एग्री स्टैक को लागू करने के लिए अभियान चलाकर किया जाएगा डिजिटल सर्वे ई-पड़ताल

उत्तराखण्ड में किसानों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने की दिशा में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राजस्व एवं कृषि विभाग को भारत सरकार के एग्री स्टैक प्रोजेक्ट को राज्य में व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए सभी तैयारियां जल्द से जल्द पूरा करने की डेडलाइन दी है। उन्होंने एग्री स्टैक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए गाइड लाइन्स बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड में सभी किसानों की कृषक रजिस्ट्री को डिजिटल रूप से सत्यापित करने तथा राज्य के प्रत्येक किसान को एक यूनिक किसान आईडी प्रदान करने वाले महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट एग्री स्टैक को लागू करने के लिए अभियान चलाकर डिजिटल सर्वे ई-पड़ताल का कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। राज्य में एग्री स्टैक प्रोजेक्ट का शत प्रतिशत कवरेज जल्द से जल्द पूरा करने के दृष्टिगत मुख्य सचिव ने एग्री स्टैक को लागू करने में स्थानीय समुदायों व किसानों को प्रशिक्षित करके उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में कृषि विभाग, राजस्व विभाग तथा राजस्व बोर्ड को अपनी तैयारियां तत्परता से पूरी करने तथा कार्मिकों की कमी की दशा में अन्य विभागों के कार्मिकों की सहायता लेने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि एग्री स्टैक में किसान की पहचान (आधार), भूमि रिकॉर्ड, कवरेज, आय, बीमा, ऋण, फसलों का विवरण तथा राजस्व रिकॉर्ड जैसी सभी सूचनाओं का स्टोरेज होगा। इस सम्बन्ध में सेटेलाइट डाटा, रियल टाइम क्रॉप इन्फोर्मेशन, मशीन लर्निंग, जीपीएस, एआई व विजुअल एनालिटिक्स की मदद से डाटा एकत्रित किया जाएगा। एग्री स्टैक का उद्देश्य किसानों तक सरकारी लाभों व योजनाओं की बेहतर, तीव्र व आसान डिलीवरी सुनिश्चित करना है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि एग्री स्टैक सिस्टम के माध्यम से किसान, सरकारी एजेंसियां, एग्रीटेक कम्पनियां तथा वितीय संस्थान सहित कृषि क्षेत्र के विभिन्न हितधारक एक साथ आएंगे।
बैठक में प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु, सचिव एस एन पाण्डेय, चन्द्रेश कुमार सहित कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारघाटी में बुधवार रात्रि को हुई अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को निर्देश दिये कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पैदल मार्गों के सुधारीकरण का कार्य तेजी से किया जाय। संवेदनशील स्थानों से लोगों को जल्द सुरक्षित स्थानों पर लाया जाए।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान श्रद्धालुओं से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को यात्रा मार्ग में फंसे श्रद्धालुओं को यथाशीघ्र सुरक्षित स्थानों में लाये जाने के साथ ही भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये। प्रभावित क्षेत्र में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का पूरा आंकलन करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। आपदा प्रभावित क्षेत्र में जन जीवन सामान्य बनाने के लिए सड़क कनेक्टिविटी, विद्युत और पेयजल की आपूर्ति सुचारू करने के निर्देश दिये हैं।
जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग डॉ. सौरभ गहरवार ने जानकारी दी कि केदारनाथ यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं के फंसे होने की सूचना मिलते ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है, साथ ही उनके लिए भोजन और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्थाएं की गई है। आज दोपहर एक बजे तक लगभग 300 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों से लोगों को सुरक्षित स्थानों में ले जाया जा रहा है। अतिवृष्टि से बहे पुल व क्षतिग्रस्त मार्गों को बनाने की कार्यवाही भी गतिमान है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, अध्यक्ष जिला पंचायत अमरदेई शाह, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम पहुंचे टिहरी, प्रभावितों से मिले, प्रशासन को हर संभव मदद करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को जनपद टिहरी के आपदाग्रस्त क्षेत्र जखन्याली का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्र में मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनका ढ़ाढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति एवं और शोकाकुल परिवार को धैर्य प्रदान करने की कामना की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में शासन-प्रशासन प्रभावितों के साथ खड़ा है। सरकार द्वारा प्रभावितों को हर संभव सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस समय एक दूसरे का सहयोगी बनकर कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में आपदा से जनहानि, पशु हानि एवं अन्य परिसंपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा है। आपदा के समय लोगों की सुरक्षा राज्य सरकार पहली प्राथमिकता है। उन्होंने जिलाधिकारी टिहरी को आपदा प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने तथा राहत कैंपों में सभी आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिये हैं। आपदा क्षति का आंकलन कर तत्काल सुरक्षात्मक कार्य करने के भी निर्देश दिये हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्र में जन जीवन सामान्य बनाने के लिए सड़क कनेक्टिविटी, विद्युत और पेयजल की आपूर्ति सुचारू करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी टिहरी मयूर दीक्षित ने जानकारी दी कि कल देर रात्रि जनपद टिहरी के घनसाली ब्लॉक के जखन्याली के पास बादल फटने से होटल बहने की सूचना प्राप्त हुई। घटना की सूचना प्राप्त होते ही राजस्व टीम, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य, सड़क, विद्युत आदि विभागों की टीम जेसीबी, एंबुलेंस सहित मौके के लिए रवाना हुए। विद्युत विभाग द्वारा तत्काल शट डाउन किया गया। खोज बचाव एवं राहत टीम ने खोज बचाव शुरू किया। इस घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की मृत्यु हुई है। दो लोगों के शव रात्रि में बरामद कर लिये गये थे। एक घायल व्यक्ति ने अस्पताल ले जाने के दौरान दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आई आपदा में मुयालगांव में घनसाली -चिरबिटिया मोटरमार्ग को जोड़ने वाली पुलिया बहने, एक घोड़ा बहने की घटना एवं अन्य परिसंपत्तियों को काफी नुकसान हुआ है।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक घनसाली शक्ति लाल शाह, विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय,एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, सीडीओ डॉ. अभिषेक त्रिपाठी मौजूद रहे।

राहत एवं बचाव कार्यों के लिए धनराशि की पर्याप्त व्यवस्था-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क स्थित राज्य आपदा परिचालन केन्द्र से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही अतिवृष्टि की जानकारी ली। सचिव आपदा प्रबंधन को उन्होंने निर्देश दिये कि जिलाधिकारियों से निरंतर समन्वय बनाये रखें। अतिवृष्टि के कारण राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जिलाधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की सहायता मांगे जाने पर यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाय। उन्होंने बालगंगा एवं बूढ़ाकेदार क्षेत्र के प्रभावित गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया को भी शीघ्र से शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा से राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी जनपदों को इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कुल 315 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। आवश्यकता पड़ने पर जनपदों को और भी धनराशि उपलब्ध कराई जायेगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिलाधिकारी हरिद्वार, टिहरी, देहरादून, चमोली, नैनीताल, अल्मोड़ा और उत्तरकाशी से बारिश की स्थिति, जानमाल के नुकसान, जलभराव की स्थिति, सड़कों, पुलों, पेयजल और विद्युत की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि अगले 24 घण्टे सभी अधिकारियों को अलर्ट मोड में रखें। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाया जाए और उनके रहने खाने की पर्याप्त व्यवस्थाएं रखी जाए। सुरक्षित स्थानों पर लाये जा रहे बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती माताओं को रहने के साथ दवाइयों एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की समुचित व्यवस्था रखी जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि अतिवृष्टि के कारण सड़के बाधित होने की स्थिति में उनको सुचारू करने में कम से कम समय लिया जाए। उन्होंने पुल टूटने पर बैली ब्रिज बनाकर जल्द से जल्द आवागमन को सुचारू किए जाने के भी निर्देश दिए, कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि लोगों को पेयजल और विद्युत की सूचारू आपूर्ति हो। चारधाम यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत सभी व्यवस्थाएं रखने के उन्होंने निर्देश दिये हैं। यात्रा मार्ग में अतिवृष्टि के कारण यदि कहीं पर मार्ग बाधित होते हैं या आगे कोई खतरा प्रतीत होता है तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया जाए। अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों को अनुमन्य सहायता राशि शीघ्र उपलब्ध कराये जाने के साथ ही फसलों और मवेशियों को हुए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को दिए हैं।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य सलाहकार समिति आपदा प्रबंधन विनय कुमार रूहेला, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन राजकुमार एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड के कोचिंग सेंटर पर मानक अनुसार कार्य न होने पर होगी कार्रवाई, मंत्री अग्रवाल ने दिए निर्देश

आवास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने दिल्ली के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन बच्चों की मौत के मामले का संज्ञान लेकर उत्तराखंड में कोचिंग सेंटर के लिए निर्देश जारी किए हैं। जिस पर आवास विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जनपदों में पांच सदस्यी समिति का गठन किया गया है।

मंत्री डॉ अग्रवाल ने अपर सचिव आवास अतर सिंह और एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी से दूरभाष पर निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने की घटना के बाद तीन छात्र जिनमें दो लड़कियां और एक लड़का निकलने में असफल रहे, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि ऐसी घटना उत्तराखंड में ना हो इसके लिए कोचिंग सेंटर पर अभियान चलाएं। डॉ अग्रवाल ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के कोचिंग सेंटर में मानक अनुसार कार्य नहीं होने पर तत्काल कार्रवाई करें। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि बेसमेंट में सुरक्षा उपाय तथा आपदा के समय निकासी जैसे अन्य आवश्यक कार्य न होने पर कोचिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

डॉ अग्रवाल ने यह भी कहा कि जिनमें कार्रवाई की जा रही है उन पर शीघ्र कार्रवाई की प्रक्रिया को अमल में लाएं।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में शिवभक्त कांवड़ियों के चरण धोकर किया स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ओम पुल घाट निकट डामकोठी, हरिद्वार में विभिन्न प्रदेशों से आये शिवभक्त कावड़ियों के चरण धोने के साथ माल्यार्पण, शॉल तथा गंगाजली भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से उत्तराखंड आए कावड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि हरिद्वार पूरे देश की श्रद्धा का केंद्र है। इस पवित्र स्थल पर मां गंगा एवं भगवान भोलेनाथ का विशेष आशीर्वाद है। श्रावण मास में कावड़ यात्रा का विशेष महत्व है। राज्य सरकार को कावड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य मिला है। कावड़ यात्रा को सुगम सुरक्षित बनाकर सरकार इस यात्रा में कावड़ियों का सहयोगी बनकर कार्य कर रही है। कावड़ियों की सेवा करना सभी के लिए पुण्य का काम है। उन्होंने पुष्प वर्षा से कांवडियों के स्वागत को देवभूमि की अतिथि देवो भवः की परम्परा बतायी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवाधिदेव महादेव की कृपा हम पर बनी रहे। उन्होंने शिवभक्तों से अपील की कि हम व्यवस्था के साथ जुड़कर यात्रा का न केवल आनंद लें, बल्कि श्रद्धा-विश्वास के साथ आत्मानुशासन का परिचय देते हुए पावन श्रावण मास के कांवड़ यात्रा कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कांवड यात्रा में शामिल सभी भक्तों को सुमग, सुरक्षित यात्रा की मंगलमय शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि असीम श्रद्धाभाव के साथ देश के अलग-अलग भागों से श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर आ रहें हैं जो कि श्रद्धा व आस्था के साथ ही देश की आन बान शान तिरंगा भी साथ लेकर चल रहे हैं। उन्होंने यातायात के नियमों तथा शासन प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन करने की अपील भी कावड़ यात्रियों से की है।

मुख्यमंत्री ने ओम पुल घाट पर आयोजित शिव समागम कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार आस्था एवं विकास के साथ सनातन संस्कृति के संरक्षण का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा सभी कांवड़ श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ मेले के सुचारू प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, संत महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कावड़ यात्रा के लिए विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य कैंप, शौचालय, पार्किंग, टीन शेड, विश्राम स्थल की पर्याप्त व्यवस्था की है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष व्यवस्थाओं को और अधिक सुधारा गया है। उन्होंने कहा पिछले वर्ष कावड़ यात्रा में करीब चार करोड़ कांवड़िए उत्तराखंड आए। भगवान भोलेनाथ की कृपा से पिछले वर्ष की यात्रा सकुशल संपन्न हुई। उन्होंने कहा इस वर्ष भी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के उत्तराखंड आने का अनुमान है। जिसके लिए शासन प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उनके नेतृत्व में भव्य एवं दिव्य केदारनाथ का निर्माण हुआ है। बद्रीनाथ में मास्टर प्लान पर कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। काशी विश्वनाथ, महाकाल जैसे विभिन्न मंदिरों का पुनर्निर्माण कार्य भव्यता के साथ किया गया है। शीघ्र ही हरिद्वार ऋषिकेश केरिडोर का कार्य प्रारम्भ हो जायेगा इससे आने वाले समय में कांवड़ यात्रियों को और अधिक सुविधा होगी।

इस अवसर पर विधायक मदन कौशिक, पूर्व मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप गोयल, आदेश चौहान, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल आदि शामिल रहे।

दिल्ली में बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे शिवभक्त, सीएम धामी ने किया शिलान्यास


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली स्थित बुराड़ी, हिरंकी में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए श्री केदारनाथ मंदिर ( दिल्ली ) का भूमि-पूजन कर मंदिर का शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में बाबा केदार के मंदिर के निर्माण से सभी शिव भक्तों की मनोकामना पूर्ण होगी। बुराड़ी क्षेत्र का जिक्र हमारे पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। इस क्षेत्र का संबद्ध महाभारत काल से भी है। बुराड़ी की पावन धरती में उत्तराखण्ड और सनातन संस्कृति के मूल परिचायक बाबा केदारनाथ का धाम हमारी संस्कृति और आस्था का आधुनिक प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि इस मंदिर से शिव भक्तों और सनातन संस्कृति की आस्था को बल मिलेगा। यह मंदिर श्रद्धा को जीवन, मानव को महादेव, समाज को अध्यात्म, और वर्तमान पीढ़ी को प्राचीन संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति की ध्वजा फैल रही है। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण, भव्य काशी कॉरिडोर का निर्माण, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर का निर्माण हुआ है, इसके अतिरिक्त श्री केदारनाथ एवं श्री बदरीनाथ का पुनर्निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि यह कालखंड भारत की सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान का कालखंड है। आज विदेशों से आने वाले मेहमानों का स्वागत श्रीमद् भगवत गीता भेंट करके होता है।

चीड़ पिरूल एकत्रीकरण का वन प्रभागवार लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कुशल वनाग्नि प्रबन्धन हेतु चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए थे। कुशल वनाग्नि प्रबन्धन के दृष्टिगत चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को महत्वपूर्ण मानते हुए प्रत्येक चीड़ आच्छादित वन प्रभाग में चीड़ पिरुल एकत्रीकरण हेतु लक्ष्य निर्धारित किये जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए थे।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में अपर प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन द्वारा क्षेत्रीय प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा, चम्पावत, गढ़वाल, बागेश्वर, मसूरी, लैंसडौन, नैनीताल, सिविल अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, टिहरी, टौंस, पिथौरागढ़, अपर यमुना बड़कोट, नरेन्द्रनगर, हल्द्वानी, रुद्रप्रयाग, चकराता, बद्रीनाथ, रामनगर एवं सिविल सोयम कालसी वन प्रभाग को निर्देशित किया गया है कि पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट/पैलेट यूनिट की स्थापना सुनिश्चित की जाये ताकि एकत्रित पिरूल का प्लांट में उपयोग होकर ब्रिकेट/पैलेट उत्पादित किये जा सके एवं संबंधित उद्यमियों द्वारा उनका विक्रय किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इससे पिरूल के वन क्षेत्रों से हटने से वनाग्नि की घटनाओं में कमी आयेगी तथा स्थानीय संग्रहणकर्ताओं को आय अर्जित होगी इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। रेंजवार पिरूल एकत्रीकरण लक्ष्य 5000 है० में उपरोक्त लक्ष्यों की पूर्ति हेतु न्यूनतम एक ब्रिकेट/पैलेट यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सभी वन क्षेत्राधिकारियों से जिला स्तर पर उद्योग एवं ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुये उद्यमियों का चयन कर उन्हें राज्य सरकार/वन विभाग से दी जाने वाली सुविधाओं/सहयोग के विषय में जागरूक करेंगे एवं इन यूनिटों की स्थापना सुनिश्चित करायेगें।
जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रभागीय वनाधिकारी अपने प्रभाग के अंतर्गत ब्रिकेट/पैलेट यूनिटों की स्थापना सम्बन्धी कार्यवाही 3 माह (सितम्बर 2024 तक) में पूर्ण करते हुये अनुपालन आख्या उपलब्ध करायेंगे तथा सम्बन्धित मुख्य वन संरक्षकों/वन संरक्षकों द्वारा वन क्षेत्राधिकारियों द्वारा की जा रही कार्यवाही की प्रत्येक 15 दिन में समीक्षा किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट कर सीएम ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को नई दिल्ली में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला भेंट कर उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के रूप में दूसरे कार्यकाल की बधाई व शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि लोक सभा अध्यक्ष के रुप में बिरला के अनुभव का लाभ सदन व सांसदों को मिलेगा एवं उनके कुशल नेतृत्व में सदन की कार्यवाही व्यवस्थित व सुगम रूप से संचालित होगी और हमारे देश का महान लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा।

गैर वानिकी परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण प्रस्ताओं को अनुमोदन करने का अनुरोध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट कर उन्हें पुनः पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का दायित्व मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके कुशल नेतृत्व में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नये कीर्तिमान स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने भेंट के दौरान केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रांट एयर पोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके लिये वन विभाग की 87.0815 है0 भूमि का हस्तांतरण किया जाना है। उन्होंने कहा कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण हेतु जौलीग्रांट के आस-पास के क्षेत्रों की कुल 96.2182 हैक्टेयर भूमि में से 87.0815 है0 भूमि वन विभाग की भी अधिग्रहण की जानी है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार/वन विभाग के पक्ष में निर्णय पारित किया जा चुका है। न्यायालय के उक्त निर्णय के उपरान्त जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारण हेतु वन विभाग की उक्त 87.0815 है० भूमि नागरिक विभाग को हस्तांतरित करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रांट एयरपोर्ट से काठमाण्डू (नेपाल) के लिए वायुयान सेवा संचालित किये जाने के लिए निविदा की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। जिसके दृष्टिगत जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का दर्जा देने की कार्यवाही को गति देने की नितांत आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहण एवं कब्जे की प्रक्रिया सम्पन्न होने के उपरान्त भारतीय विमानपत्न प्राधिकरण द्वारा जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण कर कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री से भेंट के दौरान यह भी अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड के विशिष्ठ भौगोलिक, सामरिक महत्व तथा पर्वतीय क्षेत्र में आम जनमानस को मूल भूत सुविधा प्रदान किये जाने के उद्देश्य से भारत सरकार के उपक्रमों द्वारा कराये जा रहे गैर वानिकी परियोजना हेतु पूर्व की भांति राज्य में उपलब्ध ‘अधिसूचित अवनत वन भूमि’ में क्षतिपूरक वृक्षारोपण कराये जाने तथा इन सभी प्रयोजन के लिये गतिमान वन भूमि हस्तान्तरण प्रस्तावों पर अनुमोदन प्रदान किया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री को यह भी अवगत कराया कि जनपद रुद्रप्रयाग के विधानसभा क्षेत्र केदारनाथ के अंतर्गत चोपता (तल्लानागपुर) में वर्ष 2014 से राजकीय पॉलिटेक्निक चोपता का संचालन किराए के भवन में किया जा रहा है। उन्होंने इसके दृष्टिगत राजकीय पॉलिटेक्निक चोपता की स्थापना हेतु पूर्व में राजस्व ग्राम कुंडा दानकोट में चयनित 2 हेक्टेयर वन भूमि को हस्तांतरण करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजकीय पालीटेक्निक, चोपता की स्थापना हेतु उक्त क्षेत्र के अन्तर्गत कहीं भी गैर वन भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। राजकीय पालीटेक्निक, चोपता की स्थापना हेतु चयनित वन भूमि लगभग 8 वर्षों से संस्था को हस्तांतरित न होने के कारण संस्था का संचालन किराये के भवन में किया जा रहा है, जिससे संस्थान में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान नहीं हो पा रही है एवं वहां के नवयुवक/युवतियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने का उद्देश्य सफल नहीं हो पा रहा है। वन भूमि हस्तांतरण से पॉलिटेक्निक अपने भवन में संचालित हो सकेगा तथा छात्रों को सुविधा होगी।