राज्य की न्याय पंचायतें ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित हो रहीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय कार्यशाला व पोषण अभियान का शुभारंभ करते हुये कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना व राष्ट्रीय पोषण अभियान के द्वारा महिला व बाल कुपोषण को समाप्त करने हेतु प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित कैलेण्डर व पोषण गीत का विमोचन किया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य ठिगनापन, अल्पपोषण दूर करना व छोटे बच्चों, महिलाओं एवं किशोरियों में एनीमिया को कम करना है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और तीन साल के कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाएगा। योजना में आईसीडीएस कर्मचारियों तथा सामुदायिक पोषक कार्यकर्ताओं में कौशल व क्षमता में सुधार लाने के लिए निवेश किया जाएगा।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड के परम्परागत पर्वतीय खानपान पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। हमारा स्थानीय अनाज, सब्जियॉं, वनों से मिलने वाले फल-फूल, वनस्पति अत्यन्त पौष्टिक है। हमारे बुर्जुगों ने खानपान की स्वास्थ्य वर्धक परम्पराओं को अपनाया था।

उन्होंने कहा कि कुपोषण को समाप्त करने के लिए सभी विभागों को मिलजुल कर कार्य करना होगा। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बाल कुपोषण को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। कुपोषण को दूर करने व बिमारियों से बचाव में स्वच्छता का विशेष महत्व है। आमजन को स्वच्छता व टीकाकरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान के प्रति आमजन विशेषकर महिलाओं को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। हमें कुपोषण के प्रति जन अभियान चलाना होगा ताकि हम पूर्णतः स्वस्थ राज्य व देश बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें से 107 को चयन कर लिया गया है। गांव के आस-पास के स्थानीय उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिग, वैल्यू एडिशन आदि स्थानीय लोगों के माध्यम करवाने की मूल परिकल्पना पर आधारित न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप विकसित किया जा रहा है। ग्रोथ सेन्टरों में महिला लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिये मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान आरम्भ किया गया है। समेकित बाल विकास सेवाओं के तहत टेक होम राशन अनुपूरक पोषाहार के रूप में वितरित किया जा रहा है। प्रत्येक माह की पांच तारीख को वजन एवं पोषण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन समस्त लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से पोषाहार वितरित किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्वैच्छिक सेवानिवृति पर एक अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृति का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं है। सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की मांग ठुकरा सकती है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डाक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी स्वीकार करते हुए सेवानिवृत घोषित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संशोधित फंडामेंटल रूल-56 की व्याख्या करते हुए कहा कि नियमों के तहत सरकार को स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराने का अधिकार है। सरकार ने मानव जीवन की आवश्यकताओं और जनहित के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। डाक्टर मौलिक अधिकार के तहत सेवानिवृति के हक का दावा कर रहे हैं लेकिन ये अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। सेवानिवृति के अधिकार की व्याख्या सरकार द्वारा लोगों को स्वास्थ्य और पोषण उपलब्ध कराने के संवैधानिक दायित्व को साथ रख कर की जाएगी। रोजगार की आजादी, जनहित के आधीन है। नौकरी ज्वाइन करने के बाद इस अधिकार का दावा सिर्फ नियमों के मुताबिक ही किया जा सकता है।

स्वैच्छिक सेवानिवृति पर नियमों के मुताबिक ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलता है, ऐसे ही जब कर्मचारी की सेवा की आवश्यकता होगी तो नियुक्ति अथारिटी को स्वैच्छिक सेवानिवृति अर्जी अस्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह सभी डाक्टरों की सेवानिवृति की अनुमति दे दी जाएगी तो अव्यवस्था उत्पन्न हो जाएगी और सरकारी अस्पताल में कोई भी डाक्टर नहीं बचेगा।

कोर्ट ने कहा कि रूल 56 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के नोटिस को तीन महीने बीतने पर सेवानिवृति स्वतरू प्रभावी नही होगी। नियुक्ति अथारिटी या तो नोटिस स्वीकार करेगी या फिर उसे अस्वीकार कर सकती है। कर्मचारी को स्वैच्छिक सेवानिवृति का संपूर्ण अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि पहले ही डॉक्टरों की कमी है। व्यवस्था को सक्षम वरिष्ठों के बगैर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज कराता है उन्हें खतरे में नहीं डाला सकता। भारत में सरकारी चिकित्सा सेवा गरीबों की जरूरतों को पूरा करती है अन्यथा इस धर्मार्थ कार्य का व्यवसायीकरण हो चुका है। इस स्थिति में लोगों को अच्छे डॉक्टरों की सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।

डॉक्टरों की कमी और इस पेशे के व्यवसायीकरण का ध्यान रखते हुए सरकार ने राज्य चिकित्सा सेवा की क्षमता बनाए रखने के लिए जो फैसला किया है वह नियम सम्मत है। संविधान के तहत हर व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह जीवित प्राणियों के प्रति दयालुता और मानवता रखे ताकि राष्ट्र लगातार ऊंचाइयों पर पहुंचे। सरकारी चिकित्सा सेवा से बड़े पैमाने पर कूच नहीं हो सकता जैसा इस मामले में दिखाई दे रहा है।

क्या था मामला
उत्तर प्रदेश में प्रांतीय मेडिकल सर्विस में वरिष्ठ पदों पर तैनात डा. अचल सिंह, डा. अजय कुमार तिवारी, डा. राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डा. राजीव चौधरी ने स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी दी। जब सरकार ने उस पर आदेश नहीं किया तो डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका कर स्वैच्छिक सेवानिवृति मांगी जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। सरकार ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का कहना था कि डॉक्टरों की कमी को देखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराई गई है।

चंबा-उत्तरकाशी बस दुर्घटना में घायलों को लाया गया एम्स, सीएम ने जाना हाल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चम्बा-उत्तरकाशी राष्ट्रीय राजमार्ग पर किरगनी के पास हुई बस दुर्घटना के 14 घायल व्यक्तियों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने एम्स पहंुचकर इन सभी घायलों की सुध लेते हुये एम्स के निदेशक से अपेक्षा जतायी कि सभी घायलों के इलाज में कोई कमी न रह पाये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुःखद है। दुर्घटना के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये गये है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न घटित हो इसके लिये भी ठोस कार्ययोजना बनायी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना के बाद घायलों को दो हैलीकाप्टरों के माध्यम से एम्स अस्पताल लाया गया है। घायलों की सरकार द्वारा हर सम्भव मदद की जायेगी। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रूपये एवं घायलों को 50-50 हजार रूपये की राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये है।

एम्स में भर्ती घायलों की सूची

एम्स ऋषिकेश में जिन घायलों को भर्ती किया गया है, उनमें घनसाली टिहरी की सीमा पुत्री आनन्द सिंह, चम्पारन के मनोज शाह पुत्र पन्ना लाल, रूड़की के रघुवीर पुत्र भजन सिंह, शिकारपुर बुलंदशहर के ममता पत्नी लोकेश, शिकारपुर बुलंदशहर के अयांश पुत्र लोकेश, बतीया बिहार के रहमान पुत्र मो.अनवर, रायवाला देहरादून के आदित्य पुत्र सुरेश, रमोला गांव टिहरी के कुसुम पुत्री सुरतम सिंह नेगी, हंसकोटी मीनगदेरा के रमेश चन्दोला पुत्र तुलाराम चन्दोला, चिन्यालीसौड़ टिहरी के विजय राज पुत्र प्रीतम सिंह, शिकारपुर बुलंदशहर के लोकेश पुत्र राजबीर सिंह, बतीया बिहार के शिव कुमार पुत्र भुत्ती शाह व दो अन्य लोग शामिल है।

मुख्यमंत्री ने ली वन्य जीव बोर्ड की बैठक, लिया ये अहम फैसला

मुख्ममंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक बुलाई गयी। जिसमें अहम फैसला लेते हुये वन्य जीवों द्वारा मारे जाने व गंभीर रूप से घायल होने पर मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाया गया। इसके लिये कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। इसके बाद मारे गये मृतक के परिजनों को तीन के बजाए पांच लाख रूपये व गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रूपये की बजाए दो लाख रूपये की मुआवजा राशि मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। वनों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। वनों का संरक्षण भी हो और स्थानीय ग्रामीण इनसे आजीविका भी प्राप्त कर सकें इसके लिए ग्रीन टूरिज्म की कन्सेप्ट पर काम किया जाए। कार्बेट के बफर जोन व रामनगर वन प्रभाग में हाथी सफारी को भी अनुमति दी गई। यह भी तय किया गया कि राजाजी टाईगर रिजर्व में पर्यटन से होने वाली आय का 100 फीसदी राजाजी टाईगर रिजर्व कंजरवेशन फाउंडेशन के कोष में जमा किया जाएगा। इसका कुछ भाग सामुदायिक गतिविधियों में प्रयोग किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल में एक बार होने वाली उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक हर छह माह में आयोजित की जाए। इसमें प्रस्तुत किए जाने वाले बिंदुओं के साथ विस्तृत रिपोर्ट भी संलग्न होनी चाहिए। यदि कोई मामला जनता से जुड़ा हो तो बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत करने से पहले यह भी अध्ययन करा लिया जाए कि इससे सम्भावित लाभ व हानि क्या-क्या हैं।

आरक्षित वन और टाईगर रिजर्व के बफर जोन में एंगलिंग का परमिट नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन विभाग द्वारा जिन पर्वतारोही दलों को अनुमति दी जाती है उसकी सूचना पुलिस को भी दी जाए। ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में फंसे पर्वतारोहियों को बचाया जा सके। बैठक में वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित कंडी मार्ग पर किए गए फिजीबिलिटी सर्वे का प्रस्तुतिकरण किया गया। बताया गया कि इसके बनने से गढ़वाल से कुमायूं के लिए सीधा सम्पर्क मार्ग बनेगा और इससे यात्रावधि में लगभग तीन घंटे की कमी आएगी। इस पर कंडी मार्ग के संबंध में एक कार्यकारी समिति बनाने का निर्णय किया गया।

जानिए एम्स ऋषिकेश में आखिर यह सुविधा क्यों नहीं

ऋषिकेश स्थित एम्स संस्थान वैसे तो सारी सुविधाओं से लैस हैं। मगर, इतने बड़े संस्थान में शव विच्छेदन गृह की सुविधा का अभाव है। अगर, यहां शव विच्छेदन गृह खुल जाता तो पांच जनपदों की पुलिस को दूर जाकर शव का पोस्टमार्टम नहीं करना पड़ता।

विदित हो कि जनपद पौड़ी के थाना लक्ष्मणझूला पुलिस को शव का पोस्टमार्टम कराने के लिये हरिद्वार जाना पड़ता है। इसी तरह टिहरी के थाना मुनिकीरेती पुलिस को भी नरेन्द्रनगर की शरण लेनी पड़ती है।

ऋषिकेश में हालांकि बाईपास मार्ग पर शव विच्छेदन गृह है, लेकिन 72 घंटे शिनाख्त के लिये अज्ञात शवों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था यहां भी नहीं है। यहां अखिल भारतीय आयर्विज्ञान संस्थान के खुल जाने के बाद यह उम्मीद बन गयी थी कि अब यहां पोस्टमार्टम हाउस खुल जायेगा। मगर, अब तक नहीं खुला है। एम्स प्रशासन द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के जरिये शासन से एम्स में शव विच्छेदन गृह के लिये अधिसूचना आदेश जारी करने की मांग की गयी थी। इस मामले में नोटिफिकेशन गृह विभाग द्वारा किया जाना है। मगर, संबंधित फाइल कभी एसएसपी कार्यालय, कभी पुलिस मुख्यालय तो कभी शासन के विभिन्न विभागों में घूम कर रह गयी है।

अगर आपके पास कोई समस्या है तो कीजिए इस टोल फ्री नंबर पर कॉल

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत हरिद्वार क्षेत्र के 450 वृद्ध दिव्यांगों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलौत ने जीवन सहायक उपकरण बांटे। इस मौके पर सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों को उठाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत टोल फ्री नंबर 1905 पर कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्री गहलोत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र की हर योजना में उत्तराखण्ड को विशेष रूप से शामिल किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले चार वर्षों में 50 गुना अधिक शिविरों का आयोजन कर पात्र लोगों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को अधिक से अधिक मिल सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने जिला प्रशासन को दिव्यांगों के कल्याण के लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने एवं योजना से लाभान्वित करने के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत या समस्या को टोल फ्री नम्बर 1905 पर दर्ज करा सकते है।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा 100 से अधिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई है, जिनके माध्यम से लोगों को लाभान्वित करने का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वृद्ध दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाये है। केन्द्रीय मंत्री गहलोत ने कहा पिछले चार वर्षों में देशभर में 11 लाख दिव्यांगों को 600 करोड़ रूपये से अधिक की सामग्री वितरित की जा चुकी है और सात हजार कैम्प आयोजित किये गये हैं।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना पिछले वर्ष प्रारम्भ की गयी, जिसमें देश के 260 जनपदों का चयन किया गया है। इस योजना के अन्तर्गत अभी तक 43 हजार वृद्धजनों को उनकी आवश्यकतानुसार उपकरण उपलब्ध कराये गये हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगों को मोटराईज ट्राई साइकिल उपलब्ध करायी जा रही है। अब तक साढ़े पांच हजार पात्र लोगों को मोटराईज ट्राईसिकल दी जा चुकी है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगों को व्हील चेयर, ट्राईसाईकिल, बैसाखी, सुनने की मशीन, चश्मा एवं पढ़ने वाले बच्चों को लेपटॉप, स्मार्टफोन आदि वितरित किये जा रहे हैं।

सरकार द्वारा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को 7500 रूपये तक की सामग्री देने का निर्णय लिया गया है। ऐसे बच्चे जो बोल व सुन नहीं सकते है, उनके उपचार के लिये सरकार अनुदान दे रही है।

श्रद्धालुओं के लिये बद्रीनाथ धाम में लगा हारपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर

यात्रियों की आमद को देखते हुये सूबे के सीएम ने श्रद्धालुओं के चिकित्सा सुविधा की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए है। इसके तहत बद्रीनाथ धाम में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर लगाया गया है, जबकि केदारनाथ धाम, गंगोत्री व यमुनोत्री में भी यह सुविधा जल्द शुरू होने वाली है।

उत्तराखंड सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर चिकित्सा अधिकारी/फार्मेसिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप वाले लोगों एवं वरिष्ठ नागरिक को आकस्मिक उपचार के लिए इकोस्प्रिन एवं सोर्बिट्रेट दवाओं की व्यवस्था की गई है। अधिक ऊचाँई पर होने वाले रोगों के उपचार हेतु प्रशिक्षित ‘सिक्स सिगमा हेल्थ केयर’, नई दिल्ली द्वारा उत्तराखण्ड में चारांे धाम के यात्रा मार्गों पर 21 जून तक विशिष्ठ सेवाएं दी जायेगी। इस हेल्थ केयर सेंटर द्वारा केदारनाथ धाम में कार्डियोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यमुनोत्री धाम में भी शीघ्र ही कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराये जाएंगे। चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नम्बर-104 को भी सुदृढ़ किया गया है। जिसके माध्यम से सभी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सूचना दी जायेगी तथा शिकायत एवं सुझाव भी लिए जायेंगे। हेल्प लाइन के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्गो पर श्रद्धाुलुओं को स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जायेगी।

उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा मार्गों में कुल 20 स्थानों पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट बनाये गये हैं। 08 स्थानों पर फर्स्ट मेडिकल रिस्पोन्डर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि 103 स्थानों पर चिकित्सा इकाईयां बनाई गई हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों, फार्मासिस्टों एवं स्टाफ नर्स की समुचित व्यवस्था की गई है। चारधाम यात्रा मार्ग में 50 प्रमुख स्थानों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

राज्य के तीव्र विकास के लिये अनुभवियों के सुझाव जरूरी

सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन उत्तराखंड के चतुर्थ प्रांतीय महाधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पेंशनर्स भवन की मांग देहरादून में विचारणीय है। उन्होंने संगठन के अधिवेशन के लिये एक लाख रूपये की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की।

संगठन के महाधिवेशन में पहुंचे मुख्यमंत्री के सम्मुख संगठन ने 14 सूत्रीय मांग पत्र रखा। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मांगों का परीक्षण किया जायेगा। जो मांग पूरी हो सकती है, उसे पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों एवं विधायकों से एक घण्टे के संवाद में उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए हम सबको आधुनिक तकनीक के अधिक से अधिक प्रयोग पर बल देना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं एवं नीतियों से अपडेट रहना जरूरी है। सरकार के नीतिगत निर्णय, शासनादेश सब वेबसाइट पर अपलोड हो जाती हैं। किसी भी समस्या की शिकायत, उसके समाधान और सुझाव के लिए सीधे मुख्यमंत्री ऐप एवं टोल फ्री नम्बर 1905 पर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि शिकायत या सुझाव मिलने पर उसे सीधा सम्बन्धित विभागों को भेजा जाता है। जिस पर सम्बन्धित विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाती है।

उन्होंने बताया कि घेस व हिमनी गांवों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से दिल्ली के अपोलो अस्पताल से जोड़ा गया है। चमोली के सुदूर बलाड गांव में कम उम्र में ही महिलाओं के दांत गिरने की समस्या पायी गयी थी, इसकी जांच करने पर यह जानकारी मिली कि प्रसव के दौरान उन्हें ठीक से आहार न मिलने के कारण यह समस्या पैदा हो रही है। इसके लिये गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश को 2024 तक टीबी मुक्त राज्य बनाने लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल करते हुए प्रदेश में 47 ई-अस्पताल स्थापित किये गये है। जबकि पूरे देश में इनकी संख्या 144 है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक सेवाएं दी जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों के वरिष्ठ पेंशनर्स को सम्मानित भी किया।

इस दौरान मसूरी विधायक गणेश जोशी ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारियों को अपने अनुभवों से सरंक्षक की भूमिका निभानी होगी। राज्य के तीव्र विकास के लिए अनुभवी लोगों का सुझाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य कर रही है। पिछले एक साल में परिवहन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश को घाटे से उभारा गया है।

सस्ता उपचार देगा ऋषिकेश एम्सः चौबे

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा राष्ट्रीय आरोग्य निधि में एम्स ऋषिकेश को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक और परिसर का मुआयना करने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह एम्स बनाने की योजना बनाई थी। जिसमें सबसे अच्छी प्रगति ऋषिकेश एम्स की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस एम्स को राष्ट्रीय आरोग्य निधि में शामिल करने जा रहा है। इस नीति से गरीबों को सस्ता उपचार मिलेगा। उन्होंने कहा कि एम्स विस्तारीकरण के लिए 200 एकड़ और रैनबसेरे के लिए 100 एकड़ भूमि की मांग राज्य सरकार से की है। इस कार्य को गति दी जाएगी। यहां आइडीपीएल की खाली भूमि पर भी विचार होगा। सरकार यहां सीआरसी खर्चे रैनबसेरे का निर्माण कराएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सरकार 1300 करोड़ का हेल्थ पैकेज देगी। बीते वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड को स्टेट प्लान के तहत 368 लाख रुपया दिया गया है। यहां 323 स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड कर इसी वर्ष वेलनेस सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। जिसमें एनएचएम से 90 प्रतिशत बजट दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना ने वर्ष 2022 तक कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। जिसमें स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शामिल है। पांच वर्ष में इस योजना से डेढ़ लाख हेल्थ सेंटर को 1300 करोड़ की लागत से मॉडल बनाए जाने का प्रावधान है। कहा कि टीबी के मरीजों को नमो केयर के रूप में प्रतिमाह 500 रुपया दिया जा रहा है।

ऋषिकेश एम्स में रोबोटिक सर्जरी से दो का सफल ऑपरेशन

ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इन दिनों रोबोटिक सर्जरी का लाभ कई मरीजों को मिल रहा है। इस सर्जरी के जरिये एक महिला का मूत्राशय में रसौली व एक व्यक्ति में पाए गये कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर्स की देखरेख में सम्पन्न हुआ।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर रविकांत गुप्ता ने बताया कि इस सर्जरी का सर्वाधिक उपयोग किडनी व मूत्राशय संबंधी बीमारियों के ऑपरेशन में किया जाता है। यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डाक्टर अंकुर मित्तल व सुनील कुमार ने 65 वर्ष की एक महिला जो ब्लैडर कैंसर की समस्या से जुझ रही थी। उनका ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के जरिए सफल रहा। इस ऑपरेशन में कैंसर से ग्रस्त मूत्राशय को निकालकर कृत्रिम मूत्राशय बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व में चीरा लगाकर ऑपरेशन किये जाते थे।

विदित हो कि मूत्राशय कैंसर धूम्रपान, विकिरण, रसायनिक कारणों, रंजक, रबड़, पेंट आदि के निर्माण में प्रयोग में लाये जाने वाले रसायन से होता है।

दूसरा सफल ऑपरेशन में एक व्यक्ति की किडनी में कैंसर था। रोबोटिक सर्जरी के जरिये रसौली को निकाल दिया गया और किडनी को बचा लिया गया। जबकि, पूर्व में किडनी को ही निकाल दिया जाता था।