उत्तराखंड वीरों की भूमि, यहां हर घर सैनिक परिवार-धामी

’’राष्ट्र-सर्वोपरि’’ की भावना से ओत-प्रोत हमारे वीर सैनिकों ने सदैव ही देश की ’’आन-बान और शान’’ को अक्षुण्ण रखने का कार्य किया है। हमारे देश के वीर सैनिकों ने आजादी के बाद हुए प्रत्येक संघर्ष में हमेशा अपने शौर्य और पराक्रम से दुश्मन के छक्के छुड़ाने का साहस दिखाया है। देवभूमि उत्तराखंड के अनेकों वीर सैनिकों ने भी देश की सुरक्षा के लिये अपने प्राण न्योछावार किये हैं। जिन्होंने अपने अदम्य साहस और वीरता से विश्व को यह आभास कराया है कि शांति का उपदेश देने वाली हमारी यह पावन भूमि समय आने पर अपने शौर्य और पराक्रम द्वारा दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देने की क्षमता भी रखती है।
शुक्रवार को सहस्त्रधारा रोड़ स्थित एक होटल में आयोजित एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सम्पूर्ण विश्व, भारत की शक्ति एवं सामर्थ्य से परिचित हुआ है, जिसका परिणाम है कि अब कोई भी दुश्मन हमारी ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता। अब देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों को दुश्मन की गोली का जवाब देने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। हमारी सेना गोली का जवाब गोलों से देने का कार्य करती है।
म्ुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व एवं रक्षामंत्री के अथक प्रयत्नों का ही परिणाम है कि हमारे सैनिकों को किसी भी प्रकार के सैन्य साजो समान की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। एक सैनिक पुत्र होने के नाते उन्होंने राष्ट्र सेवा के प्रति हमारे वीर जवानों के जज्बें को बहुत ही करीब से देखा है। हमारी सरकार का हमेशा से प्रयास रहा है कि आने वाली पीढ़ी, सैनिकों के पराक्रम और वीरता से भलीभांति परिचित हो सके। इसी दिशा में हमारी सरकार राज्य में भव्य सैन्य धाम के निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसका निर्माण प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड को सैन्य धाम बताये जाने के विजन के अनुरूप किया जा रहा है। अभी हाल में ही देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीड़ बाग में “शौर्य स्थल“ का लोकार्पण कर वीर सैनिकों के हितों के प्रति केंद्र व राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी वीर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शहीदों को वीरता को याद करने के साथ-साथ हम सभी को अपने देश और प्रदेश के प्रति कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सर्वश्रेष्ठ उत्तराखण्ड के विकल्प रहित संकल्प की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करने के साथ ही सैनिकों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए दिन-रात संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शहीद सैनिकों के पारिवारिक जनों को सम्मानित भी किया।
अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य का जोशीमठ क्षेत्र पिछले एक माह से आपदा से जूझ रहा है, जोशीमठ क्षेत्र के प्रभावितों को हर संभव मदद करना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। प्रभावितों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो, उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के साथ त्वरित निराकरण हो, इसके निर्देश सभी सम्बन्धित अधिकारियों को दिये गये हैं। जोशीमठ क्षेत्र के भूगर्भीय जांच आदि में केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी संस्थान जुटे हैं। शीघ्र ही इस संबंध में ठोस कार्य योजना पर कार्य किया जायेगा। प्रभावितों के पुनर्वास आदि के स्थायी समाधान के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र का नियोजित विकास भी हमारी प्राथमिकता है। सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामरिक महत्व वाला जोशीमठ क्षेत्र सुरक्षित हो, यह अपने पुराने स्वरूप में लौटे तथा आगामी यात्रा भी सुनियोजित ढंग से संपन्न हो, इस दिशा में भी हमें कार्य करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार जोशीमठ के हालात की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक 270 परिवारों को राहत शिविर में रखा गया है। केंद्र व राज्य सरकार पीड़ितों के हित में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जोशीमठ का कुछ सीमित क्षेत्र ही भू धंसाव से प्रभावित है तथा अधिकांश भाग में सामान्य रूप से कार्य संचालित हो रहे हैं, ऐसे में पूरे जोशीमठ के बारे में असुरक्षा का माहौल बनाया जाना ठीक नहीं है। चार माह बाद चार धाम यात्रा प्रारम्भ होनी है। ऐसे समय में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि पूरा जोशीमठ क्षेत्र ही असुरक्षित है। हमारा प्रयास होना चाहिये कि सुरक्षित उत्तराखण्ड का संदेश भी देश व दुनिया में जाये। कार्यक्रम में नैनीताल बैंक के एमडी श्री निखिल मोहन द्वारा जोशीमठ भूधंसाव से प्रभावितों की सहायता हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष में 20 लाख का चेक भी मुख्यमंत्री को भेंट किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर उत्तराखण्ड की झांकी मानसखण्ड को प्रथम स्थान प्राप्त होने से राज्य का सम्मान बढ़ा है तथा उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से देश व दुनिया परिचित हुई है। मुख्यमंत्री ने झांकी को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर प्रदेशवासियों के साथ झांकी में सम्मिलित सभी कार्मिकों एवं कलाकारों को भी बधाई दी।

प्रदेश की नदियों को बचाने और चेक डैम बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश की नदियों को बचाए जाने और चेक डैम बनाए जाने आदि के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक आयोजित हुई।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश की नदियों के पुनरोद्धार के लिए प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों को बचाने के लिए प्राधिकरण बनाए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने जनपद स्तरीय और राज्य स्तरीय प्राधिकरण बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा आधारित नदियों को बचाने के लिए उनके श्रोत से राज्य की सीमा तक कार्य करने की आवश्यकता है। यह काम सुचारू रूप से हो सके इसके लिए सिंचाई, लघु सिंचाई, जलागम और वन विभाग को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्य को लगातार मॉनिटर किया जाए। इसके लिए एक डेडिकेटेड सेल का गठन किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वन विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा अपने अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक चेक डैम बनाएं जाएं। इससे भूजल स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि चैक डैम और वृक्षारोपण आदि के माध्यम से लगातार इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर वन विभाग से डी.एस. मीणा ने टिहरी जनपद में हेंवल नदी के पुनरोद्धार के लिए किए गए प्रयासों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव ने उनके प्रयासों को सराहते हुए कहा कि इस कार्य को पूरे प्रदेश में किस प्रकार से लागू किया जा सकता है, इसके लिए कॉन्सेप्ट पेपर तैयार किया जाए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, हरिचन्द्र सेमवाल सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा देने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में आयुष विभाग के अन्तर्गत प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा दिए जाने के सम्बन्ध में बैठक की।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह प्रदेश में आयुर्वेद को मजबूती दिए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए आयुर्वेद में पंचकर्मा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऋषिकेश और देहरादून में विश्वस्तरीय पंचकर्मा केन्द्र बनाए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि केरला आयुर्वेद को प्रदेश में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के डॉक्टर्स सहित 100 प्रतिशत स्टाफ को प्रशिक्षण कराया जाए। डॉक्टर्स को प्रशिक्षण हेतु उच्च स्तरीय संस्थानों में भेजे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सेमिनार भी आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि आयुर्वेदिक संस्थानों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राज्य से जो भी सहायता चाहिए, उन्हें दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुर्वेदिक पद्यति उच्च स्तरीय होने के बावजूद प्रमाणों की कमी के कारण ज्यादा प्रयोग में नहीं ली जाती। उन्होंने कहा कि इसके लिए अनुसंधान और प्रलेखन की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। रिसर्च को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि जानकारी और प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण इस दिशा में किए गए कार्यों की किसी को जानकारी नहीं होती। उन्होंने इसके लिए ई-मैगजीन भी संचालित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसमें सभी के लिए शोध आदि प्रकाशित किए जाएं, ताकि इससे इस दिशा में किए जा रहे कार्यों की सभी को जानकारी हो सके। साथ ही, आमजन को जानकारी के लिए ई-पत्रिका, टीवी चैनल और रेडियो चैनल भी संचालित किए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव ने आयुष विभाग को अपनी वेबसाइट भी अपग्रेड करने के निर्देश दिए। कहा कि अपनी वेबसाइट में बीमारी और उनके उपचार के साथ ही प्रदेश में उनसे सम्बन्धित कौन कौन सी सुविधाएं कहां कहां उपलब्ध हैं, सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने हाईपरटेंशन, डायबिटीज आदि जैसी आम बीमारियों के कारण एवं उपचार को भी इसमें शामिल किए जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने इस क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे फर्जी डॉक्टर्स और संस्थानों को रोकने हेतु सिस्टम विकसित किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संस्थानों को रजिस्टर किए जाने के साथ ही मान्यता पर भी कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सचिव आयुष डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

युवा स्वयं में लीडरशिप का विकास करें-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में इस वर्ष गणतन्त्र दिवस परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने एनसीसी कैडेट्स व आरडीसी दल को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री धामी ने कैडेट् अंजलि नेगी, कैडेट् प्रिया पाण्डेय, कैडेट् आरती सिंह (घुड़सवारी में कांस्य पदक), कैडेट् यश पाण्डेय (बैण्ड मास्टर), कैडे्ट मनोज सिंह बिष्ट (घुड़सवारी में कांस्य पदक), शिविर के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये फलाईग कैडे्ट अविनाश, कैडेट मंयक काला, कैडेट् गिरीश जोशी, कैडेट् तन्वी, कैडे्ट अदिति कौशिक और कैडे्ट प्रियंका पनेरू को सम्मानित किया।
एनसीसी कैडेट्स को गणतंत्र दिवस पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारे एनसीसी कैडेट्स के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ ही इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर उत्तराखण्ड की झांकी मानसखण्ड को प्रथम स्थान मिलना प्रत्येक उत्तराखण्डवासी के लिये गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि एनसीसी जैसे गौरवशाली संगठन से जुड़ना प्रत्येक युवा के लिए गर्व का विषय है। एनसीसी संगठन से ज्यादा एक मिशन है, जिसका उद्देश्य देश की युवाशक्ति में अनुशासन, दृढ़ निश्चय और राष्ट्र के प्रति निष्ठा की भावना को मजबूत करना है। देश के किसी भी हिस्से में जब भी कभी कोई संकट या आपदा आई, एनसीसी के कैडेट्स ने हमेशा पूर्ण समर्पण भाव के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दोनों ही दक्ष एनसीसी कैडेट्स रहे हैं। एनसीसी वो नर्सरी है, जहां भविष्य के वीर सैनिक तैयार होते हैं, इसलिए वर्तमान में एनसीसी के विस्तार और आधुनिकीकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में केंद्र सरकार की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री की योजना है कि आने वाले समय में 1 लाख नए कैडेट्स तैयार किए जाएं, जिनमें से करीब एक तिहाई महिलाएं होंगी। सरकार की योजना सीमावर्ती इलाकों में एनसीसी के कार्यक्षेत्र को और अधिक बढ़ाने की भी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि विद्यार्थी जीवन के दौरान वह भी एनसीसी का कैडेट रहे हैं। एनसीसी के माध्यम से जिस अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठता और राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव को उन्होंने अंगीकार किया वह आज प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में कार्य करते हुए उनके सबसे अधिक काम आ रहा है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में हमारे देश की पहचान एक युवा देश के रूप में होती है, देश ही नहीं बल्कि हमारा प्रदेश भी एक युवा प्रदेश है। देश में आज युवा सोच है और देश का युवा हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। जिस देश के युवाओं में अनुशासन हो, दृढ़ इच्छाशक्ति हो, निष्ठा हो और लगन हो, उस देश का तेज गति से विकास कोई नहीं रोक सकता। युवाओं को स्वयं में लीडरशिप का विकास करना होगा। युवा जिस भी क्षेत्र में जाए, वहां नेतृत्व करें। प्रधानमंत्री “सबका साथ“ लेकर, “सबका विकास“ करते हुए, “सबका विश्वास“ हासिल कर रहे हैं, अब यह हम “सबका प्रयास“ होना चाहिए कि हम इस भावना को देश के प्रत्येक युवा तक पहुंचा सके।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत को विश्व के जी-20, की अध्यक्षता मिलना अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर देश के सामर्थ्य का परिचय देता है। कोरोना काल में जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था अव्यवस्थित रही वही भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रूप में उभरी। प्रधानमंत्री जी के आह्वाहन पर पूरे विश्व में योग को मान्यता मिली। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी गीता धामी, एडीजी उत्तराखण्ड एनसीसी निदेशालय मेजर जरनल पी.एस.दहिया, कंटीजेंट कमांडर आरडीसी 2023 लेफ्टिनेंट कर्नल दीपेन्द्र सिंह समेत एनसीसी के अधिकारी-कर्मचारी एवं कैडेट्स मौजूद रहे।

कृषि मंत्री ने की विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक

कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्री गणेश जोशी ने समीक्षा बैठक के दौरान कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। मंत्री जोशी ने मिलेट्स के व्यापक प्रचार प्रसार करने के अधिकारियों को निर्देशित किया। मंत्री जोशी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कह मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को मोटे अनाज के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को पर्यटक स्थलों में मिलेट्स मेले के माध्यम से किसानों को मिलेट्स के उत्पादन के लाभ और जानकारियां किसानों की दी जाए।

बैठक में मंत्री जोशी ने कहा मंडुवे को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किसान के घर से क्रय किया जाय। ताकि विचोलिये खत्म हो ओर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिल सके। बैठक में मंत्री जोशी ने अधिकारियों को प्रदेश के प्रत्येक जनपद में पीएमएफएमइ स्टोर खोलने के निर्देश दिए। साथ ही मंत्री जोशी ने फूड प्रोसेसिंग को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया। मंत्री जोशी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों से उद्यान विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे सेंटर फॉर एक्सीलेंस को लेकर भी जानकारी प्राप्त की।

मंत्री ने सेंटर फॉर एक्सीलेंस के कार्यों को सुनियोजित ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री जोशी ने योजनाएं को केवल किताबों में नही धरातल पर उतारा जाए। मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओ के क्रियान्वयन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए। ताकि योजना के लाभार्थी योजना का लाभ मिले सके। साथ ही बैठक में मंत्री जोशी ने केंद्र और राज्य सरकार की लाभान्वित योजनाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। मंत्री जोशी ने कहा कि जो सरकार का संकल्प है कि किसानों की आय दुगनी हो उस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे है।

इस अवसर पर सचिव कृषि बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर सचिव रणवीर सिंह चैहान, उद्यान निदेशक एचएस बवेजा, कृषि निदेशक गौरी शंकर सहित कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मिशन ड्रग्स फ्री देवभूमि का शुभारम्भ कर बोले सीएम, युवा नशे को दृढ़ता से कहें ना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला कारागार, सुद्धोवाला देहरादून में मिशन ड्रग्स फ्री देवभूमि का शुभारम्भ करते हुए प्रदेशवासियों विशेषकर राज्य के युवाओं का आह्वान किया है कि उत्तराखण्ड सरकार ने देवभूमि उत्तराखण्ड को 2025 तक ड्रग्स फ्री बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प सिद्धि के लिए सरकार के साथ ही समाज, युवाओं, एनजीओ, सेलिब्रिटिज, सफल लोगों व विभिन्न सामाजिक-शैक्षणिक संस्थानों को आगे आना होगा और मिलकर काम करना होगा। सरकार के इस अभियान को महाअभियान बनाना है। इस जन अभियान में प्रत्येक उत्तराखण्डवासी का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि युवा किसी भी प्रकार के नशे को दृढ़ता से ना कहें तथा अन्य लोगों को भी नशे के दुष्प्रभाव के विषय में जागरूक करें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिला कारागर में नवनिर्मित बेकरी यूनिट का लोकापर्ण किया। उन्होंने जिला कारागार में वेदान्त फाउण्डेशन के सौजन्य से संचालित कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र, कारागार अंलकार प्रदर्शनी, महिला बन्दियों द्वारा हस्तनिर्मित प्रदर्शनी, कारागार में व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कैदियों से उनकी कुशलक्षेम पूछी तथा उन्हें सकारात्मक सोच अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि आशा है कि जेलों में निर्मित उत्पाद भविष्य में स्थानीय बाजार में भी बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री धामी ने कारागार से संचालित दून जेल रेडियो के माध्यम से अपना संदेश दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा की कि कारागार विभाग के नाम को परिवर्तित करते हुये “कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा’’ किया जाएगा एवं “बंदी गृह“ के स्थान पर ‘‘बंदी सुधार गृह‘‘ किया जाएगा। कारागार विभाग में पृथक सुधार सेवा के रूप में करैक्शनल सर्विस विंग का गठन किया जाना। बन्दी कल्याण कोष का गठन करते हुए कोष में एकमुश्त धनराशि 01 करोड़ रूपये का प्राविधान किया जाएगा। बन्दीरक्षक संवर्ग को मासिक पौष्टिक आहार भत्ता रूपये 01 हजार अनुमन्य किया जाएगा। बन्दी रक्षक संवर्ग को वर्दी भत्ता अनुमन्य किया जाएगा। बन्दी प्रशिक्षण एवं पुनर्वास हेतु जिला कारागार, देहरादून में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम हेतु प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारागार भी समाज का ही अंग है। कैदी कारागार को पाश्चताप् और सुधार की तपस्थली माने और सकारात्मक सोच के साथ भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़कर राष्ट्रनिर्माण मे योगदान का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि 2025 में जब हम राज्य स्थापना की रजत जयंती मना रहे हों तो हमारा राज्य पूर्ण रूप से नशा मुक्त हो जाए। हम प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी राज्य होंगे। उत्तराखण्ड भी एक भारत श्रेष्ठ भारत के अभियान में अपना अमूल्य योगदान देगा। कारागारों में ड्रग्स के आदी कैदी भी आते है, जिनके रखरखावध्देखभाल कारागार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। राज्य के सभी कारागारों में भी ड्रग्स फ्री का अभियान के बारे में जागरूकता लाई जानी चाहिए। यह सराहनीय है कि ड्रग्स के विरूद्व इसी अभियान के तहत जिला कारागार, देहरादून में सुभारती मेडिकल कॉलेज के सहयोग से ड्रग्स डी एडिक्शन सेन्टर की शुरूआत की जा रही है। हमने नशे के कारोबारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाही के निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने जेलों में निरूद्ध आजीवन कारावास के बंदियों की समयपूर्व मुक्ति की पारदर्शी स्थाई नीति बनायी है, जिससे 14 साल की सजा पूरी करने पर बन्दी रिहाई का पात्र हो जाएगा। इस नीति के अन्तर्गत इस समय 160 बन्दियों की रिहाई पर विचार किया जा रहा है। कैदी अपने परिजन की मृत्यु होने पर उसके अन्तिम संस्कार से वंचित रहते थे। सरकार द्वारा अन्य राज्यों की अपेक्षा आसान पैरोल व्यवस्था बनायी गई है। सरकार ने बन्दी के परिजन की मृत्यु पर अन्तिम संस्कार हेतु तत्काल 24 घण्टे का पैरोल तथा मृत्यु उपरान्त संस्कारों हेतु 15 दिन के पैरोल की व्यवस्था की है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि सरकार द्वारा बन्दियों के कौशल विकास हेतु कारपेन्ट्री, दरी बुनाई, सिलाई, गमला निर्माण, एल0ई0डी0 झालर इत्यादि अनेक व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है। जेलों में बने निर्मित उत्पादों की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों में सुनिश्चित करवाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुण्डीर, महानिरीक्षक कारागार विमला गुंज्याल, विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल, सुभारती मेडिकल कॉलेज से डा. प्रशान्त भटनागर, डा. तपस्या राजलक्ष्मी शाह तथा जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पाठ्यक्रम में शामिल की जायेगी हमारी विरासत पुस्तक-शिक्षा मंत्री

स्कूलों में बच्चों के भारी-भरकम बस्तों का बोझ कम करने के लिये राज्य में संचालित सभी शिक्षा बोर्ड के साथ विचार-विमार्श कर कोई तरीका निकाला जायेगा, जिससे बच्चों के बस्ते का बोझ कम किया जा सके। इसी के साथ स्कूली बच्चों का तनाव कम करने के उद्देश्य से माह में एक दिन बैग फ्री डे निर्धारित करते हुये उनसे स्कूलों में अन्य गतिविधियां कराई जा सकती है।
यह बात शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज देहरादून के एक निजी होटल में उत्तराखंड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण निदेशालय एवं एससीईआरटी द्वारा आयोजितएनईपी-2020 के क्रियान्वयन एवं शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्द्धन विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कही। डॉ0 रावत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूली बच्चों के बस्तों का बोझ उनके वजन से भी ज्यादा बढ़ गया है, जिसको कम करना उनके सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित सभी शिक्षा बोर्डों के अधिकारियों एवं शिक्षाविदों के साथ विचार-विमर्श कर बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने का कोई नया तरीका निकालना होगा। इसके लिये चाहे बच्चों के पाठ्यक्रम को त्रिमासिक एवं अर्द्धवार्षिक के हिसाब से बांटते हुये पाठ्य पुस्तकों एवं नोट बुक्स का चयन भी किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चे कई बार लगातार पढ़ाई से ऊब जाते हैं जिससे वह तनाव में आ जाते हैं। उनकी इस समस्या को दूर करने के लिये माह में एक दिन को बैग फ्री डे निर्धारित करते हुये उस दिन बच्चों से केवल खेल-कूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कृषि कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही अन्य कौशल विकास से संबंधी गतिविधियां कराई जा सकती है। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद विभागीय अधिकारियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा हमारी विरासत पुस्तक नाम से एक पाठ्य पुस्तक तैयार करने को कहा ताकि बच्चों को अपने जनपद, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की विरासत एवं इतिहास पुरूषों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने कार्यशाला में आये उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, विद्या भारती एवं नेफा नई दिल्ली से आये शिक्षा अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुये उनके राज्य में एनईपी पर किये गये कार्यों के प्रस्तुतिकरण के लिये आभार जताया। डॉ0 रावत ने कहा कि एनईपी के अंतर्गत किये गये कार्यों के साथ करने से सभी राज्यों को एक-दूसरे से कुछ नया सीखने को मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में राज्य में संचालित विभिन्न बोर्डों के साथ टीचिंग शेयरिंग को लेकर अनुबंध किया जायेगा ताकि अच्छे शिक्षकों को एक-दूसरे बोर्ड के स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिये बुलाया जा सकेगा, जिसका फायदा छात्र-छात्राओं को मिलेगा। कार्यशाला में शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 220 दिन अनिवार्य रूप से पठन-पाठन किया जायेगा, इसके लिये उन्होंने अधिकारियों को नवीन शैक्षिणिक सत्र शुरू होने से पूर्व पूरी कार्ययोजना तैयार कर शैक्षिक कैलेंडर बनाने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने भविष्य में स्कूली बच्चों को जुलूस-प्रदर्शनों एवं विभाग से इतर अन्य गतिविधियों में शामिल ने किये जाने के निर्देश दिये।
कार्यशाला में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन ने कहा कि राज्य में एनईपी-2020 को लेकर जनपदों में भी कार्याशालाओं का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के 4500 से अधिक प्री-प्राइमरी पाठशालाओ एवं आंगनबाडी केन्द्रों में एनईपी लागू कर ली गई है, अन्य कक्षाओं में भी धीरे-धीरे इसे लागू किया जायेगा।
कार्यशाला में गुजरात से आये आसिफ सामंत एवं कल्पेश कुमार द्वारा नवाचार के अंतर्गत सूचना और तकनीकी का समन्वयन विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। जिसमें बताया गया कि गुजरात में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति, छात्रों का ऑनलाइन मूल्यांकन एवं प्रत्येक छात्र की यूनिक पहचान संख्या के द्वारा ऑन लाइन अनुश्रवण किया जाता है। इसी क्रम में एनसीईआरटी नई दिल्ली से प्रो0 इन्द्राणी भादुडी ने ग्रेड थ्री से कक्षा-12 तक बच्चों का समग्र मूल्यांकन पर प्रस्तुतिकरण दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि बच्चों का सम्पूर्ण मूल्यांकन 360 डिग्री प्रगति कार्ड तैयार कर अभिभावक, छात्र तथा शिक्षकों के लिये शैक्षणिक प्रगति के साथ ही उनके स्वास्थ्य, अभिरूचि मूल्यों तथा जिज्ञासों का आंकलन किया जाता है।
कार्यशाला में विधायक लैंसडाउन दीलीप रावत, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं सीमैट सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक राम कृष्ण उनियाल, अपर निदेशक माध्यमिक गढ़वाल महावीर सिंह बिष्ट, विरेन्द्र सिंह रावत, एस0पी0 खाली, डॉ0 आर0डी0 शर्मा, अजय नौडियाल, संयुक्त निदेशक दिनेश चन्द्र गौड़ सहित डायट के प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 मोहन सिंह बिष्ट ने किया।

मुख्यमंत्री ने मानसखण्ड झांकी के प्रत्येक कलाकार को 50 हजार देने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झांकियों में उत्तराखण्ड की “मानसखण्ड” झांकी को प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने ट्रॉफी के साथ भेंट की। इस अवसर पर झांकी के टीम लीडर संयुक्त निदेशक सूचना के.एस.चैहान के साथ झांकी के कलाकार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को मानसखण्ड झांकी के लिये प्रथम पुरस्कार मिलने पर प्रदेश के लिये सम्मान की बात बतायी। उन्होंने झांकी में शामिल प्रत्येक कलाकार को 50-50 हजार की धनराशि देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड की झांकी को प्रथम स्थान प्राप्त होने से राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति एवं धार्मिक विरासत को देश व दुनिया में पहचान मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन के उपरान्त मानसखण्ड पर आधारित झांकी प्रस्तावित की गई थी। श्री केदारनाथ व श्री बदरीनाथ की तर्ज पर कुमाऊ के पौराणिक मंदिरों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखण्ड मंदिर माला मिशन योजना पर कार्य किया जा रहा है।

आवश्यकता की वस्तुओं को राज्य में ही निर्माण करने पर सीएस का जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शासन और विभाग के सभी अधिकारियों के साथ प्रदेश में निवेश योग्य योजनाओं के सम्बन्ध में चर्चा की। उन्होंने नियोजन विभाग से खरीद वरीयता नीति तैयार करने के निर्देश दिए। इस पॉलिसी के तहत विभागों से जानकारी मांगी जाए कि किस विभाग को किस प्रकार की खरीद करनी होती है। इसके अनुसार प्रदेश में ही वस्तुओं आदि का उत्पादन पर फोकस किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक विभाग से एक प्रारूप में सभी प्रकार की जानकारियां मांगी जाएं ताकि प्रदेश में इन खरीदे जाने वाली वस्तुओं का उत्पादन किया जाए। इससे प्रदेश में उत्पादित होने से रोजगार तो उत्पन्न होगा ही साथ ही राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खपत संचालित योजनाओं से प्रदेश को लाभ होगा।
मुख्य सचिव ने लैंड बैंक को पोर्टल पर अपलोड किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग लैंड बैंक पोर्टल पर अपने लिए सबसे उपयुक्त भूमि की तलाश कर सकेगा। इससे उस भूमि पर योजना की सफलता के अधिक सम्भावना होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन विभाग के पास पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए विभिन्न जगहों पर अपनी भूमि हैं। पर्यटन विभाग के लिए पर्यटन से सम्बन्धित गतिविधियों के लिए उसकी लोकेशन बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। और पर्यटन इन भूमियों को प्रयोग करने की योजनाएं बना रहा है, परन्तु आसपास में किसी अन्य विभाग की भूमि है जो पर्यटन की उस योजना के लिए, अधिक अनुकूल है। तो पर्यटन विभाग को अपनी भूमि के बजाय उस अधिक उपयुक्त भूमि पर निवेश करने की आवश्यकता है न कि अपनी भूमि पर। उन्होंने कहा कि विभागों के पास जो भी भूमियां हैं वह सार्वजनिक सम्पत्ति है, जो विभाग को उनके कार्यों के लिए दी गयी है। उन्होंने अधिकारियों द्वारा उनके विभाग की भूमि में उन्हीं के विभाग से सम्बन्धित योजनाओं का ही संचालन हो, की मानसिकता को त्यागे जाने की जरूरत बताया। कहा कि प्रदेश के हित में जिस भूमि का जिस कार्य अथवा योजना के लिए अधिक उपयोगिता होगी, उसी कार्य के लिए प्रयोग की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पोषक अनाजों पर अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस दिशा में योजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्यान विभाग को हॉर्टी टूरिज्म की दिशा में योजनाएं लाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को धनौल्टी की तर्ज पर प्रदेशभर में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने की भी बात कही। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून मसूरी के आवासीय विद्यालय भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार के आवासीय विद्यालयों पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। इससे सिर्फ इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी जिससे प्रदेश और प्रदेशवासियों को किसी न किसी रूप में लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में बहुत से निवेश और उद्योग छोटी-छोटी समस्याओं के कारण अटक जाते हैं। इनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री स्तर पर तीन स्तर में समितियां गठित की जा सकती हैं। पहले स्तर पर शासन स्तर पर समस्या का निराकरण किया जाए। यदि वहां समस्या का निस्तारण नहीं होता तो मुख्य सचिव स्तर पर किया जाएगा उसके बावजूद नहीं हो सकेगा तो मुख्यमंत्री स्तर पर गठित समिति उस समस्या का निस्तारण करेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार एवं अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

आयकर स्लैब में छूट और खाद्यान्न योजना का विस्तार जैसी महत्वपूर्ण घोषणाए बजट को बनाती है विशेष-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2023-24 हेतु केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। 2014 से सरकार के प्रयासों से प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक बढ़कर 1.97 लाख रुपये हो गई है। इन 9 वर्षों में, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास के मंत्र पर बजट पेश किया है। समावेशी विकास, वंचितों को वरीयता, बुनियादी ढांचे और निवेश, क्षमता विस्तार, हरित विकास, युवा शक्ति, और वित्तीय क्षेत्र को समर्पित ये बजट, अमृत काल के विजन को बताता है। यह अमृत काल का पहला बजट है। इस बजट में किसान, मध्य वर्ग, महिला से लेकर समाज के सभी वर्गो के विकास की रूपरेखा है।
केन्द्रीय बजट 2023-24 देश के समावेशी विकास और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने वाला है। बजट में खाद्य और पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित रखते हुए अगले 1 वर्ष तक सभी प्राथमिकता वाले परिवारों को मुफ्त अनाज की आपूर्ति का निर्णय अत्यन्त सराहनीय है। बजट में राज्यों को 50 साल का ब्याज मुक्त कर्ज एक और साल के लिए बढ़ाया गया है। ये केंद्र की टीम इंडिया की भावना को बताता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों द्वारा कृषि-स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि कोष बनाया जाएगा। अगले 3 वर्षों में 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सहायता मिलेगी। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन पर ध्यान देने के साथ कृषि कर्ज लक्ष्य को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। इससे देश के साथ ही उत्तराखंड राज्य के किसानों, बागवानों, पशुपालको और मत्स्य पालकों को भी लाभ मिलेगा।
जनजातीय समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए पीएम पीवीटीजी विकास मिशन शुरू किया जाएगा। राज्यों की सक्रिय भागीदारी, सरकारी और सार्वजनिक पार्टनरशिप के साथ मिशन मोड पर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार किया जाएगा। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन का महत्व बहुत अधिक है। निश्चित रूप बजट में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए की जा रही पहल प्रदेश में पर्यटन विकास में काफी सहायक सिद्ध होगी। वाइब्रेंट विलेज के माध्यम से सीमावर्ती गांवों के विकास पर फोकस किया जायेगा। इससे राज्य के सीमावर्ती गांवों को भी लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में नया टैक्स स्लैब लाया गया है। इससे मध्यम वर्ग और नौकरी पेशा को काफी राहत मिलेगी। आयकर छूट का दायरा बढ़ाया गया। यह बजट हमारे वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए भी खास रहा है। वरिष्ठ नागरिक खाता स्कीम की सीमा अब 4.5 लाख से बढ़कर 9 लाख की जाएगी। महिलाओं के लिए नई बचत योजना की घोषणा की गई है। इसमें महिलाओं को 2 लाख की बचत पर 7.5 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा। बजट में जहां गरीबों, मध्यम वर्ग, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों किसानों, शिल्पकारों, वरिष्ठ नागरिकों सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है, वही इकोनॉमी की मजबूती और रक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुल मिलाकर कहा जाए तो यह बजट सच्चे मायनों में अमृत काल का बजट है। युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों, मध्यम वर्ग का बजट है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखण्ड राज्य तथा प्रदेशवासी बजट से पूर्णतः लाभान्वित होंगे।