मुख्य सचिव बर्द्धन ने की चारधाम यात्रा की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आपदा नियंत्रण कक्ष, आईटी पार्क जाकर चारधाम यात्रा की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा को लेकर व्यवस्था चाकचौबन्द किए जाने हेतु जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि चारों धामों में श्रद्धालुओं को दर्शन सुगमता एवं सरलता से हों एवं श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए जिला प्रशासन, बीकेटीसी एवं हितधारकों को आपसी सामंजस्य से सभी आवश्यक सुविधाएं एवं सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर पिछले वर्षों की भांति रात्रिकालीन दर्शन की व्यवस्था को सुचारू किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यात्रा के विभिन्न पड़ावों में निचले क्षेत्रों में होल्डिंग एरिया में श्रद्धालुओं को रखे जाने के निर्देश देते हुए होल्डिंग एरिया में सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आने वाले मानसून सीजन को लेकर भी जिलाधिकारियों को अपने जनपदों में सभी आवश्यक कदम उठाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी होल्डिंग एरिया को अभी से एक्टिवेट कर लिया जाए। साथ ही, सभी सम्बन्धित जनपद भारी वर्षा और भूस्खलन आदि के दृष्टिगत होल्डिंग एरिया एवं निकासी योजना तैयार रखें। उन्होंने युकाडा को भी अपनी निकासी योजना तैयार रखे जाने के निर्देश दिए, ताकि एयरलिफ्ट कराए जाने की परिस्थिति में पहले से व्यवस्थाएं उपलब्ध रहें । उन्होंने सम्बन्धित सभी जनपदों को राशन सहित अन्य आवश्यक सामग्री का भी समुचित स्टॉक रखे जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण के साथ ही स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान दिये जाने के निर्देश दिए। कहा कि 60 वर्ष से अधिक एवं बहुत छोटे बच्चों को लेकर जाने वाले श्रद्धालुओं एवं बीमार लोगों को यात्रा न करने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके लिए लगातार प्रचार प्रसार भी किया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, सचिन कुर्वे, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, सचिव विनोद कुमार सुमन, धीराज गर्ब्याल एवं एडीजी डॉ. वी. मुरूगेशन सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने “क्यालु हिम तेंदुआ” शुभंकर का किया अनावरण, प्रतिभागियों के साथ प्रतीकात्मक दौड़ में हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026 के काउंटडाउन रन कार्यक्रम का फ्लैग ऑफ किया और मशाल प्रज्ज्वलित कर प्रतीकात्मक दौड़ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 31 मई 2026 को होने वाले नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन के शुभंकर क्यालु- हिम तेंदुआ का अनावरण भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में नई ऊर्जा, नए अवसर और नए विश्वास को जागृत करने का अभियान है। उन्होंने कहा कहा कि कार्यक्रम में युवाओं का उत्साह, ऊर्जा और आत्मविश्वास यह दर्शाता है कि देवभूमि उत्तराखंड के युवाओं में साहस, संकल्प और देश के लिए कुछ बड़ा करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है। उन्होंने कहा कि आज यहां गूंज रहे युवाओं के कदम आने वाले समय में नीति घाटी की ऊंचाइयों पर इतिहास रचेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौड़ केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि नीति घाटी जैसे दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में दौड़ने के लिए बुलंद हौंसला, हिमालय जैसा अडिग विश्वास और चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को देवभूमि उत्तराखंड के साहस, पर्यटन और सामर्थ्य का ब्रांड एंबेसडर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता नया उत्तराखंड है। उन्होंने कहा कि नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन नए उत्तराखंड की शक्ति और सामर्थ्य के प्रदर्शन का प्रतीक बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह विजन कि सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि पहले गांव हैं, इस आयोजन के माध्यम से साकार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार, होमस्टे, स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमिता को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 31 मई को नीति घाटी की पावन एवं दुर्गम धरती पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम उत्तराखंड के खेल एवं एडवेंचर टूरिज्म के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखेगा। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के 27 राज्यों और 2 अन्य देशों से 900 से अधिक प्रतिभागियों ने इस महाआयोजन के लिए पंजीकरण कराया है, जो युवाओं में इस आयोजन के प्रति बढ़ते आकर्षण का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया एवं राष्ट्रीय खेलों जैसे अभियानों के माध्यम से खेल और फिटनेस को जनआंदोलन बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड को देश का अग्रणी एडवेंचर स्पोर्ट्स एवं स्पोर्ट्स टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे पूरे आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ दौड़ में प्रतिभाग करें तथा सुरक्षित रूप से इसे पूर्ण कर 31 मई को नीति घाटी में नया इतिहास रचें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों को कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

इस अवसर पर सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन विकास परिषद नरेन्द्र भंडारी एवं अनेक प्रतिभागी मौजूद थे।

डीएम के प्रयासों से कैंसर पीड़ित विधवा को मिली आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा और उपचार में मिला सहारा

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जरूरतमंद, असहाय एवं वंचित परिवारों के कल्याण हेतु संवेदनशीलता, तत्परता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित न रहकर पीड़ित एवं संकटग्रस्त परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उपचार, शिक्षा, आर्थिक सहायता, रोजगार एवं ऋण राहत जैसे विषयों पर जिला प्रशासन द्वारा सैकड़ों प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण कर जरूरतमंदों को नई आशा एवं संबल प्रदान किया गया है।
डोईवाला निवासी कैंसर पीड़ित एकल महिला सुनीता कलवार को जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण आर्थिक एवं शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सुनीता कलवार ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वह एक विधवा महिला हैं तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण उनके समक्ष उपचार एवं बच्चों की शिक्षा दोनों को जारी रखना कठिन हो गया था। उन्होंने अपने दोनों बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए फीस माफी एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किए जाने का अनुरोध किया था।
प्रकरण को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा तत्काल आवश्यक निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन द्वारा रायफल क्लब फंड से विधवा सुनीता कलवार को रू0 50,000 की आर्थिक सहायता स्वीकृत एवं उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त उनके पुत्र का विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित कराया गया, जबकि उनकी पुत्री की बाधित शिक्षा को जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से पुनः प्रारंभ कराया गया। जिला प्रशासन की इस पहल से दोनों बच्चों के भविष्य को नई दिशा एवं सुरक्षा मिली है।
उल्लेखनीय है कि सुनीता कलवार का 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में कैंसर का ऑपरेशन हुआ था तथा वर्तमान में उनका उपचार निरंतर जारी है। उपचार के दौरान आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे इस परिवार को जिला प्रशासन ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि मानवीय सहयोग एवं भरोसे का भी संबल दिया है। जिला प्रशासन द्वारा उनके उपचार एवं पारिवारिक सहयोग के लिए लगातार समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन द्वारा विगत वर्षों में भी अनेक जरूरतमंद परिवारों को लाखों रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही विद्युत एवं जल संबंधी बकाया प्रकरणों के निस्तारण, बैंक ऋण राहत, चिकित्सा सहायता एवं रायफल क्लब फंड से सहयोग उपलब्ध कराकर कई परिवारों को राहत पहुंचाई गई है। वहीं ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद एवं असहाय बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें पुनः मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन की यह पहल शासन की संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी कार्यशैली का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें प्रशासन जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

दून डीएम का मानवीय निर्णय, 64 हजार का ऋण कराया जमा, रोजगार को रायफल क्लब फंड से दिए 25 हजार

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने एक बार फिर संवेदनशील एवं मानवीय प्रशासन का परिचय देते हुए ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार को बड़ी राहत प्रदान की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आर्थिक तंगी और सामाजिक संकट से जूझ रहे दिव्यांग की फरियाद सुनते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 64 हजार 915 रुपये की बकाया ऋण राशि सीएसआर फंड से जमा कराने के निर्देश दिए। 03 नौनिहाल बालिकाओं के 100 दिव्यांग पिता व 65 प्रतिशत् दिव्यांग माता के उपर से 64 हजार का बोझिल ऋण से जीविका उपार्जन के अति कठिन साधन व लाचारी में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा मदद का हाथ बढाते हुए ऋण माफी के साथ ही रोजगार हेतु रायफल क्लब फंड से 25 हजार आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने हेतु 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। प्रारम्भिक अवधि में उन्होंने लगभग 15 से 20 किश्तों का भुगतान भी किया, किन्तु वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक संकट गहराने पर वे शेष किश्तें जमा नहीं कर सके।
ऋण अदायगी न होने पर निगम द्वारा 64,915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी गई। दिव्यांग दंपति केवल 3000 रुपये की पेंशन पर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि बेटियों की शिक्षा तक प्रभावित होने लगी थी। प्रार्थी ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अवगत कराया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जी रहा था।
मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को निर्देशित किया कि दिव्यांग संजीव कुमार की बकाया ऋण राशि राइफल क्लब फंड से जमा कराई जाए, ताकि परिवार को राहत मिल सके और आरसी की कार्रवाई समाप्त हो सके।
जिलाधिकारी ने केवल आर्थिक राहत तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी पहल की। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देशित किया कि संजीव कुमार की 3 बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत शिक्षा सहायता प्रदान करने हेतु प्रकरण की जांच कर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। जिला प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक जरूरतमंद परिवार को नया संबल मिला है।  जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।

डीएम दून सविन बंसल ने कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल को किया 6 माह के लिए जिला बदर

जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था एवं आमजन की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए एटीएस कॉलोनी में आतंक और भय का वातावरण पैदा करने वाले बिल्डर पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड गुण्डा नियंत्रण अधिनियम-1970 की धारा 3(3) के अंतर्गत पुनीत अग्रवाल को “गुण्डा” घोषित करते हुए 06 माह के लिए जनपद देहरादून की सीमा से बाहर रहने के आदेश जारी किए हैं।

प्रकरण की शुरुआत एटीएस कॉलोनी निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा सहित अन्य निवासियों द्वारा 25 अप्रैल 2026 को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत शिकायती प्रार्थना पत्र से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुनीत अग्रवाल द्वारा 13 अप्रैल 2026 को डीआरडीओ में कार्यरत वैज्ञानिक के परिवार पर आक्रामक एवं जानलेवा हमला किया गया। मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया तथा महिलाओं एवं बुजुर्गों के साथ अभद्रता और गाली-गलौच की गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोपी को महिलाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों को डराने-धमकाने वाला असामाजिक तत्व बताते हुए गुण्डा एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने उप जिलाधिकारी मसूरी से गोपनीय जांच कराई गई। जांच में क्षेत्रवासियों ने बताया कि पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार भय और असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न कर रहा था तथा उसके विरुद्ध पहले से कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप्स तथा स्थानीय निवासियों की सामूहिक शिकायतों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया। प्रकरण में डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका द्वारा भी शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी का व्यवहार समाज में भय और असुरक्षा का कारण बन चुका है तथा यदि उस पर रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी गंभीर अप्रिय घटना हो सकती है।

वहीं विपक्षी पक्ष द्वारा इसे आपसी रंजिश एवं सिविल विवाद बताया गया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों, दर्ज मुकदमों, वायरल वीडियो, शिकायतों तथा गोपनीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी न्यायालय ने पाया कि पुनीत अग्रवाल अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जो लोगों को डराने-धमकाने और क्षेत्र में अशांति फैलाने का आदी है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुनीत अग्रवाल अगले 06 माह तक देहरादून जनपद की सीमा में बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि वह आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कठोर कारावास एवं जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। थाना रायपुर पुलिस को आदेश की तत्काल तामील कराते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शहर के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कालोनी में बिल्डर की गूंडागर्दी पर जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने स्वतरू संज्ञान लेते हुए गुंडा एक्ट में मामला दर्ज किया था। इससे पूर्व भी विवादित बिल्डर पर दीपावली में नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने तथा लाईसेंसी शस्त्र को प्रदर्शित करने पर डीएम ने शस्त्र लाईसेंसधारक पुनीत अग्रवाल की लापरवाही मानते हुए उनका शस्त्र जब्त करते हुए शस्त्र लाईसेंस निलम्बित कर दिया था। आरोपी बिल्डर पर डीआरडीओं वैज्ञानिक के साथ मारपीट एवं उत्पीड़न, नशे में धुत होकर एटीएस आरडब्ल्यूए अध्यक्ष के साथ मारपीट, बच्चों से गाली गलौच, दीपावली पर पिस्टल तानने, बच्चों से गाली गलौच एवं गाड़ी से टक्कर मारने का प्रयास, जनरल बाडी मीटिंग में धमकाने अभद्र भाषा का प्रयोग, आरोपी द्वारा निवासियों एवं आरडब्ल्यूए के सदस्यों को जानबूझकर झूठे मुकदमों एवं निराधार आरोपों में फंसाकर उत्पीड़न करने का प्रयास, विधवा महिला की भूमि को कूट रचित रजिस्ट्री एवं अनाधिकृत कब्जा मामलों विभिन्न धाराओं में 05 एफआईआर दर्ज हैं।

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने जनमानस महिला, बुजुर्ग बच्चे, असहायों की सुरक्षा के दृष्टिगत समय-समय पर कड़े एक्शन लिए है। साथ ही अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि कानून हाथ में लेकर ऐसा कृत्य करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नही जाएगा। बिल्डर के विरूद्ध बीएनएस की धारा 115 (2), 351(2), 352, 74,126(2), 324(4), 447 में पांच मुकदमें दर्ज हैं। तथा बिल्डर द्वारा आए दिन कोई न कोई विवाद किए जा रहे हैं, जनमानस की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए बिल्डर के विरूद्ध गुंडाएक्ट में बुक कर दिया था।

शहर के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में बिल्डर की कथित दबंगई का मामला सामने आने जिला प्रशासन ने यह एक्शन लिया है । बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर नगर निगम/एमडीडीए की जमीन पर अवैध निर्माण के विरोध में 01 डीआरडीओ मे तैनात वैज्ञानिक के साथ मारपीट का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिल्डर द्वारा कथित रूप से नगर निगम /एमडीडीए की जमीन पर दीवार निर्माण कराया जा रहा था, जिसका मलबा उनके घर की ओर गिर रहा था। इसका विरोध करने पर बिल्डर ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा विवाद बढ़ने पर बिल्डर ने कथित रूप से डीआरडीओ के सांईटिस्ट से मारपीट की। मारपीट में घायल डीआरडीओ के सांइटिस्ट अनिरुद्ध शर्मा को चोटें आई थी मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों के थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। एटीएस कॉलोनी के निवासियों ने आरोप लगाए थे कि बिल्डर के खिलाफ कई शिकायतों के बावजूद सख्त/ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती थी। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अपराधी प्रवृत्ति के लोगों में कानून का भय बढ़ा है तथा आमजन में सुरक्षा और विश्वास का संदेश गया है।

राज्य आन्दोलनकारियों की जगी उम्मीद, डीएम ने तहसीलों से 7 दिन के भीतर समस्त लंबित सूचियों पर की रिपोर्ट तलब

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार कलेक्टेªट में राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में सम्पन्न हुई, जिसमें राज्य आन्दोलनकारियों से जुड़े विभिन्न लंबित प्रकरणों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित एक-एक आंदोलनकारियों के बारी-बारी से सुझाव सुने तथा उनकी शंकाओं का भी समाधान किया।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपनी-अपनी तहसीलों में लंबित समस्त चिन्हीकरण प्रकरणों एवं सूचियों पर गंभीरता से कार्यवाही करते हुए 07 दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक प्रकरण का पारदर्शी एवं तथ्यपरक परीक्षण किया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चिन्हीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सहभागी बनाने के लिए संबंधित क्षेत्रीय आन्दोलनकारी समिति के सदस्यों को भी प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए, जिससे वास्तविक आन्दोलनकारियों के मामलों का निष्पक्ष परीक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने संबंधित विभागों को भी निर्देशित किया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों से संबंधित आख्या एवं अभिलेख 07 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
ज्ञातब्य है कि शासन द्वारा राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु वर्ष 2021 तक प्राप्त लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए 06 माह का समय विस्तार प्रदान किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा इस अवधि के भीतर सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं न्यायसंगत निस्तारण हेतु गंभीरता से कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है। जिन आंदोलनकारियों के रिकार्ड नहीं मिल रहे है ऐसे आंनदोलनकारियों को चिन्हित करने हेतु वरिष्ठ आंदोलनकारियों एवं समिति के सदस्यों द्वारा दिए गए शपथपत्र के माध्यम से चिन्हीकरण किए जाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा शासन को अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया है, जिस पर शासन स्तर से निर्णय होना है।

बैठक में उपस्थित राज्य आन्दोलनकारियों ने चिन्हीकरण प्रक्रिया को गति देने एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। आन्दोलनकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि जिलाधिकारी के कार्यकाल में लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान होगा तथा पात्र आन्दोलनकारियों को न्याय मिल सकेगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्टेªट राहुल आंनद, पुलिस अधीक्षक जया बलूनी, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, राज्य आंदोलनकारी सरोज डिमरी, उर्मिला शर्मा, निर्मला बिष्ट, पुष्पलता सिलमाना, जयप्रकाश उत्तराखण्डी, योगेश भट्ट, ओपी उनियाल, देवी गोदियाल, डीएस गुंसाई, विवेकानंद खण्डूरी आदि उपस्थित रहे।

कैंसर पीड़ित पति, दयनीय आर्थिक स्थिति, सर पर कर्ज, दो मासूम नौनिहालों की जिम्मेदारी के बीच असहाय संध्या को मिला डीएम दून का सहारा

मुख्यमंत्री के निर्देशों को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन देहरादून लगातार मानवीय संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्रवाई के साथ जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाने का कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न जिला स्तरीय प्रोजेक्ट, सीएसआर फंड, रायफल क्लब मद तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से अनेक असहाय एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनमानस की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर संवेदनहीनता अथवा योजनाओं के लाभ से वंचित होने जैसी स्थिति नहीं आनी चाहिए। यदि किसी जरूरतमंद, असहाय अथवा पात्र व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचने में किसी प्रकार का गैप रह जाता है, तो जिला प्रशासन अपने स्तर पर उस कमी को पूरा करते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध कराए।
जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित एवं संवेदनशील समाधान हेतु प्रतिबद्ध जिला प्रशासन ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आर्थिक संकट से जूझ रहे एक कैंसर पीड़ित परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। इसी क्रम में हाल ही में रायपुर क्षेत्र की एक महिला, जिनके पति कैंसर से पीड़ित हैं और परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, को जिला प्रशासन द्वारा बड़ी राहत प्रदान की गई। परिवार पर लगभग 71 हजार रुपये का ऋण बकाया था तथा लगातार इलाज एवं घरेलू खर्चों के कारण परिवार दयनीय स्थिति में पहुंच चुका था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड से ऋण की सम्पूर्ण धनराशि जमा कराते हुए संबंधित परिवार को ऋणमुक्त कराया। साथ ही अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई
रायपुर विकासखण्ड के दूरस्थ ग्राम द्वारा मालदेवता निवासी संध्या रमोला ने जिलाधिकारी सविन बंसल के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रार्थना पत्र के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनके पति गले के कैंसर से पीड़ित हैं तथा उनका उपचार हिमालय अस्पताल में चल रहा है। गंभीर बीमारी और लगातार कीमोथेरेपी के चलते उनके पति कार्य करने में असमर्थ हो गए हैं, जबकि परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर निर्भर थी।
संध्या ने अवगत कराया कि उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक की आयु लगभग तीन वर्ष तथा दूसरे की छह वर्ष है। लगातार इलाज, दवाइयों एवं घरेलू खर्चों के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 45 हजार रुपये तथा वर्ष 2025 में 37 हजार रुपये का ऋण स्वयं सहायता समूह संचालन एवं स्वरोजगार हेतु बैंक से लिया गया था, किंतु पति की बीमारी के चलते वह ऋण की किश्तें जमा नहीं कर पाईं। परिणामस्वरूप बैंक द्वारा लगभग 71 हजार रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया गया तथा एजेंटों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने से परिवार मानसिक तनाव से भी गुजर रहा था। इसी के चलते उन्होंने जिलाधिकारी से ऋण माफी एवं आर्थिक सहायता की गुहार लगाई।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जिला प्रशासन के सीएसआर फंड से 71 हजार रुपये की धनराशि सीधे ऋण खाते में जमा कराने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित बैंक को नो ड्यूज प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त रायफल क्लब मद से संध्या रमोला के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जनसमस्याओं का समाधान सर्वाेच्च प्राथमिकता है। ऐसे परिवार जो किसी कारणवश योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं अथवा आकस्मिक संकट का सामना कर रहे हैं, उन्हें जिला प्रशासन हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिव्यांगजन, गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों, निराश्रित महिलाओं, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तथा आपात परिस्थितियों से प्रभावित नागरिकों को विभिन्न माध्यमों से सहायता प्रदान की जा रही है। प्रशासन की यह पहल शासन की जनकल्याणकारी सोच, संवेदनशील प्रशासनिक कार्यशैली एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

दून डीएम का ऑपरेशन सफाई, 96 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरस्त, एक्शन निरंतर जारी

जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशानुसार होमस्टे संचालन की गहन जांच कराई जा रही है। जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 96 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। जिसमें प्रथम चरण में 17 तथा द्वितीय चरण में 79 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। संबंधित होमस्टे को विभागीय वेबसाइट से भी विलोपित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है।

जिले में होटल रूप में शहरी धनाडय अमीरों के होमस्टे पर डीएम ने कार्रवाई का डंडा चला दिया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन की मजिस्टेªट टीमों ने अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 136 निरीक्षण करते हुए मानक विपरित संचालित मिले 96 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त करते हुए पर्यटन वेबसाइट से विलोपित की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने ऑपरेशन सफाई शुरू करते हुए प्रथम चरण में 17 तथा द्वितीय चरण में 79 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरसत कर दिया है तथा आगे भी कार्रवाई गतिमान रहेगी। विगत कई माह से शहर में बढती आपराधिक घटना नशे एवं ओवर स्पीड में वाहन चलाना अदि घटनाएं बढी है। जिसका एक बडे़ कारण में से एक होमस्टे में रात भर नियम विस्द्ध बार संचालन आदि निकल कर सामने आए है, जहां लाउड डीेजे नशे गैर कानूनी गतिविधि के अड्डे बन रहे होमस्टे में उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों के ठहरने से आमजन की जान का खतरा बना हुआ है। इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए होमस्टे का सत्यापन एवं निरीक्षण किया जा रहा है। होमस्टे होटल में निर्धारित प्रक्रिया पालन किए बिना पर्यटक एवं उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग ठहराए जा रहे है। होमस्टे भी लीज पर संचालित हो रहे है जो जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे है। उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों द्वारा शहर में हुड़दंग मचाने तथा नशे की हालत में ओवर स्पीड, पिस्टल तमचों से फायरिंग की घटनाएं भी सामने आ रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार-प्रसार तथा स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि करना है, किंतु निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे का उपयोग होटल अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान की भांति किया जाना पाया गया, जिससे अव्यवस्था एवं कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सहसपुर एवं रायपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में पंजीकृत होमस्टे की जांच हेतु क्षेत्रवार समितियों का गठन किया गया। समितियों द्वारा निरीक्षण उपरांत 96 होमस्टे ऐसे पाए गए जो उत्तराखण्ड गृह आवास (होमस्टे) नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे थे। इन सभी के पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की गई, जिसे स्वीकार करते हुए प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं पाई गई। अग्निशमन उपकरण अनुपलब्ध या उनकी वैधता समाप्त पाई गई। होमस्टे का उपयोग बारात घर एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। कई स्थानों पर स्वामी का निवास नहीं पाया गया तथा इकाइयों को लीज/किराये पर संचालित किया जा रहा था। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा था। विगत निरीक्षण में विदेशी नागरिकों के ठहराव की सूचना (सी-फॉर्म) उपलब्ध नहीं कराने सम्बन्धी घटनाएं प्रकाश में आई थी। कुछ होमस्टे पंजीकृत होने के बावजूद संचालित नहीं पाए गए।

डीएम दून अंडरग्राउण्ड केबलिंग की प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग करेंगे, सीएस ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून में विद्युत लाईनों की अंडरग्राउण्ड केबलिंग को लेकर ऊर्जा विभाग एवं जिलाधिकारी देहरादून के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्य सचिव ने पिटकुल को निर्देश दिए कि सड़कों की खुदाई एवं अंडरग्राउण्ड केबलिंग और ब्लैक टॉपिंग का कार्य जून माह तक पूर्ण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिटकुल को सभी फ्रंट पर एक साथ कार्य खोलने के बजाय कुछ फ्रंट पर कार्य खोलकर अपनी सभी लेबर को एक ही जगह कंसंट्रेट करते हुए कार्य को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पूरे शहर की सड़कें खुदने के बजाय कुछ हिस्सों में अधिक लेबर लगाने से कार्य ज्यादा तेजी से होगा। इससे शहरवासियों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी देहरादून के साथ लगातार सम्पर्क बनाते हुए अपने कार्य को तय समय सीमा के साथ पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को भी अंडरग्राउण्ड केबलिंग की प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक जगह कार्य पूर्ण होने के बाद ही आगे के कार्य शुरू किए जाने की परमिशन दी जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल एवं पिटकुल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के बिना तैयारी के उपस्थित होने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस प्रकार की बैठकों में बिना पूरी तैयारी के आना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सभी अधिकारी पूर्ण तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ ही बैठक में उपस्थित हों।

मुख्यमंत्री ने विभागों एवं अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में विभागीय तालमेल के अभाव के कारण विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित हो रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं की एक बार पुनः गहन समीक्षा करने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता का विषय हैं और जनता से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किस विभाग में कितने प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी लंबित हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी लंबित घोषणाओं के संबंध में 15 जून तक शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन कार्यों के शासनादेश जारी हो चुके हैं, उन पर तत्काल कार्य प्रारंभ सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि कई स्थानों पर घोषणाओं के अनुरूप कार्य प्रारंभ होने के बावजूद शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यस्थलों पर शिलापट्ट लगाना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित जिलाधिकारी इसकी जिम्मेदारी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो विषय जिला स्तर पर हल हो सकते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस स्तर पर कार्य लंबित है, उसी स्तर पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि 15 जून से पहले सभी लंबित घोषणाओं की पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाए और प्रत्येक कार्य की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की जाए।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जनपद के विधानसभा क्षेत्र सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर एवं जागेश्वर से संबंधित विभिन्न विकास घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता से किए गए सभी वादों और घोषणाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए तथा विकास कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं पर शासनादेश जारी हो चुके हैं, उनके कार्यों में तेजी लाई जाए तथा लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा के दौरान विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की कुल 90 घोषणाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें बड़ी संख्या में घोषणाओं पर शासनादेश जारी किए जा चुके हैं तथा अनेक कार्यों पर तेजी से कार्यवाही चल रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पेयजल, सिंचाई, चिकित्सा-स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, ऊर्जा, कृषि एवं कृषक कल्याण सहित विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित मामलों में शीघ्र प्रगति लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र सल्ट की कुल 69 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अनेक घोषणाओं पर शासनादेश जारी कर कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने धर्मस्व, ग्राम्य विकास, चिकित्सा-स्वास्थ्य, पर्यटन, लोक निर्माण, शिक्षा एवं शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र रानीखेत की कुल 33 घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाएं स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपूर्ण एवं लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

वहीं विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर की कुल 48 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यटन, पेयजल, युवा कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, आवास और धार्मिक महत्व की योजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रदेश के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा का उद्देश्य यही है कि आम जनता को समय पर योजनाओं का लाभ मिले और उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सल्ट, रानीखेत एवं जागेश्वर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।