जनपद में मानसून को लेकर अलर्ट, डीएम ने आपदा कंट्रोलरूम का निरीक्षण कर दिए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहेः डीएम दून

भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशानुसार चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत आज जिला कार्यालय स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, प्रतिनिधियों तथा सचिवों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों, बीएलओ एवं बीएलए का समन्वित सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए उत्तराखण्ड सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें प्राप्त कर डिजिटाइजेशन की कार्यवाही भी की जा रही है।

जनपद के 13,76,813 मतदाताओं में से 13,55,948 (98.48 प्रतिशत) मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। इनमें से 10,98,179 (79.76 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन भी पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 1,42,485 (10.35 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन शेष है। जनपद में वर्तमान में केवल 1,36,149 (9.89 प्रतिशत) मतदाता ऐसे हैं, जिनसे गणना प्रपत्र प्राप्त होना शेष है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त कराने एवं समयबद्ध रूप से जमा कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि जिन मतदाताओं तक किसी कारणवश गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में बीएलओ स्थानीय जांच एवं पड़ताल के आधार पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में पृथक सूची तैयार करेंगे। यह सूची पंचायत भवनों, नगर निकाय कार्यालयों एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी तथा राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सहभागिता लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने में जिला प्रशासन एवं निर्वाचन विभाग का पूर्ण सहयोग करें, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो तथा निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली, बीजेपी से अरविन्द कुमार जैन, कांग्रेस से डॉ जसविन्दर, सुनील जायसवाल व सतेन्द्र, बीएसपी से सतेन्द्र सिंह व सतेन्द्र चोपड़ा, सीपीआई (एम) से अन्नत आकाश, आप से कमल राना उपस्थित रहे।

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम ने बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित करने तथा सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह एवं किशोरी गृह का स्थलीय निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाल सुधार गृह में रह रहे बालकों से संवाद स्थापित कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जाए, जिससे बच्चों की शैक्षिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके। साथ ही उन्होंने बाल सुधार गृह में निवासरत सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थान में रह रहे प्रत्येक बालक की नियमित काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायता मिल सके। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी बल दिया।

नारी निकेतन एवं किशोरी गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में निवासरत किशोरियों एवं संवासिनियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी ने परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों एवं महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वर्तमान में नारीनिकेतन में 160 संवासनिया, बाल सुधार ग्रह में 07 किशोर, किशोरी संप्रेक्षण ग्रह में 12 किशोरिया है।

निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, सदस्य पीएन जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को सदैव स्मरण रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, किंतु देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण को केंद्र में रखकर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय, राष्ट्र प्रथम तथा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के आधार पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही, आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी अपना योगदान दें। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया तथा उनके संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की गई।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद थे।

ई ऑफिस प्रणाली को प्रभावी बनाने को दून जनपद में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशों के अनुपालन में जनपद देहरादून के समस्त कार्यालयों में शासकीय कार्यों का संचालन पूर्णतः ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने की दिशा में कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी क्रम में आज एनआईसी सभागार, कलेक्ट्रेट देहरादून में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के संचालन, फाइल प्रबंधन, पत्राचार, नोटशीट तैयार करने, फाइलों के ऑनलाइन अग्रसारण, डिजिटलीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयी कार्यों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, कागजरहित एवं प्रभावी बनाना है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी विभागों में शासकीय कार्यों का निष्पादन ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण सत्र में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (छप्ब्) अंकुश पाण्डेय एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को वर्चुअल एवं फिजिकल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगिन प्रक्रिया, ई-फाइल निर्माण, दस्तावेज अपलोड, डिजिटल हस्ताक्षर, फाइल ट्रैकिंग तथा ऑनलाइन अनुमोदन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से कार्यों के निष्पादन से न केवल कार्यालयों में कार्य संस्कृति अधिक सुव्यवस्थित होगी, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी तथा अभिलेखों का सुरक्षित एवं सुगम रख-रखाव सुनिश्चित होगा। उन्होंने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित समयावधि में ई-ऑफिस प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाते हुए शासन की मंशा के अनुरूप डिजिटल प्रशासन को मजबूत करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल तथा प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे तथा ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त की। जिला प्रशासन द्वारा आगामी दिनों में भी आवश्यकता अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनपद के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

देहरादून में पूर्व विधायक सुरेश राठौर की जमानत अर्जी स्वीकार, हुए रिहा

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून की अदालत ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर को जमानत दी है। इस संबंध में पूर्व विधायक राठौर के अधिवक्ता अभिलाष शर्मा और कार्तिक पांडेय ने अदालत में मजबूत पैरवी करते हुए जमानत के लिये प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।

अधिवक्ता अभिलाष शर्मा व कार्तिक पांडेय ने अदालत को बताया कि आरोपी सुरेश राठौर के विरूद्ध दिनांक 14.06.2026 को धारा 308(6) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की वृद्धि की गई। उससे पूर्व आरोपी को धारा 35(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के नोटिस पर छोड़ा गया था। बताया कि धारा 308(6) भारतीय न्याय संहिता, 2023 का अपराध जमानती प्रकृति का है।

अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी के विरूद्ध आपराधिक अपराध केवल धारा 353(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 अजमानती प्रकृति का है, जिसमें अधिकतम तीन वर्ष के कारावास की सजा है। बताया कि आरोपी को अरेस्ट करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन पुलिस द्वारा मनमाने तरीके से आरोपी को अरेस्ट कर जेल भेजा गया है।

इस संबंध में न्यायधीश रवि प्रकाश की अदालत ने आरोपी सुरेश राठौर की जमानत स्वीकारते हुए एक लाख रूपये का व्यक्तिगत बन्ध पत्र एवं समान धनराशि के दो सक्षम व विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने के बाद सुरेश राठौर को रिहा किया।

डीएम बोले, उद्योग मित्रों की समस्याओं का समाधान करना हमारी प्राथमिकता

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला उद्योग मित्र समिति की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि उद्योग मित्रों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण करना जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दिशा में उद्योग क्षेत्र एक गेम चेंजर की भूमिका निभाता है तथा औद्योगिक विकास से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि औद्योगिक आस्थानों से संबंधित वे समस्याएं, जिनका समाधान लंबे समय से लंबित है और जिनके संबंध में शासन को पूर्व में पत्राचार किया जा चुका है, उन्हें “मिसिंग लिंक” के रूप में चिह्नित करते हुए पुनः शासन को प्रेषित किया जाए ताकि उनका उचित समाधान हो सके।

बैठक में औद्योगिक आस्थान सेलाकुई में निर्माणाधीन 220 केवी विद्युत स्टेशन की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान यूपीसीएल अधिकारियों ने अवगत कराया कि आगामी दो से तीन दिनों के भीतर विद्युत स्टेशन पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने संतोष व्यक्त करते हुए परियोजना को निर्धारित समय में संचालित करने के निर्देश दिए।

औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत शटडाउन की समस्या पर जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) को निर्देशित किया कि उद्योगपतियों एवं यूपीसीएल अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित कर शटडाउन का पूर्व निर्धारित समय तय किया जाए, जिससे उत्पादन गतिविधियों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। उन्होंने उद्योगों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के भी निर्देश दिए, जिसमें उद्योग मित्र अपनी समस्याएं सीधे साझा कर सकें। स्मार्ट मीटरों में रीडिंग जंप होने के कारण उपभोक्ताओं को अधिक विद्युत बिल आने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने यूपीसीएल अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जीएमडीआईसी को इस संबंध में शासन को विस्तृत पत्र प्रेषित करने को कहा।

औद्योगिक क्षेत्र मोहब्बेवाला में सड़कों पर विक्रम वाहनों की अवैध पार्किंग तथा सब्जी एवं रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस एवं नगर निगम अधिकारियों को आद्यौगिक आस्थानों में नियमित अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के उपरांत पुनः अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों एवं कामगारों के कौशल विकास पर विशेष बल देते हुए सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने कर्मचारियों का ऑनलाइन पंजीकरण कराकर कौशल अभिवृद्धि कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए।

बैठक में औद्योगिक भूमि के दुरुपयोग का मामला भी प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन प्रकरणों में उद्योग स्थापना के उद्देश्य से भूमि आवंटित की गई है, लेकिन लंबे समय से उद्योग स्थापित नहीं किए गए हैं अथवा आवंटन उद्देश्य से भिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी। इसके लिए उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जीएमडीआईसी को निर्देशित किया कि ऐसे सभी प्रकरणों की स्पष्ट एवं तथ्यात्मक आख्या चार दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि नियमों के विपरीत कार्य पाए जाने अथवा जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।

बैठक में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं एवं उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए तथा औद्योगिक विकास को गति देने के लिए समन्वित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अध्यक्ष उत्तराखण्ड उद्योग संघ पंकज गुप्ता, सदस्य राज्य स्तरीय उद्योग मित्र समिति शांतनु बिष्ट, महाप्रबन्धक मीना बोरा सहित उद्योग मित्र समिति के सदस्य एवं सम्बन्धित विभगाों के अधिकारी एवं उद्योगपति उपस्थित रहे।

फिर सफल होंगे सीएम धामी के प्रयास, मेरठ से लक्ष्मणझूला ऋषिकेश तक चलेगी हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन

मेरठ के मोदीपुरम से ऋषिकेश के पास लक्ष्मणझूला तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन (आरआरटीएस) का सपना सच होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से, उत्तराखण्ड, यूपी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के बीच आरआरटीएस ट्रेन के मौजूदा नेटवर्क को मेरठ से ऋषिकेश तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है। परियोजना की डीपीआर के लिए जल्द सर्वे होने जा रहा है।

इसी वर्ष फरवरी माह में दिल्ली से मेरठ के मोदीपुरम तक हाईस्पीड नमो भारत ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है। इस हाईस्पीड ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश तक विस्तार देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रयासरत रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर प्रस्ताव भी सौंपा था। इसके बाद इस ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है। परियोजना को गति देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर चुकी है, इसी तरह एनसीआरटीसी ने अपना नोडल नियुक्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी परियोजना पर सहमति दे चुकी है। इसके बाद अब कुल 150 किलोमीटर प्रस्तावित ट्रैक की डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे शुरु होने जा रहा है।

प्रस्तावित परियोजना के मुताबिक मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से नया ट्रैक शुरू होगा, जो मुजफ्फरनगर होते हुए, उत्तराखण्ड की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद ये ट्रैक रुड़की, हरिद्वार में हर की पैड़ी होते हुए, ऋषिकेश के अंतिम छोर लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा। इसका 72 किमी का हिस्सा उत्तर प्रदेश में और 78 किमी का हिस्सा उत्तराखण्ड में आएगा।

इससे उत्तराखण्ड आने वाले तीर्थयात्रियों सहित दिल्ली जाने वाले उत्तराखण्ड के लोगों का भी नया आधुनिक ट्रांसपोर्ट विकल्प मिल पाएगा। वर्तमान में दिल्ली से ऋषिकेश जाने में सड़क मार्ग से करीब पांच से छह घंटे का समय लगता है। नमो भारत ट्रेन (160 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार) के शुरू होने के बाद यह सफर सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेरठ से ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन सेवा का विस्तार उत्तराखण्ड की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और एनसीआरटीसी के साथ लगातार समन्वय कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड में बेहतर रेल और परिवहन अवसंरचना के माध्यम से विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हों

विकसित उत्तराखंड के निर्माण में सचिवालय परिवार की भूमिका महत्वपूर्णः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उत्तराखंड सचिवालय संघ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभाग कर नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड सचिवालय संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपक जोशी, उपाध्यक्ष राकेश जोशी एवं संजय कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष प्रमिला टम्टा, महासचिव राजेन्द्र रतूड़ी, सचिव अतुल कुमार सिंह, संयुक्त सचिव दिव्यांशु डोभाल एवं सुरेन्द्र सिंह रावत, संप्रेक्षक रीना मखनवाल, कोषाध्यक्ष रमेश सिंह बर्त्वाल तथा प्रचार सचिव दीपक बिष्ट सहित समस्त नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सचिवालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रदेश की शासन व्यवस्था की आत्मा और जनविश्वास का प्रमुख केंद्र है। यहीं से नीतियों का निर्माण होता है, जनकल्याणकारी योजनाओं को दिशा मिलती है और प्रदेश के विकास की रूपरेखा तैयार होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण सहभागी है। सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों और योजनाओं को धरातल पर उतारने तथा अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में सचिवालय परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी शासन एवं जनता के बीच विश्वास के मजबूत सेतु के रूप में कार्य करते हैं। उनकी कार्यकुशलता, कर्मनिष्ठा और समर्पण से सरकार की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रारंभ से ही शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने का प्रयास किया है। इसी क्रम में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में कार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि एक मजबूत, प्रेरित और संतुष्ट कर्मचारी तंत्र सुशासन की सबसे बड़ी शक्ति होता है। शासन और कर्मचारी जब टीम भावना के साथ कार्य करते हैं तो विकास कार्यों को गति मिलती है और जनता का विश्वास शासन व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, तकनीक आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने और ई-गवर्नेंस को सशक्त करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध हों। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सचिवालय परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड सचिवालय बेहतर कार्य संस्कृति, आपसी समन्वय और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से सुशासन एवं कार्यकुशलता की नई मिसाल स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी से अपेक्षा की कि वे सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के सरकार के “विकल्प रहित संकल्प” को सिद्धि तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर शासन के वरिष्ठ अधिकारी, सचिवालय संघ के पदाधिकारी तथा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।