मेरे सपनों का उत्तराखंड अभियान में आए पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक पर्यावरण सहित आठ प्रमुख विषयों पर सुझाव

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के युवा विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला है। राज्य की कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार एवं विजन साझा करते हुए निबंध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित किए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने 10 अगस्त को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों का आह्वान किया था कि वे 24 अगस्त तक अपने विचार साझा कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें।

पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं में कुल 2,96,426 विद्यार्थी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इस अभियान में प्रतिभाग कर उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए हैं।

विद्यार्थियों ने पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक सहित आठ प्रमुख विषयों पर अपने सुझाव और नए विचार प्रस्तुत किए हैं। खास बात यह है कि ये निबंध केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और भविष्य के प्रदेश को लेकर उनकी सोच का दस्तावेज भी हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और चमोली जिलों में कक्षा 11वीं और 12वीं के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने निबंध पोर्टल पर अपलोड किए हैं। वहीं पौड़ी में 98.82 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 97.46 प्रतिशत, हरिद्वार में 91.77 प्रतिशत, टिहरी में 91.57 प्रतिशत, बागेश्वर में 89.26 प्रतिशत, नैनीताल में 85.89 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी में 84.93 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इस अभियान में भागीदारी की है। देहरादून जिले में कक्षा 11वीं और 12वीं के कुल 63,666 विद्यार्थियों में से 47,358 विद्यार्थियों ने अपने निबंध प्रस्तुत किए हैं।

अब प्राप्त निबंधों एवं विचारों का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विशेषज्ञों की टीम द्वारा अवलोकन एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। चयनित श्रेष्ठ विचारों के परिणाम 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

पहली बार विद्यार्थियों से विकास के विजन पर वैचारिक मंथन
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवा विद्यार्थियों को सीधे राज्य के विकास और नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने की अभिनव पहल की है। राज्य के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस अभियान की व्यापकता और विद्यार्थियों के उत्साह को दर्शाती है।

अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ 140 विचारों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी इन विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विजन, अनुभवों और सुझावों को सुनेंगे।

इसके साथ ही श्रेष्ठ विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग सहित अन्य प्रोत्साहन एवं पुरस्कार प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक सहभागी को मिला डिजिटल प्रमाण पत्र
पोर्टल पर निबंध जमा करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक, विद्यालय और विद्यार्थी से संबंधित विवरण का डेटा संकलित किया गया है, जिससे अभियान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया गया है।

अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी को सीधे राज्य की विकास प्रक्रिया और नीति निर्माण की सोच से जोड़ने की यह एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारे विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार आज के उत्तराखंड को भी नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ के माध्यम से हम नई पीढ़ी की सोच को सुन रहे हैं। युवाओं के अच्छे और व्यावहारिक सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा। हमारा संकल्प है कि युवा जिस उत्तराखंड का सपना देख रहे हैं, उसे साकार करने में उन्हें भी सहभागी बनाया जाए।”

सीएम धामी ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से खरीदे स्थानीय उत्पाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों से विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद हमारी स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हुनर की पहचान हैं। इन उत्पादों को खरीदकर हम न केवल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों का समय स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेशवासी त्योहारों पर उपहार एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दें। हमारे द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद की प्रत्येक खरीद किसी परिवार की आय बढ़ाने, किसी महिला के स्वरोजगार को मजबूती देने और राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्थानीय उत्पादों के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पाद खरीदें, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-अभियान बनाने में अपना योगदान दें। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।

मानसून के बाद सड़क सुधार के कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण करने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति और उनके सुधार के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधीन आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत निर्मित ऐसी पुरानी सड़कों, जिनकी अनुरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है और जिनका नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क सुधार के कार्य एक साथ युद्धस्तर पर शुरू किए जाने चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण कर लें, ताकि बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू करने में किसी प्रकार का विलंब न हो।

बैठक में शहरी क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय निकायों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को सड़क सुधार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों की सड़कों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अक्टूबर माह से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का सड़क मार्ग से भ्रमण करेंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़कों के सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध रूप से कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

इसके अलावा धामी कैबिनेट में 17 अहम बिंदुओं पर सहमति मिली। इसके अलावा शहीदों को लेकर भी कैबिनेट में बड़ा अच्छा निर्णय लिया गया है। कैबिनेट द्वारा लिये गये अहम निर्णय यह रहे-
1- राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के अनुरूप राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति, 2026 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में।

सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि‘ की परिकल्पना को साकार करते हुए सतत् सहकारी विकास तथा देशभर में सहकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 तैयार की गयी है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, प्रभावी बनाने जाने तथा राज्य के अन्तर्गत सहकारिता क्षेत्र के सतत् विकास हेतु राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप राज्य में एक सहकारिता नीति तैयार की जा रही है, जो सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, तकनीक सक्षम एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगी।

भारत सरकार द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। नीति के माध्यम से जहाँ एक ओर सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त, पारदर्शी, पेशेवर, प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसरों को सृजित कर समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उक्त प्रस्तावित सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं सुदृढ़ बनाना, पारदर्शी एवं व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन तथा पलायन से पुर्नवास की दिशा में ठोस पहल करना है।

उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित नीति में प्रमुख रूप से सात रणनीतिक मिशन निर्धारित किये गये है, जिसमें नींव का सशक्तीकरण, जीवंतता को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता तक पहुँच का विस्तार करना, नये एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना, युवा पीढ़ी को सहकारी विकास हेतु तैयार करना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है। अतः इन समस्त उद्देश्यों को पूर्ण किये जाने हेतु राज्य स्तर पर ‘उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति, 2026‘ को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

2- वित्त (वे०आ०-सा०नि०) अनुभाग-07 की अधिसूचना संख्या-290/XXVII (7) 50(16) दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 के द्वारा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी सेवकों के वेतन निर्धारण हेतु प्रख्यापित ‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016‘ के साथ संलग्न अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स की तालिकायें निर्गत की गयी थी। प्रचलित वेतन मैट्रिक्स की तालिकाओं में लेवल-13 क के उपरान्त सीधे लेवल-15 एवं लेवल-16 का प्रावधान है, जबकि भारत सरकार में वेतन लेवल-13 क के पश्चात वेतन लेवल-14 एवं वेतन लेवल-15 अंकित है।

अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 के अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स में उल्लिखित वेतनमान रू0 1,44,200-2,18,200 के लिए वेतन लेवल-15 के स्थान पर वेतन लेवल-14 एवं वेतनमान रू0 1,82,200-2,24,100 के लिए वेतन लेवल-16 के स्थान पर वेतन लेवल-15 संशोधित किया जाना है। साथ ही विभागीय पदीय संरचनाओं / सेवा नियमावलियों में उपरोक्तानुसार जहां-जहां वेतन लेवल-15 एवं 16 अंकित है, के स्थान पर क्रमशः वेतन लेवल-14 एवं 15 समझा / पढ़ा जायेगा।

3-उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा-4 की उपधारा (5) के अधीन मोटर यान पर ग्रीन सेस हेतु निर्गत अधिसूचना में सेस की छूट को समाप्त किये जाने के संबंध में। तथा सी०एन०जी० वाहनों को देय ग्रीन

उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम एवं नियमावली, 2003 के अन्तर्गत वर्तमान में श्प्रवेश उपकरश् तथा ‘ग्रीन सेस‘ की दरों को सम्मिलित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य में पंजीकृत एवं राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्य के व्यवसायिक एवं निजी वाहनों हेतु ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की गयी हैं। हाईब्रिड अथवा सी०एन०जी० चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु तत्समय देय मोटरयान कर से छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में अधिकांश हानि, सी०एन०जी० तथा सामान्य वाहन यथा ICE (Internal Combustion Engine) वाहन ही हैं, जिनके द्वारा संचालन के दौरान ईधन खपत के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग किया जाता है, जिससे तथा सी०एन०जी० प्रकार के यानों की लोकप्रियता में बढोत्तरी हुई है। वर्तमान में अधिकांश हाईब्रिड तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहन ही बाजार में प्रचलन में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहनों को मोटरयान कर से छूट प्रदान किए जाने पर राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके दृष्टिगत उपरोक्त प्रकार के वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से कराधान में लाया जाना आवश्यक है।

4- ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के सम्बन्ध में।
उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत सांख्यिकीय संवर्ग के अन्तर्गत सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित किये जाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के प्रख्यापन का प्रस्ताव है।

5- प्रदेश में आम जनमानस को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने और विभागीय स्तर पर विशेषज्ञ उपलब्ध न होने को दृष्टिगत रखते हुए औषधियों, सर्जिकल सामग्री, रसायन, उपकरण एवं इंप्लांटस की समयबद्ध एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति हेतु उत्तराखण्ड मेडिकल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन का गठन का प्रस्ताव मंत्रिमण्डल के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है जिस पर मंत्रिमण्डल ने विभागीय प्रस्ताव पर सहमति की गयी है।

6- उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०डी०सी० (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) शाखा की स्थापना से राज्य में रोग निगरानी, प्रकोप महामारी की जांच और प्रकोप से निपटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर निदान सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्येक शाखा में बी०एस०एल०-3 स्तर की सुविधाए उपलब्ध होंगी। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित शाखाएं मुख्यालय के साथ-साथ अन्य राज्य की शाखाओं और क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ी होंगी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) नई दिल्ली, भारत सरकार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में अवस्थित 65 एकड भूमि में से 01 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज (रू0 01) पर लीज पर दिये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

7-‘उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026‘ का प्रख्यापन।

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु उप कारापाल के पद पर 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के पदों पर 90 प्रतिशत प्रधान बन्दीरक्षक एवं 10 प्रतिशत महिला बन्दीरक्षक से पदोन्नति कोटा निर्धारित किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित सेवा नियमावली विभागीय एवं कर्मचारी हित में प्रख्यापित की जानी आवश्यक है। अतः कार्मिको के ष्उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026ष् के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

8-उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026

उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 एवं लोकायुक्त अधिनियम (संशोधन) 2014 की धारा 4 की उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन लोकायुक्त संस्था के अध्यक्ष एवं सदस्य पद हेतु उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को उपलब्ध कराये जाने हेतु उक्त अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट खोजबीन समिति की कार्यवधि, उसके सदस्यों को संदेय भत्ते तथा नामों के पैनल के चयन की रीति निर्धारित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026 तैयार किया जाना है।

9-‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन के सम्बन्ध में।

भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा दिनांकः 25 सितम्बर, 2024 को डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मार्डनाईजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के अंतर्गत नक्शा (शहरी आबादी क्षेत्रों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसका उद्देश्य शहरी भू-अभिलेखों के निर्माण और प्रबंधन में कांतिकारी बदलाव लाना है।

नक्शा कार्यक्रम अन्तर्गत स्वामित्व योजना की भांति शहरी भूमि अभिलेखों के लिए एक व्यापक और सटीक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार करना है। हवाई और ग्राउण्ड सर्वेक्षणों को उन्नत जी०आई०एस० तकनीक के साथ एकीकृत करके, यह कार्यक्रम भूमि प्रशासन में दक्षता बढ़ायेगा, संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों को सुव्यवस्थित करेगा और शहरी नियोजन को सुगम बनाने में उपयोगी होगा। सटीक भू-स्थानिक डेटा बेहतर निर्णय लेने, कुशल भूमि उपयोग नियोजन और संपत्ति लेनदेन को सुगम और निश्चित बनाने में भी उपयोगी एवं सहायक होगा।

अतएव प्रदेश के अन्य क्षेत्रों / सम्पूर्ण प्रदेश की राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक विधि से सर्वेक्षण किये जाने हेतु ‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ को प्रख्यापित किया जाना प्रस्तावित है।

10- उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में कार्यरत तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने के सम्बन्ध में।

उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में अधिकांश तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों के कार्य की उपयोगिता सीजनल (माह फरवरी से माह मार्च एवं माह अगस्त से माह दिसम्बर तक) है। तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने से निगम के बीज उत्पादन के लागत में कमी आयेगी, जिससें उत्तराखण्ड राज्य के कृषि विभाग एवं कृषकों को कम मूल्य पर गुणवत्तायुक्त बीज की आपूर्ति एवं अन्य राज्यों में अन्य बीज संस्थाओं से प्रतिस्पर्द्धा की जा सकेगी तथा बीज आपूर्ति में वृद्धि हो सकेगी। निगम के कार्मिकों के वेतन मद एवं प्रशासनिक व्यय में कमी होने से निगम को हो रहे प्रतिवर्ष घाटे को रोकने में मदद होगी। इसके कारण निगम में कार्यरत तृतीय श्रेणी के 22 एवं चतुर्थ श्रेणी के 63 कार्मिकों को जनपद ऊधमसिंहनगर एवं अन्य निकटस्थ जनपदों के विभिन्न विभागों में अधिकतम 10 वर्ष अथवा कार्मिकों की सेवानिवृत्ति की तिथि से 3 माह पूर्व, जो पहले हो, तक के लिये सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जाना प्रस्तावित है। कार्मिकों का सेवानिवृत्तिक लाभ निगम के द्वारा ही प्रदान किया जाएगा। सेवा स्थानांतरण पर अन्य विभागों में भेजे गए कार्मिकों को निगम में देय वेतन के आधार पर ही सम्बन्धित विभाग द्वारा वेतन देय होगा।

11- रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती से चयनित लाभार्थियों को काठबंगला में निर्मित आवासों का आबंटन विषयक।
उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों में नदियों के किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों का सुव्यवस्थित और सुविचारित रूप से विस्थापन किये जाने के उद्देश्य से काठबंगला में 116 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। काठबंगला के निकट रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती में निवासरत् परिवारों में से, नगर निगम, देहरादून द्वारा चयनित लाभार्थियों को उक्त आवास आबंटित किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

12- यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन किये जाने विषयक।

उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों यथा-कोटद्वार, चम्पावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रूद्रपुर, काशीपुर एवं सितारगंज में ए०डी०बी० एवं ई०आई०बी० के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत सीवरेज एवं पेयजल का कार्य किया जाना है तथा ऋषिकेश शहर में के०एफ०डब्लू० (KFW) के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत राड़क निर्माण, सिवरेज, स्ट्रीट लाईट, सार्वजनिक परिवहन (ई बस), पेयजल, घाटों का सौन्दर्यकरण, एस०डब्लू०एम०, एल०डी०डी० स्क्रीन संबंधी कार्य किये जाने हैं। उक्त परियोजनाओं में किये जाने वाले कार्यों के सुचारू संचालन के दृष्टिगत यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन करते हुए कुल 94 अस्थाई (निःसंवर्गीय) पदों का सृजन किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

13-अंत्योदय फाउंडेशन के पक्ष में Gift Deed किये जाने पर स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किये जाने विषयक।

मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, कनाट प्लैस, नई दिल्ली द्वारा कैंसर रोगियों के लिये Hospice Care Center स्थापित किये जाने हेतु देवेंद्र नाथ सक्सेना और माधुरी सक्सेना की मौजा वीरभद्र (पुराना), ऋषिकेश स्थित सम्पत्ति को Antyodaya Foundation, जो कि एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है के पक्ष में Gift Deed किए जाने पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रश्नगत सम्पत्ति की लागत रू0 1,77,41,000/- है, जिस पर निर्धारित 5 प्रतिशत की दर रू0 8,87,050/- (₹ आठ लाख सत्तासी हजार पचास मान्त्र) की स्टाम्प ड्यूटी आकलित है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली के अनुरोध पर विचार किये जाने पर उक्त वर्णित / आकलित की धनराशि₹ 8,87,050/- की राजस्व हानि होगी।

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-9 में श्शुल्क को घटाने, माफ करने या प्रशमन करने की शक्तिश् विषयक प्रावधान है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा किये गये अनुरोध के कम में धर्मार्थ एवं जनकल्याणकारी कार्याे को प्रोत्साहित किये जाने के दृष्टिगत् उक्त वर्णित / आकलित स्टाम्प शुल्क की धनराशि ₹ 8,87,050/- से छूट प्रदान किये जाने के संबंध में मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाना है।

14-उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 की धारा-36 के प्राविधानानुसार उत्तरांचल विश्वविद्यालय जनपद देहरादून से सम्बन्धित या उससे आनुषांगिक विषयों का उपबन्ध एवं नियमन करने के लिए परिनियम के प्रख्यापन के संबंध में।

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों के कृत्यों को विनियमित किये जाने और संबंधित या आनुषांगिक विषयों की व्यवस्था करने हेतु उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 (अधिनियम 02 वर्ष 2024) अधिनियमित है, जिसकी धारा-36 के प्राविधानानुसार संबंधित विश्वविद्यालय के परिनियमों को राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना होता है।
उक्त के कम में उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिनियम, 2026 का प्रख्यापन किया जा रहा है।

15- विषय-उपनल कार्मिकों के समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने के संबंध में।

मंत्रिमण्डल द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है-
(1) उपनल कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन का लाभ तीन चरणों में प्रदान किया जायेगा, जिसके प्रथम चरण में 01.01.2016 से पूर्व के नियोजित कार्मिकों के संबंध में वर्तमान में कार्यवाही की जा रही है। द्वितीय चरण में 01.01. 2016 से 12.11.2018 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन हेतु विचार किया जायेगा जिस पर कार्यवाही दिनांक 09.11.2026 से तथा तृतीय चरण में 13.11.20218 से 15.10.2024 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन की कार्यवाही 01 अप्रैल, 2027 से प्रारम्भ की जायेगी।

(2) उपनल के माध्यम से कार्याेजित कार्मिकों की सेवा में दिये गये कृत्रिम ब्रेक (व्यवधान) के दृष्टिगत सैनिक कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश दिनांक 20.02.2026 में उल्लिखित निरन्तर योजित शर्त / प्रतिबन्ध को विलोपित करते हुये दिनांक 01.01.2016 से पूर्व कार्य कर रहे उपनलकर्मी जो वर्तमान में भी कार्यरत हों, को शासनादेश दिनांक 03.02.2026 (यथासंशोधित) के अधीन न्यूनतम वेतन व महँगाई भते का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(3) यदि किसी विभाग में सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष अतिरिक्त उपनल कार्मिक कार्य कर रहें हों तो उस स्थिति में समान कार्य समान वेतन के लाभ हेतु उपनल से नियुक्ति की तिथि का संज्ञान लेते हुये नियुक्ति तिथि (डेट ऑफ ज्वॉइनिंग) की वरीयता क्रम में कार्मिकों को सर्वप्रथम सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जायेगा। शेष उपनल कार्मिकों को स्वीकृत पद के सापेक्ष कार्याेजित होने तक उसी विभाग/कार्यालय में संवर्ग के प्रारम्भिक (सीधी भर्ती के) पद के सापेक्ष वेतनमान के आधार पर कार्याेजित किया जा सकेगा, जिसके लिए वह न्यूनतम अर्हता धारित करते हों। पद उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिसंख्य पदों का सृजन/समायोजन करवाया जाएगा। इस प्रकार के समायोजन/अधिसंख्य पद सृजन पर त्वरित निर्णय लिए जाने हेतु शासन स्तर पर एक पृथक व्यवस्था (समिति) गठित की जायेगी।

(4) इस श्रेणी में आने वाले पूर्व उपनलकर्मी जिन्हें उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबन्ध पर कार्याेजित किया जा रहा है, उन्हें वेतनमान का न्यूनतम एवं परिवर्तनीय महंगाई भत्ता का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(5) न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सैनिक कल्याण विभाग द्वारा निर्गत आदेशों में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन रहते हुए विभिन्न निगमों, परिषदों एवं स्वायतशासी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में स्वयं के स्तर पर निर्णय लिया

16- मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा संख्या-778/2025 ‘सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल की स्थापना की जायेगी‘ के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के स्तर पर सेवामुक्त अग्निवीरों से संबंधित विषयों के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित किए जाने तथा प्रकोष्ठ के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संविदा के आधार पर निम्नलिखित कुल-06 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी है-
उप निदेशक – 01
सहायक निदेशक 02
कनिष्ठ सहायक 02
डाटा इंट्री ऑपरेटर 01

17-उत्तराखण्ड पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (UPCI) द्वारा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्वसनीय बेस-लोड बिजली की आपूर्ति हेतु राज्य सरकार को प्रस्तुत 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के संबंध में न्यूनतम बोलीदाता (L1) अडानी पावर लिमिटेड से ₹5.746 प्रति यूनिट के कुल टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट (1234 मेगावाट अनुबंधित क्षमता) कोयला आधारित बिजली की खरीद को स्वीकृति प्रदान किये जाने एवं उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि० को अडानी पावर लिमिटेड के साथ बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) एवं अन्य सम्बन्धित अभिलेखों पर हस्ताक्षर करने, आवश्यक शर्तों को पूरा करने और नियामक आयोग (UERC) से वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है।

शहीद सैनिकों की स्मृति में गांवों में स्थापित होंगी मूर्तियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के शहीद सैनिकों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस पहल से शहीद सैनिकों की स्मृतियां सदैव जीवंत रहेंगी और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी।

सीएम निर्देश, आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने तथा आम जनता को उचित दरों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के माध्यम से कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित संबंधित विभाग बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं उनके मूल्यों की नियमित निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर आम जनता से अधिक मूल्य न वसूला जाए। उन्होंने कहा कि बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में प्रशासन द्वारा नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण किया जाए। आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित एवं प्रचलित बाजार मूल्यों की जांच के साथ ही स्टॉक की स्थिति पर भी नजर रखी जाए। कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के घरेलू बजट पर पड़ता है, इसलिए मूल्य नियंत्रण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं प्रभावी और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए बाजार की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की। सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के ₹1930.11 लाख के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे। सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा। साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए। इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।

पिथौरागढ़ के ग्राम जाखनी स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ में आयोजित ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार घर-घर में मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की भक्ति धारा प्रवाहित होती है, उसी प्रकार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्षों से अधिक समय से मनाया जा रहा हिलजात्रा पर्व पिथौरागढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की विशिष्ट पहचान बन चुका है। सोरघाटी की यह ऐतिहासिक हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध परंपराओं का प्रतीक होने के साथ ही पहाड़ी जीवन के संघर्ष, साधना और कृषि-पशुपालन पर आधारित ग्रामीण जीवन की विशिष्टताओं को भी दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि हिलजात्रा केवल धार्मिक अथवा पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व हमें अपने पूर्वजों की महान परंपराओं, आदर्शों और वीरता का स्मरण कराने के साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। भगवान शिव के गण लखिया भूत का आगमन इस पर्व में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास, विरासत और विश्वास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि केदारखंड की तर्ज पर मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के पुनरुत्थान, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर, विवेकानंद कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के माध्यम से प्रदेश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखना चाहती। उत्तराखंड को पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आज उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के पसंदीदा केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का एक बड़ा संकल्प गांवों की खुशहाली है। इसी उद्देश्य से होम-स्टे योजना, लखपति दीदी और सौर स्वरोजगार योजना को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से पहाड़ के हुनर और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि उत्तराखंड के पारंपरिक पर्व, मेले और त्योहार अपनी मूल पहचान एवं सांस्कृतिक स्वरूप के साथ आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और संरक्षित रहें। इसी क्रम में ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि हिलजात्रा जैसे पर्व युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत के महत्व को समझने और उसे भव्य स्वरूप प्रदान करने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को सिद्धि तक पहुंचाने में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी को हिलजात्रा पर्व की पुनः शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद लेकर आए।

रक्षाबंधन पर मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देहरादून में आयोजित दो कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर प्रदेश की मातृशक्ति के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। इसके पश्चात उन्होंने हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। दोनों ही कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को रक्षा सूत्र बांधा और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्नेह और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उत्तराखंड की समस्त माताओं और बहनों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि यह पवित्र पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियों की नई सौगात लेकर आए। उन्होंने कहा कि आज बहनों के बीच पहुंचकर उन्हें ऐसा अनुभव हो रहा है, जैसे कोई भाई अपने घर-परिवार के बीच पहुंचा हो। मातृशक्ति से मिल रहा स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और यही उन्हें उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक की सेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह अटूट स्नेह, विश्वास, समर्पण और सुरक्षा के उस पवित्र संकल्प का पर्व है, जिसे भाई अपनी बहन के प्रति जीवनभर निभाने का प्रयास करता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन से मजबूत होते हैं। भाई का बहन के प्रति स्नेह एवं सुरक्षा का संकल्प और बहन का भाई के प्रति अटूट विश्वासकृइन दोनों पवित्र भावनाओं को रक्षाबंधन और अधिक मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हमें नारी सम्मान के महत्व का भी स्मरण कराता है। नारी का सम्मान केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कार का आधार है। नारी परिवार की आधारशिला होने के साथ-साथ समाज और संस्कृति की भी मूल शक्ति है। जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही समाज वास्तव में समृद्ध और संस्कारित बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिला सशक्त होती है तो उसका लाभ केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। आज महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर देश की सीमाओं तक, घर-परिवार से लेकर उद्योग और व्यवसाय तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। अब महिलाएं केवल सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि जब देवभूमि उत्तराखंड की मातृशक्ति की बात आती है तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। पहाड़ की महिलाओं ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया है और परिवार, समाज तथा प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

महिला सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने ‘नारी तू नारायणी’ के भाव को शासन की नीतियों और कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाने, जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर नल से जल पहुंचाने, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को घर के स्वामित्व से जोड़ने तथा लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण, शौचालयों का निर्माण और तीन तलाक जैसी कुप्रथा के खिलाफ निर्णायक कदम भी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। केंद्र सरकार की नीतियों के केंद्र में मातृशक्ति का सम्मान और कल्याण सर्वाेपरि है।

उत्तराखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड सरकार भी मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।

इसी उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। ये स्वयं सहायता समूह केवल आय का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामूहिक शक्ति, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के मजबूत केंद्र बन चुके हैं। प्रदेश में 7 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन भी महिलाओं की सामूहिक क्षमता और नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों के स्तर पर भी सशक्त किया जा रहा है। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। वहीं समान नागरिक संहिता के माध्यम से सभी वर्गों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं की संख्या इतनी अधिक है कि यदि वे एक-एक योजना का उल्लेख करने लगें तो समय कम पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए ये योजनाएं केवल सरकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि मातृशक्ति को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान करने की प्रतिबद्धता हैं।

34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, रोजगार प्राप्त करे और अपने परिवार का सहारा बने। इसके विपरीत बच्चे के पढ़-लिखने के बाद भी रोजगार के लिए भटकना मां के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है। सरकार ने इसी पीड़ा को समझते हुए अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल रोजगार देने की बात नहीं की, बल्कि भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार भी किए हैं। नकल विरोधी कानून लागू किया गया, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई तथा योग्य युवाओं के साथ अन्याय रोकने के लिए कठोर व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। आज प्रदेश का युवा यह विश्वास कर सकता है कि उसकी मेहनत का परिणाम उसकी योग्यता तय करेगी, न कि किसी नकल माफिया या भ्रष्ट व्यवस्था का प्रभाव।

मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, एक भाई के रूप में आपके बीच आया हूं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के रक्षाबंधन समारोह में वे केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक भाई के रूप में अपनी बहनों के बीच उपस्थित हैं। उन्होंने मातृशक्ति से कहा कि प्रदेश की किसी भी बहन या बेटी को कभी कोई परेशानी हो तो वह निःसंकोच अपनी बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनकी समस्या का संज्ञान लेकर उसके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा और वे एक भाई होने के अपने दायित्व को निभाने का पूरा प्रयास करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए बहनों का विश्वास और स्नेह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां बेटियां सुरक्षित हों, बहनें आत्मनिर्भर हों, माताएं सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें और प्रदेश का युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने मातृशक्ति से आशीर्वाद, सहयोग और विश्वास की अपेक्षा की।

रक्षाबंधन पर महिलाओं को निःशुल्क रोडवेज यात्रा की सौगात
मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को विशेष सौगात देते हुए 28 और 29 अगस्त को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा की घोषणा की। इस सुविधा से प्रदेश की महिलाएं रक्षाबंधन के अवसर पर अपने मायके और परिवारजनों से मिलने के लिए सुगमता से यात्रा कर सकेंगी। सरकार ने इस सुविधा के माध्यम से रक्षाबंधन के पर्व को मातृशक्ति के लिए और अधिक सुविधाजनक एवं आत्मीय बनाने का प्रयास किया है।

चौधरी फार्म, जीएमएस रोड में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम के आयोजक जोगिंदर सिंह पुंडीर, उत्तराखंड आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, अन्य जनप्रतिनिधि तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आई महिलाएं उपस्थित रहीं।

वहीं, हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराएंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की स्थिति, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग द्वारा विभिन्न जनपदों में आयोजित की जा रही प्रवासी पंचायतों, पलायन निवारण एवं स्वरोजगार जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। आयोग के सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा रिवर्स पलायन को गति देने के संबंध में विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों और योजनाओं के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य करें। विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाए। योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों अथवा बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को अपने गांव में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने, उनकी गुणवत्ता एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल रोजगार उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि गांवों में बेहतर आजीविका, सुविधाएं और संभावनाएं विकसित करने से संभव होगा। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परिणामोन्मुखी कार्य करना होगा।

देहरादून के 13 गांव में खोला जाएगा स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद विपणण के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत चौपाल 2026 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया जा चुका है। साथ ही 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता और आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है। उद्घाटन सत्र में उन्होंने देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में प्रदेश के समस्त जनपदों के स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद विपणण के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोलने की घोषणा की है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे गांव प्रदेश के विकास में सहभागी ही नहीं बन रहे हैं, बल्कि अपने सामर्थ्य और परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उत्साही युवाओं, साहसी मातृशक्ति में कुछ कर गुजरने की इच्छा और हुनर है, इसी तरह प्रदेश के स्थानीय उत्पादों में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचने की पूरी क्षमता है। जरूरत केवल इस बात कि है कि हुनर को सही दिशा मिले। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार ने ष्मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजनाष् को आगे बढ़ाने का काम किया है। योजना के जरिए सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड का युवा रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। साथ ही किसानों और महिलाओं की आर्थिक स्थित मजबूत हो। ष्मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजनाष् इसी सोच को धरातल पर उतारने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने में मदद दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। वहीं, 3 लाख से अधिक बहने लखपति दीदी बनने में सफल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति पहाड़ी मसालों से लेकर मंडुवा, झंगोरा, दालों, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पादों और स्थानीय कला तक को व्यवसाय का रूप दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि सरकार गांव के उत्पादों को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इसी दिशा में काम करते हुए हाउस ऑफ हिमालयाज नामक अंब्रेला ब्रांड तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत जैसे मंत्र दिए हैं। प्रदेश सरकार इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत है। सरकार चाहती है कि जब कोई व्यक्ति उत्तराखण्ड का उत्पाद खरीदे, तो उसे उस उत्पाद में पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस हो। इसीलिए आज प्रदेश में ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसान और उद्यमी को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिल सके।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता का एक बड़ा उद्देश्य पलायन को रोकना भी है। सरकार चाहती है कि युवा रोजगार की तलाश में अपने गांव को छोड़ने के लिए मजबूर न हों। क्योंकि गांव मजबूत होगा तो उत्तराखण्ड मजबूत होगा। इस दिशा में कार्य करते हुए सरकार ष्ग्रामोत्थान परियोजनाष् (रीप) के माध्यम से भी गांव के अति-निर्धन परिवारों को आजीविका से जोड़कर गांवों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में ष्मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपालष् आयोजित की जा रही हैं। इन चौपालों का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं के बारे में अधिक से अधिक लोग जान सकें और उनका फायदा उठा सकें। इसी उद्देश्य से प्रचार वैन को भी गांव-गांव तक भेजा जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी और महिला उद्यमियों को भी सम्मानित किया। साथ ही उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार की गई पुस्तक, वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। साथ ही एकीकृत कृषि कलस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल और शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल के साथ ही महिलाओं एचं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉडयूल का भी लोकार्पण किया।

उत्तराखंड में दिसंबर तक 15 हजार से अधिक परिवारों को मिलने जा रही पक्की छत

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) को नई गति दी है। जरूरतमंद पात्र परिवारों का अपने आशियाने का सपना साकार हो रहा है। आगामी दिसंबर माह तक 15 हजार से अधिक परिवारों को पक्की छत मिलने जा रही है। आवास विभाग ने लंबित आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अगले माह सितंबर तक की टाइम लाइन निर्धारित की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हर पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए धामी सरकार प्रतिबद्ध है। सचिव आवास डॉ आर राजेश के अनुसार प्रदेश में कुल 18 परियोजनाओं के तहत 15496 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें लगभग 84 फीसदी यानी 12948 आवासों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जबकि 1271 घरों की चाबियां भी लाभार्थियों को सौंपी जा चुकी है। इनमें 768 रुड़की और 503 लाभार्थी हरिद्वार के हैं। लंबित आवासीय परियोजनाओं को 30 सितंबर तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश कार्यदायी संस्थाओं को दिए गए हैं।

योजना के तहत कहां कितने आवास

जनपद ऊधमसिंह नगर
योजना के तहत सर्वाधिक 10200 मकान ऊधमसिंह नगर जनपद में बनाए जा रहे हैं। इनमें रुद्रपुर हाउसिंग स्कीम के 1872 आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा 1264 आवास भवानीपुर (जसपुर), 1168 उकरौली-1 (सितारगंज), 864 उकरौली-2 (सितारगंज), 1256 कनकपुर (काशीपुर), 928 मटकोटा (रुद्रपुर), 928 श्यामनगर (गदरपुर), 824 महुवाखेड़ागंज, 512 मानपुर (काशीपुर) एवं 584 गंगापुर गोसाल (काशीपुर) में पात्र लाभार्थियों को मिलेंगे।

हरिद्वार
जनपद में कुल 4528 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है, इनमें 544 मंगलौर, 448 झब्बरपुर, 1152 अन्नेखी, 1088 बेल्दी (बेलड़ी, रुड़की), 768 आवास शिकारपुर एवं 528 इंद्रलोक आवासीय योजना के तहत बन रहे हैं।

नैनीताल
जनपद के उम्मेदनगर (रामनगर) में सभी 528 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।

देहरादून
जनपद में धौलास हाउसिंग स्कीम के तहत 240 में से 180 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

कोट——–

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मंत्र ष्सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के अनुरूप विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है। प्रदेश में हजारों गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को योजना का सीधा मिला है। पात्र परिवारों की मदद के लिए योजना में अब राज्य सरकार की हिस्सेदारी को ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹75 हजार किया जा रहा है।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड