डीएम दून का नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत यातायात सुधार पर विशेष फोकस

मोबिलिटी प्लान के अंतर्गत देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने तथा पार्किंग की समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार, पार्किंग स्थलों के बेहतर उपयोग, लंबित निर्माण कार्यों की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देहरादून शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए आवश्यकतानुसार सड़कों, चौराहों एवं जंक्शनों के सुधारीकरण हेतु माइक्रो लेवल प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा योजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारें।

बैठक में आढ़त बाजार क्षेत्र में यातायात सुधार एवं व्यवस्थाओं, जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों की प्रगति, पार्किंग उपयोगिता की मॉनिटरिंग व्यवस्था, इंदिरा मार्केट पुनर्विकास कार्य, मंडी शिफ्टिंग, परेड ग्राउंड पार्किंग, रामराय पार्किंग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने आढ़त बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर के प्रमुख चौराहों के सुधारीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करते हुए कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराया जाए, जिससे यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।

बैठक में इंदिरा मार्केट में निर्माणाधीन मल्टीलेवल कार पार्किंग की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि यहां लगभग 1050 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग विकसित की जा रही है। जिलाधिकारी ने कार्य की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए एमडीडीए के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित कार्यदायी संस्था/फर्म के साथ बैठक कर प्रगति की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की जाए तथा निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि पार्किंग स्थलों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि शहर में अनावश्यक जाम की स्थिति को कम किया जा सके और आमजन को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक यातायात एवं नगर निगम को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यातायात प्रबंधन के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण, बेहतर पार्किंग व्यवस्था एवं सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

जिलाधिकारी ने मंडी शिफ्टिंग, आढ़त बाजार सड़क सुधार, परेड ग्राउंड एवं रामराय पार्किंग सहित अन्य विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक, व्यवस्थित एवं जनसुविधा केंद्रित बनाने के लिए सभी विभागों को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के मिश्रा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, एमडीडीए, नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएस बर्द्धन ने परेड ग्राउंड में अंडरग्राउंड पार्किंग और सचिवालय अंडरग्राउंड पार्किंग के सम्बन्ध में बैठक ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में परेड ग्राउंड में अंडरग्राउंड पार्किंग और सचिवालय अंडरग्राउंड पार्किंग के सम्बन्ध में बैठक ली। इस अवसर पर मुख्य सचिव द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रम में सचिव पीडब्ल्यूडी डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने परेड ग्राउंड के नीचे अंडरग्राउंड पार्किंग के डिज़ाइन पर प्रस्तुतिकरण दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि परेड ग्राउंड में अंडरग्राउंड पार्किंग तैयार करने के साथ ही परेड ग्राउंड और गांधी पार्क को जोड़ते हुए और बिना कोई नया पक्का कंस्ट्रक्शन करते हुए ओपन स्पेस पार्क तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि पार्किंग स्पेस बढ़ाए जाने के लिए डबल बेसमेंट तैयार किया जा सकता है। पार्किंग एरिया से एंट्री और एग्जिट पॉइंट ज़्यादा से ज़्यादा स्थानों पर दिए जाएं, ताकि पार्किंग करने वाले लोगों को गाड़ी पार्क करने के बाद अपने गंतव्य की दिशा में जाने में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो। कहा कि अधिक एंट्री और एग्जिट सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहतर रहेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहर की आवश्यकता को देखते हुए परेड ग्राउंड और गांधी पार्क को मर्ज़ करते हुए एक बड़ा ओपन स्पेस ग्रीन पार्क के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए स्टैक होल्डर्स कंसल्टेशन्स भी अनिवार्य रूप से कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इसे एक कम्पलीट पैकेज के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान सचिवालय परिसर के अंदर अंडर ग्राउंड पार्किंग के डिज़ाइन पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून शहर के लिए भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए पार्किंग क्षमता विकसित की जाए। राजपुर रोड पर एलिवेटेड पार्किंग के सुझाव पर मुख्य सचिव ने डिजाइन तैयार पर प्रस्तुतिकरण दिये जाने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी एवं सीडीओ देहरादून अभिनव शाह सहित सम्बन्धित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मानसून को लेकर दून डीएम सख्त, जलभराव, जर्जर भवन, गड्ढों, विद्युत सुरक्षा एवं डेंगू नियंत्रण पर दिए कड़े निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में आगामी मानसून के दृष्टिगत शहर क्षेत्र में आवश्यक व्यवस्थाओं, सड़क सुरक्षा, जल निकासी, विद्युत व्यवस्था एवं जनसुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को मानसून अवधि में सतर्कता बरतते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने रिस्पना एवं बिंदाल नदी किनारे निवासरत लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था एवं मानसून के दृष्टिगत नालियों/नालों की सफाई कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी प्रमुख नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर पूर्व में ही आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभगा के अधिकारियों को शहर में नहर एवं अण्डरग्राउंड नहर के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने शहर क्षेत्र में रोड कटिंग के उपरांत सड़क रिस्टोरेशन कार्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए सड़क कटिंग के बाद तत्काल मरम्मत कार्य पूर्ण करें, ताकि आमजन को आवागमन में असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने मानसून के दौरान सड़कों पर उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं के समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान खोदी गई सड़कों को पुर्नस्थापित करने के निर्देश साथ ही चेतावनी दी तथा सदस्य सचिव सड़क सुरक्षा समिति अधीक्षण अभियंता लोनिवि, नगर निगम, यूयूएसडीए संचालित निर्माण कार्यों स्थलीय निरीक्षण करते हुए आख्या प्रस्तुत करने तथा सड़क को तत्काल गुड्डामुक्त करते हुए यातायात हेतु सुरक्षित करने के निर्देश दिए। साथ ही गेल द्वारा संचालित कार्यों में सुरक्षा मानकों की लापरवाही बरतने की शिकायत पर सम्बन्धित ठेकेदार के विरूद्ध अर्थदण्ड की कार्यवाही करने तथा पुनरावृत्ति होने पर ब्लैकलिस्ट की चेतावनी दी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया किया यदि सड़क पर गड्डो से यदि कोई दुर्घटना होती है अथवा जानमाल की हानि होती है तो सम्बन्धित की जिम्मेदारी तय करते हुए विधिक कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में डेंगू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग, लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान प्रभावी रूप से संचालित किए जाएं। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को जिले में अवस्थित समस्त स्कूलों में डेंगू, मलेरिया सुरक्षा के दृष्टिगत बच्चों को फूल बाजू की डेªस में आने की व्यवस्था लागू करने के साथ ही डेंगे मलेरिया से जनमानस को जागरूक करने हेतु जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मानसून सीजन के दृष्टिगत दुर्गम क्षेत्रों में हाईरिस्क प्रेगनेंसी, गर्भवती महिलाओं से दूरभाष पर वार्ता कर उनका हॉल चाल जाना तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के निरंतर मॉनिटिरिंग की जाए, निर्देशित किया कि महिलाओं को प्रसव तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही नजदीकि चिकित्सालय सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

जिलाधिकारी ने पेयजल निगम एवं जल संस्थान को पानी शुद्वता एवं खाद्य सुरक्षा विभाग को संचालित होटल रेस्टोंरेट में खाने गुणवत्ता एवं की निरंतर जांच कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने शहर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति की समीक्षा करते हुए खराब एवं बंद पड़ी लाइटों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश नगर निकाय एवं संबंधित विभागों को दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था बेहतर रहना जनसुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीएम ने नगर मजिस्टेªट एवं उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय के अधिकारी अपने क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईटों का निरीक्षण करते हुए खराब स्ट्रीट लाईट ठीक कराने तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईट नही है वहां स्ट्रीट लाईट लगवाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी स्वयं इसकी मॉनिटिरिंग कर रहे हैं। बैठक में शहर क्षेत्र में संचालित रैनबसेरों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी रैनबसेरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर आश्रय एवं अन्य सुविधाएं मिल सकें। जिलाधिकारी ने शहर में स्थित जर्जर एवं असुरक्षित भवनों के संबंध में की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे भवनों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा ऋतु में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके, नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि नगर में 23 भवन चिन्हिकरण किए गए है जिस पर जिलाधिकारी ने कहा कि मा0 न्यायालय में लम्बित वाद वालें भवनों को छोड़कर जनसुरक्षा के दृष्टिगत ऐसे शेष भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत् ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाए।

बैठक में विद्युत पोलों, आवासीय भवनों एवं वृक्षों से सटे अथवा लटकते विद्युत तारों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ढीले एवं असुरक्षित तार जनसुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यूपीसीएल के अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र चिन्हित करते हुए केबल भूमिगत कराने के कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने तथा विद्युत लाईन की स्थिति तथा मानसून के दृष्टिगत खराब विद्युत लाईन चिन्हीकरण एवं सुधारीकरण कार्य हेतु टास्कफोर्स बनाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वि/रा के.के मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 मनोज शर्मा, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओमपाल सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

ऋषिकेश में आयोजित सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में 3.5 हजार से अधिक लोगों ने उठाया जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया एवं मुख्यमंत्री को उनके कार्याकाल के सफलतम 5 साल होने पर बधाई दी।

सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में देहरादून, हरिद्वार एवं टिहरी जनपदों के विभिन्न विभागों ने समन्वित रूप से सेवाएं प्रदान कीं। इंटीग्रेटेड एफर्ट (एकीकृत प्रयास) के तहत आमजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया तथा पात्र लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर आमजन को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया गया। इससे नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक विभागों की सेवाएं प्राप्त हुईं।

कार्यक्रम में आयोजित विशाल स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गंभीर एवं पुरानी बीमारियों की 1009 मरीजों की जांच एवं उपचार किया गया। शिविर में 212 हड्डी रोगियों, 70 स्त्री रोगियों तथा 81 नेत्र, नाक एवं कान संबंधी रोगियों का परीक्षण एवं उपचार किया गया। इसके अतिरिक्त 13 बच्चों का टीकाकरण किया गया, 15 आयुष्मान कार्ड एवं 20 आभा कार्ड बनाए गए। 95 एक्स-रे एवं 70 रक्त जांचें की गईं। आयुष विभाग द्वारा 310 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क औषधियों का वितरण भी किया गया। इसके अतिरिक्त 23 लोगों के विकलांग प्रमाण पत्र ऑनलाइन पंजीकरण किए गए।

समाज कल्याण विभाग द्वारा विधवा वृद्धावस्था दिव्यांग सहित 75 लोगों की पेंशन मौके पर स्वीकृत की गई तथा 10 लोगों के यूडीआईडी कार्ड भी निर्गत किए गए। वही 280 दिव्यांगजनो को सहायक उपकरण वितरित किए गए। शिविर में कृषि, उद्यान, उद्योग, डेयरी, मत्स्य, रेशम, पशुपालन, लीड बैंक ने करीब 1200 से अधिक लाभार्थियों को विभागीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

पुरस्कार /सम्मान
राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लघु उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न विभागों की योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंजीकृत पांच स्वयं सहायता समूहों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक समूह को ₹5 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

इसके अतिरिक्त कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अल्मोड़ा, देहरादून तथा टिहरी जनपद के तीन युवाओं का जापान में रोजगार हेतु चयन होने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। चयनित युवाओं को लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के पैकेज पर रोजगार प्राप्त हुआ है, जिसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताया गया।

कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के एक, उद्यान विभाग के एक, उद्योग विभाग के तीन तथा डेयरी विभाग के एक लाभार्थी को भी अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

लाइब्रेरी चौक से लाल टिब्बा तक प्रस्तावित स्टेशनों का सचिव आवास ने किया निरीक्षण, तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की हुई समीक्षा

पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में शुक्रवार को सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन, जिला प्रशासन, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशनों, और संबंधित भूमि का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय संतुलन और यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

लाइब्रेरी चौक में रोपवे परियोजना को लेकर हुई चर्चा
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अगुवाई में अधिकारियों की टीम मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर एकत्रित हुई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों ने उन्हें प्रस्तावित रोपवे परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे का मार्ग लाइब्रेरी चौक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके मद्देनजर परियोजना से संबंधित आवश्यक भूमि और अन्य व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। सचिव आवास ने मौके पर उपलब्ध भूमि की संभावनाओं का आकलन करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान परियोजना के तकनीकी पहलुओं और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई।

रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थलों का किया निरीक्षण
इसके बाद सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने पिक्चर पैलेस (चिक चॉकलेट) तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (मॉल रोड) के निकट प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यात्रियों की आवाजाही, पहुंच मार्ग, सुरक्षा, तकनीकी व्यवहार्यता तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

भनौत एस्टेट और लाल टिब्बा क्षेत्र का भी लिया जायजा
निरीक्षण के अगले चरण में अधिकारियों ने आईएनआई डिस्पेंसरी एवं भनौत एस्टेट क्षेत्र की प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद नहाटा एस्टेट (लाल टिब्बा) में प्रस्तावित अपर रोपवे टर्मिनल स्टेशन के आसपास स्थित चार दुकानों वाले क्षेत्र का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्थल की भौगोलिक स्थिति, निर्माण की व्यवहार्यता तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई।

चार दुकान क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान पाया कि चिक चॉकलेट/चार दुकान क्षेत्र में प्रस्तावित स्टेशन के लिए उपलब्ध स्थान सीमित है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टेशन के लिए अधिक सुरक्षित एवं उपयुक्त वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए भू-तकनीकी (जियो-टेक्निकल) अध्ययन के आधार पर नया प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।

पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच रहेगा संतुलन
निरीक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि परियोजना को विकसित करते समय मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और परियोजना को पर्यटन हितैषी स्वरूप में विकसित किया जाए।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना के क्रियान्वयन से पर्यटन सीजन में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के पूरा होने से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

सचिव आवास की मौजूदगी में हुआ व्यापक निरीक्षण
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की मौजूदगी में अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण संबंधी संभावनाओं का भी आकलन किया। निरीक्षण दल में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन के प्रबंध निदेशक ब्रिजेश कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी मसूरी राहुल आनंद, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जय नंदन सिन्हा, नगर पालिका मसूरी के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन, रेंज अधिकारी महेंद्र नेगी, प्रबंधक सिविल अभिषेक त्यागी, सेक्शन इंजीनियर सौरभ पटवाल, अशोक डोभाल, वरिष्ठ सर्वेयर कुंदन सिंह अधिकारी तथा वरिष्ठ सर्वेयर हरिओम सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना पर्यटन नगरी में बढ़ते यातायात दबाव का दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि परियोजना तकनीकी रूप से मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो, ताकि स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके तथा मसूरी की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी अक्षुण्ण बनी रहे।

औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने कोरोनेशन अस्पताल के वार्डों में गंदगी देख दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40 से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।

जनपद में मानसून को लेकर अलर्ट, डीएम ने आपदा कंट्रोलरूम का निरीक्षण कर दिए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहेः डीएम दून

भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशानुसार चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत आज जिला कार्यालय स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, प्रतिनिधियों तथा सचिवों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों, बीएलओ एवं बीएलए का समन्वित सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए उत्तराखण्ड सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें प्राप्त कर डिजिटाइजेशन की कार्यवाही भी की जा रही है।

जनपद के 13,76,813 मतदाताओं में से 13,55,948 (98.48 प्रतिशत) मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। इनमें से 10,98,179 (79.76 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन भी पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 1,42,485 (10.35 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन शेष है। जनपद में वर्तमान में केवल 1,36,149 (9.89 प्रतिशत) मतदाता ऐसे हैं, जिनसे गणना प्रपत्र प्राप्त होना शेष है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त कराने एवं समयबद्ध रूप से जमा कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि जिन मतदाताओं तक किसी कारणवश गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में बीएलओ स्थानीय जांच एवं पड़ताल के आधार पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में पृथक सूची तैयार करेंगे। यह सूची पंचायत भवनों, नगर निकाय कार्यालयों एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी तथा राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सहभागिता लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने में जिला प्रशासन एवं निर्वाचन विभाग का पूर्ण सहयोग करें, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो तथा निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली, बीजेपी से अरविन्द कुमार जैन, कांग्रेस से डॉ जसविन्दर, सुनील जायसवाल व सतेन्द्र, बीएसपी से सतेन्द्र सिंह व सतेन्द्र चोपड़ा, सीपीआई (एम) से अन्नत आकाश, आप से कमल राना उपस्थित रहे।

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम ने बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित करने तथा सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह एवं किशोरी गृह का स्थलीय निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाल सुधार गृह में रह रहे बालकों से संवाद स्थापित कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जाए, जिससे बच्चों की शैक्षिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके। साथ ही उन्होंने बाल सुधार गृह में निवासरत सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थान में रह रहे प्रत्येक बालक की नियमित काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायता मिल सके। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी बल दिया।

नारी निकेतन एवं किशोरी गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में निवासरत किशोरियों एवं संवासिनियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी ने परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों एवं महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वर्तमान में नारीनिकेतन में 160 संवासनिया, बाल सुधार ग्रह में 07 किशोर, किशोरी संप्रेक्षण ग्रह में 12 किशोरिया है।

निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, सदस्य पीएन जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।