उत्तराखंड में 837 संक्रमित मरीज ठीक हुए

राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार इजाफा हो रहा है। आज प्रदेश में 75 और कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। अपर सचिव स्वास्थ्य डॉ. युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। अब प्रदेश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1637 हो गई है। जबकि 837 संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं। अब एक्टिव केस की संख्या 778 हो गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, टिहरी जनपद में 30, देहरादून में 16, चमोली में तीन, हरिद्वार में 15, पौड़ी में एक, रुद्रप्रयाग में छह, ऊधमसिंह नगर में तीन केस सामने आए हैं। वहीं, एक प्राईवेट लैब से आई जांच रिपोर्ट में भी संक्रमित केस सामने आया है।
जबकि बीते दस दिनों में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या सक्रिय मामलों से अधिक हो गई है। प्रदेश की रिकवरी दर 51.79 प्रतिशत हो गई है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि केंद्र की ओर से कोरोना संक्रमित मरीजों को डिस्चॉर्ज करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें संक्रमित मरीज को 10 दिन निगरानी में रखा जाएगा। सात दिन के बाद यदि मरीज में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं तो उसे अस्पताल से घर भेजा जाएगा। प्रदेश में रिकवरी दर 51 प्रतिशत पहुंच गई है।   

डॉक्टर समेत तीन में कोरोना की पुष्टि
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल की एक और महिला डॉक्टर समेत तीन स्वास्थ्य कर्मियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने इसकी पुष्टि की है। जूनियर रेजिडेंट महिला डॉक्टर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज और देखभाल कर रही थीं। जबकि स्वास्थ्य कर्मी भी लगातार रोटेशन पर कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे हैं।  दून अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना संक्रमण की जद में आने से स्वास्थ्य विभाग के साथ ही शासन प्रशासन की भी चिंता बढ़ी हुई है।

सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार अपनाने के लिए मीडिया सलाहकार दे रहे महत्वपूर्ण जानकारी

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य के लोगों को रोजगारपरक जानकारी दे रहे है। साथ ही सरकार की वह कौन सी नीतियां है जो उनके लिए स्वरोजगार में सहायक बन सकती है, इसकी भी सिलसिलेवार जानकारी दे रहे है। यह जानकारी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो अपना स्वरोजगार करने के इच्छुक है। युवा भी बड़ी संख्या में सोशल मीडिया में उन्हें फाॅलो कर रहे है। साथ कई सवालों के माध्यम से स्वरोजगार की दिशा में कदम भी बढ़ा रहे है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट की कलम से ….

मेरा प्रयास रहता है कि मैं हर उत्तराखंडी को ये भरोसा दिला सकूं कि हम राज्य में रहकर भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
90 के दशक में भीमताल में फूलों की खेती ने लोगों को नई दिशा दिखाई थी, फूलों से अच्छा खासा रोजगार लोगों को मिला। भीमताल की महाशीर के बारे में देश-दुनिया मे कौन नहीं जानता।
मैंने बचपन मे अपने पिता से सुना था, अंग्रेजो के समय में लंदन में आयोजित होने वाली टी एक्जीबिशन में बेरीनाग की चाय, टी क्वीन का खिताब जीतती रही।
आज जब बड़े पैमाने पर प्रवासी भाई बहन घर लौटे हैं, तो एक नया विश्वास पैदा हो रहा है। जैसा कि हमारे मुख्यमंत्री जी का कहना है, आवा अपणु गौं का वास्ता कुछ करा। तो ये सही समय भी है, और सरकार ने मौका भी दिया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है जिसमें स्वरोजगार के लिए भारी सब्सिडी मिल रही है। इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के जरिये भी स्वरोजगार के लिए ऋण मिलता है। नाबार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत भी स्वरोजगार शुरू करने के लिए उचित दरों व सब्सिडी के साथ लोन की सुविधा है।

हमारा उत्तराखण्ड विविधताओं से भरा है। उत्तराखंड में प्रकृति ने सभी ऋतुयें और सभी तरह की भौगोलिक परिस्थिति प्रदान की है। इस लिहाज से वोकल फॉर लोकल से आत्मनिर्भर बनने के लिए यह उचित समय भी है और मौका भी है।
प्रदेश के हर जिले और हर घाटी की अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और जलवायु है। पर्वतीय क्षेत्रों में साग- भाजी का उत्पादन है, तो कहीं फलों का, कहीं फूलों का और कहीं अनाज का। उत्तरकाशी जिला जहां फल और सब्जी पट्टी के लिए विख्यात है, वहां की राजमा अपने विशिष्ट स्वाद के लिए पहचानी जाती है। उसी तरह हमारे पर्वतीय जिलों में नींबू, नारंगी, माल्टा, खुमानी, आलू बुखारा, नाशपाती, काफल आदि का भरपूर उत्पादन होता है। गढ़वाल कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में मंडवा, झंगोरा, जौ, गहत, भट्ट, मसूर, तोर और रामदाना (स्थानीय भाषा मे चुआ) का भरपूर उत्पादन होता है।
हम चाहें तो अपने बुरांस के जूस को प्रमोट करके कोला पेप्सी के टक्कर का बना सकते हैं। हम चाहें तो काफल को चेरी के जैसी मार्केट दे सकते हैं। हमारे सीमांत जिलों में बड़ी मात्रा में भेड़-बकरी पालन होता है। उनकी ऊन से पीढ़ियों से लोग कालीन निर्माण में प्रयोग होती है।

बागेश्वर को तो ताम्र नगरी ही कहा जाता है। जहां तांबे से बर्तन, वाद्य यंत्र आदि अनेक उपयोगी वस्तुएं बनती हैं, चंपावत में लौह से बनी वस्तुओं का प्रचलन है। रिंगाल, कंडाली, भीमल, भांग के रेशे पहाड़ में हर जगह व्याप्त हैं जिनसे अच्छी खासी इंडस्ट्री खड़ी हो सकती है। की।
रानीखेत का चैबटिया गार्डन सेव के लिए और सेब की प्रजातियों पर शोध के लिए प्रसिद्ध है। रानीखेत के निकट की गगास घाटी साग सब्जी के क्षेत्र में सबके लिए प्रेरणा है।
हमारा गैरसैण और नौटी का क्षेत्र तथा कुमाऊँ में चैकोड़ी में शानदार चाय के बागान है।
हमारे तराई के जिले गेहूं, चावल, गन्ना सब्जियां भरपूर मात्रा में उत्पन्न करते हैं।
हमारे उच्च हिमालयी क्षेत्र में जड़ी बूटी उत्पादन की प्रबल सम्भावनाएं हैं। कुटकी, अतीश, जटामाशी, हरड़, बहेड़ा, आंवला का उत्पादन फार्मा कंपनियों की जरूरत है।
इस तरह हमारा हर गांव, हर क्षेत्र, हर जिला एक विशेषता लिए है। अब जरूरत है, हमें उन विशेषताओं को अर्थव्यव्स्था से जोड़ने की, स्वरोजगार अपनाने की।
मुझे विश्वास है, हमारा उत्तराखण्ड स्वरोजगार के रास्ते आत्मनिर्भर जरूर बनेगा।

प्रधानमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम में चल रहे कार्यों का अवलोकन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम में चल रहे कार्यों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम में चल रहे विभिन्न कार्यों का अवलोकन भी किया। उन्होंने केदारनाथ मन्दिर परिसर, आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि, सरस्वती घाट एवं आस्था पथ, भैरव मन्दिर के रास्ते पर बने पुल, केदारनाथ में बन रही गुफाओं, मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल, मंदाकिनी एवं सरस्वती के संगम पर बन रहे घाटों का अवलोकन किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक छोटे-छोटे पेच को श्री केदारनाथ की ऐतिहासिकता से जोड़ा जाय, ताकि श्रद्धालुओं को केदारनाथ के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के बारे में भी रोचक जानकारियां मिल सके। इस क्षेत्र में आध्यात्म से संबंधित भी अनेक कार्य किये जा सकते हैं। इस ओर ध्यान दिया जाय। इससे श्रद्धालुओं को केदारनाथ के दर्शन के साथ ही यहां से जुड़ी धार्मिक एवं पारंपरिक महत्व के बारे में भी जानकारी मिलेगी। केदारनाथ के आस-पास जो गुफाएं बनाई जा रही हैं, उनका सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाए ताकि इनका स्वरूप आकर्षक हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी केदारनाथ में निर्माण कार्य तेजी से किये जा सकते हैं। शीर्ष प्राथमिकता के कार्य चिन्हित कर पहले उन्हे पूर्ण कर लिया जाय। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ में विभिन्न कार्यों के लिए राज्य सरकार को केन्द्र से हर सम्भव मदद दी जायेगी। भगवान बदरीनाथ धाम के लिए भी डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। अगले 100 साल तक की परिकल्पना के हिसाब से डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने केदारनाथ धाम में यात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी ली।

वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि केदारनाथ में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए राज्य को लगभग 200 करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के लिए सीमित संख्या में भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ जी के दर्शन के लिए अनुमति दी गई है। मास्क का उपयोग, सामाजिक दूरी के पालन करते हुए एक दिन में अधिकतम 800 लोग दर्शन कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने केदारनाथ धाम में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि के पुनर्निर्माण का कार्य 31 दिसम्बर 2020 तक पूरा हो जायेगा। सरस्वती घाट का कार्य पूर्णता की ओर है, यह कार्य 30 जून जक पूर्ण हो जायेगा। भैरव मन्दिर के रास्ते पर पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, यह कार्य निर्धारित समयावधि से पहले ही पूरा किया गया है। तीर्थ पुरोहितों को रहने के लिए 05 ब्लॉको में घर बनाऐ जा रहे हैं, जिसमें से 02 ब्लाको में बनाये जा चुके हैं, शेष ब्लाको में सितम्बर तक कार्य पूरा हो जायेगा। केदारनाथ में आध्यात्म की दृष्टि से तीन गुफाएं बनाई जा रही हैं, जिनका निर्माण कार्य सितम्बर 2020 तक पूर्ण हो जायेगा। मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल का कार्य 31 मार्च 2021 तक पूर्ण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में ओपन म्यूजियम बनाने की योजना भी बनाई जा रही है।

नौ पर्वतीय जिलों में अल्मोड़ा की स्थिति सबसे बेहतर

पर्वतीय जिलों में स्थिति अब नियंत्रण में आती दिख रही है। लॉकडाउन-3 में मिली छूट के बाद सैकड़ों की संख्या में प्रवासी उत्तराखंड लौटे, जिसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों में एकाएक कोरोना संक्रमण के मरीज मिलने शुरु हुए। लेकिन सुकुन की बात है कि अब उसी रफ्तार से लोग रिकवर भी होने लगे हैं।
नौ पर्वतीय जिलों की बात करें तो अल्मोड़ा सबसे बेहतर स्थिति में है। उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, चंपावत और बागेश्वर में भी पचास फीसद से अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि पिथौरागढ़, चमोली और पौड़ी गढ़वाल में भी स्थिति में सुधार दिख रहा है। रुद्रप्रयाग का रिकवरी रेट जरूर कम है। इधर, प्रदेश की राजधानी दून में रिकवरी रेट अभी भी बहुत कम है। यहां पर मरीजों के ठीक होने की रफ्तार 30 फीसद है।
वहीं, प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमित जिन चैदह मरीजों की मौत हुई है, उनमें नौ मरीज देहरादून जनपद की सूची में शामिल हैं। रिकवरी रेट में नैनीताल और ऊधमसिंहनगर दून से कई बेहतर स्थिति में हैं। जबकि हरिद्वार भी दून के आसपास ही खड़ा दिख रहा है।
उत्तराखंड में कोरोना के 127 नए मामले, टिहरी में सबसे ज्यादा 72 केस
वहीं, अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालक केन्द्र की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। शासन द्वारा साफ किया गया है कि कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार की दवा बिना चिकित्सक के पर्चे के नहीं बेचेगा। अगर बेचेगा तो उसे मरीज का डाटा और दवा का ब्योरा प्रशासन को उपलब्ध कराना होगा। मरीज का नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल का विवरण अलग एक रजिस्टर में अंकित किया जाएगा। पर अभी भी बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
वहीं, प्रदेशभर के सभी निजी अस्पतालों की जानकारी भी शासन-प्रशासन को नहीं मिल पा रही है। उनका रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पताल रोजाना कितने मरीज देख रहे हैं, क्या दवाएं दे रहे हैं इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
चार जिलें सबसे ज्यादा प्रभावित
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि एक समय तेजी से पहाड़ चढ़ रहे कोरोना के मामले फिलहाल प्रदेश के चार जिलों में ही सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। ये जिले हैं देहरादून, नैनीताल, टिहरी और हरिद्वार। कोरोना के 70.29 फीसद मरीज इन्हीं चार जिलों में हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा 26.59 फीसद मरीज देहरादून में हैं। इसके बाद मरीजों के मामले में नैनीताल की हिस्सेदारी 22.98 तो टिहरी की 10.53 व हरिद्वार की 10.18 फीसद है।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार के साथ प्रदेश में संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 14 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें भी सबसे ज्यादा नौ मौतें देहरादून जिले में हुई हैं।

देना होगा बाजार मूल्य पर किराया, राज्य सरकार का अधिनियम अंसवैधानिक

हाईकोर्ट नैनीताल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने वाले अधिनियम-2019 को अंसवैधानिक घोषित करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब बाजार भाव के हिसाब से किराया चुकाना होगा।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय दिया। अधिवक्ता कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 के उल्लंघन में पाया है। अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार मूल्य से किराए का भुगतान करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में उन्हें दी गई अन्य सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने और उसकी वसूली के लिए राज्य उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद मंगलवार को निर्णय सुनाया गया है।
मामले के अनुसार, देहरादून की रुलक संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने से छूट दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, किराया करीब पौने तीन करोड़ है, जिसकी वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले वर्ष छह माह में करने के आदेश दिए थे।

क्या है अधिनियम
रूलक सामाजिक संस्था के चेयरपर्सन अवधेश कौशल की ओर से हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के खिलाफ पूर्व सीएम व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा।
इसमें भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि क्यों न उनकी संपत्ति की जांच करा ली जाए। हाईकोर्ट में जब सरकार तथ्यों और तर्कों के आधार पर कुछ न कर पाई तो भगत सिंह कोश्यारी के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने और सुविधाएं जारी रखने के लिए अध्यादेश ले आए। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि कैबिनेट में गुपचुप निर्णय करके अध्यादेश को मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया था। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में सरकार ने राज्य का एक्ट नहीं बनाया।
सरकार ने उत्तर प्रदेश का एक्ट लागू करना स्वीकार किया लेकिन उसे संशोधित नहीं किया। पिछले वर्ष कोर्ट में दिए गए हलफनामे में लागू एक्ट में लखनऊ का उल्लेख कर दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अधिनियम में साफ तौर पर अंकित था कि सुविधा सिर्फ लखनऊ में दी जा सकती है। इसलिए राज्य सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कोई अधिनियम प्रभावी नहीं है।
वहीं, अधिवक्ता ने बताया कि 1981 में यूपी में बने अधिनियम में साफ उल्लेख था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों को पद पर बने रहने तक सरकारी आवास मुफ्त मिलेगा। पद से हटने के 15 दिन में उन्हें आवास खाली करना होगा। 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियम में बदलाव कर कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।
एक्ट में यह भी उल्लेख था कि आवास सिर्फ लखनऊ में ही दिया जाएगा, बाहर नहीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद यह नियम यहां निष्प्रभावी हो गया। राज्य सरकार ने यूपी के एक्ट को उत्तराखंड के लिए मोडिफाई नहीं किया लेकिन कोर्ट में बताया कि सरकार ने 2004 में लोकसेवकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर आवास देने के रूल्स बनाए थे। इसमें कहा गया कि ट्रांसफर होने के बाद अधिकतम तीन माह तक लोकसेवक आवंटित आवास में रह सकते हैं, फिर हर हाल में खाली करना होगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि रूल्स सरकारी लोक सेवकों के लिए है, यह पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं हो सकता।

आज से मंदिर, होटल, रेस्टोरेंट, शाॅपिंग माॅल खोलने की मिली अनुमति

आज से धार्मिक गतिविधियां सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक शुरू होंगी। मंदिरों के बोर्ड, ट्रस्ट या प्रबंधन समितियां सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करवाएंगी। होटल और होम स्टे को खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। इसके साथ रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल भी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खुल सकेंगे। वहीं, देहरादून नगर निगम क्षेत्र और कंटोनमेंट जोन में किसी भी गतिविधि को शुरू करने की अनुमति शासन ने नहीं दी है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग मॉल और धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है। जिलाधिकारी अपने अपने जिलों में इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आठ जून से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग माल और धार्मिक गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है। दिशानिर्देशों के तहत सभी जिले व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही करेंगे।

होटल को खोलने की दी अनुमति
होटल, होम स्टे आदि सेवाओं को खोलने की अनुमति दे दी है। होटल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश हैं कि कोविड-19 के प्रति संवेदनशील 75 शहरों में से आने वालों की बुकिंग नहीं की जाएगी। देश के अन्य शहरों से आने वाले अतिथियों के लिए सात दिन तक के लिए बुकिंग होगी। होटल को जिला प्रशासन को प्रत्येक गेस्ट की सूचना देनी होगी। होटल प्रबंधन को प्रत्येक व्यक्ति से लिखकर लेना होगा कि वे पर्यटन स्थल या सार्वजनिक स्थल में नहीं जाएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग अलग से एसओपी जारी करेगा।

रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल मालिकों को राहत
सरकार ने रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल के मालिकों को राहत देते हुए सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दे दी है। शापिंग मॉल मालिकों को लिखित में देना होगा कि एयर कंडिशनर चलाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के मानकों का पालन करेंगे। केवल पचास प्रतिशत दुकानें एक समय में खोली जाएंगी। जिला प्रशासन तय करेगा कि अधिकतम कितने लोग मॉल में एक समय में जा सकेंगे। इसके लिए अलग से एसओपी जारी की जाएगी। रेस्टोरेंट मालिकों को सामाजिक दूरी और सर्विस के दौरान टेबल की दूरी को लेकर भी व्यवस्था बनानी होगी।

धार्मिक स्थल खुलेंगे
धार्मिक स्थल सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही खुलेंगे। जिला प्रशासन मंदिरों के ट्रस्ट, बोर्ड और प्रबंधन समितियों से सलाह करने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तय करेगा कि एस समय में कितने लोग मंदिर में आ सकते हैं।

देवस्थानम बोर्ड तय करेगा चारधाम यात्रा
प्रदेश सरकार ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड को चार धाम यात्रा शुरू करने का जिम्मा सौंपा है। जारी गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड प्रबंधन यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और अन्य हक हकूकधारियों से चर्चा करेगा। आम सहमति बनने के बाद यात्रा शुरू की जाएगी। कितने श्रद्धालु यात्रा में आ सकते हैं, इसके लिए प्रोटोकॉल तय किया जाएगा। गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट निर्देश है कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा को मानकों का पूरी तरह से अनुपालन होगा। यात्रा शुरू करने से पहले उसका पूरी तरह से प्रचार किया जाएगा। इसके साथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए तय प्रावधानों के बारे भी जानकारी दी जाएगी। उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर से सवारी के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सिविल एविएशन अलग से एसओपी जारी करेगा।

अन्य राज्यों के श्रद्धालु नहीं आयेंगे
प्रदेश सरकार के स्तर से जारी गाइडलाइन से स्पष्ट है कि चार धाम यात्रा और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए केवल राज्य के नागरिकों को अनुमति होगी। प्रदेश के बाहर के लोगों को यात्रा और धार्मिक स्थलों में दर्शन की अनुमति नहीं होगी।

कोरोना संक्रमण के लगातार मिल रहे केस, प्रदेश में 824 एक्टिव केस

आज दोपहर तक कोरोना संक्रमण के 50 नए मामले सामने आए हैं। अब प्रदेश में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1355 हो गया है। वहीं, जांच रिपोर्ट में 1118 सैंपल निगेटिव मिले हैं। जबकि 498 संक्रमित मरीजों को इलाज के बाद घर भेजा जा चुका है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि अभी भी 824 एक्टिव केस हैं।
स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार, आज देहरादून में 24, हरिद्वार में 32, पौड़ी में दो, टिहरी में आठ संक्रमित मामले में आए हैं। वहीं, देहरादून में शनिवार देर रात और रविवार सुबह दो कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई है। अब तक प्रदेश में 13 संक्रमित मरीजों की जान जा चुकी है।
वहीं, कोरोना संक्रमण की जांच के लिए लैब की सुविधा बढ़ने के बाद भी सैंपलिंग की रफ्तार घटने का अंदेशा जताया जा रहा है। तीन दिनों से प्रदेश में प्रतिदिन 500 से 600 सैंपल ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इससे पहले एक दिन में एक हजार से अधिक सैंपल लिए जा रहे थे।
जबकि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार ने भी सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आईआईपी देहरादून में लैब शुरू होने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने चंडीगढ़ निजी लैब के साथ सैंपल टेस्टिंग के लिए एमओयू किया है। अभी प्रदेश में पांच सरकारी लैब, एक निजी पैथोलॉजी लैब के साथ चंडीगढ़ की लैब सैंपल जांच अनुबंध हुआ है।
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है प्रदेश में प्रतिदिन लिए जा रहे सैंपलों का आकलन करने पर जांच में ठहराव सा आ गया है। देखा जा रहा है कि पिछले तीन दिनों में जांच के लिए भेजने जाने वाले सैंपलों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रतिदिन 1200 से 1500 सैंपल जांच के लक्ष्य पर काम होना चाहिए।

आपदा संवेदनशील 225 गांवों का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूर्ण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि राज्य के आपदा संवेदनशील गांवों से परिवारों के पुनर्वास का काम पूरी गम्भीरता से किया जा रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां 2 गांवों के 11 परिवारों का पुनर्वास किया गया था, वहीं वर्तमान सरकार के तीन वर्ष के अभी तक के कार्यकाल में 25 गांवों के 688 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। वर्ष 2017 तक 2 गांवों के 11 परिवार, 2017-18 में 12 गांवों के 177 परिवार, 2018-19 में 6 गांवों के 151 परिवार और 2019-20 में 7 गांवों के 360 परिवारों का पुनर्वास किया गया है।
वर्ष 2017 तक राज्य सरकार द्वारा आपदा संवेदनशील गांवों से पुनर्वास के लिए 37 लाख 50 हजार रूपये आवंटित किए गए जबकि 2017 से 2020 तक तीन वर्षो में 29 करोड़ 12 लाख 53 हजार रूपये आवंटित किए गए। आपदा प्रभावित 395 गांवों को आपदा संवेदनशील ग्रामों के रूप में चिन्हित किया गया था, इनमें से 225 गांवों का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण करा दिया गया है।

’उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट’
विश्व बैंक की सहायता से उत्तराखण्ड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के अंतर्गत 84 पुलों का निर्माण कार्य और 15 मार्ग सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 5 रिवर बैंक प्रोटेक्शन कार्य, यूएसडीएमए का भवन और जौलीग्रांट में एसडीआरएफ प्रशिक्षण सुविधा का निर्माण कार्य भी परियोजना के तहत किया जाना है। 840 करोङ रूपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए विश्व बैंक द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। 29 अप्रैल 2019 से प्रभावी परियोजना की समाप्ति तिथि 31 मार्च 2022 निर्धारित है। विश्व बैंक के साथ प्रोजेक्ट का फंडिंग पैटर्न 80-20 प्रतिशत है। अभी तक परियोजना की 22 प्रतिशत भौतिक प्रगति हो चुकी है।

अधिसूचना जारी, क्वारंटीन अवधि में रहने पर कर्मचारी को देना होगा वेतन

राज्य में कोरोना संदिग्ध कर्मचारियों को क्वारंटीन अवधि के दौरान 28 दिन का भुगतान युक्त अवकाश देना होगा। इस संबंध में राज्य सरकार के श्रम विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। श्रम विभाग के सचिव हरबंस सिंह चुघ ने अधिसूचना जारी होने की पुष्टि की। बता दें कि पिछली कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
यह आदेश प्रदेश में संचालित कारखानों, सभी दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व उन व्यापारिक केंद्रों में जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। महामारी अधिनियम 1897 की शक्तियों के तहत यह प्रावधान किया गया है। इसके तहत यदि कोई कर्मचारी या कर्मकार कोविड-19 महामारी में संदिग्ध होता है और उसे क्वारंटीन किया गया हो, उसका संस्थान या नियोजक 28 दिन का अवकाश मंजूर करेंगे और उसे इस अवधि का पूरा भुगतान किया जाएगा। लेकिन इस तरह के अवकाश की मंजूरी के लिए कर्मचारी को स्वस्थ होने के बाद अपने नियोजक या प्राधिकृत व्यक्ति को चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा।
वहीं, सभी कारखानों, दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, अधिष्ठानों के सूचना पट्ट और मुख्य द्वार पर कोविड-19 महामारी की रोकथाम को लेकर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बताए गए सुरक्षा उपायों को प्रदर्शित करना होगा।

नियमों का उल्लंघन करने को लेकर दायर याचिका में हाईकोर्ट ने महाराज को दिया नोटिस

कोरोना संक्रमण के दायरे में आए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को आज हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। उन्हें तीन हफ्ते के अंदर जवाब भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज द्वारा कोरोना वायरस से बचने के लिए जारी केंद्र सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन करने के मामले में एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। इस पर आज सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ ही मंत्री को भी नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट ने पूछा है कि जब आम लोगों पर क्वारंटीन के नियमों का उल्लंघन करने पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है तो संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के खिलाफ कार्यवाही अमल में क्यों नहीं लाई जा रही है। इसे लेकर हाईकोर्ट कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार व मंत्री को तीन हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में मंत्री सतपाल महाराज व उनकी पत्नी सहित उनके परिवार के पांच सदस्य, उनके कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित मिले थे। संक्रमित पाए जाने से पहले महाराज कैबिनेट की बैठक में भी गए थे। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत सभी कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और शासन के अन्य उच्च अधिकारी मौजूद थे। जिसके बाद एहतियात बरतते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सुबोध उनियाल और हरक सिंह रावत ने सेल्फ क्वारंटीन में जाने का निर्णय लिया है। हालांकि कल देर रात को मुख्यमंत्री की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है।