पौड़ी जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही सरकार

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने जनपद पौड़ी में पर्यटन विभाग द्वारा 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन योजना के अन्तर्गत चयनीत योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होने गुमखाल के समीप कीर्तिखाल में कीर्तिखाल से भैरंवगढ़ी रोपवे योजना के साथ ही सतपुली में 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन के अन्तर्गत विभिन्न पर्यटन योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियां से कार्य प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाये जाने के भी निर्देश दिये।
सचिव पर्यटन ने सतपुली में पर्यटन विभाग की 40 शैय्या वाले आवास गृह एवं विवाह समारोह मल्टी परक हाल के निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण कर भवन के डिजाईन एवं सुविधा के बारे में मौके पर जानकारी ली। इसके बाद उन्होने सतपुली में चयनीत पार्किग स्थल एवं सतपुली में नयार नदी के उस पार निर्माणधीन एग्लिंग हट्स कम होमस्टे व नयार नदी में बनने वाले अन्य पर्यटन विकास परक कार्यों की संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। इसके उपरान्त सचिव जावलकर दिवा की डाडा रोपवे योजना के स्थलीय निरीक्षण किया।
सचिव जावलकर ने कहा कि इस क्षेत्र में एडवेंचर टूरिज्म की अपार सम्भावनाएं है। नयार नदी में फिशिंग व एंगलिंग का अच्छा स्कोप है। विगत दिनों में पैराग्लाइडिंग व पैरासिलिंग के जो प्रयास किये गये थे, उसके भी अच्छे परिणाम आये है। कहा कि यहां पर राफ्टिंग, क्याकिंग, पैराग्लाइडिंग, पैरासिलिंग, एंगलिंग आदि की अपार सम्भावनाएं हैं, इसलिए इसे एक अच्छे डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज जीएमवीएन का टीआरएच 40 बैड कैपसिटी का उद्घाटन भी किया जा रहा है, जो थर्टीन डिस्ट्रिक्ट थर्टीन डेस्टिनेशन का पार्ट है। पैरासिलिंग के जो ट्रायल हुए थे, उसकी रिपोर्ट प्राप्त कर उसके लॉचिंग पार्ट डेवलप किया जा रहे है। कुछ रोपवे भी प्रस्तावित है, जिनका अध्ययन कर उन पर भी कार्य किया जाना प्रस्तावित है।
सचिव जावलकर ने कहा कि दीवा का डांडा से हिमालय का बहुत अच्छा दर्शन होता है और यहां पर रोपवे का प्रस्ताव दिया गया था, जिस पर कार्य चल रहा है कि किस तरह से बनाया जाय। कहा कि क्षेत्र का निरीक्षण किया जायेगा और तत्पश्चात टेण्डर प्रक्रिया की कार्यवाही की जायेगी।
इस अवसर पर जिला पर्यटन विकास अधिकारी/साहसिक खेल अधिकारी पौड़ी खुशाल सिह नेगी, उपजिलाधिकारी अपर्णा ढौंडियाल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

गुणवत्तायुक्त सस्ती दवाएं हर नागरिक का अधिकारः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से आम आदमी तक जन औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि गरीबों को गुणवत्तायुक्त सस्ती दवा उपलब्ध हो यह हमारा उद्देश्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अधिक से अधिक जन औषधि केन्द्रों की स्थापना के साथ ही रेलवे स्टेशनों पर भी जन औषधि की विपणन व्यवस्था बनाये जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से भी लोगों को जन औषधि दवा क्रय करने हेतु पहल करने में सहयोग करने को कहा।
मुख्यमंत्री आवास में जन औषधि वितरण केन्द्रों एवं इसके लिये प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये कारगर तंत्र विकसित करने से सम्बन्धित प्रस्तुतिकरण का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत गरीबों तक गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। यह व्यवस्था प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक प्रभावी हो इसके लिये प्रयास किये जाने चाहिए। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने एथिक्स ग्रुप के सीएमडी विपिन केवडिया द्वारा दिये गये प्रस्तुतिकरण का अध्ययन कर इस सम्बन्ध में कार्यवाही के निर्देश भी सचिव स्वास्थ्य को दिये।
इस अवसर पर सचिव अमित सिंह नेगी, प्रभारी सचिव डॉ. पंकज पाण्डेय, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. अमिता उप्रेती आदि उपस्थित थे।

टिहरी बांध विस्थापितों की मांग पूरी, राजस्व ग्राम बनाने की अधिसूचना जारी

शासन द्वारा जनपद देहरादून के टिहरी बांध विस्थापित क्षेत्र पशुलोक ऋषिकेश के सात गांवों तथा जनपद हरिद्वार के टिहरी विकास नगर एवं टिहरी बन्द्राकोटी को राजस्व ग्राम बनाये जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा इन गांवों के निवासियों की वर्षो पुरानी मांग पर गत माह ही इन गांवों को राजस्व ग्राम बनाये जाने की स्वीकृति प्रदान की थी। टिहरी बांध विस्थापित क्षेत्र के गांवों को राजस्व ग्राम बनाये जाने सम्बन्धी अधिसूचना जारी किये जाने पर विधायक स्वामी यतीश्वरानन्द ने गुरूवार को मुख्यमंत्री से भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्व ग्राम बनाये जाने से इन गांवों के निवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। राजस्व ग्राम बनने से ग्राम वासियों को सभी सरकारी योजनाओं, ग्राम पंचायतों के गठन आदि की सुविधायें उपलब्ध हो सकेगी।
सचिव राजस्व सुशील कुमार द्वारा जारी अधिसूचना के साथ राजस्व ग्राम बनाये गये इन गांवों- ग्राम मालीदेवल, विरयाणी पैंदार्स, असैना, लम्बोगड़ी गोजियाड़ा, सिरांई, सिरांई राजगांव, डोबरा, टिहरी विकास नगर एवं टिहरी बन्द्राकोटी में सम्मिलित किये गये गाटों की संख्या, क्षेत्रफल व नक्शा भी अधिसूचित किया गया है।
अधिसूचित राजस्व ग्रामों में टिहरी बांध विस्थापित क्षेत्र पशुलोक के ग्राम माली देवल में निर्मल ब्लाक ए व ए (ई) की 90.19 एकड़ भूमि सम्मिलित होगी जबकि ग्राम विरयाणी पैंदार्स में निर्मल ब्लाक ए की 64.69 एकड़ भूमि, ग्राम असैना में श्यामपुर ब्लाक ए 62.07 एकड़ भूमि, ग्राम लम्बोगडी गोजियाड़ा में निर्मल ब्लाक सी व श्यामपुर ब्लाक सी की 107.40 एकड़ भूमि, ग्राम सिरांई में कृषि निर्मल ब्लाक बी, आवासीय निर्मल ब्लाक बी-पार्ट-2 की 85.11 एकड़ भूमि, ग्राम सिरांई राजगांव में कृषि निर्मल ब्लाक बी, आवासीय निर्मल ब्लाक बी-पार्ट-1 की 69.61 एकड़ भूमि तथा ग्राम डोबरा में श्यामपुर ब्लाक बी की 38.14 एकड़ भूमि सम्मिलित होगी।
इसी प्रकार हरिद्वार जनपद के टिहरी बांध परियोजना विस्थापित क्षेत्र पथरी भाग 3 के पूर्व एवं पश्चिम क्षेत्र के ग्राम टिहरी विकास नगर में आदर्श टिहरी नगर के 365 गाटों की 871.58 एकड़ भूमि तथा ग्राम टिहरी बन्द्राकोटी में आदर्श टिहरी नगर के 104 गाटों की 227 एकड़ भूमि शामिल हैं।
सचिव राजस्व द्वारा आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद से नवगठित राजस्व ग्रामों से सम्बन्धित विवरण जनपद की सम्बन्धित तहसील भवन तथा सम्बन्धित ग्रामों के प्रमुख स्थान पर चस्पा कराने के साथ ही सम्बन्धित अभिलेखों में इन्द्राज कराने की भी अपेक्षा की है।

कोविड के चलते अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुख्यमंत्री ने वर्चुअल बात की

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि कोरोना संक्रमितों के उपचार मे लगे चिकित्सकों का काम तपस्या की भांति है। जिस तरह से कठिन परिस्थितियों में मरीजों के बीच में रहकर उनका ईलाज कर रहे हैं, इसे एक बड़ी तपस्या ही कहा जा सकता है। धैर्य और तत्परता से चिकित्सक अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नेे कहा कि चिकित्सक जिस मनोयोग से कार्य कर रहे हैं, विश्वास है कि हम कोविड-19 से लड़ाई में हमारी जीत अवश्य होगी। जो मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, वे जल्द स्वस्थ होकर अपने घर जायेंगे। मुख्यमंत्री ने सीएम आवास से वर्चुअल कांफ्रेंस के माध्यम से कोविड अस्पतालों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों एवं उपचाराधीन मरीजों से बात की।
मुख्यमंत्री ने दून, हल्द्वानी, श्रीनगर मेडिकल काॅलेज एवं जिला अस्पतालों में तैनात डाक्टर्स एवं मरीजों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से मरीजों की स्थिति, वंेटिलेटर, आईसीयू, आक्सीजन बैड, कोविड से निपटने के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कोविड पर नियंत्रण के लिए हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं। डाॅक्टरों द्वारा अतुलनीय योगदान दिया जा रहा है। मरीजों से बातचीत कर जिस तरह से उन्होंने अस्पतालों की व्यवस्थाओं से वे संतुष्ट हैं, इसके लिए सभी अस्पताल बधाई के पात्र हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए डाॅक्टरों द्वारा कठिन परिस्थितियों में पूरे सेवाभाव से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अस्पतालों में भर्ती कोरोना के मरीजों से मुख्यमंत्री ने इलाज, रहने एवं खाने के बारे में जानकारी ली। सभी मरीजों ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री ने दून मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष सयाना से दून मेडिकल काॅलेज की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। डाॅ. सयाना कहा कि दून मेडिकल काॅलेज आगे की चुनौतियों का समाना करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। आईसीयू बैड की संख्या बढ़ा दी गई है। 33 पेसेंट अभी आईसीयू में हैं। पीपीई किट्स, मास्क, आक्सीजन सपोर्ट सिस्टम एवं अन्य आवश्यक सामग्री की उचित व्यवस्था है। अस्पताल में भर्ती मरीजों द्वारा भी काफी सपोर्ट दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल में भर्ती कोविड के मरीज बलजीत सिंह एवं महावीर कण्डारी से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने बताया की उनका उपचार चिकित्सकों की देखरेख में सही तरीके से हो रहा है। खानपान एवं रहने की भी उचित व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी मेडिकल काॅलेज में डाॅ. परमजीत सिंह से वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में प्लाज्मा थेरेपी पर भी कार्य किया जा रहा है। लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने के लिए अपील की जा रही है। जिससे मरीज जल्द रिकवर हो जाय। मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में उपचार करा रहे जगजीवन वर्मा, धूम सिंह, नीरज, उदय सिंह से बात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इन मरीजों ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। डाॅक्टर्स द्वारा काफी अच्छी केयर की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने श्रीनगर मेडिकल काॅलेज में डाॅ. कलम सिंह बुटोला, कोटद्वार बेस अस्पताल में डाॅ. वी.सी. काला, मेला अस्पताल हरिद्वार में डाॅ. राजेश गुप्ता एवं डाॅ. देवेन्द्र रावत एवं चमोली में डाॅ. अमित जैन से बातचीत कर इन जनपदों में कोविड की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। डाॅक्टरों द्वारा जानकारी दी गई कि व्यवस्थाएं सभी अस्पतालों में ठीक है। को-माॅर्बिड पेशेंट को हायर सेंटर रैफर किया जा रहा है।
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि लोगों को अच्छा ट्रीटमेंट मिले। इसमें और जितनी सुधार की गुंजाइश होगी वह किया जायेगा। सैंपल टैस्टिंग को और बढ़ाया जायेगा। हमारे डाॅक्टर्स कोरोना से जिस तरह से जंग लड़ रहे हैं, निश्चित रूप से सभी डाॅक्टरों के प्रयास सराहनीय है।

‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2020’’ के परिणाम जारी, उत्तराखण्ड के निकायों का शानदार प्रदर्शन

‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2020’’ में उत्तराखण्ड राज्य द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर तीन पुरस्कार प्राप्त किए गए। उत्तराखण्ड राज्य द्वारा 100 से कम शहरी निकायों वाले राज्यों की श्रेणी में ‘‘बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट’’ से तीसरा स्थान प्राप्त किया। नगर पंचायत नंदप्रयाग ने देशभर की एक लाख से कम आबादी वाली निकायों में से ‘‘सिटिजन फीडबैक श्रेणी’’ में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। छावनी क्षेत्र अल्मोड़ा द्वारा ‘‘सिटिजन फीडबैक श्रेणी’’ में तीसरे स्थान पर रह कर राज्य को तीसरा पुरस्कार दिलवाया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने ये पुरस्कार प्राप्त किये ।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले निकायों को बधाई देते हुए कहा कि निकायों इसी मनोयोग से आगे कार्य करना होगा। स्वच्छता के क्षेत्र में अभी बहुत सुधार की गुंजाईश है। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों एवं निकायों की रैंकिंग में अच्छा सुधार हुआ है। इसमें और बेहतर प्रदर्शन किये जाने पर उन्होंने बल दिया। मुख्यमंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छ भारत मिशन अभियान को आगे बढ़ाने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्वच्छता के बल पर हम अनेक बीमारियों से बचाव सकते हैं।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों हेतु अत्यधिक गंभीरता से कार्य कर रही है। नगर निकायों को और भी अधिकार सम्पन्न बनाने एवं उनकी आय अर्जन के नए स्रोतों के विकास हेतु भी राज्य पर लगातार किया गया है। हमने निकायों को कहा कि स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए कार्य किए जाएं। यहां तक कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत निकायों को प्रदान किए जाने वाले अनुदान को भी सबसे पहले स्वच्छता कार्यों हेतु उपलब्ध करवाने संबंधी स्पष्ट दिशा – निर्देश जारी किए गए। इसका सीधा असर स्वच्छ सर्वेक्षण में हमारे प्रदर्शन पर पड़ा है।
नगरीय स्वच्छता की अखिल भारतीय प्रतियोगिता ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ के बहुप्रतीक्षित नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इस ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण’’ में उत्तराखण्ड राज्य की नगरीय निकायों तथा छावनी परिषदों द्वारा विभिन्न श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन किया गया है। आज ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ के परिणामों तथा ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2021’’ का टूलकिट जारी करते हुए मा0 केन्द्रीय मंत्री, आवसन और शहरी कार्य मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), भारत सरकार, श्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुरस्कार वितरित किए गए। वर्षभर चलने वाली इस राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया में देशभर के 4242 नगरों एवं 62 केन्ट बोर्ड द्वारा प्रतिभाग किया गया। गत वर्ष तक ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण’’ के परिणामों को राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता रहा है। इस वर्ष कोविड -19 संक्रमण के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में इस आयोजन को एन0आई0सी0 के सहयोग से वर्चुअल प्लेटफार्म पर ऑनलाईन आयोजित किया गया।

एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में उत्तराखण्ड का स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देहरादून का स्थान 384, रूड़की का 281, काशीपुर का 304, हल्द्वानी का 350, हरिद्वार का 376 एवं रूद्रपुर का 403वां स्थान था। जबकि 2020 में देहरादून का 124वां, रूड़की का 131वां, काशीपुर का 139, हल्द्वानी का 229, हरिद्वार का 244 एवं रूद्रपुर का 316 स्थान आया है। 50 हजार से अधिक एवं एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में रामनगर का नार्थ जोन के शहरों में 18वां, जसपुर का 56वां एवं पिथौरागढ़ का 58वां स्थान आया है। 25 हजार से 50 हजार से तक की जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में नार्थ जोन में नैनीताल का 68वां एवं सितारगंज को 106वां स्थान प्राप्त हुआ है। 25 हजार से कम जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में मुनि की रेती का 12वां, उखीमठ का 41वां, भीमताल का 50वां एवं नरेन्द्रनगर का 58वां स्थान आया है। देश भर के कुल 92 गंगा निकायों में उत्तराखण्ड से गौचर ने तीसरा, जोशीमठ ने चैथा, रूद्रप्रयाग ने पांचवा, श्रीनगर ने छटवां, गोपेश्वर ने आठवां, मुनि कि रेती ने 11 वां, बड़कोट ने 12वां , कर्णप्रयाग ने 13 वां, कीर्तिनगर ने 18वां, देवप्रयाग ने 20 वां, नन्दप्रयाग ने 22वां व टिहरी ने 28 वां स्थान प्राप्त किया।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक द्वारा राज्य की निकायों को बेहतर मार्गदर्शन करने तथा ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्य स्तरीय पी0एम0यू0 टीम को भी पुरस्कार प्रदान किया गया। अपर निदेशक शहरी विकास अशोक कुमार पाण्डे, संयुक्त निदेशक कमलेश मेहता, अधीक्षण अभियंता, रवी पाण्डेय, राज्य मिशन प्रबंधक, रवि शंकर बिष्ट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं आई0ई0सी0 विशेषज्ञ, कमल भट्ट, एम0आई0एस0 विशेषज्ञ, राकेश कुमार, कनिष्ठ सहायक, उपेन्द्र सिंह तड़ियाल एवं अनुज गुलाटी को यह पुरस्कार प्रदान किए गए।

नई शिक्षा नीति के तहत अब प्रदेश में उच्च शिक्षा आयोग का गठन करने की तैयारी

राज्य में अब उच्च शिक्षा आयोग के गठन की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही वार्षिक परीक्षा प्रणाली को खत्म कर सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने की बात भी हो रही है। सचिवालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान इन बिन्दुओं पर उच्च शिक्षा मंत्री और अधिकारियों के बीच इस पर सहमति बनती दिख रही है।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रस्तुतीकरण किया गया। जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विस्तृत अध्ययन के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं उच्च शिक्षा सलाहकार प्रोफेसर एमएसएम रावत की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। यह कमेटी 40 दिनों में अपने सुझाव प्रस्तुत करेगी। नई शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किये। जिनमें प्रमुख रूप से राज्य शिक्षा आयोग के गठन, राज्य के कई महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय व स्वायत्तशासी महाविद्यालय बनाए जाने, बहुविषय विश्वविद्यालय की स्थापना, कोर्स स्ट्रक्चर तैयार किए जाने, वार्षिक परीक्षा प्रणाली खत्म कर सेमेस्टर सिस्टम को शुरू कर क्रेडिट बेस्ड सिस्टम लागू करने, प्रत्येक जिले में समावेशी महाविद्यालय बनाए जाने पर सहमति बनी। 
बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत अध्ययन के लिए जो कमेटी गठित की गई है। उसमें राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक उच्च शिक्षा, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा, उन्नयन समिति व शासन स्तर के अधिकारी बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से यह भी बताया गया कि बहुविषयक शिक्षा के प्रावधान के तहत स्नातक तीन या चार वर्ष की अवधि की होगी। जिसमें छात्रों को किसी भी विषय या क्षेत्र में एक साल पूरा करने पर प्रमाणपत्र, दो साल पूरा करने पर डिप्लोमा, तीन वर्ष की अवधि के बाद स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। जबकि चार वर्ष के कार्यक्रम में शोध सहित डिग्री प्रदान की जाएगी। पीएचडी के लिए या तो स्नातकोत्तर डिग्री या शोध के साथ चार वर्ष की स्नातक डिग्री अनिवार्य होगी। 
इसके अलावा नई शिक्षा नीति के तहत तीन प्रकार के शिक्षण संस्थान होंगे। जिसमें अनुसंधान विश्वविद्यालय, शिक्षण अनुसंधान, स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। इसमें एफिलेटिंग विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों का कंसेप्ट समाप्त हो जाएगा।

अन्तरराष्ट्रीय मानकों के तहत कुशल युवाओं को तैयार करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय देहरादून से हरिद्वार के जगजीतपुर आईटीआई में स्थापित अन्तरराष्ट्रीय स्तर के नवीनतम उपकरणों से सुसज्जित स्मार्ट वैल्डिंग लैब का ई-लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जगजीतपुर, आईटीआई के आधुनिकीकरण से राज्य में आईटीआई के आधुनिकीकरण की अच्छी शुरूआत हुई है। हमें क्वाटिंटी के बजाय क्वालिटी एजुकेशन पर अधिक ध्यान देना होगा। उत्तराखण्ड में आईटीआई एवं पाॅलिटेक्निक में गुणातम्क सुधार की दिशा में विशेष प्रयास करने होंगे। जगजीतपुर में आईटीआई का जो आधुनिकीकरण किया गया है। इससे जो छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण लेंगे। उन्हें रोजगार के अनेक अवसर मिलेंगे। इस आईटीआई में प्रशिक्षण के लिए आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग द्वारा जिन आईटीआई के आधुनिकीरण की योजना बनाई गई, यह कार्य जल्द किया जाय। यह समय कार्य के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के लिए आईटीआई में आधुनिक यंत्रों का इस्तेमाल हो। जिससे युवाओं को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने का मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल विकास के लिए सरकार, इंडस्ट्री एवं प्रशिक्षण संस्थान आपसी सामंज्य से कार्य कर रहे हैं। इससे इंडस्ट्रियों को किस क्षेत्र में काम करने वालों की डिमांड अधिक है, किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है एवं युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर कैसे बढ़ सकते हैं, इसकी जानकारी रहेगी।
कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य में 25 आईटीआई को हाईटैक किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं के हाथ में हुनर हो। प्रधानमंत्री जी के स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रशिक्षण संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आईटीआई एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें युवाओं का कौशल विकास अच्छे तरीके से हो तो, इसमें रोजगार एवं स्वरोजगार की बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जगजीतपुर हरिद्वार में आईटीआई का जो आधुनिकीकरण किया गया है, यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वैल्डिंग एक ऐसा कार्य है, जिसकी जरूरत हर क्षेत्र में है। प्रशिक्षण संस्थानों में संख्याबल की अपेक्षा गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दिये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन डाॅ. रणजीत सिन्हा ने कहा कि श्रीनगर आईटीटाई को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जायेगा। आईटीआई के आधुनिकीकरण के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। इंडस्ट्री से निरन्तर समन्वय स्थापित किये जा रहे हैं, कि उद्योगों को किन-किन क्षेत्रों में मेन पावर की अधिक आवश्यकता है।

बाजपुर चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट की मंजूरी, बढ़ेगी आय

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में गन्ना किसानों की आर्थिकी में सुधार के लिए किसानों के व्यापक हित में गन्ने के बहुआयामी उपयोग पर ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री आवास में बाजपुर चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट की स्थापना के संबंध में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, गन्ना उत्पादन के विविधीकरण, ऊर्जा उत्पादन, एथेनॉल उत्पादन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर चीनी मिलों के संबंध में जो भी कार्यवाही की जानी है उन पर किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाजपुर चीनी मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट के लिए अपेक्षित भूमि उपलब्ध है। उन्होंने इस अवसर पर इथेनॉल प्लांट की स्थापना के संबंध में प्राज टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतीकरण का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने अन्य चीनी मिलों में भी इसकी संभावना तलाशने की बात कही। चीनी मिलों में चीनी के अलावा सीरा व बगास का भी बेहतर उपयोग हो इस दिशा में भी कार्य योजना बनाई जाए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार नरेंद्र सिंह, प्रबंध निदेशक गन्ना एवं चीनी चंद्रेश यादव, बाजपुर चीनी मिल के जीएम प्रकाश चन्द्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम की विधानसभा में हाईटेक अस्पताल के निर्माण का रास्ता साफ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन द्वारा हर्रावाला, देहरादून में 300 शैय्या युक्त शकुन्तला रानी सरदारी मैटर्निटी व कैंसर चिकित्सालय के निर्माण के लिये 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को उपलब्ध करायी गई है। मुख्यमंत्री ने इस अस्पताल के निर्माण को स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि हर्रावाला क्षेत्र में सुविधायुक्त अस्पताल की जरूरत भी थी। इससे क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
सचिव अमित सिंह नेगी द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि जनपद देहरादून के हर्रावाला में जीवन ज्योति कैंसर हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा उपहार स्वरूप स्वास्थ्य विभाग को प्रदत्त भूमि पर 300 शैय्या युक्त चिकित्सालय का निर्माण किया जायेगा। चिकित्सालय निर्माण की अनुमोदित लागत रू. 106 करोड़ 84 लाख 70 हजार है। इसमें से भारत सरकार द्वारा 97.60 करोड़ की धनराशि अनुमोदित की गई है।

समझिए इस दृढ़ संकल्प को जिसके इंतजार में वर्षों से नेताओं की राह देख रही है गैरसैण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) विधानसभा परिसर में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कर स्वर्णिम इतिहास रचा। यह पहला मौका है जब प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया।
स्वतंत्रता पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री ने 12 विभिन्न विकास योजनाओं की घोषणाएं भी की। जिसमें सीएचसी गैरसैंण 50 बैड के सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की स्थापना, भराडीसैंण में मिनी सचिवालय की स्थापना, हॉस्पिटल में टेली मेडिसिन की सुविधा, भराडीसैंण क्षेत्र में पम्पिंग पेयजल लाईन निर्माण, भराडीसैंण-गैरसैंण में साईनेज लगाने, भराडीसैंण-गैरसैंण में जिओ ओएफसी नेटवर्किंग का विस्तारीकरण, लोनिवि निरीक्षण भवन में 8 कमरों का निर्माण, गैरसैंण ब्लाक में कृषि विकास हेतु कोल्ड स्टोरेज एवं फूड प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना, बेनीताल को एस्ट्रो विलेज के रूप में विकसित करने, भराडीसैंण में ईको ट्रेल/ईको पार्क की स्थापना, राइका भराडीसैंण में दो अतिरिक्त कक्षाकक्ष निर्माण, आईटीआई गैरसैंण के भवन निर्माण एवं उपकरणों हेतु धनराशि की स्वीकृति शामिल है। मुख्यमंत्री ने 76 करोड़, 67 लाख, 65 हजार की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकापर्ण करते हुए जनपदवासियों को बडी सौगात भी दी।
बता दें कि विधानसभा बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने 4 मार्च, 2020 को सदन में बजट पेश करने के तुरंत बाद गैरसैंण (भराडीसैंण) को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री ने भराडीसैंण पहुॅचकर स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप ही राज्य में विकास कार्यो को आगे बढाने के लिए उनकी सरकार संकलपबद्व है।

स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री ने भराडीसैंण विधानसभा परिसर में 6071.82 लाख की विकास योजनाओं का शिलान्यास तथा 1595.83 लाख की योजनाओं का लोकार्पण किया। जिन योजनाओं का शिलान्यास किया गया उनमें कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में बुंगीधार-मेहलचैरी-बछुवाबाण मोटर मार्ग के किमी 51 मे डामरीकरण व सुधारीकरण लागत 60 लाख, गैरसैंण में पुनगांव-विषौणा मोटर मार्ग सुधारीकरण व डामरीकरण लागत 312.93 लाख, गोपेश्वर में ईवीएम वेयर हाउस का निर्माण लागत 223.31 लाख, पोखरी के विनायकधार में स्व0 श्री नरेन्द्र सिंह भण्डारी की मूर्ति स्थापना एवं पार्क विकास निर्माण कार्य लागत 14.30 लाख, भराडीसैंण में हैलीपैड निर्माण लागत 216.76 लाख, राइका थिरपाक में भौतिक, रसायन व जीवविज्ञान प्रयोगशाला निर्माण लागत 82.02 लाख, हाईस्कूल पुडियाणी में रमसा के तहत विविध कार्य लागत 74.14 लाख, गैरसैंण में अक्षयबाडा पेयजल योजना लागत 83.53 लाख, सारिगंगाव ग्राम समूल पेयजल योजना लागत 94.79 लाख, टंगणी तल्ली से टंगणी मल्ली तक मोटर मार्ग लागत 260.46, कुहेड मैठाणा से रोपा चलधर मोटर मार्ग निर्माण लागत 441.58लाख, कुहेड-मैठाणा पलेठी-सरतोली-मथरपाल-नैथोली मोटर मार्ग लागत 989.23 लाख, मारवाडी-थेंग मोटर मार्ग लागत 813.08 लाख, मारवाडी-पुलना मोटर मार्ग 673.50 लाख, बूंगीधार-मैहलचैरी-बछुवाबाण मोटर मार्ग के किमी 12 से कोलानी मोटर मार्ग लागत 296.69 लाख, रोहिडा-पज्याणा मोटर मार्ग लागत 353.09 लाख, गौचर-ढमढमा मोटर मार्ग लागत 806.04 लाख, नन्द्रप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के किमी 11 से मंगरोली मोटर मार्ग 182.44 लाख तथा घाट-थराली मोटर मार्ग के किमी 10 से स्यारी मोटर मार्ग लागत 108.23 लाख शामिल है। मुख्यमंत्री ने कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज लिए भराडीसैंण में से बनाए गए कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।