मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि चारधार यात्रा सुगम एवं व्यवस्थित रूप से संचालित किए जाने के लिए केदारनाथ और बद्रीनाथ में यात्रा मार्ग एवं दर्शन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं को पहचान कर निराकरण किया जाना आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि चारधाम यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान और वापसी तक का सुखद अनुभव लेकर जाना चाहिए। हमें इस स्तर की तैयारियां करनी हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को दर्शन टोकन देते समय मंदिर में अभी किस नंबर का दर्शन चल रहा है, इसकी जानकारी डिस्प्ले पर मिलनी चाहिए। इस बार चारधाम यात्रा के लिए इसकी अनिवार्य रूप से व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। टोकन लेते समय श्रद्धालु को दर्शन में लगने वाला सम्भावित समय भी बताया जाना चाहिए। उन्होंने व्हील चेयर और चलने में अक्षम श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट एवं ऑल टेरेन व्हीकल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आवश्यक एवं उपयुक्त जानकारी प्राप्त हो इसके लिए विभिन्न प्रकार की जानकारियों के लिए जगह-जगह साईनेज और क्यू आर कोड आधारित सूचना पटल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों के लिए सर्टिफाईड गाईड व्यवस्था उपलब्ध करायी जानी चाहिए। उन्होंने गाईड प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पर्यटन विभाग कार्ययोजना तैयार करे।

मुख्य सचिव ने कहा कि केदारनाथ रोपवे संचालित होने के बाद केदारनाथ मंदिर परिसर, गौरीकुंड एवं सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं का अत्यधिक दबाव बढ़ने की सम्भावना को देखते हुए अभी से तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने इसके लिए केदारनाथ मंदिर परिसर क्षेत्र विस्तार और गौरीकुंड एवं सोनप्रयाग में पार्किंग एवं अन्य सुविधाओं के लिए क्षेत्र विस्तार की सम्भावनाओं को तलाशे जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव डॉ. वी. षणमुगम, धीराज सिंह गर्ब्याल, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग प्रतीक जैन एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित है।

मुख्य सचिव ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड की उच्च स्तरीय संचालन समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान स्मार्ट सिटी के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लिया गया।

मुख्य सचिव ने ग्रीन बिल्डिंग निर्माण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग, स्मार्ट सिटी का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट था। मुख्य सचिव ने ग्रीन बिल्डिंग निर्माण कार्य अगले 6 माह में पूर्ण कराए जाने हेतु जिलाधिकारी / सीईओ स्मार्ट सिटी को निर्देशित किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी को भी 3 शिफ्ट में कार्य कराए जाने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि अगले 6 माह में प्रत्येक कार्य की टाईमलाईन निर्धारित कर लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून स्मार्ट सिटी के अंतर्गत चलायी जा रही 30 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का कार्य परिवहन निगम द्वारा किया जाए। उन्होंने वीएमडी (एलईडी स्क्रीन) एवं पर्यावरण सेंसर को नगर निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को आईटीडीए के अंतर्गत ही संचालित किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून एवं सीईओ स्मार्ट सिटी सविन बंसल, अपर सचिव डॉ. इकबाल अहमद, एमडी परिवहन रीना जोशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पीएमश्री स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए शीघ्र बजट आबंटित किया जाएः बर्द्धन

पीएमश्री स्कूलों में कम्प्यूटर लैब एवं पुस्तकालयों के स्थापना में तेजी लायी जाए। कम्प्यूटर लैब अगले एक माह में की जाए स्थापित। यह निर्देश मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पीएमश्री स्कूलों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए शीघ्र बजट आबंटित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि 32 पीएमश्री स्कूलों में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना में भी तेजी लायी जाए। जिनका बजट जारी किया जाना है, एक माह के भीतर बजट जारी कराया जाए। उन्होंने टिंकरिंग लैब शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के लिए आईआईटी कानपुर से लगातार संवाद कर निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य को पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी पीएमश्री स्कूलों में खेल के मैदान उपलब्ध कराए जाने पर भी शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए हैं।

बैठक के दौरान बताया गया कि प्रदेश में कुल 226 विद्यालयों को पीएमश्री विद्यालयों के रूप में चुना गया है। इसमें 34 प्राथमिक एवं 192 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इसके साथ ही 15 और अन्य विद्यालयों को स्वीकृति मिली है। बताया गया कि पीएमश्री के 22 कम्पोनेंट्स में से 16 को 100 प्रतिशत लागू कर लिया गया है। बाकि 6 कम्पोनेंट्स का कार्य विभिन्न चरणों में गतिमान है।
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जाइका से वित्त पोषित उत्तराखण्ड एकीकृत उद्यान विकास परियोजना की उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जाइका से वित्त पोषित उत्तराखण्ड एकीकृत उद्यान विकास परियोजना की उच्च स्तरीय/संचालन समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को परियोजना का वित्तीय एवं भौतिक प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में भ्रमण कर समीक्षा कर फीडबैक लेने के लिए लगातार दौरे करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों की फल एवं सब्जियों से जुड़े आजीविका की योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना जनवरी माह तक पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण हो सकें इसके लिए जनपदों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। संपूर्ण प्रोजेक्ट का भी वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए प्लान तैयार कर लिया जाए।

इस अवसर पर सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, डॉ. एस.एन. पाण्डेय, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान वंदना सहित कृषि, उद्यान एवं सगन्ध पौधा केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने दिए विद्यमान संभावनाओं के अनुरूप विशिष्ट औद्योगिक ‘हब‘ विकसित किए जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (सिडकुल) के निदेशक मंडल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने आगामी पच्चीस सालों की आवश्यकताओं और संभावनाओं का ध्यान राज्य में औद्योगिक विकास के नए दौर का सूत्रपात करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने गहनता से अध्ययन कर राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यमान संभावनाओं के अनुरूप विशिष्ट औद्योगिक ‘हब‘ विकसित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा की पर्वतीय क्षेत्रों के औद्योगिक विकास के लिए भी उपयुक्त संभावनाओं को तालाशा जाय।

सिडकुल मुख्यालय में आयोजित सिडकुल के निदेशक मंडल की 67वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि राज्य के उद्योगों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं व सहूलियतें उपलब्ध कराने के लिए उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को प्रो-एक्टिव होकर कार्य करना होगा। औद्योगिक विकास की राह में आने वाली किसी भी अड़चन को दूर करने के लिए तत्परता से कार्य किया जाय। उद्योगों को बेहतर माहौल देने के साथ ही बिजली की पर्याप्त एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाय। मुख्य सचिव ने हरिद्वार में नव निर्मित फ्लैटेड फैक्टरी में छोटी औद्योेगिक इकाईयों एवं स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध अवस्थापना सुविधाओं का आवंटन लॉटरी के माध्यम से किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रमुख औद्योगिक आस्थानों के अलावा राज्य के अन्य क्षेत्रों में सिडकुल के पास उपलब्ध परिसंपत्तियों का पूरा ब्यौरा तैयार कर उनके बेहतर इस्तेमाल की कार्ययोजना तैयार करने तथा आवंटित जमीनों पर तय समय के भीतर औद्योगिक इकाईयों की स्थापना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में आईटी हब, सेमी कंडक्टर हब, डाटा सेंटर की स्थापना जैसी नए दौर की संभावनाओं को साकार करने के लिए अनुकूल ईको सिस्टम का सृजन करने की दिशा में कारगर पहल किया जाना जरूरी है। जिससे लिए संबंधित विभागों व संगठनों को प्रतिबद्धता से जुटना होगा।

बोर्ड की बैठक में प्राग फार्म, खुरपिया, नेपा आदि स्थानों पर औद्योगिक आस्थान विकास की योजनाओं सहित रानीपोखरी आदि क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर भी विचार-विमर्श कर अनेक महत्वपूर्ण लिए। औद्योगिक आस्थानों में विद्यमान सब स्टेशनों की क्षमता बढाने तथा खुरपिया फार्म सहित अन्य स्थानों पर नए विकसित किए जा रहे औद्योगिक आस्थानों तक ट्रांसमिशन लाईनों एवं सब स्टेशनों के निर्माण के प्रस्तावों पर भी बोर्ड की बैठक में चर्चा कर निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने सिडकुल को अधिक प्रभावी व सशक्त बनाने के लिए बोर्ड के अंतर्गत टेक्नीकल समिति सहित अन्य समितियों का गठन करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव उद्योग विनय शंकर पाण्डेय, सिडकुल के प्रबंध निदेशक डॉ. सौरभ गहरवार, निदेशक मंडल के सदस्य सिडबी के डीजीएम सिद्धार्थ मंडल, उद्योगों के प्रतिनिधि के तौर पर स्वतंत्र निदेशक अविनाश विरमानी तथा पुनीत वाधवा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

मॉक अभ्यास का दस्तावेजीकरण करें सभी जनपदः बर्द्धन

भूकंप तथा भूकंप जनित आपदाओं से बचाव तथा भूकंप आने पर विभिन्न रेखीय विभागों की तैयारियों को परखने के लिए राज्य के सभी 13 जनपदों में 80 से भी अधिक स्थानों पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह पहला अवसर है जब यूएसडीएमए द्वारा इतने बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल की निगरानी राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से की गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने एसईओसी पहुंचकर मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया। उन्होंने जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति, टीमों की तैनाती, क्षति तथा विभागीय समन्वय की वास्तविक तैयारियों की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने ग्राउंड जीरो पर मौजूद इंसीडेंट कमाण्डरों तथा राहत एवं बचाव कार्य में जुटे कर्मियों से भी बात की। इस दौरान उन्होंने जनपदों से पूछा कि राज्य स्तर पर उन्हें किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य भूकम्प जैसी आपदा में प्रशासनिक तत्परता का परीक्षण, विभिन्न विभागों के मध्य आपसी समन्वय को मजबूत करना, संचार एवं समन्वय तंत्र की खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना तथा फील्ड स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि मॉक अभ्यास का विस्तृत डाक्यूमेंटेशन तैयार किया जाए और अभ्यास के दौरान जिन कार्यों में कमी या सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है, उन्हें जिला स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि शासन द्वारा इन सुधारात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता और सभी तरह का सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि रेस्क्यू एवं रिलीफ टीमों के रिस्पांस टाइम को और बेहतर किया जाए, आईआरएस प्रणाली के तहत अधिकारियों द्वारा अपने-अपने दायित्वों की पुनः समीक्षा की जाए, एसईओसी और डीईओसी के बीच संचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा अस्पतालों, स्कूलों, विद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं से जुड़े विभाग अपने एसओपी को दोबारा परखकर उनकी तत्परता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉक अभ्यास राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करते हैं और वास्तविक संकट के समय सुव्यवस्थित कार्रवाई सुनिश्चित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।

उपाध्यक्ष राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग विनय कुमार रुहेला ने कहा कि भूकम्प मॉक ड्रिल राज्य की वास्तविक तैयारी का महत्वपूर्ण परीक्षण है और इस अभ्यास से मिली सीख को तुरंत लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ड्रिल के दौरान जिन बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता सामने आई है, उन्हें विभागीय स्तर पर शीघ्रता से दूर किया जाए तथा फील्ड में तैनात सभी टीमें अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप तत्परता बढ़ाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, यूएसडीएमए और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय को और मजबूत करें, क्योंकि किसी भी आपदा में त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया ही जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। रुहेला ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपकरण, जनशक्ति और संचार व्यवस्थाओं की समीक्षा नियमित रूप से होती रहे।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि जिन उद्देश्यों को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, उन्हें हासिल करने में सफलता प्राप्त हुई है। कुछ कमियां मिलीं हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी प्रकार की दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि अभ्यास में जो भी कमियां सामने आई हैं, उन्हें बिना किसी देरी के दूर किया जाए और सभी विभाग अपने सुझाव एवं अवलोकन यूएसडीएमए के साथ साझा करें, ताकि ड्रिल के वास्तविक अनुभव आगे की तैयारी में उपयोगी साबित हों।

उन्होंने यह निर्देश दिया कि आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी न रहे और जिन उपकरणों का उपयोग फील्ड में किया जाना है, उनके संचालन का पूर्ण प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए, ताकि किसी भी आपदा स्थिति में टीमें तुरंत और कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मॉक ड्रिल में शामिल सभी विभाग अपने रिस्पांस का व्यवस्थित डाक्यूमेंटेशन तैयार करें, जिससे प्रतिक्रिया समय, समन्वय और संसाधनों के उपयोग का गहन विश्लेषण हो सके।

सचिव सुमन ने क्विक रिस्पांस टीमों को और अधिक सक्षम, संसाधनयुक्त और त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रखने पर बल दिया, साथ ही स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाकर उन्हें नियमित प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है-आपदा में शून्य मृत्यु और इसे वास्तविकता में बदलने के लिए सभी विभागों को अपनी तैयारियों को और मजबूत, अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना होगा।

इस अवसर पर आईजी फायर मुख्तार मोहसिन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ बिमलेश जोशी आदि मौजूद थे।

सीएम घोषणाओं की पूर्ण और गतिमान घोषणाओं का वित्तीय और भौतिक अपडेट प्रस्तुत करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव ने संबंधित सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को पूर्ण हो चुकी, गतिमान और किसी विशेष इश्यू के चलते अभी तक प्रारंभ नहीं की जा सकी ऐसी सभी सीएम घोषणाओं तथा गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस तथा राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर की गई सभी घोषणाओं का पृथक- पृथक विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने गतिमान घोषणाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति का अपडेट तीन दिवस की अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

ऐसी घोषणाएं जिनको किसी भी प्रकार के इश्यू के चलते अभी तक प्रारंभ नहीं किया जा सका उनका विवरण कार्य प्रारंभ न करने का कारण बताते हुए सात दिवस की अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और राज्य स्थापना दिवस पर की गई मुख्यमंत्री घोषणाओं की सूची अलग से तैयार करें तथा उनको उच्च प्राथमिकता में लेते हुए अग्रिम कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों को कहा कि ऐसी घोषणाऐं जिनको तत्काल प्रारंभ करने में कोई इशू नहीं है उनके तत्काल प्रस्ताव प्रस्तुत करें। जिन घोषणाओं को प्रारंभ करने में कोई इशू है उनकी समस्या की प्रकृति बताते हुए उचित निराकरण हेतु प्रथम बार विभागीय सचिव स्तर से निस्तारित कराएं यदि सचिव स्तर पर निस्तारण नहीं हो पाता तो उन्होंने उनके स्तर पर निराकरण हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सचिव एस एन पांडेय को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति तेजी से पूरी हो इसके लिए निगरानी का प्रभावी मेकैनिज्म बनाएं तथा जिन विभागों की जिस घोषणा में प्रगति संतोषजनक न हो उनको व्यक्तिगत अथवा दैनिक रूटीन से अवगत कराते हुए उसकी प्रगति बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री की कुल 3575 घोषणाओं में से 2215 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं, 777 पर कार्रवाई गतिमान है तथा 583 घोषणाएं अपूर्ण हैं।

बैठक में अपर सचिव नवनीत पांडेय व जगदीश कांडपाल, उपसचिव हीरा सिंह बसेड़ा, आर सी शर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

देहरादून इंदिरा मार्केट व आढ़त बाजार के कार्यों में लायी जाए तेजीः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून शहर के मोबिलिटी प्लान से सम्बन्धित एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण की बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने देहरादून शहर के लिए यातायात संकुलन योजना की प्रगति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को मोबिलिटी प्लान के तहत सुधारीकरण के लिए चिन्हित स्थानों में सुधार प्रक्रिया शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अगले एक माह में कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि कार्यों को समय से पूर्ण किया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि लगातार नई पार्किंग स्थल चिन्हित कर तैयार किए जाएं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को अंडरग्राउंड पार्किंग पर भी कार्य किए जाने की बात कही। कहा कि अंडरग्राउंड पार्किंग के लिए सचिवालय एवं परेड ग्राउंड के साथ ही चकराता रोड पर उपलब्ध स्थानों की फिजिबिलिटी स्टडी करवा ली जाए। उन्होंने सीएमपी में दिए गए सुझावों और नए चिन्हित सम्भावित पार्किंग स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने इंदिरा मार्केट एवं आढ़त बाजार के कार्यों की प्रगति की जानकारी भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने आढ़त बाजार भूमि आबंटन प्रक्रिया नवंबर तक पूर्ण कर शीघ्र अग्रेत्तर कार्यवाही शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इंदिरा मार्केट के फेज-1 और फेज-2 के कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने दोनों कार्यों के लिए टाईमलाईन निर्धारित कर शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि नई बसें शीघ्र संचालित किए जाने के साथ ही यातायात नियमों के प्रति सजगता बढ़ाए जाने की दिशा में भी लगातार कार्य किए जाने पर बल दिया जाए।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, अपर सचिव विनीत कुमार, रीना जोशी, एमएनए नमामी बंसल एवं उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से बृजेश कुमार मिश्रा सहित संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

नर्सिंग कोर्स संचालन को संस्थानों के आवेदनों को विभिन्न स्तरों में सिंगल विंडो सिस्टम तैयार की जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नर्सिंग पाठ्यक्रम संचालन हेतु गठित एम्पावर्ड समिति की बैठक आयोजित हुयी। बैठक के दौरान समिति द्वारा विभिन्न मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों को नर्सिंग कोर्स संचालन एवं सीट वृद्धि की संस्तुति दी गयी।

मुख्य सचिव ने नर्सिंग कोर्स संचालन हेतु संस्थानों के आवेदनों को विभिन्न स्तरों में छंटनी करने के बजाय इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे संस्थानों को आवेदन करने से लेकर शासन से स्वीकृति की प्रक्रिया में सरलता आएगी। उन्होंने तत्काल इस दिशा में कार्य शुरू किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि संस्थानों द्वारा आवेदन किए जाने से लेकर विभिन्न चरणों की प्रक्रिया की एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी शीघ्र तैयार की जाए।

बैठक के दौरान समिति द्वारा 39 कॉलेजों की 1790 नई नर्सिंग सीट्स को संस्तुति प्रदान की गयी। सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि स्टेट नर्सिंग काउंसिल में वर्ष 2024 तक पंजीकृत नर्सों की कुल संख्या 21541 है। वर्तमान में सरकारी एवं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों में 9806 लोगों का नर्सिंग प्रशिक्षण चल रहा है।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीएस ने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर लिया आशीर्वाद, वर्ष 2026 की यात्रा तैयारियों के दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज पवित्र केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने धाम क्षेत्र में विभिन्न फेज़ों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य निष्पादन की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से धाम में चल रहे सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी ली, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्य और धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा जाए।उन्होंने कहा कि कल, 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं, उन्होंने निर्देश दिए कि कपाट बंद होने के बाद भी धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी रखी जाए।मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं की पूर्व योजना तैयार की जाए ताकि अगले यात्रा सीजन में यात्रियों को और भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा, और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया।।

इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय और सहयोग से कार्य कर रहे हैं।

मुख्य सचिव ने धाम क्षेत्र में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि केदारनाथ धाम आज पूरे देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ,प्रसासन का लक्ष्य केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और सुविधा का संतुलित संगम सुनिश्चित करना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो।

इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मुख्य कार्याधिकारी मंदिर समिति विजय थपलियाल, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला, अधिशासी अभियंता डी.डी.एम. विनय झिंकवाण तथा ए.आर.टी.ओ. रुद्रप्रयाग धर्मेंद्र सिंह बिष्ट एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास को लेकर सीएस की अध्यक्षता में हुई बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आईएमए के सदस्यों द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता में सुधार के संबंध में अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।

आईएमए के सदस्यों ने कहा कि उत्तराखंड का अधिकतर क्षेत्र दूरस्थ श्रेणी में आता है इस कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास करना एक चुनौतीपूर्ण कदम है। इसके लिए उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास हेतु 50 बैड से नीचे के क्लीनिक/ नर्सिंग होम स्थापित करने हेतु क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों में शिथिलता लाने के सुझाव दिए।

उन्होंने पंजीकरण से लेकर क्लीनिक भवन के निर्माण और क्लीनिक स्थापित करने हेतु विभिन्न प्रकार की अनापत्ति (पंजीकरण, फायर, प्रदूषण इत्यादि से संबंधित) को सरलतम बनाने की अपेक्षा की।

आईएमए के सदस्यों ने अन्य प्रदेशों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से संबंधित बनाए गए सरलतम मानकों को भी प्रदेश में आत्मसात करने का सुझाव रखा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देशित किया कि आईएमए के सदस्यों द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी से संबंधित सुझाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निर्देशित किया कि जो सुझाव व्यावहारिक और समय के अनुरूप किए जाने अपेक्षित हो उनको बायोलॉज में शामिल करने की कार्रवाई करें ।

उन्होंने आईएमए के सदस्यों के समन्वय से इस संबंध में अग्रिम कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार, आईएमए से प्रेसिडेंट उत्तराखंड डॉ केके शर्मा व सचिव डॉ डीडी चौधरी, अपर सचिव संतोष बडोनी, डीजी हेल्थ सुनीता टम्टा सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।