डीएम जनता दर्शन में 100 से अधिक मसले, अन्य जिले से भी प्राप्त हुई फरियाद

जिलाधिकारी सविन बसंल ने आज अपने कार्यालय कक्ष में जनमानस की शिकायतें सुनी। जिलाधिकारी प्रत्येक दिन अपने कार्यालय कक्ष में आने वाले फरियादियों की शिकायतें सुनते है तथा सम्बन्धित विभागों से उनका समयबद्ध निस्तारण भी करवाते है। डीएम स्वयं शिकायतों की मॉनिटिरिंग करते है। डीएम अपने कार्यालय कक्ष में प्रतिदिन अपने कार्यों के साथ ही जनमानस की शिकायतें भी सुनते है प्रतिदिन फरियादियों की संख्या 40 से अधिक ही होती है।

जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में चले आज के जनदर्शन में संगतियावाला भानियावाला निवासी दीपा ने गुहार लगाई कि एकल अभिभावक है उनकी 04 वर्षीय बेटी का लालन पोषण की जिम्मेदारी है उन्होंने डीएम से उज्ज्वला गैस कनैक्शन दिलवाने का अनुरोध किया जिस जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को असहाय दीपा को उज्ज्वला गैस कनैक्शन दिलाते हुए कृत कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश दिए। दीपा जिलाधिकारी का धन्यवाद किया दीपा इससे पूर्व दीपा की बेटी को स्कूल में दाखिला दिलाया तथा दीप के प्रकरण पर ई एफआईआर भी कराई।

जिला उत्तरकाशी तहसील पुरोला ग्राम वेष्टी पल्ली निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग मंजरी देवी ने अपने आवेदन पत्र के माध्यम से फरियाद लगाई कि उनके परिवार में एक पुत्र व एक पौत्री है पुत्र मानसिकरूप से बीमार है जिनका उपचार चल रहा है पौत्री शारीरिक रूप से असहाय है तथा बिस्तर से उठने में असमर्थ है। अपनी उम्र एवं शारीरिक अक्षमता के कारण पौत्री को नही संभाल पा रही हॅंू, उनके बाद पौत्री का क्या होगा इसकी चिंता लगी रहती है, मंजरी देवी ने अपनी पौत्री को दिव्यांगजनों हेतु कार्य कर रहे संस्थान में प्रवेश दिलाने का अनुरोध किया जिस पर जिलाधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को रफेल होम में प्रवेश दिलाते हुए समन्वय करते हुए कृत कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश दिए।

अधोईवाला निवासी बीना देवी एवं त्यागी रोड निवासी राखी ने अपनी खराब पारिवारिक स्थिति के कारण बेटी की फीस भरने में असमर्थता के चलते पढाई बाधित होने की फरियाद सुनाते हुए डीएम से सहायता की गुहार लगाई जिस पर जिलाधिकारी ने बीना देवी की 02 पुत्रियों तथा राखी की पुत्री की स्कूल फीस हेतु प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से कराने के जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास को निर्देश दिए।

नेमी रोड डालनवाला निवासी प्राची सिंह जिनकी जिला प्रशासन द्वारा नंदा-सुंनदा से एमसीए में दाखिला दिलाने के साथ ही संस्थान तक आवागमन पूर्ण व्यय जिला प्रशासन वहन कर रहा है ने शिक्षा हेतु लैपटॉप का अनुरोध किया गया जिस पर जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को राइफल क्लब फंड से लेपटॉप दिलाने हेतु कार्यवाही के निर्देश दिए।
ब्रहा्रमपुरी निवासी मनीष शर्मा ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि वर्ष 2006 में चार बच्चों को कंरट से बचाने में उनके बुरी तरह झुलस जाने के कारण काट दिए गए है। उनके 02 बच्चें है उन्होने जिलाधिकारी से सहायता की गुहार लगाई, जिस पर जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को राइफल क्लब से 25000 आर्थिक सहायता हेतु पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बुजुर्गों महिलाओं एवं असहायों के तीन शिकायती प्रकरणों पर ईएफआईआर भी दर्ज कराई गई।

उत्तराखंड के टिहरी में केंद्रीय विद्यालय की होगी स्थापना, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद टिहरी गढ़वाल के मदननेगी में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा मदन नेगी, टिहरी गढ़वाल में नए केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। यह विद्यालय सिविल सेक्टर के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से मदननेगी एवं आसपास के क्षेत्र में नोनीहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर शैक्षिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा केंद्र एवं राज्य सरकार मिलकर युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने एवं उनके भविष्य को संवारने के लिए संकल्पित है।

नए केन्द्रीय विद्यालय का संचालन प्रारंभिक चरण में कक्षा 1 से 5 तक (प्रत्येक कक्षा में एक सेक्शन) किया जाएगा, जिसे आवश्यकता एवं स्वीकृति के अनुसार आगामी वर्षों में क्रमिक रूप से विस्तारित किया जाएगा।साथ ही प्रवेश प्रक्रिया सभी आवश्यक औपचारिकताओं के पूर्ण होने के 30 दिनों के भीतर प्रारंभ कर दी जाएगी।

गौरतलब है कि यह निर्णय भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति के क्रम में लिया गया है, जिसके तहत देशभर में 85 नए केन्द्रीय विद्यालय खोले जाने हैं। मदान नेगी, टिहरी गढ़वाल स्थित यह विद्यालय उन्हीं स्वीकृत विद्यालयों में शामिल है।

उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान मिलने पर सीएम धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड पुलिस को “राष्ट्रपति पुलिस कलर” (President’s Police Colour) से अलंकृत किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राज्य के इतिहास का “स्वर्णिम और गौरवपूर्ण अध्याय” बताया है। सीएम कहा कि उत्तराखंड के लिए यह क्षण केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गौरव, परंपरा और अदम्य सेवा भावना का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में भेंट कर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस को देश के उन चुनिंदा पुलिस बलों की श्रेणी में स्थापित करता है, जिन्हें उनकी विशिष्ट और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक सहित सभी अधिकारियों और जवानों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन ने उत्तराखंड पुलिस को इस उच्च सम्मान तक पहुँचाया है। यह उपलब्धि न केवल पुलिस बल की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि पूरे उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किया कि यह सम्मान केवल एक अलंकरण नहीं, बल्कि वर्षों की वीरता, अनुशासन, उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मान्यता है। यह पुरस्कार एक कठोर और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद दिया जाता है, जिसमें पुलिस बल के हर आयाम—कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, जनसुरक्षा और तकनीकी नवाचार—का गहन परीक्षण किया जाता है।

यह सम्मान पुलिस बल के ध्वज और वर्दी पर अंकित होकर उसके गौरव, अस्मिता और परंपरा का स्थायी प्रतीक बन जाता है, साथ ही हर पुलिसकर्मी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी का स्रोत भी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस बल ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखते हुए अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से जनता का विश्वास जीतना इस उपलब्धि का प्रमुख आधार रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस की भूमिका आपदा प्रबंधन में विशेष रूप से सराहनीय रही है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में पुलिस बल ने अद्भुत साहस, त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हजारों लोगों के जीवन की रक्षा की।

इसके साथ ही महाकुंभ, चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजनों में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन का उत्कृष्ट संचालन पुलिस की दक्षता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, पर्यटन सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी सशक्तिकरण और जनसहभागिता के माध्यम से एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना के “रजत जयंती वर्ष” में यह सम्मान मिलना इस उपलब्धि को और भी अधिक विशेष और ऐतिहासिक बनाता है। यह उत्तराखंड की 25 वर्षों की विकास यात्रा, सेवा और समर्पण का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड पुलिस “मित्रता, सेवा, सुरक्षा” के अपने ध्येय वाक्य के साथ आगे भी राष्ट्र और राज्य की सेवा में निरंतर अग्रसर रहेगी। राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वैश्विक मानकों की स्मार्ट पुलिसिंग स्थापित की जा सके।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस उपलब्धि को उत्तराखंड पुलिस के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए कहा कि यह सम्मान प्रत्येक अधिकारी और जवान के समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ पुलिस परिवारों के त्याग और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भविष्य में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।

उत्तराखंड पुलिस अब इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ राष्ट्र एवं राज्य की सेवा और सुरक्षा में और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी।

दून में आयोजित कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री धामी ने किया प्रतिभाग

देहरादून के एक स्थानीय होटल में आयोजित विकसित “उत्तराखंड कॉन्क्लेव” में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में पारदर्शिता और सुशासन को प्राथमिकता देते हुए सख्त नकल विरोधी कानून लागू करना शामिल है। इस कानून के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और युवाओं का विश्वास सरकार पर मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक 30,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की जा चुकी है, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के जेंडर बजट प्रावधान किए हैं। साथ ही, 2.65 लाख से अधिक महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं, जिससे राज्य में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को भी अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड इस दिशा में अग्रणी राज्य बना है और यदि अन्य राज्य भी इसे अपनाते हैं तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। उन्होंने कहा कि “यूसीसी की गंगा उत्तराखंड से निकलकर पूरे देश में प्रवाहित होनी चाहिए”, जिससे सामाजिक समरसता और समानता को बल मिलेगा।

कानून व्यवस्था और पारदर्शिता के विषय में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नकल प्रकरणों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की है। इसके साथ ही, चर्चित अंकित भंडारी मामले में सीबीआई जांच की मांग और अन्य संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी उन्होंने विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अग्निवीर योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा किए गए विशेष प्रावधानों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अग्निवीरों को भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने हेतु राज्य स्तर पर कई योजनाएं और प्राथमिकताएं तय की गई हैं, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जिनमें पारदर्शी भर्ती प्रणाली, निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीतियां, पर्यटन को सशक्त बनाने के प्रयास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का विकास, सड़क एवं कनेक्टिविटी में सुधार, डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा, और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम शामिल हैं। इन सभी पहलों के माध्यम से उत्तराखंड को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इन प्रयासों से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगा।

काशीपुर से सड़क मार्ग से खटीमा पहुंचे सीएम धामी, हुआ भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सड़क मार्ग से काशीपुर से खटीमा पहुंचे। इस दौरान यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा उनका भव्य एवं अभूतपूर्व स्वागत किया गया। कई स्थानों पर बुलडोजर के माध्यम से भी स्वागत कर जनता ने अपना उत्साह और समर्थन प्रदर्शित किया।

यात्रा के दौरान काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, दिनेशपुर, किच्छा, सितारगंज सहित कई स्थानों पर भारी संख्या में लोग अपने लोकप्रिय नेता के इंतजार में सड़कों के किनारे खड़े रहे। युवाओं, माताओं-बहनों एवं बुजुर्गों ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। हर जगह जनसैलाब उमड़ा और लोगों ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उत्साहपूर्वक भागीदारी दिखाई।

जगह-जगह आयोजित स्वागत कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश की जनता राज्य सरकार की विकास नीतियों और जनहितकारी निर्णयों के साथ मजबूती से खड़ी है और इस विकास यात्रा की सक्रिय सहभागी बन रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपार स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास, सुशासन और जनसेवा के लिए और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समग्र और संतुलित विकास के लिए संकल्पबद्ध है, ताकि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सके।

राज्य में स्थापित होंगे दो आधुनिक साहित्य ग्राम: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025 में उत्तराखंड के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया।

इसके साथ मुख्यमंत्री ने डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय एवं अताए साबिर अफजल मंगलौरी को “उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट साहित्यकारों एवं “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य हेतु प्रो. दिनेश चमोला, उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ भूपेंद्र बिष्ट, डॉ सुधा जुगरान, शीशपाल गुसाई, उत्कृष्ट कुमाऊनी एवं गढ़वाली साहित्य हेतु तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट एवं गजेंद्र नौटियाल आदि को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि उनके लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्हें प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” समारोह प्रदेश की साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक चेतना और साहित्यकारों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है, जहां हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने अनेक लेखकों और कवियों को प्रेरित किया है। सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत “शिवानी”, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों ने इस धरा को गौरवान्वित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक केवल शब्दों के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं, जहां साहित्यकारों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है और साहित्यिक धरोहर को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखंड की बिखरी साहित्यिक धरोहर को संकलित एवं संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है।

अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं तथा समाज को दिशा देने का कार्य निरंतर करते रहेंगें।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास, विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में सरकारी आवासीय ढांचे को मिलेगा नया स्वरूप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मुख्यसचिव आनंद बर्धन के दिशा-निर्देश पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार प्रदेश भर में सरकारी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि सरकारी आवासीय परिसंपत्तियों का व्यवस्थित रखरखाव और विस्तार सुनिश्चित करना भी है। राज्य संपत्ति विभाग के अनुसार लंबे समय से कई सरकारी आवास जर्जर हो चुके हैं, जिससे कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सरकार अब ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें मरम्मत और पुनर्निर्माण के माध्यम से बेहतर बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।

*जर्जर आवासों की पहचान, नए निर्माण की तैयारी*
सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में मौजूद जर्जर सरकारी आवासों का सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया है। जिन भवनों की स्थिति बेहद खराब है, उन्हें या तो पुनर्निर्मित किया जाएगा या फिर उनकी जगह नए आधुनिक आवास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही जहां भी विभागीय या सरकारी भूमि उपलब्ध है, वहां आवश्यकता के अनुसार नए आवासीय परिसरों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इन आवासों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा मिल सके। सरकार का मानना है कि बेहतर आवास मिलने से कर्मचारियों का कार्य परिवेश भी बेहतर होगा और वे अधिक दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

*कार्यों की निगरानी के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति*
इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए राज्य संपत्ति विभाग के स्तर पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि, जर्जर भवनों और नए निर्माण की संभावनाओं का त्वरित सर्वेक्षण किया जाए। सर्वेक्षण के आधार पर विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा, ताकि निर्माण और मरम्मत से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर स्वीकृति मिल सके। इसके अलावा कार्यदायी संस्थाओं को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों और तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी की संभावना कम हो सके।

*रेसकोर्स में बनेंगे नए आवास*
राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन देहरादून के ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी, रेसकोर्स क्षेत्र में भी नए आवासों के निर्माण की योजना बनाई गई है। यहां जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद खाली हुई भूमि पर श्रेणी-2 के 31 नए आवास बनाने का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया। इसके अलावा 6 मार्च 2026 को इसी कॉलोनी में उपलब्ध अन्य भूमि पर श्रेणी-4 के 10 आवासों के निर्माण की योजना भी प्रस्तुत की गई। दोनों परियोजनाओं के लिए सिंचाई विभाग के परियोजना खंड द्वारा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इन आवासों के निर्माण के लिए श्रेणी-2 के 31 आवासों पर लगभग 1458.56 लाख रुपये और श्रेणी-4 के 10 आवासों के लिए लगभग 743.95 लाख रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।

समिति की बैठक में इन परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद विचार-विमर्श के पश्चात दोनों योजनाओं को स्वीकृति देने पर सहमति व्यक्त की गई। सरकार की इस पहल को प्रदेश में सरकारी आवासीय ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बेहतर आवासीय सुविधाओं से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कार्यों की दक्षता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

*आवास सचिव डॉ आर. राजेश कुमार का बयान*
राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई जिलों में पुराने सरकारी आवास जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, इसलिए उनकी पहचान कर मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा रही है।उन्होंने कहा कि जहां भी विभागीय भूमि उपलब्ध है, वहां नए और आधुनिक आवासों का निर्माण कराया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल सके। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सभी परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई गई है। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पूरे प्रदेश में सरकारी आवासीय ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाना है, जिससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य परिवेश मिल सके।

उत्तराखंड: श्रमिक कर्मकार कल्याण बोर्ड को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार

नई दिल्ली में उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड को स्कॉच ग्रुप द्वारा राज्य में श्रम उपकर संग्रह प्रबधन प्रणाली के लिए गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार उत्तराखंड के श्रम आयुक्त एवं सचिव, उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, प्रकाश चंद दुमका द्वारा आईटी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली के साथ प्राप्त किया गया।

दुमका ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्ग दर्शन में उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रम उपकर संग्रह प्रबधन प्रणाली पोर्टल डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट मानक के रूप में उभरा है। इसकी सफलता के चलते इसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार द्वारा देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने के लिए अपनाया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को मिले इस सम्मान को श्रमिक सुधारों एवं श्रम प्रबंधन के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों का भी सम्मान बताया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मैनुअल प्रणाली से एक पारदर्शी, जवाबदेह और दक्ष डिजिटल प्रणाली की ओर हुए उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाती है, जो सुशासन और तकनीकी उन्नति के प्रति सशक्त प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।

कुम्भ 2027 बनेगा ‘डिजिटल कुम्भ’, AI और IoT तकनीक से होगा स्मार्ट प्रबंधन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भेंट कर उत्तराखण्ड में रेल संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर त्वरित कार्यवाही का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने राज्य में बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एवं रेल मंत्रालय द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सामरिक, भौगोलिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। उन्होंने दिल्ली से मेरठ के बीच आरआरटीएस (Regional Rapid Transit System) के सफल संचालन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों को समय एवं ईंधन की बचत के साथ सुगम यात्रा का अनुभव मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार, ऋषिकेश, चारधाम एवं अन्य पर्यटन स्थलों पर बढ़ते यातायात दबाव का उल्लेख करते हुए मेरठ से हरिद्वार एवं ऋषिकेश तक आरआरटीएस के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया और इस दिशा में शीघ्र कार्यवाही का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रथम चरण का कार्य वर्ष 2026 तक पूर्ण कर लोकार्पण सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। कुमाऊँ क्षेत्र के विकास के लिए टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में स्वीकृति प्रदान करने तथा बागेश्वर-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) की अनुमति देने का भी अनुरोध किया। उन्होंने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण, रायवाला बाई-डक ब्रिज के विकास कार्य, चारधाम रेल परियोजना के अंतर्गत डोईवाला-उत्तरकाशी एवं कर्णप्रयाग-पीपलकोटी खंडों के फाइनल लोकेशन सर्वे को शीघ्र पूर्ण कर स्वीकृति प्रदान करने तथा मोहण्ड-देहरादून-सहारनपुर रेल लाइन परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं उत्तराखण्ड के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को अवगत कराया कि राज्य सरकार कुम्भ 2027 को भव्य एवं दिव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियाँ कर रही है। इस बार कुम्भ को ‘डिजिटल कुम्भ’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अंतर्गत आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ‘डिजिटल कुम्भ’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सहित अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, त्वरित सूचना प्रसार, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण तथा आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि ‘डिजिटल कुम्भ’ परियोजना हेतु ₹143.96 करोड़ की वित्तीय सहायता के लिए भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से प्रस्ताव पर शीघ्र कार्यवाही किए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से कुम्भ 2027 का आयोजन आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के साथ सफलतापूर्वक संपन्न किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

धामी सरकार का मास्टर स्ट्रोक : देहरादून–हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर को मिलेगा स्मार्ट और जाम मुक्त परिवहन नेटवर्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड में आधुनिक और सुदृढ़ आधारभूत ढांचे के निर्माण की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक, पर्यटन और प्रशासनिक कॉरिडोर, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए कॉम्प्रीहेन्सिव मोबिलिटी प्लान (CMP)-2024 पर उच्चस्तरीय मंथन किया गया। आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में यह महत्वपूर्ण बैठक राज्य सचिवालय में आयोजित हुई, जिसमें इस पूरे कॉरिडोर की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक की शुरुआत मैसर्स यूएमटीसी द्वारा CMP-2024 के अद्यतन प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण से हुई, जिसमें देहरादून (देहरादून शहर, विकासनगर, ऋषिकेश) और हरिद्वार (हरिद्वार शहर, रुड़की, भगवानपुर) क्षेत्र की मौजूदा यातायात चुनौतियों और उनके समाधान को विस्तार से रखा गया। इसके बाद विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजना के तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि CMP के सभी प्रस्तावों को संबंधित मास्टर प्लान में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि आने वाले समय में शहरी परिवहन अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में तैयार होने वाली सभी योजनाओं में एकीकृत परिवहन प्रणाली की अवधारणा को केंद्र में रखा जाए।

*बढ़ते यातायात दबाव का समाधान, लोगों को मिलेगा राहतभरा सफर*
देहरादून–हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर वर्तमान में राज्य का सबसे व्यस्त क्षेत्र बन चुका है। SIDCUL जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, तेजी से हो रहे शहरीकरण और पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि के चलते यहां यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पीक आवर्स में जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, सीमित सड़क क्षमता और सार्वजनिक परिवहन की कमी जैसी समस्याएं आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। CMP-2024 इन चुनौतियों का दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे आमजन को राहत मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत परिवहन को लोग-केंद्रित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और पैदल व साइकिल चालकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कई ठोस कदम प्रस्तावित किए गए हैं। इससे न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

*ई-बीआरटीएस, रोपवे और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से बदलेगा कॉरिडोर का स्वरूप*
CMP-2024 के अंतर्गत कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, जो इस पूरे कॉरिडोर की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच लगभग 73 किलोमीटर लंबी ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) प्रणाली विकसित करने की योजना है, जिससे तीनों शहरों के बीच आवागमन तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। इसके अलावा हरिद्वार में पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है, जो विशेष रूप से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए रोपवे परियोजनाओं का विकास भी इस योजना का अहम हिस्सा है, जिससे यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITS), आधुनिक सिग्नलिंग, पार्किंग प्रबंधन और बाईपास सड़कों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के माध्यम से शहरों का समेकित विकास सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे परिवहन और शहरी जीवनशैली के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

*कांवड़ और कुंभ जैसे आयोजनों में मिलेगी बड़ी राहत*
विशेषज्ञों का मानना है कि CMP-2024 के लागू होने से कांवड़ मेला और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। हर साल लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से इस कॉरिडोर पर भारी दबाव पड़ता है, लेकिन नई योजना के लागू होने के बाद यातायात अधिक सुगम, व्यवस्थित और सुरक्षित हो सकेगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और प्रशासन के लिए भी व्यवस्थाएं संभालना आसान होगा। कुल मिलाकर यह योजना धामी सरकार की विकासोन्मुखी और दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब है, जो उत्तराखंड को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय जी. पाठक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने CMP-2024 को राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

*सरकार की दूरदर्शी सोच, विकास को मिलेगी नई रफ्तार*
आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के प्रमुख शहरी क्षेत्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। CMP-2024 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें एकीकृत और आधुनिक परिवहन प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया है। हमारा उद्देश्य है कि देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच आवागमन को अधिक सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाया जाए। ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम), रोपवे, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट जैसी योजनाएं न केवल यातायात समस्याओं का समाधान करेंगी, बल्कि राज्य के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई गति देंगी। आने वाले समय में यह कॉरिडोर देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा।