100 बेड के अस्पताल से मिलेगी बड़ी राहत

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड को नए वर्ष की सौगात के रूप में 1 जनवरी को देहरादून में 100 बेड के प0 दीनदयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने मौके पर ही कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि एक साल पांच महीने तेईसवे दिन 23 जून 2020 को यह अस्पताल किसी भी स्थिति में जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल निर्माण का काम पूरी तरह से क्वालिटी कन्ट्रोल के साथ किया जाए। अत्याधुनिक तकनीक व सुविधाओं के साथ चैबीस घण्टे इसका निर्माण कार्य चलाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे देहरादून वासियों की काफी समय से अपना जिला अस्पताल न होने की चिन्ता भी खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आगामी कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय भवन निर्माण कला के साथ भवन व घर निर्माण करने वालो को एक फलोर या मंजिल और बनाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की परम्परागत पर्वतीय भवन निर्माण शैली दुनिया की सबसे अच्छी भवन निर्माण कला व शैली है। यह वातानुकूलित है जिसे हमारे पूर्वजों ने अपने अनुभवों के आधार पर विकसित किया है। इससे राज्य की विशिष्ट पहचान व कला दुनिया के सामने आएगी। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सभी सरकारी अस्पतालों व निजी संस्थानों के चिकित्सकों को आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी अस्पतालों को रेगुलरराइज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत परिवर्तन उत्तराखण्ड के लिए आमूल चूल परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समस्याओं के सतही समाधान नही बल्कि स्थायी समाधान में विश्वास रखते है।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने राज्य की जनता को नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नया वर्ष हम सब के लिए अच्छा स्वास्थ्य, जीवन में संवर्द्धन लेकर आए, हम जीवन की नई-नई ऊंचाईयों को छुए और हमारा व्यक्तित्व बहुआयामी हो ऐसी कामना है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारे राज्य के लिए बहुत खुशी की बात है कि राज्य में ऐसे भी चिकित्सक है जोे अच्छा वेतन व बड़े निजी अस्पतालों की नौकरियां छोड़ कर के एक चैथाई वेतन पर प0दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके लिए न्यूरोसर्जन डा0 राहुल अवस्थी जैसे डाॅक्टर बधाई व प्रशंसा के पात्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प0 दीनदयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय आज व भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। कुल क्षेत्र 8141 वर्ग मीटर जैसे बड़े क्षेत्र में इसका निर्माण होगा है। यह अस्पताल कुल 136 बेड का है जिसमें 76 जनरल वार्ड, 24 बर्न वार्ड, 11 आईसीयू बेड, 9 बेड का रिकवरी वार्ड और 16 इमरजेंसी बेड व 4 आॅपरेशन थियेटर होंगे। यह अत्याधुनिक व पूरी तरह से कम्पयूटराइज्ड होगा। अस्पताल में डाईग्नोसिस हेतु एम0आर0आई0 , सी0टी0 स्कैन, एक्स रे, ब्लड बैंक, ब्लड सैंपल, ब्लड डोनेशन आदि सभी सुविधाए होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 108 सेवा निरन्तर चलती रहेगी। मोबाइल मेडिकल वैन के प्रभावी संचालन हेतु मोटर वीकल एक्ट में तकनीकी कारणों के लिए परिवर्तन पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक श्री खजानदास, श्रीमती ऋतु खंडूरी, सचिव स्वास्थ्य श्री नितेश कुमार झा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 एस0के0गुप्ता आदि उपस्थित थे।

3 डी मोशन एनलिसिस और वीआर लैब से मरीजों को मिलेगी मदद

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में मंगलवार को 3 डी मोशन एनलिसिस एंड वर्चुअल रिएलिटी वीआर लैब का विधिवत शुभारंभ किया गया। एम्स प्रशासन ने बताया कि संस्थान में लैब की स्थापना से विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीजों के उपचार में सहायता मिलेगी। जिनमें स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, सेरीब्रल पाल्सी, पैरों में दर्द आदि रोग शामिल हैं। मंगलवार को एम्स के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास पीएमआर विभाग में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने 3 डी मोशन एनलिसिस एवं वीआर लैब का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि संस्थान में स्थापित यह लैब दक्षिण एशिया में सबसे नवीनतम और आधुनिकतम लैबों में से एक है। निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि लैब में स्थापित अत्याधुनिक मशीन से मनुष्य की चाल एवं गति का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। जिससे मेरुदंड स्पाइनल कॉर्ड इंजरी,स्ट्रोक, सेलीब्रल पाल्सी से ग्रस्त रोगियों का सर्जिकल एवं दूसरी तरह के व्यवधानों का सटीक निर्णय लिया जा सकेगा।

निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत ने बताया कि इसके अलावा लैब में मरीजों के पैरों के तलवे पर पड़ रहे दाब वितरण का अध्ययन किया जाता है। इससे पैरों में दर्द, कमजोरी के अलावा डाइबटिक फुट से ग्रसित मरीजों के इलाज में सहायता मिलेगी। साथ ही एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि लैब में पैरों की कमजोरी से ग्रस्त रोगियों की रिकवरी एवं रिहेबिलिटेशन के लिए वर्चुअल रिएलिटी उपकरण भी लगाया गया है। पीएमआर विभागाध्यक्ष डा.राजकुमार यादव ने बताया कि एम्स में स्थापित आधुनिक लैब का उपयोग भविष्य में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और खेल के दौरान लगने वाली चोट के उपचार के लिए भी किया जाएगा। इस अवसर पर डीन एलूमनी प्रोफेसर बीना रवि, सब डीन कुमार सतीश रवि,डीन नर्सिंग डा.सुरेश कुमार शर्मा,डीएमएस डा.अनुभा अग्रवाल,एफएसएम विभाग के प्रमुख डा.बिनय कुमार बस्तिया, एफएनसीओ डीपी लखेड़ा,असिस्टेंट प्रोफेसर डा.ओसामा नियाज आदि मौजूद थे।

राज्य की जनता को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा देने वाला उत्तराखंड बना पहला राज्य

उत्तराखण्ड राज्य के निर्माता भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिन पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ‘‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’’ का शुभारम्भ किया। इस योजना के लागू होने से उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां सभी प्रदेश वासियों को निशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही हो। उत्तराखंड राज्य के प्रणेता स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर शुरू की जा रही यह योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किए। उनकी उपस्थिति में योजना के तहत चिन्हित विभिन्न अस्पतालों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया। मुख्यमंत्री ने योजना के तहत जल्द ही बच्चों व बुजुर्गों के लिए निशुल्क ओपीडी की भी सुविधा देने व 26 जनवरी से राज्य में पूरी तरह से समर्पित एयर-एम्बुलेंस शुरू करने की घोषणा की।

देहरादून के बन्नू स्कूल में आयेाजित कार्यक्रम में सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत अपना पंजीकरण कराने व गोल्डन कार्ड बनाने के लिए काउंटरों पर लोग लाईनों में खड़े हो गए। बिना किसी परेशानी के अपने पंजीकरण व गोल्डन कार्ड बनते देखकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उनका उत्साह देखते ही बनता था।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने योजना के शुभारम्भ की घोषणा की। उन्होंने अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना की वेबसाईट व एप का औपचारिक शुभारम्भ किया। उन्होंने अनेकों लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड भी वितरित किए। उनकी उपस्थिति में योजना के अंतर्गत चयनित विभिन्न अस्पतालों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारम्भ की। उसी प्रेरणा से हमने सोचा कि ऐसी क्या योजना शुरू की जाए कि सभी प्रदेशवासियों को निशुल्क ईलाज की सुविधा दे सकें। कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में ईलाज से वंचित न रहे। इसीलिए हमने ‘अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’ में राज्य के सभी परिवारों को कवर किया है और इसमें कैशलैस इलाज का प्रबंध किया है। इन्श्योरेंस में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए योजना को ट्रस्ट मोड में संचालित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 लाख परिवार इससे लाभान्वित होंगे। 99 सरकारी व 66 प्राईवेट चिकित्सा संस्थान इसमें चयनित हैं। 1350 गम्भीर बिमारियों का इसमें इलाज हो सकेगा।
भारत कीें आर्थिक सामाजिक एवं जातीय जनगणना 2011 में चयनित लभग 10 करोड परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री भारत सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना प्रारम्भ की गयी। इस जनकल्याणकारी योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड के लगभग 5.37 लाख परिवारों को चिन्ह्ति किया गया। जिन्हें प्रतिपरिवार पांच लाख रूपये तक प्रतिवर्ष की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं उपचार देने का कार्य प्रारम्भ हो गया है।

योजना की प्रमुख विशेषताऐंः-
-उत्तराखण्ड राज्य के समस्त परिवारों को बीमार होने पर चिकित्सालय में भर्ती होने की दशा में इस योजना का लाभ मिलेगा।
-चिकित्सा उपचार की सुविधा के लिये सरकारी एवं प्राईवेट अस्पतालों का चिन्हित किया गया है।
-पात्र लाभार्थी परिवारों के सभी उम्र के सभी सदस्य इस योजना के अन्तर्गत लाभ ले सकते है।
-लाभार्थी परिवार अपनी एवं परिवार के सदस्यों का विवरण मोबाईल एप-(अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना) के माध्यम से प्राप्त कर सकते है।
-ऐसे परिवार जो योजना में चिन्ह्ति नहीं है का पंजीकरण मोबाईल एप (अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना) एवं वेब साईट के माध्यम से किया जायेगा।
-उपचार के समय आपके पास कोई एक फोटो पहचान पत्र अवश्य होना चाहिए।
-योजना में चयनित परिवारों को उनके डाटा बेस के अनुसार प्रमाणित कर एवं सम्बन्धित के फोटो पहचान पत्र के अनुसार उपचार मिलेगा।
-योजना में कुल 1350 (तेरह सौ पचास) प्रकार के रोग अवस्थाओं से सम्बन्धित पैकेजों का चयन किया गया है।
-हृदय रोग सम्बन्धित कुल 130 पैकेज, नेत्र रोग सम्बन्धित 42 पैकेज, नाक कान गला रोग सम्बन्धित 94 पैकेज, हडडी रोग सम्बन्धित 114 पैकेज, मूत्र रोग सम्बन्धित 161 पैकेज, महिला रोग सम्बन्धित 73 पैकेज, शल्य रोग सम्बन्धित 253 पैकेज, न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलोजी एवं फ्लास्टिक सर्जरी, बर्न रोग सम्बन्धित 115 पैकेज, दन्त रोग सम्बन्धित 9 पैकेज, बाल रोग सम्बन्धित 156 पैकेज, मेडिकल रोग सम्बन्धित 70 पैकेज, कैन्सर रोग सम्बन्धित 112 पैकेज एवं अन्य 21 पैकेजों का चयन किया गया है।
-मरीजो की सहायता के लिये सूचीबद्ध चिकित्सालयों में आरोग्य मित्र तैनात रहेंगे। जिनके द्वारा भर्ती मरीजो को सहयोगध्मार्गदर्शन में मदद मिलेगी। सूचीबद्ध चिकित्सालयो में तैनात आरोग्य मित्र का मोबाईल नम्बर चिकित्सालय के हेल्प डेस्क पर उपलब्ध रहेगा।

एसआरएचयू ने चिकित्सा के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल कियाः डा. मनमोहन सिंह

हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक ब्रह्मलीन डॉ. स्वामी राम का 22वां महासमाधि दिवस पर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम को स्वामी राम मानवता पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने किया।

पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने संस्था के निदेशक सुनील गोयल को स्वामी गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र व पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया। डा. सिंह ने कहा कि स्वामी राम का सपना हिमालयन हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआइएचटी) और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय वर्तमान में अध्यात्म, स्वास्थ्य व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विश्वस्तर पर अपनी पहचान बन चुका है। स्वामी राम हिमालयन विवि परिसर में आयोजित समारोह का पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और एसआरएचयू के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मानवता की सेवा के लिए डा. स्वामी राम ने 1989 में इस संस्थान की नींव रखी थी। उनका संकल्प आज विश्व के उन चुनिंदा संस्थानों में से एक बन गया है, जहां एक ही छत के नीचे डाक्टर, इंजीनियर, नर्सेज, मैनेजमेंट व योग के छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्थान के विकास क्रम में तमाम चुनौतियां भी जुड़ी रही, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि यह संस्थान एक परिवार के रूप में स्वामी राम के सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहा है। 300 बेड से शुरू हुआ हिमालयन हास्पिटल 1200 बेड का बन गया है। जल्द ही तीन सौ वेड की नई विंग के साथ यह 1500 बेड का मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल बनने जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण कौर मौजूद थीं।

अल्प समय में एम्स ऋषिकेश ने किये नये कीर्तिमान हासिलः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एम्स में एनाटॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से आयोजित 66वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्धाटन किया। इस दौरान उन्होंने एम्स द्वारा दी जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन से यहां अध्ययनरत भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेटकॉम-66 की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

सोमवार को आयोजित नॉटकाम के 66वें अधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एम्स में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों व विदेश से आए एनाटॉमी के विशेषज्ञ अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। जो आने वाले समय में चिकित्सा सेवाओं की बेहतरी के लिए मजबूत आयाम बनेगा। जो छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, उनको इन विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुये कहा इस सम्मेलन से भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। एनॉटोमी विभाग एम्स ऋषिकेश में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिये जा रहे हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि इस सम्मेलन में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर 400 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ चिकित्सा से सम्बंधित अनेक कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप एम्स दिल्ली पर 30 प्रतिशत का दबाव कम हुआ है। वर्तमान में एम्स में मरीजों के लिए 900 बेड की उपलब्धता है। उन्होंने आशा व्यक्त कि एम्स से प्रशिक्षण लेकर यहां के छात्र देश भर में जाकर एम्स का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर विधायक खजान दास, एम्स निदेशक प्रो. रविकान्त, प्रो. सुरेखा किशोर, प्रो. विजेन्द्र सिंह, प्रो. सुरजीत घटक, प्रो. जीएस लोंगिया आदि उपस्थित थे।

राज्य की न्याय पंचायतें ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित हो रहीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय कार्यशाला व पोषण अभियान का शुभारंभ करते हुये कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना व राष्ट्रीय पोषण अभियान के द्वारा महिला व बाल कुपोषण को समाप्त करने हेतु प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित कैलेण्डर व पोषण गीत का विमोचन किया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य ठिगनापन, अल्पपोषण दूर करना व छोटे बच्चों, महिलाओं एवं किशोरियों में एनीमिया को कम करना है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और तीन साल के कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाएगा। योजना में आईसीडीएस कर्मचारियों तथा सामुदायिक पोषक कार्यकर्ताओं में कौशल व क्षमता में सुधार लाने के लिए निवेश किया जाएगा।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड के परम्परागत पर्वतीय खानपान पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। हमारा स्थानीय अनाज, सब्जियॉं, वनों से मिलने वाले फल-फूल, वनस्पति अत्यन्त पौष्टिक है। हमारे बुर्जुगों ने खानपान की स्वास्थ्य वर्धक परम्पराओं को अपनाया था।

उन्होंने कहा कि कुपोषण को समाप्त करने के लिए सभी विभागों को मिलजुल कर कार्य करना होगा। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बाल कुपोषण को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। कुपोषण को दूर करने व बिमारियों से बचाव में स्वच्छता का विशेष महत्व है। आमजन को स्वच्छता व टीकाकरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान के प्रति आमजन विशेषकर महिलाओं को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। हमें कुपोषण के प्रति जन अभियान चलाना होगा ताकि हम पूर्णतः स्वस्थ राज्य व देश बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें से 107 को चयन कर लिया गया है। गांव के आस-पास के स्थानीय उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिग, वैल्यू एडिशन आदि स्थानीय लोगों के माध्यम करवाने की मूल परिकल्पना पर आधारित न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप विकसित किया जा रहा है। ग्रोथ सेन्टरों में महिला लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिये मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान आरम्भ किया गया है। समेकित बाल विकास सेवाओं के तहत टेक होम राशन अनुपूरक पोषाहार के रूप में वितरित किया जा रहा है। प्रत्येक माह की पांच तारीख को वजन एवं पोषण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन समस्त लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से पोषाहार वितरित किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्वैच्छिक सेवानिवृति पर एक अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृति का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं है। सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की मांग ठुकरा सकती है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डाक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी स्वीकार करते हुए सेवानिवृत घोषित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संशोधित फंडामेंटल रूल-56 की व्याख्या करते हुए कहा कि नियमों के तहत सरकार को स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराने का अधिकार है। सरकार ने मानव जीवन की आवश्यकताओं और जनहित के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। डाक्टर मौलिक अधिकार के तहत सेवानिवृति के हक का दावा कर रहे हैं लेकिन ये अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। सेवानिवृति के अधिकार की व्याख्या सरकार द्वारा लोगों को स्वास्थ्य और पोषण उपलब्ध कराने के संवैधानिक दायित्व को साथ रख कर की जाएगी। रोजगार की आजादी, जनहित के आधीन है। नौकरी ज्वाइन करने के बाद इस अधिकार का दावा सिर्फ नियमों के मुताबिक ही किया जा सकता है।

स्वैच्छिक सेवानिवृति पर नियमों के मुताबिक ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलता है, ऐसे ही जब कर्मचारी की सेवा की आवश्यकता होगी तो नियुक्ति अथारिटी को स्वैच्छिक सेवानिवृति अर्जी अस्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह सभी डाक्टरों की सेवानिवृति की अनुमति दे दी जाएगी तो अव्यवस्था उत्पन्न हो जाएगी और सरकारी अस्पताल में कोई भी डाक्टर नहीं बचेगा।

कोर्ट ने कहा कि रूल 56 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के नोटिस को तीन महीने बीतने पर सेवानिवृति स्वतरू प्रभावी नही होगी। नियुक्ति अथारिटी या तो नोटिस स्वीकार करेगी या फिर उसे अस्वीकार कर सकती है। कर्मचारी को स्वैच्छिक सेवानिवृति का संपूर्ण अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि पहले ही डॉक्टरों की कमी है। व्यवस्था को सक्षम वरिष्ठों के बगैर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज कराता है उन्हें खतरे में नहीं डाला सकता। भारत में सरकारी चिकित्सा सेवा गरीबों की जरूरतों को पूरा करती है अन्यथा इस धर्मार्थ कार्य का व्यवसायीकरण हो चुका है। इस स्थिति में लोगों को अच्छे डॉक्टरों की सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।

डॉक्टरों की कमी और इस पेशे के व्यवसायीकरण का ध्यान रखते हुए सरकार ने राज्य चिकित्सा सेवा की क्षमता बनाए रखने के लिए जो फैसला किया है वह नियम सम्मत है। संविधान के तहत हर व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह जीवित प्राणियों के प्रति दयालुता और मानवता रखे ताकि राष्ट्र लगातार ऊंचाइयों पर पहुंचे। सरकारी चिकित्सा सेवा से बड़े पैमाने पर कूच नहीं हो सकता जैसा इस मामले में दिखाई दे रहा है।

क्या था मामला
उत्तर प्रदेश में प्रांतीय मेडिकल सर्विस में वरिष्ठ पदों पर तैनात डा. अचल सिंह, डा. अजय कुमार तिवारी, डा. राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डा. राजीव चौधरी ने स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी दी। जब सरकार ने उस पर आदेश नहीं किया तो डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका कर स्वैच्छिक सेवानिवृति मांगी जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। सरकार ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का कहना था कि डॉक्टरों की कमी को देखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराई गई है।

चंबा-उत्तरकाशी बस दुर्घटना में घायलों को लाया गया एम्स, सीएम ने जाना हाल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चम्बा-उत्तरकाशी राष्ट्रीय राजमार्ग पर किरगनी के पास हुई बस दुर्घटना के 14 घायल व्यक्तियों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने एम्स पहंुचकर इन सभी घायलों की सुध लेते हुये एम्स के निदेशक से अपेक्षा जतायी कि सभी घायलों के इलाज में कोई कमी न रह पाये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुःखद है। दुर्घटना के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये गये है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न घटित हो इसके लिये भी ठोस कार्ययोजना बनायी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना के बाद घायलों को दो हैलीकाप्टरों के माध्यम से एम्स अस्पताल लाया गया है। घायलों की सरकार द्वारा हर सम्भव मदद की जायेगी। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रूपये एवं घायलों को 50-50 हजार रूपये की राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये है।

एम्स में भर्ती घायलों की सूची

एम्स ऋषिकेश में जिन घायलों को भर्ती किया गया है, उनमें घनसाली टिहरी की सीमा पुत्री आनन्द सिंह, चम्पारन के मनोज शाह पुत्र पन्ना लाल, रूड़की के रघुवीर पुत्र भजन सिंह, शिकारपुर बुलंदशहर के ममता पत्नी लोकेश, शिकारपुर बुलंदशहर के अयांश पुत्र लोकेश, बतीया बिहार के रहमान पुत्र मो.अनवर, रायवाला देहरादून के आदित्य पुत्र सुरेश, रमोला गांव टिहरी के कुसुम पुत्री सुरतम सिंह नेगी, हंसकोटी मीनगदेरा के रमेश चन्दोला पुत्र तुलाराम चन्दोला, चिन्यालीसौड़ टिहरी के विजय राज पुत्र प्रीतम सिंह, शिकारपुर बुलंदशहर के लोकेश पुत्र राजबीर सिंह, बतीया बिहार के शिव कुमार पुत्र भुत्ती शाह व दो अन्य लोग शामिल है।

मुख्यमंत्री ने ली वन्य जीव बोर्ड की बैठक, लिया ये अहम फैसला

मुख्ममंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक बुलाई गयी। जिसमें अहम फैसला लेते हुये वन्य जीवों द्वारा मारे जाने व गंभीर रूप से घायल होने पर मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाया गया। इसके लिये कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। इसके बाद मारे गये मृतक के परिजनों को तीन के बजाए पांच लाख रूपये व गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रूपये की बजाए दो लाख रूपये की मुआवजा राशि मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। वनों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। वनों का संरक्षण भी हो और स्थानीय ग्रामीण इनसे आजीविका भी प्राप्त कर सकें इसके लिए ग्रीन टूरिज्म की कन्सेप्ट पर काम किया जाए। कार्बेट के बफर जोन व रामनगर वन प्रभाग में हाथी सफारी को भी अनुमति दी गई। यह भी तय किया गया कि राजाजी टाईगर रिजर्व में पर्यटन से होने वाली आय का 100 फीसदी राजाजी टाईगर रिजर्व कंजरवेशन फाउंडेशन के कोष में जमा किया जाएगा। इसका कुछ भाग सामुदायिक गतिविधियों में प्रयोग किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल में एक बार होने वाली उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक हर छह माह में आयोजित की जाए। इसमें प्रस्तुत किए जाने वाले बिंदुओं के साथ विस्तृत रिपोर्ट भी संलग्न होनी चाहिए। यदि कोई मामला जनता से जुड़ा हो तो बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत करने से पहले यह भी अध्ययन करा लिया जाए कि इससे सम्भावित लाभ व हानि क्या-क्या हैं।

आरक्षित वन और टाईगर रिजर्व के बफर जोन में एंगलिंग का परमिट नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन विभाग द्वारा जिन पर्वतारोही दलों को अनुमति दी जाती है उसकी सूचना पुलिस को भी दी जाए। ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में फंसे पर्वतारोहियों को बचाया जा सके। बैठक में वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित कंडी मार्ग पर किए गए फिजीबिलिटी सर्वे का प्रस्तुतिकरण किया गया। बताया गया कि इसके बनने से गढ़वाल से कुमायूं के लिए सीधा सम्पर्क मार्ग बनेगा और इससे यात्रावधि में लगभग तीन घंटे की कमी आएगी। इस पर कंडी मार्ग के संबंध में एक कार्यकारी समिति बनाने का निर्णय किया गया।

जानिए एम्स ऋषिकेश में आखिर यह सुविधा क्यों नहीं

ऋषिकेश स्थित एम्स संस्थान वैसे तो सारी सुविधाओं से लैस हैं। मगर, इतने बड़े संस्थान में शव विच्छेदन गृह की सुविधा का अभाव है। अगर, यहां शव विच्छेदन गृह खुल जाता तो पांच जनपदों की पुलिस को दूर जाकर शव का पोस्टमार्टम नहीं करना पड़ता।

विदित हो कि जनपद पौड़ी के थाना लक्ष्मणझूला पुलिस को शव का पोस्टमार्टम कराने के लिये हरिद्वार जाना पड़ता है। इसी तरह टिहरी के थाना मुनिकीरेती पुलिस को भी नरेन्द्रनगर की शरण लेनी पड़ती है।

ऋषिकेश में हालांकि बाईपास मार्ग पर शव विच्छेदन गृह है, लेकिन 72 घंटे शिनाख्त के लिये अज्ञात शवों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था यहां भी नहीं है। यहां अखिल भारतीय आयर्विज्ञान संस्थान के खुल जाने के बाद यह उम्मीद बन गयी थी कि अब यहां पोस्टमार्टम हाउस खुल जायेगा। मगर, अब तक नहीं खुला है। एम्स प्रशासन द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के जरिये शासन से एम्स में शव विच्छेदन गृह के लिये अधिसूचना आदेश जारी करने की मांग की गयी थी। इस मामले में नोटिफिकेशन गृह विभाग द्वारा किया जाना है। मगर, संबंधित फाइल कभी एसएसपी कार्यालय, कभी पुलिस मुख्यालय तो कभी शासन के विभिन्न विभागों में घूम कर रह गयी है।