मुख्यमंत्री ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रूपये प्रति क्विंटल करने की स्वीकृति दी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में रबी-खरीद सत्र 2020-21 की समीक्षा की। उन्होंने गेहूँ क्रय का समर्थन मूल्य 1925 रूपये प्रति क्विंटल किये जाने की स्वीकृति प्रदान करते हुए कहा कि किसानों को अधिकतम मूल्य एवं बेहतर सुविधायें उपलब्ध हो, यह हमारा प्रयास होना चाहिए। गत वर्ष प्रदेश में गेहूँ का समर्थन मूल्य 20 रूपए बोनस के साथ कुल 1860 रूपये प्रति क्विंटल था जिसमें इस वर्ष 65 रूपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। गेहूं किसानों को समय पर भुगतान हेतु उन्होंने 150 करोड़ की धनराशि खाद्य विभाग को दिये जाने की भी स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री ने समय पर गेहूं क्रय केन्द्रों की स्थापना, सीमान्त क्षेत्रों के साथ ही कुम्भ के दृष्टिगत हरिद्वार में भण्डारण क्षमता बढ़ाये जाने की व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान सभी सम्बन्धित विभागों से इस सम्बन्ध में प्रभावी कार्य योजना बनाकर आपसी समन्वय से कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान के साथ ही क्रय केन्द्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करने के भी सम्बन्धित विभागों को निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने ऑर्गेनिक गेहूँ के उत्पादन एवं इस क्षेत्र में कार्य कर रहे किसानों को भी आवश्यक सहयोग दिये जाने की बात कही। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग, सहकारिता एवं नैफेड के माध्यम से कुल 174 क्रय केन्द्रों तथा आवश्यकतानुसार नये बोरों के क्रय किये जाने पर सहमति प्रदान की।
सचिव खाद्य सुशील कुमार ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में वर्ष 2020-21 में 3,27,000 हेक्टेयर में गेहूँ की बुआई तथा 9,60,000 मी.टन गेहूँ के उत्पादन का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि वर्ड बैंक के साथ हुए समझौते के तहत पांच-पांच सौ मी.टन क्षमता के दो टेम्पररी गोदाम धारचूला एवं हरिद्वार में स्थापित किये जाने के साथ ही ऊधम सिंह नगर व ऋषिकेश में 50 हजार मी.टन क्षमता के दो नये भण्डारण गृह बनाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रबी विपणन सत्र 2020-21 में 2.00 लाख मी.टन गेहूँ के संग्रहण हेतु लगभग 2.00 लाख मी.टन भण्डारण क्षमता की आवश्यकता होगी। वर्तमान में विभाग के पास विभागीय/राज्य भण्डारण निगम/केन्द्रीय भण्डारण निगम से किराये पर ली गयी कुल 191707.300 मी.टन अतिरिक्त भण्डारण क्षमता उपलब्ध है।
बैठक में सचिव आर. मीनाक्षी सुदरम, आर.एफ.सी कुमाऊ ललित मोहन श्याल, आर.एफ.सी गढ़वाल चन्द्र सिंह, अपर जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर जगदीश चंद काण्डपाल, निदेशक कृषि गौरी शंकर, एम.डी यू.सी.एफ इरा उप्रेती, प्रबन्धक एफ.सी.आई बी.बी. सिंह सहित अन्य सम्बन्धित विभागों एवं संस्थानों के अधिकारी उपस्थित थे।

युवाओं को तरजीह देगी सरकार, युवा आयोग का गठन करने की तैयारी में सरकार

राज्य सरकार ने युवा वर्ग के हितों का संरक्षण करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आयोग के गठन का मकसद युवा शक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ ही रोजगार के अवसरों का सृजन करना है। प्रस्तावित युवा आयोग का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
बताया जा रहा कि उत्तराखंड में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है। अगर मतदाताओं के लिहाज से आकलन करें तो 18 से 39 वर्ष तक के युवा वर्ग का हिस्सा 55 फीसद से ज्यादा है। राजनीतिक नजरिये से देखे तो युवा तबका उत्तराखंड में एक बड़े वोट बैंक की भूमिका में है। राज्य में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा सरकार अब इन्हें लक्ष्य कर भावी योजनाओं को आकार दे रही है। युवाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार ही है, इसलिए आने वाले दो वर्षों में सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने पर है। प्रस्तावित युवा आयोग का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उद्देश्य भी यही है।
यूं तो उत्तराखंड में युवा नीति वर्ष 2011 से ही वजूद में है लेकिन अब इसमें कुछ अहम संशोधन किए जाने की तैयारी है। दरअसल, पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड आया था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न विभागों, गैर सरकारी संस्थाओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों से विचार-विमर्श किया। इसकी रिपोर्ट के आधार पर अब प्रदेश में संशोधित युवा नीति पर काम चल रहा है। अब नीति में युवा कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाने की तैयारी है। सभी विभाग अपने यहां युवा विकास की कार्ययोजना बनाने के साथ ही इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। इनके बीच आपसी समन्वय बनाने का काम युवा कल्याण विभाग करेगा।
संशोधित युवा नीति के मुताबिक ही अलग युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आयोग में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा लगभग आधा दर्जन सदस्य शामिल किए जाएंगे। इनमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों को तरजीह दी जाएगी। यह भी संभव है कि स्वयं मुख्यमंत्री युवा आयोग के पदेन अध्यक्ष हों। युवा आयोग के गठन से पहले सभी विभागों को युवाओं के विकास के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। युवा आयोग के जरिये रोजगार के साथ ही विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार युवा आयोग के गठन के संबंध में गंभीरता से विचार कर रही है। संभवतया इस तरह के आयोग का गठन करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य होगा। युवाओं के चहुंमुखी विकास और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री जल्द कर सकते है मंत्रिमंडल विस्तार, नड्डा से की मुलाकात

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल का बहु प्रतीक्षित विस्तार अब जल्द हो सकता है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर दिल्ली रहे। दिल्ली में मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकातकी। इससे माना जा रहा कि मंत्रिमंडल में रिक्त तीन स्थानों को जल्द भरे जाने की संभावना है।
उत्तराखंड में इस वक्त मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल का आकार नौ सदस्यीय है। हालांकि यहां अधिकतम 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल हो सकता है लेकिन फिलहाल इसमें तीन सीट खाली चल रही हैं। दो स्थान तो शुरुआत से ही खाली हैं, जबकि मंत्रिमंडल में तीसरा स्थान पिछले वर्ष कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के असामयिक निधन के कारण रिक्त हो गया। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पिछले ढाई साल के दौरान कई दफा चर्चा चली लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
कुछ समय पहले स्वयं मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत दिए लेकिन इसे भी अब काफी दिन गुजर चुके हैं। अब माना जा रहा है कि शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष नड्डा से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी टीम में तीन नए सदस्यों को शामिल करने के लिए सहमति ले ली है। पिछले दिनों अपने दिल्ली दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में स्वयं मुख्यमंत्री ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष से भेंट के दौरान वह इस संबंध में चर्चा करेंगे लेकिन तब समय तय होने के बावजूद यह मुलाकात हो नहीं पाई।

भगत ने सूची तैयार की भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की

मंडलों और जिलों की कार्यकारिणी गठित होने के बाद अब भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी भी जल्द घोषित हो जाएगी। बताया जा रहा कि प्रांतीय पदाधिकारियों के नाम करीब-करीब फाइनल कर लिए गए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने दिल्ली प्रवास के दौरान इस सिलसिले में पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। बताया कि उनकी कोशिश है इस माह के आखिर तक प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी जाए।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बंशीधर भगत की ताजपोशी के बाद अब सभी की निगाहें उनकी टीम पर टिकी हुई हैं। पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में अध्यक्ष के अलावा तीन महामंत्री, एक महामंत्री संगठन, आठ उपाध्यक्ष, छह मंत्री, एक कोषाध्यक्ष, एक कार्यालय मंत्री, पांच प्रवक्ता, अनुशासन समिति के अध्यक्ष व मंत्री और एक मीडिया प्रमुख पद निर्धारित हैं। प्रदेश कार्यकारिणी के लिए चल रही मशक्कत के बाद अब नाम करीब-करीब फाइनल कर लिए गए हैं। समझा जा रहा है कि इसमें दायित्वधारियों को शामिल नहीं किया गया है। नए चेहरों को प्रदेश कार्यकारिणी में तवज्जो देने पर जोर दिया गया है।
इस बीच प्रदेश अध्यक्ष भगत ने दिल्ली प्रवास के दौरान शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ.मुरली मनोहर जोशी और केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश से भी मुलाकात कर विभिन्न मसलों पर विमर्श किया।
प्रदेश अध्यक्ष भगत के अनुसार पार्टी के केंद्रीय नेताओं से अन्य बिंदुओं के अलावा नई प्रदेश कार्यकारिणी के नामों पर भी चर्चा हुई। नाम तकरीबन फाइनल हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शनिवार को हरिद्वार में होने वाले मंडल अध्यक्षों के प्रशिक्षण वर्ग के दौरान भी इसमें शिरकत करने वाले केंद्रीय नेताओं से फिर चर्चा हो सकती है।

देहरादून जाने से पहले करा ले अपने वाहन की फिटनेस

राजधानी देहरादून सहित आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैला रहे वाहनों की अब खैर नहीं होगी। परिवहन विभाग की ओर से आज से बडे़ स्तर पर जांच अभियान शुरू किया जा रहा है।
बताया जा रहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर वायु प्रदूषण नियंत्रण को गठित मॉनीटरिंग कमेटी की पहल पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा गाड़ियों की जांच की जाएगी। अभियान चलाने को लेकर एआरटीओ प्रवर्तन अरविंद पांडे की अगुवाई में अफसरों की सात सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गई है।
एआरटीओ (प्रवर्तन) अरविंद पांडे ने बताया कि अभियान की शुरुआत सुबह सात बजेे से हुई। इस दौरान गाड़ियों के प्रदूषण जांच के साथ ही ओवरलोडिंग, ओवरस्पीड, फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस की भी जांच की जाएगी। अभियान के दौरान प्रदूषण जांच पर खास फोकस रहेगा। जिन गाड़ियों के प्रदूषण निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए, उन गाड़ियों पर तत्काल मौके पर ही नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाने के साथ ही सीज करने की भी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद पांच माह पहले परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा गाड़ियों के प्रदूषण जांच को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था इस दौरान हजारों हजारों गाड़ियों का चालन करने के साथ ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी।
गाड़ियों के प्रदूषण जांच कराने को लेकर जबरदस्त मारामारी मची थी। आलम यह रहा कि गाड़ियों की प्रदूषण जांच कराने को लेकर जांच केंद्रों पर लंबी लाइनें लगी रहीं। गाड़ियों के प्रदूषण की जांच जल्द की जा सके, इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से शहर में 100 से अधिक जांच केंद्र खोले गए थे।

सैलानियों के लिए खुशखबरी, एक बार फिर हो सकती है बर्फबारी

उत्तराखंड में एक बार फिर बारिश और बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग ने 19 और 20 फरवरी को प्रदेशभर में बारिश और बर्फबारी का अनुमान जताया है।
मौसम विभाग की ओर से रसाप्ताहिक बुलेटिन जारी करके बताया गया कि 17 और 18 फरवरी को प्रदेशभर में मौसम साफ रहेगा। उसके बाद 19 और 20 फरवरी को फिर मैदानी इलाकों में हल्की बारिश और पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी का अनुमान जताया है। इससे तापमान फिर गोता खा सकता है। हालांकि 21 फरवरी से दोबारा मौसम साफ हो जाएगा। वहीं रविवार को प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहे। जहां शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 27 डिग्री था, वहीं रविवार को गिरकर 24.8 डिग्री पर आ गया।
वहीं, केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को औली की वादियों का जमकर लुत्फ उठाया। आईटीबीपी और गढ़वाल मंडल विकास निगम के अधिकारियों के साथ उन्होंने औली की बर्फीली ढलानों का निरीक्षण किया।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने रविवार सुबह आईटीबीपी जवानों के साथ बर्फ की ढलानों पर दौड़ लगाकर जवानों को फिट इंडिया का संदेश दिया। उन्होंने औली के विकास को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा भी की। रिजिजू अपने दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को औली पहुंचे थे। उन्होंने यहां स्नो स्कूटर की सवारी करने के साथ ही औली के प्राकृतिक सौंदर्य को भी करीब से निहारा।
केन्द्रीय मंत्री ने औली के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि औली बहुत खूबसूरत स्थान है, लेकिन इसे विकसित करने की जरूरत है। यहां अभी भी कई कमियां हैं, जिन्हें दूर करना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

अब नही लगाने होंगे ट्रेजरी के चक्कर, पेंशनर ऑनलाइन भरे ई-जीवन प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक ओर कदम बढ़ाते हुए डिजिटल माध्यम से ई-जीवन प्रमाण पत्र प्रदान करने हेतु आईएफएमएस सॉफ्टवेयर का शुभारम्भ किया गया। इस सॉफ्टवेयर की सहायता से राज्य के पेंशनर देश या विदेश, कहीं से भी अपना ई-जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन माध्यम से जमा करा सकेंगे। ई-जीवन प्रमाण पत्र को सीएससी केन्द्र से भरा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-जीवन प्रमाण पत्र के माध्यम से राज्य के पेंशनरों को बहुत राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वर्ष ई-जीवन प्रमाण पत्र के लिए लाखों लोगों को परेशान होना पड़ता है। इस सेवा के शुरू होने से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को ट्रेजरी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे पास के सीएससी केन्द्र से अपना ई-जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन जमा करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के वृद्ध एवं अक्षम लोगों को सीएससी तक ना आना पड़े इसके लिए ई-जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाने की व्यवस्था भी की जा सकती है। ई-जीवन प्रमाण पत्र अन्य राज्यों एवं विदेशों में रह रहे हमारे पेंशनर्स के लिए भी बहुत ही लाभदायक होगा। वे कहीं से भी अपना जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन जमा करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ई ऑफिस लागू किया गया है। ई-जीवन प्रमाण पत्र, ई-ऑफिस की दिशा में एक ओर कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश लगातार पेपरलेस व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सचिव श्री अमित नेगी ने बताया कि सीएससी के लोगों के साथ इस संबंध में बैठक एवं ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। ई-जीवन प्रमाण पत्र को कोषागार, उप कोषागार, सीएससी केन्द्र, पर्सनल कंप्यूटर, टैब और मोबाईल ऐप से भी भरा जा सकेगा, स्वीकृत होने पर इसकी सूचना मोबाईल नंबर और ई मेल आईडी पर भी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि कोषागार, पेंशन एवं हकदारी विभाग लगातार डिजिटल की दिशा में अग्रसर हो रहा है। लगभग 1,56,000 कर्मचारियों की पे रोल ई सिस्टम से जेनरेट की का रही है। लगभग 1,52,000 पेंशनर्स और न्यू पेंशन स्कीम को भी ई गवर्नेंस से जोड़ दिया गया है।

मुख्यमंत्री से जुड़ें फेसबुक लाइव में और बताएं कैसा हो बजट

नये बजट के स्वरूप को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्यमंत्री आवास में फेसबुक लाईव के माध्यम से जनता से करेंगे सीधा संवाद।
प्रदेश के आगामी बजट में जन सुझावों पर भी ध्यान दिया जायेगा। इसके लिए आपका बजट आपका सुझाव कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री आम जनता से शनिवार 8 फरवरी, 2020 को मुख्यमंत्री आवास में सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे तक फेसबुक लाईव द्वारा जन-संवाद करेंगे। हर साल राज्य सरकार द्वारा बजट पर लोगों के सुझाव प्राप्त किये जाते हैं। सुझाव जनहित में पाए जाने पर बजट में शामिल भी किए जाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जन आकांक्षाओं के अनुरूप प्रदेश का विकास है। उन्होंने सरकार में जनभागीदारी को भी जरूरी बताया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से फेसबुक लाईव में शामिल होकर अपने अमूल्य सुझाव देने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी सुझावों को अमल में लाया जाएगा। प्रदेश के बजट को अंतिम रूप देने से पहले समाज के सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किये जाने से समावेशी बजट की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।
ज्ञातव्य है कि पहले यह कार्यक्रम 8 फरवरी को पूर्वाह्न 11ः00 बजे वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार सचिवालय में निर्धारित था जिसे अब संशोधित कर मुख्यमंत्री आवास में शनिवार को सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री के प्रयास हुए सफल, राज्य के अनुरोध को 15वें वित्त आयोग ने स्वीकारा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की 15 वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के हक में की गई पैरवी आयोग की सिफारिशों में देखने को मिल रही हैं। 15वें वित्त आयोग द्वारा उत्तराखण्ड राज्य को राजस्व घाटा अनुदान दिये जाने की संस्तुति की गई है, जिसके फलस्वरूप राज्य को प्रतिवर्ष लगभग न्यूनतम रू 2000 करोड़ का लाभ होगा। आयोग की सिफारिशों में केन्द्रीय करों में राज्य का अंश 1.052 से बढ़ाकर 1.104 कर दिया गया है, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग रू. 300 से 400 करोड़ का लाभ होगा। डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश 7.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसे राज्य के अंश में वृद्धि हुई है। राज्य आपदा राहत निधि के अंश में 787 करोड़ रूपए वृद्धि पर सहमति दी गई है। शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं के अनुदान में भी 148 करोड़ रूपए की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के पक्ष को स्वीकारने के लिए 15 वें वित्त आयोग का जताया आभार
15 वें वित आयोग की सिफारिशों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 15वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के पक्ष को तार्किक ढंग से बहुत ही स्पष्ट एवं सक्षम तरीके से प्रस्तुत किया गया। उसी का परिणाम है कि विभिन्न बिंदुओं पर आयोग ने अपनी सहमति देते हुए राज्य के पक्ष में संस्तुतियां की हैं। उत्तराखण्ड के दृष्टिकोण को समझने और तद्नुसार संस्तुतियां देने के लिए 15 वें वित आयोग का आभार व्यक्त करते हैं। इससे उत्तराखण्ड विकास के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ेगा।
उत्तराखण्ड द्वारा दी जा रही पर्यावरणीय सेवाओं को किया स्वीकार
15 वें वित्त आयोग को संदर्भित विषयों एवं राज्य की विभिन्न समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मैमोरेण्डम प्रस्तुत किया गया था। उत्तराखण्ड द्वारा मैमोरेण्डम में विभिन्न बिन्दुओं को स्पष्ट एवं विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे आयोग द्वारा स्वीकार किया गया। उत्तराखण्ड राज्य के परिदृश्य में आयोग द्वारा स्वीकार किया गया है कि राज्य द्वारा पूरे देश को बहुमूल्य ईको-सिस्टम सेवायें प्रदान की जा रही हैं। इसके लिये 15 वें वित्त आयोग से डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश बढ़ाये जाने का अनुरोध किया गया था, जिसे ग्रीन बोनस भी कह सकते हैं। 15वें वित्त आयोग द्वारा डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश 7.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्य के अंश में वृद्धि हुई है।
उत्तराखण्ड को मिलेगा राजस्व घाटा अनुदान
मुख्यमंत्री ने सांवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप 15 वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के हक की पुरजोर पैरवी करते हुये कहा था कि 14वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त कर दिया था, जिसके कारण राज्य को अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ा। 15वें वित्त आयोग ने इस बात को स्वीकार करते हुए उत्तराखण्ड राज्य को राजस्व घाटा अनुदान दिये जाने की संस्तुति की है, जिसके फलस्वरूप राज्य को प्रतिवर्ष लगभग न्यूनतम रू 2000 करोड़ का लाभ होगा।
आपदा राहत निधि में बढ़ोतरी
आपदा प्रबन्धन के अन्तर्गत राज्य को राज्य ‘‘आपदा राहत निधि’’ के अंश के रूप में गतवर्ष लगभग रू. 254 करोड़ की धनराशि प्राप्त होती थी। उत्तराखण्ड राज्य में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निटने के लिये आवश्यक सहायता दिये जाने का विषय आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राज्य से सहमत होते हुये 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्य आपदा राहत निधि के अंश में वृद्धि करते हुये, इसे प्रतिवर्ष लगभग रू 1041 करोड़ कर दिया गया है।
शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के अनुदान में वृद्धि
14वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 में मूल अनुदान के अन्तर्गत शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं हेतु कुल रू 704.10 करोड़ की धनराशि संस्तुति की गई थी। 15वें वित्त आयोग द्वारा शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं हेतु अनुदान में वृद्धि करते हुये वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु कुल रू 852.00 करोड़ की धनराशि संस्तुत की गई है, जिसमें लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।