सीएम धामी बोले, आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखण्ड एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लेट, सेट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र व छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

विकसित उत्तराखंड विजन को लेकर दून में हुई उच्च स्तरीय बैठक

आज Civil Services Institute, राजपुर रोड देहरादन में “Viksit Uttarakhand Vision 2047” पर गहन चर्चा हेतु High Level Brainstorming बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक का शुभारंभ करते हुए आर. के सुधांशु, प्रमुख सचिव वन द्वारा बताया गया कि विकसित उत्तराखण्ड विजन 2047 लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में जनपदों के लिए भी जनपद स्तरीय विजन 2047 कार्ययोजना बनायी जायेंगी जिन्हें दिसम्बर 2026 तक तैयार कर लिया जायेगा।

बैठक में विजन 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु विभागीय समन्वयन के साथ ही राज्य में उपलब्ध संसाधनों के ईष्टम प्रयोग किये जाने पर बल दिया गया। राज्य के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवरों उद्यानकी, पर्यटन, सूक्ष्म तथा लघु उद्योंगो को बढ़ावा देने वाली रणनीतियों पर चर्चा की गयी।

राज्य में समावेशी विकास सुनिश्चित करने तथा महिला सशक्तिकरण हेतु कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने हेतु बालिकाओं में शुरूवात से ही STEM शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया जाय।

चिन्हित समस्त संकेतकों के प्रभावी अनुश्रवण हेतु गुणवत्तायुक्त डाटा सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक स्तर पर डाटा ईकोसिस्टम के सुदृढ़ीकरण हेतु केन्द्रीयकृत डाटा सिस्टम बनाये जाने की आवश्यकता है।

उक्त कार्यशाला में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री रमेश कुमार सुधांशु, प्रमुख सचिव, नियोजन आर. मीनाक्षी सुन्दरम् तथा समस्त सविच व अपर सचिव, मण्डलायुक्त सहित समस्त जिलाधिकारी तथा सेतु आयोग व सी.पी.पी.जी.जी. के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं एवं आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाने हेतु जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल की अध्यक्षता में ऋषिकेश क्षेत्र के समस्त पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं एलपीजी की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी गैस एजेंसियों को घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने तथा उपभोक्ताओं को समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा अवधि के दौरान रविवार को भी सभी गैस एजेंसियां अनिवार्य रूप से खुली रहेंगी, ताकि श्रद्धालुओं एवं स्थानीय उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशित किया गया कि गैस वितरण में प्रयुक्त सभी लोडर वाहनों पर एजेंसी की स्पष्ट फ्लैक्सी/बैनर लगाए जाएं। प्रत्येक वाहन में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) एवं तौलने का कांटा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। साथ ही सभी डिलीवरी कर्मियों के पास ड्रेस एवं पहचान पत्र (आईडी कार्ड) होना भी सुनिश्चित किया जाए।

जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा की संपूर्ण अवधि में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें तथा सभी पेट्रोल पंप 24×7 (दिन-रात) संचालित किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं, आपातकालीन सेवाओं एवं आम नागरिकों को निर्बाध ईंधन उपलब्ध हो सके।

बैठक के दौरान पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी संचालकों ने जिला पूर्ति अधिकारी के समक्ष सुझाव रखा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं गैस के टैंकरों के निर्बाध आवागमन के लिए प्रतिदिन रात्रि 10 बजे से प्रातः 05 बजे तक मार्ग को खुला रखा जाए, जिससे आवश्यक आपूर्ति समय पर विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाई जा सके।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा आवश्यक सेवाओं को निर्बाध रूप से ईंधन एवं रसोई गैस उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। बैठक में वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली, संजीव कुमार गोयल, अनिरुद्ध गोयल, अशोक जैन, सुनील अग्रवाल, नवनीत नागलिया, दिवंबर प्रसाद लखेड़ा, मुकुल दलाल, कमल सिंह सहित क्षेत्र के अनेक प्रमुख व्यवसायी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने किया वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए जनभागीदारी, जन-जागरूकता तथा प्रत्येक नागरिक के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर उत्तराखंड को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने के संकल्प को साकार करना होगा।

मुख्यमंत्री ने विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जाखन स्थित एक होटल में आयोजित ष्एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तनष् विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कदम उठाने तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस के अवसर पर इस विषय पर आयोजित कार्यशाला अत्यंत सार्थक है। यह आयोजन केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है। यदि हमारे जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो बाघ सुरक्षित रहेंगे और प्रकृति का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के वन क्षेत्र इस विरासत के सशक्त प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, नदियों, मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। वन क्षेत्रों में छोड़ा गया प्लास्टिक अनेक बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध प्रभावी और निर्णायक अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ माँ के नाम, नमामि गंगे तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान, निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्रवाई कर रही है। चारधाम यात्रा मार्गों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से कपड़े के थैले, जूट तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक अथवा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ने की अपील की। उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने तथा युवाओं से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा राज्य को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं विषय विशेषज्ञ मौजूद थे।

धामी सरकार की त्वरित कार्रवाई, नंदा की चौकी में मात्र 12 घंटे के भीतर बहाल हुआ आवागमन

देहरादून। भारी वर्षा के चलते आज प्रातः लगभग 6ः30 बजे नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड का एक छोटा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल अधिकारियों को मौके पर राहत एवं मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए लगातार अभियान चलाया और मात्र 12 घंटे के भीतर क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत कर मार्ग को पुनः सुचारु रूप से आवागमन के लिए खोल दिया। मार्ग खुलते ही स्थानीय लोगों को राहत मिली तथा आवश्यक सेवाओं का संचालन भी सामान्य हो गया। एक एम्बुलेंस भी बिना किसी बाधा के मरीज को अस्पताल पहुंचाने में सफल रही।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि आपदा की स्थिति में राहत एवं पुनर्स्थापन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुल, एप्रोच रोड एवं संबंधित निर्माण कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार से स्पष्टीकरण तलब करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तेजी से सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाया और मात्र 12 घंटे में मार्ग को पुनः चालू कराया, उससे लोगों को बड़ी राहत मिली। नागरिकों ने इसे संवेदनशील, जवाबदेह और त्वरित निर्णय लेने वाली सरकार का उदाहरण बताया।

धामी सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और जनहित सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा आपदा की हर स्थिति में सरकार पूरी तत्परता के साथ जनता के साथ खड़ी है।

राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति 2024 लागू की हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में 06 प्राथमिक लाभार्थी वाहन स्वामियों को पूंजीगत अनुदान एवं प्रोत्साहन राशि के सब्सिडी चेक प्रदान किए। 05 अन्य लाभार्थियों की सब्सिडी एवं स्वीकृति प्रक्रिया भी परिवहन विभाग द्वारा पूर्ण की जा चुकी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वच्छ ईंधन आधारित 11 वाहनों का फ्लैग ऑफ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड को स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने के राज्य सरकार के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, डीजल चालित वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी तथा पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे समय में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत हरित ऊर्जा एवं सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य, लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट अभियान, पीएम ई-बस सेवा तथा सौर एवं अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार जैसे अनेक प्रयास पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय की गोद में बसी देवभूमि है, जहां से गंगा एवं यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियों का उद्गम होता है। प्रदेश की जैव विविधता, वन संपदा, नदियां एवं पर्वतीय प्राकृतिक धरोहरें पूरे देश की अमूल्य विरासत हैं। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि के पर्यावरण एवं प्राकृतिक संतुलन की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को गति दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाना, पुराने डीजल चालित वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना तथा सीएनजी एवं अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नीति प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देहरादून, हरिद्वार एवं हल्द्वानी में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लगातार विस्तार कर रही है। साथ ही प्रदेशभर में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों के उपयोग के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रोप-वे एवं आधुनिक अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम के विकास पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनेगी तथा पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों का दबाव और प्रदूषण कम होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड को हरित विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य ने 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्रों का प्रारंभिक लक्ष्य निर्धारित समय से पूर्व प्राप्त कर लिया है तथा निर्धारित कुल लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को स्वच्छ ऊर्जा, हरित परिवहन एवं सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन वाहन स्वामियों को सब्सिडी चेक प्रदान किए गए हैं, वे केवल इस योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड में हरित परिवहन क्रांति के अग्रदूत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके इस प्रयास से अन्य वाहन संचालक भी स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी के बिना कोई भी परिवर्तन स्थायी नहीं हो सकता, इसलिए प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ परिवहन के इस अभियान में सहभागी बनना होगा।

इस अवसर पर परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सचिव परिवहन रविनाथ रमन, परिवहन विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्मारक पर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता, अटूट मनोबल और सर्वाेच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया तथा विश्व के समक्ष भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की समृद्ध विरासत तथा यहां के युवाओं का राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सुरक्षा नीति अधिक सशक्त, निर्णायक और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हुई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत संरचना का तीव्र विकास तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयास नए भारत की शक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा सैनिक कल्याण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णयों से देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। इसके साथ ही सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति क्रय पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी अनेक जनकल्याणकारी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के जिला अदालतों में भूमि धोखाधड़ी के जो मामले पेंडिंग हैं, उनके शीघ्र निस्तारण के प्रयास किये जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के श्पांचवें धामश् के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से निर्मित यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा-स्थल बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला श्अग्निवीर रोजगार सेलश् गठित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग तथा अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कारगिल के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित भारत तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में वृद्धि की है तथा अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सचिव सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), जिला अधिकारी डॉ .आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन उपस्थित थे।

नकल माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई, यूटीयू परीक्षा का पेपर आउट करने वाला सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

उत्तराखंड में भर्ती एवं शैक्षणिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए चल रहे अभियान के तहत दून पुलिस ने नकल माफियाओं के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

कोतवाली प्रेमनगर में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित यूटीयू की सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले आरोपी सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रश्नपत्र का मिलान करने पर साझा किए गए प्रश्नों में काफी समानता पाई गई। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने भी अपनी जांच में पाया कि परीक्षा से पूर्व छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप एवं अन्य माध्यमों पर समान प्रश्न साझा किए गए थे।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य संकलित किए और आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया। मामले में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है तथा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की परीक्षाएं, किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लागू सख्त नकलरोधी कानून और लगातार की जा रही कार्रवाई के परिणामस्वरूप विभिन्न मामलों में अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं एवं उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है और इस दिशा में अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।

हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में शाइन अवी लर्निंग समावेशी शिक्षा मिशन-2030 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा शाइन अवी लर्निंग की पहल, शिक्षा को और अधिक सरल, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा केंद्र एवं राज्य सरकार ने हमेशा शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की है। जिसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाने के साथ समझने, सोचने, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने योग्य बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, पीएम श्री विद्यालय, अटल उत्कृष्ट विद्यालय, डिजिटल शिक्षण सामग्री और विज्ञान एवं नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाने के लिए सरकार विद्यालयों में रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय, अनुकूलित फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न स्तरों पर विद्यालयों में पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा संचालित 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा प्रारम्भिक एवं माध्यमिक स्तर पर 300 से अधिक विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है और शेष रिक्त पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें राज्य का प्रत्येक बच्चा, अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सके और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सके। हमें अपने बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षाविद अनीता शर्मा और शाइन अवी लर्निंग की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अनीता ने विदेश से रिवर्स पलायन कर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार किया है। उन्होंने कहा यह कदम अन्य प्रवासियों के लिए भी एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सालों में कई प्रवासियों ने अपने गांव घर लौटकर काम करने की इच्छा जताई है और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने हम सब ने अपनी विरासत को संरक्षित करना है और अपनी सभ्यता को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य, पूरे भारत के लोगों को आत्मसात करता है। हमारे राज्य के लोग व्यक्ति की सोच और उसके कामों को देखते है। तमाम चुनौतियों के बाद भी राज्य, निरंतर विकास के पथ पर आगे चला है। उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सरकार को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा हमारा राज्य पूरे देश के लिए कई मामलों में उदाहरण बन कर रहा है। राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू हुआ। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड में प्रथम स्थान हासिल किया। साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, जैसे कड़े फैसले भी राज्य सरकार ने लिए हैं।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, अनीता शर्मा, रमेश भट्ट, सुधीर नौटियाल, पीसी नैनवाल, मनोज पंत, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

जलभराव, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को सभी विभागों को प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान ने मानसून अवधि में संभावित आपदाओं, डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम, जलभराव की समस्या तथा स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल बैठक कर व्यापक समीक्षा की।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में सभी विभाग अलर्ट मोड पर कार्य करें तथा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करते हुए समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग समन्वय के साथ पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनपद के नदी किनारे स्थित लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी मशीनें पूर्व से ही तैनात रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के साथ एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्वतीय, दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में संभावित आपदा की त्वरित सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, जलभराव निस्तारण, डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता अभियान को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाए, ताकि जनपदवासियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया, जलभराव तथा संभावित आपदा की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्य करें तथा और अधिक फागिंग मशीन क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान में तेजी लाई जाए। प्रत्येक घर में संभावित डेंगू लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाए। संदिग्ध मामलों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम एवं नगर निकायों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया जाए कि विद्यालय परिसर डेंगू की दृष्टि से सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी अथवा मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि छात्र-छात्राएं पूर्ण बाजू (फुल स्लीव) की वर्दी अथवा वस्त्र पहनकर विद्यालय आएं, जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संबंध में निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध एपिडेमिक एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विद्यालयों एवं कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग एवं डेंगू निरोधक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जनपद में कूड़ा उठान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए बने गार्बेज प्वाइंटों का चिन्हीकरण कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगर निगम एवं नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में कूड़े के ढेर अथवा नए गार्बेज प्वाइंट पाए जाते हैं तो संबंधित उप जिलाधिकारी एवं नगर निकाय के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के के मिश्रा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार, सिंचाई विभाग लोक निर्माण के विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे तथा समस्त उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय एवं समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।