गैरसैंण के भूमिधर बन गये मुख्यमंत्री, बोले जनप्रतिनिधियों से ही होनी चाहिए रिवर्स पलायन की शुरुआत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत गैरसैंण के भूमिधर बन गये हैं। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री ने ट्वीटर और फेसबुक के माध्यम से दी है। मुख्यमंत्री ने रिवर्स पलायन का बङा संदेश देते हुए कहा कि “गैरसैंण जनभावनाओं का प्रतीक है। गैरसैंण हर उत्तराखंडी के दिल में बसता है। लोकतंत्र में जनभावनाएं सर्वोपरि होती हैं। गैरसैंण के रास्ते ही समूचे उत्तराखण्ड का विकास किया जा सकता है। सबसे पहले जनप्रतिनिधियों को ही रिवर्स पलायन करना होगा। रिवर्स पलायन से ही सुधरेगी पहाड़ों की तस्वीर और तकदीर। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं भी गैरसैंण का विधिवत भूमिधर बन गया हूँ।“
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। हम अपने युवा को स्वरोजगार की राह पर ले जाने को कृतसंकल्प हैं और ऐसा करने से पहाड़ बसेगा। राज्य सरकार ने पूरी ईमानदारी से उत्तराखंड को उसके प्राकृतिक स्वरूप की तरफ ले जाने और प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए कार्य किया है और यह प्रक्रिया आगे और गति पकड़ेगी। हमारी सरकार पुरानी धारणाएँ तोड़ने की कोशिश कर रही है-हम स्वरोजगार को विकास का माध्यम बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने घी संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तराखंडवासियों से अनुरोध कि सभी अपने अपने गाँवों की तरफ रूख करेंगे और वहां के अपने घरों का बेहतर रख-रखाव करेंगे।

कड़कनाथ के चूजों का एक माह में होगा वितरण, जिला योजना के बजट से खरीदे जाएंगे चूजे

कोविड-19 में उत्तराखंड लौटै प्रवासी युवाओं को गांव में रोकने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़े रखने के लिए जिला योजना के बजट से सरकार ने पहल की है। सरकार इस बजट से पौड़ी गढ़वाल और चमोली जिले में पशुलोक ऋषिकेश से 70 हजार कड़कनाथ मुर्गी के चूजे भेजने जा रही है। 10 सितंबर से यह चूजे पशुपालन विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे।

पहली बार जिला योजना के बजट से पशुपालन विभाग मुर्गी के चूजे खरीद रहा है। पशुलोक ऋषिकेश स्थित कुक्कट प्रक्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डा. मनोज तिवारी ने बताया कि पौड़ी जिले को कड़कनाथ के एक माह के 60 हजार चूजे और चमोली जिले को 10 हजार चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हर आठ दिन बाद कई अलग जिले को 1500 चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। 10 सितंबर से यह चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे।

कुक्कट प्रक्षेत्र पशुलोक में सात जुलाई को हैदराबाद से एक दिन के रेनबो रोस्टर के 1800 चूजे आए हैं। डॉण्मनोज तिवारी ने बताया कि यह चूजे कुक्कट प्रक्षेत्र में पाले जाएंगे। रेनबो रोस्टर के 1600 मुर्गों की लॉट की नीलामी होनी है। ऐसे में यह चूजे उनके स्थान पर भरे जाएंगे। कुक्कट प्रक्षेत्र में 72 हफ्ते की आयु पूरी होने के बाद मुर्गों की नीलामी की जाती है।

घर से नाराज किशोर पहुंचा शिवपुरी, पुलिस ने बड़े भाई के सुपर्द किया

परिजनों से नाराज होकर एक किशोर चमोली से शिवपुरी आ पहुंचा। पुलिस ने किशोर को संदिग्ध पाते हुए पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने किशोर के बड़े भाई को चौकी बुलाकर उसके सुपुर्द किया।

चौकी इंचार्ज शिवपुरी नीरज रावत ने बताया कि बीते रोज एक किशोर संदिग्ध रूप से शिवपुरी बाजार में घूमता हुआ दिखाई दिया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उसे चौकी लेकर आई। काफी पूछताछ करने पर किशोर ने अपनी पहचान उम्र 17 वर्ष अरुण कुमार पुत्र रघुवीरलाल निवासी ग्राम लूथरा थाना घाट जिला चमोली के रूप में कराई। पूछताछ में किशोर ने यह भी बताया कि वह सोमवार को परिजनों से नाराज होकर घर से बिना बताए आ गया है। चौकी इंचार्ज ने बताया कि किशोर का बड़ा भाई सुनील कुमार हरिद्वार में नौकरी करता है। बड़े भाई से संपर्क साधकर अरुण कुमार को उसके सुपुर्द किया गया।

धार्मिक स्थानों के साथ ही पर्यटक स्थलों को विकसित करने का प्लान तैयार कर रही सरकार

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में वर्ष पर्यंत पर्यटन के लिए एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिये हैं। विशेष तौर पर यात्रा मार्ग पर स्थित पर्यटन स्थलों में यात्रा अवधि के अलावा भी पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। श्री बदरीनाथ धाम के प्रस्तावित मास्टर प्लान पर तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों के सुझाव भी प्राप्त कर लिए जाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पर्यटन गतिविधियाँ को बढाने के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सलाहकार अश्विनी लोहानी और Federation of Associations in Indian Tourism and Hospitality (FAITH) के महासचिव सुभाष गोयल के साथ विचार विमर्श किया। लोहानी ने उत्तराखंड पर्यटन को ब्राण्ड के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध वाइल्ड लाइफ में भी पर्यटन की काफी सम्भावना बताई। गोयल ने कहा कि उत्तराखंड में हाईएंड टूरिज्म पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसमें टूरिज्म इंडस्ट्री और पर्यटन से जुड़ी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए।
सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने उत्तराखंड में पर्यटन के विविध आयामों व वर्तमान में चल रही पर्यटन परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने चारधाम देवस्थानम बोर्ड, होम स्टे, एडवेंचर टूरिज्म, रोप वे प्रोजेक्ट, 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन आदि के बारे मे बताया। सचिव पर्यटन ने श्री बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर प्रस्तुतीकरण भी दिया।

ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित गैरसैण में स्थापित होगी ई-विधानसभा

भराड़ीसैण (गैरसैण) को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भराड़ीसैण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में भराड़ीसैण सबसे सुन्दर राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। भराड़ीसैण (गैरसैण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए चार मार्च 2020 को की गई घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है। अब अधिसूचना लागू करने से भराड़ीसैण, गैरसैण आधिकारिक रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के विजन डाक्यूमेंट में गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कही गई थी। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें प्लानर और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। भराड़ीसैण (गैरसैण) में राजधानी के अनुरूप वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। बड़े स्तर पर फाइलें न ले जानी पड़ी, इसके लिए ई-विधानसभा पर कार्य किया जा रहा है। इससे पेपरलैस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए रामगंगा पर चौरड़ा झील का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के बाद भराड़ीसैण, गैरसैण और आसपास के क्षेत्र में ग्रेविटी पर जल उपलब्ध हो सकेगा।

गैरसैण की कनेक्टिविटी पर भी काम किया जा रहा है। भराड़ीसैण, गैरसैण को जोड़ने वाली सड़कों को आवश्यकतानुसार चौड़ा किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर रेल गैरसैण के काफी निकट तक पहुंच जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश, गैरसैंण ई-विधानसभा बनने की ओर

ग्रीष्म कालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा। पर्यावरण का संरक्षण हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति एवं जैव विविधता को बनाये रखने के लिए हमें जनभागीदारी से प्रयास करने होंगे। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और मानव के बीच कैसे संतुलन बना रहे, इस दिशा में अनुसंधान की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य की पर्यावरण रिपोर्ट की बुक का विमोचन भी किया।

गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीष्म कालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा। उत्तराखण्ड सरकार ने ई-कैबिनेट की शुरूआत की है। हमने अपने ऑफिसों को ई-ऑफिस बनाने का निर्णय लिया। अभी 17 कार्यालय, ई-ऑफिस हो गये हैं। प्रयास है कि राज्य के ब्लॉक स्तर तक जितने भी कार्यालय हैं, इनको ई-ऑफिस बनाया जाय।

हरेला पर्व पर फिजीकल डिस्टेंस रखते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला पर्व पर फिजीकल डिस्टेंस का पालन करते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जायेगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि हरेला पर्व पर वृक्षारोपण के लिए जन सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाय। किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए जन सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने जनपदों में नदियों, नौलों, एवं जल के स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में कार्य करें। राज्य सरकार ने मिशन रिस्पना टू ऋषिपर्णा एवं कोसी के पुनर्जीवन का लक्ष्य रखा है। रिस्पना नदी के लिए आईआईटी रूड़की ने प्रोजक्ट रिपोर्ट तैयार की है। इस अभियान के तहत मिशन मोड में कार्य किया जायेगा।

भारत में जैव विविधता को बनाये रखने में उत्तराखण्ड का अहम योगदान
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि भारत में जैव विविधता को बनाये रखने में उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तराखण्ड में देश की 28 प्रतिशत जैव विविधता पायी जाती है। यहां की जैव विविधता का प्रभाव भारत ही नहीं अपितू सम्पूर्ण विश्व पर पड़ता है। प्रकृति हमें सब कुछ देती है। मानव को प्रकृति के साथ पूरा संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा। पर्यावरण संतुलन के लिए लोगों में सजगता होना बहुत जरूरी है। हम छोटे-छोटे प्रयासों से भी इस दिशा में अपना योगदान दे सकते हैं। हम भावी पीढ़ी को कैसा पर्यावरण देना चाहते हैं, यह हम पर निर्भर है।

बैठक में जानकारी दी गई कि झाझरा, देहरादून में ‘आनंद वन’ के नाम से सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रत्येक जनपद के लिए जनपद स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण मैनेजमेंट प्लान बनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम जैव विविधता है। बैठक में मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, प्रमुख सचिव वन आनन्द वर्द्धन, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस.नेगी, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, निदेशक उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एस.पी. सुबुद्धि आदि उपस्थित थे।

दानवीरों में अब चमोली की देवकी भंडारी का भी होगा जिक्रः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि चमोली जनपद की गौचर निवासिनी देवकी भंडारी ने अपने नाम को चरितार्थ किया है। उन्होंने वैश्विक संकट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पीएम केयर फंड में 10 लाख रुपए की अपनी सारी पूंजी देकर जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस भरत भूमि में दानवीर कर्ण और राजा बलि की दानवीरता की कहानियाँ हमने सिर्फ किताबों में पढ़ी थी लेकिन आज साक्षात देख भी ली है। निस्वार्थ भाव से सब कुछ त्याग और दान देने की हमारी भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करते हुए देवकी ने अकेले होकर भी पूरे भारतवर्ष को अपना परिवार समझा और हमारे सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। नारी शक्ति के रूप में हम सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। कोरोना से लड़ने के लिए ऐसा हर एक प्रयास इस जंग को मजबूत करेगा।

वहीं, एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर्स, रानीपुर, हरिद्वार के अध्यक्ष संदीप जैन ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 7,51,000 (सात लाख इक्यावन हजार) का चेक भेंट किया। इसके साथ ही, संजीवनी यूए सिविल सर्विसेज उत्तराखण्ड की अध्यक्षा निपुनिका सिंह ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में दो लाख रूपये का चेक भेंट किया।

एक दिन के वेतन का चेक सौंपा
उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक दिन के वेतन के योगदान के रूप में 25,72,548 रुपए का चेक दिया है। यह चेक वन मंत्री हरक सिंह रावत एवं प्रबंध निदेशक मोनिष मल्लिक ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा। उन्होंने पीएम केयर्स फंड के लिए भी पांच लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा।

इसी क्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख दो हजार रुपए का चेक दिया। इससे पूर्व भी उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए का चेक दिया था।

शाक्य बौद्ध समुदाय ने 23 लाख की राशि दी
शाक्य बौद्ध समुदाय ने मुख्यमंत्री राहत कोष में कुल 23 लाख रूपये की राशि दी गई है। शाक्य बौद्ध समुदाय की ओर से आध्यात्मिक नेता एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उक्त राशि के चेक भेंट किए। कुल 23 लाख रूपये की राशि में से एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य द्वारा 3 लाख रूपये, डोलमा फोड्रांग द्वारा 3 लाख रूपये, न्गोर पाल एवाम चोडान द्वारा 3 लाख रूपये, शाक्य कालेज द्वारा 3 लाख रूपये, द ग्रेट शाक्य मोनलाम फाउंडेशन द्वारा 5 लाख रूपये, शाक्य ननरी द्वारा 3 लाख रूपये और शाक्य सेंटर द्वारा 3 लाख रूपये का अंशदान किया गया है।

बर्फबारी और बारिश ने बढ़ाई परेशानी, ठंड लौटी

होली के दिन प्रदेश के कई इलाकों में चटख धूप खिली रही, लेकिन आज मौसम ने ऐसी करवट ली कि ठंड का अहसास हो गया। राजधानी देहरादून सहित मैदानी इलाकों में सुबह से बादल छाए रहे। वहीं, मंगलवार को कहीं-कहीं बारिश भी हुई है।
चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में आज तड़के बर्फबारी हुई और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, रुद्रनाथ, घांघरिया के साथ ही अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की सूचना है। फिर ठंड लौटी आई है। श्रीनगर क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं। यहां तेज हवांए चल रही हैं।
नैनीताल हल्के बादल छाए हैं। पिथौरागढ़ में हल्के बादलों के साथ धूप खिली है। पंतनगर में बादलों के साथ सूरज की आंख मिचैली जारी हैं।

बारिश और ठंड से परेशान हो रहे लोग
अभी बारिश और ठंड लोगों को और सता सकती है। आईआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार हरिद्वार जिले में 12 से 14 मार्च के बीच ओलावृष्टि और गरज के साथ कुल 47 मिमी बरसात होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान आठ से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। आईआईटी के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 80-90 प्रतिशत और न्यूनतम सापेक्षिक आर्द्रता 40 से 50 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।

ओलावृष्टि और गरज के साथ बारिश की संभावना
11 मार्च को उत्तर-पश्चिम तथा 12-14 मार्च को दक्षिण-पूर्व दिशा से छह से 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। वहीं पौड़ी गढ़वाल जनपद में 12-14 मार्च के बीच कुल 38 मिमी बरसात होने की संभावना है। देहरादून जनपद में 12-14 मार्च के बीच ओलावृष्टि और गरज के साथ कुल 60 मिमी बरसात होने की संभावना है। उन्होंने सलाह दी है कि किसान 14 मार्च तक सिंचाई, कीटनाशकों के छिड़काव तथा उर्वरकों के उपयोग को रोक दें।
निचले, गहरे स्तर के खेतों से पानी की अत्यधिक मात्रा को निकालने के लिए जल निकास की उचित व्यवस्था करें। साथ ही दुधारू पशुओं को संतुलित आहार दें। ओलावृष्टि व बरसात के पूर्वानुमान को देखते हुए पशुधन को खुले में न छोड़ें।

उत्तराखंड में जश्न का माहौल, मुख्यमंत्री के कार्यो की हो रही प्रशंसा

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री ने एक ओर मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को धराशायी कर दिया। सरकार ने सत्र को आगे बढ़ाते हुए भराड़ीसैंण में 26 मार्च को बजट पास करवाने का निर्णय लिया है।
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सात मार्च तक सदन को जारी रखने का फैसला लिया गया, लेकिन इस दौरान बजट पर सामान्य चर्चा सात मार्च को ही होगी। बजट पास कराने के लिए इसी सत्र में सदन 25 से 27 मार्च तक भराड़ीसैंण में ही चलेगा। 25 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होगी। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव इसी दिन स्वीकार किए जाएंगे। 26 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होने के बाद उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।
इससे पहले कार्यमंत्रणा समिति ने सात मार्च तक बजट पारित करने का फैसला किया था। इस पर विपक्ष ने खासा हो हल्ला मचाया था और बजट सत्र बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इस पर भी विचार हुआ कि होली के बाद दो दिन का सत्र देहरादून में आयोजित कर लिया जाए। लेकिन इसमें तकनीकी अड़चन रही। सरकार बजट पास कराए बिना सत्र को समाप्त नहीं कर सकती थी। देहरादून में बजट पास कराने का मतलब होता कि सरकार को भराड़ीसैंण का सत्र समाप्त करना पड़ता और देहरादून में अलग से सत्र आयोजित करना पड़ता। कार्य संचालन नियमावली में स्थान और समय दोनों को लेकर सत्र की घोषणा की व्यवस्था है।

भराड़ीसैंण में जश्न का माहौल
मौसम की आंखमिचैली के बीच सरकार पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न हावी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल समेत भाजपा विधायकों ने जमकर गुलाल खेला। ढोल व दमाऊ की थाप पर जमकर नाच किया। इस दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वहीं, गैरसैंण के आसपास की महिलाओं ने झोड़ा चांचरी नृत्य से अपनी खुशी का इजहार किया। तो विधायकों ने स्थानीय लोगों के साथ ढोल की थाप पर पांव थिरकाए। इन सब से दूर रहे विपक्ष ने सदन में प्रश्न काल नहीं चलने दिया और सरकार को नियमों व परंपराओं में बांधे रखने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार देर शाम ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की थी, जिसका असर पूरे उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। आंदोलनकारियों की गैर मौजूदगी में जगह-जगह चेकिंग से भी लोगों को रियायत मिली। भराड़ीसैंण के विधानमंडल भवन के सामने ढोल दमाऊ की थाप के बीच जश्न का माहौल बन गया। गैरसैंण के आसपास गांव गवाड़ तल्ला, सिलंगी, सिमटी समेत अन्य गांवों से आई महिलाएं जश्न में शामिल हुई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां पहुंचे तो जोश और उत्साह बढ़ गया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री व भाजपा विधायकों का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी इसी तरह स्वागत हुआ। उत्साह का आलम ये रहा कि नेता फूल मालाओं से लदे सदन में पहुंच गए।
इसके उलट विपक्ष खामोश, जश्न से दूर रहते हुए बैकफुट पर दिखाई दिया।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपा कर किया सम्मान
सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत सदन में पहुंचे तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपा कर उनका सम्मान किया। सामान्य रूप से नेता सदन के पहुंचने को सत्ता पक्ष के विधायक खामोशी से स्वीकार करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कुछ समय तक ही सदन में रहे।

जनभावनाओं का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान, गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित

उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा की। लंबे समय से चले आ रहे कयासों के बीच मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में अब दो राजधानियां हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री के इस कार्ड की भनक सरकार ने भराड़ीसैंण में पहुंचे विपक्ष को और अन्य आंदोलनकारी संगठनों तक को नहीं लगने दी। बीते दिनों ही कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन मंत्रियों को साफ हिदायत दे दी गई थी कि किसी को इसकी भनक नहीं लगने दी जाए। सदन में घोषणा होने के साथ ही गैरसैंण में जश्न का माहौल शुरू हो गया। सत्ता पक्ष के विधायक लोगों से फूल मालाएं स्वीकार करते हुए दिखाई दिए।
वहीं, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का भाजपा का यह चुनावी संकल्प था। उसने चुनाव संकल्प पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया था। आम तौर पर सत्तारूढ़ दल के लिए चैथा साल चुनावी घोषणाओं को पूरा करने का साल होता है। प्रदेश में भाजपा सरकार तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले ही सरकार ने यह एतिहासिक फैसला लिया है।
उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही हैं। राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को जनाकांक्षाओं की राजधानी का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारें गैरसैंण को खारिज नहीं कर पाई।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जब गैरसैंण में विधानमंडल भवन बनाया तब उन पर भी राजधानी घोषित करने का दबाव बना था। लेकिन उन्होंने घोषणा नहीं की। राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा एक वर्ग गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की वकालत करता है।

प्रदेश की 70 फीसदी जनता गैरसैंण में स्थायी राजधानी चाहती है। राज्य गठन से पहले यूपी की मुलायम सरकार की गठित कौशिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था। वही उक्रांद ने 27 साल पहले गैरसैंण में राजधानी का शिलान्यास किया था।
बजट सत्र शुरू होने से पहले ही बदरीनाथ और कर्णप्रयाग के विधायकों ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था कि पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में इस संकल्प को शामिल किया है। सरकार गठन के तीन साल हो चुके हैं। अब घोषणा का समय आ गया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को आज पूरा कर दिया गया है। समय के साथ गैरसैंण में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और ये राजधानी के रूप में विकसित होगी।
बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन का आभारी हूं कि उन्होंने पहाड़ की जनाकांक्षाओं के प्रतीक गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है। इससे पहाड़ के विकास को मजबूती मिलेगी।
उधर, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने पर भाजपाइयों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। बुधवार को भाजपा महानगर कार्यालय में मेयर सुनील उनियाल गामा, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी समेत पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि सरकार का निर्णय बेहद सराहनीय है। सरकार का यह निर्णय शहीद आंदोलनकारियों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। भाजपा ने इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल किया था। जिसे आज पूरा कर लिया है।