कुंभ मेला 2027 की तैयारियों में किये जा रहे निर्माण कार्यों को समयसीमा पर करें पूर्णः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए विभिन्न निर्माण एवं अन्य आवश्यक कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को समानांतर रूप से किया जा सकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर साथ-साथ पूर्ण किया जाए, ताकि समय का सदुपयोग हो और कुम्भ मेले से सम्बन्धित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से तैयार हो सकें।

मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना एवं निर्वाचन सम्बन्धी कार्यों के कारण कुम्भ मेला 2027 के लिए आवश्यक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए अभी से आवश्यक प्लानिंग कर ली जाए। उन्होंने सम्बन्धित विभागों को कुम्भ मेले के लिए आवश्यक मानव संसाधन की आवश्यकता का आंकलन करते हुए समय से तैनाती की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र में साइनेज की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साइनेज पर क्यूआर कोड की व्यवस्था करते हुए, उसमें श्रद्धालुओं के लिए उस स्थल की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व सहित आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करायी जाएं। साथ ही, कुम्भ क्षेत्र की विभिन्न लोकेशन एवं सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक समर्पित ऐप भी तैयार कराया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि कुम्भ मेले के लिए बनायी गयी स्थायी व्यवस्थाओं के कुम्भ के बाद भी संचालन एवं रख-रखाव के लिए अभी से प्लान तैयार कर लिया जाए। उन्होंने अस्थायी ब्रिजों के निर्माण कार्य को लगातार मॉनिटरिंग करते हुए नवम्बर माह के अन्त तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला क्षेत्र में पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी एवं सरकारी एजेंसियों की भूमि पर पार्किंग तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए किए जाने वाले आवश्यक कार्य तत्काल प्रारम्भ किए जाएं, ताकि इन व्यवस्थाओं को समय रहते तैयार किया जा सके। उन्होंने नहरबंदी के दौरान किए जाने वाले कार्यों की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करते हुए इस अवधि का अधिकतम उपयोग करने की बात कही। कहा कि सभी आवश्यक कार्यों की पहले से तैयारी पूर्ण कर ली जाए और निर्धारित अवधि में कार्य सम्पन्न किए जाएं।

मुख्य सचिव ने सिंचाई एवं पेयजल विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग करते हुए कुम्भ मेला प्रारंभ होने से पहले कार्य संपन्न कराये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेलाधिकारी एवं सम्बन्धित विभागाध्यक्ष स्वयं इन कार्यों की नियमित समीक्षा करें तथा निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कुम्भ मेले के दौरान यातायात व्यवस्था को सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक वैकल्पिक मार्गों एवं व्यवस्थाओं को समय से तैयार किया जाए।

मुख्य सचिव ने मेलाधिकारी को कुम्भ से सम्बन्धित कार्यों का लगातार स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाले किसी भी प्रकार की समस्याओं से तत्काल अवगत कराया जाए, ताकि सम्बन्धित विभाग के साथ समन्वय कर उसका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसी भी स्तर पर आने वाली समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

एफपीओ को मजबूती देने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय हो स्थापितः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने नाबार्ड के शाखा कार्यालय, देहरादून में नाबार्ड से वित्तपोषित किसान उत्पादक संगठनों द्वारा आयोजित सेब महोत्सव 3.0 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) द्वारा उत्पादित सेब की विभिन्न प्रजातियों, कीवी, सब्जियों एवं अन्य कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने किसानों और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से उत्पादों के सम्बन्ध में जानकारी ली एवं आ रही समस्याओं पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को केवल किसानों को एक साथ जोड़ने तक सीमित न रखते हुए उन्हें मजबूत, आत्मनिर्भर और सस्टेनेबल संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए उन्हें निरन्तर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और क्षमता विकास के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्य सचिव ने कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए खरीद, विपणन और उत्पादों की ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ावा देते हुए उन्हें उचित बाजार और बेहतर मूल्य से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने किसानों के उत्पादों के सुरक्षित भंडारण एवं उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए शीत भंडारण की सुविधाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराने की ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था विकसित करने तथा जैविक उत्पादों के लिए जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को बढ़ावा देने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को सस्टेनेबल बनाने के लिए इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है। योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों का एक-दूसरे से जोड़कर अधिक से अधिक लाभ किसानों और किसान उत्पादक संगठनों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए सरकार, नाबार्ड, सम्बन्धित विभागों, किसान उत्पादक संगठनों, किसानों और अन्य स्टेक होल्डर्स को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड के कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है।

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से सम्बन्धित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में मानकीकरण, गुणवत्ता प्रबंधन एवं उपभोक्ता हितों से सम्बन्धित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य में प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के दौरान निर्धारित प्रोक्योरमेंट रूल्स के साथ-साथ सम्बन्धित बीआईएस मानकों एवं गुणवत्ता मानकों का भी प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो को सम्बन्धित विभागों के साथ वर्कशॉप आयोजित किए जाने के साथ ही इस सम्बन्ध में एडवाइजरी भी जारी किए जाने के निर्देश दिए, ताकि सरकारी खरीद में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

मुख्य सचिव ने बीआईएस को विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स के सम्बन्ध में जागरूकता और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि इंडस्ट्री एवं ट्रेडर्स के साथ कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें बीआईएस मानकों एवं क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बीआईएस को सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यशालाओं में बीआईएस के विशेषज्ञ एवं सक्षम रिसोर्स पर्सन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रतिभागियों को मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों तथा उनके अनुपालन की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि कपैसिटी बिल्डिंग को निरंतर प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाए जाने कि आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि बीआईएस से सम्बन्धित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश एवं सूचनाएं सभी सम्बन्धित विभागों तक सर्कुलेट कराई जाएं तथा संबंधित सचिवों के साथ भी नियमित रूप से इंटरेक्शन किया जाए, ताकि बीआईएस मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन में विभागीय स्तर पर आवश्यक समन्वय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बीआईएस द्वारा इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ आयोजित होने वाली बैठक में भी प्रस्तुतिकरण किए जाने कि बात कही, ताकि जनपद स्तर पर भी इन विषयों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के सम्बन्ध में जागरूक किया जाना आवश्यक है। इसके लिए बीआईएस केयर ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए, ताकि उपभोक्ता उत्पादों की गुणवत्ता एवं बीआईएस प्रमाणन से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकें तथा आवश्यकतानुसार शिकायत अथवा सत्यापन की सुविधा का उपयोग कर सकें।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा विकसित बीआईएस केयर (ठप्ै ब्।त्म्) ऐप उपभोक्ताओं को उत्पादों की गुणवत्ता एवं प्रमाणिकता की जानकारी प्राप्त करने में उपयोगी डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है। ऐप के माध्यम से उपभोक्ता उत्पादों पर अंकित आईएसआई मार्क एवं लाइसेंस नंबर की सत्यता, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आर-नंबर, स्वर्ण आभूषणों पर अंकित एचयूआईडी नंबर का सत्यापन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय मानकों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, बीआईएस कार्यालयों एवं प्रयोगशालाओं की जानकारी देखने तथा मानकों के उल्लंघन, नकली आईएसआई मार्क अथवा अन्य अनियमितताओं के संबंध में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है। यह ऐप उपभोक्ताओं को जागरूक करने तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आईआईएम काशीपुर का कैंपस देहरादून में स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू, सीएस ने किया भूमिपूजन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून में भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर के देहरादून कैंपस का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने आईआईएम काशीपुर का कैंपस देहरादून में स्थापित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून में आईआईएम काशीपुर का कैंपस खुलने से प्रदेश के साथ ही इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में मैनेजमेंट से सम्बन्धित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों की उपलब्धता से उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने तथा नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर निदेशक आईआईएम काशीपुर प्रो. नीरज द्विवेदी एवं कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी देहरादून के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश सहित संबंधित विभागों एवं आईआईएम काशीपुर के अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएस ने दिए राज्य में अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की सराहना की। उन्होंने मानव एवं बाल तस्करी की रोकथाम, साइबर अपराधों से निपटने, नारकोटिक्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, इन्वेस्टीगेशन में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग तथा डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में मैदानी क्षेत्रों सहित पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन किया जाए तथा एपी आई इंटीग्रेशन के माध्यम से दोनों विभागों के डेटा में किसी प्रकार विसंगति न हो। इसके लिए पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्य कॉर्डिनेशन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने लापता बालिकाओं एवं नाबालिग बच्चों को ट्रेस करने के लिए डेडिकेटेड टीम एवं मजबूत मैकेनिज्म विकसित करने तथा अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का केस-वाइज विश्लेषण किया जाए। तस्करी के नेटवर्क एवं संगठित मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी एवं मजबूत तंत्र विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों का रेस्क्यू करने के बाद उनकी रिहैबिलिटेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पीड़ितों को उनके अभिभावकों को सुरक्षित रूप से सौंपे जाने तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने रेस्क्यू मैकेनिज्म को और मजबूत करने तथा जिला स्तर पर डेडिकेटेड टीम एवं व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए।

साइबर पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग की मैनपावर को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई, ताकि साइबर अपराधों के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य सचिव ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने NCORD की बैठक में इस सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किए जाने को कहा।

इन्वेस्टीगेशन में तकनीक का अधिकाधिक उपयोग

मुख्य सचिव ने कहा कि पुलिस इन्वेस्टीगेशन में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि विवेचना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे थानों जहाँ अधिकतर एफ़आईआर दर्ज होती हैं, उन थानों में इन्वेस्टीगेशन विंग खोली जा सकती है। उन्होंने e-FIR के रिजेक्शन का विश्लेषण एवं क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश भी दिए। साथ ही न्यायश्रुति, FSL, मालखाना एवं Dial 112 को शीघ्र लाइव करने तथा e-Summons के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने ICJS 2.0 साइट्स पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा करते हुए कमजोर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क एवं बैंडविड्थ बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि डिजिटल पुलिसिंग की व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा शेयरिंग, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जिला स्तर पर मजबूत मैकेनिज्म विकसित किया जाना आवश्यक है।

मुख्य सचिव ने कहा कि थानों का अधिकतम स्पेस सीज गाड़ियों से भरा रहता है। इससे थानों स्पेस की कमी की समस्याएं आ रही हैं, जिससे थानों को अधिक उपयोगी और प्रभावशाली बनाने ने भी समस्या आ रही है। उन्होंने थानों में सीज गाड़ियों को डिस्पोज ऑफ़ करने के लिए डिजिटल स्टोरेज पर जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे थानों में स्पेस की समस्या को खत्म किया जा सकेगा। उन्होंने जनपदों को भी कैम्पेन मोड पर डिस्पोज कराते हुए इसकी मंथली रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी तृप्ति भट्ट एवं अजय सिंह उपस्थित थे।

नए संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना की जाए तैयार

उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों का अध्ययन किया जाए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से सीख लेकर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर, कसार देवी एवं सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर समेकित पैकेज टूर विकसित करने तथा इनकी पब्लिसिटी का कार्य समय रहते शुरू किए जाएँ। उन्होंने नए पर्यटन प्रोजेक्ट्स तलाशने एवं संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन के भीतर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य में विंटर टूरिज्म एवं नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन से विश्व बैंक के एमडी एवं प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन के साथ विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई एवं उनकी टीम ने सचिवालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा राज्य की उत्तराखण्ड/2047 की विकास रणनीति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध, टिकाऊ और आपदा- प्रतिरोधी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास के लिए जल, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है, इसलिए राज्य में वर्षा जल के संरक्षण एवं अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विश्व बैंक के साथ वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर सृजित कर पलायन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकतानुसार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राज्य के दीर्घकालिक विकास पर फोकस किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में भी विश्व बैंक के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में सुधार तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ही आजीविका एवं पलायन के क्षेत्र में भी विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा राज्य के ऊर्जा, वित्त एवं पेयजल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखंड के विकास के लिए दीर्घकालिक सहयोग एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ‘विजन उत्तराखंड/2047’ के तहत राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, आधारभूत सुविधाओं तथा सतत एवं सुनियोजित शहरी विकास पर भी चर्चा हुई। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विश्व बैंक से जोहांस जट्ट, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव नरेंद्र सिंह भंडारी, रोहित मीणा एवं नवनीत पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

दुपहिया वाहन चालकों एवं सवारियों के लिए हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को प्रभावी रूप से सुनिश्चित करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति, सड़क सुरक्षा उपायों, ब्लैक स्पॉट के सुधार सहित जनपद स्तरीय सड़क सुरक्षा समितियों की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ प्रभावी एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण किया जाए। उन्होंने सड़क की डिजाइन, रोड ज्योमेट्रिक्स तथा अन्य तकनीकी कमियों पर विशेष ध्यान दिए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर सड़क की स्थिति अथवा डिजाइन के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ रही है, वहां सम्बन्धित अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने रोड सेफ्टी ऑडिट को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। कहा कि बस अड्डों का भी टीम गठित कर नियमित ऑडिट कराया जाए। बात ही, ऑडिट में प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक उपायों को लागू किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उन्होंने दो पहिया वाहन चालकों एवं सवारियों के लिए हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को प्रभावी रूप से सुनिश्चित करने तथा यातायात नियमों का पालन न करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिवहन एवं पुलिस विभाग को नियमित रूप से प्रवर्तन सम्बन्धी कार्रवाई की समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा की दृष्टि से बांस के वृक्षों तथा क्रैश बैरियर/पैराफिट आदि के सम्बन्ध में पूर्व में वन एवं लोक निर्माण विभाग को दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी ली, साथ ही अन्य राज्यों में अपनाई जा रही बेहतर सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट तथा दुर्घटना संभावित स्थलों का रोड सेफ्टी एवं थर्ड पार्टी ऑडिट कराने तथा ऑडिट के सुझावों के आधार पर सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने जनपद स्तरीय सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें निर्धारित समय पर नियमित रूप से आयोजित की जाने के निर्देश दिए। कहा कि प्रत्येक बैठक का कार्यवृत्त सम्बन्धित पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। उन्होंने सचिव परिवहन को सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमित एवं रूटीन कार्यों की लगातार निगरानी करने तथा आवश्यकतानुसार सम्बन्धित विभागों से समन्वय करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए सेंसिटाइजेशन कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद रेस्क्यू आदि कार्यों के सेंसिटाइज़ेशन के लिए पुलिस, स्वास्थ्य एवं परिवहन विभाग की संयुक्त वर्कशॉप आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए प्रत्येक दो-तीन माह में अभियान मोड में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाए। इसके लिए प्रचार-प्रसार का वार्षिक प्लान तैयार किया जाए।

मुख्य सचिव ने राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्हें परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि हिट एंड रन के लंबित मामलों की सूची सम्बन्धित जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने जनपद में लंबित मामलों की स्वयं भी समीक्षा कर शीघ्र से शीघ्र निस्तारित करें।

मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा जागरूकता फिल्मों का स्थानीय सिनेमाघरों में प्रदर्शन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता गतिविधियों के लिए विभागों द्वारा वर्षभर का समेकित प्रचार-प्रसार कैलेंडर तैयार किया जाए, ताकि अलग-अलग समय पर लक्षित समूहों के बीच सड़क सुरक्षा संबंधी संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

मुख्य सचिव ने ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्यों में तेजी लाते हुए निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने शेष ब्लैक स्पॉट पर भी ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग एवं परिवहन विभाग के समन्वय से विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लबों की स्थापना एवं उन्हें सक्रिय रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में विभागीय समन्वय, नियमित अनुश्रवण और एक्शन टेकन रिपोर्ट की नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केवल प्रवर्तन ही नहीं, बल्कि सड़क की इंजीनियरिंग, वाहन एवं चालक व्यवहार, जन-जागरूकता और त्वरित उपचारकृसभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाना आवश्यक है।

माह के प्रथम मंगलवार को होगी विभिन्न समस्याओं के त्वरित निस्तारण की समन्वय बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जनपदों की विभिन्न समस्याओं के त्वरित निस्तारण तथा शासन एवं जनपद स्तर के अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय के लिए प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को समन्वय बैठक आयोजित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

इस समन्वय बैठक में जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों से सम्बन्धित ऐसी समस्याओं एवं प्रकरणों को सम्बन्धित विभागों के समक्ष रख सकेंगे, जिनके निस्तारण के लिए शासन स्तर पर विभागीय समन्वय अथवा निर्णय की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जनपदों द्वारा चिन्हित समस्याओं एवं प्रकरणों को सम्बन्धित विभागों को बैठक से पूर्व उपलब्ध कराया जाए, ताकि संबंधित विभाग आवश्यक जानकारी एवं कार्यवाही के साथ बैठक में उपस्थित रहें। प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समन्वय बैठक में इन प्रकरणों पर सम्बन्धित जनपद एवं विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए यथासंभव मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य जनपद स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब को दूर करना तथा शासन और जिलों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने सभी सचिवगणों को निर्देश दिए कि जनपदों से प्राप्त प्रकरणों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन से जुड़े विषयों का शीघ्र समाधान हो सके।

सीएस ने प्रमुख सचिव सिंचाई को 16 क्लस्टर के लिए निश्चित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने उत्तराखण्ड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान प्रदेश के उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के सभी घटकों पर विस्तार से चर्चा हुई एवं विभिन्न दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने जाइका से वित्तपोषित उत्तराखण्ड एकीकृत बागवानी विकास योजना (परियोजना अवधि – अप्रैल 2022 – दिसंबर 2029) को पीएम गतिशक्ति पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे इस प्रोजेक्ट की जीआईएस आधारित डिजिटल मैपिंग हो सकेगी। इससे परियोजना के अन्य घटकों से एकीकरण और समन्वय आसानी से हो सकेगा। उन्होंने इस योजना के वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए, कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने प्रोजेक्ट के तहत् 4 जनपदों नैनीताल, पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी के 16 विकासखण्डों के 16 क्लस्टर आधारित बिजनेस ऑर्गनाईजेशन (सीबीबीओ) का अलग-अलग समीक्षा किए जाने की बात कही। कहा कि कौन सा क्लस्टर किस क्षेत्र में अच्छा कर रहा है, इसकी समीक्षा कर अवगत कराया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि यहाँ अच्छा पोटेंशियल है, इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से सिंचाई सुविधा विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रमुख सचिव सिंचाई को इन 16 क्लस्टर के लिए निश्चित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। इसके लिए सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। कहा कि वर्षा आधारित सिंचाई व्यवस्था से ही उत्तराखण्ड एकीकृत बागवानी विकास योजना को सफल बनाया जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने नए कहा कि इन क्षेत्रों के लिए सप्लाई चेन विकसित की जाए। साथ ही छोटे कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। उन्होंने योजना के अंतर्गत 30 मीट्रिक टन के कोल्ड स्टोरेज रूम को पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप छोटा किया जा सकता है। और अलग-अलग साइज के बनाए जा सकते हैं। और अधिक आवश्यकता पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ायी जा सकती है। उन्होंने इसके लिए जाइका से सहमति लेते हुए कोल्ड स्टोरेज चेन के लिए विभिन्न साइज के स्टोरेज बनाए जाने की बात कही। उन्होंने सोलर आधारित कोल्ड स्टोरेज की सम्भावनाएं तलाशे जाने की भी बात कही।

मुख्य सचिव ने पॉलीहाउस योजना की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए निर्धारित समय पर परियोजना पूर्ण किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही, महक क्रांति के अंतर्गत 2026 से 2036 तक प्रत्येक वर्ष का वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजनाएं तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि महक क्रांति को सफल बनाने के लिए क्वालिटी मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।