जो ट्रेन का खाना पसंद नहीं करते हैं, तो आपके लिए रेलवे एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।
खाने के नहीं देने होंगे पैसे बुधवार को रेलवे ने घोषणा करते हुए कहा है कि अब आपको ट्रेन टिकट खरीदते समय खाने के पैसे देना जरूरी नहीं होगा। यह नया नियम 26 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। इसका फायदा सबसे अधिक उन लोगों को होगा, जिन्हें ट्रेन का खाना पसंद नहीं आता था और वह उसका पैसा नहीं देना चाहते थे। अब आप टिकट बुक करते समय चाहें तो खाने का पैसा दें या चाहें तो खाने को टिकट से हटा दें, आपकी मर्जी।
इन ट्रेनों में मिलेगी सुविधा रेलवे ने कैटरिंग को फिलहाल 31 प्रीमियम ट्रेनों में वैकल्पिक बनाया है। इन 31 प्रीमियम ट्रेनों में 7 राजधानी, 6 शताब्दी और दूरंतो शामिल हैं। फिलहाल रेलवे की तरफ से उन 31 प्रीमियम ट्रेनों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन ट्रेनों की टिकटें सस्ती हो जाएंगी, क्योंकि आपके लिए खाने के पैसे देना वैकल्पिक कर दिया जाएगा।
ये भी होगा बदलाव कैटरिंग सेवा को बेहतर बनाने के लिए आईआरसीटीसी यात्रियों से उनके फीडबैक लेगी। इसके अलावा, भारतीय रेलवे के तहत चल रहे 100 किचन को आईआरसीटीसी को दे दिया जाएगा और साथ ही 20 नए मॉडर्न किचन भी खोले जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आईआरसीटी के ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकें।

श्रमिकों को मिलेगा नया न्यूनतम वेतन का लाभ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए वेतन विधेयक (नए वेज कोड बिल) को मंजूरी दे दी है, जिससे देशभर में चार करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इसमें मजदूरों से जुड़े चार कानूनों को मिलाया गया है, इससे सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित होगी।
बताया जा रहा है कि वेतन लेबर कोड बिल में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, वेतन भुगतान कानून 1936, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 को एक साथ जोड़ा गया है। मसौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है।
इस विधेयक में केंद्र सरकार को सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित करने का अधिकार देने की बात कही गई है। साथ ही उसके फैसले को सभी राज्यों को मानना होगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी से अधिक राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से बढ़ा सकती हैं। इस बिल को 11 अगस्त को समाप्त हो रहे मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा।
नए न्यूनतम मजदूरी मानदंड सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। फिलहाल केंद्र और राज्य का निर्धारित न्यूनतम वेतन उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जिन्हें मासिक 18,000 रुपए तक वेतन मिलता है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सभी उद्योगों के श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम वेतन तय हो सकेगा। इसमें वो भी शामिल हो जाएंगे, जिन्हें 18,000 रुपए से अधिक वेतन मिलता है।
इससे पहले, श्रम मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने राज्यसभा को लिखित जवाब दिया कि श्रमिकों पर द्वितीय राष्ट्रीय आयोग ने सिफारिश की है कि मौजूदा मजदूर कानूनों को व्यापक रूप से कामकाज के आधार पर चार या पांच लेबर कोड्स में बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय मजदूरी पर चार लेबर कोड्स को ड्राफ्ट करने वाला है, जिसमें औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और सुरक्षा, और कामकाजी परिस्थितियां, शामिल हैं।