दून विवि में सीएम धामी ने युवाओं से किया संवाद, कहा बदलती तकनीक के अनुरूप फ्यूचर के लिये रेडी हो युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने, उत्तराखंड को उच्च शिक्षा का हब बनाने, विज्ञान, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में रोजगार की नई संभावनाओं तथा देहरादून में यातायात जाम की समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं सौर स्वरोजगार योजना सहित पर्यटन, उद्योग और फिल्म नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को मजबूत करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञान, तकनीक एवं एआई के दौर में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और नई संभावनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करते हुए ‘फ्यूचर रेडी’ बनना होगा। सरकार भी युवाओं को आधुनिक कौशल एवं नई तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

देहरादून में यातायात जाम की समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

सीएम सौर स्वरोजगार योजना के तहत राज्य में हो रहा 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन

देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।

टिहरी जिले ने बनाई बढ़त
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

3500 लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सीएम धामी बोले, आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखण्ड एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लेट, सेट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र व छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड से सेना में सेवा देने वाले प्रत्येक युवा को मिलेगा सम्मानजनक भविष्यः सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूथ फाण्डेशन ट्रेनिंग एरिया-कुआंवाला, देहरादून में यूथ फाउण्डेशन द्वारा आयोजित युवा अग्निवीर संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर मुख्यमंत्री ने घोषणा कि की पर्यटन विभाग की होमस्टे योजना के अंतर्गत पूर्व सैनिकों तथा अग्निवीरों को होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जाएगा। सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों एवं अग्निवीरों को स्वरोजगार से संबंधित अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने हेतु विशेष अनुदान स्वीकृत किया जाएगा एवं सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अग्निवीरों, सैनिकों और शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। शहीद परिवारों की अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजन की व्यवस्था की गई है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन की समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष की गई है एवं वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के सम्मान में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध विधवाओं एवं दिव्यांग सैनिकों के लिए विशेष सहायता एवं पूर्व सैनिकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार हेतु आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है।

अग्निवीरों से वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निवारों का सम्मान, राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार, अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। सेवा पूर्ण करने वाले अग्निवीरों को पुलिस, वन विभाग, आपदा प्रबंधन सहित राज्य की सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके साथ अधिकतम आयु सीमा में छूट तथा भर्ती प्रक्रियाओं में आवश्यक भी प्राथमिकता सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सेना में सेवा देने वाले प्रत्येक युवा को सम्मान जनक भविष्य मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा अग्निवीर बनना केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वाेच्च अवसर है। सेना में बिताए गए चार वर्ष अग्निवीरों के पूरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होगी। अग्निवीरों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। उन्होंने कहा उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा, जहां अग्निवीरों के लिए विशेष श्अग्निवीर सेलश् की स्थापना भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के मुख्यसेवक के रूप में उन्होंने हमेशा जनता की सेवा की है। राज्य की सेवा करने का अवसर उन्हें देवभूमि की जनता के आशीर्वाद से मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उन्होंने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। राज्य सरकार उनके संकल्प अनुसार ही उत्तराखंड को भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 2022 में राज्य की जनता ने विकास और सुशासन को चुना है। आज डबल इंजन की सरकार, डबल रफ्तार से विकास को आगे बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा वे स्वयं एक सैनिक के बेटे हैं। उन्होंने बचपन से सैनिकों का अनुशासन, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को देखा है। उन्होंने अपने जीवन में संस्कार, अनुशासन अपने पिताजी से सीखा। उन्होंने कहा सैनिकों के बीच में आकर उन्हें अपने परिवार की अनुभूति होती है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तराखंड को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने का काम किया है। आज देश में सबसे पहले यूसीसी लागू करने वाला राज्य उत्तराखंड बना है। राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने भर्ती घोटालों के सभी प्रकरणों को गंभीरता से लिया और सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसमें उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा 100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया। सख्त नकल विरोधी कानून लागू करने का परिणाम है कि आज उत्तराखंड के अंदर रिकॉर्ड भर्तियां हुई हैं। पिछले 5 साल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई। उन्होंने कहा राज्य में पूरी पारदर्शिता के साथ पात्र युवाओं को नौकरी मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे पहले उत्तराखंड राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। जिससे सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के द्वार खुल गए हैं। उन्होंने कहा हर बच्चे को पढ़ने और आगे बढ़ने का अधिकार है। उन्होंने कहा राज्य में हर क्षेत्र में काम किया जा रहा है। किसानों के लिए कीवी, एप्पल, तिमरु मिशन जैसी कई योजनाएं संचालित हैं। सतत विकास लक्ष्य की सूची में उत्तराखंड में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य को फिल्म फ्रेंडली स्टेट के रूप में भी सम्मानित किया गया है। निर्यात सूचकांक में बढ़त हुई है। अब राज्य के युवा अपने घर , गांव में ही रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं। चार धाम यात्रा, आदि कैलाश यात्रा, शीतकालीन यात्रा जैसी अनेकों यात्राओं में बीते 4 सालों में 24 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखंड आए हैं।

इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कौठियाल (से.नि), मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत (से.नि), जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

नियुक्ति पत्र देकर सीएम धामी बोले, यह पत्र जनसेवा का संकल्प और सवा करोड़ राज्य की जनता के विश्वास का प्रतीक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, रामसिंह कैड़ा, विधायक सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पांडेय, एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधारः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

धामी सरकार का मिला सहारा, फिल्म जगत में चमकेंगे उत्तराखंड के युवा

उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 के लाभ, उत्तराखंड के युवाओं को प्रत्यक्ष तौर पर मिलने शुरु हो गए हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान, पूणे (एफटीआईआई) से पासआउट तीन युवाओं की छात्रवृत्ति का भुगतान कर दिया है।

उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 के तहत फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान, पूणे, सत्यजीत-रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता या अन्य ख्यातिप्राप्त संस्थानों में प्रवेश लेने वाले उत्तराखंड राज्य के स्थाई निवासी छात्र-छात्राओं को मैरिट के आधार पर पाठ्यक्रम पूर्ण होने तथा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरांत छात्रवृत्ति प्रदान किए जाने का प्राविधान है। इसके तहत पाठ्यक्रम पर हुए व्यय के अनुसार एसटी,एससी, ओबीसी को 75 प्रतिशत एवं सामान्य अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने बताया कि इसी नीति के क्रम में ग्राम पोस्ट उखीमठ, रुद्रप्रयाग निवासी प्रवीण सेमवाल को एक वर्षीय स्नातकोत्तर सर्टिफिकेट कोर्स के लिए कुल 65,682 रुपए की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इसी तरह ग्राम, हरनी (मुंदोली) चमोली निवासी कविता को दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स के लिए कुल 1,27,619 रुपए और तल्लीताल, नैनीताल निवासी देवेश भट्ट को तीन वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा के लिए कुल 1,38,990 रुपए की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। उक्त तीनों ने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे से पढ़ाई पूरी की है।

उत्तराखंड के युवा रचनात्मक प्रतिभा की धनी हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हों। उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। फिल्म जगत में शिक्षा प्राप्त करने वाले राज्य के युवाओं को छात्रवृत्ति प्रदान कर सरकार उनके सपनों को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

रामनगर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने बीच पाकर बच्चे हुए उत्साहित, जमकर खिंचवाईं तस्वीरें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार रविवार को रामनगर के अहाना रिसॉर्ट हैलीपेड पहुँचें। रामनगर पंहुचने पर मंडलायुक्त दीपक रावत, आईजी निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ.मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय, बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, राकेश नैनवाल, संजय डॉर्बी, इंदर रावत आदि ने स्वागत किया।

इस दौरान हैलीपैड पर भारी संख्या में क्षेत्र के बच्चे एकत्रित हुए उन्हें देखते ही स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बच्चों के बीच स्वयं पहुंच गए। मुख्यमंत्री के बच्चों के पास पहुंचते ही बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाईं और उनसे आत्मीय संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ कुछ समय बिताते हुए उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरंतर प्रयास, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के साथ बिताए इन यादगार पलों का भरपूर आनंद लिया और उनके साथ सेल्फी व समूह फोटो खिंचवाए।

इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र से आए लोगों की समस्याओं को भी सुना तथा उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए।

युवा संवाद में सीएम बोले, युवा शक्ति ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुड़की में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रदेश और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है और युवाओं की ऊर्जा, नवाचार तथा प्रतिभा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को वोट बैंक नहीं, बल्कि विकसित भारत का सबसे सशक्त स्तंभ मानते हुए उनकी शिक्षा, कौशल, नवाचार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, खेलो इंडिया तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलें युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार सृजक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहाँ युवाओं को अवसरों के लिए पलायन न करना पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही प्रदेश में रोजगार, उद्यम और नवाचार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, युवा प्रोत्साहन योजना, दीनदयाल उपाध्याय योजना, एक जनपद-दो उत्पाद योजना तथा श्हाउस ऑफ हिमालयाजश् जैसे प्रयास स्थानीय उत्पादों और युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिला रहे हैं। स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, होम-स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार जैसी पहलें भी रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के परिणामस्वरूप उत्तराखंड की बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। साथ ही नीति आयोग के सतत विकास में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में रिवर्स माइग्रेशन का सकारात्मक वातावरण बन रहा है और युवा अपने अनुभव एवं कौशल के साथ उत्तराखंड लौटकर स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लागू देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है तथा पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब, परीक्षा भवनों का निर्माण तथा उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ नए महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। वहीं पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर विकसित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, नवाचार को अपनाने तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक युवा के सपनों को साकार करने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड का युवा विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को देश का अग्रणी एवं सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा शक्ति संवाद कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया तथा उनके विभिन्न प्रश्नों का सरल, स्पष्ट एवं सारगर्भित उत्तर दिया। कार्यक्रम में पहला प्रश्न भुनेश गोयल ने किया। उन्होंने युवाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा तथा शासन-प्रशासन में उनकी भागीदारी को लेकर सरकार की योजनाओं के संबंध में जानकारी चाही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रुड़की विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार की भूमि है। उन्होंने युवा संवाद कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभाशाली युवाओं का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है तथा विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त नकल विरोधी कानून के परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आई है और अब तक 33 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है।

रीया वंदना ने सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर सरकार की कार्ययोजना के संबंध में प्रश्न किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोशल मीडिया जनसंचार का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बन चुका है। किसी भी सूचना का प्रसार कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक हो जाता है। पहले लोगों को समाचारों के लिए मुख्य रूप से समाचार पत्रों एवं टेलीविजन पर निर्भर रहना पड़ता था, जबकि आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी बात सीधे समाज तक पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रभावी निगरानी के लिए साइबर सेल सक्रिय रूप से कार्य कर रही है तथा अफवाह फैलाने एवं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सोनालिका ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों के संबंध में प्रश्न किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2027 के कुंभ मेले को दिव्य, भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, विभिन्न घाटों के निर्माण एवं विस्तारीकरण सहित श्रद्धालुओं की सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के दौरान आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम के आयोजक गौरव कौशिक ने मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष मधु सिंह, रुड़की नगर निगम की महापौर अनीता अग्रवाल, श्यामवीर सैनी, आदेश सैनी, शोभाराम प्रजापति, भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश गिरी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक (देहात) शेखर सुयाल, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह, उपजिलाधिकारी भगवानपुर देवेंद्र सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

युवा शक्ति ही विकसित उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने का सबसे बड़ा आधारः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टनकपुर, चंपावत में आयोजित “युवा संवाद युवा शक्ति, उत्तराखंड की प्रगति” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर स्थानीय जनता एवं युवाओं ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं के साथ संवाद करते हुए उनके विचारों, सुझावों एवं विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्नों को सुना और उनका उत्तर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा किसी भी राज्य और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। उत्तराखंड के युवा प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और नवाचार की क्षमता से भरपूर हैं। उनके सामर्थ्य के बल पर ही विकसित उत्तराखंड के संकल्प को पूरा किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा ऊर्जा देश को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने की क्षमता रखती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने युवाओं को केवल अवसर तलाशने वाला नहीं, बल्कि अवसर देने वाला बनाने की दिशा में कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलों से युवा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और नवाचार को प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, युवा प्रोत्साहन योजना और ग्रामीण कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए “एक जनपद, दो उत्पाद” योजना और “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, होम स्टे योजना, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं से युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीति और पारदर्शी व्यवस्था के कारण उत्तराखंड में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही, पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत और योग्यता के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो, इसके लिए राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। अब भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ संचालित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में खेल संस्कृति को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन ने यह साबित किया है कि देवभूमि अब खेलभूमि के रूप में भी अपनी पहचान बना रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को शिक्षा, खेल और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार “नो पेंडेंसी” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए बजट जारी कर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, नवाचार एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा ही नए उत्तराखंड का निर्माता है और उनकी प्रगति में ही प्रदेश की प्रगति निहित है।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।