सरकार ला रही नजूल नीति, 1.50 लाख लोगों को मिल सकती है राहत

राज्य सरकार नजूल भूमि पर काबिज लोगों को बड़ी राहत देने जा रही है। सरकार जल्द ही नजूल नीति लाने जा रही है। शासन स्तर पर नीति लाने को लेकर कसरत शुरू हो गई है। 2009 की नजूल नीति के तहत सरकार ने लीज और कब्जे की भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया आरंभ की थी, लेकिन मामला न्यायालय में चला गया था। तब से सरकार नई नजूल नीति को लेकर असमंजस में रही।
अब त्रिवेन्द्र सरकार नजूल नीति को लाने जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नजूल नीति लाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विधिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नजूल नीति का प्रस्ताव तैयार कर रही है। वर्तमान में सरकार नजूल की भूमि केवल सरकारी कार्यों के लिए ही आवंटित कर सकती है। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि हम जल्द ही नई नजूल नीति लाने जा रहे हैं। इससे लोगों को राहत मिलेगी। सरकारी भूमि का उपयोग भी हो सकेगा। अधिकारियों को नीति का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं सचिव आवास शैलेश बगौली ने बताया कि नजूल नीति लाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं, इस पर कार्यवाही चल रही है। इसके सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। 
वहीं, सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों को नजूल नीति को तैयार करते समय सभी विधिक और कानूनी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने को कहा है। सरकार की मंशा है कि नीति इतनी प्रभावी हो कि उसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके। बता दें कि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के अलावा नैनीताल जिले के तराई क्षेत्र में सबसे अधिक नजूल भूमि है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 392,204 हेक्टेयर नजूल भूमि है। इस भूमि के बहुत बड़े हिस्से पर डेढ़ लाख से अधिक लोग काबिज हैं।
सरकार नजूल नीति के तहत इस भूमि को फ्री होल्ड कराना चाहती है। वहीं पूर्व में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी नजूल नीति लाने को लेकर मुख्यमंत्री से सिफारिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जिस तरह दिल्ली में कब्जेदारों को राहत दी गई, उसी तरह नजूल भूमि को फ्री होल्ड किया जा सकता है।

अब निजी अस्पताल भी कर सकेंगे कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज

राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने की छूट दे दी है। अब निजी चिकित्सा विश्वविद्यालय और कॉलेज से संबद्ध अस्पताल भी संक्रमित मरीज का इलाज कर सकेंगे। सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। 
प्रदेश सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 21 अगस्त को गाइडलाइन जारी की थी, लेकिन प्रदेश में नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को ही कोरोना मरीजों का इलाज करने की अनुमति दी गई थी। प्रदेश में एनएबीएच से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों की संख्या मात्र तीन है। सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी की ओर से जारी आदेश के अनुसार निजी चिकित्सा विश्वविद्यालय और कॉलेजों से संबद्ध निजी अस्पतालों को भी कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज करने की अनुमति दे दी गई है।
अस्पतालों को वास्तविक और न्यूनतम दरों पर ही कोरोना मरीज का इलाज करना होगा। वहीं, केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार की ओर से दी गई छूट से अब प्रदेश में कई निजी अस्पताल कोरोना मरीज का इलाज कर सकेंगे।

पुरानी पेंशन योजना के लिए आवाज उठा रहे कार्मिकों को रावत का समर्थन

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पुरानी पेंशन योजना के लिए आवाज उठा रहे कार्मिकों को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वह लोकसभा और विधानसभा से बाहर रहकर भी कर्मचारियों के हिमायती हैं और पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने के पक्ष में हैं।
सोशल मीडिया में पुरानी पेंशन योजना के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री ने पोस्ट किया कि वर्ष 1999 में कर्मचारी अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। भाजपा के चुनाव जीतने के बाद वाजपेयी सरकार ने पब्लिक सेक्टर की इकाइयों को निजी पूंजीपतियों को बेचना शुरू कर दिया। तात्कालिक पेंशन योजना के स्थान पर एक नई पेंशन योजना लेकर आए। आज केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारी तड़प रहे हैं। रावत के मुताबिक 2019 में भी उन्होंने हल्द्वानी में एक सभा में कहा था कि मोदी के मोहनास्त्र में फंसकर हमें न नकारें। पूर्व सीएम हरीश रावत का ये भी कहना है कि वह लोकसभा और विधानसभा से बाहर रहकर भी कर्मचारियों के हिमायती हैं और पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने के पक्ष में खडे हैं।

भगत के कोरोना संक्रमित होने से नेता, कार्यकर्ता और पत्रकारों में चिंतित

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत कोरोना संक्रमित हुए हैं। उन्होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया पर साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्होंने पिछले सप्ताह उनके संपर्क में आए सभी पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से कोरोना टेस्ट करवाने की अपील भी की है। बता दें कि बंशीधर भगत के बेटे विकास भगत की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।
सूत्रों के अनुसार, विकास भगत को तीन दिन से बुखार था। उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में प्राइवेट रूम में भर्ती किया गया। उनका सैंपल जांच को भेजा गया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। विकास भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही विधायक प्रतिनिधि भी हैं। एसटीएच के एमएस डॉ. जोशी ने बताया कि विकास भगत की हालत ठीक है।
वहीं अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बंशीधर भगत व उनके बेटे की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन सभी लोगों में चिंता है जो उनके गृह प्रवेश की पार्टी में शामिल हुए थे। भगत ने 21 अगस्त को यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास में गृह प्रवेश पर सहभोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में उनके बेटे भी थे। हालांकि कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया था। सभी अतिथि आयोजन में मास्क लगाकर पहुंचे थे। कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सरकार के कुछ मंत्री और पत्रकार भी मौजूद थे। इतना ही नहीं राष्ट्रीय महामंत्री संगठन शिव प्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार, पार्टी के प्रदेश महामंत्री, प्रदेश मीडिया प्रभारी व कई अन्य नेताओं ने कार्यक्रम में शिरकत की थी।
इसके बाद भगत ने 24 अगस्त को मीडिया कर्मियों को सहभोज के लिए आमंत्रित किया था। इसी आयोजन के दौरान उन्होंने विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की पार्टी में वापसी कराई थी।

महापौर के आश्वासन पर माने आंदोलनकारी

शिवाजी नगर घर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा धरना महापौर अनिता ममगाई के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। धरने पर बैठी मात्रृ शक्ति एवं तमाम आंदोलनकारियों ने धरने को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए महापौर का आभार जताया। साथ ही विश्वास जताया कि विकास की राह में उन्हें अब अपने आशियानों से वंचित नही होना पड़ेगा।
अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए महापौर अनिता ममगाई ने शिवाजी नगर घर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन कर रहे लोगों से मुलाकात की। जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि नमामि गंगे योजना के नाले टेपिंग योजना को क्षेत्रवासियों के लिए नुकसान की योजना नही बनने दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति तिनका-तिनका जोड़कर घर बनाता है। योजना से प्रभावित लोगों के घर ना उजड़े इसके लिए उन्होंने कार्यदायी संस्था पेयजल निगम के अधिकारियों से बात की है।
महापौर ने निर्देश दिये कि योजना को मूर्त रूप देने के लिए एडवांस से एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जाये ताकि नुकसान कम से कम हो जिसकी जद में आने वाले लोग इसे बर्दाश्त कर सके। महापौर की पहल और आश्वासन पर धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। इस दौरान पार्षद जयेश राणा, पार्षद विजेंद्र मोघा, पार्षद विजय बडोनी, पार्षद लव कांबोज, पार्षद गुरविंदर सिंह, सुभाष वाल्मीकि, सुरेंद्र सुमन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ने से गर्भवती महिला की हालत बिगड़ी

ऊधमसिंह नगर में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी अस्पताल की महिला लैब टेक्नीशियन ने गर्भवती का ब्लड ग्रुप गलत बताया और निजी अस्पताल ने भी ब्लड ग्रुप की बगैर जांच किए बिना महिला को ब्लड चढ़ा दिया। परिजनों का आरोप है कि गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ने से महिला की हालत बिगड़ गई। 
ग्राम गढ़ी हुसैन निवासी अजय कुमार ने विधायक आदेश चैहान को दिए पत्र में बताया कि उसकी पत्नी सविता रानी गर्भवती थी। प्रसव के लिए उसके गांव की आशा कार्यकर्ता ने सरकारी अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड बनवाया था। उसने बताया कि ब्लड ग्रुप चेक करने वाली लैब तकनीशियन ने उसकी पत्नी के कार्ड पर उसका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव लिख दिया, जबकि उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है। 5 मई 2020 को सरिता को ग्राम पंचायत की आशा कार्यकर्ता सरकारी अस्पताल साथ लेकर आई थी। महिला डॉक्टर से बात करने के बाद आशा कार्यकर्ता ने उसके शरीर में ब्लड की कमी बताकर प्रसव न होने की जानकारी दी।
उसके बाद वह सरिता को नगर के एक निजी अस्पताल में ले गया। अस्पताल की महिला डॉक्टर ने ब्लड मंगवाकर चढ़ा दिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। वह पत्नी को पीएचसी पतरामपुर ले गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया। वह अपनी पत्नी को लेकर मुरादाबाद पहुंचा। वहां एक निजी अस्पताल में जांच कराने पर ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव पाया गया। गलत ग्रुप का खून चढ़ने से उसकी पत्नी की हालत बिगड़ी है। उसने बताया कि घर बेचकर उसे पत्नी का इलाज कराना पड़ा। इस शिकायती पत्र को पढ़ने के बाद विधायक आदेश चैहान ने सरकारी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को जमकर खरी-खोटी सुनाई और घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। वहां पर एसडीएम सुंदर सिंह भी मौजूद रहे।

आखिर इंदिरा ने मुख्यमंत्री को कौन सा पद छोड़ने की नसीहत दी

नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने राज्य में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के विरोध में एक दिन का उपवास रखकर धरना दिया। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा कि मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग छोड़ देना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सीएम के पास विभाग होने के बावजूद पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कोरोना संक्रमित अस्पताल जाने तक से डर रहे हैं। उन्हें डर है कि अस्पताल जाने पर उन्हें इलाज तो नहीं मिलेगा मगर लापरवाहियों के कारण उनकी जान जरूर चली जाएगी। पहाड़ों में न संक्रमितों को इलाज मिल रहा है और न बाकी रोगों से जूझ रहे लोगों को। पहाड़ के जिलों में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा को 56 विधायकों में एक स्वास्थ्य मंत्री नहीं मिल पा रहा है तो ऐसी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं, उपवास में पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल ने कहा, कोरोनाकाल में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उसके पास इलाज का कोई विकल्प नहीं है। एआईसीसी सदस्य सुमित हृदयेश ने कहा कि कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया है। पांच माह से अस्पताल में बाकी सुविधाएं बंद है। पहाड़ों में इलाज पहले उपलब्ध नहीं था। अब एकमात्र इलाज का सहारा भी छिन गया है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव महेश शर्मा ने कहा कि कोरोना के नाम पर सरकारी की सभी योजनाएं जनता के साथ छलावा साबित हो रही हैं। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

उपनल कर्मचारियों की काम पर होगी वापसी, सीएस ने दिया आश्वासन

राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थानों में लंबे समय से कार्य कर रहे उपनल के आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किए जाने को लेकर प्रदेश सरकार हिमाचल की तर्ज पर नियमावली बनायेगी। प्रदेश सरकार ने हिमाचल सरकार में लागू नियमावली मंगाई है, जिसका अध्ययन करने के बाद एक प्रस्ताव तैयार होगा और इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। यह आश्वासन मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने उपनल कर्मचारियों के समर्थन में आये प्रतिनिधिमंडल को दिया। 
बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ विधायक पुष्कर सिंह धामी और स्वामी यतीश्वरानंद के नेतृत्व एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात की। उन्होंने मुख्य सचिव को बताया कि प्रदेश में करीब 20 हजार उपनल कर्मचारी आउटसोर्स पर सेवाएं दे रहे हैं। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। न्यायालय से भी उनके चरणबद्ध नियमितीकरण का आदेश हो चुका है। उन्हें नियमित करने पर विचार होना चाहिए।
मुख्य सचिव ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। हिमाचल में लागू नियमावली को मंगाया गया है। नियमावली का अध्ययन करने के बाद सरकार नियमावली का प्रस्ताव तैयार करके कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। दोनों विधायकों ने उपनल कर्मियों का वेतन बढ़ाये जाने पर सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपनल की महिला कार्मिकों को (सीसीएल) बाल्य देखभाल अवकाश तथा पितृत्व अवकाश देने का अनुरोध किया। 
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को उन उपनल कर्मचारियों के नामों की सूची भी सौंपी, जिन्हें नौकरियों से हटाया गया है। सीएस ओम प्रकाश ने आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार के शासनादेश के तहत हटाए गए उपनल कर्मचारियों को वापस लिया जा रहा है।
वहीं, प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव सैनिक कल्याण राधा रतूड़ी से भी मुलाकात की। उनसे शिकायत की गई कि 10 अगस्त के आदेश के बाद भी विभाग हटाए गए कर्मचारियों की बहाली नहीं कर रहे हैं। एसीएस ने कहा कि शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने को लेकर जल्द ही विभागाध्यक्ष को एक पत्र जारी किया जाएगा। सदस्यों ने एसीएस को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई। 

बाल आयोग ने लिया संज्ञान, व्हाट्सअप माध्यम को नही माना ऑनलाइन क्लास

बाल आयोग की ओर से अभिभावक, स्कूल प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों के वेबीनार में प्राइवेट स्कूलों की ट्यूशन फीस को लेकर मनमानी के साथ ही ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर व्हाट्सअप से पढ़ाने का मामला सामने आया है। आयोग की ओर से इस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
वेबीनार में अभिभावकों ने बताया कि कई स्कूल ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर बच्चों को व्हाट्सअप के माध्यम से पढ़ा रहे हैं। वहीं, स्कूल की ओर से 4 दिन के भीतर परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को जांच कर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। 
वेबीनार में ये शिकायतें भी आईं
– हरिद्वार के एक अभिाभवक ने बताया कि उनके स्कूल की ओर से उन्हें आधी तनख्वाह दी जा रही है।
– हरिद्वार के एक अभिभावक ने कहा कि उनका बच्चा ऑनलाइन क्लास नहीं पढ़ पा रहा है और ना ही स्कूल द्वारा उसे पढ़ाया जा रहा है, इसलिए वह स्कूल से टीसी लेना चाहते हैं, लेकिन स्कूल टीसी नहीं दे रहा है।
– एक अन्य अभिभावक ने बताया कि स्कूल द्वारा रीएडमिशन के नाम पर 25 से 30 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
– बैठक में एक विद्यालय के शिक्षकों द्वारा बताया गया कि उनके स्कूल प्रबंधन की ओर से उनके वेतन में भारी कटौती कर दी गई है, इसके अलावा पिछले 7 महीने से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष ने जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
– कई अभिभावकों ने कहा कि प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस से अधिक फीस वसूल रहे हैं। 
– अधिवक्ता पुनीत कंसल ने बताया कि अभिभावकों की समस्या के आधार पर उनके द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा गया था, जिस पर स्कूल की फीस का निर्धारण 500 से 700 किया गया। आयोग की अध्यक्ष ने अधिवक्ता से पत्र उपलब्ध कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि वह पत्र उपलब्ध कराया जाए, उसका संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के कर्मचारियों को स्कूलों को ट्यूशन फीस देनी चाहिए। जबकि जो अभिभावक किसी कारण से फीस देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें स्कूलों के प्रिंसिपल को इस संबंध में प्रार्थना पत्र देना चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार आनंद भारद्वाज ने कहा कि आरटीई के तहत अब तक स्कूलों को 9 करोड़ का भुगतान किया गया है। वहीं, अधिक फीस मामले में स्कूलों पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया जा रहा है। बैठक में शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

एहतियात के तौर पर मुख्यमंत्री होम क्वारंटीन हुए

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के वाहन चालक और निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री का टेस्ट निगेटिव आया है। लेकिन उन्होंने एहतियात के तौर पर खुद को क्वारंटीन कर लिया है। इसे देखते हुए बुधवार को होने वाली प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक भी स्थगित कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने उनके चालक व पीएसओ के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि की है। फिलहाल मुख्यमंत्री ने अपने सभी कार्यक्रम व बैठकें स्थगित कर दी हैं। मंगलवार अपराह्न साढ़े तीन बजे उन्हें राज्य के सभी बैंकर्स व जिलाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्वरोजगार के संबंध में बैठक करनी थी। लेकिन यह बैठक उनकी जगह अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री राधा रतूड़ी ने ली। 
इसके साथ ही बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक भी स्थगित हो गई है। अब यह बैठक दो सितंबर को होगी। इस संबंध में गोपन विभाग ने कैबिनेट बैठक का नया नोटिस जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री फिलहाल सेल्फ क्वारंटीन रहेंगे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी और आर्थिक सलाहकार भी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। 
वहीं मीडिया को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि मेरे चालक और पीएसओ कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। मेरी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। कैबिनेट बैठक में ज्यादा विषय नहीं थे। उन्हें अगली कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।