गढ़वाल कमिश्नरी के 50 वर्ष पूरे होने पर पौड़ी को मिली कई सौगात

प्रदेश में साहसिक गतिविधियों के लिए अलग से निदेशालय बनाया जाएगा। पौड़ी में सीता माता सर्किट विकसित किया जाएगा। पौड़ी गढ़वाल में 200 करोड़ रूपए से अवस्थापना सुविधाओं का विकास होगा। पौड़ी में रोपवे बनाया जाएगा। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पौड़ी को कलर कल्चर देने का प्रयास किया जाएगा। देवाल में एनसीसी एकेडमी के लिए भूमि स्वीकृत कर दी गई है।

गढ़वाल कमिश्नरी के 50 वर्ष पूरे होने पर पौड़ी में विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने आए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को पौड़ी स्थित सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता करते हुए पौड़ी गढ़वाल सहित राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न निर्णयों की जानकारी दी। इस अवसर पर सहकारिता व उच्च शिक्षा मंत्री डा.धनसिंह रावत, विधायक दिलीप सिंह रावत, पौड़ी नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम, आयुक्त डा. बीवीआरसी पुरूषोत्तम भी उपस्थित थे।

पौड़ी में सीता माता सर्किट विकसित किया जाएगा
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि पौड़ी में ‘‘सीता माता सर्किट’’ विकसित किया जाएगा। पौराणिक महत्व के देवप्रयाग स्थित रघुनाथ मंदिर, देवाल स्थित लक्ष्मण मंदिर व फलस्वाड़ी स्थित माता सीता मंदिर को धार्मिक पर्यटन में सीता माता सर्किट के तौर पर विकसित करते हुए इसका प्रचार प्रसार किया जाएगा। इन धार्मिक स्थलों की स्थानीय लोगों में बड़ी मान्यता है परंतु अन्य प्रदेशों के लोगों के इनके बारे कम जानकारी है। इसलिए देश भर के श्रद्धालुओं को यहां के धार्मिक महत्व के बारे बताने के लिए प्रचार प्रसार किया जाएगा।

पौड़ी गढ़वाल में 200 करोड़ रूपए से होगा अवस्थापना सुविधाओं का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल में 200 करोड़ रूपए से अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिए निर्देशित किया गया है। इससे पार्कों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। माल रोड़ विकसित की जाएगी। पौड़ी बस अड्डा-कंडोलिया-किंकालेश्वर रोपवे बनाया जाएगा। पौड़ी, खिर्सू, सतपुली, जयहरिखाल आदि स्थानों में विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

स्थानीय सहयोग से पौड़ी में कलर-कल्चर
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पौड़ी को कलर कल्चर देने का प्रयास किया जाएगा। पिंक सिटी जयपुर की भांति ही कोशिश की जाएगी कि पौड़ी में इमारतें एक रंग में हों। इससे पौड़ी नगर को एक नई पहचान मिलेगी। लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि भवन निर्माण में पर्वतीय स्थापत्य का प्रयोग हो। इसके लिए आवास नीति में प्रावधान भी किया गया है। इससे बाहर से आने वाले हमारी स्थापत्य कला से परिचित होंगे।

साहसिक गतिविधियों के लिए बनेगा अलग निदेशालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहसिक गतिविधियों के लिए अलग से निदेशालय बनाया जाएगा। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को इसकी जिम्मेवारी दी जाएगी। हाई वेल्यु टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इसका निर्णय लिया गया है। साहसिक गतिविधियों में पर्वतारोहण, ट्रेकिंग,रॉक क्लाईम्बिंग, माउंटेन बाईकिंग, जिप वायर साईक्लिंग, बंगी जम्पिंग, हॉट एयर बैलून, पैराग्लाईडिंग, वाटर स्पोर्ट्स आदि शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक खर्चीले पर्यटक राज्य में आएं, जिससे यहां के युवाओं को रोजगार के साथ अच्छी आमदनी हो।

देवाल में एनसीसी एकेडमी के लिए भूमि स्वीकृत
देवाल में एनसीसी एकेडमी के लिए भूमि स्वीकृत कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनसीसी एकेडमी बनने पर प्रतिवर्ष यहां प्रशिक्षण के लिए 35-40 हजार लोग आएंगे। इससे यहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों को लाभ होगा। देशभर से आए लोग पौड़ी के बारे में परिचित होंगे जिससे यहां पर्यटन भी बढ़ेगा।

ल्वाली झील से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
ल्वाली झील से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ल्वाली झील में 70 लाख लीटर पानी एकत्र करने की क्षमता होगी। इससे जल-गतिविधियों के साथ यहां पीने के पानी की बैकअप व्यवस्था भी हो सकेगी।

पिथौरागढ़ में देश का सबसे बड़ा ट्यलिप गार्डन बनेगा
पिथौरागढ़ में देश का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन बनेगा। यहां 50 हेक्टेयर में ट्यूलिप गार्डन बनाया जाएगा। इस पर 50 करोड़ रूपए खर्च होंगे। यहां वर्ष में 8 महिने टृयूलिप के फूल देखने को मिलेंगे। पिथौरागढ़ हवाई पट्टी का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। टिहरी में सी-प्लेन के लिए 3 जुलाई को एमओयू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय में टिहरी में पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। राज्य सरकार के प्रयास सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

इन्वसर्ट समिट का असर, 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद

प्रदेश में आठ माह पूर्व हुए निवेश सम्मेलन का असर धरातल पर दिखने लगा है। सम्मेलन के दौरान किए गए समझौतों के बाद 98 योजनाओं पर काम होना शुरू हो गया है। इनमें तकरीबन 13261.83 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से लगभग 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में बीते वर्ष अक्टूबर में दो दिवसीय निवेश सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में लगभग एक करोड़ बीस लाख करोड़ रुपये निवेश के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए। इससे सरकार खासी उत्साहित भी थी। आठ माह बाद जो तस्वीर सामने आई है उसके मुताबिक प्रदेश में अभी तक 98 प्रस्तावों पर काम शुरू हो गया है। इनमें सबसे अधिक कार्य उद्योग के क्षेत्र में हुआ है। इसमें 32 योजनाओं पर काम चल रहा है, जिसमें 3692 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जताई गई है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार कल्याण के क्षेत्र में 26 योजनाओं पर काम चल रहा है और इसमें 861 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। रोजगार के लिहाज से देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी में सबसे अधिक उम्मीदें हैं। इसके तहत यहां पांच योजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 3217 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है और इससे 11730 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। निवेश के लिहाज से सबसे ज्यादा उम्मीदें पशुपालन क्षेत्र में हैं। इसके तहत तीन योजनाओं पर काम हो रहा है, जिसके अंतर्गत 3850 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मुख्य सचिव उद्योग मनीषा पंवार ने मंत्रिपरिषद के सामने ये आंकड़े प्रस्तुत किए। यह भी बताया गया कि निवेश सम्मेलन में हुए करार के अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के 211, सूचना प्रौद्योगिकी के दो बड़ी योजनाओं पर भी काम हो रहा है, जिनमें 2700 करोड़ का निवेश और 10832 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार भर्ती वाला कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर का हुआ शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस भर्ती केन्द्र के लिए भारत सरकार से 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इस भर्ती केन्द्र के लिए पूरा खर्चा भारत सरकार वहन करेगी। यह भर्ती केन्द्र ड़ेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। यह भर्ती केन्द्र केन्द्र चार राज्यों उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश और हरियाणा के लिए बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से प्रदेश के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। थलसेना, वायुसेना व नौसेना के भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में पहले से ही हैं। कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से राज्य के युवाओं को तटरक्षक बल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह रैबार कार्यक्रम का प्रतिफल है कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खुलने जा रहा है, जबकि देहरादून में देश का पहला ड्रोन एप्लिकेशन रिसर्च सेंटर खुल चुका है। उत्तराखण्ड में पांचवे धाम के रूप में सैन्यधाम को विकसित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देहरादून में जल्द ही भव्य शौर्य स्थल (सैन्यधाम) बनाया जायेगा। इसके लिए देहरादून में 70 बीघा जमीन का चयन कर लिया गया है। यह शौर्य स्थल सबके लिए प्रेरणा का केन्द्र बनेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रानीपोखरी में नेशनल लॉ युनिवर्सिटी बन रही है। इससे प्रदेश के युवाओं को विधि की पढ़ाई के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। राज्य में अधिक से अधिक पर्यटक आयें इसके लिए हवाई सेवाओं को विस्तार दिया जा रहा है। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर हैं। देश का 23वां सीपैट संस्थान डोईवाला में खोला गया है। सीपैट एक ऐसा संस्थान हैं, जिसमें कोर्स करने से रोजगार की बहुत प्रबल संभावनाएं हैं। इसमें जल्द ही डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी शुरू किये जायेंगे।

महानिदेशक कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गत वर्ष मुख्यमंत्री आवास में रैबार कार्यक्रम में प्रदेश की बड़ी हस्तियों का जो मंथन हुआ। उसके सुखद परिणाम आज हम सबके सामने हैं। डीजी कोस्टगार्ड ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का वासी होने के नाते मेरे मन में उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए कुछ करने की तमन्ना थी। उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर हो यह मुख्यमंत्री का ख्वाब था और मेरी ख्वाईश थी जिसका परिणाम है कि आज मंजिल हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती केन्द्र लगभग डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जायेगा। कोस्टगार्ड द्वारा एसडीआरएफ को आपदा से बचाव राहत कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की कोस्टगार्ड विश्व की चौथी सबसे बड़ी कोस्टगार्ड है। काम के मामले में आज भी सबसे आगे है। उन्होंने इस भर्ती केन्द्र के लिए अपेक्षित भूमि आवंटन करने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

खुशखबरीः रिक्त पदों पर 10 जुलाई तक विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा निदेशालय समेत प्रदेश के पांच सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों व अन्य कार्मिकों के एक हजार पदों की भर्ती की जाएगी। सरकार ने सभी कुलपतियों को 10 जुलाई तक रिक्त पदों की विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दिए हैं।
इन नियुक्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। दून विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विवि, आवासीय विवि में बंपर नौकरियां खुलने वाली है। इन विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी और स्टाफ नियुक्ति करने के लिए सरकार ने सभी कुलपतियों को रिक्त पदों की विज्ञप्ति 10 जुलाई तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं उच्च शिक्षा निदेशालय में भी लेखाकार, क्लर्क समेत अन्य कार्मिकों के 186 पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। नेट क्वालीफाई और पीएचडी धारकों को असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर प्राथमिकता मिलेगी।
वहीं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के पांच विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा निदेशालय में सैकड़ों पर पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए कुलपतियों को 10 जुलाई तक विज्ञप्ति निकालने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश सरकार इस साल को रोजगार वर्ष के रूप में मना रही है। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों से उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरी का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी होगी।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।

कृषि उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास करना जरुरीः त्रिवेन्द्र रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सर्वे चैक स्थित आईआरटीडी आडिटोरियम में राज्य स्तरीय शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि से संबधित एक दिवसीय कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में आजीविका का सबसे मुख्य साधन कृषि है। हमारी लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए कृषि कार्यों में उत्पादन लागत कम करने व प्रोडक्शन में वृद्धि पर विशेष ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने तथा उसकी लागत कम करने के लिए प्राकृतिक कृषि से संबंधित पालेकर कृषि माॅडल उपयोगी साबित हो सकता है। विशेषकर उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक कृषि काफी कारगर साबित हो सकती है। प्राकृतिक खेती में जैव अवशेषों, कम्पोस्ट व प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग किया जाता है, जो पर्वतीय क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध होते हैं। प्राकृतिक खेती से कृषकों पर व्यय भार भी नहीं पड़ेगा व उत्तम गुणवत्ता के उत्पादों में भी इजाफा होगा। प्राकृतिक खेती कृषि, बागवानी व सब्जी उत्पादन के लिए उपयोगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में रासायनिक उत्पादों का प्रयोग कम से कम हो इसके लिए राज्य में प्रभावी प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर कौशल विकास व कृषि विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालेकर कृषि माॅडल हिमांचल प्रदेश में भी सफल हुआ है। उत्तराखण्ड में इस माॅडल पर विस्तृत अध्ययन कराया जायेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इसके लिए एक कमेटी भी बनाई जायेगी।
पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि परम्परागत खेती व रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्राकृतिक खेती में लागत ना के बराबर है जबकि यह मृदा की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने व शुद्ध पौष्टिक आहार का एक उत्तम जरिया है। उन्होंने कहा कि उद्योग व रासायनिक कृषि वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख कारक हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को एक मिशन के रूप में लिया जा रहा है। इसके लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं है। यह कृषि राज्य में उपलब्ध संसाधनों से आगे बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हिमांचल में प्राकृतिक कृषि पर कार्य किया जा रहा है। जिसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। उत्तराखण्ड व हिमांचल की भौगोलिक व आर्थिक स्थिति में काफी समानता है। देश की कृषि व्यवस्था सुदृढ़ होगी तो आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
इस अवसर पर विधायक खजानदास, रेशम बोर्ड के अध्यक्ष अजीत चैधरी, बीज बचाओ आन्दोलन के प्रणेता विजय जड़धारी, सचिव कृषि डी सेंथिल पांडियन, डाॅ. देवेन्द्र भसीन, वृजेन्द्र पाल सिंह व विभिन्न विश्वविद्यालयों के कृषि विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर समय से हो अमलः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव सभागार में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति विषयक बैठक मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागो से सम्बन्धित घोषणाओं की क्रमवार समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी द्वारा की जाने वाली घोषणाओं से सम्बन्धित समीक्षा बैठक से पूर्व ज्यादा से ज्यादा घोषणाओं की स्थिति को पूर्ण एवं स्पष्ट कर लिया जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि घोषणाओं को पूर्ण करने में लापरवाही न की जाए। घोषणाओं के पूर्ण होने में आ रही समस्याओं का प्रस्ताव बनाया जाए चाहे वह वित्त से सम्बन्धित हो या जमीन से। मुख्य सचिव ने सभी विभागो के घोषणाओं के पूर्ण होने की प्रगति पर सन्तोष जाहिर करते हुए निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कतिपय घोषणाओ में बजट की मांग पर शीघ्र बजट का प्राविधान कराने के लिये प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने शहरी विकास, ग्राम्य विकास एवं अन्य महत्वपूर्ण विभागों की विस्तार से समीक्षा करने के निर्देश देते हुए संबंधित सचिवों को एक सप्ताह में सम्पूर्ण विवरण सहित समीक्षा हेतु उपस्थित होने के निर्देश दिये।
उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के लिये कैरियर ट्रेनिंग कराने की घोषणाओं के अन्तर्गत छूट गए महाविद्यालयों के परिसर में कैरियर ट्रेनिंग शीघ्र ही आरम्भ की जाए। उन्होंने कहा कि जिन महाविद्यालयों की घोषणाओं में जमीन की उपलब्धता में समस्या आ रही है ऐसे प्रकरणों को अपने स्तर सहित जिलाधिकारियों के स्तर से भी कार्यवाही करें। राजकीय महाविद्यालय मालदेवता में 4 कक्षा कक्ष निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है। नारायणबगड़ में महाविद्यालय की स्थापना हेतु जमीन स्थानान्तरण रजिस्ट्री की प्रक्रिया गतिमान है।
शहरी विकास की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिये कि घोषणाओं को पूर्ण करने में और तेजी लायी जाए। शौचालय निर्माण एवं स्ट्रीट लाइट जैसे महत्वपूर्ण कार्य में देरी न की जाए। स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य में तेजी लायी जाए। लच्छीवाला में पार्किंग निर्माण की समस्या का निराकरण जल्द ही किया जाए। धनोल्टी ईको पार्क के विस्तार, मूनि की रेती में ईको पार्क की स्थापना, धनोल्टी में ट्रैक रूट, हर की दून- तालुका ट्रैक मार्ग के निर्माण की कार्य प्रक्रिया में तेजी लायी जाए। युवा कल्याण विभाग के अन्तर्गत मिनी स्टेडियमों के लिए जहां भूमि संबंधी दिक्कत आ रही हैं, वहां जिलाधिकारी स्तर से प्रयास किए जाएं।
बैठक में प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, सचिव अमित नेगी, डा. भूपिन्दर कौर औलख, दिलीप जावलकर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

पालेकर के सुझावों से उत्तराखंड में कृषि उत्पादन को मिलेगा बढ़ावाः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिये पद्मश्री सुभाष पालेकर के सुझावों पर अमल किया जायेगा। इसके लिये शीघ्र ही प्रदेश में जनजागरूकता के लिये कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा, इसके साथ ही उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति से शीघ्र प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में शिमला व महाराष्ट्र में आयोजित होने वाली कार्यशाला में सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों एवं कृषि विशेषज्ञों के प्रतिभाग के भी निर्देश दिये हैं ताकि इसकी व्यापक जानकारी होने के साथ ही अधिक से अधिक किसान इससे जुड सकेंगे।
मुख्यमंत्री आवास में पद्मश्री सुभाष पालेकर, लोक भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजेन्द्र व गोपाल उपाध्याय के साथ ही शासन के उच्चाधिकारियों व सम्बंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने पालेकर के सुझावों को राज्य हित में बताते हुए उनके सुझावों पर अमल करने के निर्देश अधिकारियों को दिये।
पालेकर ने कहा कि उत्तराखण्ड की जैव विविधता ज्यादा है। यहां के वनों को कृषि के साथ जोड़कर प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम उत्तराखण्ड को वास्तव में देवभूमि बनाने में मददगार हो सकेंगे। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसकी विशेषताओं व विशिष्टताओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि से हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं। इसकी बेहतर मार्केटिंग से आय के साधनों में वृद्धि होगी। पर्यावरण को बचाने, आर्थिक व सामाजिक बदलाव के साथ ही पारम्परिक खेती को बचाये रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस पर सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने इसके लिये हर सम्भव सहायता का आश्वासन भी मुख्यमंत्री को दिया है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव भूपिन्दर कौर औलख, अमित नेगी, डी0 सैंथिल पांडियन, जिलाधिकारी देहरादून एस ए. मुरूगेशन सहित जीबीपंत कृषि विश्व विद्यालय व अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी व कृषकगण उपस्थित थे।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के लिए विशेष फंड की व्यवस्था होः बलूनी

उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने उत्तराखंड में हो रहे भारी पलायन की समस्या के निदान के उद्देश्य से उत्तराखंड के दस पर्वतीय जिलों के लिए आगामी बजट में विशेष फंड के प्रावधान की माग की है। बलूनी ने इस सिलसिले में नई दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की।
सासद बलूनी ने केंद्रीय वित्त मंत्री से भेंट के दौरान कहा कि उत्तराखंड में पलायन के कारण सैकड़ों गाव निर्जन (घोस्ट विलेज) घोषित हो चुके हैं और यह क्रम अब भी तेजी से जारी है। इस भयावह समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है ताकि मूलभूत सुविधाओं और सामान्य से रोजगार के लिए होने वाले पलायन के उन्मूलन के लिए धरातल पर व्यवहारिक नीति बन सके और ठोस कार्य हो सके। उत्तराखंड के पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ तथा नैनीताल जिलों का पर्वतीय क्षेत्र पलायन की समस्या से अत्यधिक ग्रस्त है।
सासद बलूनी ने कहा की आगामी बजट में अगर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के लिए विशेष फंड की व्यवस्था होती है तो यह राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस हिमालयी राज्य के लिए जीवनदान भी होगा। उन्होंने कहा कि वह इस क्रम में विभिन्न मंत्रालयों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से संवाद कर इस कड़ी को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ढाचागत अवस्थापना विकास के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो वह पलायन रोकने में कारगर होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार इस विषय में गंभीरता से विचार करेगी।

पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा की रिपोर्ट से पलायन का सच आया सामने

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से लोग पलायन कर रहे हैं। अल्मोड़ा जनपद में वर्ष 2001 से 2011 तक दस सालों में करीब 70 हजार लोग पैतृक गांव से पलायन कर गए। 646 पंचायतों से 16207 लोगों ने स्थायी रूप से गांव छोड़ दिया है। इसका खुलासा पलायन आयोग की रिपोर्ट में हुआ है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सीएम आवास पर पलायन आयोग की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद की पलायन रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में सल्ट, भिकियासैंण, चैखुटिया, स्याल्दे विकासखंड से सबसे ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। इन ब्लाकों के कई गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन नहीं है, जिससे लोग जनपद मुख्यालय और प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में जाकर बस गए हैं।
वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि जनपद की 11 विकासखंडों से 7.13 प्रतिशत लोगों ने गांव के नजदीकी शहरी क्षेत्रों में पलायन किया है।
जबकि 13 प्रतिशत ने जनपद मुख्यालय, 32.37 प्रतिशत ने प्रदेश के अन्य जनपदों में, 47.08 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर पलायन कर चुके हैं। देश से बाहर पलायन करने वाले की संख्या 0.43 प्रतिशत है। 2011 के बाद जनपद के 80 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 50 प्रतिशत आबादी कम हुई है। वहीं, 63 गांवों में सड़क, 11 गांवों में बिजली, 34 गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में पेयजल और 71 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न होने से 50 प्रतिशत आबादी घटी है।

रिपोर्ट पर एक नजर ….

– 2011 की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की 6 लाख 22 हजार 506 आबादी
– 89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
– 3189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है अल्मोड़ा जनपद
– जनपद में रहने वाले परिवारों की संख्या एक लाख 40 हजार 577
– दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों की आबादी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी