विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

प्रदेश में बेरोजगारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ चयन सेवा आयोग और विभागों के बीच समन्वय बनाने और समयबद्ध भर्ती कराने के लिए भर्ती कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए। कार्मिक विभाग नियमित रूप से इस कैलेंडर का परीक्षण करेगा। बैठक में यह बात सामने आई कि विभागों में डीपीसी न होने का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) का समय से पूरा न होना है। इस पर मुख्यमंत्री ने समय से कर्मचारियों की एसीआर न लिखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में प्रदेश के सरकारी महकमों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया विवाद रहित और पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कहा कि आयोग को भेजे जाने वाले अधियाचन व सेवा नियमावली स्पष्ट रखी जाएं ताकि मामले न्यायालय में न जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दस प्रतिशत आर्थिक आरक्षण को शामिल करने के लिए विभागों को जो अधियाचन वापस भेजे गए हैं, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाए। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (सेनि) आनंद सिंह रावत ने बताया कि आयोग स्तर पर 852 पदों पर भर्ती प्रक्रिया और 3080 पदों पर डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। 883 पदों पर आवश्यक संशोधन के लिए विभागों को वापस भेजा गया है।
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने कहा कि आयोग ने 3177 पद अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के माध्यम से भरने के लिए चिह्नित किए हैं। इनमें 2564 पद तकनीकी अर्हता व 613 पद गैर तकनीकी अर्हता के हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने कहा कि अभी तक कुल 32 विभागों ने रिक्त पदों के संबंध में जानकारी दी है। इन विभागों में लगभग 18 हजार पद रिक्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने इन पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव शैलेश बगोली, नीतेश झा, डॉ. भूपिंदर कौर औलख, हरबंस सिंह चुघ, सुशील कुमार, लोक सेवा आयोग के सचिव राजेंद्र कुमार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी का शिकार होने से बचें, अपनाइए ये तरीके

देश में फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों में 53.7 करोड़ रुपये की फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी बिकी हैं, वहीं ऐसे मामलों की संख्या 498 से बढ़ कर 1,192 तक पहुंच गई है।

नकली पाॅलिसी की संख्या बढ़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद सत्र की शुरुआत में बताया था कि इरडा की फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 498 नकली पॉलिसी बिकीं, वहीं 2017-18 में ये संख्या बढ़ कर 823 हो गई। जबकि साल 2018-19 में यह संख्या बढ़ कर 1192 को पार गई है।

क्लेम की धनराशि में नही मिली
इनमें सबसे ज्यादा फर्जी पॉलिसी ट्रक वालों और दो-पहिया वाहन रखने वालों को दी गईं। वहीं ये पॉलिसी उन लोगों ने खरीदी, जो सड़क पर पुलिस की चेकिंग के दौरान जांच से बचना चाहते थे। एक असली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की कीमत जहां 10 हजार रुपये पड़ती है, वहीं नकली पॉलिसी 5 से 6 हजार रुपये में मिल जाती हैं। वहीं ग्राहक ये अच्छे से जानते हैं कि ऐसी पॉलिसी की मदद से आप केवल पुलिस चेकिंग से बच सकते हैं, लेकिन कोई दुर्घटना होने पर उससे कोई क्लेम नहीं ले सकते।

बिना इंश्योरेंस के चल रहे वाहन
वहीं देश में तकरीबन 70 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। इरडा का कहना है कि उन्हें 2016 में ।ज्ञब्च्स् जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और 2019 में गोन जनरल और मैरींस टेक्नोलॉजी की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने की शिकायते मिलीं हैं। वहीं इनमें से ज्यादातर पॉलिसी सेकंड हैंड गाड़ियों के लिए खरीदी गई थीं, ताकि ट्रैफिक चालान वगैरहा से बचा जा सके।

अन्तरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय
इसके अलावा वाहन मालिकों को फंसाने के लिये बकायदा गैंग बना कर लोगों को ठगा जा रहा है। फरवरी में मुंबई पुलिस के हत्थे एक ऐसा गैंग चढ़ा था, जो दो सालों में 800 से अधिक नकली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी टू-व्हीलर मालिकों को बेच चुका था। ये जालसाज कम कीमत वाली श्सस्तीश् पॉलिसी की पेशकश कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते थे।

छूट का ऑफर देकर फंसाते है
ये लोग टू-व्हीलर मालिकों को फोन करके मोटर इंश्योरेंस एजेंट होने का दावा कर पॉलिसी रिन्यू कराने पर प्रीमियम और एड-ऑन कवर पर भारी छूट का वादा करते थे। प्रीमियम का चेक मिलने के बाद पॉलिसी जारी हो जाती थी, लेकिन जब बीमाधारक क्लेम दाखिल करता था, तो उसे इंश्योरेंस कंपनी से पता चलता है कि पॉलिसी नकली है और एजेंट लापता है।

पॉलिसी रिन्यू कराने वाले होते हैं टारगेट में
आमतौर पर ये फर्जीवाड़ा उन टू-व्हीलर मालिकों के साथ होता है, जिनकी पॉलिसी रिन्यू होने वाली होती है। आरटीओ के डेटाबेस के जरिये लोगों को फंसाते हैं और फेक पॉलिसी इश्यू करने के लिए जाली लेटर हेड और स्टैम्प का इस्तेमाल करते हैं।

ध्यान रखें कि पॉलिसी खरीदने के लिये चेक या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ही करें। केवल कंपनी के नाम पर ही चेक काटें, किसी निजी व्यक्ति के नाम पर चेक देने से बचें।
वहीं अगर आपने किसी थर्ड पाटी या व्यक्ति से पॉलिसी ली है, तो आपके ईमेल पर उसकी डिटेल आएंगी। यदि नहीं आई हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी के कॉल सेंटर पर फोन करके पॉलिसी को वेरिफाई करें।
किसी अंजान कंपनी से पॉलिसी खरीदने से बचें। अगर आपको कोई शक हो रहा है कि इरडा की वेबसाइट पर जाकर लाइसेंस वाली कंपनियों की लिस्ट में उस कंपनी का नाम चेक कर सकते हैं। साथ ही स्वीकृत पॉलिसी की डिटेल भी आपको वहीं मिल जाएगी।
प्त्क्।प् ने कुछ साल पहले बीमा कंपनियों के लिए वाहन बीमा पॉलिसी पर एक फत् कोड प्रिंट करना जरूरी कर दिया है, इससे आप पॉलिसी की डिटेल्स क्यूआर कोड के जरिये मोबाइल पर चेक सकते हैं। भारत में दिसंबर 2015 के बाद बिकने वाली मोटर बीमा पॉलिसियों में आम तौर पर एक क्यूआर कोड होता है।

गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को संगीत अकादमी पुरस्कार

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी और रंगमच और फिल्म समीक्षक दीवान सिंह बजेली को संगीत अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है। संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा जारी प्रेस बयान में यह जानकारी दी गयी है। 26 जून को गोवाहाटी में हुई संगीत नाटक अकादमी की बैठक में यह निर्णय किया गया। 82 वर्षीय बजेली तीस साल तक राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित सभी प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों मे रंगमंच की समीक्षा करते रहे हैं। 1937 में अल्मोडा के मन्नान गांव मे जन्मे बजेली टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस तथा पायनियर एवं इकानामिक टाइम्स मे रंगमंच पर लिखते रहे है और वह द हिन्दू के नियमित स्तंभकार रहे हैं। उन्हांने अब तक सैकड़ों नाटको की समीक्षा की है और भारतीय रंगमंच को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। वह पर्वतीय लोककला के भी विशेषज्ञ माने जाते है।
इनके साथ ही पंडित तरुण भट्टाचार्य विख्यात शास्त्रीय गायक मधुप मुद्गल, रंगकर्मी संजय उपाध्याय, अभिनेता टीकम जोशी, लोकगायिका मालिनी अवस्थी समेत 44 कलाकारों को यह पुरस्कार दिये जायेंगे, जबकि प्रख्यात नृत्यांगना एवं राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सोनल मानसिंह, मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन समेत चार को साहित्य अकादमी का नया फेलो बनाया गया है। फेलो बनाये जाने पर हर कलाकार को तीन-तीन लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र आदि दिये जायेंगे जबकि अकादमी पुरस्कार के लिए प्रत्येक कलाकार को एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह दिये जायेंगे। राष्ट्रपति नई दिल्ली में एक विशेष समारोह के दौरान कलाकारों को पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पंडित भट्टाचार्य ने पुरस्कार दिये जाने पर आभार जताते हुए कहा कि यह संतूर और संतूर के प्रशंसकों का सम्मान है। वह सम्मान की सूचना पाकर बहुत की खुश है तथा अकादमी के प्रति आभार जताते हैं। उल्लेखनीय कि पंडित भट्टाचार्य कोलकाता में संतूर आश्रम का संचालन चलाते हैं तथा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते रहे हैं। फेलो बनाये गये दो अन्य कलाकारों में जतिन गोस्वामी और के कल्याण सुन्दरम पिल्लई शामिल हैं। इसके अलावा 18 युवा कलाकारों का बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार विजेता कलाकार को 25-25 हजार रुपये प्रशस्ति पत्र आदि दिए जायेंगे। संगीत के क्षेत्र में 11, नृत्य के क्षेत्र में नौ, रंगकर्म के क्षेत्र में नौ, पारंपरिक कला में दस कलाकारों को अकादमी पुरस्कार दिए जायेंग। इसके अलावा दो कलाकारों को सम्पूर्ण योगदान के लिए यह पुरस्कार दिए जाएगा। नृत्य में राधा श्रीधर को भारत नाट्यम, इषिरा और मौलिक शाह को कत्थक में संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया जायेगा। नाट्य लेखन में राजीव नायक और एल खिलान्गते को यह पुरस्कार मिलेगा। उत्तराखंड के चर्चित लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी और खड़ताल संगीत के लिए गाजी खान को याक पुरस्कार दिया जायेगा।

वृहद वृक्षारोपण से प्राकृतिक जलस्रोत होंगे पुनर्जीवितः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हरेला पर्व पर रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान के अन्तर्गत मोथरावाला, देहरादून में वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक संयोग है कि इस वर्ष गुरू पूर्णिमा व हरेला पर्व एक ही दिन है। उन्होंने गुरू पूर्णिमा व हरेला की सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिस्पना जलागम क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए 11 क्षेत्र बनाए गये हैं 31 हजार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। अधिकांश वृक्ष पीपल, बरगद व बट के लगाये जा रहे हैं। रिस्पना व कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए गत वर्ष भी व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया। मोथरावाला में जो वृक्षारोपण किया जा रहा है, उनकी सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का प्रतीक है। हमारे पूर्वजों ने वृक्षों को बचाने के लिए अनवरत प्रयास किये हैं। पीपल, वट व केले वृक्षो का हमारे धार्मिक ग्रंथों में विशेष महत्व था। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अच्छा पर्यावरण मिले मिले इसके लिए हमें संकल्प लेना होगा।
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि हमें वृक्ष लगाने के साथ ही उनके संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता वाला राज्य है। भारत की कुल कुल जैव विविधता में 28 प्रतिशत योगदान उत्तराखण्ड का है। ईकोलॉजी को बचाने की उत्तराखण्ड पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की याद व बच्चों के जन्म व शादी पर वृक्षारोपण करने की पंरपरा को बनाये रखना होगा।
हरेला पर्व पर प्रदेश भर में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। इस बार हरेला पर्व पर 6.25 लाख पौधे लगाये जा रहे हैं। गत वर्ष हरेला पर्व पर 4.50 लाख पौधे लगाये गये थे। इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक विनोद चमोली, भरत चैधरी, भाजपा के नगर अध्यक्ष विनय गोयल, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, जिलाधिकारी देहरादून सी. रविशंकर, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

योगी और त्रिवेन्द्र के पैतृक गांव से लागू होगी चकबंदी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पैतृक गांव खैरासैंण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैतृक गांव पंचूर में सबसे पहले चकबंदी की जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग ने दोनों गांवों में चकबंदी के लिए पड़ताल की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वहीं, पौड़ी जनपद के कुछ गांवों में चकबंदी की अनुमति दी गई है।
राजस्व विभाग के अपर सचिव एसएस बल्दिया ने बताया कि चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम -2018 की नियमावली में संशोधन की तैयार चल रही है। ताकि 20 किसान भी चकबंदी के लिए तैयार होते हैं तो सरकार उसे कानूनी रूप से मंजूरी देगी। दरअसल, पहाड़ों में क्लस्टर खेती के जरिये किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार का चकबंदी पर फोकस है। इसकी शुरुआत खैरासैंण और पंचूर गांव से की गई है। राजस्व विभाग की टीम ने दोनों गांवों में किसानों की सहमति से चकबंदी के लिए कृषि भूमि की पड़ताल पूरी कर ली है।
वहीं, पौड़ी के तंगोली और बीरोंखाल में चकबंदी की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश सरकार किसानों को भी चकबंदी के प्रति जागरूक करेगी। इसके लिए चकबंदी पर डॉक्यूमेंट्री तैयार कर पंचायतों को दी जाएगी।

पहाड़ों में बिना चकबंदी के संभव नहीं है दोगुनी आय
प्रदेश सरकार ने 2022 तक किसानों की दोगुनी आय करने का संकल्प लिया है, लेकिन पहाड़ों में बिखरी कृषि जोत पर किसानों की आय बढ़ाना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार का चकबंदी पर फोकस है। जिससे किसान एक ही जगह पर क्लस्टर खेती अपनाकर फसलों की पैदावार को बढ़ा सकें। चकबंदी से किसान को कृषि कार्य पर कम मेहनत करनी पड़ेगी और फसलों की देखभाल भी अच्छी तरह से हो सकेगी।

हिमालयन कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों के विकास पर मंथन

हिमालयी संस्कृति, आर्थिकी व पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी हिमालयी राज्य एक मंच पर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर हो रहे हिमालयन कान्क्लेव में भारत के सभी हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ व हिमालय के संरक्षण पर मंथन करेंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी इसमें शामिल होने पर अपनी सहमति दी है। शासन द्वारा 28 तारीख को मसूरी में प्रस्तावित हिमालयन कान्क्लेव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ‘‘हिमालयन कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों की समस्याओं व उनके समाधान के लिए गहनता से मंथन किया जाएगा। यह मंथन भविष्य में हिमालयी राज्यों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगा। इससे नीति आयोग व वित्त आयोग को हिमालयी राज्यों की वास्तविक स्थिति को जानने में आसानी रहेगी।’’

उत्तराखण्ड में पहली बार हो रहा है हिमालयी राज्यों का कान्क्लेव
उत्तराखण्ड में पहली बार हिमालयी सरोकार से जुड़े कान्क्लेव का आयोजन हो रहा है जिसमें तमाम हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रशासकों, अधिकारियों व विशषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा। इसमें मुख्यतः उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, आसाम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम व मणिपुर राज्यों के मुख्यमंत्री व प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे। व्यापक विचार विमर्श के बाद एक हिमालयन ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा जो कि नीति आयोग को प्रेषित किया जाएगा।

ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय के इको सिस्टम का संरक्षण
बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारतीय संस्कृति व सभ्यता के मूल स्त्रोत हिमालय व यहां की जीवनदायिनी नदियों पर संकट मंडरा रहा है। हिमालयी इकोलॉजी की रक्षा के साथ कैसे विकास का लाभ यहां के लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, कान्क्लेव का मुख्य एजेंडा रहेगा। हिमालय के संसाधनों का उपयोग कैसे यहां की अर्थव्यवस्था को उन्नत करने में किया जा सकता है ताकि यहां के युवा को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। हिमालय भारतीय सभ्यता का केंद्र बिंदु तो है ही, इसका सामरिक महत्व भी काफी ज्यादा है। सभी हिमालयी राज्यों की सीमाएं दूसरे देशों से जुड़ी हुई हैं। इस दृष्टि से भी कान्क्लेव में चर्चा की जा सकती है।

जल संरक्षण व जल संवर्धन पर भी रहेगा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलशक्ति मंत्रालय बनाकर जल संरक्षण व जल संवर्धन की बड़ी पहल की है। इसमें हिमालयी राज्यों की सहभागिता बहुत जरूरी है। ग्लेशियरों, नदियों, झीलों, तालाबों व वनों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाना भी कान्क्लेव का प्रमुख एजेंडा रहेगा।

सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बनेगी कार्ययोजना
एक ओर जहां हिमालय का संरक्षण जरूरी है वहीं यहां के दूरदराज के गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका उपलब्ध करवाना भी आवश्यक है। इसके लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देना होगा। कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों में सतत विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।

नीति आयोग को सौंपा जाएगा ड्राफ्ट
हिमालयन कान्क्लेव में वैचारिक मंथन के बाद प्राप्त निष्कर्षों को एक ड्राफ्ट का रूप देते हुए नीति आयोग को सौंपा जाएगा। इससे नीति आयोग को हिमालयी राज्यों के लिए नीति निर्धारण करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग को हिमालयी राज्यों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं व क्षमताओं के बारे में पता चलेगा।

निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली संजीवनी, भाजपा चित्त

उत्तराखंड में श्रीनगर और बाजपुर नगर निकायों में सोमवार के हुए मतदान के बाद परिणाम जारी हुए। श्रीनगर और बाजपुर दोनों ही जगह कमल को पछाड़ पंजे ने पैठ जमाई। वहीं दून और ऋषिकेश दोनों ही जगह कमल खिला।

श्रीनगर पालिका अध्यक्ष पद पर कांग्रेस का कब्जा
श्रीनगर पालिका अध्यक्ष पर कांग्रेस कब्जा करने में सफल रही है। पार्टी प्रत्याशी पूनम तिवारी ने भाजपा प्रत्याशी सरोजनी रावत को 638 मतों से पराजित कर जीत दर्ज की। पूनम को 4413 और सरोजनी को 3775 मत मिले। निर्दलीय प्रत्याशी आशा उपाध्याय 2930 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि भाजपा की बागी पूर्णकला जैन 1500 मतों के साथ चैथे स्थान पर रही।
नगर पालिका चुनाव में 23,126 मतदाताओं के सापेक्ष 13 हजार 204 मतदाताओं ने वोट डाले थे। बुधवार को तहसील परिसर में अध्यक्ष पद के लिए दो राउंड में मतगणना हुई। कांग्रेस प्रत्याशी पूनम तिवारी ने शुरुआती दौर में ही वार्ड एक से 447 मत प्राप्त कर बढ़त बना ली। भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त को कम करने की कोशिश की, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के ज्यादा मत हासिल करने से भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस से आगे नहीं निकल पाईं। आरओ दीपेंद्र नेगी ने बताया कि अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों में बीना चैधरी को 319 और सीमा भंडारी को 215 मत मिले। 52 मत नोटा के खाते में गए और 456 मत रद्द किए गए।

गित्ते ने बाजपुर में दिखाई ‘पंजे’ की ताकत
बाजपुर निकाय चुनाव का परिणाम कांग्रेस के लिए संजीवनी से कम नहीं है। चेयरमैन पद पर कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी राजकुमार को 2990 मतों से शिकस्त दी। गित्ते को 9025 मत मिले, जबकि राजकुमार को 6035 मत से संतोष करना पड़ा। 18,096 लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया था। मतगणना बुधवार को जीजीआईसी में सुबह आठ बजे से शुरू हुई। पहले चरण में कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते को 4727 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजकुमार को 2857 मत मिले। 1870 की लीड लेकर कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते आगे ही रहे। भाजपा प्रत्याशी राजकुमार अंतिम चरण तक बढ़त नहीं ले पाए।
शाम 5ः45 बजे एसडीएमध्आरओ एपी वाजपेयी ने कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते को 2990 मतों से विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र सौंपा। इसी तरह चेयरमैन पद पर बसपा के अशोक कुमार गौतम को 66 मत, समाजवादी पार्टी के अरविंद यादव को 244 मत, निर्दलीय अजीम अहमद को 578 मत, निसार अहमद को 674 और महीपाल यादव को 512 वोट मिले। नोटा को 54 मत पड़े। अध्यक्ष पर पद 853 मत निरस्त हुए।

दून और ऋषिकेश के दोनों वार्डों में खिला कमल
दून और ऋषिकेश के दो वार्डों में हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। देहरादून के आम वाला तरला वार्ड नंबर 61 में भाजपा की नीतू वाल्मीकि ने कांग्रेस की मोनिका को 190 मतों से मात दी। जबकि, ऋषिकेश के वार्ड नंबर तीन दुर्गा मंदिर में प्रियंका यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी को 356 मतों से हराया। उपचुनाव के लिए आठ जुलाई को मतदान हुआ था।
बुधवार सुबह देहरादून नगर निगम उपचुनाव की मतगणना निगम परिसर और ऋषिकेश में हुए उपचुनाव की मतगणना तहसील परिसर में हुई। दोपहर करीब एक बजे परिणामों की घोषणा की गई। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुदियाल ने बताया कि वार्ड नंबर 61 आमवाला तरला में नीतू वाल्मीकि को 1641 वोट पड़े। जबकि, उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की मोनिका को 1451 मत मिले। इस तरह नीतू ने मोनिका को 190 मतों से मात देकर पार्षद पद पर कब्जा किया।
उधर, ऋषिकेश के दुर्गा मंदिर वार्ड में कांग्रेस की श्यामा राजभर को 567 वोट मिले। जबकि, भाजपा की प्रियंका यादव को 923 वोट पड़े। प्रियंका यादव को 356 वोट से विजयी घोषित किया। नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले सप्ताह शपथ दिलाई जाएगी। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान किसी की कोई शिकायत नहीं आई है।

दोनों वार्डों पर था कांग्रेस का कब्जा
नवंबर-2018 में हुए नगर निगम चुनाव में दोनों वार्डों पर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए थे। दुर्गा मंदिर वार्ड ऋषिकेश में कांग्रेस की रीना गुप्ता विजयी हुई थीं। जबकि, आमवाला तरला देहरादून में रीता रानी जीती थीं। लेकिन, दोनों ही प्रत्याशियों के जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए चुनाव निरस्त कर दिए थे

कांवड़ मेले में सभी व्यवस्थाएं दुरस्त होः मुख्यमंत्री

कांवड़ शुरू होने से पूर्व सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाय। सफल कांवड़ मेला सम्पन्न कराने के लिए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों से भी निरंतर समन्वय बनाये रखें। कांवड़ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए सुनियोजित प्लानिंग की जाय। कावंड़ के दौरान सुरक्षा की चाक -चैबंद व्यवस्था की जाय। स्वास्थ्य, सफाई, पेयजल, टॉयलेट व अन्य आवश्यक सामग्रियों की समुचित व्यवस्था की जाय। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कांवड़ मेले की व्यवस्थाओं की बैठक लेते हुए अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 से 30 जुलाई 2019 तक होने वाले कांवड़ मेले को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। देहरादून, मसूरी व चारधाम यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों को रूड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश शहरों के बीच से न जाने के बजाय बाईपास से जाने के प्रेरित किया जाय। रूट चार्ट का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाय। कांवड़ यात्रा मार्गों पर सड़क, मेडिकल, पेयजल आदि की सुदृढ़ व्यवस्था की जाय। डाक कांवड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था व भीड़ प्रबंधन के लिए पूरी योजना बनाई जाय। व्यापार मंडल व संत समाज के साथ बैठक कर उनसे भी सकुशल कांवड़ सम्पन्न कराने के लिए सहयोग लिया जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि कांवड़ यात्रा मार्गों पर दिशा सूचक, रूट डायवर्जन साइनेज की समुचित व्यवस्था हो। कांवड़ के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था हो। कांवड़ यात्रा वाले मार्गों पर कहीं भी झूलते हुए बिजली के नंगे तार न हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ से पूर्व घाटों की सफाई की समुचित व्यवस्था की जाय। घाटों पर सुरक्षा के दृष्टिगत चैन व जल पुलिस की व्यवस्था की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ के दौरान स्पेशल ट्रेन की मांग रेलवे से की जाय। इस तरह से योजना बनाई जाय कि कांवड़ के दौरान निर्माण से संबंधित कार्य अवरूद्ध न हों। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार से कांवड़ की तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली।
पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि कांवड़ के दौरान लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। शान्तिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण कांवड़ सम्पन्न कराने के लिए 10 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जायेगी। सीमावर्ती प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के साथ कांवड़ के सम्बन्ध में कोर्डिनेशन मीटिंग की जा चुकी है। कांवड़ के लिए सीमावर्ती राज्यों के साथ 6 ज्वाइंट पुलिस चैकपोस्ट बनाये गयो हैं।
बैठक में बताया गया कि कांवड़ मेला क्षेत्र चार जनपदों हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी व टिहरी में है। कावंड़ मेला क्षेत्र में कुल 36 जोन व 149 सेक्टर बनाये गये हैं। जिसमें से जनपद हरिद्वार में 04 सुपर जोन, 26 जोन व 100 सेक्टर बनाये गये हैं।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव नितेश झा, शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डीजीपी कानून व व्यवस्था अशोक कुमार, मेलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपेन्द्र कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सी. रविशंकर व सबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

कार्य संस्कृति नही सुधारी तो समय से पूर्व मिल जाएगी सेवानिवृति

उत्तराखंड सरकार भी केन्द्र सरकार की राह पर चल पड़ी है। राज्य में भ्रष्ट और नकारा अफसरों को जबरन सेवानिवृत्ति देने की तैयारी की जा रही है। अब उत्तराखंड सरकार भी ऐसे अफसरों को समय पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने जैसा सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सचिवालय सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में इस सूची में 50 वर्ष की आयु पार कर चुके अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है। शासन के बाद विभिन्न महकमों में भी ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों का चिह्नीकरण किया जाएगा। सरकार की कार्यशैली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की केंद्र सरकार की पहल का अब राज्य भी अनुसरण करने लगा है।
उत्तराखंड सरकार इसकी शुरुआत शासन स्तर करने जा रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऐसे अधिकारियों को चिह्नित किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के अलावा जिन अधिकारियों की कार्यशैली अप्रभावी है और जिनका पिछला रिकार्ड इस लिहाज से संतोषजनक नहीं है, उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा।
शासन के बाद विभिन्न महकमों के ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें कार्य के प्रति लापरवाह, नकारा माना जाता है और जिन पर भ्रष्टाचार के मामले हैं या रहे हैं। हालांकि, उत्तराखंड के संदर्भ में सरकार के लिए इस मुहिम को आगे बढ़ाना आसान साबित होने वाला नहीं है, क्योंकि यहां पहले से ही अधिकारियों की खासी कमी है।

विजयवर्गीय की मौजूदगी में पीएम ने दुव्र्यवहार बर्दाश्त नही करने की चेतावनी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता पुत्रों के दुर्व्यवहार पर मंगलवार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो भी हो, चाहे वह किसी का भी बेटा हो, मनमानी नहीं चलेगी। इस तरह का अक्खड़पन, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों और उनका समर्थन करने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने बीते दिनों इंदौर में नगर निगम के एक अधिकारी को क्रिकेट बैट से पीटा था। इस पर कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
सत्रहवीं लोकसभा में संसदीय दल की पहली बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। चाहे वह किसी का बेटा हो, सांसद हो अहंकार नहीं होना चाहिए। ठीक से व्यवहार करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका सीधा इशारा आकाश विजयवर्गीय की घटना की तरफ था। बैठक में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे।
सदस्यता मुहिम का जिक्र करते हुए मोदी ने सांसदों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने को कहा। उन्होंने कहा कि हर बूथ पर पांच पेड़ लगाएं। उन्होंने इसे पंचवटी अभियान का नाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह जुलाई को वाराणसी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तेलंगाना से इसकी शुरुआत करेंगे।
मोदी ने कहा कि सांसद का चुनाव आसान नहीं होता है। जीत के बाद जवाबदेही बनती है। नए सांसदों के लिए संसद सीखने का सबसे बड़ा मंच है। उन्हें सदन में रहकर चर्चा में सक्रियता से हिस्सा लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने तीन तलाक विधेयक के मौके पर लोकसभा में सांसदों की कम उपस्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, उपस्थिति को लेकर सतर्क रहें।