उत्तराखंड में प्रति एक हजार बालकों पर 984 बालिकाओं का अनुपात

उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है, साथ ही राज्य में संस्थागत प्रसव का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत इसे राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य सरकार विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेश के आम लोंगो को मिल रहा है। उनका कहना है कि लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार के लिये स्वास्थ्य विभाग ने लाभार्थियों को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाया साथ ही गर्भ में भू्रण के लिंग परीक्षण पर सख्ताई से रोक लगाई। वर्तमान में सूबे में 90 फीसदी संस्थागत प्रसव किये जा रहे हैं, जिनको शतप्रतिशत करने का प्रयास किया जा रहा है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में बाल लिंगानुपात में बेहत्तर सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में 0-05 आयु वर्ग तक के बच्चों का लिंगानुपात 984 दर्ज किया गया है जोकि विगत वर्षों के मुकाबले बढ़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्रति 1000 बालकों पर 984 बालिकाएं जन्म ले रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पांच जनपदों अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी व ऊधमसिंह नगर में बालकों की तुलना में अधिक बालिकाओं का जन्म हुआ है। जिसमें जनपद अल्मोड़ा में 1000 बालकों के मुकाबले 1444 बालिकाओं ने जन्म लिया, ऐसे ही चमोली में 1026, नैनीताल में 1136, पौड़ी में 1065 व उधमसिंह नगर में 1022 बालिकाएं पैदा हुई।
वहीं बागेश्वर में 1000 बालकों के जन्म के सापेक्ष 940, चंपावत में 926, देहरादून में 823, हरिद्वार में 985, पिथौरागढ़ में 911, रुद्रप्रयाग में 958, टिहरी में 866 व उत्तरकाशी में 869 बालिकाओं ने जन्म लिया, जो कि राष्ट्रीय औसत 929 के मुकाबले कहीं अधिक है। विभागीय मंत्री ने बताया कि राज्य में बाल लिंगानुपात को लगातार बेहत्तर किया जा रहा है, जिसके लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनजागरुकता अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान व अलग-अलग मौकों पर अभिभावकों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा विभाग द्वारा भ्रुण जांच व पीसीपीएनडीटी अधिनियम की जानकारी देते हुये ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण समिति स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित किये जा रहे हैं। रावत ने बताया कि राज्य में संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। वर्तमान में सूबे में लगभग 90 फीसदी प्रसव विभिन्न चिकित्सा ईकाईयों में हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य रखा गया है इसके लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दे दिये गये हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा की समीक्षा बैठक में दिये ये निर्देश

चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों एवं नर्सिंग कॉलेजों में चल रहे निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाय ताकि नया सत्र शुरू होने तक निर्माणाधीन शैक्षणिक भवन एवं छात्रावास बनकर तैयार हो सके। इसके लिये संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों को प्रत्येक माह निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्माण कार्य पूर्ण होने पर तत्काल शासन को उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने आज चिकित्सा शिक्षा निदेशालय, चन्दरनगर में राजकीय मेडिकल कॉलेजों एवं नर्सिंग कॉलेजों में निर्माण कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक ली। रावत ने बताया कि अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रूद्रपुर, हल्द्वानी, श्रीनगर व हरिद्वार जनपदों के नर्सिंग एवं मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न निर्माण कार्य चल रहे हैं। जिनको समय पर पूर्ण करने के लिये संबंधित जिलाधिकारियों, प्राचार्यों एवं कार्यदायी संस्थाओं को सख्त निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिये संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों को प्रतिमाह कॉलेज प्रशासन व कार्यदायी संस्था के साथ बैठक कर समीक्षा के निर्देश दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बैठक में जनपद पिथौरागढ़ में स्वीकृत राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने तथा बेस अस्पताल का संचालन करने के निर्देश दिये। उन्होंने कोविड काल के दौरान लगे कर्मचारियों को पुनः आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से पुनः तैनाती देने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। इसी क्रम में अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्यों को पूर्ण करने के लिये शेष धनराशि जारी करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कॉलेज के विधिवत संचालन के लिये वार्ड ब्वाय एवं सुरक्षाकर्मी सहित अन्य जरूरी कार्मिकों के पद स्वीकृत करने की मांग रखी। जिस पर विभागीय मंत्री ने प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिये। मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर के अंतर्गत नये भवन में अस्पताल शिफ्ट करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। जबकि हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में ऑडिटोरियम का कार्य पूर्ण कर शीघ्र यूसी शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में छात्रावासों की मरम्मत, बाउंड्रीवाल फेंसिंग तथा पेयजल के सुदृढ़करण का कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। इसी प्रकार जनपद हरिद्वार में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का कार्य भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये। इसके अतिरिक्त् राज्य कैंसर संस्थान हल्द्वानी, नर्सिंग कॉलेज कोटगी रूद्रप्रयाग, नर्सिंग कॉलेज बाजपुर, नर्सिंग कॉलेज श्रीनगर, जीएनएम कॉलेज रूड़की तथा स्टेट नर्सिंग कॉलेज देहरादून के भवनों के अधूरे कार्यों को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश, कुलपति मेडिकल विश्वविद्यालय प्रो. हेमचंद पाण्डेय, संयुक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ एमके पंत, वित्त नियंत्रक, कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे। जबकि संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी, सीएमओ, प्राचार्य एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने उत्तराखंड को दिया आयुष्मान उत्कृष्टता सम्मान-2022

आयुष्मान योजना के बेहतर संचालन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से उत्तराखंड को आयुष्मान उत्कृष्टता पुरस्कार-2022 से नवाजा गया। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) की चौथी वर्षगांठ पर दिल्ली में आयोजित आरोग्य मंथन-4 कार्यक्रम के अवसर पर केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह पुरस्कार दिया गया।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा उत्तराखंड में संचालित आयुष्मान योजना ने गत 4 वर्षों में कई उपलब्धियों को हासिल किया है। प्रदेश में अभी तक 48.50 लाख से अधिक कार्ड बनाए जा चुके हैं। सभी पात्र परिवार के शत- प्रतिशत कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा 5.70 लाख से अधिक बार मरीजों ने निशुल्क उपचार सुविधा का लाभ उठाया है। अस्पतालों के समय से पेमेंट भुगतान को लेकर भी उत्तराखंड देश में अव्वल रहा है। अब तक प्रदेश सरकार के आयुष्मान योजना की निशुल्क उपचार सुविधा पर ₹989 करोड़ से अधिक खर्च हुए हैं। इसके अलावा योजना का दुरुपयोग ना हो उसके लिए भी राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से ठोस कदम उठाए गए हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य क्लेम एक्सचेंज सहित कई योजनाएं की लांच

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के चार वर्ष तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में दो दिवसीय आरोग्य मंथन-2022 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 मनसुख मंडाविया ने स्वास्थ्य क्लेम एक्सचेंज, नेशनल ई-रुपी पोर्टल सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने भी प्रतिभाग किया।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के चार वर्ष तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के एक वर्ष पूर्ण पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिल्ली के एक निजी होटल में आरोग्य मंथन-2022 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य डॉ मनसुख मंडाविया द्वारा आयुष्मान भारत योजना एवं आयुष्मान डिजिटल योजनाओं की समीक्षा की गई तथा स्वास्थ्य क्षेत्र की बेहतरी के लिए स्वास्थ्य क्लेम एक्सचेंज, नेशनल ई-रुपी पोर्टल सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आये स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं विशेष आमंत्रित सदस्यों से सुझाव मांगे गये। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ रावत ने उत्तराखंड में दोनों योजनाओं के संचालन को लेकर संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लगभग 50 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं, जिसके अंतर्गत करीब 5.50 लाख लोगों ने निःशुल्क उपचार का लाभ प्राप्त किया है। इसी प्रकार एडीबीएम के अंतर्गत अबतक प्रदेश में लगभग 28 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ आईडी बन चुकी है। उन्होंने बताया कि विगत 7 सितम्बर से प्रदेश में जन आरोग्य अभियान के तहत लोगों की निःशुल्क जांच की जा रही है। जिसके अंतर्गत अभी तक लगभग 1.50 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है। जिसमें उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, ओरल कैंसर, स्तन कैंसर, नेत्र परीक्षण, टीबी स्क्रीनिंग आदि प्रमुख बीमारियों की जांच की जा रही है। डॉ रावत ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भरोसा दिलाया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा भविष्य के लिये लांच सभी योजनाओं को उत्तराखंड में योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जायेगा ताकि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं का बेहत्तर लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान आरोग्य रथ को फ्लैग ऑफ कर किया रवाना


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न चिकित्सालयों, चिकित्सकों एवं आरोग्य मित्रों आदि को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इस योजना के लाभार्थियों से संवाद कर उनके विचार सुने। उन्होंने लाभार्थियों से जन स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ी इस योजना को जन-जन तक पहुंचाने में मददगार बनने की अपील की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आयुष्मान आरोग्य रथ को फ्लैग ऑफ कर रवाना किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना देश की ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है जिसमें 5 लाख प्रति परिवार प्रतिवर्ष चिकित्सा उपचार की व्यवस्था है। समाज के 90 प्रतिशत लोगों को इस योजना की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य बेहतर भविष्य का मार्ग बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी आयुष्मान भारत योजना दी है। देश की आजादी के बाद किसी ने इस दिशा में नहीं सोचा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश स्वास्थ्य के साथ ही हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। आयुष्मान योजना का आम जनमानस को सीधे लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पदचिन्हों पर चलकर राज्य में विकास के कार्य आगे बढ़ाये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी परिवारों को राज्य में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना से आच्छादित किया गया है। इस योजना के तहत अभी तक प्रदेश में लगभग 5.68 लाख लोग अपना उपचार करा चुके हैं, जिस पर 980 करोड़ रूपये का व्यय हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले यदि परिवार में कोई बीमार होता था तो कई परिवार बिलों का भुगतान करने में असमर्थ होते थे। इसलिए मरीज इलाज करवाने में असहज महसूस करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश में हताशा व निराशा का वातावरण था। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश व दुनिया में भारत का मान व सम्मान बढ़ा है। हर क्षेत्र में नेतृत्व करने वाला भारत बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों का जीवन बचाने वाले चिकित्सक ईश्वर का वरदान है। हमें अच्छे कार्यों का फल अवश्य प्राप्त होता है। असहायों की सहायता हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को संतुष्टि के भाव के साथ मिले। यह सुनिश्चित करना चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों का है। इसके लिये भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि जन समस्याओं के निराकरण में सरलीकरण समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि के भाव के साथ कार्य करने से ही समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत पिछले चार सालों में 5.68 लाख लोगों को लाभान्वित कर लगभग 980 करोड़ की धनराशि व्यय की गई है। उन्होंने कहा कि अब इस योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति के इलाज पर होने वाले व्यय की उसे भी जानकारी दी जाने की व्यवस्था की गई है। राज्य में शत प्रतिशत आयुष्मान कार्ड बने इसके लिये आशा कार्यकत्रियों को भी जिम्मेदार दी गई है। योजना के क्रियान्वयन में आरोग्य मित्रों की सेवा ली जा रही है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्याधिकारी अरुणेन्द्र सिंह चौहान ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना राज्य में दिनांक 23 सितम्बर 2018 को एसईसीसी 2011 की जनगणना के आधार पर चिन्हित 5.24 लाख परिवारों को एवं अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना दिनांक 25 दिसम्बर, 2018 को शेष 10.46 लाख परिवारों को निःशुल्क कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने हेतु लागू की गयी जबकि कर्मचारियों एवं पेंशनरों को गोल्डन आयुष्मान कार्ड की व्यवस्था की गयी है।

कार्यक्रम में प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 आशुतोष सयाना सहित योजना के लाभार्थी, संस्थानों के प्रतिनिधि, चिकित्सक एवं आरोग्य मित्र आदि उपस्थित थे।

स्वास्थ्य मंत्री ने नर्सिंग भर्ती के संबंध में दिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश

सूबे में स्टाफ नर्स की वर्षवार भर्ती में आ रही अड़चनों को शीघ्र दूर कर दिया जायेगा। जिसके लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं। स्वास्थ्य निदेशालय एवं जिला स्तर पर लम्बे समय से रिक्त पदोन्नति के पदों की डीपीसी कर शीघ्र भरने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में संचालित टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान को सफल बनाने के लिये अधिक से अधिक लोगों को नि-क्षय मित्र बनाने एवं ‘रक्तदान अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत लोगों का पंजीकरण कर स्वैच्छिक रक्तदान के लिये प्रेरित करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने राजकीय चिकित्सालयों एवं मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ नर्स के रिक्त 2800 सौ पदों पर शीघ्र भर्ती करने के लिये संशोधित नियमावली तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। डॉ0 रावत ने बताया कि स्टाफ नर्स की वर्षवार भर्ती में आ रही अड़चनों को तत्काल दूर किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। विभागीय मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन में लम्बे समय से रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरे जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से खाद्य निरीक्षक, औषधि निरीक्षक व अन्य कार्मिकों के पद रिक्त होने से विभागीय कार्य प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार डॉ0 रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय एवं जिला स्तर पर आईईसी के रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरे जाने के निर्देश दिये। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेशभर में चलाये जा रहे अभियान को सफल बनाने के लिये निरंतर निगरानी करने को कहा। इसके साथ ही टीबी रोगियों की देखभाल एवं उपचार के लिये अधिक से अधिक नि-क्षय मित्र बनाने पर भी जोर दिया। इसके अलावा प्रदेशभर में चलाये जा रहे ‘रक्तदान अमृत महोत्सव’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिये राज्य व जिला स्तर के अधिकारियों को जन जागरूकता अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिये।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ0 आर राजेश कुमार, अपर सचिव चिकित्सा शिक्षा गरिमा रौंकली, अपर सचिव न्याय, प्रभारी महानिदेशक डॉ0 विनीता शाह, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

यूएचएसडीपी से एनएबीएच एक्रिडिएशन को जुटाये जायेंगे संसाधन

केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना के जरिये जिला अस्पतालों की सूरत बदली जायेगी। परियोजना के प्रथम चरण में सूबे के पांच जिला चिकित्सालयों का चयन कर सुधारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके तहत अस्पतालों की गुणवत्ता संवर्द्धन के लिये एनएबीएच स्तरीय मानकों के अनुरूप संसाधन जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। ताकि आने वाले समय में जिला अस्पतालों को आसानी से एनएबीएच मान्यता मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में एनएचएम के अंतर्गत केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के अंतर्गत चयनित पांच जिला चिकित्सालयों अल्मोड़ा, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, चमोली तथा जिला महिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़करण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत चयनित चिकित्सालयों में एनएबीएच स्तरीय मानक पूर्ण करने के लिये गैप एसेसमेंट के आधार पर शासन द्वारा पूर्व में ही डीपीआर अनुमोदित कर लगभग रूपये 74 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। जिसके तहत चयनित जिला चिकित्सालयों में 10 विशेषज्ञ चिकित्सक, 10 स्टॉफ नर्स, 2 लैब टेक्निशियन, एक एक्स-रे टेक्नीशियन तथा एक मैट्रन तैनात किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा परियोजना के अंतर्गत अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस कार्य हेतु रूपये 20 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है जबकि शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान आईआईएचएमआर जयपुर एवं एएससीआई हैदराबाद के माध्यम से सीएमओ, सीएमएस व एसीएमओ को कौशल संबर्द्धन हेतु प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी प्रकार चयनित चिकित्सालयों में लोक निजी सहभागिता के अंतर्गत कम्युनिकेशन कार्य योजना एवं डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान भी अपडेट किया जा रहा है। विभागीय मंत्री ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2023 तक परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर चयनित जिला चिकित्सालयों में अमूलचूल परिर्वतन देखने को मिलेगा, जिससे चिकित्सालयों को एनएबीएच एक्रिडिएशन कराने में खासी मदद मिलेगी।
समीक्षा बैठक में प्रभारी अधिकारी डॉ0 अमित शुक्ला ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 28 पदों पर तैनाती दे दी गई है। इसी प्रकार स्टॉफ नर्स के स्वीकृत 50 पदों, एक्स-रे टेक्नीशियन तथा मैट्रन के 05 पदों एवं लैब टेक्नीशियन के 10 पदों के सापेक्ष पूर्ण तैनाती कर दी गई है। जबकि अधिकारियों के प्रशिक्षण का कार्य गतिमान है।

बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ0 आर0 राजेश, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी, एपीडी यूएचएसडीपी डॉ0 प्रेम लाल, संयुक्त निदेशक पीपीपी डॉ0 अमित शुक्ला, वित्त नियंत्रक बिरेन्द्र कुमार, डॉ0 विपुल विश्वास, डॉ0 राजन अरोड़ा सहित विभगाय अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल का किया औचक निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने मरीजों को दिये जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को परखने के लिए खुद वह भोजन खाया। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा भगवान की सेवा है। मरीजों के साथ मधुरता से व्यवहार किया जाए तो आधी बीमारी तो वैसे ही दूर हो जाती है। सेवा भाव का होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये। स्वच्छ माहौल से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि इलाज के लिए आने वालों को अधिक इंतजार न करना पड़े। मरीजों के साथ साथ आने वाले उनके तीमारदारों को भी परेशानी न हो। अस्पताल में सभी आवश्यक दवाईयों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल में इमरजेंसी वार्डों, आईसीयू एवं डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री अग्रवाल ने नगर के अधिकारियों की बैठक ली, दिए डेंगू की रोकथाम के निर्देश

तीर्थ नगरी में लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या में इजाफा होने पर कैबिनेट मंत्री व क्षेत्रीय विधायक ने नगर निगम के उच्चाधिकारियों की बैठक ली। इस मौके पर निगम डेंगू के लार्वा नष्ट करने की धीमी कार्यप्रणाली पर जोरदार फटकार भी लगाई। साथ ही पूरे नगर निगम क्षेत्र में अभियान चलाकर डेंगू के लारवा को नष्ट करने के कड़े निर्देश भी दिए।

बैराज रोड स्थित कैंप कार्यालय में मंत्री डॉ अग्रवाल ने नगर आयुक्त राहुल गोयल से नगर में डेंगू की रोकथाम के संबंध में जानकारी हासिल की। नगर आयुक्त राहुल गोयल ने बताया कि प्रथम चरण में सात जगहों में अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा डेंगू की सूचना आने पर टीम भेजी जाती है। इस पर मंत्री डॉ अग्रवाल ने फटकार लगाते हुए कहा कि सूचना आने का इंतज़ार न करें।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम अपने कार्यों में तेजी लाये। डेंगू को उत्पन्न न होने दे, इस दिशा में कार्य करे। इसके लिए निगम की टीम सेनेट्री इंस्पेक्टर के नेतृत्व में हर घर, घर-घर जाकर अभियान चलाए। डॉ अग्रवाल जी ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू के लार्वा को पैदा न होने दे।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में डेंगू तेजी से अपने पैर पसार रहा है। आये दिन इसके मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ऐसे में सघन अभियान चलाकर इसके लार्वा को नष्ट करना होगा। डॉ अग्रवाल जी ने नगर आयुक्त राहुल गोयल और सहायक नगर आयुक्त रमेश रावत को स्पष्ट तौर पर निर्देशित करते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र में फॉगिंग, टैंकर से दवाई छिड़काव, एक जगह जमा पानी को हटाये, डोर टू डोर जाकर अभियान चलाया जाए।

जनता के बीच जाकर जानें समस्या
कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने नगर आयुक्त को कहा कि समय निर्धारित करें और क्षेत्र में जनता के बीच जाकर उनकी समस्या भी जानें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निगम अपनी कार्यशैली में सुधार लाये।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए विश्वविद्यालय में रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति से भरने के निर्देश

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय सेलाकुई देहरादून का निरीक्षण कर समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने माह नवम्बर तक विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित करने, लम्बे समय से रिक्त चल रहे शिक्षणेत्तर कार्मिकों के पदों को स्थाई नियुक्ति होने तक प्रतिनियुक्ति/सेवास्थानांतरण के माध्यम से भरने तथा मेडिकल छात्रों को भविष्य में डिजी लॉकर के माध्यम से डिग्रियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।

मेडिकल यूनिवर्सिटी सेलाकुई के निरीक्षण के उपरांत विभागीय मंत्री ने अधिकारियों की समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालय की बॉउंड्रीवॉल का कार्य शीघ्र पूर्ण कराने तथा कुलपति आवास सहित कुलसचिव एवं अन्य सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिये आवास निर्माण की डीपीआर तैयार कर शीघ्र शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिये। उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक, लेखा एवं मिनिस्ट्रियल संवर्ग के वर्षों से रिक्त चल रहे सभी पदों पर स्थाई नियुक्ति होने तक सेवा स्थानांतरण/ प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरने के निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन को दिये। डॉ0 रावत ने कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक वर्ष दीक्षांत समारोह का आयोजन कर डिग्रियां प्रदान करने के निर्देश पूर्व से ही दिये गये हैं। इसी क्रम में मेडिकल विश्वविद्यालय को आगामी नवम्बर माह तक दीक्षांत समारोह आयेजित करने तथा मेडिकल छात्र-छात्राओं को भविष्य में डिजी लॉकर के माध्यम से अंक प्रमाण पत्र सहित अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।

विश्वविद्यालय के नये परिसर में निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल सहित अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने निर्देश भी दिये। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने विभागीय मंत्री के परिसर में आगमन पर पुष्पगुष्छ एवं स्मृतिचिह्न देकर जोरदार स्वागत किया। इससे पूर्व डॉ0 रावत ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 हेमवती नंदन बहुगुणा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।

इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमचंद्र पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. एम0के0 पंत, परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल, वित्त नियंत्रक खजान चंद पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।