चम्पावत में तेजी से विकास के लिए पूंजीगत व्यय व मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देशः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज जिला सभागार चम्पावत में जिले की सभी प्रमुख विकास योजनाओं, जनपदीय नवाचारों, मुख्यमंत्री घोषणाओं, केंद्र-राज्य व्यय तथा जनपदीय श्रेष्ठ प्रथाओं की व्यापक समीक्षा की।

उन्होंने विभागवार कार्यों की प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी ली और अधिकारियों को योजनाओं को समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने गोल्ज्यू कॉरिडोर, कृषि महाविद्यालय, पैरामेडिकल कॉलेज, छमनिया स्पोर्ट्स महाविद्यालय, यू०यू०एस०डी०ए० पेयजल योजना, एनएच स्वाला सुधार योजना व अन्य पर चर्चा की।

इन सभी योजनाओं का संपूर्ण विवरण जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। बैठक से पूर्व मुख्य सचिव ने कलेक्ट्रेट परिसर में लगे विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया, जिनमें एनआरएलएम, उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड, डेयरी, कृषि, मत्स्य, रेशम, बागवानी, उद्योग, अक्षय ऊर्जा एवं अन्य विभाग शामिल थे।

उन्होंने स्टॉलों पर प्रदर्शित नवाचार, उत्पादों और विभागीय उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की तथा विभागों को इन नवाचारों को और अधिक विस्तार एवं प्रोत्साहन देने के निर्देश भी दिए। इसके उपरांत मुख्य सचिव ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

जिला सभागार में उन्होंने “आदर्श चम्पावत” का लोगो अनावरण भी किया।

बैठक में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जिले में चल रहे प्रमुख नवाचारों-ज्ञान केंद्र लाइब्रेरी, ज्ञान सेतु पुल, कम्प्यूटर ऑन व्हील, पिरुल ब्रिकेटिंग यूनिट आदि की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्य सचिव ने पंचेश्वर में एंग्लिंग पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष वार्षिक एंगलर्स मीट आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने चम्पावत-लोहाघाट मास्टर प्लान की समीक्षा करते हुए कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएँ-विशेषकर रेलवे विस्तारकृमास्टर प्लान में सम्मिलित की जाएं।

उन्होंने अंडरग्राउंड विद्युतिकरण कार्यों की समीक्षा कर मेंटेनेंस हेतु एक सुव्यवस्थित दीर्घकालिक योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूंजीगत व्यय बढ़ाया जाए, कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए, वर्क प्लान के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य किए जाएं, पब्लिक ग्रीवांस व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए चम्पावत को एक आदर्श, योजनाबद्ध एवं तेज गति से विकसित होने वाले जनपद के रूप में स्थापित करे।

इस दौरान कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड की धामी सरकार में मेडिकल शिक्षा में हुआ सुधार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के बाद उत्तराखंड में मेडिकल एजुकेशन का विस्तार अभूतपूर्व रफ्तार पकड़ चुका है। राज्य सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लक्ष्य की ओर तीव्रता से बढ़ रही है, और उसी अभियान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना है सीमांत पिथौरागढ़। कठिन भूगोल और सीमित संसाधनों के बावजूद यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यह परियोजना अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है।

मेडिकल कॉलेज परिसर अब लगभग पूरा आकार ले चुका है। विशाल इमारतें, सुव्यवस्थित ब्लॉक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर—यह सब पिथौरागढ़ को पहाड़ का एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र बनाने की दिशा में बड़े कदम साबित हो रहे हैं। स्थानीय जनता इस परियोजना को लेकर काफी उत्साहित है। लोगों की मानें तो मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए हल्द्वानी, देहरादून या बाहरी राज्यों की ओर जाने की मजबूरी खत्म होगी। रोजगार, व्यवसाय और आवागमन के नए अवसर भी जिले में उभरेंगे। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अगर निर्माण की यही गति बनी रही तो यह लक्ष्य समय पर पूरा होता नजर आ रहा है।

पेयजल निगम की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट बताती है कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के अधिकांश प्रमुख ब्लॉक 70 से 95 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं। यह न केवल विभाग की कार्यकुशलता का प्रमाण है, बल्कि सीमांत जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का भविष्य भी उज्जवल होने जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार फैकल्टी ब्लॉक, लैबोरेट्री ब्लॉक और परीक्षा–लेक्चर थिएटर ब्लॉक 65 से 80 प्रतिशत तक बन चुके हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में भी 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन भवनों के लगभग तैयार हो जाने से आने वाले दिनों में फैकल्टी नियुक्ति, विभागों की स्थापना और शैक्षणिक सत्र शुरू करने की दिशा में बड़ा रास्ता साफ होगा।

हॉस्टल भवनों में निर्माण कार्य सबसे तेज रहा है। बॉयज़ हॉस्टल 90 प्रतिशत और गर्ल्स हॉस्टल 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। गर्ल्स डाइनिंग ब्लॉक 78 प्रतिशत और बॉयज़ डाइनिंग 35 प्रतिशत निर्माण स्तर पर है। वहीं आवासीय ब्लॉकों में टाइप-6 और टाइप-4 श्रेणियां 85 से 96 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं। यह पूरी संरचना मेडिकल कॉलेज के संचालन को सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इससे डॉक्टरों, नर्सों, फैकल्टी और छात्रों को बेहतर रहने की व्यवस्था उपलब्ध होगी।

अस्पताल परिसर में भी प्रगति उल्लेखनीय है। इमरजेंसी ब्लॉक रिमॉडलिंग 90 प्रतिशत और IPD-1 में 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। OPD-2 (35%), जूनियर रेजिडेंट हॉस्टल (20%), और इंटर्न होस्टल (25–65%) में काम जारी है। कुछ नए ब्लॉक जैसे IPD-2, IPD-3, नर्स हॉस्टल, BMW ब्लॉक और मोर्चरी अभी शुरुआती चरण में हैं, लेकिन विभाग का दावा है कि जल्द ही इनके निर्माण में भी तेजी आएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि, “पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री धामी जी की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। सीमांत जिले में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है। अधिकांश प्रमुख ब्लॉकों में तेज़ प्रगति हुई है और शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज बनाना नहीं, बल्कि इसे राज्य का ‘मॉडल मेडिकल इंस्टीट्यूट’ बनाना है। आने वाले वर्षों में यहाँ चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत केंद्र विकसित होगा।”

सीएस ने चंपावत में गोल्ज्यू कॉरिडोर का किया भ्रमण, सौंदर्यीकरण को दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज चम्पावत स्थित ऐतिहासिक गोल्ज्यू मंदिर एवं प्राचीन बालेश्वर मंदिर में दर्शन कर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

गोल्ज्यू मंदिर परिसर में उन्होंने प्रस्तावित गोल्ज्यू कॉरिडोर परियोजना का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। अधिशासी अभियंता लोनिवो मोहन पलड़िया ने मुख्य सचिव को परियोजना के सभी घटकों, संरचनाओं और कार्ययोजना की विस्तृत प्रस्तुति दी।

मुख्य सचिव ने कॉरिडोर परिसर का स्वयं भ्रमण कर प्रस्तावित निर्माण, सौंदर्यकरण एवं सुगमता बढ़ाने वाले कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉरिडोर के समस्त विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में, उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ।

इसके उपरांत मुख्य सचिव बर्द्धन ने बालेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण कर मंदिर एवं नौले के सौंदर्यीकरण की आवश्यकताओं का अवलोकन किया। उन्होंने पुरातत्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मंदिर के प्राकृतिक व सांस्कृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि गोल्ज्यू मंदिर एवं बालेश्वर मंदिर दोनों ही सांस्कृतिक आस्था और लोक परंपराओं के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन धरोहरों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और बेहतर सुविधाओं के विकास से चम्पावत जिले में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं और अधिक सशक्त होंगी, जिससे स्थानीय रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।

निरीक्षण के दौरान कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव बर्द्धन का चम्पावत दौरा, विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा, प्रगति में तेजी के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के तहत एन०एच०पी०सी० बनबसा हेलीपैड पहुँचे, जहाँ कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।

एन०एच०पी०सी० सभागार बनबसा में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने चम्पावत जिले में संचालित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की प्रगति का व्यापक आकलन किया।

बैठक में शारदा कॉरिडोर, इनलैण्ड पोर्ट अथॉरिटी, टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन, बाढ़ प्रबंधन कार्य, टनकपुर/बनबसा वाटर सप्लाई स्कीम, आई०एस०बी०टी टनकपुर निर्माण, तथा ब्रिडकुल द्वारा बनाए जा रहे पुलों सहित विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने शारदा रिवर फ्रंट एवं एडजॉइनिंग प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को और सुदृढ़ बनाने, पूर्णागिरि रोपवे को शारदा कॉरिडोर के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित समयसीमा में पूरा करने तथा रोपवे निर्माण कंपनी को प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन के संदर्भ में चम्पावत और लोहाघाट के साथ-साथ अल्मोड़ा को जोड़ने हेतु विस्तृत एलाइमेंट तैयार करने के भी निर्देश दिए।

बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को पारंपरिक तरीकों से हटकर कम लागत में प्रभावी प्रोटेक्शन मॉडल अपनाने के निर्देश दिए। साथ ही 5 करोड़ से कम लागत वाले कार्यों को मुख्यमंत्री घोषणा के माध्यम से अनुमोदित करवाकर त्वरित गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने डिप्टेश्वर और कुर्मू झील परियोजनाओं की प्रगति के साथ साथ टनकपुर और बनबसा वाटर सप्लाई योजनाओं, आईएसबीटी टनकपुर तथा ब्रिडकुल के पुलों की प्रगति में और तेजी लाने को भी कहा।

इस दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, एन०एच०पी०सी० पावर स्टेशन प्रमुख ऋषि रंजन आर्य, शारदा कॉरिडोर से सत्यजीत राय एवं राजीव रंजन, एनएचएआई के पीडी जोगेंद्र शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष टनकपुर विपिन कुमार, बनबसा अध्यक्ष रेखा देवी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

हरिद्वार में गन्ने भाव ऐतिहासिक रूप से बढ़ाने पर सीएम धामी का किसानों ने किया भव्य स्वागत

हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी हेलिपैड पर आज किसानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का उत्साहजनक स्वागत किया। किसानों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय अधिकारियों ने फूलों की माला पहनाकर, पुष्पवर्षा कर और गन्ना भेंट कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। उपस्थित किसानों ने सम्मान स्वरूप उन्हें “किसान पुत्र” की उपाधि से सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने स्वागत और सम्मान प्रकट किए जाने पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों व किसानों का आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा कि सरकार किसानों के हित में समर्पित है और किसानों की आय बढ़ाने व उनकी फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों की मांगों व भावना के अनुरूप गन्ने का समर्थन मूल्य ऐतिहासिक रूप से ₹405 प्रति क्विंटल तय किया गया है-जो पूर्व की तुलना में ₹30 अधिक है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की प्राथमिकता है कि चीनी मिलों द्वारा किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान सुनिश्चित हो। जहाँ कहीं भी भुगतान या क्रय में कमी प्रतीत होती है, उसे तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार मिलकर किसान हितकारी नीतियों-जैसे किसान सम्मान निधि, समर्थन मूल्य निर्धारण और समय पर भुगतान-के माध्यम से किसान की आय बढ़ाने पर कार्य कर रही हैं।

उन्होंने लक्सर क्षेत्र के गंगदासपुर की सड़क ऊँची करने की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने कहा कि इकबालपुर एवं सितारगंज के बंद चीनी मिलों के कारण हुई समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार कदम उठा रही है और प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद के नेतृत्व में भारी संख्या में आए जनपद के किसानों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में किसान हित के संवर्धन हेतु अनेक सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं और गन्ने के भाव में यह ऐतिहासिक वृद्धि किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।

कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक प्रदीप बत्रा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, मेयर रूड़की अनिता अग्रवाल, उपाध्यक्ष/मैलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित अनेक जनप्रतिनिधि व भारी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

शारदा करिडोर, इको-टूरिज्म व आधारभूत ढांचों की समीक्षा हेतु मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज टनकपुर/शारदा बैराज, शारदा घाट, किरोड़ा नाला, बूम, बाटनागाड़ एवं श्यामलाताल क्षेत्र का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर विकास एवं बाड़ सुरक्षा कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की।

टनकपुर/शारदा बैराज के निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने यहां पर्यटन एवं एरो स्पोर्ट्स की संभावनाओं की समीक्षा की।

शारदा घाट, टनकपुर स्थित शारदा कॉरिडोर परियोजना की जमीनी स्थिति का अवलोकन करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने ब्रिडकुल के अधिकारियों से 480 मीटर लम्बे स्पान पुल की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा निर्माण कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने बूम व बाटनागाड़ क्षेत्रों में हो रहे भू-कटाव का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों को पूर्ण चौनलाइजेशन के बाद प्रभावी बाड़ सुरक्षा कार्य करने के निर्देश दिए। शारदा नदी के तट पर पहुंचकर उन्होंने सिंचाई विभाग को कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा।

माँ पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने बाटनागाड़ क्षेत्र का निरीक्षण किया और मार्ग सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना अनुसार चम्पावत जनपद में विकसित किए जा रहे Spiritual Economic Zone एवं Eco Tourism को मजबूत करने हेतु मुख्य सचिव ने श्यामलाताल का निरीक्षण किया।

यहां उन्होंने कृषि, उद्यान एवं एनआरएलएम द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा लाल चावल, लाल धान, मधुमक्खी पालन, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन और बाजार उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मुख्य सचिव को श्यामलाताल सहित सभी स्थलों पर चल रहे विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

निरीक्षण के दौरान कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने चम्पावत के खेल प्रतिभाओं को किया सम्मानित

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज चम्पावत जनपद की उभरती खेल प्रतिभाओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु सम्मानित किया।

इस अवसर पर विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों एवं कोच को मेडल एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्य सचिव ने चम्पावत की उभरती (नेशनल) प्रतिभाओं को सम्मानित करते हुए प्रिंस खोलिया (ब्रॉन्ज मेडल), दीपांशु जोशी (सिल्वर मेडल), अक्षत बोहरा (ब्रॉन्ज मेडल), अंशिका धामी (नॉर्थ इंडिया गोल्ड मेडल) और हर्षित थापा (जूनियर नेशनल ब्रॉन्ज मेडल) को एक साथ सम्मानित किया।

इसके साथ ही अर्जुन सिंह एवं तुषार भट्ट को विद्यालय स्तर से नेशनल प्रतियोगिताओं हेतु चयनित होने पर सम्मानित किया गया।

मुख्य सचिव ने खिलाड़ियों के व्यक्तिगत कोच ललित कुंवर एवं कराटे कोच विजय रावत को भी खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु शॉल एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।

उन्होंने जिला क्रीड़ा अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट को भी खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु मुख्य सचिव ने बूम फॉरेस्ट गेस्ट हाउस परिसर में एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत हरसिंगार (पारिजात) का पौधा रोपा।

कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत ने भी इस अवसर पर रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि खेल और पर्यावरण-दोनों ही क्षेत्र समाज को नई दिशा देते हैं, इसलिए युवाओं को स्वस्थ वातावरण और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

इस दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु कई छात्रवृत्ति व प्रोत्साहन योजनाएँ संचालितः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान एवं विकास हेतु एक उच्च स्तरीय आयोग के गठन की घोषणा की।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विद्वानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “भारतीय ज्ञान परंपरा- वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित यह सम्मेलन भारतीय सभ्यता की गौरवमयी जड़ों को विश्व पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विद्वानों द्वारा संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जो एक प्रेरणादायी पहल है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके लिए संस्कृत भाषा हमेशा से प्रेरणा का विषय रही है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा के दौरान कक्षा 9 तक संस्कृत का अध्ययन किया और उस दौरान सीखे गए श्लोक, व्याकरण एवं भाषा की मधुरता आज भी स्मरण में है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और विज्ञान का आधार है, जिसने प्राचीन मानव सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि विश्व की अनेकों भाषाओं की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हुई हैं। वेद, पुराण, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, दर्शन, गणित, साहित्य, विज्ञान और खगोलशास्त्र जैसे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में रचे गए, जिसने भारत की वैचारिक धरोहर को समृद्ध किया।

मुख्यमंत्री ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोपीय विद्वानों द्वारा संस्कृत साहित्य में बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने संस्कृत आधारित ज्ञान को विश्व में प्रसारित किया, जहाँ से चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, चाणक्य, ब्रह्मगुप्त और पाणिनि जैसे महान विद्वानों ने जन्म लिया। संस्कृत केवल विज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि नीति, मानवीय मूल्यों और वैश्विक बंधुत्व का संदेश देने वाली भाषा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु कई सार्थक प्रयास जारी हैं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया है। ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स, ऑनलाइन साहित्य उपलब्धता जैसी पहलों से संस्कृत को नई पीढ़ी तक सरल रूप में पहुंचाया जा रहा है। कर्नाटक के मट्टूर गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत आज भी दैनिक जीवन की भाषा बन सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लोकसभा की कार्यवाही के संस्कृत अनुवाद की पहल भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत का केंद्र रहा है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करना इसी विरासत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को प्रति माह 251 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर एससी/एसटी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत संस्कृत विषय के एससी/एसटी विद्यार्थियों को समान आर्थिक सहायता दी जा रही है। संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 5100, 4100 और 3100 रुपए की पुरस्कार राशि दी जा रही है। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और रघुनाथकीर्ति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशालाएँ एवं छात्र प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न कार्यक्रमों का लगातार आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने का संकल्प लिया है, जिससे देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास और मजबूत होंगे। साथ ही संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि, जिसने वेदों और ऋषि-मुनियों के ज्ञान को जन्म दिया, वहाँ संस्कृत को समृद्ध करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक दिन संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा न रहकर आम बोलचाल की भाषा के रूप में भी स्थापित होगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश सचिव (भारत सरकार) मीना मल्होत्रा, सचिव संस्कृत उत्तराखंड दीपक गैरोला, संस्कृत विश्वविद्यालय कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोभाल सहित विभिन्न देशों से आए वक्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

अभाविप के अधिवेशन में पहुंचकर सीएम धामी ने किया पदाधिकारियों का स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज परेड ग्राउण्ड, देहरादून में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 71 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रो. यशवंत राव केलकर युवा पुरुस्कार से गोरखपुर के श्रीकृष्ण पांडेय को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि पांडेय ने ‘बाल भिक्षावृत्ति निर्मूलन, ‘निस्सहाय मनोरोगियों की सेवा’ तथा ‘कारागार बंदियों के पुनर्वास’ की दिशा में कार्य करते हुए सामाजिक उत्तरदायित्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने देशभर से आये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वे भी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रूप से कार्य करते थे। उन अनुभवों ने उन्हें नेतृत्व और संगठन की समझ देने के साथ ही समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया। वे मूल्य और आदर्श उनके जीवन की आधारशिला की तरह हैं, उन्हें प्रतिदिन अनुशासन के साथ सेवा पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह राष्ट्रीय अधिवेशन कोई साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि राष्ट्रनिर्माण के पवित्र यज्ञ के प्रति समर्पित ऊर्जावान युवाओं का महासंगम है।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस मंच से निकलने वाले विचार और संकल्प राष्ट्र निर्माण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे और देश के विकास और सामाजिक प्रगति को नई दिशा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का निर्माण हुआ, देश एक नए युग की ओर बढ़ रहा था। ऐसे समय में राष्ट्र निर्माण, समाज सुधार और सांस्कृतिक जागरण के लिए एक संगठित, जागरूक, संस्कारित और राष्ट्रवादी छात्रशक्ति की आवश्यकता थी। यह संगठन 77 वर्षों से व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का कार्य करता आ रहा है। विद्यार्थी परिषद राष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैचारिक क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन लाने वाली अग्रणी शक्ति बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है, जो अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के बल पर सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने की क्षमता रखती है। इस ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन से देश पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित होगा। इस ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करके ही हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति मानकर विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में निरन्तर कार्य किये जा रहा है। आज स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, फिट इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से युवाओं को उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

नजरियाः पीएम मोदी ने मन की बात में की उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की ब्रॉडिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष स्नेह को प्रकट करते हुए राज्य में विंटर टूरिज्म, साहसिक खेलों, वेडिंग डेस्टिनेशन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए, देशवासियों से सर्दियों के सीजन में हिमालय की वादियों का अनुभव लेने की अपील की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उत्तराखंड टूरिज्म के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेस्डर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात” कार्यक्रम में करीब ढाई मिनट उत्तराखंड को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को खूब लुभा रहा है। सर्दियों के मौसम में औली, मुनस्यारी, दयारा, चोपता जैसी जगहें लोकप्रिय हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही पिथौरागढ़ में साढ़े 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई ऑल्टीट्यूट अल्ट्रा रन मैराथन आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 18 राज्यों से 750 से अधिक एथिलीट ने भाग लिया। 60 किमी लंबी आदि कैलाश परिक्रमा रन का प्रारंभ कड़कड़ाती ठंड में सुबह पांच बजे हुआ, इतनी ठंड के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साद देखते ही बनता था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश की यात्रा पर प्रतिवर्ष मात्र दो हजार लोग ही आते थे, अब यह संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में उत्तराखंड विंटर गेम्स का भी आयोजन करने जा रहा है, जिसमें प्रतिभाग करने के लिए देशभर के खिलाड़ी, एडवेंचर प्रेमी और खेलों से जुड़े लोग उत्साहित हैं। उन्होंने उत्तराखंड में बढ़ती पर्यटन आधारभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने विंटर टूरिज्म को बढावा देने के लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष तौर पर फोकस किया है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने होम स्टे के लिए नई पॉलिसी भी बना दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग की ब्रांडिंग करते हुए कहा कि सर्दियों की सुनहरी धूप और पहाड़ों से उतरते कोहरे के बीच, उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। खासकर गंगा जी के किनारे अब खूब डेस्टिनेशन वेडिंग हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि वो, सर्दियों में कहीं जाने का विचार कर रहे हैं तो हिमालय की वादियों को अपने विकल्प के रूप में जरूर शामिल करें, हिमालय की वादियां आपको जीवनभर साथ चलने वाली अनुभूतियों से भर देंगी।

पीएम के दौरे से बढ़ा पर्यटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन हर बार, यहां के पर्यटन को नई गति प्रदान कर जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम की यात्रा पर आ चुके हैं, जिसके बाद इन तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री गत वर्ष उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन का शुभारंभ करने उत्तरकाशी के मुखबा गांव में पहुंचे, इसके बाद से पूरी हर्षिल घाटी में पर्यटन गतिविधियों में तेजी नजर आ रही है। जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

धामी सरकार के कार्यों पर पीएम की मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में गत वर्ष से सरकार शीतकालीन यात्रा भी संचालित कर रही है। सरकार राज्य में वेडिंग डेस्टिनेशन को भी बढ़ावा दे रही है, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए, एक तरह से धामी सरकार के कार्यों पर अपनी सकारात्मक मुहर लगा दी है।

देवभूमि उत्तराखंड के सतत विकास और संभावनाओं को विश्व पटल पर रेखांकित करने के लिए समस्त प्रदेशवासी प्रधानमंत्री के आभारी हैं। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुसार उत्तराखंड को प्राकृतिक, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री