हमारा लक्ष्य उत्तराखंड में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, डांडा लखौंड, देहरादून में राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला एवं राज्य औषधि नियंत्रक भवन कार्यालय का शिलान्यास, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के नवीन कार्यालय भवन का लोकार्पण, चिकित्सा अधिकारियों के लिए 17 ट्रांजिट हाँस्टल का शिलान्यास व राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक व्यापक एवं सुविधाजनक बनाने के लिए संगठित एवं समन्वित प्रयासों की जरूरत है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के बाद उत्तराखण्ड दूसरा राज्य है जहां एन.एच.एम का अपना कार्यालय स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरा सामाजिक दायित्व के तहत विशेषज्ञ डाॅक्टर महिने में 2-3 दिन दुर्गम क्षेत्रों में जाकर अपने सेवाएं दें, तो बड़े अस्पतालों के वर्क लोड में भी कमी आयेगी व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आयेगा। उन्होंने कहा कि चमोली के पीपलकोटी व रूद्रप्रयाग के गुप्तकाशी में विशेषज्ञ डाॅक्टरों द्वारा इस तरह की सेवाएं दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐलोपैथिक व आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाइसेंस के लिए सिंगल विंडों सिस्टम बनाने का प्रयास किया जायेगा। देश के 20 प्रतिशत आयुर्वेदिक दवाओं का निर्यात उत्तराखण्ड करता है। उन्होंने कहा कि फार्मा इंडस्ट्रियों के प्रतिनिधियों से पिछले साल मसूरी में बैठक के बाद उनकी अनेक समस्याओं का समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद राज्य में तेजी से औद्योगीकरण हुआ। वर्तमान में प्रदेश में 300 औषधि निर्माता फर्म व 150 काॅस्मेटिक आईटम निर्माता फर्म हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। आम जन के स्वास्थ्य के हित में औषधियों का परीक्षण किये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राज्य औषधि संगठन हेतु कार्यालय भवन एवं राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित किये जाने के लिए 14 करोड़ रूपये की स्वीकृति केन्द्र सरकार से प्राप्त की गई है जिसमें से 5 करोड़ रूपये की पहली किश्त प्राप्त हो चुकी है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, उत्तराखण्ड के भवन के तृतीय तल पर 644.33 लाख रूपये की लागत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का निर्माण किया गया है। एन.एच.एम के अन्तर्गत हर चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारियों हेतु चिकित्सालयों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण किया जा रहा है। बागेश्वर, चम्पावत, चमोली व उप चिकित्सालय में एक-एक एवं 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण 4538 लाख रूपये की लागत से पेयजल निगम द्वारा किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने 15 बच्चों को एलबेंडाजोल की गोलिया खिलाकर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया। 8 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति के छठें चरण में प्रदेश के सभी जनपदों में 1 से 19 वर्ष के 42 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई जायेगी।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, उपाध्यक्ष, ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार परिषद् ज्ञान सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा, मिशन निदेशक एनएचएम युगल किशोर पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य डाॅ. टी.सी.पंत, चेयरमैन औषधि नियंत्रण निर्माण इकाई संदीप जैन आदि उपस्थित थे।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बलूनी ने दी एक और सौगात

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश व सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी में रोगियों के परिजनों के रुकने तथा रात्रि प्रवास हेतु दो आरोग्य सदनों (रैन-बसेरों) के निर्माण की सौगात देने जा रहे है। गढ़वाल और कुमाऊ मंडल में बनने वाले इन आरोग्य-सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्र के गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।
सांसद बलूनी ने आज इस संबंध में देहरादून व नैनीताल के जिलाधिकारियों, ऋषिकेश तथा हल्द्वानी के मेयर से इन आरोग्य-सदनों हेतु शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने हेतु वार्ता की। बलूनी ने कहा कि वे अपनी सांसद निधि एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से इन सदनों का निर्माण करेंगे।

सांसद बलूनी ने कहा कि सुदूर से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य-सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा तो बचायेंगे ही साथ ही उन्हें लागत मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराने हेतु कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा।
बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने हेतु कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) व कैंटीन का निर्माण किया जायेगा। सुदूर के रोगी सम्पूर्ण जांच व उपचार होने तक यहाँ रुक सकेंगे ताकि होटल के महंगे रहने-खाने के खर्च से उन्हें राहत मिल सके।

आशाओं की हुई मांग पूरी, वेतन में ₹1000 की वृद्धि

आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में एक हजार रूपये की वृद्धि की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बागेश्वर ने गरूड़ में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के शुभारम्भ के अवसर पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रूकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रूपये जारी किये गये। वर्ष 2012 से आशा कार्यकत्रियों को 5 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि देने की योजना शुरू की गयी थी, जिसका कभी भी नियमित रूप से भुगतान नहीं हो पाया। आशा कार्यकत्रियों द्वारा इसकी लगातार मांग की जा रही थी। आशा कार्यकत्रियों की मांग का संज्ञान लेते हुए लम्बित पूर्ण 33 करोड़ की धनराशि जारी की गयी। इससे प्रदेश की 12 हजार आशा कार्यकत्रियों को फायदा हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बागेश्वर जनपद की लगभग 65 करोड़ से निर्मित विभिन्न 36 योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने जनपद बागेश्वर में अटल आयुष्मान योजना का शुभारम्भ किया तथा लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल्द से जल्द इस योजना के अन्र्तगत अपना कार्ड बनवायें। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि कुछ लोगों द्वारा इस महत्वकांक्षी योजना के बंद होने की अफवाह फैलाई जा रही है जो बिलकुल निराधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ की गयी आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत बीपीएल एवं अन्त्योदय परिवारों को सम्मिलित किया गया था।

राज्य के सभी परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिये प्रदेश में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना शुरू की गयी। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। एक माह में तीन हजार से अधिक लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध अस्पतालों द्वारा भी उत्तराखण्ड सरकार से एमओयू हेतु प्रस्ताव किये जा रहे है जिनमें वेदान्ता अस्पताल दिल्ली भी शामिल है।
बागेश्वर की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गयी आयुष्मान भारत योजना के वास्तविक लक्ष्यों को पाने हेतु राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना का शुभारम्भ किया गया है। जिससे प्रत्येक लाभार्थी चयनित अस्पतालों में अपना एवं अपने परिवार का निःशुल्क उपचार करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में जोड़ना है जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक चन्दन राम दास, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू आदि उपस्थित थे।

26 नई एंबुलेंस शामिल हुई 108 सेवा के बेड़े में

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सा विज्ञान केंद्र में 108-आपातकालीन एम्बुलेंस की 26 एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को हंस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए 2 करोड़ की लागत के उपकरणों का भी लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मीडिया से अनौपचारिक वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए 108-एम्बुलेंस सेवा जीवन दायिनी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती प्रदान करते हुए नवंबर माह में 61 बी.एल.एस. एम्बुलेंस वाहनों को पुरानी एम्बुलेंस से प्रतिस्थापित किया गया था, आज 26 अन्य एम्बुलेंस वाहनों को प्रतिस्थापित किया गया है। इस प्रकार कुल 87 बी.एल.एस. एम्बुलेंस को प्रतिस्थापित कर दिया गया है। शीघ्र ही नई 34 बी.एल.एस. एम्बुलेंस और 16 ए.एल.एस. एम्बुलेंस राज्य की जनता के सेवार्थ उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी से एयर एम्बुलेंस सेवा भी शुरू कर दी गई है, जो आपातकालीन स्थिति में मरीजों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हंस फाउंडेशन भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को हंस फाउंडेशन द्वारा रु0 2.00 करोड़ की लागत के उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका आज लोकार्पण किया गया।

26 जनवरी से उत्तराखंड में एयर एंबुलेंस की सेवा

उत्तराखंड के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अटल आयुष्मान योजना के बाद सरकार सूबे में हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने जा रही है। इस सेवा के शुरू होने के बाद आपदा और दुर्घटना के वक्त मरीजों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाएगा। खास तौर पर पहाड़ के लोगों के लिए ये एक बेहतरीन खबर है। अक्सर देखने को मिलता है कि सही वक्त पर सही तरह से इलाज ना मिल पाने की वजह से पहाड़ में कई बार लोग दम तोड़ देते हैं।
अब एयर एंबुलेंस की मदद से उन्हें तुरंत ही किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जा सकेगा। एयर एंबुलेंस के लिए जिलाधिकारी की परमीशन लेनी होगी। आगामी 26 जनवरी से हेली सेवा की शुरूआत किए जाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है। इस सेवा को स्थायी रूप से शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकार की कोशिशें रंग लाईं तो जल्द ही उत्तराखंड हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। हेली एंबुलेंस सेवा के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5 करोड़ रुपये का बजट मिला है। प्राकृतिक आपदा के मामले में उत्तराखंड बेहद संवेदनशील राज्य है। सूबे में आपदा के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हेली एंबुलेंस सेवा शुरू होने के बाद आपदा और दुर्घटना के हालात में मरीजों को समय रहते इलाज मिल पाएगा। जिससे कई लोगों की जान बचेगी। हेली एंबुलेंस में एक से दो स्ट्रेचर की क्षमता होगी। आने वाले वित्तीय वर्ष में इस सेवा में विस्तार करने की भी प्लानिंग है, जिसके बाद चारधाम यात्रा के दौरान भी एयर एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध रहेगी। प्रदेश सरकार 26 जनवरी से ये सेवा शुरू करने के प्रयास कर रही है। आगामी वित्तीय वर्ष से इसमें और सुधार किया जाएगा।

100 बेड के अस्पताल से मिलेगी बड़ी राहत

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड को नए वर्ष की सौगात के रूप में 1 जनवरी को देहरादून में 100 बेड के प0 दीनदयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने मौके पर ही कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि एक साल पांच महीने तेईसवे दिन 23 जून 2020 को यह अस्पताल किसी भी स्थिति में जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल निर्माण का काम पूरी तरह से क्वालिटी कन्ट्रोल के साथ किया जाए। अत्याधुनिक तकनीक व सुविधाओं के साथ चैबीस घण्टे इसका निर्माण कार्य चलाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे देहरादून वासियों की काफी समय से अपना जिला अस्पताल न होने की चिन्ता भी खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आगामी कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय भवन निर्माण कला के साथ भवन व घर निर्माण करने वालो को एक फलोर या मंजिल और बनाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की परम्परागत पर्वतीय भवन निर्माण शैली दुनिया की सबसे अच्छी भवन निर्माण कला व शैली है। यह वातानुकूलित है जिसे हमारे पूर्वजों ने अपने अनुभवों के आधार पर विकसित किया है। इससे राज्य की विशिष्ट पहचान व कला दुनिया के सामने आएगी। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सभी सरकारी अस्पतालों व निजी संस्थानों के चिकित्सकों को आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी अस्पतालों को रेगुलरराइज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत परिवर्तन उत्तराखण्ड के लिए आमूल चूल परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समस्याओं के सतही समाधान नही बल्कि स्थायी समाधान में विश्वास रखते है।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने राज्य की जनता को नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नया वर्ष हम सब के लिए अच्छा स्वास्थ्य, जीवन में संवर्द्धन लेकर आए, हम जीवन की नई-नई ऊंचाईयों को छुए और हमारा व्यक्तित्व बहुआयामी हो ऐसी कामना है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारे राज्य के लिए बहुत खुशी की बात है कि राज्य में ऐसे भी चिकित्सक है जोे अच्छा वेतन व बड़े निजी अस्पतालों की नौकरियां छोड़ कर के एक चैथाई वेतन पर प0दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके लिए न्यूरोसर्जन डा0 राहुल अवस्थी जैसे डाॅक्टर बधाई व प्रशंसा के पात्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प0 दीनदयाल उपाध्याय राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय आज व भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। कुल क्षेत्र 8141 वर्ग मीटर जैसे बड़े क्षेत्र में इसका निर्माण होगा है। यह अस्पताल कुल 136 बेड का है जिसमें 76 जनरल वार्ड, 24 बर्न वार्ड, 11 आईसीयू बेड, 9 बेड का रिकवरी वार्ड और 16 इमरजेंसी बेड व 4 आॅपरेशन थियेटर होंगे। यह अत्याधुनिक व पूरी तरह से कम्पयूटराइज्ड होगा। अस्पताल में डाईग्नोसिस हेतु एम0आर0आई0 , सी0टी0 स्कैन, एक्स रे, ब्लड बैंक, ब्लड सैंपल, ब्लड डोनेशन आदि सभी सुविधाए होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 108 सेवा निरन्तर चलती रहेगी। मोबाइल मेडिकल वैन के प्रभावी संचालन हेतु मोटर वीकल एक्ट में तकनीकी कारणों के लिए परिवर्तन पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक श्री खजानदास, श्रीमती ऋतु खंडूरी, सचिव स्वास्थ्य श्री नितेश कुमार झा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 एस0के0गुप्ता आदि उपस्थित थे।

3 डी मोशन एनलिसिस और वीआर लैब से मरीजों को मिलेगी मदद

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में मंगलवार को 3 डी मोशन एनलिसिस एंड वर्चुअल रिएलिटी वीआर लैब का विधिवत शुभारंभ किया गया। एम्स प्रशासन ने बताया कि संस्थान में लैब की स्थापना से विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीजों के उपचार में सहायता मिलेगी। जिनमें स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, सेरीब्रल पाल्सी, पैरों में दर्द आदि रोग शामिल हैं। मंगलवार को एम्स के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास पीएमआर विभाग में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने 3 डी मोशन एनलिसिस एवं वीआर लैब का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि संस्थान में स्थापित यह लैब दक्षिण एशिया में सबसे नवीनतम और आधुनिकतम लैबों में से एक है। निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि लैब में स्थापित अत्याधुनिक मशीन से मनुष्य की चाल एवं गति का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। जिससे मेरुदंड स्पाइनल कॉर्ड इंजरी,स्ट्रोक, सेलीब्रल पाल्सी से ग्रस्त रोगियों का सर्जिकल एवं दूसरी तरह के व्यवधानों का सटीक निर्णय लिया जा सकेगा।

निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत ने बताया कि इसके अलावा लैब में मरीजों के पैरों के तलवे पर पड़ रहे दाब वितरण का अध्ययन किया जाता है। इससे पैरों में दर्द, कमजोरी के अलावा डाइबटिक फुट से ग्रसित मरीजों के इलाज में सहायता मिलेगी। साथ ही एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि लैब में पैरों की कमजोरी से ग्रस्त रोगियों की रिकवरी एवं रिहेबिलिटेशन के लिए वर्चुअल रिएलिटी उपकरण भी लगाया गया है। पीएमआर विभागाध्यक्ष डा.राजकुमार यादव ने बताया कि एम्स में स्थापित आधुनिक लैब का उपयोग भविष्य में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और खेल के दौरान लगने वाली चोट के उपचार के लिए भी किया जाएगा। इस अवसर पर डीन एलूमनी प्रोफेसर बीना रवि, सब डीन कुमार सतीश रवि,डीन नर्सिंग डा.सुरेश कुमार शर्मा,डीएमएस डा.अनुभा अग्रवाल,एफएसएम विभाग के प्रमुख डा.बिनय कुमार बस्तिया, एफएनसीओ डीपी लखेड़ा,असिस्टेंट प्रोफेसर डा.ओसामा नियाज आदि मौजूद थे।

राज्य की जनता को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा देने वाला उत्तराखंड बना पहला राज्य

उत्तराखण्ड राज्य के निर्माता भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिन पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ‘‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’’ का शुभारम्भ किया। इस योजना के लागू होने से उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां सभी प्रदेश वासियों को निशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही हो। उत्तराखंड राज्य के प्रणेता स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर शुरू की जा रही यह योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किए। उनकी उपस्थिति में योजना के तहत चिन्हित विभिन्न अस्पतालों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया। मुख्यमंत्री ने योजना के तहत जल्द ही बच्चों व बुजुर्गों के लिए निशुल्क ओपीडी की भी सुविधा देने व 26 जनवरी से राज्य में पूरी तरह से समर्पित एयर-एम्बुलेंस शुरू करने की घोषणा की।

देहरादून के बन्नू स्कूल में आयेाजित कार्यक्रम में सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत अपना पंजीकरण कराने व गोल्डन कार्ड बनाने के लिए काउंटरों पर लोग लाईनों में खड़े हो गए। बिना किसी परेशानी के अपने पंजीकरण व गोल्डन कार्ड बनते देखकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उनका उत्साह देखते ही बनता था।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने योजना के शुभारम्भ की घोषणा की। उन्होंने अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना की वेबसाईट व एप का औपचारिक शुभारम्भ किया। उन्होंने अनेकों लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड भी वितरित किए। उनकी उपस्थिति में योजना के अंतर्गत चयनित विभिन्न अस्पतालों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारम्भ की। उसी प्रेरणा से हमने सोचा कि ऐसी क्या योजना शुरू की जाए कि सभी प्रदेशवासियों को निशुल्क ईलाज की सुविधा दे सकें। कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में ईलाज से वंचित न रहे। इसीलिए हमने ‘अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’ में राज्य के सभी परिवारों को कवर किया है और इसमें कैशलैस इलाज का प्रबंध किया है। इन्श्योरेंस में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए योजना को ट्रस्ट मोड में संचालित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 लाख परिवार इससे लाभान्वित होंगे। 99 सरकारी व 66 प्राईवेट चिकित्सा संस्थान इसमें चयनित हैं। 1350 गम्भीर बिमारियों का इसमें इलाज हो सकेगा।
भारत कीें आर्थिक सामाजिक एवं जातीय जनगणना 2011 में चयनित लभग 10 करोड परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री भारत सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना प्रारम्भ की गयी। इस जनकल्याणकारी योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड के लगभग 5.37 लाख परिवारों को चिन्ह्ति किया गया। जिन्हें प्रतिपरिवार पांच लाख रूपये तक प्रतिवर्ष की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं उपचार देने का कार्य प्रारम्भ हो गया है।

योजना की प्रमुख विशेषताऐंः-
-उत्तराखण्ड राज्य के समस्त परिवारों को बीमार होने पर चिकित्सालय में भर्ती होने की दशा में इस योजना का लाभ मिलेगा।
-चिकित्सा उपचार की सुविधा के लिये सरकारी एवं प्राईवेट अस्पतालों का चिन्हित किया गया है।
-पात्र लाभार्थी परिवारों के सभी उम्र के सभी सदस्य इस योजना के अन्तर्गत लाभ ले सकते है।
-लाभार्थी परिवार अपनी एवं परिवार के सदस्यों का विवरण मोबाईल एप-(अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना) के माध्यम से प्राप्त कर सकते है।
-ऐसे परिवार जो योजना में चिन्ह्ति नहीं है का पंजीकरण मोबाईल एप (अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना) एवं वेब साईट के माध्यम से किया जायेगा।
-उपचार के समय आपके पास कोई एक फोटो पहचान पत्र अवश्य होना चाहिए।
-योजना में चयनित परिवारों को उनके डाटा बेस के अनुसार प्रमाणित कर एवं सम्बन्धित के फोटो पहचान पत्र के अनुसार उपचार मिलेगा।
-योजना में कुल 1350 (तेरह सौ पचास) प्रकार के रोग अवस्थाओं से सम्बन्धित पैकेजों का चयन किया गया है।
-हृदय रोग सम्बन्धित कुल 130 पैकेज, नेत्र रोग सम्बन्धित 42 पैकेज, नाक कान गला रोग सम्बन्धित 94 पैकेज, हडडी रोग सम्बन्धित 114 पैकेज, मूत्र रोग सम्बन्धित 161 पैकेज, महिला रोग सम्बन्धित 73 पैकेज, शल्य रोग सम्बन्धित 253 पैकेज, न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलोजी एवं फ्लास्टिक सर्जरी, बर्न रोग सम्बन्धित 115 पैकेज, दन्त रोग सम्बन्धित 9 पैकेज, बाल रोग सम्बन्धित 156 पैकेज, मेडिकल रोग सम्बन्धित 70 पैकेज, कैन्सर रोग सम्बन्धित 112 पैकेज एवं अन्य 21 पैकेजों का चयन किया गया है।
-मरीजो की सहायता के लिये सूचीबद्ध चिकित्सालयों में आरोग्य मित्र तैनात रहेंगे। जिनके द्वारा भर्ती मरीजो को सहयोगध्मार्गदर्शन में मदद मिलेगी। सूचीबद्ध चिकित्सालयो में तैनात आरोग्य मित्र का मोबाईल नम्बर चिकित्सालय के हेल्प डेस्क पर उपलब्ध रहेगा।

एसआरएचयू ने चिकित्सा के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल कियाः डा. मनमोहन सिंह

हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक ब्रह्मलीन डॉ. स्वामी राम का 22वां महासमाधि दिवस पर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम को स्वामी राम मानवता पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने किया।

पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने संस्था के निदेशक सुनील गोयल को स्वामी गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र व पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया। डा. सिंह ने कहा कि स्वामी राम का सपना हिमालयन हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआइएचटी) और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय वर्तमान में अध्यात्म, स्वास्थ्य व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विश्वस्तर पर अपनी पहचान बन चुका है। स्वामी राम हिमालयन विवि परिसर में आयोजित समारोह का पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और एसआरएचयू के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मानवता की सेवा के लिए डा. स्वामी राम ने 1989 में इस संस्थान की नींव रखी थी। उनका संकल्प आज विश्व के उन चुनिंदा संस्थानों में से एक बन गया है, जहां एक ही छत के नीचे डाक्टर, इंजीनियर, नर्सेज, मैनेजमेंट व योग के छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्थान के विकास क्रम में तमाम चुनौतियां भी जुड़ी रही, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि यह संस्थान एक परिवार के रूप में स्वामी राम के सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहा है। 300 बेड से शुरू हुआ हिमालयन हास्पिटल 1200 बेड का बन गया है। जल्द ही तीन सौ वेड की नई विंग के साथ यह 1500 बेड का मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल बनने जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण कौर मौजूद थीं।

अल्प समय में एम्स ऋषिकेश ने किये नये कीर्तिमान हासिलः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एम्स में एनाटॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से आयोजित 66वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्धाटन किया। इस दौरान उन्होंने एम्स द्वारा दी जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन से यहां अध्ययनरत भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेटकॉम-66 की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

सोमवार को आयोजित नॉटकाम के 66वें अधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एम्स में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों व विदेश से आए एनाटॉमी के विशेषज्ञ अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। जो आने वाले समय में चिकित्सा सेवाओं की बेहतरी के लिए मजबूत आयाम बनेगा। जो छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, उनको इन विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुये कहा इस सम्मेलन से भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। एनॉटोमी विभाग एम्स ऋषिकेश में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिये जा रहे हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि इस सम्मेलन में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर 400 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ चिकित्सा से सम्बंधित अनेक कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप एम्स दिल्ली पर 30 प्रतिशत का दबाव कम हुआ है। वर्तमान में एम्स में मरीजों के लिए 900 बेड की उपलब्धता है। उन्होंने आशा व्यक्त कि एम्स से प्रशिक्षण लेकर यहां के छात्र देश भर में जाकर एम्स का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर विधायक खजान दास, एम्स निदेशक प्रो. रविकान्त, प्रो. सुरेखा किशोर, प्रो. विजेन्द्र सिंह, प्रो. सुरजीत घटक, प्रो. जीएस लोंगिया आदि उपस्थित थे।