मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऋण की उपब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड की विशेष बैठक आयोजित हुई। बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2020-21 पर चर्चा करते हुए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की पर्याप्त संभावनाओं पर विचार करते हुए वार्षिक ऋण योजना को बढ़ाकर 25 हजार 793 करोड़ की संशोधित वार्षिक ऋण योजना अनुमोदित की गई। ज्ञातव्य है कि पूर्व में यह वार्षिक योजना 23 हजार 980 करोड़ की स्वीकृति थी जिसे राज्य में स्थानीय प्रवासी युवाओं के स्वरोजगार की संभावनाओं के आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की संभावना को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड द्वारा डी.एल.आर.सी/डी.सी.सी द्वारा अनुमोदित वार्षिक ऋण योजना में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लक्ष्यों को बढ़ाकर योजना का आकार बढ़ाया गया, तथा इस योजना में 1 हजार 913 करोड़ रूपये की वृद्धि की गयी।
मुख्य सचिव द्वारा चर्चा के दौरान बैंकर्स एवं अधिकारियों को निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा घोषित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यक्तिगत ध्यान देकर अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया जाए। बैठक में बताया गया कि युवा उद्यमियों द्वारा डेरी एवं कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अधिक उत्साह दिखाया जा रहा है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागाध्यक्ष को निर्देश दिये कि युवा उद्यमियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को तकनीकी दृष्टि से मदद कराकर बैंकर्स से स्वीकृत कराने में सक्रिय सहयोग दें।
मुख्य सचिव द्वारा जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की प्रगति की समीक्षा के दौरान एजीएम राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एसबीआई रमेश कुमार पंत द्वारा बताया गया कि जनपद देहरादून, नैनीताल एवं रुद्रप्रयाग जिलों में मई माह में बैठक नहीं हो पायी है बाकी सभी जिलों में जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक की जा चुकी है। इस पर मुख्य सचिव द्वारा अवशेष तीनों जनपदों में शीघ्र बैठक कराये जाने हेतु वित्त सचिव सौजन्या को सम्बन्धित जिलाधिकारियों से समन्वय कर क्रियान्वित करने के निर्देश दिये गये।
बैठक में अपर मुख्य सचिव एम.एस.एम.ई मनीषा पंवार, सचिव कृषि एवं पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम, वित्त सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, उप महाप्रबंधक एस.बी.आई बी.एल सैनी तथा सहायक महाप्रबंधक एन.एस रावत, सी.जी.एम नाबार्ड सुनील चांवला, डीजीएम आर.बी.आई तारिका सिंह, क्षेत्रीय निदेशक आर.बी.आई राजेश कुमार सहित समस्त विभागों के सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

अमेजन प्राइम के माध्यम से बेचेंगे उत्पाद, उत्तराखंड के उद्योगों को मिलेगा फायदा

(एनएन सर्विस)
कोरोना महामारी के कारण उद्योगों के सामने आ रही बाजार की दिक्कत अब जल्द खत्म होगी। उद्योगों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए अमेजन प्राइम सामने आया है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) के पहल के बाद अमेजन प्राइम प्रबंधन उद्योगों के प्रोडक्ट उसके माध्यम से बेचने पर सहमत हो गया है। इससे उत्तराखंड के उद्योगों को काफी फायदा हो सकता है। इसके साथ ही आईएयू ने बिजनेस प्लेटफार्म तैयार किया है। जिसके माध्यम से राज्य के उद्योग अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर सकेंगे।
आईएयू के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि कोरोना संकट के चलते उद्योगों के सामने बाजार की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके समाधान के लिए सोमवार को आईएयू की ओर से वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें अमेजन प्राइम के सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए। आईएयू की पहल पर अमेजन प्रबंधन उद्योगों के रजिस्ट्रेशन को तैयार हो गया है। जिसके बाद उद्योग अमेजन के माध्यम से और डायरेक्ट भी अपने प्रोडक्ट बेच सकते हैं।
इसके साथ ही इस दौरान एसोसिएशन की ओर से आईएयू बिजनेस प्लेट फार्म की घोषणा की है। इसके माध्यम से राज्य का कोई भी उद्योग अपने माल की मार्केटिंग कर सकता है। इससे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा और उनके माल की अधिक बिक्री हो पाएगी। अभी तक यहां के उद्योगों में बनने वाले माल के बारे में लोगों को पता नहीं चल पाता है और जो माल यहां बन रहा है, लोग उसे बाहर से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। कहा कि यह बिजनेस प्लेटफार्म उद्योगों को एक मार्केटिंग का प्लेटफार्म देगा।
पंकज गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कई उद्योग ऐसे हैं जिनके प्रोडक्ट की डिमांड खत्म हो चुकी है लेकिन उद्योगों के सामने कोरोना के बाद कई नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। खासकर जो माल चीन से आता था, उसे अपने देश या प्रदेश में भी बना सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार भी कार्ययोजना तैयार कर रही है। इसलिए आईएयू मेडिकल डिवाइस, डिस्पोजेबल मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर रहा है। इसके लिए सौ ऐसे आइटम की लिस्ट तैयार कर ली गई है। जिसकी टेक्नोलॉजी लेकर यहां आसानी से बनाया जा सकता है। इसमें लागत भी कम आएगी।
20 से 25 करोड़ में इस प्रकार के उद्योगों को लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई तीन लाख करोड़ की आत्मनिर्भर इकोनॉमिक पैकेज का उत्तराखंड के उद्योग फायदा नहीं उठा रहे हैं। अभी तक मात्र दस हजार उद्योग ही इसका फायदा उठा रहे हैं। जबकि 75 हजार उद्योग इसका फायदा उठा सकते हैं। सेमिनार में इस पैकेज के बारे में उद्योगों को बताया गया और उन्हें पैकेज की सीमा खत्म होने से पहले इसका लाभ लेने की अपील की गई। सेमिनार में प्रदेशभर के उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एम्म ऋषिकेश में कीमियोथेरेपी और डाइलिसिस की सुविधाएं फिर से बहाल, मिली राहत

(एनएन सर्विस)
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में डाइलिसिस और कीमियोथेरेपी के लिए मरीजों को अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लॉकडाउन के चलते संस्थान में बीते मार्च माह में स्थगित की गई ओपीडी व अन्य कई सेवाएं अब धीरे धीरे सुचारू की जा रही हैं। ऐसे में डाइलिसिस व कीमियोथेरेपी से जुड़े मरीजों को भी जल्द यह सुविधाएं मिल सकेंगी। कोविड-19 के विश्वव्यापी प्रकोप के चलते एम्स संस्थान में बीते मार्च माह में वाह्य रोगी विभाग ओपीडी समेत कई अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाएं स्थगित कर दी गई थी। जिसकी वजह कोरोना वायरस के संक्रमण से एक-दूसरे लोगों का बचाव व सरकार की गाइड लाइन का शब्दशरू पालन सुनिश्चित कराना था। जिसके कारण कैंसर के मरीजों के लिए संस्थान में उपलब्ध कीमियोथेरेपी व किडनी संबंधी रोगों से ग्रसित मरीजों की डाइलिसिस आदि सुविधाओं को भी कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। इससे संबंधित रोगों से ग्रस्त मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था और वह इन सुविधाओं को लेकर लगातार संस्थान से संपर्क बनाए हुए थे। लिहाजा ऐसे मरीजों की परेशानी के मद्देनजर एम्स ऋषिकेश ने कीमियोथेरेपी व डाइलिसिस की सुविधाएं फिर से बहाल कर दी हैं।
गौरतलब है कि ऋषिकेश नगर व समीपवर्ती इलाकों में किडनी संबंधी रोगों से ग्रसित काफी संख्या में मरीज हैं, जो एम्स में इसके नियमित उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में खासकर उन लोगों को डाइलिसिस की सुविधा फिर से नियमिततौर पर मिल सकेगी जो पहले से ही संस्थान में इस सुविधा का लाभ लेते रहे हैं। जबकि संस्थान में रेडियोथेरेपी की सुविधा लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में कुछ समय स्थगित कर दी गई थी, इसके बाद से इसे सुचारू कर दिया गया था, एम्स संकायाध्यक्ष अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि इन दिनों एक दिन में डाइलिसिस के अधिकतम 9 और कीमियोथेरेपी के 12 मरीजों का ही उपचार हो पा रहा है। जिसके लिए एम्स परिसर में अलग से वार्ड स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान में कीमियोथेरेपी और डाइलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को इससे पूर्व कोविड स्क्रीनिंग करानी होगी। जिसके बाद कोविड नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही वह इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने बताए कि ऐसे मरीजों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसके लिए उन्हें एम्स की वेबसाइट पर ऑनलाइन अथवा संस्थान की टेलिमेडिसिन ओपीडी के लिए उपलब्ध कराए गए टेलीफोन नंबरों के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री नाराज, क्वारंटीन सेंटर में आत्महत्या करने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा जिलाधिकारियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आशा व आंगनबाङी कार्यकत्रियों की सहायता से सर्विलांस को बढाएं। यह सर्विलांस नियमित रूप से होना है। वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप लोगों में व्यवहारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। देहरादून के क्वारेंटाईन सेंटर में युवक के आत्महत्या पर संबंधित नोडल अधिकारी व डाक्टर को निलंबित किया जाए। कोविड-19 से संबंधित हर मृत्यु की ऑडिट कराई जाए।

कोविड-19 से संबंधित लक्षण पर अनिवार्य तौर पर सेम्पलिंग
सर्विलांस में जिन लोगों में कोविड-19 से संबंधित लक्षण दिखाई दें, उनकी हेल्थ टीम के माध्यम से अनिवार्य रूप से सेम्पलिंग कराई जाए। फ्रंटलाईन वर्कर्स को आवश्यकताअनुसार थर्मल स्कैनर, फेस शील्ड, पीपीई किट, मास्क आदि जरूर उपलब्ध कराए जाएं। इससे उनका कार्य के प्रति उत्साह बढ़ता है। ओपीडी में ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों को भी फेस शील्ड उपलब्ध हों।

लोगों में व्यवहारात्मक परिवर्तन लाने होंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप लोगों में व्यवहारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। इसके लिए आईईसी कार्यक्रम संचालित करें। फिजीकल डिस्टेंसिंग, मास्क का अनिवार्यता से उपयोग, नियमित रूप से हाथ धोना आदि बातों को आदत में लाना होगा। बाजारों में एक जगह पर भीड़ को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।

कोविड-19 से संबंधित हर डेथ का आडिट
मुख्यमंत्री ने देहरादून के क्वारेंटाईन सेंटर में युवक के आत्महत्या पर संबंधित नोडल अधिकारी व डाक्टर को निलंबित करते हुए जांच के निर्देश दिये। देहरादून में एक गर्भवती महिला की इलाज न मिलने पर मृत्यु की भी शीघ्र जांच की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाए। कन्टेनमेंट जोन में पूरी सख्ती रखी जाए। कान्टेक्ट ट्रेसिंग बहुत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से संबंधित हर डेथ का आडिट किया जाए। हर मृत्यु के कारण का विश्लेषण किया जाए। कोविड केयर सेंटर में सारी आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। क्वारेंटाईन सेंटर में भी सुविधाएं उपलब्ध हों। यह सुनिश्चित किया जाए कि होम आइसोलेशन में सारे प्रोटोकोल का पालन हो। डिस्चार्ज कर होम आइसोलेशन में भेजे जाने वालों की काउंसिल की जाए।

कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु पर अंतिम संस्कार सम्मानजनक तरीके से हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु पर उसके अंतिम संस्कार में विवाद न हो। लोगों को इस संबंध में जारी दिशानिर्देशों की जानकारी दी जाए। मृत्यु के बाद भी व्यक्ति का सम्मान बरकरार रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी व हरिद्वार में विद्युत शव-दाह गृह का कार्य शुरू करने के निर्देश देते हुए देहरादून में भी शव-दाह गृह की घोषणा की।

जिला स्तर पर अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि धन की कोई समस्या नहीं है। आवश्यकता अनुसार कार्मिकों की नियुक्ति के लिए जिलाधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं। इसी प्रकार आवश्यक चिकित्सा संबंधित उपकरणों के क्रय के लिए भी अधिकार दिए गए हैं।

होम क्वारेंटाईन में प्रोटोकॉल का पालन
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि हर केस को पूरी गम्भीरता से लिया जाना है। होम क्वारेंटाईन के लिए डिस्चार्ज करने से पूर्व पूरी तरह आश्वस्त हो जाएं कि घर में मानकों के अनुरूप सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध हों। सर्विलांस को बढाया जाना है।

पेशेंट केयर मेनेजमेन्ट से मृत्यु दर पर नियंत्रण
सचिव अमित नेगी ने कहा कि अगले 15-20 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमारी रिकवरी रेट और डबलिंग रेट में सुधार हो रहा है। एक्टिव केस लगभग स्थिरता की ओर जा रहे हैं। पेशेंट केयर मेनेजमेन्ट पर अधिक ध्यान दिया जाए। कोविड-19 के अलावा सामान्य चिकित्सा भी प्रभावित नहीं हो। लोगों को सामान्य इलाज मिलता रहे।

प्रदेश में आने वालों का ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी
सचिव शैलेश बगोली ने कहा कि बाहर से प्रदेश में आने वालों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इससे भविष्य में उन्हें ट्रेक करने में आसानी होगी।

वीडियो कांफ्रेंसिग में आयुक्त कुमाऊँ अरविंद सिंह ह्यांकी, आयुक्त गढवाल रविनाथ रमन, सचिव डाॅ पंकज पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी व जिलाधिकारी उपस्थित थे।

याद है या भूल गए देहरादून की साप्ताहिक बंदी का आदेश इस शनिवार और रविवार को भी है लागू

राज्य सरकार द्वारा देहरादून में कोरोना संक्रमण को देखते हुए नगर निगम क्षेत्र के बाजारों को अगले आदेश तक यानि की शनिवार और रविवार के लिए बंद करने का निर्णय लिया था। साप्ताहिक बंदी के तहत कल शनिवार और रविवार को देहरादून नगर निगम क्षेत्र बंद रहेगा। बतातें चले कि 5 जून को जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी हुए थे। देहरादून नगर निगम क्षेत्र के बाजार पिछली बार की तरह इस बार भी बंद रहेंगे। इसके अलावा बंदी के दौरान वाहनों का भी संचालन नहीं होगा। सिर्फ आवश्यक सेवा से जुड़ी दुकानें, मेडिकल स्टोर और वाहन के संचालन की इजाजत दी गई है।इस दौरान पेट्रोल पंप, फल-सब्जी, मेडिकल स्टोर, डेयरी, गैसएजेंसी, टिफिन सर्विस, लाइसेंस धारक मीट की दुकानें, औद्योगिक इकाइयां और अस्पतालों की ओपीडी खुली रहेंगी। वहीं स्वास्थ्य, चिकित्सा, पेयजल, नगर निगम और विद्युत विभाग के दफ्तर भी खुले रहेंगे।
वहीं, सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शराब के ठेके, बैंक, सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी एवं निजी कार्यालय बंद रहेंगे। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन और एंबुलेंस को छोड़ परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने 5 जून को यह आदेश जारी किए थे।

डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर नगर निगम क्षेत्र में संख्या ज्यादा है। जिसे देखते हुए दो दिन की साप्ताहिक बंदी का निर्णय लिया गया है। डीएम ने बताया कि इस दौरान आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले चिंता की बात है। लेकिन, प्रशासन अपनी ओर से इसे रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लोगों से भी अपील है कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। जनसहयोग और जागरूकता के जरिये ही हम इस पर अंकुश लगा सकते हैं।

त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड से किया वादा निभायाः बंशीधर भगत

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर समय राजनीति करती है। अच्छे निर्णयों को लेकर जहां कांग्रेस को सरकार की पीठ थपथपानी चाहिए। कांग्रेस वहां भी लोगों को गुमराह करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की भावनाओं में है। प्रदेश के सभी लोग चाहते हैं कि गैरसैंण को लेकर जो सपना हमारे राज्य आंदोलनकारियों ने देखा था, वो आज पूरा हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी गैरसैंण को लेकर सदैव सकारात्मक रही है, यही वजह है कि हमारे घोषणापत्र में गैरसैंण प्रमुखता से था। मुझे खुशी है कि त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने उत्तराखण्ड के लोगों से किया वादा निभाया है। मैं प्रदेश सरकार, राज्य के समस्त जनता और आंदोलनकारियों को बहुत बहुत बधाई देता हूँ।
बंशीधर भगत ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्म राजधानी ऐसे समय बनाया गया है, जब न तो चुनाव हैं, न किसी तरह की मजबूरी है। हमारी पार्टी के प्रयास होता है कि जनभावनाओं को सर्वोपरि रखा जाय, उसी दिशा में ये कदम बढ़ाया गया है।
उत्तराखण्ड के सृजन से लेकर अब तक भाजपा की सरकारों ने इस पर्वतीय प्रदेश के लिए दिल खोलकर, बिना नफा नुकसान की परवाह किये काम किया है। याद कीजिये उत्तराखण्ड का सृजन स्व. अटल जी ने ही किया था। यही नहीं प्रदेश में आज जो औद्योगिक ढांचा है उसके लिए अटल जी की सरकार ने ही विशेष पैकेज दिया था, हालांकि बदकिस्मती से कांग्रेस की सरकार ने इस विशेष पैकेज को खत्म कर दिया था। आज के दौर में भी मोदी जी का उत्तराखण्ड के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। ऑल वेदर रोड, पहाड़ पर रेल लाइन, केदारपुरी का कायाकल्प, ये सारे काम भाजपा की सरकारों द्वारा ही संभव थे। गैरसैंण को ग्रीष्म राजधानी घोषित करना भी इसी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 
मगर ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस की सरकारों ने 10 साल राज किया लेकिन गैरसैंण पर कोई ठोस फैसला नहीं ले पाए, और जब भाजपा की सरकार ने ये ऐतिहासिक कदम उठाया तो कांग्रेस जनता को गुमराह करने लगी है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस नेतृत्व से पूछता हूँ, आखिर जब सरकार में थे तब क्यों सोए रहे? तब आपने जनभावना का अपमान क्यों किया? सच तो ये है कि कांग्रेस चाहती है नहीं है कि गैरसैंण की तरफ कदम आगे बढ़ाए जायँ, हां इनके नेता ढोंग करने, धरना देने जरूर वहां पहुंच जाते हैं। और जब जनभावनाओं के सम्मान की बात आती है तो ये पीछे हट जाते हैं।

स्वरोजगारः पिरूल प्रोजेक्ट में प्रति क्विंटल 100 रूपए की धनराशि देगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा जिलाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सौलर व पिरूल परियोजनाओं की समीक्षा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में वास्तव में जरूरतमंदों और बेरोजगार को प्राथमिकता दी जाए। सभी विभागों में चल रही स्वरोजगार योजनाओं को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के साथ जोङा जाए। सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट की आवश्यक प्रक्रियाएं समय से पूरी हों। मुख्यमंत्री ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा जिलाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सोलर व पिरूल परियोजनाओं की समीक्षा की।

होप पोर्टल पर स्वरोजगार योजनाओं को अपलोड करे
मुख्यमंत्री ने कहा कि होप पोर्टल पर स्वरोजगार की सभी योजनाओं की सूचना अपलोड की जाए। एक प्लेटफार्म पर आने से लोगों को इन योजनाओं की जानकारी मिल पाएगी और इसका लाभ उठा सकेंगे। जन प्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए।

प्रत्येक जिले में दो-दो स्वरोजगार प्रेरक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है हर बेरोजगार साथी अपना रोजगार प्रारम्भ कर सके। लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए प्रत्येक जिले में एक महिला और एक पुरूष स्वरोजगार प्रेरक तैनात किए जाएंगे।

किसानो के उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपने उत्पादों की बिक्री के लिए निश्चिंत होना चाहिए। उनके उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था पर काम किया जाए। हॉर्टीकल्चर, पॉल्ट्री, मत्स्य, बकरी और भेड़पालन लाभदायक हो सकते हैं। इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोशिश की जाए कि अदरक, हल्दी आदि के बीज मांग के अनुरूप स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों। किसानों को उन्नतशील खेती का प्रशिक्षण बंद कमरों तक ही सीमित न रहे, यह प्रशिक्षण का लाभ खेतों तक पहुंचे। कृषि विज्ञान केंद्रों का अधिकाधिक उपयोग हो।

लाभकारी प्रोजेक्ट पर संबंधित विभाग गाइडलाइन तैयार करें
आवेदकों को प्रोजेक्ट बनाने के लिए सारी जानकारी दें। इसमें ऑफलाईन आवेदन की भी व्यवस्था हो। विभिन्न व्यवसायों के प्रोजेक्ट किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं, इसके लिये संबंधित विभाग गाइडलाइन तैयार करें। जिला रोजगार समितियां आवेदकों की काउंसिलिंग भी करें। डीएम हर जिले में कुछ मॉडल प्रोजेक्ट स्थापित करें। बैंकों से समन्वय स्थापित किया जाए और ऋण प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं का निस्तारण तुरंत किया जाए।

सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट में प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से लिया जाए। किसी भी एसडीएम के पास इनसे संबंधित फाईल एक सप्ताह से ज्यादा लम्बित नहीं रहनी चाहिए। जिलाधिकारी लगातार इसकी समीक्षा करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पिरूल प्रोजेक्ट में पिरूल एकत्रीकरण पर स्वयं सहायता समूहों को एक रूपया प्रति किलो वन विभाग और 1.5 रूपया (एक रूपया पचास पैसे) प्रति किलो विकासकर्ता द्वारा दिया जाता है। अब राज्य सरकार भी अतिरिक्त 1 रूपया प्रति किलो अर्थात 100 रूपए प्रति क्विंटल की राशि देगी।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ट्रेडिंग भी शामिल
अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में विनिर्माण व सेवा क्षेत्र के साथ ट्रेडिंग को भी लिया गया है। योजना की वेबसाइट पर मॉडल प्रोजेक्ट अपलोड किए गए हैं। प्रोजेक्टों की डीपीआर के स्टैंडर्ड फार्मेट भी उपलब्ध कराए गए हैं। वेबसाइट लांच करने के कुछ ही दिनों में काफी लोगों ने आवेदन किया है।

सोलर और पिरूल प्रोजेक्ट
सचिव राधिका झा ने प्रदेश में सोलर व पिरूल प्रोजेक्टों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सोलर में 283 परियोजनाएं आवंटित की गई हैं जिसमें 203 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा और 800 करोङ रूपए का निवेश होगा। बहुत सी परियोजनाओं का यूपीसीएल का करार हो चुका है। पिरूल के भी 38 प्रोजेक्ट आवंटित किए जा चुके हैं। इनका भी यूपीसीएल के साथ करार किया जा चुका है।
वीडियो कांफ्रेंसिग में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव एल फैनई, अमित नेगी, आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल सहित अन्य अधिकारी व जिलाधिकारी उपस्थित थे।

त्रिवेन्द्र का दम, राज्य के लिये लिए है 11 बड़े फैसले, जो बदलेंगे राज्य की दशा और दिशा

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने बताया कि त्रिवेन्द्र सरकार ने तीन वर्षों में कई ऐसे फैसले लिए है जो जनता के हित के साथ ही जनभावनाओं के लिए बेहद जरुरी थे। इनमें 11 फैसले तो सीधे जनता से जुड़े हुए है। जिनका लाभ बड़ी संख्या में राज्य के लोगों को मिल रहा है या आने वाले समय में मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते है। रोजगार और स्वास्थ्य के विषय में मुख्यमंत्री ने बड़े और दूरगामी फैसले लिए है।
मीडिया सलाहकार इन 11 बड़े फैसलों की दे रहे है जानकारी-

’11 बड़े फैसले’

’1. जनभावनाओं की राजधानी’: गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को राज्य जी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करके जनभावनाओं का ख्याल रखा।

’2. चारधाम देवस्थानम बोर्ड गठित’: चार धाम यात्रा के सफल व बेहतर प्रबंधन के लिए चार धाम देवस्थानम बर्ड का गठन किया गया। इससे बद्री केदार, गंगोत्री यमुनोत्री के अलावा 51 बड़े मंदिरों के रखरखाव व प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार को मिली।

’3 अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’: आयुष्मान भारत की तर्ज पर प्रदेश के समस्त परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक का निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने हेतु अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना लागू की गई। अपने राज्य के समस्त परिवारों को सुरक्षा कवच देने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य बना। अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग मुफ्त उपचार करवा चुके हैं।

’4. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार’ : साल 2017 में प्रदेश में 1031 डॉक्टर थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 2600 के करीब हो गई है। 400 डॉक्टरों को केवल कोरोना काल मे ही नियुक्ति दी गई है। हर जिला अस्पताल में प्ब्न् की सुविधा है। दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को लाभ देने के लिए 35 अस्पतालोंध्केन्द्रों में टेली मेडिसिन सुविधा शुरू की गई है।

’5. ग्रोथ सेंटर’: ग्रामीण संसाधनों से लोकल इकोनॉमी जुटाने का तथा स्वरोजगार से जोड़ने के लिए करीब 100 ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

’6. सभी 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ : पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 13 जिलों में 13 नए थीम बेस्ड टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। टिहरी झील, गूलरभोज जलाशय, ट्यूलिप गार्डन प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।

’7. होम स्टे’: ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए राज्य में 5000 होमस्टे बनाने का लक्ष्य है, जिसमे से अभी तक 2100 होमस्टे बनाये जा चुके हैं।

’8. इन्वेस्टर्स समिट’ : राज्य में उद्योगों और निवेश को विस्तार देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सुविधा लागू है। 2018 में राज्य में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ जिसमें सवा लाख करोड़ के डवन् साइन हुए। इनमें से भी अब तक 21 हजार करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट ग्राउंडेड हो चुके हैं।

’9. फिल्म पॉलिसी’: उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए फिल्म नीति लाई गई। इससे फिल्मकारों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। पिछले 3 साल में राज्य में 250 से अधिक फिल्मों व सीरियल्स की शूटिंग हो चुकी है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।

’10. कोरोना से लड़ाई’ : उत्तराखण्ड सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं। लॉकडाउन पीरियड में कोई भूखा नहीं रहे इसका ख्याल रखा, प्रदेश में रह रहे अन्य प्रदेशों के मजदूरों को कभी भूखा नहीं सोने दिया, उनको उनके घर तक पहुंचाने के पर्याप्त इंतजाम किए। अन्य राज्यों से प्रवासी उत्तराखण्डियों को लाने के लिए भी सभी व्यवस्थायें की।

कोरोना काल मे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया। आज राज्य में कोरोना मरीजों की देखभाल व इलाज के लिए 5 डेडिकेटेड कोविड अस्पताल, 10 डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर व 94 कोविड केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं।

राज्य में आईसीयू की संख्या को 62 से बढ़ाकर 251 किया गया है। वेंटीलेटर्स कि संख्या को 37 से बढ़ाकर 113 किया गया है। बाइपैप मशीनों की संख्या 4 से बढ़कर 33 की गई है।

’11. मुख्यमन्त्री स्वरोजगार योजना’ : कोरोना के कारण घर लौटे प्रवासियों को घर मे काम देना हमारी प्राथमिकता है। हम राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना चाहते हैं इसलिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। इसके तहत अपना कोई भी काम शुरू करने के लिए ऋण लेने पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

सरकार ने केवल नये पदों के सृजन पर रोक लगाई हैः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि प्रदेश में नई भर्तियों पर रोक नहीं लगायी गई है। केवल नये पदों के सृजन पर रोक लगाई गई है। पहले से सृजित पदों पर भर्ती पर रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में जारी शासनादेश में भी स्पष्ट किया गया है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी के पदों के साथ-साथ कतिपय विशिष्ट-तकनीकी कार्य हेतु सृजित वाहन चालक, माली, वायरमैन, इलेक्ट्रीशयन, प्लम्बर, मिस्त्री, लिफ्टमैन, ए.सी.-मैकेनिक एवं अन्य इसी प्रकार से रिक्त होने वाले पदों पर समस्त सेवायें अधिप्राप्ति नियमावली, 2017 के अध्याय-5 बाह्य स्त्रोत से सेवायें कराये जाने के अन्तर्गत नियम-61 से 64 तक स्थापित व्यवस्था के अनुरूप संविदा-आउटसोर्सिंग के आधार पर सम्पादित करवाया जानी है। चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नई भर्ती पर सातवें वेतन आयोग द्वारा पूर्व में ही रोक लगाई हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। जिसके माध्यम से प्रदेश के युवा अपना काम शुरू कर सकते हैं। इसमें ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसमें ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है। अपने गांवों को वापस लौटे लोगों की आजीविका के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग स्वरोजगार के लिए करें, सरकार हर कदम पर आप सभी के साथ है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं से स्वरोजगार की मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा के राज्य में बहुत से युवाओं ने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय प्रारम्भ किया बल्कि बहुत से अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान किया। हम सब मिलकर सकारात्मक माहौल बनायें और अपनी देवभूमि में जन भागीदारी से एक नई स्फूर्ति का संचार करें।

खुशखबरीः उत्तराखण्ड में मैट्रो रेल की संभावनाओं को लेकर मंथन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज सचिवालय में यूनिफाईड मैट्रो पॉलिटन ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी (यू.एम.टी.ए) की बैठक हुई। बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल परियोजना के कॉम्प्रीहेंसिव मॉबिलिटी प्लान (सी.एम.पी) को मंजूरी दी गई। देहरादून शहर में दिल्ली मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के सहयोग से रोप-वे प्रणाली की डीपीआर तैयार की जा रही है। हरिद्वार-ऋषिकेश एवं नेपाली फार्म-विधानसभा कोरिडोर में मैट्रो लाईट के निर्माण के साथ ही हरिद्वार शहर में पी.आर.टी के निर्माण हेतु अनुमोदन प्राप्त किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में यू.एम.टी.ए का गठन किया गया है। इसमें आवास मंत्री, उत्तराखण्ड उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव सदस्य सचिव, सचिव आवास, वित्त, परिवहन, नियोजन, राजस्व एवं शहरी विकास सदस्य हैं।
बैठक में एमडी उत्तराखण्ड मैट्रो रेल जितेन्द्र त्यागी ने देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश मैट्रोलाईट सिस्टम पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। इस अवसर पर उन्होंने हरिद्वार से ऋषिकेश, देहरादून से नेपाली फार्म तक मैट्रो लाईट के लिए रूट प्लान स्टडी के बारे में जानकारी दी। देहरादून व हरिद्वार शहर के लिए भी बनाई गई योजना के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर आवास मंत्री मदन कौशिक, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव नितेश झा एवं सबंधित अधिकारी उपस्थित थे।