आंदोलन को धार देने के लिए की थी राजनीति, ऐसे थे रणजीत सिंह वर्मा

जननायक और पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह वर्मा की अंतिम यात्रा में आज सुबह भारी हुजूम उमड़ा। सुबह दस बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकली और लक्खीबाग देहरादून में उनका अंतिम संस्कार किया। बतातें चले कि सोमवार सुबह सात बजे उनका स्वर्गवास हो गया था।
पूर्व विधायक और राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा का सोमवार सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। अस्पताल में पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे। उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों ने दुख जताया है। जौलीग्रांट के पूर्व प्रधान और उनके सहयोगी रहे कुंवर सिंह मनवाल कहते हैं कि उनके निधन की खबर डोईवाला के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुरूख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर डोईवाला क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं। उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता है। आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र डोईवाला रहा।
तरली जौलीग्रांट में उनका निवास स्थान है। क्षेत्र में उनके पास काफी खेती बाड़ी होने के कारण प्रगतिशील किसान कहा जाता रहा है। गन्ना राजनीति में करीब तीन दशक से भी अधिक समय तक उनकी पकड़ रही है। गन्ना परिषद डोईवाला में करीब 25 सालों तक लगातार अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. नारायणदत्त तिवारी से उनका स्नेह होने के कारण डोईवाला चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाकर उसको आधुनिक रूप दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक रहे।

रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन की जटिलताओं में आती है कमीः एम्स निदेशक

एम्स ऋषिकेश में पहली मर्तबा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने यूरो ओंकोलॉजी एवं यूरोगाइनीकोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जटिल सर्जरियों पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान के यूरोलॉजी विभाग की ओर से पहली अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक यूरोलॉजी कांफ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें देश के ही नहीं अपितु अन्य देशों के भी प्रसिद्ध रोबोटिक शल्य चिकित्सकों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश हमेशा बेहतर उपचार परिणामों के साथ रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित है, इस श्रंखला में यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में शनिवार का दिन गुर्दे के कैंसर के इलाज एवं महिला पैल्विक रोगों के उपचार व विचार विमर्श के लिए समर्पित रहा। निदेशक प्रो. रवि कांत बताया कि रोबोटिक सर्जरी से पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम मिलते हैं,इससे .शरीर से रक्त का बहाव कम होता है और छोटे छोटे चीरे लगने से कम निशान पड़ते हैं एवं घाव आसानी से भर जाते हैं। साथ ही बताया कि रोबोटिक सर्जरी से बेहतर सूचरिंग के कारण सर्जरी में आसानी होती है और ऑपरेशन से संबंधित जटिलताओं में कमी आती है। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में खासतौर से आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक सर्जन डा. डेविड गिल्लाट ने प्रतिभागियों को रोबोटिक सर्जरी की बारिकियों से अवगत कराया। निदेशक प्रो. रवि कांत ने उम्मीद जताई कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन से आने वाले समय में मरीजों को लाभ मिलेगा।


एम्स के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल काफ्रेंस के दूसरे दिन शनिवार को डा. रवि मोहन ने एक मरीज के गुर्दे को बचाते हुए गुर्दे की गांठ की सर्जरी का प्रदर्शन किया। कांफ्रेंस के दौरान यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने वेसिको वेजाइनल फिस्टुला रिपेयर ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इस अवसर पर उन्होंने एम्स संस्थान की ओर से प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। यूरोलॉजी विभाग के डा. सुनिल कुमार ने प्रतिभागियों को रोबोट पर सिमुलेशन के द्वारा प्रशिक्षण दिया।
सम्मेलन के आयोजन में डा. किम जैकब मैमन, डा. सुनील कुमार, डा. विकास कुमार पंवार, डा. शिव चरण नावरिया, डा. तुषार नारायण आदित्य,डा. निशित के अलावा यूरोलॉजी व गाइनेकोलॉजी टीम ने सहयोग किया।

सरकार ने भेजा नोटिस, हाईकोर्ट से भी नही मिली डाॅक्टरों को राहत

उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कालेजों से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले गैरहाजिर डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग ने ज्वाइनिंग का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। इसके बाद बांड की शर्तों के मुताबिक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं न देने वाले बांड धारक डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस की वसूलने की कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।
प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सरकारी मेडिकल कालेजों में बांड योजना शुरू की थी। जिसमें बांड भरकर एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को फीस में भारी छूट दी गई। लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ डॉक्टर ने युवाओं ने दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने से इनकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्ती करने पर ऑल इंडिया रैकिंग से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
जिसमें हाल ही में हाईकोर्ट ने बांड की शर्त के अनुसार ज्वाइनिंग न करने वाले डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस वसूलने के आदेश दिए। अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, युगल किशोर पंत ने बताया स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से गैरहाजिर चल रहे बांड धारक डॉक्टरों का रिकॉर्ड तैयार कर नोटिस जारी किए गये हैं। जिसमें ऑल इंडिया रैकिंग के करीब 22 डॉक्टर हैं। वहीं राज्य कोटे की सीट से बांड भरने वाले डॉक्टरों को नोटिस संबंधित कालेजों को भेजे गए हैं।
वहीं, इस साल से सरकार ने दून और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में बांड के माध्यम से एमबीबीएस करने की योजना को समाप्त कर दिया है। अब श्रीनगर मेडिकल कालेज और अगले साल से अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में ही बांड भरकर कम फीस पर एमबीबीएस की सुविधा मिलेगी।
बांड से प्रशिक्षित डॉक्टरों से एमबीबीएस की 15, 25, 50 हजार रुपये की फीस ली जाती है। जबकि बिना बांड के फीस चार लाख रुपये सालाना देनी होती है। बांड से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एक साल तक मेडिकल कालेजों में सेवाएं देनी होती हैं। इसके बाद दो साल तक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों और दो वर्ष तक जिला चिकित्सालयों में सेवाएं देनी अनिवार्य हैं।

वेलनेस समिट में रोजगार और पलायन पर फोकस कर रही सरकारः मुख्यमंत्री

इंवेस्टर्स समिट की तर्ज पर प्रदेश सरकार अब वेलनेस समिट का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर उद्योग विभाग समिट की कार्ययोजना बनाने में जुट गया है। ये समिट चार प्रमुख सेक्टरों पर केंद्रित होगा। इसमें आयुर्वेद, योग, पर्यटन, स्वास्थ्य प्रमुख हैं। सरकार प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से सर्विस सेक्टर को प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए चार सेक्टर तय किए गए हैं।
सरकार ने गत वर्ष प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए पहली बार इंवेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें सरकार को उम्मीदों से अधिक निवेश के प्रस्ताव मिले। इंवेस्टर्स समिट में निवेश के लिए 15 सेक्टरों को चिन्हित किया गया था। सरकार ने 673 प्रस्ताव में 1.24 लाख करोड़ के निवेश पर एमओयू किए। इसी तर्ज पर इस साल सरकार वेलनेस समिट के आयोजन की तैयारी कर रही है। उत्तराखंड में जड़ी-बूटी, योग, पर्यटन और मेडिकल निवेश की अपार संभावनाएं है। इन सेक्टरों में निवेश से जहां रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वहीं, सर्विस सेक्टर से सरकार का राजस्व बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वेलनेस समिट के आयोजन के लिए सरकार तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से निवेशकों का उत्तराखंड में निवेश करने के लिए अच्छा रिस्पांस मिला था। इस साल प्रदेश में वेलनेस समिट कराने की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें मेडिकल, योग, आयुर्वेद, पर्यटन में सर्विस सेक्टर के उद्योगों को बढ़ावा देने पर फोकस होगा।
इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से सरकार ने 1.24 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। जिसमें अब तक 20 हजार करोड़ के निवेश को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो गया है। नए उद्योगों के लिए सरकार जमीन चिन्हित कर रही है।
सरकार ने पर्यटन सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योग का दर्जा दिया है। इंवेस्टर्स समिट में पर्यटन में 15362 करोड़, वेलनेस एवं आयुष में 1751, हर्बल एवं ऐरोमेटिक में 745 करोड़, हेल्थ केयर में 16890 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे।

डायलिसिस यूनिट पावर सप्लाई बंद, मरीज की मौत

हरिद्वार के मेला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में अचानक पॉवर सप्लाई बंद होने से किडनी की बीमारी से पीड़ित दस मरीजों की हालत बिगड़ गई। गंभीर हाल में एक मरीज को जौलीग्रांट रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मरीजों के तीमारदारों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर पहुंची मेयर अनीता शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर चल रही यूनिट बिना एमडी डॉक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट के चलाई जा रही थी। मेला अस्पताल में अप्रैल में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई थी। शनिवार की दोपहर को यूनिट की दस मशीनों पर किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। अस्पताल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जेनरेटर चलाया गया।
करीब दो बजे अचानक से तकनीकी खराबी के कारण जनरेटर बंद हो गया और मशीन बैकअप पर चलने लगी। कुछ ही मिनटों पर मशीन का अलार्म बजने लगा। देखते ही देखते दस मिनट में ही बैकअप समाप्त होने लगा। यूनिट के डॉक्टर, तकनीशियनों और नर्स ने डायलिसिस मशीन के पंप चलाकर बाहर निकले ब्लड को बमुश्किल से शरीर के अंदर पहुंचाया। सभी दस मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। एक मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मरीज विजय शर्मा (62) की मेला अस्पताल में ही मौत हो गई थी।
पीपीपी मोड पर यूनिट चला रहे चंडीगढ़ की संस्था राही केयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डॉ. शौर्य पयाल का कहना है कि यूनिट में उनकी तरफ से सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। पॉवर सप्लाई प्रभावित होने से यह समस्या खड़ी हुई। उन्होंने एक मरीज की मौत की पुष्टि तो की लेकिन कहा कि यह मौत यूनिट में नहीं हुई है।
सीएमओ प्रेमलाल का कहना है कि विजय शर्मा दस साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। कार्डियकअरेस्ट से उनकी मौत हुई है। उनका कहना है कि यूनिट में जो कमियां हैं उनको दूर कराया जाएगा। पाॅवर सप्लाई के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।

खुशखबरीः सरकार ने ओपीडी में सस्ता इलाज देने की तैयारी की

अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को अब ओपीडी में भी सस्ता इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को लाया जाएगा।
वर्तमान में आयुष्मान योजना के तहत मरीज के भर्ती होने पर भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा है। ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों का योजना का लाभ नहीं मिलता है।
अब सरकार सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों को भी इलाज मुहैय्या कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए दो अलग-अलग श्रेणियों के लिए दरें तय की जाएगी।
त्रिवेंद्र सरकार ने अटल आयुष्मान योजना के तहत कार्डधारकों को ओपीडी में भी कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए कवायद शुरू कर दी है। जिन लोगों के पास आयुष्मान योजना का हेल्थ कार्ड होगा।
उन्हें सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। जिसमें पंजीकरण शुल्क, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन, ब्लड और शुगर जांच, एक्स-रे समेत अन्य जांचें शामिल होंगी। जबकि जिन लोगों के पास कार्ड नहीं है, उन्हें इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी।

प्रदेश में 31 लाख लोगों के बन चुके कार्ड
प्रदेश में अब तक अटल आयुष्मान योजना के तहत 31 लाख लोगों के हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं। जिसमें 44 हजार 460 लोगों ने योजना में अपना इलाज कराया है। इन पर करीब 45 करोड़ की धनराशि खर्च हुई है। माना जा रहा है कि ओपीडी में इलाज की सुविधा मिलने से प्रदेश में कार्ड धारकों की संख्या 50 से 60 लाख तक पहुंच सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव नितेश कुमार झा ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इलाज की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।

एम्स में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान नहींः स्वास्थ्य मंत्रालय

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में स्थानीय लोगों को नौकरियों में 70 प्रतिशत आरक्षण की दलील को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया है कि भारत सरकार के अधीन संचालित होने वाले ऑटोनामस संस्थानों में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम एम्स ऋषिकेश पर भी लागू होता है। करीब तीन महीने पहले आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को एम्स से निकाल दिया गया था। इसके बाद करीब 45 निष्कासित कर्मियों ने क्रमिक धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस मामले में काफी सियासी दखल भी सामने आई। एम्स प्रशासन ने निष्कासन के पीछे तर्क दिया कि अनुबंध के मुताबिक सभी कर्मचारियों ने लिखित सहमति दी थी कि स्थायी नियुक्ति होने के बाद अस्थाई पद पर नियुक्त कर्मियों को निकाला जा सकेगा।

उक्त अनुबंधों के अनुसार ही कर्मचारियों को संस्थान से कार्यमुक्त किया गया। इसी क्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने एम्स की नौकरियों में 70 फीसदी स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का मुद्दा उठाया। इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी ज्ञापन सौंपा गया था।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्पष्ट किया था कि नियमों के विपरीत जाकर वे नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं दे सकते हैं। निष्कासित कर्मचारियों के समर्थन में मेयर अनिता ममगाईं और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने भी एम्स निदेशक से वार्ता की थी।

इसी क्रम में सहमति बनी कि एम्स की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर स्थानीयता के आधार पर आरक्षण जारी करने की अनुमति मांगी जाएगी। उक्त प्रस्ताव पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स को स्पष्ट किया है कि डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की गाइडलाइन के अनुसार क्षेत्रीय या राज्य के आधार पर ऑटोनॉमस संस्थानों में आरक्षण की कोई नियमावली नहीं है।

महिला मौत मामलाः मरीज के बाहर जाने सहित अन्य बिंदु पर निर्मल अस्पताल ने डा. शोएब से मांगा जवाब

बीती बुधवार को ऋषिकेश देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में अब निर्मल अस्पताल प्रबंधन ने भी डॉ. मोहम्मद शोएब के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। अस्पताल प्रबंधन ने शोएब को नोटिस देकर तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

बता दें कि डॉ. मोहम्मद शोएब ने निर्मल अस्पताल में आई महिला को इलाज में कम रुपये लगने की बात कहकर देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय भेजा था, जहां महिला का अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ।

ऑपरेशन के दौरान जब महिला की हालत बिगड़ गई तो डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी ने महिला के परिजनों को हायर सेंटर रेफर करने की बात कही थी। जब परिजन महिला जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले गए तो चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि महिला की मौत कई घंटे पूर्व ही हो चुकी है। इसके बाद परिजनों ने क्लीनिक पर हंगामा किया था।

परिजनों ने डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। इसके बाद से ही मामले ने तूल पकड़ा। डॉ. शोएब निर्मल अस्पताल में भी प्रेक्टिस करते हैं। उक्त अस्पताल का प्रबंधन अनुबंध की शर्तों का पालन न करने, मरीज को नियम विरुद्ध तरीके से बाहर भेजने सहित अन्य बिंदुओं पर अपने स्तर से भी जांच करवा रहा है।

ऑपरेशन के दौरान महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने काटा हंगामा

ऋषिकेश में अपेडिक्स के इलाज के दौरान महिला की मौत होने पर परिजनों ने निजी क्लीनिक के दो चिकित्सक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों ने चिकित्सकों पर मरीज की फाइल भी गायब करने का आरोप लगाया है।

तपोवन लक्ष्मणझूला सराय निवासी कृष्णा ने बताया कि उनकी 45 वर्षीय माता सुमित्रा देवी अपेंडिक्स से पीड़ित थी। इनका इलाज कराने का निर्मल अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर मोहम्मद शोएब के पास गए। उन्होंने डॉक्टर को आर्थिक स्थिति ठीक न होने का हवाला दिया। डॉक्टर ने उन्हें कहा कि मेरा एक देहरादून रोड स्थित निजी चिकित्सालय भी है वहां पर रुपए कम लगेंगे। इसके बाद बीती मंगलवार कि शाम को देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एवं चिकित्सालय में उनकी माता को भर्ती किया गया।

बुधवार की सुबह उनकी माता के ईसीजी और ब्लड टेस्ट किए गए, जिसमें सभी रिपोर्ट सामान्य आई। इसके बाद करीब ढाई बजे उन्हें ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। और बताया कि डॉक्टर को एस कंडारी ने उन्हें साढ़े चार बजे कहा कि आप की माता की तबीयत ज्यादा खराब हो रही है इसलिए उन्हें हायर सेंटर जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। कृष्णा ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस के जरिए जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल पर अपनी माता को पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया कि उनकी माता की मौत बहुत पहले ही हो चुकी है। इसके बाद परिजन देहरादून रोड स्थित क्लीनिक आए और डॉक्टर पर लापरवाही करने का आरोप लगाने लगे। परिजनों का आरोप है कि वह अपनी माता की भर्ती की हुई फाइल डॉक्टर से मांग रहे हैं मगर डॉक्टर उन्हें उपलब्ध नहीं करा रहा है। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंची। मगर इस पर भी परिजन शांत न हुए।

वहीं डॉ ओएस कंडारी का कहना है कि फाइल उन्होंने देखी जरूर है मगर निर्मल अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद शोएब के पास फाइल है। इस पर पुलिस ने मौके से ही डॉक्टर शोएब से बात की उन्होंने बताया की फाइल उनके पास नहीं है फाइल क्लीनिक पर ही रखी हुई है। इसके बाद हंगामा और भी बढ़ गया। देर रात परिजनों ने आरोपी डॉक्टर मोहम्मद शोएब और डॉक्टर ओएस कंडारी के खिलाफ कोतवाली पुलिस को तहरीर दी।

फुटेज में फाइल हटाते दिख रहा डॉक्टर
कंडारी क्लीनिक एवं चिकित्सालय ने परिजनों ने जब ज्यादा हंगामा किया तो पुलिस की मौजूदगी में सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई। इस दौरान निर्मल अस्पताल का डॉक्टर मोहम्मद शोएब फाइल को छुपाता हुआ दिखाई दिया। परिजनों ने फुटेज को मोबाइल से कैमरे पर कैद भी कर लिया। हालांकि यह कहना मुश्किल है, कि फाइल कौन सी हैं।

राफ्टिंग का काम कर घर लौट रहे युवक की डंपर से कुचलकर मौत

ऋषिकेश स्थित हीरालाल मार्ग पर नो एंट्री जोन में गुजर रहे एक डंपर ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। इससे युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने युवक के परिजनों को सूचित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिया है।

बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे हीरालाल मार्ग पर राफ्टिंग का काम करके गली नंबर 04 सुमन विहार बापू ग्राम निवासी दिनेश सिंह बिष्ट पुत्र रंजीत सिंह बिष्ट बाइक से अपने घर लौट रहा था। इस दौरान एक बेकाबू डंपर ने दिनेश सिंह को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा देख स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और डंपर चालक को पकड़ लिया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस के सामने लोगों ने नो एंट्री में डंपर घुसने पर भी विरोध जताया। पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स भेज दिया।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि डंपर और चालक हुकुम चंद्र पुत्र दुमनो राम निवासी धगरास थाना सुंदरनगर जिला मंडी हिमाचल प्रदेश को हिरासत में ले लिया गया है। हुकुम चंद्र देहरादून रोड ऋषिकेश स्थित गैरोला कॉम्पलेक्स के एसएन डोभाल के यहां काम करता है।