ऋषिकेश राजकीय अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक में नहीं है नियमित रक्तकोष अधिकारी

ब्लड बैंक ऋषिकेश पर लाइसेंस निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है। यह खतरा यहां नियमित रूप से पैथोलॉजिस्ट का न होने से है। हकीकत यह है कि यहां तैनात पैथोलॉजिस्ट सप्ताह में तीन दिन ऋषिकेश तो तीन दिन हरिद्वार में अपनी सेवाएं दे रहे है। इस मामले में राज्य ड्रग कंट्रोलर ने संज्ञान लिया है। ड्रग कंट्रोलर की मानें तो ब्लड बैंक में यदि नियमित रूप से पैथोलॉजिस्ट नहीं है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। ऐसे में एक बार फिर मरीजों के लिए समस्या पैदा हो जाएगी।

राजकीय चिकित्सालय में वर्ष 2012 में ब्लड बैंक संचालित हुआ था। दो साल के सफल संचालन के बाद वर्ष 2014 में यहां पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण इसे बंद कर दिया गया। करीब 14 माह बाद यहां पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय की रक्तकोष अधिकारी के पद पर नियुक्त की गई और ब्लड बैंक का पुनरू संचालन शुरू हो गया। नियमानुसार बिना रक्तकोष अधिकारी के रक्त नहीं दिया जा सकता है। इसके अलावा रक्तकोष के सभी कार्यों में पैैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।

इसलिए बनी समस्या
दरअसल हरिद्वार के राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. रजत सैनी को मई 2019 में किन्हीं कारणों से सस्पेंड कर दिया गया। तभी से ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय हरिद्वार में सप्ताह में तीन दिन सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में न ही हरिद्वार राजकीय चिकित्सालय में नियमानुसार ब्लड बैंक संचालित हो पा रहा है और न ही ऋषिकेश में ब्लड बैंक का सही मायने में संचालन हो रहा है। ड्रग कंट्रोलर ताजवर नेगी का कहना है कि यदि सप्ताह में तीन दिन बिना पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन किया जा रहा है, तो ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।

पैथोलॉजिस्ट का होना इसलिए है जरूरी
ब्लड बैंक संचालित करने के लिए केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर एवं राज्य ड्रग कंट्रोलर कार्यालय से लाइसेंस जारी किया जाता है। इनके मानकों के अनुसार ब्लड बैंक में एक पैैथोलॉजिस्ट, एक टेक्नीशियन और एक स्टाफ नर्स का होना आवश्यक है। बिना पूर्णकालिक पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन नहीं किया जा सकता है।

एम्स ने किया टेलीमेडिसिन तकनीक पर करार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश और अमेरिकी कंपनी इवोल्को के मध्य टेलीमेडिसिन तकनीक को लेकर करार हो गया है। अब मरीज घर बैठे भी एम्स के विशेषज्ञों से सलाह ले सकता है।
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि इवोल्को कंपनी कैलिफोर्निया में स्थापित है, जिसकी भारत में लखनऊ और बेंगलुरु में शाखाएं स्थापित हैं। कंपनी ने आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस पर आधारित पेसेंट स्क्रीनिंग एंड टेलीमेडिसिन तकनीक को विकसित करने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय इलाकों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स संस्थान ने कंपनी के साथ करार किया है।
निदेशक ने बताया कि टेलीमेडिसिन तकनीक से दूर दराज के पहाड़ी क्षेत्रों के मरीज एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सक से घर बैठे ही चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकेंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को न सिर्फ शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिलेगी वरन वह अपने गांवों से सैकड़ों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में आने की समस्या से निजात पा सकेंगे। इससे उनके समय और धन की मितव्ययता भी नहीं होगी। एम्स टेलीमेडिसिन यूनिट की नोडल ऑफिसर प्रो. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि समझौता ज्ञापन पर एम्स की ओर से निदेशक प्रो. रवि कांत व इवोल्को कंपनी की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. विनीत ध्यानी ने हस्ताक्षर किए।
गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश की स्थापना रोगियों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए की गई है, जिसके तहत एम्स प्रशासन मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को सतत प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में वर्ष 2018 के जून माह में टेलीमेडिसिन इकाई की स्थापना की गई, इकाई के माध्यम से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों में टेली परामर्श, टेली चिकित्सा सेवा व टेली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवसर पर एम्स टेलीमेडिसिन यूनिट के सदस्य डॉ. योगेश बेहुरूपी, डॉ. मधुर उनियाल आदि उपस्थित थे।

स्कूलों में दैनिक प्रार्थना में बच्चों को मौसमी बीमारियों से बचाव व उपचार की जानकारी देंः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा के बारे में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचाव व उपचार की तैयारियां पहले से ही कर ली जानी चाहिए। सर्दियों में फैलने वाले इस इन्फ्लुएंजा से बचाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगां तक पहुंचाई जाए। विशेष रूप से स्कूलों में जाकर दैनिक प्रार्थना के समय बच्चों को इसके बारे में बताया जाए कि किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से इससे बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री आवास में एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा से बचाव व उपचार की तैयारियों पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा को लेकर आम लोगों में भय न हो, इसके लिए बीमारी और इससे बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उपचार के लिए आवश्यक दवाईयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे।

बैठक में बताया गया कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा एक सामान्य किस्म का इन्फ्लुएंजा है। इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं होती है। इसके मरीजों का बहुत कम प्रतिशत होता है जिन्हें कि भर्ती कराए जाने की जरूरत पड़ती है। इसमें सामान्य सर्दी, जुखाम जैसे लक्षण ही होते हैं। घर पर ही इसका उपचार हो जाता है। बाजार में इसकी दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। परंतु यह दवा केवल डाक्टर का पर्चा दिखाने पर ही दी जा सकती है। केवल डायबिटिज, दमा आदि के रोगियों व उम्रदराज लोगों को सावधानी बरतनी होती है। अधिक से अधिक तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार लिया जाना चाहिएा। अगर किसी बच्चे में इसके लक्षण दिखें तो स्कूल नहीं भेजा जाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की भी जानकारी ली।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग, मिली सबसे बड़ी राहत

उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए आयुष्मान कार्डधारकों को सुविधा दी है कि डेंगू के मरीज अब सीधे प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज करा सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को डेंगू के मरीजों को आयुष्मान कार्ड के आधार पर भर्ती कर इलाज कराने की सुविधा प्रदान कर दी है। विभाग ने निजी अस्पतालों से कहा है कि मरीज को भर्ती करने के बाद इसकी सूचना आयुष्मान की नोडल एजेंसी को देनी होगी।
डेंगू के मामले लगातार बढ़ने और सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ने के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। वहीं, सामने आया है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज न मिलने के कारण भी मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निजी अस्पतालों में इलाज कराना मुश्किल हो रहा है और वहीं, सरकारी अस्पतालों में बैड खाली नही होने से उनकी जिंदगी दांव पर लगी हुई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने अधिकारियों की बैठक ली और यह निर्णय लिया कि आयुष्मान कार्डधारकों को निजी अस्पतालों में डेंगू का इलाज करने के लिए अधिकृत किया जाए। साथ ही लोगों मंे यह अपील भी पहुंचाने का निर्णय लिया गया कि डेंगू होने पर केवल गंभीर स्थिति में ही अस्पतालों में भर्ती हुआ जाए। इसका इलाज घर पर भी संभव हो सकता है।
सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि आयुष्मान कार्डधारक निजी अस्पतालों में अपना इलाज करा सकते हैं। इसके लिए अस्पतालों को एडवाइजरी भी दी जा रही है। निजी अस्पतालों को मरीज भर्ती करने के बाद इसकी सूचना आयुष्मान एजेंसी को देनी होगी। ताकि उनके बिल के भुगतान की प्रक्रिया नियमानुसार की जा सके।

कूड़ाघर शिफ्टिंग को लेकर मेयर अनिता ने किया वन भूमि का निरीक्षण

नगर निगम की ओर से शहर के बीचोंबीच गोविंद नगर स्थित खाली भूखंड पर बना कूड़ाघर लालपानी ब्लॉक-ए में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। यहां कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगाया जाएगा। मंगलवार को मेयर ने निगम, वन विभाग और पर्यावरण प्रभाव आंकलन (ईआईए) टीम के साथ लाल पानी ब्लॉक-ए में 10 हेक्टेयर भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि लालपानी ब्लॉक-ए में शीघ्र ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा और शहर के बीचोंबीच बना कूड़ाघर भी शिफ्ट किया जाएगा। इस दौरान टीम ने ध्वनि और पानी का सैंपल भी लिया। मेयर ने इसकी रिपोर्ट जल्द बनाकर देने को कहा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के बाद ही एनवायरमेंट क्लीयरेंस की एनओसी मिल सकेगी।

पर्यावरण प्रभाव आंकलन के विशेषज्ञ रत्नेश कोठियाल ने बताया कि इसकी रिपोर्ट छह से सात माह के भीतर आएगी। उन्होंने मेयर को विश्वास दिलाया कि तीन दिन में टर्म आफ रिफरेंस की रिपोर्ट फाइनल कर दी जाएगी। तीन माह मॉनिटरिंग में लगते हैं और 20 सितंबर से हवा, पानी और जमीन के सैंपल भी लिए जाएंगे। दो माह का समय पब्लिक हेयरिंग में लगेगा। उसके बाद वन विभाग की क्लीयरेंस के बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट और कूड़ाघर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस मौके पर वन अधिकारी राजेंद्र पाल नेगी, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण आदि उपस्थित रहे।

कूड़ा निस्तारण को निगम में होगा प्रजेंटेशन
मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि निगम का उद्देश्य सिर्फ कूड़े को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखना नहीं है। कूड़े का निस्तारण भी होगा। पूरे प्लांट की कैपिंग करवाकर वहां से किसी तरीके की कोई बदबू और बीमारी न फैले, इसका ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही निगम में कूड़ा निस्तारण करने वाली कंपनियों का प्रजेंटेशन करवाया जाएगा।

आंदोलन को धार देने के लिए की थी राजनीति, ऐसे थे रणजीत सिंह वर्मा

जननायक और पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह वर्मा की अंतिम यात्रा में आज सुबह भारी हुजूम उमड़ा। सुबह दस बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकली और लक्खीबाग देहरादून में उनका अंतिम संस्कार किया। बतातें चले कि सोमवार सुबह सात बजे उनका स्वर्गवास हो गया था।
पूर्व विधायक और राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा का सोमवार सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। अस्पताल में पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे। उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों ने दुख जताया है। जौलीग्रांट के पूर्व प्रधान और उनके सहयोगी रहे कुंवर सिंह मनवाल कहते हैं कि उनके निधन की खबर डोईवाला के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुरूख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर डोईवाला क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं। उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता है। आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र डोईवाला रहा।
तरली जौलीग्रांट में उनका निवास स्थान है। क्षेत्र में उनके पास काफी खेती बाड़ी होने के कारण प्रगतिशील किसान कहा जाता रहा है। गन्ना राजनीति में करीब तीन दशक से भी अधिक समय तक उनकी पकड़ रही है। गन्ना परिषद डोईवाला में करीब 25 सालों तक लगातार अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. नारायणदत्त तिवारी से उनका स्नेह होने के कारण डोईवाला चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाकर उसको आधुनिक रूप दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक रहे।

रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन की जटिलताओं में आती है कमीः एम्स निदेशक

एम्स ऋषिकेश में पहली मर्तबा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने यूरो ओंकोलॉजी एवं यूरोगाइनीकोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जटिल सर्जरियों पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान के यूरोलॉजी विभाग की ओर से पहली अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक यूरोलॉजी कांफ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें देश के ही नहीं अपितु अन्य देशों के भी प्रसिद्ध रोबोटिक शल्य चिकित्सकों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश हमेशा बेहतर उपचार परिणामों के साथ रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित है, इस श्रंखला में यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में शनिवार का दिन गुर्दे के कैंसर के इलाज एवं महिला पैल्विक रोगों के उपचार व विचार विमर्श के लिए समर्पित रहा। निदेशक प्रो. रवि कांत बताया कि रोबोटिक सर्जरी से पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम मिलते हैं,इससे .शरीर से रक्त का बहाव कम होता है और छोटे छोटे चीरे लगने से कम निशान पड़ते हैं एवं घाव आसानी से भर जाते हैं। साथ ही बताया कि रोबोटिक सर्जरी से बेहतर सूचरिंग के कारण सर्जरी में आसानी होती है और ऑपरेशन से संबंधित जटिलताओं में कमी आती है। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में खासतौर से आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक सर्जन डा. डेविड गिल्लाट ने प्रतिभागियों को रोबोटिक सर्जरी की बारिकियों से अवगत कराया। निदेशक प्रो. रवि कांत ने उम्मीद जताई कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन से आने वाले समय में मरीजों को लाभ मिलेगा।


एम्स के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल काफ्रेंस के दूसरे दिन शनिवार को डा. रवि मोहन ने एक मरीज के गुर्दे को बचाते हुए गुर्दे की गांठ की सर्जरी का प्रदर्शन किया। कांफ्रेंस के दौरान यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने वेसिको वेजाइनल फिस्टुला रिपेयर ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इस अवसर पर उन्होंने एम्स संस्थान की ओर से प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। यूरोलॉजी विभाग के डा. सुनिल कुमार ने प्रतिभागियों को रोबोट पर सिमुलेशन के द्वारा प्रशिक्षण दिया।
सम्मेलन के आयोजन में डा. किम जैकब मैमन, डा. सुनील कुमार, डा. विकास कुमार पंवार, डा. शिव चरण नावरिया, डा. तुषार नारायण आदित्य,डा. निशित के अलावा यूरोलॉजी व गाइनेकोलॉजी टीम ने सहयोग किया।

सरकार ने भेजा नोटिस, हाईकोर्ट से भी नही मिली डाॅक्टरों को राहत

उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कालेजों से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले गैरहाजिर डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग ने ज्वाइनिंग का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। इसके बाद बांड की शर्तों के मुताबिक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं न देने वाले बांड धारक डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस की वसूलने की कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।
प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सरकारी मेडिकल कालेजों में बांड योजना शुरू की थी। जिसमें बांड भरकर एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को फीस में भारी छूट दी गई। लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ डॉक्टर ने युवाओं ने दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने से इनकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्ती करने पर ऑल इंडिया रैकिंग से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
जिसमें हाल ही में हाईकोर्ट ने बांड की शर्त के अनुसार ज्वाइनिंग न करने वाले डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस वसूलने के आदेश दिए। अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, युगल किशोर पंत ने बताया स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से गैरहाजिर चल रहे बांड धारक डॉक्टरों का रिकॉर्ड तैयार कर नोटिस जारी किए गये हैं। जिसमें ऑल इंडिया रैकिंग के करीब 22 डॉक्टर हैं। वहीं राज्य कोटे की सीट से बांड भरने वाले डॉक्टरों को नोटिस संबंधित कालेजों को भेजे गए हैं।
वहीं, इस साल से सरकार ने दून और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में बांड के माध्यम से एमबीबीएस करने की योजना को समाप्त कर दिया है। अब श्रीनगर मेडिकल कालेज और अगले साल से अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में ही बांड भरकर कम फीस पर एमबीबीएस की सुविधा मिलेगी।
बांड से प्रशिक्षित डॉक्टरों से एमबीबीएस की 15, 25, 50 हजार रुपये की फीस ली जाती है। जबकि बिना बांड के फीस चार लाख रुपये सालाना देनी होती है। बांड से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एक साल तक मेडिकल कालेजों में सेवाएं देनी होती हैं। इसके बाद दो साल तक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों और दो वर्ष तक जिला चिकित्सालयों में सेवाएं देनी अनिवार्य हैं।

वेलनेस समिट में रोजगार और पलायन पर फोकस कर रही सरकारः मुख्यमंत्री

इंवेस्टर्स समिट की तर्ज पर प्रदेश सरकार अब वेलनेस समिट का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर उद्योग विभाग समिट की कार्ययोजना बनाने में जुट गया है। ये समिट चार प्रमुख सेक्टरों पर केंद्रित होगा। इसमें आयुर्वेद, योग, पर्यटन, स्वास्थ्य प्रमुख हैं। सरकार प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से सर्विस सेक्टर को प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए चार सेक्टर तय किए गए हैं।
सरकार ने गत वर्ष प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए पहली बार इंवेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें सरकार को उम्मीदों से अधिक निवेश के प्रस्ताव मिले। इंवेस्टर्स समिट में निवेश के लिए 15 सेक्टरों को चिन्हित किया गया था। सरकार ने 673 प्रस्ताव में 1.24 लाख करोड़ के निवेश पर एमओयू किए। इसी तर्ज पर इस साल सरकार वेलनेस समिट के आयोजन की तैयारी कर रही है। उत्तराखंड में जड़ी-बूटी, योग, पर्यटन और मेडिकल निवेश की अपार संभावनाएं है। इन सेक्टरों में निवेश से जहां रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वहीं, सर्विस सेक्टर से सरकार का राजस्व बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वेलनेस समिट के आयोजन के लिए सरकार तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से निवेशकों का उत्तराखंड में निवेश करने के लिए अच्छा रिस्पांस मिला था। इस साल प्रदेश में वेलनेस समिट कराने की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें मेडिकल, योग, आयुर्वेद, पर्यटन में सर्विस सेक्टर के उद्योगों को बढ़ावा देने पर फोकस होगा।
इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से सरकार ने 1.24 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। जिसमें अब तक 20 हजार करोड़ के निवेश को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो गया है। नए उद्योगों के लिए सरकार जमीन चिन्हित कर रही है।
सरकार ने पर्यटन सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योग का दर्जा दिया है। इंवेस्टर्स समिट में पर्यटन में 15362 करोड़, वेलनेस एवं आयुष में 1751, हर्बल एवं ऐरोमेटिक में 745 करोड़, हेल्थ केयर में 16890 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे।

डायलिसिस यूनिट पावर सप्लाई बंद, मरीज की मौत

हरिद्वार के मेला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में अचानक पॉवर सप्लाई बंद होने से किडनी की बीमारी से पीड़ित दस मरीजों की हालत बिगड़ गई। गंभीर हाल में एक मरीज को जौलीग्रांट रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मरीजों के तीमारदारों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर पहुंची मेयर अनीता शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर चल रही यूनिट बिना एमडी डॉक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट के चलाई जा रही थी। मेला अस्पताल में अप्रैल में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई थी। शनिवार की दोपहर को यूनिट की दस मशीनों पर किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। अस्पताल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जेनरेटर चलाया गया।
करीब दो बजे अचानक से तकनीकी खराबी के कारण जनरेटर बंद हो गया और मशीन बैकअप पर चलने लगी। कुछ ही मिनटों पर मशीन का अलार्म बजने लगा। देखते ही देखते दस मिनट में ही बैकअप समाप्त होने लगा। यूनिट के डॉक्टर, तकनीशियनों और नर्स ने डायलिसिस मशीन के पंप चलाकर बाहर निकले ब्लड को बमुश्किल से शरीर के अंदर पहुंचाया। सभी दस मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। एक मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मरीज विजय शर्मा (62) की मेला अस्पताल में ही मौत हो गई थी।
पीपीपी मोड पर यूनिट चला रहे चंडीगढ़ की संस्था राही केयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डॉ. शौर्य पयाल का कहना है कि यूनिट में उनकी तरफ से सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। पॉवर सप्लाई प्रभावित होने से यह समस्या खड़ी हुई। उन्होंने एक मरीज की मौत की पुष्टि तो की लेकिन कहा कि यह मौत यूनिट में नहीं हुई है।
सीएमओ प्रेमलाल का कहना है कि विजय शर्मा दस साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। कार्डियकअरेस्ट से उनकी मौत हुई है। उनका कहना है कि यूनिट में जो कमियां हैं उनको दूर कराया जाएगा। पाॅवर सप्लाई के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।