डीएनए रिपोर्ट में हुआ खुलासा, बेटा की जगह बेटी ही हुई थी

देहरादून के दून महिला अस्पताल में बच्चा बदले जाने के कथित मामले में अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इस मामले में डीएनए रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि महिला का बच्चा बदलने का इल्जाम झूठा है। उसकी बेटी ही हुई थी।

विदित हो कि पिछले माह अस्पताल में एक ही नाम की दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। दोनों के प्रसव के बीच करीब डेढ़ घंटे का अंतर रहा। इनमें एक महिला ने बेटे और दूसरी ने बेटी को जन्म दिया था। शाम ढलते ही अस्पताल में बेटा-बेटी का मामला उलझ गया। इनमें डोभालवाला निवासी आरती पत्नी उमेश ने आरोप लगाया कि उनका बेटा हुआ था। लेकिन अस्पताल में तैनात स्टाफ ने उन्हें शाम को बताया कि बेटा नहीं बेटी हुई है। बच्ची को दूध पिलाने तक से उसने इन्कार कर दिया था।

मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। वहीं उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इसका संज्ञान लिया। अगले दिन आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी अस्पताल पहुंच गईं। उनके हस्तक्षेप पर महिला ने बच्ची को दूध पिलाया। इस मामले में शहर कोतवाली में भी तहरीर दी गई थी। शिकायतकर्ता दंपती बच्चों का डीएनए टेस्ट करने की मांग कर रहे थे।

बीती 12 मार्च को बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी व पुलिस की मौजूदगी में डीएनए जांच के लिए दोनों दंपती व बच्चों के सैंपल लिए गए। अब सवा माह बाद डीएनए की जांच रिपोर्ट आई है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है।

उत्तराखंड में देश की पहली सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन परियोजना और प्रयोगशाला का लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्यामपुर ऋषिकेश में गोकुल योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड लाइव स्टाक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा संचालित 47.50 करोड़ लागत की देश की पहली सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन परियोजना एवं प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग की 11 अन्य योजनाओं के शिलान्यास सहित कुल 101.52करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिन योजनाओं का शिलान्यास किया उनमें-भ्रूण प्रत्यारोपण प्रशिक्षण केन्द्र कालसी में हाॅस्टल का निर्माण लागत 4.63 करोड़, क्रास ब्रीड हिफर रियरिंग फार्म, पशुलोक ऋषिकेश लागत 10.33 करोड़, सैन्टर आॅफ एक्सीलेन्स, भ्रूण प्रत्यारोपण, कालसी, देहरादून लागत 15.00 करोड़, राजकीय बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र, डुन्डा, उत्तरकाशी लागत 3.51 करोड़, स्टेट रेफरल सैन्टर, ट्रान्सपोर्ट नगर, देहरादून लागत 3.07 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, थलकुण्डी, उत्तरकाशी लागत 2.58, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद् देहरादून में प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण लागत 4.28 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, खलियान बांगर, रूद्रप्रयाग लागत 2.99 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, कोपड़धार, टिहरी गढ़वाल लागत 2.64 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, पीपलकोेटी, चमोली लागत 2.50 करोड़, राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, केदारकाॅठा, चमोली लागत 2.49 करोड़ शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सेक्स सार्टड सीमन प्रयोगशाला में तैयार होने वाले स्ट्रा का मूल्य यद्यपि 1150 प्रति स्ट्रा है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा रू.450 का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के पशुपालकों के व्यापक हित में इसके लिए रू.400 का अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिये जाने की घोषणा की, इस प्रकार प्रदेश के पशुपालकों को 1150 रू का स्ट्रा मात्र रू.300 में उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए यूएसए की फर्म इगुरान सोर्टिंग टेक्नालाजी एल.एल.पी. अनुबन्धित की गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समेकित दुग्ध विकास योजना के तहत लाभार्थियों को 100 मोटर बाइक भी प्रदान करने की योजना के तहत प्रतीक स्वरूप बाइक की चाबी प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गो वंशीय पशुओं की संख्या 20.06 लाख तथा महिष वंशीय पशुओं की संख्या 9.80 लाख है। इसमें देशी नस्ल के गोवंश की संख्या 5.42 लाख तथा क्रासबीड की संख्या 2.56 लाख है।उन्होंने कहा कि गोकुल ग्राम योजना के तहत देशी गोवंश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गायों का दुध व गोमूत्र को गुणवत्ता सबसे अच्छी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देशी गाय (बद्री गाय) की संख्या जरूर कम है लकिन इसकी गुणवत्ता सबसे अच्छी है। इस नस्ल की गायों के संवर्धन के लिये चमावत में बद्री गो संवर्धन केन्द्र स्थापित किया गया है। यहां पर इनकी नस्ल सुधार एवं गुणवत्ता के विकास पर ध्यान दिया जा है वहां पर इस समय 150 गायें है इनकी संख्या बढाने के प्रयास किये जाने पर भी उन्होंने बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा प्रगतिशील पशुपालकों के हित में संचालित योजनाओं के माध्यम से भेड़ बकरी पालकों को अच्छी नस्ल तथा उच्च वंशावली के नरों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इंटरवेंशन से भेड़ बकरी पालकों के पशुधन में सुधार होगा तथा ऊन व मांस के अधिक उत्पादन से उनकी आय में गुणात्मक वृद्धि होगी।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित अवधि से पूर्व इस महत्वपूर्ण योजना का शुभारम्भ होना बेहतर कार्य संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने इस प्रकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसान व पशुपालकों को पहुंचे इसके लिए प्रभावी प्रयास करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गाय को गौ माता का सम्मान देने के लिए उत्तराखंड द्वारा प्रभावी पहल की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशुपालन मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों, पशुपालकों के व्यापक हित में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों व मत्स्यपालकों को भी किसान का दर्जा दिया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी इन्हें प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दूध वितरण की व्यवस्था का शुभारम्भ किया गया है।
इस अवसर पर सचिव पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने कहा कि पशुपालन विभाग पशुपालकों के कल्याण हुतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड सेक्स सार्टड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला स्थापित करने की तकनीक का प्रयोग करने वाला पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड लाईवस्टाक डेवलपमेन्ट बोर्ड द्वारा कालसी स्थित भू्रण प्रत्यारोपण केन्द्र के सुदृढ़ीकरण के तहत उक्त प्रयोगशाला को राष्ट्र का सर्वश्रेष्ठ केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु रुपये 15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी तथा साथ-साथ उक्त स्थान पर इसके साथ प्रशिक्षुओं हेतु अत्याधुनिक हॉस्टल का भी निर्माण रुपए 4.63 करोड़ की लागत से किया जाएगा इस केंद्र पर समस्त देश के पशु चिकित्साविदों तथा वैज्ञानिकों को भु्रण प्रत्यारोपण तकनीक का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उच्च नस्ल की वंशावली के पशुओं में वृद्धि की जाएगी तथा प्रदेश एवं सम्पूर्ण राष्ट्र के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी।
उत्तराखंड लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा रुपए 10.33 करोड़ की लागत से पशुलोक प्रक्षेत्र ऋषिकेश में क्रॉस ब्रीड हीफर रियरिग फार्म की स्थापना की जाएगी उक्त योजना के तहत उत्तराखंड के पशुपालकों को उन्नत नस्ल की बछियां तैयार कर उपलब्ध कराई जाएंगी योजना के संचालन से प्रदेश के पशुपालकों के अवर्गीकृत उत्पादन करने वाले पशुओं को रिप्लेस किया जाएगा जिससे उनके germpool में योगदान से राज्य के पशुधन में अनुवांशिक सुधार हो सकेगा।
इस अवसर पर मेयर ऋषिकेश अनीता ममगाई, इगुरान सोर्टिंग टेक्नालाजी के प्रकाश कालेकर, उत्तराखण्ड पशुकल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष विनोद आर्य, निदेशक पशुपालन डा. के.के.जोशी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बोंगला मैं स्वास्थ्य कैंप का नरेश बंसल ने किया उद्घाटन, 1000 से अधिक ने कराई जाँच।

बोंगला हरिद्वार मैं लगा स्वास्थ शिविर एक हजार से अधिक लोगों ने कराई निशुल्क जाँच।
हरिद्वार, 6 मार्च

हरिद्वार जनपत के बहादराबाद क्षेत्र अंतर्गत बोंगला मैं विशाल मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। 1000 से अधिक लोगों ने मेडिकल कैंप से स्वास्थ लाभ लिया। कैंप का आयोजन स्वदेशी जागरण मंच, एम्स ऋषिकेश और होम्योपैथिक हेल्थ सर्विस के संयुक्त तत्वावधान मैं किया गया था। कैंप का उद्घाटन उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति उत्तराखंड नरेश बंसल ने किया। विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष निर्देशक होमियोपैथी डॉ राजेंद्र सिंह रानीपुर विधायक आदेश चौहान सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।
बोंगला मैं संयुक्त तत्वावधान मैं सुबह मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। मेडिकल कैंप का उद्धघाटन उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति उत्तराखंड नरेश बंसल ने किया। इस दौरान ज्वालापुर के विधायक सुरेश राठौर, नगर पालिका शिवालिक नगर के अध्यक्ष राजीव शर्मा , भाजयुमो के पदाधिकारी हरजीत सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। कैंप मैं बंसल ने ब्लड प्रेशर की जाँच कराई।

मुख्यमंत्री ने किया 300 बेड के अस्पताल का शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को हर्रावाला, देहरादून में 300 बेड के चिकित्सालय का शिलान्यास किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य, पर्यटन, सिंचाई व एमडीडीए की विभिन्न विकास योजनाओं के लगभग 540 करोड़ रूपये के कार्यों का शिलान्यास किया गया। हर्रावाला में बनने वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल का नाम ‘‘शंकुतलाराणी सरदारीलाल ओबेराॅय अस्पताल’’ रखा जायेगा। इस अस्पताल के लिये राकेश ओबेराॅय ने 15 बीघा जमीन दान में दी है।
हर्रावाला में बनने वाले यह जच्चा बच्चा व कैंसर अस्पताल 164 करोड़ की लागत से बनाया जायेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी के लिए 287 करोड़ रूपये के कार्यों का शिलान्यास किया गया। 5 करोड़ 9 लाख रूपये की लागत के 33 सड़क निर्माण कार्यों, राजपुर पार्क सौन्दर्यीकरण के लिए 7 करोड़, जार्ज एवरेस्ट हेरिटेज पार्क के विकास की योजना हेतु 23 करोड़ रूपये, धौलास आवासीय परियोजना़ व सिंचाई से सम्बन्धित शिलान्यास के विभिन्न कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पिछले 2 वर्षों में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिए। स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार, पलायन आदि क्षेत्रों में विशेष बल दिया।

अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना
प्रदेश के सभी परिवारों को अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना से जोड़ा जा रहा है। 25 दिसम्बर को प्रदेश में इस योजना के शुभारम्भ से अभी तक 10 हजार लोगों का ईलाज हो चुका है। जबकि 23 लाख 50 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। सभी परिवारों के प्रत्येक व्यक्ति को यह गोल्डन कार्ड दिया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 5 लाख रूपये तक का निःशुल्क ईलाज की सुविधा दी जा रही है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन आयोग के माध्यम से 2221 नियुक्तियां
पिछले 22 माह में उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा 36 भर्ती परीक्षाएं कराई गई, जिसमें 2221 नई नियुक्तियां की गई। 2014 से मार्च 2017 तक सिर्फ 06 परीक्षाएं कराई गई जिसमें 819 नई नियुक्तियां हुई। सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य किया जा रहा है।
देहरादून को 60 प्रतिशत ग्रेविटी वाटर उपलब्ध कराने का लक्ष्य
देहरादून को 60 प्रतिशत ग्रेविटी का पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सृदृढ़ व्यवस्था की जा रही ही। सौंग बांध परियोजना का जल्द ही शिलान्यास किया जायेगा। इस बांध को 350 दिन में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बजट का प्रावधान किया जा चुका है। इस बांध के निर्माण से प्रतिवर्ष 92 करोड़ रूपये की बिजली बचत होगी। सूर्यधार पेयजल योजना पर कार्य शुरू हो गया है। इस परियोजना से 43 गांवों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा तथा बिजली की भी बचत होगी।
सीपैट
सीपैट आने वाले समय में रोजगार का प्रमुख जरिया बनेगा। इसमें 85 प्रतिशत प्रदेश के युवाओं को दाखिला दिया जायेगा। इस कोर्स में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इस संस्थान में सीटों की संख्या बढ़ाई जायेंगी।
विधि विश्वविद्यालय का जल्द शिलान्यास किया जायेगा
रानीपोखरी में 2 मार्च 2019 को विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया जायेगा। इस विश्वविद्यालय को एयरपोर्ट के निकट बनाया जा रहा है। इससे जहां छात्रों को विधि की अच्छी शिक्षा मिलेगी वहीं प्रदेश की आर्थिकी में भी सुधार होगा। यह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय होगा। एयरपोर्ट के निकट इस यूनिवर्सिटी के होने से बाहर से आने वाले विधि विशेषज्ञों को भी सुविधा होगी।

शौर्य स्थल
वीरभूमि उत्तराखण्ड में एक भव्य शौर्य स्थल बनाया जायेगा। इसके लिए बजट में प्राविधान किया जा चुका है। शौर्य स्थल के लिए जल्द भूमि का चयन किया जायेगा। शौर्य स्थल बनाने के लिए एक कमेटी बनाई जायेगी, जिसमें सेना के लोगों को भी शामिल किया जायेगा।
साइंस सिटी
उत्तराखण्ड में जल्द ही साइंस सिटी बनाई जायेगी। साइंस सिटी बनाने के लिए केन्द्र से स्वीकृति मिल चुकी है। इससे बच्चो को विज्ञान के आधुनिक तौर-तरीको की जानकारी के साथ ही अन्वेषण करने का मौका मिलेगा।
ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग
पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किये जा रहे हैं। इस बार के बजट में 48 ग्रोथ सेंटर के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग बनाया गया है। पलायन आयेग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने प्रदेश के प्रत्येक गांवों का अध्ययन किया। उन्होंने पलायन होने के विभिन्न कारणों का अध्ययन किया। पलायन को रोकने के लिए सरकार द्वारा कारगर प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, माला राज्यलक्ष्मी शाह, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, गणेश जोशी, श्री खजान दास आदि उपस्थित थे।

अच्छा व्यवहार बीमारी को दूर करने में मदद करता है

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय स्थित सभागार में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिये प्रभावी पहल के लिये प्रदेश के 46 चिकित्सा इकाइयों को वर्ष 2018-19 का कायाकल्प पुरस्कार प्रदान किया। इसके तहत श्रेणी ए में जिला चिकित्सालय को प्रथम पुरस्कार के रूप में 50 लाख, सांत्वना पुरस्कार 3 लाख, श्रेणी बी में उप जिला चिकित्सालयों को 15 लाख, द्वितीय पुरस्कार 10 लाख, सांत्वना पुरस्कार एक लाख, जबकि सी श्रेणी में प्रत्येक जनपद के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को 2 लाख का प्रथम पुरस्कार तथा 50 हजार का सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। चेनराय जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार को 50 लाख का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह पुरस्कार अस्पतालों को ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प के लिये भी पुरस्कार है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार अन्य अस्पतालों को भी प्रेरित करने में मददगार होंगे। उन्होंने अस्पतालों से इस दिशा में और बेहतर प्रयास करने को कहा। यह स्वास्थ्य सेवाओं को जनोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल भी है। उन्होंने कहा कि इस योजना में पिछले चार वर्षों में 15 गुना वृद्धि हुई है। जहां 2015-16 में इसमें 3 अस्पताल, 2016-17 में 11, 2017-18 में 16 तथा 2018-19़ में यह संख्या 46 पहुंच गई है। उन्होंने इसमें और अधिक प्रयासों की भी जरूरत बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य का क्षेत्र हमारी प्राथमिकता है स्वास्थ्य कर्मी इसमें सबसे ज्यादा मददगार होते हैं। उन्होंने अस्पतालों का वातावरण बेहतर बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने चिकित्सकों से भी जनता के विश्वास को बनाये रखने की अपेक्षा करते हुए कहा कि अच्छा व्यवहार भी बीमारी को दूर करने में मददगार होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न अस्पतालों में स्थापित होने वाले आई.सी.यू तथा डायलिसस केन्द्रों की स्थापना के लिये पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। उन्होंने आयुष्मान भारत-अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना में आ रही कठिनाइयों का तत्परता से निराकरण सुनिश्चत करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने से लोगों को देहरादून कम से कम आना पड़े यह भी देखा जाय। उन्होंने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये स्वस्थ वातावरण भी जरूरी बताया है। उन्होंने प्रदेश के एक ब्लाक को प्रयोग के तौर पर कन्ट्रेक्ट फ्री करने के लिये आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित करने के साथ शिशु मृत्यु दर को 2020 तक 100 से नीचे लाने के प्रयासों पर बल दिया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य स्वास्थ्य सलाहकार परिषद् ज्ञान सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य नीतेश झा, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन युगल किशोर पंत, निदेशक स्वास्थ्य के साथ ही विभिन्न जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

हमारा लक्ष्य उत्तराखंड में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, डांडा लखौंड, देहरादून में राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला एवं राज्य औषधि नियंत्रक भवन कार्यालय का शिलान्यास, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के नवीन कार्यालय भवन का लोकार्पण, चिकित्सा अधिकारियों के लिए 17 ट्रांजिट हाँस्टल का शिलान्यास व राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक व्यापक एवं सुविधाजनक बनाने के लिए संगठित एवं समन्वित प्रयासों की जरूरत है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के बाद उत्तराखण्ड दूसरा राज्य है जहां एन.एच.एम का अपना कार्यालय स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरा सामाजिक दायित्व के तहत विशेषज्ञ डाॅक्टर महिने में 2-3 दिन दुर्गम क्षेत्रों में जाकर अपने सेवाएं दें, तो बड़े अस्पतालों के वर्क लोड में भी कमी आयेगी व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आयेगा। उन्होंने कहा कि चमोली के पीपलकोटी व रूद्रप्रयाग के गुप्तकाशी में विशेषज्ञ डाॅक्टरों द्वारा इस तरह की सेवाएं दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐलोपैथिक व आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाइसेंस के लिए सिंगल विंडों सिस्टम बनाने का प्रयास किया जायेगा। देश के 20 प्रतिशत आयुर्वेदिक दवाओं का निर्यात उत्तराखण्ड करता है। उन्होंने कहा कि फार्मा इंडस्ट्रियों के प्रतिनिधियों से पिछले साल मसूरी में बैठक के बाद उनकी अनेक समस्याओं का समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद राज्य में तेजी से औद्योगीकरण हुआ। वर्तमान में प्रदेश में 300 औषधि निर्माता फर्म व 150 काॅस्मेटिक आईटम निर्माता फर्म हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। आम जन के स्वास्थ्य के हित में औषधियों का परीक्षण किये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राज्य औषधि संगठन हेतु कार्यालय भवन एवं राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित किये जाने के लिए 14 करोड़ रूपये की स्वीकृति केन्द्र सरकार से प्राप्त की गई है जिसमें से 5 करोड़ रूपये की पहली किश्त प्राप्त हो चुकी है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, उत्तराखण्ड के भवन के तृतीय तल पर 644.33 लाख रूपये की लागत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का निर्माण किया गया है। एन.एच.एम के अन्तर्गत हर चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारियों हेतु चिकित्सालयों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण किया जा रहा है। बागेश्वर, चम्पावत, चमोली व उप चिकित्सालय में एक-एक एवं 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण 4538 लाख रूपये की लागत से पेयजल निगम द्वारा किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने 15 बच्चों को एलबेंडाजोल की गोलिया खिलाकर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया। 8 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति के छठें चरण में प्रदेश के सभी जनपदों में 1 से 19 वर्ष के 42 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई जायेगी।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, उपाध्यक्ष, ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार परिषद् ज्ञान सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा, मिशन निदेशक एनएचएम युगल किशोर पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य डाॅ. टी.सी.पंत, चेयरमैन औषधि नियंत्रण निर्माण इकाई संदीप जैन आदि उपस्थित थे।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बलूनी ने दी एक और सौगात

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश व सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी में रोगियों के परिजनों के रुकने तथा रात्रि प्रवास हेतु दो आरोग्य सदनों (रैन-बसेरों) के निर्माण की सौगात देने जा रहे है। गढ़वाल और कुमाऊ मंडल में बनने वाले इन आरोग्य-सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्र के गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।
सांसद बलूनी ने आज इस संबंध में देहरादून व नैनीताल के जिलाधिकारियों, ऋषिकेश तथा हल्द्वानी के मेयर से इन आरोग्य-सदनों हेतु शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने हेतु वार्ता की। बलूनी ने कहा कि वे अपनी सांसद निधि एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से इन सदनों का निर्माण करेंगे।

सांसद बलूनी ने कहा कि सुदूर से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य-सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा तो बचायेंगे ही साथ ही उन्हें लागत मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराने हेतु कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा।
बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने हेतु कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) व कैंटीन का निर्माण किया जायेगा। सुदूर के रोगी सम्पूर्ण जांच व उपचार होने तक यहाँ रुक सकेंगे ताकि होटल के महंगे रहने-खाने के खर्च से उन्हें राहत मिल सके।

आशाओं की हुई मांग पूरी, वेतन में ₹1000 की वृद्धि

आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में एक हजार रूपये की वृद्धि की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बागेश्वर ने गरूड़ में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के शुभारम्भ के अवसर पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रूकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रूपये जारी किये गये। वर्ष 2012 से आशा कार्यकत्रियों को 5 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि देने की योजना शुरू की गयी थी, जिसका कभी भी नियमित रूप से भुगतान नहीं हो पाया। आशा कार्यकत्रियों द्वारा इसकी लगातार मांग की जा रही थी। आशा कार्यकत्रियों की मांग का संज्ञान लेते हुए लम्बित पूर्ण 33 करोड़ की धनराशि जारी की गयी। इससे प्रदेश की 12 हजार आशा कार्यकत्रियों को फायदा हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बागेश्वर जनपद की लगभग 65 करोड़ से निर्मित विभिन्न 36 योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने जनपद बागेश्वर में अटल आयुष्मान योजना का शुभारम्भ किया तथा लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल्द से जल्द इस योजना के अन्र्तगत अपना कार्ड बनवायें। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि कुछ लोगों द्वारा इस महत्वकांक्षी योजना के बंद होने की अफवाह फैलाई जा रही है जो बिलकुल निराधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ की गयी आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत बीपीएल एवं अन्त्योदय परिवारों को सम्मिलित किया गया था।

राज्य के सभी परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिये प्रदेश में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना शुरू की गयी। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। एक माह में तीन हजार से अधिक लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध अस्पतालों द्वारा भी उत्तराखण्ड सरकार से एमओयू हेतु प्रस्ताव किये जा रहे है जिनमें वेदान्ता अस्पताल दिल्ली भी शामिल है।
बागेश्वर की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गयी आयुष्मान भारत योजना के वास्तविक लक्ष्यों को पाने हेतु राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना का शुभारम्भ किया गया है। जिससे प्रत्येक लाभार्थी चयनित अस्पतालों में अपना एवं अपने परिवार का निःशुल्क उपचार करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में जोड़ना है जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक चन्दन राम दास, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू आदि उपस्थित थे।

26 नई एंबुलेंस शामिल हुई 108 सेवा के बेड़े में

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सा विज्ञान केंद्र में 108-आपातकालीन एम्बुलेंस की 26 एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को हंस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए 2 करोड़ की लागत के उपकरणों का भी लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मीडिया से अनौपचारिक वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए 108-एम्बुलेंस सेवा जीवन दायिनी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती प्रदान करते हुए नवंबर माह में 61 बी.एल.एस. एम्बुलेंस वाहनों को पुरानी एम्बुलेंस से प्रतिस्थापित किया गया था, आज 26 अन्य एम्बुलेंस वाहनों को प्रतिस्थापित किया गया है। इस प्रकार कुल 87 बी.एल.एस. एम्बुलेंस को प्रतिस्थापित कर दिया गया है। शीघ्र ही नई 34 बी.एल.एस. एम्बुलेंस और 16 ए.एल.एस. एम्बुलेंस राज्य की जनता के सेवार्थ उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी से एयर एम्बुलेंस सेवा भी शुरू कर दी गई है, जो आपातकालीन स्थिति में मरीजों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हंस फाउंडेशन भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को हंस फाउंडेशन द्वारा रु0 2.00 करोड़ की लागत के उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका आज लोकार्पण किया गया।

26 जनवरी से उत्तराखंड में एयर एंबुलेंस की सेवा

उत्तराखंड के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अटल आयुष्मान योजना के बाद सरकार सूबे में हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने जा रही है। इस सेवा के शुरू होने के बाद आपदा और दुर्घटना के वक्त मरीजों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाएगा। खास तौर पर पहाड़ के लोगों के लिए ये एक बेहतरीन खबर है। अक्सर देखने को मिलता है कि सही वक्त पर सही तरह से इलाज ना मिल पाने की वजह से पहाड़ में कई बार लोग दम तोड़ देते हैं।
अब एयर एंबुलेंस की मदद से उन्हें तुरंत ही किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जा सकेगा। एयर एंबुलेंस के लिए जिलाधिकारी की परमीशन लेनी होगी। आगामी 26 जनवरी से हेली सेवा की शुरूआत किए जाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है। इस सेवा को स्थायी रूप से शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकार की कोशिशें रंग लाईं तो जल्द ही उत्तराखंड हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। हेली एंबुलेंस सेवा के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5 करोड़ रुपये का बजट मिला है। प्राकृतिक आपदा के मामले में उत्तराखंड बेहद संवेदनशील राज्य है। सूबे में आपदा के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हेली एंबुलेंस सेवा शुरू होने के बाद आपदा और दुर्घटना के हालात में मरीजों को समय रहते इलाज मिल पाएगा। जिससे कई लोगों की जान बचेगी। हेली एंबुलेंस में एक से दो स्ट्रेचर की क्षमता होगी। आने वाले वित्तीय वर्ष में इस सेवा में विस्तार करने की भी प्लानिंग है, जिसके बाद चारधाम यात्रा के दौरान भी एयर एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध रहेगी। प्रदेश सरकार 26 जनवरी से ये सेवा शुरू करने के प्रयास कर रही है। आगामी वित्तीय वर्ष से इसमें और सुधार किया जाएगा।