खुशखबरीः सरकार ने ओपीडी में सस्ता इलाज देने की तैयारी की

अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को अब ओपीडी में भी सस्ता इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को लाया जाएगा।
वर्तमान में आयुष्मान योजना के तहत मरीज के भर्ती होने पर भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा है। ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों का योजना का लाभ नहीं मिलता है।
अब सरकार सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों को भी इलाज मुहैय्या कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए दो अलग-अलग श्रेणियों के लिए दरें तय की जाएगी।
त्रिवेंद्र सरकार ने अटल आयुष्मान योजना के तहत कार्डधारकों को ओपीडी में भी कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए कवायद शुरू कर दी है। जिन लोगों के पास आयुष्मान योजना का हेल्थ कार्ड होगा।
उन्हें सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। जिसमें पंजीकरण शुल्क, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन, ब्लड और शुगर जांच, एक्स-रे समेत अन्य जांचें शामिल होंगी। जबकि जिन लोगों के पास कार्ड नहीं है, उन्हें इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी।

प्रदेश में 31 लाख लोगों के बन चुके कार्ड
प्रदेश में अब तक अटल आयुष्मान योजना के तहत 31 लाख लोगों के हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं। जिसमें 44 हजार 460 लोगों ने योजना में अपना इलाज कराया है। इन पर करीब 45 करोड़ की धनराशि खर्च हुई है। माना जा रहा है कि ओपीडी में इलाज की सुविधा मिलने से प्रदेश में कार्ड धारकों की संख्या 50 से 60 लाख तक पहुंच सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव नितेश कुमार झा ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इलाज की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।

एम्स में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान नहींः स्वास्थ्य मंत्रालय

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में स्थानीय लोगों को नौकरियों में 70 प्रतिशत आरक्षण की दलील को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया है कि भारत सरकार के अधीन संचालित होने वाले ऑटोनामस संस्थानों में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम एम्स ऋषिकेश पर भी लागू होता है। करीब तीन महीने पहले आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को एम्स से निकाल दिया गया था। इसके बाद करीब 45 निष्कासित कर्मियों ने क्रमिक धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस मामले में काफी सियासी दखल भी सामने आई। एम्स प्रशासन ने निष्कासन के पीछे तर्क दिया कि अनुबंध के मुताबिक सभी कर्मचारियों ने लिखित सहमति दी थी कि स्थायी नियुक्ति होने के बाद अस्थाई पद पर नियुक्त कर्मियों को निकाला जा सकेगा।

उक्त अनुबंधों के अनुसार ही कर्मचारियों को संस्थान से कार्यमुक्त किया गया। इसी क्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने एम्स की नौकरियों में 70 फीसदी स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का मुद्दा उठाया। इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी ज्ञापन सौंपा गया था।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्पष्ट किया था कि नियमों के विपरीत जाकर वे नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं दे सकते हैं। निष्कासित कर्मचारियों के समर्थन में मेयर अनिता ममगाईं और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने भी एम्स निदेशक से वार्ता की थी।

इसी क्रम में सहमति बनी कि एम्स की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर स्थानीयता के आधार पर आरक्षण जारी करने की अनुमति मांगी जाएगी। उक्त प्रस्ताव पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स को स्पष्ट किया है कि डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की गाइडलाइन के अनुसार क्षेत्रीय या राज्य के आधार पर ऑटोनॉमस संस्थानों में आरक्षण की कोई नियमावली नहीं है।

महिला मौत मामलाः मरीज के बाहर जाने सहित अन्य बिंदु पर निर्मल अस्पताल ने डा. शोएब से मांगा जवाब

बीती बुधवार को ऋषिकेश देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में अब निर्मल अस्पताल प्रबंधन ने भी डॉ. मोहम्मद शोएब के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। अस्पताल प्रबंधन ने शोएब को नोटिस देकर तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

बता दें कि डॉ. मोहम्मद शोएब ने निर्मल अस्पताल में आई महिला को इलाज में कम रुपये लगने की बात कहकर देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय भेजा था, जहां महिला का अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ।

ऑपरेशन के दौरान जब महिला की हालत बिगड़ गई तो डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी ने महिला के परिजनों को हायर सेंटर रेफर करने की बात कही थी। जब परिजन महिला जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले गए तो चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि महिला की मौत कई घंटे पूर्व ही हो चुकी है। इसके बाद परिजनों ने क्लीनिक पर हंगामा किया था।

परिजनों ने डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। इसके बाद से ही मामले ने तूल पकड़ा। डॉ. शोएब निर्मल अस्पताल में भी प्रेक्टिस करते हैं। उक्त अस्पताल का प्रबंधन अनुबंध की शर्तों का पालन न करने, मरीज को नियम विरुद्ध तरीके से बाहर भेजने सहित अन्य बिंदुओं पर अपने स्तर से भी जांच करवा रहा है।

ऑपरेशन के दौरान महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने काटा हंगामा

ऋषिकेश में अपेडिक्स के इलाज के दौरान महिला की मौत होने पर परिजनों ने निजी क्लीनिक के दो चिकित्सक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों ने चिकित्सकों पर मरीज की फाइल भी गायब करने का आरोप लगाया है।

तपोवन लक्ष्मणझूला सराय निवासी कृष्णा ने बताया कि उनकी 45 वर्षीय माता सुमित्रा देवी अपेंडिक्स से पीड़ित थी। इनका इलाज कराने का निर्मल अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर मोहम्मद शोएब के पास गए। उन्होंने डॉक्टर को आर्थिक स्थिति ठीक न होने का हवाला दिया। डॉक्टर ने उन्हें कहा कि मेरा एक देहरादून रोड स्थित निजी चिकित्सालय भी है वहां पर रुपए कम लगेंगे। इसके बाद बीती मंगलवार कि शाम को देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एवं चिकित्सालय में उनकी माता को भर्ती किया गया।

बुधवार की सुबह उनकी माता के ईसीजी और ब्लड टेस्ट किए गए, जिसमें सभी रिपोर्ट सामान्य आई। इसके बाद करीब ढाई बजे उन्हें ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। और बताया कि डॉक्टर को एस कंडारी ने उन्हें साढ़े चार बजे कहा कि आप की माता की तबीयत ज्यादा खराब हो रही है इसलिए उन्हें हायर सेंटर जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। कृष्णा ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस के जरिए जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल पर अपनी माता को पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया कि उनकी माता की मौत बहुत पहले ही हो चुकी है। इसके बाद परिजन देहरादून रोड स्थित क्लीनिक आए और डॉक्टर पर लापरवाही करने का आरोप लगाने लगे। परिजनों का आरोप है कि वह अपनी माता की भर्ती की हुई फाइल डॉक्टर से मांग रहे हैं मगर डॉक्टर उन्हें उपलब्ध नहीं करा रहा है। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंची। मगर इस पर भी परिजन शांत न हुए।

वहीं डॉ ओएस कंडारी का कहना है कि फाइल उन्होंने देखी जरूर है मगर निर्मल अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद शोएब के पास फाइल है। इस पर पुलिस ने मौके से ही डॉक्टर शोएब से बात की उन्होंने बताया की फाइल उनके पास नहीं है फाइल क्लीनिक पर ही रखी हुई है। इसके बाद हंगामा और भी बढ़ गया। देर रात परिजनों ने आरोपी डॉक्टर मोहम्मद शोएब और डॉक्टर ओएस कंडारी के खिलाफ कोतवाली पुलिस को तहरीर दी।

फुटेज में फाइल हटाते दिख रहा डॉक्टर
कंडारी क्लीनिक एवं चिकित्सालय ने परिजनों ने जब ज्यादा हंगामा किया तो पुलिस की मौजूदगी में सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई। इस दौरान निर्मल अस्पताल का डॉक्टर मोहम्मद शोएब फाइल को छुपाता हुआ दिखाई दिया। परिजनों ने फुटेज को मोबाइल से कैमरे पर कैद भी कर लिया। हालांकि यह कहना मुश्किल है, कि फाइल कौन सी हैं।

राफ्टिंग का काम कर घर लौट रहे युवक की डंपर से कुचलकर मौत

ऋषिकेश स्थित हीरालाल मार्ग पर नो एंट्री जोन में गुजर रहे एक डंपर ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। इससे युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने युवक के परिजनों को सूचित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिया है।

बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे हीरालाल मार्ग पर राफ्टिंग का काम करके गली नंबर 04 सुमन विहार बापू ग्राम निवासी दिनेश सिंह बिष्ट पुत्र रंजीत सिंह बिष्ट बाइक से अपने घर लौट रहा था। इस दौरान एक बेकाबू डंपर ने दिनेश सिंह को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा देख स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और डंपर चालक को पकड़ लिया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस के सामने लोगों ने नो एंट्री में डंपर घुसने पर भी विरोध जताया। पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स भेज दिया।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि डंपर और चालक हुकुम चंद्र पुत्र दुमनो राम निवासी धगरास थाना सुंदरनगर जिला मंडी हिमाचल प्रदेश को हिरासत में ले लिया गया है। हुकुम चंद्र देहरादून रोड ऋषिकेश स्थित गैरोला कॉम्पलेक्स के एसएन डोभाल के यहां काम करता है।

डीएनए रिपोर्ट में हुआ खुलासा, बेटा की जगह बेटी ही हुई थी

देहरादून के दून महिला अस्पताल में बच्चा बदले जाने के कथित मामले में अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इस मामले में डीएनए रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि महिला का बच्चा बदलने का इल्जाम झूठा है। उसकी बेटी ही हुई थी।

विदित हो कि पिछले माह अस्पताल में एक ही नाम की दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। दोनों के प्रसव के बीच करीब डेढ़ घंटे का अंतर रहा। इनमें एक महिला ने बेटे और दूसरी ने बेटी को जन्म दिया था। शाम ढलते ही अस्पताल में बेटा-बेटी का मामला उलझ गया। इनमें डोभालवाला निवासी आरती पत्नी उमेश ने आरोप लगाया कि उनका बेटा हुआ था। लेकिन अस्पताल में तैनात स्टाफ ने उन्हें शाम को बताया कि बेटा नहीं बेटी हुई है। बच्ची को दूध पिलाने तक से उसने इन्कार कर दिया था।

मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। वहीं उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इसका संज्ञान लिया। अगले दिन आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी अस्पताल पहुंच गईं। उनके हस्तक्षेप पर महिला ने बच्ची को दूध पिलाया। इस मामले में शहर कोतवाली में भी तहरीर दी गई थी। शिकायतकर्ता दंपती बच्चों का डीएनए टेस्ट करने की मांग कर रहे थे।

बीती 12 मार्च को बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी व पुलिस की मौजूदगी में डीएनए जांच के लिए दोनों दंपती व बच्चों के सैंपल लिए गए। अब सवा माह बाद डीएनए की जांच रिपोर्ट आई है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है।

उत्तराखंड में देश की पहली सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन परियोजना और प्रयोगशाला का लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्यामपुर ऋषिकेश में गोकुल योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड लाइव स्टाक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा संचालित 47.50 करोड़ लागत की देश की पहली सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन परियोजना एवं प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग की 11 अन्य योजनाओं के शिलान्यास सहित कुल 101.52करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिन योजनाओं का शिलान्यास किया उनमें-भ्रूण प्रत्यारोपण प्रशिक्षण केन्द्र कालसी में हाॅस्टल का निर्माण लागत 4.63 करोड़, क्रास ब्रीड हिफर रियरिंग फार्म, पशुलोक ऋषिकेश लागत 10.33 करोड़, सैन्टर आॅफ एक्सीलेन्स, भ्रूण प्रत्यारोपण, कालसी, देहरादून लागत 15.00 करोड़, राजकीय बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र, डुन्डा, उत्तरकाशी लागत 3.51 करोड़, स्टेट रेफरल सैन्टर, ट्रान्सपोर्ट नगर, देहरादून लागत 3.07 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, थलकुण्डी, उत्तरकाशी लागत 2.58, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद् देहरादून में प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण लागत 4.28 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, खलियान बांगर, रूद्रप्रयाग लागत 2.99 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, कोपड़धार, टिहरी गढ़वाल लागत 2.64 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, पीपलकोेटी, चमोली लागत 2.50 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, केदारकाॅठा, चमोली लागत 2.49 करोड़ शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सेक्स सार्टड सीमन प्रयोगशाला में तैयार होने वाले स्ट्रा का मूल्य यद्यपि 1150 प्रति स्ट्रा है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा रू.450 का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के पशुपालकों के व्यापक हित में इसके लिए रू.400 का अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिये जाने की घोषणा की, इस प्रकार प्रदेश के पशुपालकों को 1150 रू का स्ट्रा मात्र रू.300 में उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए यूएसए की फर्म इगुरान सोर्टिंग टेक्नालाजी एल.एल.पी. अनुबन्धित की गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समेकित दुग्ध विकास योजना के तहत लाभार्थियों को 100 मोटर बाइक भी प्रदान करने की योजना के तहत प्रतीक स्वरूप बाइक की चाबी प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गो वंशीय पशुओं की संख्या 20.06 लाख तथा महिष वंशीय पशुओं की संख्या 9.80 लाख है। इसमें देशी नस्ल के गोवंश की संख्या 5.42 लाख तथा क्रासबीड की संख्या 2.56 लाख है।उन्होंने कहा कि गोकुल ग्राम योजना के तहत देशी गोवंश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गायों का दुध व गोमूत्र को गुणवत्ता सबसे अच्छी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देशी गाय (बद्री गाय) की संख्या जरूर कम है लकिन इसकी गुणवत्ता सबसे अच्छी है। इस नस्ल की गायों के संवर्धन के लिये चमावत में बद्री गो संवर्धन केन्द्र स्थापित किया गया है। यहां पर इनकी नस्ल सुधार एवं गुणवत्ता के विकास पर ध्यान दिया जा है वहां पर इस समय 150 गायें है इनकी संख्या बढाने के प्रयास किये जाने पर भी उन्होंने बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा प्रगतिशील पशुपालकों के हित में संचालित योजनाओं के माध्यम से भेड़ बकरी पालकों को अच्छी नस्ल तथा उच्च वंशावली के नरों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इंटरवेंशन से भेड़ बकरी पालकों के पशुधन में सुधार होगा तथा ऊन व मांस के अधिक उत्पादन से उनकी आय में गुणात्मक वृद्धि होगी।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित अवधि से पूर्व इस महत्वपूर्ण योजना का शुभारम्भ होना बेहतर कार्य संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने इस प्रकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसान व पशुपालकों को पहुंचे इसके लिए प्रभावी प्रयास करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गाय को गौ माता का सम्मान देने के लिए उत्तराखंड द्वारा प्रभावी पहल की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशुपालन मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों, पशुपालकों के व्यापक हित में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों व मत्स्यपालकों को भी किसान का दर्जा दिया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी इन्हें प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दूध वितरण की व्यवस्था का शुभारम्भ किया गया है।
इस अवसर पर सचिव पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने कहा कि पशुपालन विभाग पशुपालकों के कल्याण हुतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला स्थापित करने की तकनीक का प्रयोग करने वाला पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड लाईवस्टाक डेवलपमेन्ट बोर्ड द्वारा कालसी स्थित भू्रण प्रत्यारोपण केन्द्र के सुदृढ़ीकरण के तहत उक्त प्रयोगशाला को राष्ट्र का सर्वश्रेष्ठ केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु रुपये 15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी तथा साथ-साथ उक्त स्थान पर इसके साथ प्रशिक्षुओं हेतु अत्याधुनिक हॉस्टल का भी निर्माण रुपए 4.63 करोड़ की लागत से किया जाएगा इस केंद्र पर समस्त देश के पशु चिकित्साविदों तथा वैज्ञानिकों को भु्रण प्रत्यारोपण तकनीक का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उच्च नस्ल की वंशावली के पशुओं में वृद्धि की जाएगी तथा प्रदेश एवं सम्पूर्ण राष्ट्र के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी।
उत्तराखंड लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा रुपए 10.33 करोड़ की लागत से पशुलोक प्रक्षेत्र ऋषिकेश में क्रॉस ब्रीड हीफर रियरिग फार्म की स्थापना की जाएगी उक्त योजना के तहत उत्तराखंड के पशुपालकों को उन्नत नस्ल की बछियां तैयार कर उपलब्ध कराई जाएंगी योजना के संचालन से प्रदेश के पशुपालकों के अवर्गीकृत उत्पादन करने वाले पशुओं को रिप्लेस किया जाएगा जिससे उनके germpool में योगदान से राज्य के पशुधन में अनुवांशिक सुधार हो सकेगा।
इस अवसर पर मेयर ऋषिकेश अनीता ममगाई, इगुरान सोर्टिंग टेक्नालाजी के प्रकाश कालेकर, उत्तराखण्ड पशुकल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष विनोद आर्य, निदेशक पशुपालन डा. के.के.जोशी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बोंगला मैं स्वास्थ्य कैंप का नरेश बंसल ने किया उद्घाटन, 1000 से अधिक ने कराई जाँच।

बोंगला हरिद्वार मैं लगा स्वास्थ शिविर एक हजार से अधिक लोगों ने कराई निशुल्क जाँच।
हरिद्वार, 6 मार्च

हरिद्वार जनपत के बहादराबाद क्षेत्र अंतर्गत बोंगला मैं विशाल मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। 1000 से अधिक लोगों ने मेडिकल कैंप से स्वास्थ लाभ लिया। कैंप का आयोजन स्वदेशी जागरण मंच, एम्स ऋषिकेश और होम्योपैथिक हेल्थ सर्विस के संयुक्त तत्वावधान मैं किया गया था। कैंप का उद्घाटन उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति उत्तराखंड नरेश बंसल ने किया। विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष निर्देशक होमियोपैथी डॉ राजेंद्र सिंह रानीपुर विधायक आदेश चौहान सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।
बोंगला मैं संयुक्त तत्वावधान मैं सुबह मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। मेडिकल कैंप का उद्धघाटन उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति उत्तराखंड नरेश बंसल ने किया। इस दौरान ज्वालापुर के विधायक सुरेश राठौर, नगर पालिका शिवालिक नगर के अध्यक्ष राजीव शर्मा , भाजयुमो के पदाधिकारी हरजीत सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। कैंप मैं बंसल ने ब्लड प्रेशर की जाँच कराई।

मुख्यमंत्री ने किया 300 बेड के अस्पताल का शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को हर्रावाला, देहरादून में 300 बेड के चिकित्सालय का शिलान्यास किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य, पर्यटन, सिंचाई व एमडीडीए की विभिन्न विकास योजनाओं के लगभग 540 करोड़ रूपये के कार्यों का शिलान्यास किया गया। हर्रावाला में बनने वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल का नाम ‘‘शंकुतलाराणी सरदारीलाल ओबेराॅय अस्पताल’’ रखा जायेगा। इस अस्पताल के लिये राकेश ओबेराॅय ने 15 बीघा जमीन दान में दी है।
हर्रावाला में बनने वाले यह जच्चा बच्चा व कैंसर अस्पताल 164 करोड़ की लागत से बनाया जायेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी के लिए 287 करोड़ रूपये के कार्यों का शिलान्यास किया गया। 5 करोड़ 9 लाख रूपये की लागत के 33 सड़क निर्माण कार्यों, राजपुर पार्क सौन्दर्यीकरण के लिए 7 करोड़, जार्ज एवरेस्ट हेरिटेज पार्क के विकास की योजना हेतु 23 करोड़ रूपये, धौलास आवासीय परियोजना़ व सिंचाई से सम्बन्धित शिलान्यास के विभिन्न कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पिछले 2 वर्षों में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिए। स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार, पलायन आदि क्षेत्रों में विशेष बल दिया।

अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना
प्रदेश के सभी परिवारों को अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना से जोड़ा जा रहा है। 25 दिसम्बर को प्रदेश में इस योजना के शुभारम्भ से अभी तक 10 हजार लोगों का ईलाज हो चुका है। जबकि 23 लाख 50 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। सभी परिवारों के प्रत्येक व्यक्ति को यह गोल्डन कार्ड दिया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 5 लाख रूपये तक का निःशुल्क ईलाज की सुविधा दी जा रही है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन आयोग के माध्यम से 2221 नियुक्तियां
पिछले 22 माह में उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा 36 भर्ती परीक्षाएं कराई गई, जिसमें 2221 नई नियुक्तियां की गई। 2014 से मार्च 2017 तक सिर्फ 06 परीक्षाएं कराई गई जिसमें 819 नई नियुक्तियां हुई। सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य किया जा रहा है।
देहरादून को 60 प्रतिशत ग्रेविटी वाटर उपलब्ध कराने का लक्ष्य
देहरादून को 60 प्रतिशत ग्रेविटी का पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सृदृढ़ व्यवस्था की जा रही ही। सौंग बांध परियोजना का जल्द ही शिलान्यास किया जायेगा। इस बांध को 350 दिन में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बजट का प्रावधान किया जा चुका है। इस बांध के निर्माण से प्रतिवर्ष 92 करोड़ रूपये की बिजली बचत होगी। सूर्यधार पेयजल योजना पर कार्य शुरू हो गया है। इस परियोजना से 43 गांवों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा तथा बिजली की भी बचत होगी।
सीपैट
सीपैट आने वाले समय में रोजगार का प्रमुख जरिया बनेगा। इसमें 85 प्रतिशत प्रदेश के युवाओं को दाखिला दिया जायेगा। इस कोर्स में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इस संस्थान में सीटों की संख्या बढ़ाई जायेंगी।
विधि विश्वविद्यालय का जल्द शिलान्यास किया जायेगा
रानीपोखरी में 2 मार्च 2019 को विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया जायेगा। इस विश्वविद्यालय को एयरपोर्ट के निकट बनाया जा रहा है। इससे जहां छात्रों को विधि की अच्छी शिक्षा मिलेगी वहीं प्रदेश की आर्थिकी में भी सुधार होगा। यह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय होगा। एयरपोर्ट के निकट इस यूनिवर्सिटी के होने से बाहर से आने वाले विधि विशेषज्ञों को भी सुविधा होगी।

शौर्य स्थल
वीरभूमि उत्तराखण्ड में एक भव्य शौर्य स्थल बनाया जायेगा। इसके लिए बजट में प्राविधान किया जा चुका है। शौर्य स्थल के लिए जल्द भूमि का चयन किया जायेगा। शौर्य स्थल बनाने के लिए एक कमेटी बनाई जायेगी, जिसमें सेना के लोगों को भी शामिल किया जायेगा।
साइंस सिटी
उत्तराखण्ड में जल्द ही साइंस सिटी बनाई जायेगी। साइंस सिटी बनाने के लिए केन्द्र से स्वीकृति मिल चुकी है। इससे बच्चो को विज्ञान के आधुनिक तौर-तरीको की जानकारी के साथ ही अन्वेषण करने का मौका मिलेगा।
ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग
पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किये जा रहे हैं। इस बार के बजट में 48 ग्रोथ सेंटर के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग बनाया गया है। पलायन आयेग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने प्रदेश के प्रत्येक गांवों का अध्ययन किया। उन्होंने पलायन होने के विभिन्न कारणों का अध्ययन किया। पलायन को रोकने के लिए सरकार द्वारा कारगर प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, माला राज्यलक्ष्मी शाह, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, गणेश जोशी, श्री खजान दास आदि उपस्थित थे।

अच्छा व्यवहार बीमारी को दूर करने में मदद करता है

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय स्थित सभागार में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिये प्रभावी पहल के लिये प्रदेश के 46 चिकित्सा इकाइयों को वर्ष 2018-19 का कायाकल्प पुरस्कार प्रदान किया। इसके तहत श्रेणी ए में जिला चिकित्सालय को प्रथम पुरस्कार के रूप में 50 लाख, सांत्वना पुरस्कार 3 लाख, श्रेणी बी में उप जिला चिकित्सालयों को 15 लाख, द्वितीय पुरस्कार 10 लाख, सांत्वना पुरस्कार एक लाख, जबकि सी श्रेणी में प्रत्येक जनपद के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को 2 लाख का प्रथम पुरस्कार तथा 50 हजार का सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। चेनराय जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार को 50 लाख का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह पुरस्कार अस्पतालों को ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प के लिये भी पुरस्कार है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार अन्य अस्पतालों को भी प्रेरित करने में मददगार होंगे। उन्होंने अस्पतालों से इस दिशा में और बेहतर प्रयास करने को कहा। यह स्वास्थ्य सेवाओं को जनोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल भी है। उन्होंने कहा कि इस योजना में पिछले चार वर्षों में 15 गुना वृद्धि हुई है। जहां 2015-16 में इसमें 3 अस्पताल, 2016-17 में 11, 2017-18 में 16 तथा 2018-19़ में यह संख्या 46 पहुंच गई है। उन्होंने इसमें और अधिक प्रयासों की भी जरूरत बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य का क्षेत्र हमारी प्राथमिकता है स्वास्थ्य कर्मी इसमें सबसे ज्यादा मददगार होते हैं। उन्होंने अस्पतालों का वातावरण बेहतर बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने चिकित्सकों से भी जनता के विश्वास को बनाये रखने की अपेक्षा करते हुए कहा कि अच्छा व्यवहार भी बीमारी को दूर करने में मददगार होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न अस्पतालों में स्थापित होने वाले आई.सी.यू तथा डायलिसस केन्द्रों की स्थापना के लिये पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। उन्होंने आयुष्मान भारत-अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना में आ रही कठिनाइयों का तत्परता से निराकरण सुनिश्चत करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने से लोगों को देहरादून कम से कम आना पड़े यह भी देखा जाय। उन्होंने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये स्वस्थ वातावरण भी जरूरी बताया है। उन्होंने प्रदेश के एक ब्लाक को प्रयोग के तौर पर कन्ट्रेक्ट फ्री करने के लिये आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित करने के साथ शिशु मृत्यु दर को 2020 तक 100 से नीचे लाने के प्रयासों पर बल दिया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य स्वास्थ्य सलाहकार परिषद् ज्ञान सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य नीतेश झा, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन युगल किशोर पंत, निदेशक स्वास्थ्य के साथ ही विभिन्न जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।