एम्स में भ्रष्टाचार उन्मूलन पर आयोजित हुई निबंध व पोस्टर प्रतियोगिता

एम्स भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कृत संकल्पित है। इसके लिए संस्थान स्तर पर निगरानी कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी इस तरह के मामलों पर नजर रखती है और यदि कोई व्यक्ति इसतरह के किसी मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। संस्थान में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहीं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में विजिलेंस वीक का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार उन्मूलन में अपनी महति भूमिका निभाने की शपथ ली। समापन कार्यक्रम में अव्वल प्रतिभागियों को एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। जिसमें भ्रष्टाचार उन्मूलन को लेकर निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर निदेशक एम्स ने भाषण व पोस्टर प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे प्रतिभागियों को संस्थान की ओर से सम्मानित किया। विजिलेंस वीक कार्यक्रम के तहत संस्थान के विधि अधिकारी प्रदीप चंद्र पांडेय ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 व आरटीआई विषय, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पंकज सिंह राणा ने विजिलेंस गाइडलाइंस फॉर स्क्रेप डिस्पोजल, सुरपरिटेंडेंट इंजीनियर अनुराग सिंह जी ने विजिलेंस गाइडलाइंस फॉर टेंडर एंड प्रोक्यूरमेंट केसेस, वित्त सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा व एकाउंट ऑफिसर राजीव गुप्ता ने जीएफआर रूल्स व एडमिन ऑफिसर संतोष जी ने विजिलेंस अवेयरनेस आदि विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, वित्तीय सलाहकार पर्वत कुमार मिश्रा, डीन कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्रो. सुरेश के. शर्मा, विधि अधिकारी प्रदीप पाण्डे, लेखा अधिकारी राजीव गुप्ता आदि मौजूद थे।

एम्स में रोबोटिक सजरी अब किडनी, मूत्राशय और किडनी के कैंसर में भी संभव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओर से मूत्राशय, प्रजनन अंगों और किडनी के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। संस्थान के यूरोलाॅजी विभाग में इस बीमारी के निदान के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ ही उच्चस्तरीय तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक से की जाने वाली सर्जरी के दौरान जहां जोखिम का खतरा निहायत कम हो जाता है, साथ ही रोगी को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाती है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स राज्य का एकमात्र ऐसा स्वास्थ्य संस्थान है, जिसमें किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्थान के यूरोलाॅजी विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि मूत्र संबंधी विकृतियों में सबसे आम समस्या प्रोस्टेट कार्सिनोमा से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है। इस छोटी सी ग्रंथि का वजन लगभग 20 ग्राम होता है। यूरोलाॅजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार प्रोस्टेट ग्रन्थि शुक्राणु परिवहन करने वाले वीर्य का उत्पादन करती है। बढ़ती उम्र के साथ ही अधिकांश पुरुषों की इस ग्रन्थि में रोग पैदा होने लगते हैं। खासतौर से बुजुर्ग अवस्था में मूत्र रोग से उत्पन्न यह समस्या कैंसर का रूप ले लेती है। भारत में एक लाख की जनसंख्या में से 8 से 9 प्रतिशत लोग गुर्दे के कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत के यह आंकड़े एशिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक हैं।

प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब करते समय परेशानी होना, पेशाब में रक्त आना, वीर्य में रक्त आना, पेल्विक क्षेत्र में असुविधा और रीढ़ की हड्डी में दर्द होना शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर का पता स्क्रीनिंग, डिजिटल रेक्टल जांच और रक्त परीक्षण (यानी सीरम पीएसए) के माध्यम से लगाया जाता है।

मूत्राशय के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में रक्त आना, पेशाब करते समय दर्द होना, पेल्विक( पेड़ू ) में दर्द और बार-बार पेशाब आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में शामिल है।

किडनी के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में खून आना, भूख में कमी होना, वजन में गिरावट, थकान होना, बुखार और पेट में गांठ बन जाना।

एम्स ऋषिकेश में स्त्री वरदानः चुप्पी तोड़ो, नारीत्व से नाता जोड़ो अभियान की नींव रखी


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ऐतिहासिक पहल पर महिलाओं की गुप्त रोगों से जुड़ी जटिल समस्याओं को लेकर सम्मेलन हुआ। संस्थान के रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभाग द्वारा स्त्री वरदान चुप्पी तोड़ो नारीत्व से नाता जोड़ो कार्यक्रम की नीव रखी। सम्मेलन में उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों से 50 से अधिक स्वयं सेविका महिलाओं ने प्रतिभाग किया। उन्होंने मुहिम को गांव-गांव-घर घर तक पहुंचाने व राज्य की प्रत्येक महिलाओं को उनकी समस्याओं को लेकर जागरुक करने व ग्रसित महिलाओं को उपचार के लिए प्रेरित करने की शपथ भी दिलाई।

एम्स निदेशक व सीईओ प्रो. रविकांत ने अपने संदेश में बताया कि यह सम्मेलन महिलाओं के गुप्त रोगों से जुड़ी समस्याओं के निदान की दिशा में पहला कदम है, जिसका उद्देश्य भारत की हर महिला को ऐसी समस्याओं को लेकर जागरुक करना हो व उन महिलाओं तक पहुंचकर एम्स ऋषिकेश की सुपरस्पेशलिटी सेवाओं से उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिलवाना है। कार्यक्रम में रिकंस्ट्रक्टिव और कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत मग्गो ने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी यह अपनी तरह की पहली मुहिम है, जिसे निदेशक की पहल पर उनकी अगुवाई में शुरू किया जा रहा है।

महिलाओं से आह्वान किया कि हमें इस मुहिम में उन महिलाओं से बात करनी है, जो महिलाएं या तो वह संकोच के मारे बात नहीं कर पाती अथवा समाज उन महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को नजरअंदाज कर देता है।

इस दौरान डॉ. नवनीत ने प्रतिभागी सेविकाओं को महिलाओं के यूरिनरी इनकांटिनेस उनकी यौन समस्याएं और उनके यौन अंग या शरीर बाहर आने की समस्याओं पर विस्तृत जानकारियां दी व इस तरह की बीमारियों से शरीर को होने वाले दूसरे तरह के नुकसान को लेकर जागरुक किया। उन्होंने कहा कि हम सभा को मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि अगले 5 वर्ष के अंदर उत्तराखंड राज्य को यूरिनरी इनकांटीनेंस फ्री यानी यूरिनरी इनकांटीनेंस से मुक्त करना है। गौरतलब है कि एम्स का रिकंस्ट्रक्टिव और गाइनोकॉलोजी विभाग पूरे विश्व में अपनी तरह का पहला सुपरस्पेशलिटी विभाग है, जिसमें कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों को नियुक्त किया गया है।

एम्स में भर्ती 1600 से अधिक कोविड रोगी हुए स्वस्थ्य

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला से कोरोना हार गया है। जी हां, यहां कोरोना संक्रमित होने के बाद से बुजुर्ग महिला को भर्ती किया गया था। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर लौट गई है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि निर्धन व्यक्ति को समुचित और बेहतर मेडिकल सुविधा देने के लिए एम्स प्रतिबद्ध है। जिस वक्त कोविड चरम पर था और अन्य अस्पताल कोविड रोगियों का इलाज करने में असमर्थता जाहिर कर रहे थे, उस दौरान कोविड मरीजों का इलाज करने में एम्स ने प्राथमिकता रखी। कहा कि कोविड मरीजों के इलाज के लिए एम्स में पर्याप्त मात्रा में बैड, आईसीयू और वेंटिलेटर्स का प्रबंध किया गया है। हेल्थ केयर वर्करों की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए हेल्थ केयर वर्कर्स की टीम ने जोखिम उठाते हुए दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि एम्स में कोविड काल शुरू होने के बाद से अब तक 1600 से अधिक कोविड मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। इन मरीजों में 90 साल की वृद्ध महिला से लेकर 1 दिन का नवजात शिशु तक का मरीज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 90 साल की वृद्धा मूलरूप से टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर विकासखंड के अंतर्गत मूलधार गांव की निवासी है। कोविड पाॅजिटिव इस वृद्धा को बीती 8 सितम्बर को एम्स में भर्ती किया गया था। इसे पहले से अस्थमा की बीमारी की शिकायत थी और कोरोना संक्रमित होने के बाद इसे सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो रही थी। 17 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ होने पर इसे 25 सितम्बर को डिस्चार्ज कर दिया गया था।

कहा कि कोविड मरीजों का ग्राफ कुछ कम हुआ है, लेकिन इसका खतरा अभी टला नहीं है। इस बीमारी के प्रति जरा सी लापरवाही फिर से भारी पड़ सकती है। उधर, 90 वर्षीय वृद्धा मौली देवी के पौत्र चैदहबीघा, ऋषिकेश निवासी दीपक कंडारी ने बताया कि उनकी दादी आजकल गढ़वाल में है और पूर्णतौर से स्वस्थ है। अपनी दादी के बेहतर उपचार के लिए उन्होंने एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों का आभार जताया।

वैश्विक भारत वैज्ञानिक समिट का पहला सत्र एम्स ऋषिकेश में हुआ आयोजित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वैश्विक भारत वैज्ञानिक समिट का पहला सत्र एम्स ऋषिकेश में संपन्न हुआ। डीआरडीओ के माध्यम से आयोजित समिट के पहले सत्र में एक थीम भारत के पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी सेवाओं का विकास थी।

गौरतलब है कि वैभव समिट प्रधानमंत्री मोदी की दूरगामी सोच और पहल पर आयोजित की जा रही है। एम्स ऋषिकेश ने पिछले चार वर्षों में निदेशक पद्मश्री प्रो. रविकांत की अगुवाई में इन विषयों पर संपूर्ण देश में अद्वितीय कार्य किया है। इसी कारण से भारत सरकार द्वारा इन विषयों के लिए एम्स ऋषिकेश को चैंपियन इंस्टीट्यूट बनाया गया है।

इस मंथन में देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक ही नहीं अपितु विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के कई प्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक भी सम्मिलित हुए। विशेषज्ञों द्वारा कई दौर के मंथन के पश्चात भारत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी सेवाओं का ब्ल्यू प्रिंट एम्स के ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अध्यक्षता एवं ट्रॉमा सर्जरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के डा. मधुर उनियाल के नेतृत्व में तैयार किया गया।

इस अवसर पर निदेशक प्रो. रविकांत ने विशेषज्ञ मंडल की सराहना करते हुए बताया कि एम्स ऋषिकेश पहले से ही उत्तराखंड के दुर्गम एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं को पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत रहा है और अब प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस दूरगामी योजना के द्वारा इस कार्य और भी उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। जो कि न केवल उत्तराखंड में वरन देश के अन्य दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी एक वरदान साबित होगा।

डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि सरकार की इस सक्रिय भागीदारी से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि वैभव समिट में तैयार किए गए ब्ल्यू प्रिंट पर शीघ्रता से कार्य होगा एवं इसका लाभ शीघ्र ही देश की जनता तक पहुंच सकेगा।

डा. उनियाल ने बताया कि प्रधानमंत्री की इस योजना के कारण विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के प्रदत्त वैज्ञानिक एवं चिकित्सकों में अत्यधिक उत्साह है। अपनी मातृभूमि के लिए सरकार द्वारा उनकी भागीदारी सुनिश्चित कराने के निर्णय पर वह गर्व महसूस कर रहे हैं।
डॉ. उनियाल ने बताया कि कि सर्वसम्मति से विशेषज्ञों का यह निर्णय हुआ है कि उत्तराखंड में ऐसी सुविधाओं को सर्वप्रथम लॉंच कर एक सफल मॉडल बनाया जाएगा स इस मॉडल को उत्कृष्ट रूप से तराशने के बाद इसे देश के अन्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकेगा।

समिट में एम्स ऋषिकेश से प्रो. कमर आजम, डा. मधुर उनियाल, अरुण वर्गीश, अमेरिका से प्रो. मंजरी जोशी, प्रो. मयूर नारायणन, प्रो. सुनिल आहूजा, प्रो. रानी कुमार, इंग्लैंड से प्रो. अजय शर्मा, आस्ट्रेलिया से प्रो. शांतनु भट्टाचार्य, एम्स दिल्ली से प्रो. अमित गुप्ता, प्रो. संजीव भोई, प्रो. तेज प्रकाश, केजीएमयू लखनऊ से प्रो. संदीप तिवारी, प्रो. समीर मिश्रा आदि शामिल हुए।

सोनू सूद के आग्रह पर एम्स ऋषिकेश में हुआ महिला का सफल आॅपरेशन, एक्टर ने लिखा थैंक्स

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के चिकित्सकों ने बीते डेढ़ साल से पेट में तेज दर्द और उल्टी की गंभीर समस्या से ग्रसित एक 26 वर्षीया महिला के पेट के ट्यूमर के सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया है। बिहार मूल की उक्त महिला को उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश तक पहुंचाने में फिल्म अभिनेता सोनू सूद की अहम भूमिका रही है। एम्स के कोरोना नोडल अधिकारी डा. मधुर उनियाल ने इसे अपनी फेसबुक पेज पर साझा किया था।

बिहार के आरा जिला निवासी 26 वर्षीय इस महिला को पिछले डेढ़ साल से उल्टी के साथ पेट में अत्यधिक दर्द से पीड़ित थी। महिला का पहले एम्स पटना और उसके बाद दिल्ली एम्स में सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें चिकित्सकों ने पाया कि महिला के पेन्क्रियाज में काफी बड़े आकार का ट्यूमर बन चुका है। जिसकी वजह से उक्त महिला को पिछले डेढ़ साल से लगातार पेट में असहनीय दर्द की शिकायत रहने लगी थी। इसके अलावा वह लगातार उल्टी होने की समस्या से भी ग्रसित थी।

गंभीर बीमारी के बावजूद पटना और दिल्ली एम्स में महिला के उपचार में हो रहे विलंब के चलते एक्टर सोनू सूद ने उसके त्वरित इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स से संपर्क साधा। जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने महिला रोगी की गहनता से जांच की। उन्होंने पाया कि महिला के पेट में बना ट्यूमर बड़ी ही जटिल स्थिति में है, जिसमें अधिक विलंब होने पर उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। लिहाजा उसकी तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया, एम्स के सर्जीकल गैस्ट्रो विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने इस महिला के ट्यूमर का सफलतापूर्वक आपरेशन को अंजाम दिया। सफल सर्जरी करने वाली टीम में शल्य चिकित्सा के डा. मधुर उनियाल, डा. अभिषेक अग्रवाल और एनेस्थिसिया विभाग के डा. वाईएस पयाल व डा. अजीत कुमार शामिल थे।

निदेशक प्रो. रविकांत ने इस सफलता के लिए चिकित्सकों की टीम को बधाई दी है। कहा कि एम्स ऋषिकेश में जटिलतम बीमारियों के उपचार के लिए वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी रोगियों को आधुनिकतम व बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।

इस बाबत जानकारी देते हुए डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने बताया कि महिला का यह ऑपरेशन बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। अग्नाशय के बिल्कुल नजदीक बन चुके ट्यूमर की वजह से उसकी स्थिति काफी जटिल हो चुकी थी। लेकिन एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने अनुभव से इस जटिल सर्जरी में सफलता प्राप्त की है। डीन प्रो. मनोज गुप्ता ने बताया कि महिला रोगी के ट्यूमर का ऑपरेशन बीती 11 सितंबर-2020 को किया गया, जबकि रविवार 20 सितंबर को महिला को एम्स अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

गौरतलब है कि इस महिला का संस्थान में हुए सफल ऑपरेशन के लिए फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने अपने ट्यूटर एकाउंट और फेस बुक में एम्स ऋषिकेश का विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने उल्लेख किया है कि जब पटना और दिल्ली एम्स में उक्त महिला के उपचार की व्यवस्था नहीं हो पाई, तो ऐसे में ऋषिकेश एम्स ने न केवल महिला की जान बचाई है, बल्कि निहायत कम समय में उसे ठीक कर डिस्चार्ज भी कर दिया है। इसके लिए एक्टर सूद ने निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत सहित ऑपरेशन टीम के विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी विशेष आभार जताया है।

प्लास्टिक कचरे के लिए एम्स ऋषिकेश का तीन संस्थाओं के साथ हुआ करार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के लिए तीन संस्थाओं में करार हुआ है। एम्स, सीएसआईआर आईआईपी देहरादून और सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) के मध्य हुए करार के तहत संस्थान में प्लास्टिक बैंक स्थापित किया गया है। जिसमें जमा होने वाले प्लास्टिक की रिसाक्लिंग सीएसआईआर-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पैट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून में की जाएगी। बताया गया कि इस कचरे से पैट्रोल व डीजल तैयार किया जाएगा।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश ने तीर्थनगरी में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में नया कदम बढ़ाया है। संस्थान परिसर में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए सतत पौधरोपण मुहिम व हरित पट्टी विकसित करने के साथ साथ एम्स ने संस्थान से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के ठोस निस्तारण के लिए देहरादून की दो संस्थाओं से प्लास्टिक बैंक की स्थापना को लेकर करार किया है।

एम्स में आयोजित बैठक में संस्थान के निदेशक प्रो. रवि कांत, सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे व सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने करार पर हस्ताक्षर किए। करार के मुताबिक तीनों संस्थाओं द्वारा मिलकर एम्स ऋषिकेश में प्लास्टिक बैंक की स्थापना की गई है, जिसमें संस्थान से निकलने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाएगा। एकत्रित प्लास्टिक कचरे की आईआईपी में साइंटिफिक टेक्निक से रिसाइक्लिंग कर इससे डीजल व पैट्रोल तैयार किया जाएगा।

इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने इसे हर्ष का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे एम्स प्रतिष्ठान एक और जन व पर्यावरण हित के कार्य से जुड़ रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान प्लास्टिक बैंक की योजना में अपना पूर्ण सहयोग व भागीदारी निभाएगा।

आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे कहा कि उनका संस्थान प्लास्टिक रिसाक्लिंग की अपनी तकनीक को निरंतर विकसित करने में जुटा है, जल्द ही आईआईपी कोविड-19 संक्रमण से बचाव में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क, ग्लब्स व पीपीई किट की रिसाक्लिंग की व्यवस्था भी करेगा। जिससे उक्त सामग्रियों का भी सही तरीके से निस्तारण किया जा सके।
एसडीसी के संस्थापक अनूप नौटियाल ने हर्ष जताया कि उत्तराखंड के दो प्रतिष्ठित केंद्रीय प्रतिष्ठान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस नेक कार्य में साथ आ रहे हैं, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल अन्य संस्थाओं को भी प्रेरित करेगी व निकट भविष्य में अन्य संस्थान भी इस मुहिम का हिस्सा बनेंगे।

सोशल मीडिया में चली ढोल वादक धूमलाल की तबियत खराब की खबर, सीएम ने संज्ञान लेकर एम्स में कराया भर्ती

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर जनपद चमोली के ग्राम उर्गम निवासी ढोल वादक धूमलाल को उपचार हेतु एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री ने धूम लाल की चिकित्सा पर होने वाला व्यय मुख्यमंत्री राहत कोष से किये जाने के भी निर्देश दिये हैं।

ज्ञातव्य है कि मुखोटा नाटकों एवं नंदा राज जात यात्राओं के ढोल वादक धूमलाल की अस्वस्थता के बारे में सोशल मीडिया से पता चलने पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने त्वरित संज्ञान लेकर धूमलाल को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराने के निर्देश दिये तथा इलाज पर होने वाला व्यय मुख्यमंत्री राहत कोष से किये जाने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। मुख्यमंत्री ने धूमलाल को ढ़ोल वादक के रूप में दी जाने वाली पेंशन के अविलम्ब भुगतान हेतु निदेशक संस्कृति को भी निर्देश दिये हैं।

महापौर के आश्वासन पर माने आंदोलनकारी

शिवाजी नगर घर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा धरना महापौर अनिता ममगाई के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। धरने पर बैठी मात्रृ शक्ति एवं तमाम आंदोलनकारियों ने धरने को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए महापौर का आभार जताया। साथ ही विश्वास जताया कि विकास की राह में उन्हें अब अपने आशियानों से वंचित नही होना पड़ेगा।
अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए महापौर अनिता ममगाई ने शिवाजी नगर घर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन कर रहे लोगों से मुलाकात की। जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि नमामि गंगे योजना के नाले टेपिंग योजना को क्षेत्रवासियों के लिए नुकसान की योजना नही बनने दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति तिनका-तिनका जोड़कर घर बनाता है। योजना से प्रभावित लोगों के घर ना उजड़े इसके लिए उन्होंने कार्यदायी संस्था पेयजल निगम के अधिकारियों से बात की है।
महापौर ने निर्देश दिये कि योजना को मूर्त रूप देने के लिए एडवांस से एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जाये ताकि नुकसान कम से कम हो जिसकी जद में आने वाले लोग इसे बर्दाश्त कर सके। महापौर की पहल और आश्वासन पर धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। इस दौरान पार्षद जयेश राणा, पार्षद विजेंद्र मोघा, पार्षद विजय बडोनी, पार्षद लव कांबोज, पार्षद गुरविंदर सिंह, सुभाष वाल्मीकि, सुरेंद्र सुमन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

दूरस्थ क्षेत्रों में लैब तक सैपंल भेजने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेः सीएम

कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अस्पतालों में आवश्यक संसाधन बढ़ाये जाय। टेस्टिंग और अधिक बढ़ाने की जरूरत है। दूरस्थ क्षेत्रों से टेस्टिंग लैब में सैंपल भेजने में देरी हो रही है, हेलीकॉप्टर से भी भेज सकते हैं। यह सुनिश्चित किया जाय की टेस्टिंग में देरी न हो। सर्विलांस सिस्टम मजबूत किया जाय। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग एवं जिलाधिकारियों को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कोरोना योद्धाओं के लिए बनाये गये ‘चिकित्सा सेतु’ मोबाईल एप्प लांच किया। इस मोबाईल एप्प को डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सुरक्षा कर्मी पुलिस तथा कोरोना ड्यूटी में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इस अवसर पर होम आइसोलेशन पर बनाये गये एप्प आरोग्य रक्षक के बारे में प्रस्तुतीकरण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के कारण काफी लोग बेरोजगार हुए हैं। राज्य में बेरोजगारों के लिए अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं की लोगों को पूरी जानकारी हो इसका जनपद स्तर पर व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाय। जिलाधिकारी सरकार की विभिन्न योजनाओं को जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं एवं विभागीय अधिकारियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचायें। योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाय। सीएम सोलर स्वरोजगार योजना जल्द शुरू की जायेगी। 10 हजार लोगों को इस योजना के तहत रोजगार दिया जायेगा। मोटर, बाईक, टैक्सी योजना भी राज्य में जल्द शुरू की जायेगी। पाईन निडिल पॉलिसी में पाईन निडिल से बिजली पैदा करने एवं चारकोल पैदा करने के अच्छे प्रोजक्ट हैं, इनके बारे में भी लोगों को जानकारी दी जाय। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जिलाधिकारी बैंकर्स के साथ बैठकर सुनियोजित योजना बनाये। जल्द ही राज्य स्तर पर बैंकर्स के साथ बैठक की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड का प्रभाव कब तक रहता है, इसकी कोई निश्चित समयावधि नहीं है। उत्तराखण्ड के जो लोग बाहर के राज्यों से आये हैं, उनमें से अधिकांश लोग प्रदेश में ही काम करना चाहेंगे। हमें रोजगार एवं स्वरोजगार के विकल्प तलाशने होंगे। लोगों को काम मिले इसके लिए जिला योजना एवं राज्य सेक्टर में फण्ड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को भी उपनल के माध्यम से सेवायोजित करने की योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों को निर्देश दिये कि लोगों के फोन कॉल अवश्य रिसीव करें। किसी कार्य या मीटिंग में व्यस्त होने पर भी लोगों को इसकी जानकारी दे दें, और उसके बाद उन्हें वापस कॉल करें। यह सुनिश्चित किया जाय कि लोगों को फोन कॉल्स का रिस्पांस मिले। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए नियमित जागरूकता के साथ ही स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। किसी भी स्थान या लोगों के घरों में साफ पानी जमा न हो इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाय।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि कोरोना को कम्यूनिटी स्प्रेड से रोकना जरूरी है। देहरादून, हरिद्वार,, ऊधमसिंहनगर एवं नैनीताल जनपद में विशेष सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी नैनीताल ने जो जीआईएस मैपिंग बेस्ड सॉफ्टवेयर तैयार किया है, यह सॉफ्टवेयर बहुत उपयोगी है। एनआईसी द्वारा इस सॉफ्टवेयर को परिस्कृत किया जाय। चारों मैदानी जनपदों में जल्द इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाय। कन्टनमेंट जोन बनाने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने कहा कि हाई रिस्क क्षेत्र से आने वाले लोगों, माइग्रेन्टर, को-मॉर्बिड की शत प्रतिशत सैंपलिंग की जाय। सर्विलांस की एक्टिविटी पर गंभीरता से ध्यान दिया जाय। आईसीयू, आक्सीजन सपोर्ट बैड एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की पूर्ण उपलब्धता रखी जाय। जिलाधिकारी कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल भी चिन्हित कर लें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन अस्पतालों में टेंस्टिंग की जा सके और लोगों का ईलाज हो। प्रत्येक जनपद में एक ऐसा सेंटर बनाया जाय जहां पर हाई रिस्क क्षेत्र एवं बाहर से आने वालों की सैंपलिंग हो सके। कोविड केयर सेंटर में खाने, रहने एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। पेशेंट को हॉस्पिटल लाने के लिए एम्बुलेंस एवं अन्य संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाय।