राज्य में फिल्मांकन के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की

(एनएन सर्विस)
राज्य सरकार ने प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत कोविड-19 के चलते प्रदेश में पहले से लागू नियम शूटिंग दल पर प्रभावी रहेंगे। फिल्म निर्माता को शूटिंग यूनिट का वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा। महानिदेशक सूचना कार्यालय देहरादून में शूटिंग दल, अवधि और लोकेशन को लेकर पूरा विवरण देना होगा।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने गाइडलाइन जारी करते हुए बताया कि कोई भी फिल्म निर्माता इसका पालने करते हुए राज्य में फिल्मांकन कर पाएगा। फिल्म प्रोडक्शन कंपनी को कोविड-19 की रोकथाम के लिए उठाए गए समस्त कदमों का विवरण राज्य सूचना विभाग को देना जरुरी होगा। महानिदेशक सूचना की तरफ से समस्त सूचनाएं और अनुमतियां संबंधित जिलाधिकारियों को भेजी जाएंगी। शूटिंग में आने वाले दल के प्रत्येक व्यक्ति की कोविड को लेकर ट्रेनिंग अनिवार्य रहेगी। सोशल डिस्टेसिंग, फेस्क मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों को दल साथ में लाएगा। अगर दल के किसी सदस्य में कोरोना के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत निकटवर्ती सरकारी अस्पताल और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी देगा।
वहीं, शूटिंग के दौरान प्रोडक्शन कंपनी को एक नोडल अधिकारी की तैनाती भी करनी होगी। जो जिला प्रशासन को प्रत्येक सदस्य का डाटा बेस तैयार करके देगा। थर्मल स्कैनिंग से लेकर पीपीई किट व अन्य उपकरणों की जानकारी रखनी होगी। इस्तेमाल के बाद उन्हें कैसे नष्ट किया जा रहा है इसकी भी सूचना प्रशासन को देनी होगी।  
प्रोडक्शन कंपनी कोे फिल्म सेट का दिन में दो बार सैनिटाइजेशन करना अनिवार्य होगा। फोर्क लिफ्ट का कम से कम इस्तेमाल करने, सेट के बाहर, वेटिंग रूम, रेस्ट रूम में हैंड सैनिटाइजर रखना अनिवार्य होगा। स्टाफ में 65 साल से अधिक के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं लाने की अनुमति नहीं दी गई है। गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर लाना बेहद जरूरी है तो इसकी अनुमति जिलाधिकारी से प्राप्त करनी होगी।
वहीं, शूटिंग स्थल पर व्यक्तियों की संख्या भी कम से कम रखने पर जोर दिया गया है। इंडोर में होने वाली शूटिंग में अनिवार्य स्टाफ की संख्या 15 और आउटडोर में 30 लोग ही रहेंगे। मेकअप और हेयर ड्रेंसिंग के स्थान पर बार बार सैनिटाइजेशन करना होगा। शूटिंग स्थल पर सभी को मास्क, दस्ताने व फेस शील्ड पहननी होगी। 
एक अन्य निर्देश में शूटिंग दल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ट्रैवलिंग प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। जिला प्रशासन इसकी निगरानी करेगा। वाहनों में यात्रियों की संख्या गाइडलाइन के अनुसार ही रहेगी। प्राइवेट प्रापर्टी पर शूटिंग के लिए अनिवार्य अनुमति के साथ लोकेशन के सैनिटाइजेशन का खास ख्याल रखना होगा।

धार्मिक स्थानों के साथ ही पर्यटक स्थलों को विकसित करने का प्लान तैयार कर रही सरकार

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में वर्ष पर्यंत पर्यटन के लिए एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिये हैं। विशेष तौर पर यात्रा मार्ग पर स्थित पर्यटन स्थलों में यात्रा अवधि के अलावा भी पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। श्री बदरीनाथ धाम के प्रस्तावित मास्टर प्लान पर तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों के सुझाव भी प्राप्त कर लिए जाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पर्यटन गतिविधियाँ को बढाने के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सलाहकार अश्विनी लोहानी और Federation of Associations in Indian Tourism and Hospitality (FAITH) के महासचिव सुभाष गोयल के साथ विचार विमर्श किया। लोहानी ने उत्तराखंड पर्यटन को ब्राण्ड के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध वाइल्ड लाइफ में भी पर्यटन की काफी सम्भावना बताई। गोयल ने कहा कि उत्तराखंड में हाईएंड टूरिज्म पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसमें टूरिज्म इंडस्ट्री और पर्यटन से जुड़ी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए।
सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने उत्तराखंड में पर्यटन के विविध आयामों व वर्तमान में चल रही पर्यटन परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने चारधाम देवस्थानम बोर्ड, होम स्टे, एडवेंचर टूरिज्म, रोप वे प्रोजेक्ट, 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन आदि के बारे मे बताया। सचिव पर्यटन ने श्री बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर प्रस्तुतीकरण भी दिया।

बुजुर्ग, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का डेटा तैयार करने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने शनिवार को सचिवालय में कोविड-19 के दृष्टिगत सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रवासी की ट्रैवल्स हिस्ट्री की जानकारी प्राप्त करते हुए उनका कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने कम टेस्टिंग रेसियो वाले जनपदों को टेस्टिंग रेशियो बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कोरोना संक्रमण को रोकने एवं इसके नियंत्रण में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों को खुद की भी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इस संक्रमण को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को इस कार्य में लगे सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हुए, उन्हें सुरक्षा किट उपलब्ध कराए जाने के निर्देश भी दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रवासियों का बेहतर ढंग से डाटा तैयार किया जाए ताकि पॉजीटिव पाए जाने पर उसकी टै्रवल हिस्ट्री की जानकारी तत्काल उपलब्ध हो सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने पोर्टल पर लगातार डाटा अपलोड करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि कोरोना संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए अपने-अपने जनपदों में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग व गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्तियों का डाटा तैयार करते हुए उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर घूमने-फिरने को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि क्वारंटीन सेंटरों हेतु बनाए गए प्रभारी अधिकारियों के पास अनिवार्य रूप से सुरक्षा किट की उपलब्धता के साथ ही उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल की पूर्ण जानकारी दी जाए। क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे प्रवासियों की टै्रवल हिस्ट्री आदि की जानकारी का रजिस्टर भी मेन्टेन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि क्वारंटीन सेंटरों में काउन्सलरों के माध्यम से प्रवासियों की निरन्तर काउंसिलिंग की जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को क्वारंटीन सेंटरों की व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होने सभी जिलाधिकारियों को सोशल डिस्टेसिंग का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराए जाने तथा सभी व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वालों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को कोरोना संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए गंभीरता एवं उत्साह के साथ बेहतर ढंग से कार्य किये जाने पर बधाई देते हुए आगे भी इसी उत्साह के साथ कार्य करने की बात कही।
सचिव स्वास्थ अमित नेगी ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि जनपद में आने वाले प्रवासियों को बेहतर ढंग से डाटा तैयार हो तथा उनकी निगरानी के लिए एक्टिव सर्विलांस को और अधिक बढ़ाया जाए। उन्होंने आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से होम एवं संस्थागत क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे प्रवासियों का सर्विलांस कराते हुए कोविड केयर सेंटरों में सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने हाईटेक मशीन खरीदने के लिए जारी की धनराशि, टेस्टिंग में मिलेगी बढ़ी मदद

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में कोविड टेस्टिंग बढ़ाने के लिये दून, हल्द्वानी व श्रीनगर मेडिकल कालेज के लिये 3 हाईटेक टेस्टिंग मशीन क्रय करने के लिये 11.25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि से स्वीकृत की गई है। क्रय की जाने वाली इन हाईटेक मशीनों की टेस्टिंग क्षमता 800 प्रति दिन है। इस प्रकार इससे 2400 टेस्टिंग प्रतिदिन हो सकेगी। अभी तक इन मेडिकल कालेजों में स्थापित मशीनों की टेस्टिंग क्षमता कम थी।
इसके अतिरिक्त प्रदेश से 50 से 100 सेम्पल जांच के लिए चण्डीगढ़ की इम्पेक्ट लेब में भेजे जा रहे हैं। जबकि नई दिल्ली स्थित एनसीडीसी लेब में हरिद्वार से 300, उधमसिंह नगर से 300 तथा नैनीताल से 100 सेम्पल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। जबकि लगभग 50 टेस्ट आई.आई.पी की टेस्टिंग लेब में किये जा रहे हैं।
जनपद स्तर पर भी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 7 स्थानों पर टू नाट मशीन स्थापित की गई है। इनमें से चार ने कार्य आरम्भ कर दिया है जबकि 11 मशीनों की और व्यवस्था की जा रही है।
प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि राज्य के इन तीन मेडिकल कालेजों में हाइटेक मशीनों की स्थापना एवं टू नाट मशीनों की जनपद स्तर पर स्थापना से राज्य में कोरोना की जांच में तेजी आयेगी।

17 चिकित्सक और मिले…
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि राजकीय संयुक्त चिकित्सालय रामनगर एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भिकियासैंण का कार्य पीपीपी मोड पर संचालित होने से इन चिकित्सालयों में कार्यरत 17 चिकित्सक राज्य को मिल गये हैं। इसमें 7 विशेषज्ञ चिकित्सक भी शामिल है। इन चिकित्सकों की तैनाती उन अस्पतालों में की जायेगी जहां चिकित्सकों की कमी है। ये दोनों चिकित्सालय विश्व बैंक परियोजना के तहत पीपीपी मोड पर संचालित हो रहे हैं।

हर घर में प्रतिदिन 16 घंटे पानी उपलब्ध हो, ऐसी कार्य योजना बनेः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में ‘जल जीवन मिशन’ की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत होने वाले कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता में रखा जाय। 2024 से पूर्व हमें ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में जल पहुंचाना है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष का टारगेट बनाया जाये। पानी की उपलब्धता के साथ ही शुद्धता का भी पूरा ध्यान रखा जाय। ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय, जहां पानी की गुणवत्ता सही नहीं हैं, उन क्षेत्रों के लिए पूरा प्लान भी बनाया जाय। इस मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए पेयजल, राजस्व एवं वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य कर इस मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्य पूरा करें।
‘जल जीवन मिशन’ के तहत अगले 2 वित्तीय वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष 3 लाख 58 हजार 880 घरों को इस मिशन के तहत पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल उपलब्ध कराने के लिए 90 प्रतिशत धनराशि केन्द्र सरकार एवं 10 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी। इस मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 में रेट्रोफिटिंग एवं नई स्कीम के तहत कुल 1465 करोड़ रूपये के कार्य किये जायेंगे।
अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों के लिए घरों में प्रतिदिन 16 घण्टे पेयजल की उपलब्धता के लिए 22 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में कार्य किये जा रहे हैं। इस प्रोजक्ट के तहत 96797 घरों को लाभ मिलेगा। यह प्रोजक्ट 877.50 करोड़ रूपये का है। इस प्रोजक्ट के तहत 22 में से 12 स्कीम पर कार्य शुरू हो गये हैं।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव नितेश झा, सौजन्या, एमडी स्वजल उदयराज एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

पाॅजीटिव पाये गये स्वास्थ्यकर्मियों की रिपोर्ट पर संदेह, दोबारा होगी जांच

(एनएन सर्विस)
राज्य में प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को 28 स्वास्थ्यकर्मियों समेत 104 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। अब प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 2206 पहुंच गई है। संक्रमित स्वास्थ्यकर्मियों में 17 देहरादून और 11 टिहरी के बताए जा रहे हैं। जबकि 1433 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। प्रदेश में अब 663 एक्टिव केस हैं।
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार शुक्रवार को अल्मोड़ा में 14, बागेश्वर में सात, देहरादून में चार (17 स्वास्थ्यकर्मी भी, जिन्हें रिपोर्ट में जोड़ा नहीं गया), हरिद्वार में आठ, नैनीताल में आठ, पौड़ी में दो, पिथौरागढ़ में चार, ऊधमसिंह नगर में 12 और टिहरी में तीन कोरोना संक्रमित मिले हैं।
टिहरी जिले में 28 संक्रमित मरीज मिले हैं। इनमें सीएचसी हिंडोलाखाल में 11 स्वास्थ्यकर्मियों में कोरोना की पुष्टि हुई है, जबकि छह महाराष्ट्र व मुंबई, एक राजस्थान, दो नासिक से लौटे हैं और आठ मरीज संपर्क में आए हुए हैं। अल्मोड़ा जिले में 14 मरीजों में 12 की ट्रेवल हिस्ट्री दिल्ली की है। हरिद्वार और नैनीताल जिले में आठ-आठ, बागेश्वर जिले में सात, पिथौरागढ़ जिले में चार और पौड़ी जिले में एक ही परिवार के 2 लोग संक्रमित मिले हैं। वहीं, देर रात ऊधमसिंह नगर जिले में भी 12 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
वहीं देहरादून जिले में शुक्रवार को चार डॉक्टरों और 13 स्वास्थ्य कर्मियों समेत 21 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों में एक वीवीआईपी के वरिष्ठ फिजीशियन भी शामिल हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.बीसी रमोला ने 17 स्वास्थ्यकर्मियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने की पुष्टी की है। लेकिन संदेह जताते हुए सभी के सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजने की बात भी कही है।

कोटद्वार के दो मार्केट 20 जून तक बंद
कोटद्वार में मालिनी मार्केट और जिला परिषद मार्केट अब शनिवार 20 जून तक बंद रहेंगे। व्यापारी के परिवार के पांच लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद बाजार बंद रहने की अवधि बढ़ाई गई है। यहां व्यापारी परिवार की तीन दुकानें हैं। इससे पूर्व गुरुवार की सुबह व्यापारी तीन दिन से बंद दुकानें खोलने के लिए पहुंचे। लेकिन पुलिस ने प्रशासन के आदेश बताते हुए उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। लिहाजा, चैथे दिन भी मालिनी और जिला परिषद बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर संक्रमण को फैलने से बचाने के लिए एहतियात के तौर पर 20 जून तक मालिनी मार्केट और जिला परिषद मार्केट को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद आगे फैसला लिया जाएगा।

त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए सरकार ने फिर खोला खजाना

(एनएन सर्विस)
चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से भी सभी जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को वित्तीय वर्ष 2020-21 की मासिक किस्त की 95 करोड़ से अधिक की धनराशि अवमुक्त की गई है।
15 वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों को प्राथमिक अनुदान के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 की प्रथम किस्त में 143.50 करोड़ रूपए की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। आज सचिव वित्त श्री अमित सिंह नेगी द्वारा इसका शासनादेश जारी किया गया है। इसमें राज्य के समस्त जिला पंचायतों को 21 करोड़ 52 लाख 50 हजार रूपए, क्षेत्र पंचायतों को 14 करोड़ 35 लाख रूपए, समस्त ग्राम पंचायतों को 107 करोड़ 62 लाख 50 हजार रूपए की धनराशि अवमुक्त की गई है।
इससे पूर्व चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर राज्य सरकार द्वारा सभी जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को वित्तीय वर्ष 2020-21 की मासिक किस्तों की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। इसके तहत राज्य की समस्त जिला पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की तृतीय व चतुर्थ मासिक किस्त (माह-जून व जुलाई) के लिए 28 करोड़ 43 लाख 22 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त क्षेत्र पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 7 करोड़ 23 लाख 78 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 9 करोड़ 65 लाख 12 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है।
राज्य की समस्त नगर निगमों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 22 करोड़ 10 लाख 97 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त नगर पालिकाओं को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 22 करोड़ 11 लाख 99 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त नगर पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 5 करोड़ 35 लाख 17 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य के तीन गैर निर्वाचित निकायों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 17 लाख 17 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है।

महामारी के प्रभाव तक ही बढ़ा किराया रहेगा लागू, बस व्यवसायियों को दी राहत

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने बसों के किराये में दोगुने से अधिक वृद्धि कर दी है। किराये में वृद्धि महामारी अधिनियम के प्रभावी रहने तक लागू रहेगी। एक्ट हटते ही बढ़ा किराया कम हो जाएगा। कोविड-19 के चलते बसों में सोशल डिस्टेसिंग के मानकों के अनुसार 50 प्रतिशत यात्रियों को ही बैठाया जाना है। ऐसे में परिवहन व्यवसायी सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बसों का संचालन करने में भी दिक्कत आ रही थी। व्यवसायियों का कहना था कि आधी सवारी के किराये से तेल का खर्च भी नही निकल पा रहा है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोजी का संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार ने यह निर्णय परिवहन व्यवसाय को बचाने के लिए लिया है।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कोविड-19 के कारण प्रदेश में बसों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुरूप 50 प्रतिशत सवारी ले जाने की अनुमति है। लेकिन बस संचालकों ने 50 प्रतिशत सवारी के साथ मौजूदा किराया दर पर वाहन संचालन में असमर्थता जताई। घाटा होने की स्थिति में वे बसें नहीं संचालित कर रहे थे। इससे यात्रियों को टैक्सी के माध्यम से आना जाना पड़ रहा था, जिससे जनता पर बोझ पड़ रहा था। ऐसे में सरकार ने बसों के किराये में वृद्धि का निर्णय लिया है। बसों का किराया दोगुना बढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह तभी तक प्रभावी होगा, जबतक महामारी एक्ट राज्य में लागू है।

किराए की लिस्ट-सिटी बस में किराया दर 
पहले दो किमी    – 07 से बढ़ाकर 14 रु
दो से छह किमी   – 10 से बढ़ाकर 20 रु
छह से 10 किमी  – 15 से बढ़ाकर 30 रु
10 से 14 किमी  –  20 से बढ़ाकर 40 रु
14 से 19 किमी  – 25 से बढ़ाकर 50 रु
19 से 24 किमी  – 30 से बढ़ाकर 60 रु
24 से 29 किमी  – 35 से बढ़ाकर 70 रु
29 किमी से अधिक- 40 से बढ़ाकर 80 रु

नॉन-डीलक्स बस किराया
साधारण बसें (मैदानी क्षेत्र) – 1.05 से बढ़ाकर 2.10 रुपये प्रति किमी
साधारण बसें (पर्वतीय क्षेत्र)- 1.50 से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति किमी

वातानुकुलीत श्रेणी में
थ्री बाय टू सीटर बसें – 1.25 गुणा वृद्धि
टू बाय टू सीटर बसें  – 1.9 गुणा वृद्धि
सुपर डीलक्स (वॉल्वो) – तीन गुणा वृद्धि

मरीजों में संक्रमण की दर बढ़ी लेकिन ठीक होने की दर में भी बड़ा सुधार

(एनएन सर्विस)
राज्य में बुधवार को कोरोना के 81 नए मरीज मिले। अब कुल मरीजों की संख्या 2023 हो गई है। वहीं 38 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी भी मिल गई है। कोरोना वायरस को हराकर ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 1254 पहुंच गई है। जबकि 717 मरीजों का राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि बुधवार को अल्मोड़ा में 14, देहरादून में 35, नैनीताल में आठ, पौड़ी में एक, टिहरी में नौ, रुद्रप्रयाग में दो और उत्तरकाशी, हरिद्वार में 3, बागेश्वर 5, यू एस नगर 3 मरीज में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। बुधवार को कुल 656 सैंपल की रिपोर्ट आई जिसमें से 81 पॉजिटिव जबकि 613 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अपर सचिव ने बताया कि विभिन्न जिलों के 1254 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से घर चले गए हैं। जबकि 717 का इलाज अभी चल रहा है। राज्य में कोरोना मरीजो के दोगुना होने की दर 26 दिन के करीब पहुंच गई है। जबकि रिकवरी रेट भी तकरीबन 62 प्रतिशत हो गया है।
लेकिन देखा जा रहा है कि मरीजों में संक्रमण की दर भी लगातार बढ़ रही है। राज्य में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही कंटेनमेंट जोन भी बढ़ रहे हैं और अब इनकी संख्या 86 हो गई है। अकेले हरिद्वार जिले में सर्वाधिक 51 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। जबकि देहरादून में 21 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन से पहुंचे प्रवासियों ने केन्द्र और राज्य सरकार का आभार जताया

(एनएन सर्विस)
महाराष्ट्र के ठाणे स्टेशन से श्रमिक स्पेशल ट्रेन राज्य के 992 प्रवासियों को लेकर लगभग रात डेढ़ बजे लालकुआं जंक्शन पहुंच गई। यहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी यात्रियों को रोडवेज की 35 बसों के माध्यम से उनको घरों के लिए रवाना किया गया। करीब 27 घंटे का सफर कर पहुंची ट्रेन में 900 वयस्क और 92 यात्री 5 साल से कम उम्र के है। वहीं, ट्रेन पहुंचने पर प्रशासनिक अफसरों ने प्रवासियों का उत्तराखण्ड पहुंचने पर स्वागत किया। अधिकारियों ने यात्रियों को सोशल डिस्टेंस मेटेंन करवाया। स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर पर्याप्त सिविल और रेलवे पुलिस के जवान मुश्तैदी के साथ तैनात रहे। कुल 1400 प्रवासियों ने प्रदेश वापसी के लिए रिजर्वेशन कराया था। इसमें 992 यात्री ट्रेन से लौट आए। यात्रियों के मुताबिक उनसे 670 रुपए प्रति व्यक्ति किराया लिया गया। ट्रेन ठाणे स्टेशन से करीब 31 मिनट विलंब से चली। स्पेशल ट्रेन में कुल 24 कोच थे। 27 घंटे में ट्रेन से 1553 किमी का सफर तय किया।

सरकार का आभार जताया
प्रवासियों ने उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने पर केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के उन्हें काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ा। उन्होंने सरकार से गुजारिश की थी। आज घर वापसी होने पर वह सरकार का धन्यवाद देते है।