मुख्य सचिव ने खतौनी में अंश निर्धारण के कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की एवं अद्यतन स्थिति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में एलपीजी गैस वितरण की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग एवं तेल कंपनियों के राज्य स्तरीय समन्वयक को लगातार गैस एजेंसियों और वितरकों पर लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बैकलॉग खत्म करने के लिए आपूर्ति बढ़ाये आने पर भी जोर दिया। उन्होंने चारधाम यात्रा के लिए कमर्शियल गैस आपूर्ति बढ़ाये जाने हेतु केंद्र सरकार से बात किये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने खतौनी में अंश निर्धारण के कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार नैनीताल एवं कुछ और मैदानी जनपदों को अंश निर्धारण में तेजी लाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अंश निर्धारण के लिए साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए सभी जिलाधिकारियों को तेजी लाए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कुंभ – 2027 की तैयारियों पर भी चर्चा की। उन्होंने सभी आवश्यक जीओ शीघ्र जारी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि जिन कार्यों की टीएसी एवं ईएफसी होनी हैं, शीघ्र करवा ली जाए। उन्होंने कह कि कार्यों में डुप्लीकेसी ना हो इसका विशेष ध्यान दिया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल. फेनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, बृजेश कुमार संत, विनोद कुमार सुमन एवं श्री आनन्द स्वरूप, मंडलायुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, मंडलायुक्त कुमाऊं दीपक रावत सहित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

ऐसी नदियां जिसमें कटान के कारण प्रत्येक वर्ष कार्य होता है, चिन्हित कर चैनलाईजेशन की योजना तैयार करें: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य आपदा मोचन निधि एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि मद के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों के अनुमोदन हेतु राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक आहूत हुई। बैठक के दौरान जनपदों से प्राप्त विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि समिति के समक्ष प्रस्तावों को जनपद स्तरीय समिति की सिफारिश पर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया जाए। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को नदियों की डेजिंग/माइनिंग की एसओपी शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ सुरक्षा कार्यों से सम्बन्धित प्रस्तावों को सिंचाई विभाग की इस हेतु गठित समिति द्वारा टीएसी के उपरान्त राज्य कार्यकारिणी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन नदियों में कटान के कारण प्रत्येक वर्ष कार्य कराना पड़ रहा है, उन्हें चिन्हित कर चैनलाईजेशन की योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि सितारगंज में बैगुल नदी के लिए अध्ययन करा लिया जाए।

मुख्य सचिव ने जनपद नैनीताल के चार्टन लॉज को भू-स्खलन से सुरक्षा प्रदान (लागत रू0 699.98 लाख), जनपद पिथौरागढ़ में खोटिला लैंड और घटधार, धारचुला में हिल का ड्रेनेज का कार्य एवं विभिन्न स्थलों पर भू-स्खलन संबंधी कार्य (लागत रू0 3840.78 लाख), जनपद हरिद्वार के मनसा देवी हिल बाईपास रोड का डेªनेज और भूस्खलन सम्बन्धित कार्य (लागत रू0 4124.83 लाख), जनपद अल्मोडा के दुधौली बैण्ड से पंचायत घर मोटर मार्ग के कि0मी0 2.00 में एच0पी0बैण्ड पर मार्ग सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 34.75 लाख), जनपद उत्तरकाषी के धराली झुला पुल का सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 147.13 लाख), जनपद उत्तरकाषी के नगर पालिका परिशद पुरोला में टैक्सी स्टैण्ड के ऊपर से हो रहे भूस्खलन को रोकने हेतु सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 128.37 लाख), जनपद उत्तरकाषी के हर्षिल मुखवा मोटर मार्ग का सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 472.00 लाख), विकास खण्ड सितारगंज में बैगुल नदी के दॉये एवं बॉये पार्श्व में ग्राम रूदपुर के आबादी क्षेत्रों की बाढ़ सुरक्षा कार्य (लागत रू0 146.67 लाख), विकासखण्ड सितारगंज में बैगुल नदी के दांये पार्ष्व में ग्राम बीसर्क्वाटर के आबादी क्षेत्र की बाढ़ सुरक्षा योजना (लागत रू0 148.48 लाख), तहसील जसपुर में फीका नदी की बाढ़ से ग्राम हजीरों की सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य (लागत रू0 419.82 लाख), जनपद नैनीताल में कौशल्यापुरी क्षेत्र की जल भराव की समस्या का समाधान कार्य (लागत रू0 84.77 लाख), रामनगर, नैनीताल के कानियॉ नई बस्ती एवं हिम्मतपुर डोटियाल के आबादी क्षेत्र को बरसाती नाले से जल भराव सुरक्षा कार्य (लागत रू0 112.15 लाख), जनपद देहराूदन के विकासखण्ड रायपुर में डिफेंस कालोनी जोगीवाला एवं बद्रीपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्य (लागत रू0 460.45 लाख), जनपद देहरादून के डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में दुल्हनी नदी के विभिन्न स्थानों पर यथा, निर्मल कालोनी, बनसरी पुरम, दिल्ली फार्म, लक्ष्मणसिद्ध मंदिर, नकरोंदा रोड (विवेक विहार, वायु विहार) में सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 412.70 लाख), जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र कैंट के अंतर्गत टोंस नदी के बांये तट पर स्थित स्वर्गाश्रम एवं गोषाला की सुरक्षा दीवार का निर्माण (लागत रू0 186.28 लाख) एवं जनपद देहरादून के विकासखण्ड सहसपुर के टौन्स नदी के बांये तट पर स्थित जलवायु टावर की क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य (लागत रू0 88.36 लाख) सहित अन्य विभिन्न कार्यों को स्वीकृति प्रदान की।

राज्य आपदा मोचन निधि के अन्तर्गत विभिन्न मदों में अतिरिक्त धनराशि आवंटन हेतु उपलब्ध कराये गये प्रस्तावों के सापेक्ष कुल रु0 34.00 करोड की वित्तीय स्वीकृतियों के संबंध में कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं विनोद कुमार सुमन सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ की घरेलू गैस को लेकर समीक्षा बैठक

मध्यपूर्व के देशों में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र प्रदेश में एलपीजी एवं ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भराडीसैंण में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर और अन्य संबंधित अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित न होने दिया जाए।

*जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा अफवाह फैलाने या माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।

*गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर सख्ती*

बैठक में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और डायवर्जन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिलों में नियमित रूप से छापेमारी अभियान चलाने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की जाए। यह टीम गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी या अवैध स्टॉकिंग करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करेगी।

*ऑयल कंपनियों से निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा*

मुख्य सचिव ने जिलों में कार्यरत ऑयल कंपनियों और गैस एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित समस्या की जानकारी तुरंत राज्य स्तर पर साझा की जाए ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।

*घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता*

बैठक में इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता और स्वर्ण सिंह ने जानकारी दी कि राज्य में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गैस आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

*अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता*

बैठक में निर्णय लिया गया कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को की जाएगी। फिलहाल होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित रखी जाएगी ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।

*कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम और जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही जिलाधिकारी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त को निर्देश दिए गए कि वे प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और आपूर्ति की जानकारी जनता तक पहुंचाएं।

*अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई*

मुख्य सचिव ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व गैस सिलेंडरों की कमी को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

*बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद*

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एल. फैनई, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव/आयुक्त खाद्य आनंद स्वरूप तथा महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

प्रत्येक विभाग अपने सभी कार्यों को लेकर वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर कार्य करें: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सचिवगणों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा कर दिशानिर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अगले वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले नए कार्यों के लिए 15 फरवरी तक स्वीकृतियां ले ली जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने सभी कार्यों को लेकर वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर, उसके अनुसार अपनी सभी गतिविधियों को संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कुम्भ मेला – 2027 से सम्बन्धित कार्यों को भी प्राथमिकता पर लेते हुए सभी प्रकार की स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण करते हुए निर्धारित प्रक्रिया समय पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा के मापदण्डों का प्रवर्तन एवं निगरानी को और मजबूत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए टेस्टिंग लैब आदि बढ़ाए जाने एवं इससे सम्बन्धित मामलों के निस्तारण में तेजी लाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता के तहत् सभी प्रोजेक्ट्स को गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड किए जाने एवं निर्धारित समय सीमा पर कार्य पूर्ण किए जाने हेतु लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए।

जन-जन की सरकार कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए मुख्य सचिव ने तहसील एवं थाना दिवसों को वर्षभर नियमित आयोजन किए जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इसके लिए कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस को मुख्यालयों एवं जनपद स्तरीय कार्यालयों में लागू किए जाने को लेकर अब तक हुयी प्रगति पर सभी विभागीय सचिवों और जिलाधिकारियों से प्रत्येक सचिव समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नक्शा पास करने वाली सभी ऑथॉरिटीज नक्शा पास करने के उपरान्त सम्बन्धित स्थानीय निकाय के साथ उक्त नक्शा और जानकारियां भी साझा करें ताकि स्थानीय निकाय उक्त प्रॉपर्टी के सम्बन्ध में अपना डाटाबेस अपडेट कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ विभागों में श्रमिकों के लिए लेबर कंप्लायंस टूल (Labour Compliance Tool) का प्रयोग किया जा रहा है, यह एक अच्छा प्रयोग है, और इसे प्रदेशभर में लागू किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं का निस्तारण इसी से हो सकेगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनाई, धनंजय चुतर्वेदी, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, बृजेश कुमार संत, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, सी. रवि शंकर, रणवीर सिंह चौहान एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने पंचायत स्तर पर भी विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में विकासकार्यों की जनपद्वार समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय 2047 विजन डॉक्यूमेंट की तर्ज पर सभी ज़िलाधिकारियों को जिला एवं पंचायत स्तर पर भी विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर, खण्ड स्तर और जनपदों के विजन डॉक्यूमेंट की दिशा में शीघ्र कार्य किया जाए। इसके लिए आवश्यक वर्कशॉप भी शीघ्र आयोजित कराई जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला योजना के लिए जिला योजना समितियों को बैठकें मार्च माह तक अनिवार्य रूप से करवा ली जाएं। इसके लिए अभी से होमवर्क शुरू किया जाए ताकि योजनाओं को समय से पूर्ण करने के लिए पहले से तैयारी रहे। उन्होंने कहा कि जिला योजना में शामिल किए जाने वाले संभावित कार्यों की प्रक्रिया के पहलुओं को पूर्ण कराते हुए एस्टीमेट तैयार करवा लिए जाएँ।

मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान विभाग, कृषि विभाग एवं पशुपालन विभाग को जनपद स्तर पर खरीद के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने खरीद के लिए मूल्य निर्धारण के साथ ही एक वर्ष के बजाए 2 से 3 वर्षों के लिए मूल्य निर्धारित करने जैसे उपायों का भी परीक्षण कराया जा सकता है। आमजनमानस की समस्याओं के निस्तारण के लिए यदि जिला योजना की गाइडलाइंस और नियमों में सुधार की आवश्यकता है तो किए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जन जन की सरकार में प्राप्त समस्याओं के निस्तारण के लिए भी योजनाएं तैयार की जाएँ, साथ ही कार्य प्रकृति के अनुरूप जिला एवं राज्य योजना में शामिल करवाया जाए। उन्होंने राज्य सेक्टर एवं डीएपी, सीसीएस आदि की मासिक बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित कराई जाएं।

मुख्य सचिव ने आजीविका से जुड़ी सभी विभागों की योजनाओं को गंभीरता से लिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जनपद स्तर पर मासिक रूप से समीक्षा की जाए साथ ही त्रैमासिक रूप से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर इन योजनाओं की समीक्षा आयोजित की जाए।

मुख्य सचिव ने राजकीय महिला विद्यालयों को टॉयलेट्स निर्माण से 08 मार्च, 2026 तक सैचुरेट किए जाने के निर्देश को दोहराया। उन्होंने टॉयलेट्स की सफाई व्यवस्था के लिए ठोस योजना भी तैयार किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, चंद्रेश कुमार यादव, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, सभी जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों को जनपद एवं पुलिस हेडक्वार्टर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग कर शीघ्र मामलों के निस्तारण की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में अभियोजन और फॉरेंसिक जांचों के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर बल दिया, ताकि इसकी प्रगति और मॉनिटरिंग अच्छे प्रकार से हो सके। उन्होंने कहा कि ई-समन व्यवस्था को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी एवं एसएसपी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गृह/पुलिस विभाग के अंतर्गत वादों के निस्तारण के लिए थाना और तहसील दिवस आयोजन भी शुरू किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम इसके लिए इसकी एसओपी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस एसओपी के लिए सचिव गृह, सचिव राजस्व, मंडलायुक्त एवं पुलिस विभाग मिलकर एक एसओपी तैयार करे। उन्होंने मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 कैम्प आयोजित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर खाली कराया जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लम्बित मामलों से संबंधित वाहनों के डिस्पोजल के लिए और क्या किया जा सकता है, इसे एक्स्प्लोर कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पॉक्सो के मामलों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम लगातार अपने पैर पसार रहा है इसे रोकने के लिए ठोस कार्यवाही और सिस्टम को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने वन स्टॉप सेंटर्स को और अधिक मजबूत किए जाने की बात कही। साथ ही ड्रग्स के ख़िलाफ़ लगातार कार्यवाही करते हुए एनकॉर्ड की मासिक बैठकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभाग तत्काल वांछित रिपोर्ट भेजें एवं मामलों के निस्तारण के लिए विभागों द्वारा विवेचनाओं को तत्काल भेजा जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन प्लेटफार्म को अधिक से अधिक जनसंचार किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों को अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में भी इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किए जाने की बात कही ताकि लोगों के बीच जागरूकता बढ़े। मुख्य सचिव ने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं इसकी भी निगरानी की जाए। बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड रिज़र्व किए जाने की संभावनाओं का परीक्षण कराया जा सकता है।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल फ़ैनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव शैलेश बगौली सहित पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने जमरानी व सौंग बांध परियोजनाओं की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सिंचाई विभाग द्वारा निर्माणाधीन जमरानी एवं सौंग बांध परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने दोनों महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की एवं दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्ट्स को समय पर पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने जमरानी बांध बहुद्देेश्यीय परियोजना सौंग बांध पेयजल परियोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए सिंचाई विभाग को परियोजना निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध सभी निविदा एवं आवश्यक अन्य प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण परियोजना का फ्लो चार्ट तैयार कर प्रत्येक चरण को निर्धारित समय पर पूर्ण कराया जाए। मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाए जाने हेतु आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को बढ़ाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए आवश्यक फर्स्ट पार्टी, सेकंड पार्टी एवं थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल एवं मूल्यांकन भी नियमित तौर पर कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावितों के पुनर्वास कार्य पर समयबद्धता एवं तत्परता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रभावितों को मुआवजा, पुनर्वास और आबंटन का कार्य आपसी तालमेल और विश्वास में लेकर किया जाए इसके लिए लगातार संवाद जारी रखे जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव सिंचाई युगल किशोर पंत ने बताया कि जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना की कुल लागत ₹ 3678.23 करोड़ है। इस परियोजना को जून 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सौंग बांध परियोजना 130.60 मीटर ऊंचा, 150 एमएलडी की गुरुत्व आधारित पेयजल परियोजना है, जिसकी लागत ₹ 2524.42 करोड़ है। इसके निर्माण कार्य नवम्बर 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष सिंचाई सुभाष चंद्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सेब की अति सघन बागवानी योजना का उद्देश्य सेब उत्पादन को बढ़ावा और किसानों की आय में वृद्धि करना: धामी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब की अति सघन बागवानी योजना सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता एवं अन्य राज्यों की उत्पादन क्षमता के सापेक्ष उत्तराखण्ड की उत्पादन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि “सेब की अति सघन बागवानी योजना” के अंतर्गत सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जनपदों में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाए जाने हेतु प्रेरित किया जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। प्रदेश में अभी सेब उत्पादन क्षेत्र बढ़ाए जाने की अत्यधिक सम्भावना है, जो प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की उत्पादन क्षमता विशेषकर सेब की उत्पादन क्षमता का आंकलन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपदों को सेब उत्पादन में क्षमता के अनुरूप 2030, 2040 एवं 2050 में कितना उत्पादन होगा, इसके लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजना को धरातल पर उतारा जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थिति कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। इससे किसान अपना सेब और अन्य उत्पाद ऑफ सीजन में मार्केट में उतार कर अधिक लाभ ले सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अभी भी पुरानी कम उत्पादन क्षमता वाली किस्म की फसलों का उत्पादन हो रहा है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से रिप्लेस करने की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर किसानों से संवाद करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने इसकी भावी मांग के अनुरूप नर्सरियों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार किए जाने के लिए नर्सरियां विकसित की जाएं। फुल टाईम टैक्निकल सपोर्ट के लिए पीएमयू गठित किया जाना चाहिए, ताकि वृहद स्तर पर इस योजना को संचालित किया जा सके। इससे धरातल पर योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जनपद देहरादून के सेलाकुई में स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र का भ्रमण किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हाई वैल्यू फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण से प्रदेश के किसानों की आर्थिकी में बेहतर सुधार हो सकता है। उन्होंने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा प्रदेश के किसानों को डूर स्टेप सहायता उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए सगन्ध पौधा केन्द्र को और मजबूत किए जाने पर जोर दिया, ताकि सगन्ध पौधा केन्द्र प्रदेशभर में अपनी गतिविधियों को बढ़ा सके।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में उनकी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप एरोमैटिक फसलों का चयन कर प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को इसमें जोड़े जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों को सगन्ध फसलों के उत्पादन में अपेक्षित सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तैयार किए जा रहे सैटेलाईट सेंटर्स को भी शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परफ्यूमरी एंड ऐरोमैटिक सेक्टर में उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास के अंतर्गत डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेशन कार्यक्रम संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अपने पूर्व में दिए निर्देशों को दोहराते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में भ्रमण कर समीक्षा कर फीडबैक लेने के लिए लगातार दौरे करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों द्वारा संचालित फल एवं सब्जियों से जुड़े आजीविका की योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसान इस सगन्ध पौध उत्पादन और प्रसंस्करण कार्य से जुड़ें इसके लिए सभी जनपदों में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना जनवरी माह तक पूर्ण किए जाने की बात दोहराते हुए कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण हो सकें इसके लिए जनपदों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

इस अवसर पर निदेशक सगन्ध पौधा केन्द्र डॉ. निर्पेंद्र चौहान ने बताया कि सगन्ध पौधा केन्द्र को खुशबूदार फसलों के वाणिज्यीकरण के लिए एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया है, जो एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि यह एक बिज़नेस इनक्यूबेटर के तौर पर काम करता है, जो किसानों, उद्यमियों और एसेंशियल ऑयल इंडस्ट्री को सपोर्ट देता है, जिसमें खेती, प्रोसेसिंग और डिस्टिलेशन, मार्केटिंग, क्वालिटी एनालिसिस और स्टैंडर्डाइजेशन ट्रेनिंग और खुशबू वाले सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए दूसरी प्रमोशनल स्कीम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 5 नाली तक के किसानों को मुफ्त रोपण सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है, जबकि 9 एरोमैटिक फसलों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

निदेशक डॉ. चौहान ने बताया कि डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रायर के लिए पर्वतीय जनपदों में 75 प्रतिशत तक सब्सिडी और मैदानी जनपदों में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख) उपलब्ध करायी जा रही है। किसानों की सहायता के लिए 27 एसेंशियल ऑयल और एरोमैटिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल भी उपस्थित थे।

सीएस वर्धन ने सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की विस्तार से जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून जनपद में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत स्किल हब सहसपुर का दौरा किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की विस्तार से जानकारी ली एवं प्रशिक्षण पा रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में प्रदेश के सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्र छात्राओं को भ्रमण कराया जाए। मुख्य सचिव ने क्षमता से कम छात्रों के प्रशिक्षण पर नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एक माह में पूर्ण क्षमता का उपयोग किया जाए।

मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में संचालित कोर्स को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की बात भी कही। उन्होंने विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ ही सम्बन्धित देश का लिविंग और वर्किंग कल्चर की जानकारी भी प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण पा रहे छात्र – छात्राओं से बातचीत कर उनके अनुभवों और भावी योजनाओं पर चर्चा की एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

निदेशक कौशल विकास एवं सेवायोजन संजय कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून जनपद में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग द्वारा स्किल हब सहसपुर की स्थापना की गयी है। रिकल हब सहसपुर में राज्य के युवाओं को देश में आईटी०आई० उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार से जोड़ने के उददेश्य से उच्च स्तर का तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने एवं विदेश रोजगार से जोडने के लिये आवश्यक विदेशी भाषा का प्रशिक्षण प्रदान करते हुये विभिन्न आरएएप के माध्यम से विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा गो है। स्किल हब सहसपुर के अंतर्गत सेन्टर ऑफ ऐक्सीलेस एवं विदेश रोजगार प्रकोष्ठ है। वर्तमान में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा मुख्यत नर्सिंग, केयर गिवर एव आतिथ्य के क्षेत्र में जापान एवं जर्मनी में राज्य के युवाओं को सेवायोजित किये जाने का कार्य किया जा रहा है। उक्त युवाओं को डोमेन प्रशिक्षण राज्य के नर्सिंग कॉलेज एव होटल मैनेजमेंट इन्स्टीयूट द्वारा दिया जा रहा है तथा प्रकोष्ठ द्वारा स्किल हब सहसपुर में आवासीय विदेशी भाषा का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, निदेशक कौशल विकास एवं सेवायोजन संजय कुमार, संयुक्त निदेशक अनिल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।