डीएम दून अंडरग्राउण्ड केबलिंग की प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग करेंगे, सीएस ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून में विद्युत लाईनों की अंडरग्राउण्ड केबलिंग को लेकर ऊर्जा विभाग एवं जिलाधिकारी देहरादून के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्य सचिव ने पिटकुल को निर्देश दिए कि सड़कों की खुदाई एवं अंडरग्राउण्ड केबलिंग और ब्लैक टॉपिंग का कार्य जून माह तक पूर्ण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिटकुल को सभी फ्रंट पर एक साथ कार्य खोलने के बजाय कुछ फ्रंट पर कार्य खोलकर अपनी सभी लेबर को एक ही जगह कंसंट्रेट करते हुए कार्य को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पूरे शहर की सड़कें खुदने के बजाय कुछ हिस्सों में अधिक लेबर लगाने से कार्य ज्यादा तेजी से होगा। इससे शहरवासियों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी देहरादून के साथ लगातार सम्पर्क बनाते हुए अपने कार्य को तय समय सीमा के साथ पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को भी अंडरग्राउण्ड केबलिंग की प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक जगह कार्य पूर्ण होने के बाद ही आगे के कार्य शुरू किए जाने की परमिशन दी जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल एवं पिटकुल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के बिना तैयारी के उपस्थित होने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस प्रकार की बैठकों में बिना पूरी तैयारी के आना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सभी अधिकारी पूर्ण तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ ही बैठक में उपस्थित हों।

मुख्यमंत्री ने विभागों एवं अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में विभागीय तालमेल के अभाव के कारण विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित हो रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं की एक बार पुनः गहन समीक्षा करने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता का विषय हैं और जनता से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किस विभाग में कितने प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी लंबित हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी लंबित घोषणाओं के संबंध में 15 जून तक शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन कार्यों के शासनादेश जारी हो चुके हैं, उन पर तत्काल कार्य प्रारंभ सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि कई स्थानों पर घोषणाओं के अनुरूप कार्य प्रारंभ होने के बावजूद शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यस्थलों पर शिलापट्ट लगाना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित जिलाधिकारी इसकी जिम्मेदारी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो विषय जिला स्तर पर हल हो सकते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस स्तर पर कार्य लंबित है, उसी स्तर पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि 15 जून से पहले सभी लंबित घोषणाओं की पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाए और प्रत्येक कार्य की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की जाए।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जनपद के विधानसभा क्षेत्र सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर एवं जागेश्वर से संबंधित विभिन्न विकास घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता से किए गए सभी वादों और घोषणाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए तथा विकास कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं पर शासनादेश जारी हो चुके हैं, उनके कार्यों में तेजी लाई जाए तथा लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा के दौरान विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की कुल 90 घोषणाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें बड़ी संख्या में घोषणाओं पर शासनादेश जारी किए जा चुके हैं तथा अनेक कार्यों पर तेजी से कार्यवाही चल रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पेयजल, सिंचाई, चिकित्सा-स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, ऊर्जा, कृषि एवं कृषक कल्याण सहित विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित मामलों में शीघ्र प्रगति लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र सल्ट की कुल 69 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अनेक घोषणाओं पर शासनादेश जारी कर कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने धर्मस्व, ग्राम्य विकास, चिकित्सा-स्वास्थ्य, पर्यटन, लोक निर्माण, शिक्षा एवं शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र रानीखेत की कुल 33 घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाएं स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपूर्ण एवं लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

वहीं विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर की कुल 48 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यटन, पेयजल, युवा कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, आवास और धार्मिक महत्व की योजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रदेश के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा का उद्देश्य यही है कि आम जनता को समय पर योजनाओं का लाभ मिले और उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सल्ट, रानीखेत एवं जागेश्वर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

राजकीय शिशु सदन केदारपुरम, की दिवंगत संविदा कार्मिक की पुत्री को 25 हजार आर्थिक सहायता

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार, देहरादून में महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत मिशन वात्सल्य योजना की जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति (डीसीडब्ल्यूपीसी) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनपद में बाल संरक्षण एवं कल्याण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ विभिन्न मानवीय एवं संवेदनशील पहलें की गईं।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई एवं बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सभी संस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने नारी निकेतन में निवासरत मानसिकरूप दिव्यांग बच्चे महिलाओं किशोरियों के उपचार हेतु मानसिक चिकित्सालय में आ रही स्टॉप की कमी पर जिलाधिकारी ने मानसिक चिकित्सालय को केयर टेकर पद हेतु मजदूरी मद में जिला योजना से स्वीकृति मौके पर ही प्रदान की गई तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को नर्स पद पर अपने स्तर से व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

पीएम केयर्स चिल्ड्रन योजना के अंतर्गत लाभार्थी बच्चों से संवाद

जिलाधिकारी सविन बसंल ने पीएम केयर्स चिल्ड्रन योजना के लाभार्थी बच्चों के साथ संवाद/वार्ता कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान बच्चों के साथ आए अभिभावकों से भी बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना के अंतर्गत सभी लाभार्थी बच्चों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।

राजकीय शिशु सदन केदारपुरम, की दिवंगत संविदा कार्मिक की पुत्री को आर्थिक सहायता प्रदान

जिलाधिकारी ने एक संवेदनशील पहल के अधीक्षिका, राजकीय शिशु सदन केदारपुरम, देहरादून में कार्यरत संविदा कार्मिक स्वर्गीय श्रीमती सुनिता सिंह के निधन के पश्चात उनकी पुत्री को शिक्षा एवं आर्थिक सहयोग हेतु धनराशि रू0 25,000 का चेक प्रदान किया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन सदैव जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़ा है और इस प्रकार की सहायता आगे भी प्राथमिकता के आधार पर दी जाती रहेगी।
बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि जनपद देहरादून में महिला कल्याण विभाग/किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अन्तर्गत कुल 19 राजकीय/स्वैच्छिक बालगृह संचालित है। उक्त बालगृहों में वर्तमान में कुल 275 बालक/बालिकाएं निवासरत है। राजकीय दिव्यांग बालिका गृह, आदर्श नगर जौलीग्रान्ट देहरादून व राजकीय खुला आश्रय गृह साधु राम इण्टर कॉलेज देहरादून का पंजीकरण कराया गया। जिलाधिकारी ने चाईल्ड हेल्पलाईन 1098 व बाल कल्याण समिति देहरादून के कार्यों की समीक्षा करते हुए जानकारी ली जिस पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अवगत कराया गया कि जनपद में विगत अक्टूबर 2023 से अतिथि तक कुल 2041 प्रकरण (विगत त्रैमास में 208 प्रकरण) तथा बाल कल्याण समिति देहरादून के समक्ष विगत त्रैमास में 221 प्रकरण प्राप्त हुए हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, अध्यक्ष/सदस्यबाल कल्याण समिति श्रीमती नमिता मंमगाई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी केकेअग्रवाल, जिला कमांडेंट होमगार्ड सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, चाईल्ड हेल्प लाईन 1098, बाल भिक्षावृत्ति निवारण प्रयास/इन्टेन्सिव केयर सेन्टर, साधुराम इण्टर कॉलेज राजा रोड देहरादून, आसरा ट्रस्ट, खुला आश्रय गृह सरफिना ट्रस्ट, समर्पण सोसाईटी व समस्त बालगृहों के कार्मिक उपस्थित थे।

देहरादून में महिला आरक्षण बिल गिरने पर सड़कों पर उतरी मातृशक्ति, सीएम धामी ने विपक्ष की मानसिकता की उजागर

देहरादून में आज गांधी पार्क से घण्टाघर तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित महिला आक्रोश मशाल यात्रा ने प्रदेश में एक नया संदेश दिया। इस विशाल आयोजन में महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां शामिल हुईं, जिसने स्पष्ट कर दिया कि अब नारी शक्ति अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह सजग और मुखर हो चुकी है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ जनाक्रोश है जो महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नारी अब अपने सम्मान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़ी है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि हाल के प्रयासों ने इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया। लेकिन राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस दिशा में बाधाएं उत्पन्न की गईं, जिसे जनता भली-भांति देख रही है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए यह संदेश दिया कि कुछ राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं और उन्होंने हमेशा इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा। उन्होंने यह भी संकेत किया कि नई पीढ़ी की महिलाएं अब इन बातों को समझ चुकी हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की भारतीय नारी केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बन रही है। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों को उन्होंने परिवर्तनकारी बताया और यह संकेत दिया कि अब नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी कुछ परंपरागत और परिवारवादी राजनीति करने वाले दलों को असहज कर रही है। इसी कारण वे महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने से कतराते रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह विश्वास भी दिलाया कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश और देश के विकास का आधार है।

इस विशाल मशाल यात्रा के माध्यम से एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी उभराकृकि आने वाले समय में महिला शक्ति अपनी एकजुटता के बल पर उन सभी ताकतों को जवाब देगी जो उनके अधिकारों के मार्ग में बाधा बनती हैं।

अंततः यह आयोजन केवल विरोध नहीं, बल्कि एक संकल्प के रूप में सामने आयाकृएक ऐसा संकल्प, जिसमें नारी शक्ति अपने सम्मान, अधिकार और भागीदारी के लिए निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल सहित विभिन्न जनप्रतिननिधि तथा बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आई महिलाएं उपस्थिति रही।

देहरादूनः मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र दृ ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास
उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।

तीन तलाक से दिलाई मुक्ति
वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड को मिलता फायदा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।

प्रदेश में मजबूत हो रही मातृशक्ति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

दिल्ली से दून ढाई घंटे में पहुंचे सीएम धामी, बोले ये है नए भारत की तेज रफ्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज करीब ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम समय है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है। अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्लीदृदेहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

स्व. बहुगुणा का संपूर्ण जीवन जनकल्याण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास के मूल्यों के प्रति समर्पित रहाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घंटाघर के निकट एमडीडीए कॉम्प्लेक्स में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बहुगुणा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने दूरदर्शी नेतृत्व से देश एवं समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि बहुगुणा केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति समर्पित एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय अंचलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा ने पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल की। उनके प्रयासों से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि बहुगुणा का संपूर्ण जीवन जनकल्याण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास के मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उनके आदर्श और विचार आज भी समाज को प्रेरित करते हैं और हमें जनहित में कार्य करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहुगुणा जी का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा,खजान दास, विधायक दुर्गेश्वर लाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने किया विफलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउण्ड, देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री, हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जन आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था। परंतु लोकसभा में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा विपक्ष ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति का अधिकार छिनने का काम किया है। उन्होंने कहा देश की नारी, अन्याय के विरुद्ध अवश्य आवाज उठाएगी क्योंकि अब नारी अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री द्वारा देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने विफल करके देश के साथ महा पाप किया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मातृशक्ति को नए भारत के निर्माण का आधार माना है। महिलाओं को सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, एवं जन धन योजना द्वारा करोड़ों बहनों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, स्टार्टअप योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को सशक्त बनाने, लखपति दीदी योजना द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को आगे बढ़ने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की प्रेरणा से देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएँ आगे आ रही हैं। आदिवासी समाज की बेटी, देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। केंद्रिय मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया है। इसके साथ राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में अब तक 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल, रेनू बिष्ट, रुचि भट्ट, दीप्ति रावत, नेहा जोशी, हिमानी, रश्मि रस्तोगी एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद थी।

दीक्षांत समारोह वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति के साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भीः सीपी राधाकृष्णन

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।

बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पुल की कार्य प्रगति की जानकारी लेकर सीएम ने दिए जल्द निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पुल की कार्य प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुल निर्माण का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को आवागमन में सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुल देहरादून और मसूरी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों का आवागमन होता है। उन्होंने कहा कि यातायात को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों ओर से आवागमन के लिए वैली ब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है, जो दूसरी ओर से भी शीघ्र ही पूर्ण होकर संचालित हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थान पर स्थायी पुल का निर्माण कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जिसे आगामी 2 से 3 माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़कों एवं पुलों के सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सड़क एवं पुल निर्माण से संबंधित अनेक परियोजनाएं तेजी से क्रियान्वित की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा एवं आदि कैलास यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक अवसंरचनात्मक कार्यों को समय पर पूर्ण किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा कार्यों की प्रगति की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।