कोरोना केसों में बड़ा उछाल, आज मिले 282 नए मरीज

उत्तराखंड में कोरोना के 282 नए मरीज मिले और 223 ठीक हुए। इसके बाद एक्टिव मरीजों की संख्या 1180 हो गई है। राज्य में कोरोना संक्रमण की दर 13.08 प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को देहरादून में 137, नैनीताल में 35, अल्मोड़ा में 18, बागेश्वर में एक, हरिद्वार में 22, पौड़ी में तीन, रुद्रप्रयाग में दो, टिहरी में 19, यूएस नगर में 32 और उत्तरकाशी जिले में 13 मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्ठि हुई है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 2699 सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 1874 सैंपल की जांच रिपोर्ट आई है। राज्य में संक्रमण की दर 13 प्रतिशत से अधिक हो गई है जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 94 प्रतिशत रह गई है। कोरोना के बढ़ते केसों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।

स्वास्थ्य विभाग ने एडवायजरी जारी कर सावधानी बरतने के दिये निर्देश

उत्तराखंड में कोरोना ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए एडवायजरी जारी की है। प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ राजेश कुमार ने जिला अधिकारियों को दिए कोरोना को लेकर दिशा निर्देश दिए हैं।
बता दें, प्रदेश में बीते 24 घंटे के भीतर प्रदेश में 142 नए संक्रमित मिले हैं। जबकि 38 मरीज ठीक हुए हैं। सक्रिय मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में फिलहाल 1140 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रविवार को 914 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है।
वहीं, देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 94, हरिद्वार में छह, नैनीताल में 15, अल्मोड़ा और पौड़ी में दो-दो, चमोली व चंपावत में एक-एक, टिहरी में सात, ऊधमसिंह नगर में तीन व उत्तरकाशी में 11 संक्रमित मरीज मिले हैं। प्रदेश की रिकवरी दर 94.96 प्रतिशत और संक्रमण दर 3.45 प्रतिशत दर्ज की गई।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई एडवायजरी
-सामाजिक दूरी का पालन करना और मास्क पहनना जरूरी।
-कोरोना के लक्षण वाले रोगियों को होम आइसोलेशन में रखा जाए।
-कोविड-19 टीकाकरण कवरेज को बढ़ाया जाए।
-सभी जिलों को संक्रमित मरीजों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजने के निर्देश।
-जिलाधिकारियों को आरटी-पीसीआर टेस्ट बढ़ाने के लिए कहा गया।
-बुखार फैल रहा तो तुरंत कोरोना जांच कराए।
-फ्लू और सांस की शिकायत वालों के टेस्ट किए जाने की सलाह भी दी गई है।
-आईसीयू बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
-आक्सीजन प्लांट की क्रियाशीलता सुनिश्चित की जाए।

राज्य में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 1140 हुई

उत्तराखंड में रविवार को कोरोना के 142 नए मरीज मिले और 38 संक्रमित इलाज के बाद ठीक हुए। इसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 1140 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार रविवार को देहरादून में 94, नैनीताल में 15, उत्तरकाशी में 11, अल्मोड़ा में दो, चमोली में एक, चम्पावत में एक, हरिद्वार में छह, पौड़ी में दो, टिहरी में सात, यूएस नगर में तीन नए मरीज मिले हैं।
रविवार को राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 1018 सैंपल जांच के लिए भेजे गए और 914 सैंपल की रिपोर्ट आई। राज्य में संक्रमण की दर 13.45 प्रतिशत जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 95 प्रतिशत से नीचे गिर गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करें।

नाबालिग जच्चा बच्चा की मौत मामले में जांच बैठाई

रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में एक नाबालिग ने बच्चे को जन्म दिया और कुछ ही समय में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि नाबालिग को पेट दर्द की शिकायत पर उसकी मां जिला अस्पताल लाई थी। जहां दोनों की मौत हो गई। हैरानी बात है कि न तो नाबालिग की मां ने अस्पताल को पूरा मामला बताया और न ही चिकित्सालय प्रशासन नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी ले सका।
जानकारी के अनुसार मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र की एक नाबालिग को पेट में दर्द होने पर उसकी मां उसे जिला चिकित्सालय लाई। यहां डॉक्टरों को दिखाने पर हीमोग्लोबिन की कमी पाई गई। डॉक्टर ने जांच के लिए लिखा। जब हीमोग्लोबिन काफी कम पाया गया तो डॉक्टर ने अन्यत्र रेफर करने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि मां ने अस्पताल में ही इलाज करने को कहा, किंतु रात में जब नाबालिग को प्रसव का दर्द हुआ तो वह जिला अस्पताल के शौचालय में गई और यहां बच्चे को जन्म देकर वापस वार्ड में आ गई।
इस बीच उन्हें काफी खून बहने लगा। नाबालिग की स्थिति सुबह आने तक बिगड़ती गई और उसने दम तोड़ दिया। वहीं जब सुबह सफाईकर्मी शौचालय में गए तो उन्हें यहां मृत नवजात मिला। इसके बाद अस्पताल में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि यदि नाबालिग की मां पूरी सच्चाई डॉक्टरों को बता देती तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
इधर, मामले में अस्पताल प्रशासन ने जांच बैठा दी है। जिला चिकित्सालय में तैनात मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राजीव सिंह पाल ने बताया कि शुक्रवार दोपहर के समय एक नाबालिग लकड़ी को लेकर उसकी मां जिला चिकित्सालय पहुंची थी। जांच करने पर पता चला कि उसमें हिमोग्लोबिन की कमी है। चिकित्सक उसे आगे के लिए रेफर कर रहे थे, किंतु नाबालिग की मां ने मना कर दिया और लिखित रूप में यह कहकर दिया कि उसका उपचार यहीं किया जाए।
रात के समय नाबालिग ने बच्चे को जन्म दिया और प्रसव के बाद उपचार न मिलने के कारण नाबालिग की भी मौत हो गई। पूरी घटना में नाबालिग के परिजनों की गलती सामने आ रही है। पूरे मामले की पुलिस और अस्पताल प्रबंधन जांच कर रहा है। कोतवाली निरीक्षक जयपाल नेगी ने बताया कि अस्पताल की सूचना पर शव का पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम करा दिया गया है।

राज्य में एक्टिव केस का आंकड़ा 1 हजार के पार

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। शनिवार को राज्य में 260 नए मरीज मिले और 103 मरीज ठीक हुए। इसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों का आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच गया है। जबकि संक्रमण की दर 14 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को राजधानी देहरादून में सबसे अधिक 149 नए मरीज मिले जबकि नैनीताल में 51, अल्मोड़ा में 14, हरिद्वार में 12, रुद्रप्रयाग में 13, टिहरी में तीन, यूएस नगर में छह, उत्तरकाशी में चार, पिथौरागढ़ में छह और चम्पावत में दो नए संक्रमित मिले हैं। राज्य के विभिन्न अस्पतालों और होम आईसोलेशन में रह रहे 103 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया। जिसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 1040 हो गई है। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 2060 मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 1626 के सैंपल की रिपोर्ट आई। राज्य में शनिवार को कोरोना संक्रमण की दर 13.76 प्रतिशत जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 95 प्रतिशत के करीब थी।

18 से 59 आयु वर्ग के समस्त लाभार्थियों को निःशुल्क मिलेगी प्रिकाशन डोज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को महात्मा गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में कोविड टीकाकरण अमृत महोत्सव का स्वयं टीका लगाकर शुरुआत की। प्रदेश में 18 से 59 आयु वर्ग के सभी लाभार्थियों हेतु निःशुल्क प्रिकाशन डोज की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थियों से टीकाकरण में सहयोगी बनने को कहा। उन्होंने कहा कि कोविड की रोकथाम के लिये टीकाकरण जरूरी है। राज्य सरकार द्वारा इसके लिये सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के विरूद्ध लड़ाई में वैक्सीनेशन ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है, सभी प्रदेशवासी जो भी 18 वर्ष से ऊपर है वो सभी कोविड प्रीकॉशन डोज अभियान का हिस्सा बनकर कोविड वैक्सीन अवश्य लगवाएं और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में हमने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला किया। उनके नेतृत्व में भारत में कोविड वैक्सीनेशन का महाअभियान चलाया गया, साथ ही मानवता का परिचय देते हुए दुनिया भर में भारत द्वारा वैक्सीन बांटने का कार्य भी किया गया। कोरोना महामारी कम अवश्य हुई है परन्तु अभी खत्म नही हुई है, अभी भी बचाव, जागरूकता, साफ-सफाई एवं वैक्सीनेशन द्वारा ही इससे बचा जा सकता है।

प्रदेश में चलेगा जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ाः डा. धन सिंह रावत

विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर आज सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने जनसंख्या वृद्धि को चिंता जाहिर की। जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं के समाधान को लेकर उन्होंने राज्य में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा संचालित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। यह पखवाड़ा 11 जुलाई से लेकर 24 जुलाई तक राज्य के सभी जनपदों में आयोजित किये जायेंगे, जिनमें जनसंख्या स्थिरीकरण के लिये सभी चिकित्सा उपायों एवं संसाधनों का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इसके साथ ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लोगों को जागरूक किया जायेगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर विभागीय अधिकारियों को जनसंख्या नियंत्रण को लेकर प्रदेशभर में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा आयोजित करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत यह पखवाड़ा राज्य के प्रत्येक जनपदों में 11 जुलाई से लेकर 24 जुलाई तक आयोजित किये जायेंगे। जिसके उपरांत विभागीय अधिकारियों से पखवाडे का फीड़बैक लिया जायेगा।

डॉ0 रावत ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं के समाधान को लेकर समय-समय पर ऐसे पखवाडे आयोजित किये जाने जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि राज्यभर में आयोजित जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े में जनसंख्या नियंत्रण के सभी चिकित्सा उपायों एवं संसाधनों का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इसके साथ ही लैप्रो, नो-स्केलपेल वेसेक्टॉमी एवं प्रसवोत्तर अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण सहित अंतरा के माध्यम से परिवार नियोजन की सेवाएं इस पखवाड़े में उपलब्ध की जायेगी। विभागीय मंत्री डॉ0 रावत ने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े में प्रदेशभर में 215 कैम्प लगाये जायेंगे, जिनमें 18 सर्जनों के माध्यम से लैप्रोस्कोपिक महिला नसबंदी सेवाएं दी जायेगी जबकि 20 सर्जन के माध्यम से मिनी लैप महिला नसबंदी कराई जायेगी। इसके अलावा 18 सर्जन पुरूष नसबंदी की सेवाएं देंगे। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत लोगों को प्रोत्साहित किया जायेगा। जिसके अंतर्गत महिला नसबंदी कराने वाले लाभार्थी को रूपये 1400 प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इसी प्रकार पुरूष नसबंदी कराने वाले को रूपये दो हजार दिये जायेंगे। जबकि इन लाभार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली आशा वर्कर को रूपये दो सौ की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।

विभागीय मंत्री ने बताया कि एनएचएम के अंतर्गत संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रम में राज्य ने सकल प्रजनन दर वांछित लक्ष्य 2.1 पहले ही प्राप्त कर लिया है। वर्तमान में राज्य में सकल प्रजनन दर की स्थिति 1.9 है। उन्होंने बताया कि राज्य में सकल प्रजनन दर को स्थिर बनाये रखने हेतु सतत प्रयास किये जा रहे हैं।

बच्चों में नशें की प्रवृति रोकने के प्रयास किये जाये-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने कहा कि गरीब बच्चों के लिए नशा मुक्ति हेतु विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्रों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए, ताकि आमजन विशेषकर गरीब लोग नशामुक्ति केंद्रों की जानकारी के अभाव में इधर उधर न भटकें, सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग्स आयोजित कर जन जागरूकता फैलाई जाए। उन्होंने नशामुक्ति हेतु लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सीज्ड ड्रग्स के निष्पादन हेतु लीगल मैकेनिज्म विकसित करने की बात भी कही। कहा कि एंटी ड्रग समितियों की लगातार बैठकें आयोजित की जाएं। जिला स्तरीय बैठकें अगले 15 दिनों में आयोजित कर ली जाएं। उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर विभागों द्वारा अपने नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने हेतु भी निर्देशित किया।
मुख्य सचिव ने जेलों में कैद 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को अलग बैरकों में रखे जाने हेतु व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इससे युवाओं को अपराध की दिशा में भटकने से बचाया जा सकेगा साथ ही उनके लिए कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि ऐसे युवा कौशल प्रशिक्षण लेकर अपने भविष्य को सुधार सकें।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, प्रमुख सचिव एल फैनई एवं अपर सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

हर वार्ड में निःशुल्क कैंप का आयोजन कर रहा जयदत्त शर्मा फाउंडेशन

जयदत्त शर्मा फाउंडेशन की ओर से रामलीला ग्राउंड बनखंडी में निशुल्क रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 65 लोगों ने रक्त जांच का लाभ उठाया।
रविवार को बनखंडी स्थित रामलीला ग्राउंड में आयोजित रक्तदान शिविर का पार्षद लता तिवाडी, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विनोद पाल और कार्यक्रम संयोजक प्रदीप कालिया ने संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। इस मौके पर क्यू हेल्थ डायग्नोस्टिक के माध्यम से लगभग 65 लोगों की 195 रक्त जांच की गई।
इस मौके पर पार्षद लता तिवाडी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसे कैम्पो से जनता को सीधा लाभ होता है विनोद पाल ने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से निम्न वर्ग के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलता है क्योकि अनेक लोग पैसों के अभाव में रक्त जांच नहीं करवा पाते हैं।
कार्यक्रम संयोजक प्रतीक कालिया ने बताया कि जय दत्त शर्मा फाउंडेशन की ओर से स्व. जयदत्त शर्मा की स्मृति में 29 मई से निशुल्क रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। अब तक लगभग 18 निशुल्क रक्त जांच शिविर का आयोजन किया जा चुका है। इन रक्त जांच शिविर के माध्यम से लोगों का निशुल्क रक्त जांच कर मानव सेवा करना ही जयदत्त शर्मा फाउंडेशन का परम उद्देश्य है।
प्रतीक कालिया ने इस सफल कार्यक्रम के लिए श्री राम लीला कमेटी बनखंडी के पदाधिकारियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के महामंत्री हरीश तिवाड़ी, पार्षद राजेश दिवाकर, राकेश पारछा, सुभाष पाल, पवन पाल, दीपक जोशी ने इस कार्यक्रम में सेवा देकर अपना योगदान दिया।

योग साधना के द्वारा हम शारीरिक व मानसिक रूप से रह सकते हैं स्वस्थः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में कहा कि योग भारत की प्राचीनतम और समृद्ध परम्परा की एक पहचान है। पूरी मनुष्यता को हमारे ऋषि-मुनियों की यह महत्वपूर्ण देन है। योग साधना के द्वारा हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘योग’ भारतीय सभ्यता, संस्कृति तथा जीवन शैली का अभिन्न अंग रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्थक प्रयासों से योग को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना देशवासियों के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग के द्वारा आज दुनिया में हमारी विशिष्ट पहचान बनी है। यह आत्मा को परमात्मा से मिलाने का सेतु भी है। योग जोड़ने का कार्य करता है। इसी का प्रतिफल है कि आज दुनिया योग को अपना रही है तथा योग के लिये दुनिया भारत की ओर देख रही है। योग ने देश व दुनिया को स्वस्थता का भी संदेश दिया है। हमारे योगाचार्यों ने भी योग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने योग को भारत की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि योग में मन और चित्त की मलिनता को दूर करने की ताकत है। योग ने मनुष्य की सुख शान्ति की राह प्रशस्त की है। महान ऋषि पतंजलि ने योग के माध्यम से लोगों को जीने की राह दिखाई है। हर मनुष्य का परम लक्ष्य सुख और शांति की प्राप्ति है जिसमें योग की बड़ी भूमिका है।
अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेश में मुख्य कार्यक्रम परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में आयोजित किया जायेगा जबकि विभिन्न जनपदों में भी 75 चयनित स्थलों पर योग के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्य स्थल परमार्थ निकेतन ऋषिकेश का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के सम्बन्ध में सम्बन्धित अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिये।
वर्तमान में प्रदेश में योग व नेचुरोपैथी व सिद्धा चिकित्सा पद्धति के लिये आयुर्वेद निदेशालय को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश में आयुष विभाग द्वारा 70 चिकित्सालयों को आयुष हैल्थ एवं वेलनेस केन्द्र के रूप में उच्चीकृत किया गया है। गत वर्ष से आयुष विभाग द्वारा कोविड हैल्प डेस्क की स्थापना कर कोविड व पोस्ट कोविड रोगियों को आयुष सम्बन्धी टेली परामर्श प्रदान किया जा रहा है ।
प्रदेश में आयुष शिक्षण संस्थानों में स्नात्तकोत्तर छात्रों द्वारा विभिन्न शोध कार्य भी संपादित किये जा रहे हैं, जिनको अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स में प्रकाशित किया जाता है। राज्य के विभिन्न आयुष शिक्षण संस्थानों से 166 छात्र शोध पूर्ण कर स्नात्तकोत्तर की उपाधि प्राप्त कर देश के विभिन्न आयुष शोध संस्थानों / महाविद्यालयों में सेवायें प्रदान कर रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का पुनर्गठन करते हुए इसे उत्तराखण्ड आयुष विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। राज्य में योग शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे समस्त केन्द्र, समस्त स्पा एवं मसाज सेन्टर तथा अन्य संस्थानों का राज्य सरकार के द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार निःशुल्क रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। योग और नेचुरोपैथी के विकास के लिए प्रदेश में राज्य स्तरीय संस्थान की स्थापना की भी योजना है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को सुदृढ किए जाने हेतु निदेशालय, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखण्ड के अंतर्गत एक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।