कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग की मेरी योजना पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा तैयार की गई पुस्तक ‘‘मेरी योजना’’ का विमोचन ई बुक के रूप में किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आम जनता के हित में लागू की जाने वाली विभिन्न योजनाओं को पुस्तक के माध्यम से सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। इससे जन सामान्य को जनहितकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक जनप्रतिनिधियों तथा आम जनमानस के साथ-साथ अधिकारी गणों एवं कार्मिकों के लिए भी उपयोगी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया की जानकारी, आवेदन कैसे और कहां करना है एवं योजनाओं की पात्रता/चयन प्रक्रिया क्या है तथा आवेदन हेतु किन-किन आवश्यक दस्तावेजों की आवश्यकता रहती है। इससे संबंधित जानकारी को सुलभता से समझाने की प्रक्रिया को पुस्तक के रूप में सरल भाषा में समावेश किया जाना निश्चित रूप से सभी के लिए उपयोगी रहेगा।
सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन दीपक कुमार ने बताया कि इस पुस्तक को प्रकाशित करने का मूल उद्देश्य जनसामान्य को जन कल्याणकारी, स्वरोजगार परक, रोजगारपरक, कौशल विकास, प्रशिक्षण परक एवं निवेशपरक योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराना है।
सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन ने बताया कि इस पुस्तक में लगभग 55 विभागों, संस्थाओं, संगठनों, बोर्ड, प्राधिकरण, एजेंसियों एवं आयोगों की लगभग 400 योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रमों के मूलभूत सेवाओं, प्रमाणपत्रों, पोर्टल का समावेश किया गया है। इससे राज्य सरकार के सभी विभागों द्वारा आम जनमानस के हित में संचालित की जाने वाली योजनाओं की जानकारी इस पुस्तक के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाना है।
इस अवसर पर कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

एक दिन में सर्वाधिक 18 जीआई प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला उत्तराखण्ड बना पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में जीआई प्रमाण पत्रों का वितरण किया। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसे एक दिन में सबसे अधिक 18 जीआई प्रमाण पत्र मिले हैं। अब तक उत्तराखंड के कुल 27 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। राज्य को जो 18 नये जी.आई प्रमाण पत्र मिले हैं उनमें उत्तराखण्ड चौलाई, झंगोरा, मंडुआ, लाल चावल, अल्मोड़ा लखोरी मिर्च, बेरीनाग चाय, बुरांस शरबत, रामनगर नैनीताल लीची, रामगढ़ आडू, माल्टा, पहाड़ी तोर, गहत, काला भट्ट, बिच्छूबूटी फैब्रिक, नैनीताल मोमबत्ती, कुमांऊनी रंगवाली पिछोड़ा, चमोली रम्माण मास्क तथा लिखाई वुड कार्विंग शामिल हैं। उत्तराखण्ड के नौ उत्पादों तेजपात, बासमती चावल, ऐपण आर्ट, मुनस्यारी का सफेद राजमा, रिंगाल क्राफ्ट, थुलमा, भोटिया दन, च्यूरा ऑयल तथा ताम्र उत्पाद को पहले ही जी.आई टैग प्राप्त हो चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच के कारण ही आज भारत सरकार से उत्तराखंड के 18 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक टैग युक्त प्रमाण पत्र मिल पाए हैं। जिन उत्पादों को जीआई टैग प्रमाण पत्र प्रदान किये गये, उनके उत्पादकों को भी मुख्यमंत्री ने बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक है। 2003 में जीआई कानून बनने से लेकर 2023 तक के बीस वर्षों के सफर में पहली बार एक दिन में, एक साथ किसी राज्य के 18 उत्पादों को जीआई प्रमाण पत्र निर्गत किये गए हैं। इस उपलब्धि से उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजनों के साथ ही कई अन्य वस्तुओं तथा इनसे संबंधित कलाकारों को काफी लाभ होने के साथ ही दुनियाभर में उत्तराखंड को अलग पहचान मिलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जीआई टैग युक्त उत्तराखण्ड के उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने के प्रयासों को इससे और मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के सभी जिलों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना पर राज्य में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। इस योजना के तहत बाजार में मांग के अनुरूप कौशल विकास, डिजाइन, रॉ मैटेरियल, नई तकनीक आदि के आधार पर प्रत्येक जिले में दो उत्पादों का विकास किया जा रहा है। उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में वहां के स्थानीय उत्पादों को पहचान कर उनके अनुरूप परंपरागत उद्योगों का विकास करना योजना का मुख्य उद्देश्य है। इस योजना से स्थानीय काश्तकारों एवं शिल्पकारों के लिए जहां एक ओर स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर जिले के स्थानीय उत्पादों को विश्वस्तरीय पहचान मिल रही है।
कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के लिए आज का दिन बेहद हर्ष का दिन है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड के मोटे अनाज मण्डुआ, झंगोरा, लाल चावल सहित 18 उत्पादों को एक साथ भौगोलिक सकेंतक (जीआई टैग) प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म निर्भर भारत तथा लोकल फॉर ग्लोबल अभियान को बढ़ावा देने एवं श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए जो मार्ग दर्शन दिये गये हैं, उसके अनुरूप प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जीआई के लिए प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राज्य को एक साथ 18 उत्पादों के जीआई टैग प्राप्त हुए हैं जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तराखण्ड के 9 उत्पादों को जीआई टैग पहले ही मिल चुका है। कृषि मंत्री ने कहा कि 12 से 18 जनवरी 2024 तक एक सप्ताह का देहरादून में प्रदेश स्तरीय जी.आई महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर उत्तराखंड मंडी परिषद एवं विपणन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अनिल डब्बू, प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार भाष्कर खुल्बे, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, पद्मश्री एवं जीआई विशेषज्ञ रजनीकांत, महानिदेशक कृषि रणवीर सिंह चौहान और वर्चुअल माध्यम से भारत सरकार के महानियंत्रक प्रो. उन्नत पी. पंडित उपस्थित रहे।

मंत्री अग्रवाल ने एमडीडीए के निर्माण कार्यों का किया औचक निरीक्षण

शहरी विकास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के अंतर्गत अपने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान स्मार्ट सिटी के कार्यों की भी जानकारी ली। मौके पर डॉ अग्रवाल ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने व गुणवत्ता के साथ करने के निर्देश दिए।

मंत्री डॉक्टर अग्रवाल ने आराघर चौक तिराहा पर दिसम्बर माह के 08 व 09 दिसम्बर को होने जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत किए जा रहे सौंदर्य करण के कार्यों का जायजा लिया।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिति के तहत हवाई पट्टी से लेकर भनियावाला, डोईवाला सहित कुल 15 सड़कों का सौंदर्यकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत फ़साड़ योजना, दीवारों पर पेंटिंग, बोर्ड तथा डिवाइडर सौंदर्य करण का कार्य गतिमान है। डॉ अग्रवाल ने बताया कि यह समस्त कार्य 78 करोड रुपए से मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है।

डॉ अग्रवाल ने मौके पर मौजूद प्राधिकरण के अधिकारियों तथा स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

इस मौके पर सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया, मुख्य उद्यान अधिकारी एआर जोशी, अधिशासी अभियंता प्रवीण कुश, जगमोहन सिंह, जनसंपर्क अधिकारी स्मार्ट सिटी प्रेरणा ध्यानी आदि उपस्थित रहे।

नई दिल्ली पहुंचे सीएम धामी, सिलक्यारा टनल पर मीडिया से की बातचीत

नई दिल्ली पहुंचने पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालना एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन के चलते ही यह बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो सका। केन्द्र सरकार की ओर से भेजी गई विशेषज्ञ बचाव एजेंसियों की बदौलत हम श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब हो सके। 17 दिन 41 जिंदगियों के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था।

सीएम धामी ने कहा कि सिल्क्यारा सुरंग मामले में प्रधानमंत्री अगर पर्याप्त संसाधन और मानवीय सहायता प्रदान नहीं करते तो यह अभियान सफल नहीं हो पाता। 12 नवम्बर की सुबह दीपावली की सुबह यह हादसा हुआ। उसी दिन शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन करके मुझसे घटना की पूरी जानकारी ली। सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को किसी भी कीमत में सकुशल बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता थी। उनकी प्रेरणा से राज्य सरकार मजबूती के साथ बचाव अभियान में जुटी। बचाव में लगी टीमों का मनोबल बढ़ा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमें आश्वस्त किया कि आप मोर्चे पर डटें रहें, मिशन को अंजाम तक पहुंचाने में संसाधनों और विशेषज्ञों की कोई कमी नहीं रहेगी। शुरू से लेकर अंत तक प्रधानमंत्री जी ने मार्गदर्शन किया और पल-पल की जानकारी लेते रहे। उन्होंने सिलक्यारा सुरंग से सकुशल बाहर निकाले गए श्रमिकों से फोन पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम की जानकारी ली और हौसला भी बढ़ाया। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जी ने निर्देश दिया कि सुरंग से निकालने के बाद श्रमिकों के स्वास्थ्य देखभाल, घर छोड़ने व परिजनों आदि के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रमिकों और उनके परिजनों को घर तक छोड़ने की व्यवस्था भी की जाए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र में मोदी के नेतृत्व में सरकार आने के बाद एक बड़ी तब्दीली ये आई है कि देश और दुनिया में कहीं भी संकट आया हो, भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मोदी सरकार ने मुसीबत में आ गए विदेश में रह रहे लोगों को कभी बेसहारा नहीं छोड़ा। ऐसा पहले की सरकारों में नहीं हुआ करता था। ये बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद आया है। यही विश्वास सुरंग में फंसे मजदूरों को और उनके परिजनों को था कि प्रधानमंत्री जी हर संसाधन उपलब्ध कराकर मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।

देश जानता है कि वह पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने श्रमिकों को उच्च कोटि का सम्मान केवल शब्दों से ही नहीं दिया है व्यवहार में भी दिखाया है। वह काशी में मजदूरों के चरण धोते हैं। नई संसद के उद्घाटन में श्रमिकों के साथ भागीदारी करते हैं उनसे संवाद करते हैं। श्रमिकों पर पुष्प वर्षा करते हुए देश ने पहली बार किसी प्रधानमंत्री को देखा है। यह प्रधानमंत्री का ही मानस है कि उन्होंने दिल्ली में बहुउद्देशीय विश्वकर्मा भवन के निर्माण के द्वारा श्रमिकों के प्रति अपने अगाध सम्मान को प्रदर्शित किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति का ही नतीजा है कि भारत ने न सिर्फ संकटकाल में अपने नागरिकों को बचाया है बल्कि जल, थल, नभ में सफल अभियान चलाकर कई विदेशी नागरिकों के जीवन की भी रक्षा कर दुनिया के सामने मानवता और जबरदस्त टीम वर्क के कई उदाहरण पेश किए हैं। ताजा उदाहरण हमास और इजरायल के युद्ध के बाद फंसे हुए भारतवासियों को सुरक्षित स्वदेश लाना हो, रूस यूक्रेन युद्ध में भारतीयों के लिए दोनों देशों के द्वारा युद्ध रुकवाना हो, हमारे नागरिकों की सुरक्षित वापसी प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में गारंटी बन गई है। यह प्रधानमंत्री जी द्वारा आज विश्व में भारत की प्रतिष्ठा का प्रभाव है कि सूडान, यमन और अफगानिस्तान की अस्थिरता के समय भारतीयों को सुरक्षित भारत लाकर प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को एक भरोसा दिलाया है कि वह एक संवेदनशील अभिभावक की तरह है अपने नागरिकों की पल-पल चिंता करते हैं। कोरोना महामारी के समय पूरी दुनिया से भारतीय सुरक्षित अपने देश लौटे। इसी विश्वास ने हमें शक्ति दी और सिल्कयारा से सभी श्रमिक पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाले गए।

निवेश के नजरिए से उत्तराखंड सर्वाधिक मुफीदः धामी

8-9 दिसंबर को देहरादून में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दृष्टिगत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एक होटल में आयोजित सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मीट को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी इंफ्लुएंसर्स का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में आप सबकी बड़ी भूमिका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड तेजी से एक उभरता हुआ डेस्टिनेशन देश-दुनिया के लोगों के लिए बन रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां चारधामों से लेकर अनेक देवस्थान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था के लिहाज से उत्तराखंड देश के सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक है और निवेश के लिए सर्वाधिक मुफीद है। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट को लेकर हम देश व विदेश में कई स्थानों पर गए जहां से बहुत अच्छा रिस्पांस इसे लेकर मिला है। अब तक 2 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का ज्यादा से ज्यादा फोकस रोजगार सृजन पर है। इसी के मद्देनजर आगामी 8-9 दिसंबर को देहरादून में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट में अभी लगभग एक सप्ताह का समय हैं। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि अपने माध्यम से वे देश-दुनिया में इस आयोजन का प्रचार प्रसार करें ताकि डेस्टिनेशन उत्तराखंड, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सब जगह ट्रेंड हो जाए। उन्होंने कहा कि आप सभी लोग पूरे मनोयोग के साथ यहां आए हैं और शायद यह प्रभु ने ही तय किया होगा कि आप सभी लोग यहां आएं। उन्होंने कहा कि मेरा ऐसा मानना है कि इस दुनिया में जो कुछ होता है वह प्रभु की इच्छा से होता है और किसी न किसी माध्यम से हम सब जुड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप लोग उत्तराखंड की बात, उत्तराखंड की विशेषता को प्रमुखता से रखेंगे। यहां की तमाम विशेषताएं आप सभी के माध्यम से दुनिया को पता लगेगी।

इससे पहले सभी इंफ्लुएंसर्स के साथ मुख्यमंत्री का एक इंटरैक्टिव सेशन भी रखा गया जिसमें मुख्यमंत्री ने सभी इंफ्लुएंसर्स के सवालों के एक-एक कर जवाब दिए।

इस मीट में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स अमित भड़ाना सहित प्रीती गांधी, रवि भदौरिया, अरविंद अरोड़ा, अनुभव दुबे, ऋषि बागरी, गौरव ठाकुर, अभिजीत जमलोकी, संदीप गुंसाईं, रोशन सिन्हा, मधुसूदन पाटीदार, प्रकाश भारद्वाज, सौरभ रावत, गौतम खट्टर, प्रशांत उमराव, रमेश सोलंकी, किरण कुमार, निखिल चतुर्वेदी, आरुषि, आदि ने प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव शैलेश बगोली, सचिव विनय शंकर पांडेय, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।

इन्वेस्टर्स समिट-2023 की तैयारियों के संबन्ध में बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरूवार को सचिवालय स्थित अपने सभागार में 8 एवं 9 दिसम्बर, 2023 को देहरादून में आयोजित हो रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को सभी तैयारियों समय से पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिट के दौरान आयोजित हो रहे प्रत्येक इवेंट की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान शहर के यातायात एवं सुरक्षा से सम्बन्धित सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि यातायात के कारण देश-विदेश से आ रहे निवेशकों के साथ ही आमजन को परेशानी न झेलनी पड़े इसका ध्यान रखा जाए। इसके लिए अन्य जनपदों से भी यातायात पुलिस की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल के आसपास पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट के दौरान निवेशकों को आसपास के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण भी कराया जा सकता है। उन्होंने समिट से पहले शहर के सौन्दर्यीकरण कार्य को पूरा करने के साथ ही सड़कों की स्थिति दुरूस्त किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बिजली, फाईबर लाइन्स एवं केबल टीवी आदि की तारों को अंडरग्राउण्ड किए जाने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम, विनोद कुमार सुमन एवं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आपदा के प्रभाव को कम करने को लेकर विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों का मंथन जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देर शाम इस वैश्विक सम्मेलन में पहुंच कर दुनिया भर से आये विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से मुलाकात की। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के सिल्वर जुबली कनवेंशन सेंटर में आयोजित इस चार दिवसीय विश्व स्तरीय सम्मेलन में आज का प्रथम सत्र काफी महत्वपूर्ण रहा। आपदा प्रबंधन पर विश्व स्तर के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक छठे विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन के इस सत्र में हिमालय में लचीलापन और सतत विकास पर वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञ ने विचार व्यक्त किए। वहीं, द्वितीय सत्र में देश के विभिन्न राज्यों, जो कि आपदा ग्रसित होते रहते हैं, को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई तथा साथ ही वैश्विक स्तर तक क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञों ने विशेष रूप से अनुभव और विचार साझा किए। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में तकनीकी सत्र भी रखे गए, इनमें क्षमता निर्माण को वैश्विक रणनीति का हिस्सा बताया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि शोध हमारे लिए जितने महत्वपूर्ण हैं और उनका कार्यान्वयन भी उतना ही अहम है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विषम हालात में परिस्थितियों से खुद को बचाने, हिमालय क्षेत्र में विकास के महत्व को समझने, एकीकृत तरीके से ग्लेशियर के प्रभाव, उनके विभिन्न पहलुओं को समझ कर कदम उठाने चाहिए, जैसे अहम तरीन सवालों के जवाब भी सुझाये। इस महासम्मेलन में आपदाओं से निपटने की तैयारी पहले से करने को क्षति कम करने के लिए बहुत प्रभावी बताया गया।
टेक्निकल सत्र में विरासत और जलवायु के लिए नेट शून्य, सामुदायिक स्वास्थ्य, लचीलापन और तैयारियों पर पैनल चर्चा के साथ ही टर्की, सीरिया, मोरक्को, अफगानिस्तान, नेपाल और हैती के आपदा क्षेत्रों में मियामोटो के अनुभव से सबक लेने, ताप कार्य योजना, मानवीय सहायता और आपदा राहत में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका, पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र में स्थायी प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए जलवायु, लचीली प्रौद्योगिकियों, जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।
सम्मेलन में आज तीसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पेमा ग्याम्त्शो (आईसीआईएमओडी, नेपाल) ने कहा कि पहाड़ सुलभ हैं और वे हमें देश की सामाजिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की सीमांतता और नाजुकता के बारे में भी बताते हैं और भविष्य में होने वाली भिन्न-भिन्न आपदाओं को और करीब से समझ कर उसका समाधान करने की महत्ता और तीव्रता का अहसास कराते हैं।
सत्र के मुख्य अतिथि विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि स्थिरता और विकास हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं। हमने समय-समय पर कई खतरों और वातावरण की विकट एवं विपरीत परिस्थितियों का अनुभव किया है। उन्होंने पिछले दिनों हुई जोशीमठ की प्राकृतिक आपदा का हवाला देते हुए कहा कि इस आपदा ने न सिर्फ वहां के लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आर्थिक रूप से भी क्षति का सामना हमें करना पड़ा है। यह हमारे लिए वास्तव में एक गंभीर घटना है और सबको ऐसी घटनाओं के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक तथा सजग होना होगा।
विकास नगर क्षेत्र के विधायक चौहान ने जागरूकता एवं गंभीरता के लिए शिक्षा को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह तभी संभव है जब हम अपने कर्तव्यों के लिए पूरी तरह से संवेदनशील होंगे। कार्यक्रम में अन्य कई विशेषज्ञ वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए। प्रो. मार्कस मार्टिन नुसर (भूगोल विभाग, दक्षिण एशिया संस्थान, हीडलबर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी) ने कहा कि विश्व भर में जगह-जगह ग्लेशियर पिघलना भारी खतरे का आभास हम सभी को करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर पीछे हटने के कारण झील क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई हुई है। उन्होंने 2014 में ग्या के ग्रामीणों के बारे में भी बताया। 30 साल पहले बिना बारिश के एक छोटी सी बाढ़ आई थी, जिससे मैदानी क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि 2014 के आसपास झील में वृद्धि देखी और फिर 2019 में एक बड़ी वृद्धि देखी गई, बाद में यह स्वीकार किया गया कि क्रायोस्फीयर खतरों की बढ़ती संभावना पर सूक्ष्म दृष्टि करने की आवश्यकता है। स्थानीय आपदा जागरूकता और तैयारी अभियानों को कुशल और विश्वसनीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और स्थानीय पर्यावरण ज्ञान और अनुभव के एकीकरण के साथ-साथ तकनीकी निगरानी उपायों (सेंसर और कैमरों की स्थापना) को साइट-विशिष्ट भूमि उपयोग योजना और पर्याप्त अनुकूलन रणनीतियों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। आपदा, अपरिहार्य का प्रबंधन, शहरीकरण प्रक्रियाओं और नए बुनियादी ढांचे के विकास से आम तौर पर बाढ़ से संभावित नुकसान और क्षति बढ़ जाती है यहां तक कि छोटे गोल्फ भी स्थानीय आजीविका के लिए संभावित रूप से हानिकारक हैं। यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ दुर्गेश पंत ने आपदाओं से निपटने के लिए सतत प्रयासों और पहले से रणनीति बनाने की जरूरत बताई।
वक्ता डॉ. गौहर मेराज (जेएसपीएस पोस्ट-डॉक्टर फेलो, टोक्यो विश्वविद्यालय, जापान) ने कहा कि कुशन आपदा प्रबंधन के लिए कारण को समझना, प्रबंधन के लिए रणनीति तैयार रखना शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में एक शोधकर्ता होने के नाते कुछ कर्तव्य हैं जिनका पालन करना चाहिए। हमारे सामने व्यवहारिक समाधान, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन व्यावहारिक विकल्प हैं। सम्मेलन की तीसरी शाम पर्यावरण की सुरक्षा की शपथ दिलाई गई।

रेलवे और प्रदेश के उच्चाधिकारियों को सकारात्मक रुख अपनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में रेलवे से संबंधित मुद्दों के निस्तारण के लिए डिवीज़नल रेलवे मैनेजर मुरादाबाद राजकुमार सिंह के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने रेलवे एवं उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों को सकारात्मक रुख़ अपनाते हुए दोनों ओर आ रही समस्याओं को लगातार बैठकें आयोजित कर निस्तारित करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने रेलवे को हर्रावाला रेलवे स्टेशन को 24 कोच टर्मिनल बनाए जाने को लेकर कार्यों में तेज़ी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने इसके लिए भूमि अधिग्रहण और हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू किए जाने हेतु रेलवे और शासन की ओर से कार्रवाई में तेज़ी लाए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने भंडारीबाग़ आरओबी की रेलवे बोर्ड स्तर पर अटकी स्वीकृति शीघ्र करवाये जाने के भी निर्देश दिये। डीआरएम मुरादाबाद ने इस पर एक हफ़्ते में स्वीकृति दिलवाए जाने का आश्वासन दिया।
मुख्य सचिव ने देहरादून मोहंड सहारनपुर नई रेलवे लाइन की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि फ़रवरी माह तक इस नई रेलवे लाइन का सर्वे का कार्य पूर्ण हो जाएगा। डीपीआर कार्य को स्वीकृति मिल गई है शीघ्र ही डीपीआर तैयार हो जाएगी। उन्होंने रेलवे भूमि में अतिक्रमण को रेलवे और सम्बन्धित ज़िलाधिकारियों को नये अतिक्रमण रोकने के लिए लगातार आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने रेलवे और वन विभाग के बीच मुद्दों को भी आपसी तालमेल के साथ निस्तारित किए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि वन विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य सभी सम्बन्धित विभाग एक दूसरे के साथ आ रही समस्याओं से संबंधित विभागों से तत्काल अवगत कराएँगे, संबंधित विभाग 15 दिन के अंदर बैठक आयोजित करा कर समस्या के निस्तारण के लिए सहयोग करेगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, वन प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक, सचिव अरविंद सिंह ह्याँकी, सचिन कुर्वे एवं वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से हरिद्वार एवं देहरादून जनपदों के ज़िलाधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने सिल्क्यारा सुरंग में फसे श्रमिकों के परिजनों को मुख्यमंत्री आवास में किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को देर सांय तक सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के सकुशल बाहर आने की खुशी में हर्ष पर्व के रूप में इगास मनायी गयी। इस अवसर पर श्रमिकों के परिजन भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने सभी परिजनों का माल्यार्पण करनें के साथ ही शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक दलों द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में राज्य की लोक संस्कृति से श्रमिकों के परिजन भी रूबरू हुये तथा सांस्कृतिक नृत्य में परिजनों ने भागीदारी कर हर्षाेल्लास के साथ दीवाली मनायी तथा अपने परिजनों के सकुशल टनल से बाहर आने पर खुशी जतायी। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री का विशेषरूप से आभार जताया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में श्रमिकों के परिजनों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके धैर्य और श्रमिकों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे लिए आज इगास का पर्व है, क्योंकि हमारे श्रमिक भाई सकुशल बाहर आ गए हैं और स्वस्थ हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भेलू खेलकर तथा लोक नृत्य कर इगास पर्व मनाते हुए सभी प्रदेशवासियों को पुनः इगास पर्व की शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बचाव दल की तत्परता, टेक्नोलॉजी के सहयोग तथा सुरंग के अंदर फंसे श्रमिक बंधुओं की जीवटता के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं बौखनाग देवता की कृपा से यह अभियान सफल हुआ और हमारे श्रमिक भाई सकुशल हमारे बीच आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिये यह अवसर बड़ी खुशी का रहा है। जितनी प्रसन्नता श्रमिक बंधुओं और उनके परिजनों को है, उतनी ही प्रसन्नता उन्हें भी हुई है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान से जुड़े एक-एक सदस्य का वे हृदय से आभार प्रकट करते है। जिन्होंने देवदूत बनकर इस अभियान को सफल बनाया। उन्होंने कहा कि सही मायनों में हमें अब ईगास पर्व की खुशी मिली है। उन्होंने कहा कि भगवान बौखनाग देवता की कृपा भी इसमें सहयोगी बनी।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के साहस, मनोबल और परिजनों के धैर्य के साथ ही रेसक्यू अभियान में शामिल सभी एजेंसियों व कार्मिकों की अनथक मेहनत को इस अभियान की सफलता का आधार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरंग में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालने के अभियान पर निरंतर नजर रखे हुए थे और वह श्रमिकों की कुशलता को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में श्रमिकों के अनमोल जीवन को बचाने की सरकार की वचनवद्धता और परिजनों के साथ ही जनता द्वारा जताए गए अटूट विश्वास ने इस बेहद जटिल, चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे बचाव अभियान को कामयाब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरंग हादसे के चलते हम सब इस बार दीपावली नही मना पाए थे, अब सभी श्रमिको को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिए जाने के बाद आज दिवाली का जश्न मनाया गया है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल, डॉ. धन सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक खजान दास, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, सचिव मीनाक्षी सुंदरम, एडीजीपी अमित सिन्हा, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी

सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू करते हुए कुल 45 मीटर तक ड्रिलिंग पूरी कर ली गई थी। 45 मीटर से आगे की ड्रिलिंग के बाद धातु के टुकड़े (सरिया) के मशीन में फसने से ड्रिलिंग में बाधा सामने आ खड़ी हुई थी। देर रात श्रमिक प्रदीप यादव एवं बलविंदर द्वारा पाइप के मुहाने पर फंसे धातु के टुकड़ों को पाइप के अंदर रेंगकर काट दिया गया है।
सचिव, उत्तराखंड शासन डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि आगे का कार्य भी पूरी सावधानी के साथ किया जा रहा है। पुनः ऑगर मशीन से स्थापित कर ड्रिलिंग शुरु करते हुए 1.8 मीटर अतिरिक्त ड्रिलिंग की गई है। आगे की ड्रिलिंग हेतु विशेष सावधानियां बरती जा रही है। उन्होंने कहा पूरी सावधानी बरतते हुए तेजी से ड्रिलिंग करना हमारी प्राथमिकता है।
इस दौरान एम.डी (एनएचआईडीसीएल) महमूद अहमद, जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी मौजूद रहे।