मुख्यमंत्री ने की देहरादून से काठगोदाम के बीच सुबह के समय एक ट्रेन चलाने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से भेंट कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन की स्वीकृति वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली व हल्द्वानी के मध्य एक विशेष रेलगाड़ी व देहरादून से काठगोदाम के लिए सुबह के समय एक शताब्दी या जनशताब्दी गाड़ी प्रारम्भ करने के साथ ही रूड़की-देवबंद परियोजना के अवशेष कार्यों का वित्त पोषण रेल मंत्रालय भारत सरकार से किए जाने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर-बागेश्वर नई रेल लाईन एक महत्वपूर्ण प्रस्तावित रेल परियोजना है। वर्तमान में टनकपुर तक रेल लाईन स्थापित है। परंतु कुमायूं मण्डल के अन्य जनपद पिथौरागढ़, बागेश्वर पूर्ण रूप से पर्वतीय होने के कारण यहां आवागमन कठिन है। इस क्षेत्र के सामाजिक व आर्थिक विकास की प्रक्रिया को तेज करने, पर्यटक स्थलों का विकास करने व स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग करने के लिए टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना अति आवश्यक है। राज्य की सीमाएं नेपाल व चीन से लगी होने के कारण इसका सामरिक महत्व भी है। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन की स्वीकृति इसी वित्तीय वर्ष 2019-20 में किए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री को अवगत कराया कि देहरादून व कुमायूं क्षेत्र जिसका अंतिम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है के मध्य वर्तमान में सुबह व दोपहर के समय कोई भी सीधी रेल सेवा नहीं है। देहरादून व कुमायूं के मध्य काफी संख्या में पर्यटकों व यात्रियों की आवाजाही रहती है। सुबह के समय कोई रेलगाड़ी न होने के कारण लोगों को शाम तक इंतजार करना पड़ता है। इसलिए जनता के हित में देहरादून से हल्द्वानी/काठगोदाम के मध्य सुबह 5 से 6 बजे के बीच एक शताब्दी या जनशताब्दी गाड़ी की सेवा तुरंत प्रारम्भ की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली से हल्द्वानी के मध्य रेलगाड़ियों की संख्या यात्रियों व पर्यटकों के दृष्टिगत काफी कम है। इसलिए दिल्ली व हल्द्वानी के मध्य एक विशेष रेलगाड़ी की सेवा प्रारम्भ की जाए तो इससे पर्यटकों को भी काफी सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में रेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा रूड़की-देवबंद परियोजना की लागत 791.39 करोड़ रूपए पुनर्निधारित की गई है। साथ ही इस रेल परियोजना की लागत का वहन रेल मंत्रालय व उत्तराखण्ड राज्य के मध्य 50ः50 के अंशदान में किए जाने पर सहमति प्रदान की गई थी। रूड़की-देवबंद परियोजना की कुल लम्बाई 27.45 किमी है। इसके तहत उत्तर प्रदेश का लगभग 94 हेक्टेयर व उत्तराखण्ड का लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र आ रहा है। वर्तमान में रेल मार्ग द्वारा देवबंद (सहारनपुर) से रूड़की (हरिद्वार) आने के लिए अनावश्यक रूप से लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। प्रस्तावित रूड़की-देवबंद रेल लाईन के निर्माण से यात्रियों के समय की बचत होगी और यातायात सुगम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में परियोजना की कुल लागत 791.39 करोड़ रूपए है। इसके सापेक्ष उत्तराखण्ड राज्य द्वारा 240 करोड़ रूपए का अंशदान परियोजना में किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए रूड़की-देवबंद परियोजना में उत्तराखण्ड द्वारा वर्तमान तक दिए गए अंशदान को पर्याप्त मानते हुए प्रोजेक्ट के अवशेष कार्यों का वित पोषण रेल मंत्रालय भारत सरकार से करवाया जाए।

चुनौती को अवसर में बदलने का कार्य करुगां, अपेक्षाओं पर खरा उतरुगांः निशंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक आज देहरादून में कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए। निशंक ने कहा- मंत्री बनने के साथ ही काम शुरू हो चुका है। 100 दिन में काम के लक्ष्य हमारे सामने हैं। पहले उन्हें साधना है। उसके बाद ही वे अपने मंत्रालय की जानकारियों को लेकर प्रेस के सामने आएंगे।
डॉ. निशंक प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह कार्यक्रम में जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। अपने करीब आधे घंटे के संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्होंने भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री सरीखा अहम मंत्रालय देंगे। उनका तो पर्यटन और संस्कृति में मन था। कहा-‘मेरे लिए ये बड़ी चुनौती है। मैं इसे अवसर में बदलने का प्रयास करूंगा। प्रधानमंत्री ने मुझ पर बहुत भरोसा किया है। मैं समझ लूं कि प्रधानमंत्री जी क्या चाहते हैं। जितनी भी क्षमता है लगा दूंगा किंतु उत्तराखंड का माथा नीचे नहीं होने दूंगा।’
निशंक ने कांग्रेस पर निशाना साधा तो प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस ने देश को चैराहे पर ला खड़ा किया था। लेकिन भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया और उनके नेतृत्व में देश लगातार नई ऊंचाई छू रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की तारीफ की। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर, देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा ने भी निशंक ने भी कार्यकर्ता संबोधन किया और निशंक को केंद्रीय मंत्री बनाने का पीएम मोदी का आभार प्रकट किया। प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल ने कार्यकर्ताओं का आभार जताया। पार्टी विधायक खजानदास ने कार्यक्रम का संचालन किया।

एचआरडी मंत्री निशंक ने किए बदरी-केदार के दर्शन
केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री बनने के बाद पहली बार डा. रमेश पोखरियाल निशंक शनिवार को दोनों बेटियों के साथ बदरी-केदार के दर्शन किए। उन्होंने दोनों धामों की पूजा में भी भाग लिया। साथ ही तीर्थयात्रियों, पुरोहितों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक बेटियों के साथ सुबह पौने आठ बजे केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने बाबा केदार के दर्शन कर करीब आधा घंटे तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने तीर्थ पुरोहितों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं और समस्याओं पर प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें मंत्री बनने पर बधाई देते हुए अभिनंदन पत्र सौंपा।

इसके बाद वह दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर बदरीनाथ मंदिर पहुंचे। यहां बीकेटीसी अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल, पूर्व विधायक अनिल नौटियाल और मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने उनका फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। वह 25 मिनट तक मंदिर में आयोजित पूजा में शामिल हुए। डा. निशंक ने धाम में यात्रा व्यवस्थाओं पर संतुष्टि जताई। इस मौके पर विधायक भरत सिंह, जिलाध्यक्ष विजय कप्रवाण, महामंत्री अजय सेमवाल, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष अशोक खत्री, वाचस्पति सेमवाल, आशा नौटियाल, चंडी प्रसाद भट्ट, मंदिर समिति के सदस्य चंद्रकला ध्यानी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, धीरज पंचभैया मोनू, डिमरी पंचायत अध्यक्ष राकेश डिमरी और मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने की केंद्र को प्रेषित प्रस्तावों को जल्द स्वीकृत करने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट कर नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत केंद्र को भेजे गए विभिन्न प्रस्तावों को जल्द स्वीकृत करने का अनुरोध किया। इनमें केदारपुरी क्षेत्र में 67 करोड़ 64 लाख रूपए लागत से सीवेज प्रबंधन, गंगा की सहायक नदियों सुसवा, कोसी, ढ़ेला, कल्याणी, भेला, पिलाखर, नन्दौर व किच्छा में गिरने वाले नालों के प्रदूषित जल के उपचार के लिए 545 करोड़ 14 लाख रूपए लागत की आठ परियोजनाएं, काशीपुर आई.एण्ड डी व एसटीपी की 97 करोड़ 79 लाख रूपए लागत की परियोजना, केदारनाथ यात्रा के दृष्टिगत महत्वपूर्ण 21 करोड़ 62 लाख रूपए लागत की गौरीकुण्ड सीवेज परियोजना, अगस्तमुनि की 27 करोड़ 17 लाख रूपए लागत की आईएंडडी व एसटीपी परियोजना व शारदा नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए 43 करोड़ 49 लाख रूपए लागत की टनकपुर सीवेज आईएंडडी व एसटीपी परियोजना शामिल हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी की निर्मलता व अविरलता भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। वर्तमान में नमामि गंगा के अंतर्गत प्रथम चरण में गंगा नदी में विभिन्न नालों व सीवर के पानी से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए उत्तराखण्ड राज्य के चिन्हित 15 प्राथमिकता के नगरों में 1005.11 करोड़ लागत की कुल 21 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके सापेक्ष वर्ष 2017-18 में स्वीकृत की गई 18 योजनाओं में से 8 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, 6 योजनाएं अगस्त 2019 तक, 3 योजनाएं दिसम्बर 2019 तक व 1 योजना फरवरी 2020 तक पूरी कर ली जाएंगी। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में स्वीकृत की गई 03 योजनाओं के संबंध में निविदा प्रक्रिया गतिमान है। इन प्राथमिकता के नगरों में चिन्हित 135 नालों में से 70 नालों को टैप किया जा चुका है और शेष 65 नालों में 61 नालों के लिए इंटरसेप्शन एंड डाईवर्जन की योजनाएं नमामि गंगे परियोजना के तहत स्वीकृत की गई है। इनमें से भी 30 नालों को टैप किया जा चुका है।

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मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से हरिद्वार महाकुंभ के लिए मांगी वित्तीय मदद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय मंत्री शेखावत से सिंचाई विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य की केन्द्र पुरोनिधानित निर्माणाधीन योजनाओं को पूर्ण करने के लिए अवशेष केन्द्रांश 142 करोड़ 52 लाख रूपए व लघु सिंचाई विभाग की केन्द्र पोषित योजनाओं को पूर्ण करने के लिए अवशेष धनराशि 63 करोड़ 57 लाख रूपए यथाशीघ्र अवमुक्त करने के साथ ही लघु सिंचाई विभागके अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं के कार्यों को पूर्ण कराए जाने की समयावधि 31 मार्च 2020 तक विस्तारित करने का भी अनुरोध किया।

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मुख्यमंत्री ने की 17 प्रान्तीय मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा केंद्र को नमामि गंगे योजना में प्रेषित प्रस्तावों की शीघ्र स्वीकृति के लिए मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री द्वारा इस पर जल्द समुचित कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया गया।

मुख्यमंत्री ने की 17 प्रान्तीय मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की। चारधाम परियोजना के अंतर्गत सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत ऋषिकेश बाई पास के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत भारत सरकार द्वारा वहन की जाए। केन्द्रीय सड़क निधि के तहत लगभग 454 करोड रूपए लागत की 19 अतिरिक्त योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर 17 प्रान्तीय मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने व हरिद्वार रिंग रोड की स्वीकृति देने का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में हरिद्वार में महाकुम्भ मेले का आयोजन किया जाना है। इसमें सम्भावित यातायात दबाव से निपटने के लिए हरिद्वार शहर में रिंग रोड़ का निर्माण कराया जाना बहुत जरूरी है। रिंग रोड की अनुमानित लम्बाई 47 किमी व लागत 1566 करोड़ रूपए आंकलित की गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इसकी डीपीआर का मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए रिंग रोड़ का संरेखण कर लिया गया है। अब इसके निर्माण की स्वीकृति भारत सरकार से की जानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त हरिद्वार में यातायात के दबाव को कम करने के लिए गंगा नदी पर जगजीतपुर (कनखल) के निकट 2.5 किमी स्पान के चार लेन सेतु का निर्माण भी आवश्यक है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मुजफ्फरनगर-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन में बदलने का कार्य एनएचएआई द्वारा किया जा रहा है। आगामी महाकुम्भ 2021 के आरम्भ होने से पहले इस प्रखण्ड में फोर लेनिंग का कार्य पूर्ण किया जाना अति आवश्यक है। केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत वर्ष 2018-19 में स्वीकृत कार्यों के अतिरिक्त राज्य की भौगोलिक आवश्यकताओं को देखते हुए 19 अन्य योजनाओं की स्वीकृति जरूरी है। लगभग 454 करोड़ लागत की इन योजनाओं के प्रस्ताव केन्द्र को भेजे जा चुके हैं। 17 प्रान्तीय मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के लिए भी अनुरोध किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चार धाम परियोजना के अंतर्गत ऋषिकेश में लगभग 17 किमी का बाईपास सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत किया गया है। इस बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत लगभग 250 करोड़ रूपए है। जिस तरह से चारधाम महामार्ग परियोजना में भूमि अधिग्रहण की लागत भारत सरकार द्वारा वहन की जा रही है, उसी तर्ज पर इस 17 किमी ऋषिकेश बाईपास की भूमि अधिग्रहण की लागत भी भारत सरकार करे।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराण्ड में केन्द्र सरकार द्वारा अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी से सभी प्रस्तावों पर जल्द स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय उत्तराखण्ड की हर सम्भव मदद के लिए तत्पर है।

ग्रामीणों और किसानों को मिले ग्राम्य परियोजनाओं का लाभः मुख्यमंत्री

ग्राम्य उत्पादों की मार्केटिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। आजीविका में संचालित प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के लिए वरिष्ठ अधिकारी नियमित तौर पर फील्ड विजिट करें। ग्रामीणों व किसानों को परियोजना का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। सचिवालय में एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उक्त निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजीविका, ग्रामीण परिवारों को सक्षम बनाने के अपने उद्देश्य में सफल हो सकें, इसके लिए उन्हें बाजार अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। योजना की धरातल पर सफलता के लिए जरूरी है कि बड़े अधिकारी नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें। यात्रा मार्ग पर फूलों के क्लस्टर विकसित किए जाएं। प्रसाद योजना का केदारनाथ व बद्रीनाथ के साथ अन्य मंदिरों में विस्तार किया जाए। प्रसाद निर्माण की प्रक्रिया में साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाए। आजीविका के जिन केंद्रों पर बहुत अच्छा काम हुआ है, वहां स्कूल-कॉलेज के छात्रों का भ्रमण कराकर प्रोत्साहित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना वर्तमान में उत्तराखण्ड में 11 पर्वतीय जनपदों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, पिथौरागढ़, देहरादून, रूद्रप्रयाग, पौड़ी, नैनीताल व चम्पावत के 44 विकासखण्डों में संचालित की जा रही है। परियोजना की कुल लागत 868 करोड़ 60 लाख रूपए है। इसके वित्तपोषण में 63 प्रतिशत आईफैड, 14 प्रतिशत राज्य सरकार, 19 प्रतिशत लाभार्थियों को बैंक फाईनेंस व 4 प्रतिशत लाभार्थी अंशदान है।

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परियोजना के प्रमुख घटक खाद्य सुरक्षा एवं आजीविका संवर्धन, सहभागी जलागम विकास, आजीविका वित्तपोषण व परियोजना प्रबंधन है। उत्तराखण्ड के एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) को भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग ने लैंडमार्क प्रोजेक्ट के रूप में मान्यता दी है। अनेक देशों में यहां के प्रोजेक्ट को दोहराया गया है। इस परियोजना में उत्तराखण्ड के 11 पर्वतीय जनपदों के 44 विकासखण्ड, 3470 गांव आच्छादित किए गए हैं। इससे 13702 उत्पादक, निर्बल उत्पादक, स्वयं सहायता समूह के 126000 सदस्य लाभान्वित हो रहे हैं। परियोजना में सिंचाई के लिए 3291 एलडीपीई टैंकों का निर्माण किया गया है। 1828 हेक्टेयर में फेंसिंग द्वारा फसलों को सुरक्षा प्रदान की गई है। 650 हेक्टेयर में चारा विकास कार्यक्रम संचालित हैं। आजीविका परियोजना में 918 बंजर भूमि को उपयोग के तहत लाया गया है। इसी प्रकार 150 क्लस्टर स्तरीय कलेक्शन सेंटर, 599 ग्राम स्तरीय स्मॉल कलेक्शन सेंटर व 129 नेनो पेकेजिंग यूनिट की स्थापना की गई है।
वेल्यू चैन के तहत 4898 समूह बैमोसमी सब्जियां, 4590 समूह डेरी, 3800 समूह मसाले, 4290 समूह पारम्परिक अनाज, 1875 समूह दालें, 3650 समूह फल, 1750 समूह गैर कृषि सेवा क्षेत्र, 798 समूह बकरी पालन, 367 समूह मुर्गी पालन, 290 समूह औषधीय व सगंध पौध, 89 समूह इको-टूरिज्म व 276 समूह गैर कृषि उद्यम से जुड़े हैं। मार्केटिंग के लिए हिलांस नाम से ब्रांड विकसित किया गया है। अनेक बड़ी संस्थाओं से टाई अप किया गया है। अल्मोड़ा में फल व सब्जियों के लिए मदर डेरी, चमोली में आलू के लिए एपीएमसी मंडी हल्द्वानी, उत्तरकाशी में सेब के लिए एफएफटी हिमालयन फ्रेश प्रोड्यूस लि., अल्मोड़ा में पारम्परिक फसलों के लिए ऑरगेनिक इंडिया एसओएस ऑरगेनिक प्रा.लि., पिथौरागढ़ में सोप नट्स के लिए हार्वेस्ट वाईल्ड ऑरगेनिक सोल्यूशन प्रा.लि., अल्मोड़ा में ओएसवी के लिए विनोधरा बायोटेक, अल्मोड़ा व बागेश्वर में मंडुआ बिस्किट के लिए ट्राईफेड, चमोली में कुटकी के लिए इमामी, कृष्ण ट्रेडर्स, चमोली में सब्जियों के लिए मोनाल होटल, देहरादून में फल व सब्जियों के लिए एसएस ट्रेडर व दिल्ली टोमटो कम्पनी दिल्ली से टाई अप किया गया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में बागेश्वर में आजीविका परियोजना के अंतर्गत संचालित महिला समूह द्वारा उत्पादित मंडुवा बिस्किट का जिक्र किया था। प्रसाद योजना के तहत वर्तमान में जागेश्वर, बैजनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ, कोटेश्वर, गंगोत्री, महासू, सिद्धबली व सुरकंडा देवी, कुंजापुरी में स्थानीय समूहों द्वारा प्रसाद बनाकर वितरण किया जा रहा है। अभिनव प्रयास करते हुए आईटीसी ग्रुप के साथ सीएसआर के अंतर्गत मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों व पत्तियों को रिसाईकल कर समूहों द्वारा धूपबत्ती बनाने का काम किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, अपर सचिव रामविलास यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पंत के सपनों को अब कौन लगायेगा पंख!

उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की मौत के साथ ही उनकी ये दिली इच्छा भी अधूरी रह गई। प्रकाश पंत उत्तराखंड के जागेश्वर और बागेश्वर को एक ट्रैक रूट में जोड़कर पांचवां धाम बनाने की ख्वाहिश रखते थे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत आखिरी बार 14 जनवरी को उत्तरायणी मेले का शुभारंभ करने के लिए बागेश्वर आए थे। यहां की जनता और जन प्रतिनिधियों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाने की मांग की थी। इस पर उन्होंने आश्वासन दिया था कि अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर और कुमाऊं की काशी के बागनाथ मंदिर तक सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए एक रूट बनाएंगे।

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ठीक होकर आने का वादा किया था, लेकिन साथ छोड़ दिया- मुख्यमंत्री

इसको नाम दिया जाएगा पांचवां धाम। उन्होंने कहा था कि उनकी ख्वाहिश भी है कि उत्तराखंड में चार धाम के साथ एक और पांचवां धाम बनाया जाए। पंत के आश्वासन के बाद बागनाथ नगरी में पर्यटन की उम्मीदें बढ़ीं थीं, लेकिन उनके निधन के साथ ही यह ख्वाहिश भी अधूरी रह गई है।नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने वित्त मंत्री प्रकाश पंत के निधन पर शोक जताते हुए बताया कि, पर्यटन के लिहाज से पिछड़े जिलों में टूरिज्म को बढ़ाने का उनका लक्ष्य था। इस वजह से उन्होंने देश और दुनिया में मशहूर उत्तरायणी मेले के लिए बागेश्वर को पांचवां धाम बनाने का आश्वासन दिया था। पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने बताया कि जनता लंबे समय से उत्तरायणी मेले को राजकीय बनाने की मांग कर रही थी। इस पर पंत ने उत्तरायणी मेले को राजकीय मेला घोषित करने के लिए हर मदद का आश्वासन दिया था।

अब हिंदी अनिवार्य नही, मोदी सरकार का बड़ा फैसला

सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर दिया है। अब हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। संशोधित मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले के तहत छात्र अब कोई भी तीन भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि इनमें एक साहित्यिक भाषा जरूरी होगी। पुराने मसौदे में हिंदी, अंग्रेजी के साथ कोई एक स्थानीय भाषा पढ़ने का प्रावधान था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में यह बदलाव सोमवार को गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों, से उठ रहे विरोध के सुर को देखते हुए किया गया है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से हुई थी, जहां द्रमुक सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए थे।

द्रमुक के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। हालांकि, सरकार ने कहा था कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यह अभी एक शुरुआती मसौदा है। सभी पक्षों से सलाह के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।
संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लचीला कर दिया गया है। अब इनमें किसी भी भाषा का जिक्र नहीं है। छात्रों को कोई भी तीन भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से दो भाषा पढ़ाई जा रही है। इनमें एक स्थानीय और दूसरी अंग्रेजी है। हालांकि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में यह साफ कहा गया है कि स्कूली छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी।

नई शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर यह विवाद तब खड़ा हुआ है, जब सरकार ने इसे 31 मई को जारी कर लोगों से सुझाव मांगे। इसके तहत कोई भी व्यक्ति 30 जून तक अपने सुझाव दे सकता है। शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर मिल रहे सुझावों पर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नीति तैयार करने वाली कमेटी भी पैनी नजर रख रही है।

तीर्थनगरी की गौरांगी ने सीबीएसई 12वीं परीक्षा में देश में दूसरा व उत्तराखंड में किया टॉप

तीर्थ नगरी की गौरांगी चावला ने ऑल इंडिया सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 498 अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि प्रदेश में टॉप किया है।

चंद्रेश्वर नगर निवासी श्वेता चावला और अनिल चावला की छोटी पुत्री गौरांगी चावला ने अंग्रेजी में 99, पॉलीटिकल साइंस में 99 और इतिहास, फिजिकल एजुकेशन तथा जियोग्राफी विषय में 100 अंक प्राप्त किए हैं। उत्तराखंड टॉपर गौरांगी के पिता अनिल चावला व्यवसाय तथा माता श्वेता चावला घरेलू महिला है। परिवार में दादी दर्शना देवी, बड़ी दीदी अर्पणा चावला भी है।

गौरांगी चावला ने बताया कि प्रतिदिन वह 05 घंटे पढ़ाई करती थी। परीक्षा के दौरान उन्होंने पढ़ाई का समय बढ़ाकर 09 घंटे कर दिया। गौरांगी ने दसवीं की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।

पढ़ाई को बोझ न समझे बल्कि रुचि लेः गौरांगी
बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए गौरांगी ने कहा कि हमेशा चिंता मुक्त रहें, पढ़ाई को कभी भी बोझ ना समझे। बल्कि इसमें रुचि लें। जब भी मन करे पढ़ाई को समय अवश्य दें।

आईएएस ऑफिसर बनकर देश सेवा करना चाहती है गौरांगी
सीबीएसई 12वीं की उत्तराखंड टॉपर गौरांगी चावला का सपना है कि वह आगे चलकर देश सेवा करें इसके लिए वह आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय या पंजाब विश्वविद्यालय में दाखिला लेंगी।

खाली समय में पालतू जानवर के साथ रहती है गौरांगी
पढ़ाई के अलावा जब भी गौरांगी खाली रहती है वह सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक्टिव रहती हैं। साथी अपने पालतू जानवर कुत्ते के साथ समय बिताती हैं।

दिवंगत दादा को मानती हैं अपना प्रेरणास्रोत
उत्तराखंड टॉपर गौरांगी चावला अपना प्रेरणास्रोत दिवंगत दादा स्व. केएल चावला को मानती है उनके दादा स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड थे जिनका पिछले वर्ष देहांत हो गया।

अपना बेस्ट दिया था सोचा नहीं था मेरिट पर आऊंगी
गौरांगी चावला का कहना है कि परीक्षा से पहले उन्होंने अपने सभी विषयों की करीब 5 बार अच्छे से तैयारी की थी। परीक्षा मैं भी उन्होंने अपना 100ः दिया था मगर यह उम्मीद नहीं थी कि मेरिट पर आएंगी।

सफलता का श्रेय माता को देती हैं गौरांगी
अपनी सफलता का श्रेय गौरांगी सभी को देना चाहती हैं मगर विशेषकर वह अपनी माता का शुक्रिया अदा करती हैं। उन्होंने बताया की माता ने उनकी पढ़ाई में साथ देने के लिए बहुत समझौते किए हैं। खान-पान से लेकर देखभाल तक किसी भी चीज में कोई कमी नहीं की है।

तीर्थनगरी पहुंचे क्रिकेटर उन्मुक्त चंद, बोले सीनियर टीम में वर्ल्डकप जिताना है सपना

द स्काई आफ द लिमिट पुस्तक को लांच करने ऋषिकेश पहुंचे क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने प्रशंसकों ने खुलकर वार्ता की। उन्होंने बताया कि पुस्तक में उन्होंने अपनी यात्रा वृत्तांत का जिक्र किया है।

क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने अपने प्रशंसकों से बातचीत की और खुद के साइन की हुई किताब प्रशंसकों को दी। उन्होंने बताया कि 2012 के अंडर-19 वर्ल्ड कप से पूर्व उन्होंने इस पुस्तक का 80 फीसदी हिस्सा लिख दिया था। बाकी हिस्सा वर्ल्ड कप जीतने के बाद लिखा। इस दौरान प्रशंसकों ने उनकी पुस्तक को खरीदा।

क्रिकेटर को गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजे नेगी, रोटरी क्लब सेंटर के अध्यक्ष दीपक तायल, समाज सेवी राधे साहनी ने पुष्प गुच्छ और प्रदेश की लोकभाषा की पहली वर्णमाला पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।

सपना है सीनियर वर्ल्ड कप जीतने का
क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने बताया कि मात्र 19 वर्ष की आयु में उनके नाम अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने का खिताब बतौर कप्तान के रूप में दर्ज हुआ है। यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए यादगार लम्हा रहेगा। उनका सपना अंडर-19 की तरह भारत की सीनियर क्रिकेट टीम का नेतृत्व करना और कप जीतना है। उनमुक्त ने कहा कि उत्तराखंड से मेरा जुड़ाव पुराना है। मुझे जब भी समय मिलता है। मैं उत्तराखंड आकर अपनी थकान मिटाता हूं। पहाड़ की वादियों में आकर बहुत सुकून मिलता हैं।

पेट्रोल की बोतल लेकर बुजुर्ग चढ़ा एम्स की छत, दी आत्मदाह की धमकी

पिछले 51 दिनों से एम्स से निष्कासित कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। धरना का समर्थन कर रहे एक 56 वर्षीय बुजुर्ग एम्स की पांचवीं मंजिल की छत पर चढ़ गए और मांग पूरी न होने पर आत्महत्या की धमकी देने लगे। पुलिस ने किसी तरह उन्हें सात घंटे बाद नीचे उतारा। जहां 35 निष्कासित कर्मियों को पुनः आउटसोर्स में नियुक्ति देने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। वहीं पुलिस ने बुजुर्ग को शांतिभंग के आरोप में चालान काट कर एसडीएम के समक्ष पेश किया।

सोमवार को उस समय स्थानीय प्रशासन, एम्स प्रशासन और लोगों में हड़कंप मच गया। जब 56 वर्षीय दाताराम ममगाईं हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर एम्स की छत पर चढ़ गए। सुबह साढ़े छह बजे चढ़े बुजुर्ग दाताराम ने अपने पास किसी को फटकने तक नहींे दिया। इस बीच अनशनकारी कर्मचारी नीचे धरने पर बैठ गए। राज्यमंत्री भगतराम कोठारी के नेतृत्व में एम्स के उप निदेशक अंशुमन गुप्ता के साथ वार्ता हुई। मगर, वार्ता सफल नहीं हो सकी। इसके बाद मेयर अनिता ममगाई के नेतृत्व में पुनः बात करने की कोशिश की गई। मगर, वह भी बेनतीजा रही।

इसके बाद करीब डेढ़ बजे कोतवाल रितेश शाह पांचवी मंजिल की छत पर पहुंच गए और बड़ी ही चालाकी व सूझबूझ से काम लेते हुए बुजुर्ग दाताराम को पकड़ लिया। उन्होंने दाताराम के हाथ से पेट्रोल की बोतल छुड़ाई और नीचे ले आए। इसके बाद तीसरे वार्ता सुलेमान अहमद पद स्थापना एम्स के साथ की गई। इस बैठक में तहसीलदार रेखा आर्य भी मौजूद रही।

यहां निष्कासित 35 कर्मचारियों को पुनः आउटसोर्स से काम पर वापस रखने पर सहमति बन सकी। इसके बाद पुलिस दाताराम को करीब सवा दौ बजे कोतवाली ले गए। यहां दाताराम का शांतिभंग के आरोप में चालान कर एसडीएम प्रेमलाल के समक्ष पेश किया गया।