वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उपराष्ट्रपति जी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वाेच्च स्थान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन स्पथ्म्’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें।

दूनः समाधान दिवस में 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त, डीएम ने दिए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश

आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में जन समाधान दिवस आयोजित किया गया। जन समाधान दिवस में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं एवं शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। इस दौरान 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। जिनमें कई शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता एवं संवेदनशीलता के साथ करना सुनिश्चित करें तथा शिकायतकर्ता को भी कार्रवाई से अवगत कराया जाए।

शिकायतकर्ता प्रस्तुत शिकायत में तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पापड़ियांन में ग्राम प्रधान द्वारा वर्ष 2023 से 2026 तक आपदा के अंतर्गत किए गए कार्यों में कथित फर्जीवाड़े एवं अनियमितता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जिला विकास अधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को संयुक्त रूप से प्रकरण की जांच करते हुए 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि उपलब्ध अभिलेखों, कराए गए कार्यों एवं संबंधित मद में हुए व्यय का परीक्षण करते हुए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता मोहम्मद शाहिद राव, खुर्शीदा बेगम एवं इकराम, मिहूवाला निवासी द्वारा अपनी पैतृक भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा मारपीट कर कब्जा करने का प्रयास किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की गई। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रकरण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शिकायतकर्ता की शिकायत पर तथ्यात्मक जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

ग्राम झीवरहेड़ी, विकासनगर क्षेत्र में आबादी के बीच अवैध रूप से हैवी वेल्डिंग मशीनें लगाकर फैक्ट्री संचालित किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी विकासनगर एवं महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) को संबंधित फैक्ट्री को तत्काल सील करने के निर्देश दिए। प्रकरण में जिला उद्योग केंद्र द्वारा पूर्व में किए गए निरीक्षण में पाया गया था कि संबंधित स्थल औद्योगिक उपयोग के लिए वर्गीकृत नहीं है। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अग्निशमन विभाग की आवश्यक एनओसी भी प्राप्त नहीं की गई थी। जिलाधिकारी ने इस स्थिति के बावजूद फैक्ट्री संचालन तथा सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिकायतकर्ता सूर्य प्रकाश द्वारा दोनों पैरों में कृत्रिम अंग लगवाने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्तुत शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई करते हुए 15 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए।

नगर निगम एवं ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार सदर को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। शिकायत में चार मंजिला मकान के निर्माण का भी आरोप लगाया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मौके का स्थलीय निरीक्षण करते हुए भूमि एवं निर्माण से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए तथा यदि अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

विशेष बच्चे प्रिंस अग्रवाल के लतिका राय फांउडेशन में प्रवेश के संबंध में प्राप्त शिकायत का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। शिकायतकर्ता बच्चे के पिता एवं एकमात्र अभिभावक द्वारा बताया गया कि फाउंडेशन में प्री-एडमिशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण किए जाने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई तथा बार-बार अनुरोध के बाद भी उचित समाधान नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करते हुए बच्चे के हित में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया। जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को संयुक्त रूप से मामले की जांच कर 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डीएम ने प्रकरण के सभी तथ्यों की निष्पक्षता से जांच की जाए तथा बच्चे के हित एवं उसके सर्वांगीण विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों को केवल औपचारिक रूप से निस्तारित न किया जाए, बल्कि शिकायत की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समयबद्ध निस्तारण, पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर विशेष जोर दिया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स देहरादून में सीएम धामी ने एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी का शुभारंभ किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, देहरादून में आयोजित एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने आए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों का देवभूमि उत्तराखंड में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा सभी खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लिए यह गौरव का विषय है कि प्रदेश को एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से उत्तराखंड की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीतकालीन एवं आइस स्पोर्ट्स के लिए एक अनुकूल गंतव्य के रूप में और मजबूत होगी। खेल दुनिया को जोड़ने का माध्यम हैं और ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन विभिन्न देशों के बीच मित्रता, सद्भाव और खेल भावना को मजबूत करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए जीत और हार खेल के दो पहलू हैं, लेकिन वास्तविक सफलता खेल भावना, अनुशासन, समर्पण और कभी हार न मानने वाली दृढ़ इच्छाशक्ति में निहित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के साथ खेल भावना की भी मिसाल पेश करेंगे और यहां से शानदार अनुभव एवं मधुर स्मृतियां लेकर लौटेंगे।

मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों, प्रशिक्षकों, तकनीकी अधिकारियों और सहयोगियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन प्रदेश के युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने के साथ ही उत्तराखंड में खेल पर्यटन की संभावनाओं को भी नई गति प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को लेकर सोच और वातावरण में व्यापक बदलाव आया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों ने देशभर में खेल संस्कृति को मजबूत किया है। आज भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक, एशियन गेम्स और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। पिछले वर्ष प्रदेश में 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल एवं भव्य आयोजन किया गया। राष्ट्रीय खेलों के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक एवं विश्वस्तरीय खेल अवस्थापना का मजबूत आधार तैयार हुआ है। इसी का परिणाम है कि उत्तराखंड अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी सक्षम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके तहत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी, जहां खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हल्द्वानी में प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी तेजी से कार्य चल रहा है, जबकि लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज प्रारंभ हो चुका है।

उन्होंने कहा कि राज्य की नई खेल नीति के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल छात्रवृत्तियों के साथ ही आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा एवं प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री खेल विकास निधि, मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना और खेल किट योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक खेलों के साथ-साथ वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स, विंटर स्पोर्ट्स और आइस स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा दे रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए पसंदीदा खेल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो।

एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2026 का आयोजन 17 से 20 अगस्त तक महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, एशियन स्केटिंग यूनियन के अध्यक्ष म्योंग ही चांग, आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष अमिताभ शर्मा, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने परेड ग्राउंड में किया ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों, वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन किया। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों, अर्धसैनिक बलों एवं पुलिस के बहादुर जवानों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राज्य आंदोलनकारियों एवं शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव सामग्री पहुंचाने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल एवं विद्युत लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, रक्षा उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप, खेल, योग एवं आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ वीरभूमि भी है। राज्य सरकार अपने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की माणा, आदि कैलाश, हर्षिल एवं मुखबा की यात्राओं तथा राष्ट्रीय खेलों में सहभागिता से उत्तराखंड को विकास, पर्यटन एवं खेल के क्षेत्र में नई दिशा मिली है। राज्य के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री ने आगामी 25 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का स्पष्ट विजन भी प्रदेशवासियों के सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में केदारनाथ की पावन धरती से प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के मंत्र को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने वर्ष 2035 तक विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल एवं रोपवे कनेक्टिविटी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न रोपवे परियोजनाओं से राज्य की कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। जमरानी, लखवाड़, किशाऊ एवं सौंग बांध परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना तीर्थ पुनर्विकास एवं शीतकालीन यात्रा जैसी पहलों से प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन एवं अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 47 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि इस वर्ष कांवड़ मेले में 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र कांवड़ लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। शीतकालीन यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ महापर्व में नया रिकॉर्ड बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अब धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां से एक अनूठा अनुभव लेकर लौटे और राज्य का ब्रांड एंबेसेडर बने। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटरों के साथ 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। होम-स्टे योजना एवं मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से भी युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं में अध्ययनरत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में 10 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा तथा इसके लिए 7 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड ने खेलों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान के अंतर्गत 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी। महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के साथ खेल विश्वविद्यालय के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, औद्यानिकी, विज्ञान एवं नवाचार तथा सुशासन के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण, कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा निःशुल्क नहर सिंचाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर एवं स्टैम लैब्स जैसी पहलें राज्य में विज्ञान एवं तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है तथा प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। पिछले पांच वर्षों में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं तथा स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1,750 हो गई है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक एवं इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। उत्तराखंड को लगातार चार वर्षों से ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का गौरव भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी मिली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत, रोजगार के साथ पलायन का समाधान, आधुनिकता के साथ संस्कृति और पहचान की मजबूती सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने की सात महत्वपूर्ण घोषणाएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी सात महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं –

’’1.’’ चमोली, पौड़ी एवं अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

’’2.’’ प्रदेश के प्रथम ‘युवा आयोग’ की स्थापना की जाएगी।

’’3.’’ सीमावर्ती ग्रामों के युवाओं, भूतपूर्व सैनिकों एवं अग्निवीरों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा।

’’4.’’ वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण की समय-सीमा का विस्तार कर भूमिधरी अधिकार दिए जाएंगे।

’’5.’’ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत राज्यांश 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया जाएगा।

’’6.’’ 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। आईआईटी एवं आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क उद्यमिता एवं कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण की 30 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी।

’’7.’’ प्रदेश के बहादुर बच्चों को सम्मानित करने के लिए इस वर्ष से ‘बाल वीरता पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों का विश्वास सरकार के लिए राजनीतिक समर्थन मात्र नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी।

हरिद्वार में मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को किया नमन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत विभाजन की त्रासदी में शहीद हुए लाखों भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी विस्थापन था। सदियों से साथ रहने वाले लोग रातों-रात एक-दूसरे से अलग हो गए और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दाेष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस दर्दनाक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इसका उद्देश्य उन पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी को देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से पुनः जुड़ रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी विरासत को दिव्यता और भव्यता के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव, तीन तलाक की प्रथा पर रोक, नागरिकता संशोधन कानून, वक्फ कानून में संशोधन तथा 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही राज्य की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर ब्लड कैम्प का अवलोकन किया तथा रक्तदान करने वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तथा इस अवसर पर विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को शॉल भेट कर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 तक भारत अखंड था और मध्यरात्रि के बाद देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय एक बड़ी विडंबना यह थी कि देश का बंटवारा तो हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी अंग्रेज अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को सौंपी गई, जिन्हें भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने भारत को पहले समझा तक नहीं था, उसे इतने बड़े और संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपना विभाजन की प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं प्रदीप बत्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मेयर हरिद्वार किरण जैसल, नगर पालिका अध्यक्ष शिवालिक नगर राजीव शर्मा, विधायक आदेश चौहान, सविता कपूर, प्रदेश अध्यक्ष उत्तरांचल पंजाबी महासभा करण मल्होत्रा, प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला, जिला अध्यक्ष प्रमोद पांधी, जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राज ओबराय, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा, जिला महामंत्री प्रदीप कालरा राम अरोड़ा, राज्य मंत्री विश्वास डाबर सहित विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के लोग मौजूद रहे।

भाऊवाला से लौटते समय नंदा की चौकी पहुंचे सीएम धमाी, एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का लिया जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम से वापस लौटते समय प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कार्यस्थल पर पहुंचकर पुनर्निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

उल्लेखनीय है कि नंदा की चौकी पुल का एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को तत्काल राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशन में युद्धस्तर पर कार्य करते हुए एप्रोच रोड का पुनर्निर्माण मात्र 12 घंटे के भीतर पूर्ण कर लिया गया, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था शीघ्र सामान्य हो सकी और आमजन को होने वाली असुविधा से राहत मिली।

मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य में सलंग्न अधिकारियों, अभियंताओं एवं कार्मिकों के त्वरित एवं समर्पित प्रयासों की सराहना भी की।

सीएम धामी बोले, आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखण्ड एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लेट, सेट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र व छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

विकसित उत्तराखंड विजन को लेकर दून में हुई उच्च स्तरीय बैठक

आज Civil Services Institute, राजपुर रोड देहरादन में “Viksit Uttarakhand Vision 2047” पर गहन चर्चा हेतु High Level Brainstorming बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक का शुभारंभ करते हुए आर. के सुधांशु, प्रमुख सचिव वन द्वारा बताया गया कि विकसित उत्तराखण्ड विजन 2047 लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में जनपदों के लिए भी जनपद स्तरीय विजन 2047 कार्ययोजना बनायी जायेंगी जिन्हें दिसम्बर 2026 तक तैयार कर लिया जायेगा।

बैठक में विजन 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु विभागीय समन्वयन के साथ ही राज्य में उपलब्ध संसाधनों के ईष्टम प्रयोग किये जाने पर बल दिया गया। राज्य के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवरों उद्यानकी, पर्यटन, सूक्ष्म तथा लघु उद्योंगो को बढ़ावा देने वाली रणनीतियों पर चर्चा की गयी।

राज्य में समावेशी विकास सुनिश्चित करने तथा महिला सशक्तिकरण हेतु कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने हेतु बालिकाओं में शुरूवात से ही STEM शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया जाय।

चिन्हित समस्त संकेतकों के प्रभावी अनुश्रवण हेतु गुणवत्तायुक्त डाटा सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक स्तर पर डाटा ईकोसिस्टम के सुदृढ़ीकरण हेतु केन्द्रीयकृत डाटा सिस्टम बनाये जाने की आवश्यकता है।

उक्त कार्यशाला में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री रमेश कुमार सुधांशु, प्रमुख सचिव, नियोजन आर. मीनाक्षी सुन्दरम् तथा समस्त सविच व अपर सचिव, मण्डलायुक्त सहित समस्त जिलाधिकारी तथा सेतु आयोग व सी.पी.पी.जी.जी. के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं एवं आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाने हेतु जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल की अध्यक्षता में ऋषिकेश क्षेत्र के समस्त पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं एलपीजी की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी गैस एजेंसियों को घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने तथा उपभोक्ताओं को समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा अवधि के दौरान रविवार को भी सभी गैस एजेंसियां अनिवार्य रूप से खुली रहेंगी, ताकि श्रद्धालुओं एवं स्थानीय उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशित किया गया कि गैस वितरण में प्रयुक्त सभी लोडर वाहनों पर एजेंसी की स्पष्ट फ्लैक्सी/बैनर लगाए जाएं। प्रत्येक वाहन में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) एवं तौलने का कांटा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। साथ ही सभी डिलीवरी कर्मियों के पास ड्रेस एवं पहचान पत्र (आईडी कार्ड) होना भी सुनिश्चित किया जाए।

जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा की संपूर्ण अवधि में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें तथा सभी पेट्रोल पंप 24×7 (दिन-रात) संचालित किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं, आपातकालीन सेवाओं एवं आम नागरिकों को निर्बाध ईंधन उपलब्ध हो सके।

बैठक के दौरान पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी संचालकों ने जिला पूर्ति अधिकारी के समक्ष सुझाव रखा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं गैस के टैंकरों के निर्बाध आवागमन के लिए प्रतिदिन रात्रि 10 बजे से प्रातः 05 बजे तक मार्ग को खुला रखा जाए, जिससे आवश्यक आपूर्ति समय पर विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाई जा सके।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा आवश्यक सेवाओं को निर्बाध रूप से ईंधन एवं रसोई गैस उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। बैठक में वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली, संजीव कुमार गोयल, अनिरुद्ध गोयल, अशोक जैन, सुनील अग्रवाल, नवनीत नागलिया, दिवंबर प्रसाद लखेड़ा, मुकुल दलाल, कमल सिंह सहित क्षेत्र के अनेक प्रमुख व्यवसायी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने किया वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए जनभागीदारी, जन-जागरूकता तथा प्रत्येक नागरिक के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर उत्तराखंड को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने के संकल्प को साकार करना होगा।

मुख्यमंत्री ने विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जाखन स्थित एक होटल में आयोजित ष्एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तनष् विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कदम उठाने तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस के अवसर पर इस विषय पर आयोजित कार्यशाला अत्यंत सार्थक है। यह आयोजन केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है। यदि हमारे जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो बाघ सुरक्षित रहेंगे और प्रकृति का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के वन क्षेत्र इस विरासत के सशक्त प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, नदियों, मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। वन क्षेत्रों में छोड़ा गया प्लास्टिक अनेक बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध प्रभावी और निर्णायक अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ माँ के नाम, नमामि गंगे तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान, निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्रवाई कर रही है। चारधाम यात्रा मार्गों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से कपड़े के थैले, जूट तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक अथवा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ने की अपील की। उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने तथा युवाओं से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा राज्य को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं विषय विशेषज्ञ मौजूद थे।