पर्यटन विकास के सभी प्रोजेक्ट में स्थानीय आमजन की ओनरशिप एवं भागीदारी सुनिश्चित होः राधा रतूड़ी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने टिहरी झील तथा इसके कैचमेंट एरिया के सम्पूर्ण विकास हेतु एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) की गाइडलाइन्स के अनुसार तैयार डीपीआर पर कार्य करने के साथ ही इस तरह के प्रोजेक्ट में सभी स्टेकहोल्डर्स विशेषकर स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उनके सुझाव लेने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने निर्देश दिए कि राज्य में संचालित पर्यटन विकास से सम्बन्धित सभी प्रोजेक्ट में स्थानीय आमजन की ऑनरशिप एवं भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने सभी प्रोजेक्ट में हितधारकों एवं स्थानीय लोगों के साथ विचार विमर्श करने व सुझाव लेने की संस्कृति अपनाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए हैं कि पर्यटन विकास के सभी प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। विशेषरूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की गतिविधियों में सोलिड वेस्ट मेनेजमेंट को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग पर भी ठोस अवशिष्ट प्रबन्धन हेतु पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही श्रीमती राधा रतूड़ी ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होम स्टे हेतु भी कूड़ा प्रबन्धन की व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने टूरिज्म एवं इकोलॉजी में संतुलन रखने की नीति का पालन करते हुए सभी टूरिज्म प्रोजेक्ट पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में पर्यटन के विकास से सम्बन्धित सभी प्रोजेक्ट का इस आधार पर मूल्यांकन किया जाए कि इससे कितने स्थानीय लोगों को रोजगार, विकास एवं कल्याण से सम्बन्धित लाभ पहुंचा है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सोमवार को सचिवालय में टिहरी झील विकास परियोजना पर सतत्, समावेशी तथा जलवायु अनुकूल पर्यटन विकास से सम्बन्धित द्वितीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) बैठक के दौरान निर्देश दिए हैं कि इस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय समुदायों को विकास का भागीदार बनाते हुए टिहरी को एक ब्राण्ड पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सीएस ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट के तहत टिहरी शहर के ऐतिहासिक महत्व को पुनः स्थापित करने, पर्यटन की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, क्षेत्र में सत्त एवं रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को प्रोत्साहित करने, पलायन रोकने, स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को कम से कम 3 तीन दिन तक यहां रहने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में जानकारी दी गई कि 1294 करोड़ रूपये लागत के एडीबी सहायता प्राप्त टिहरी लेक प्रोजेक्ट के तहत 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग 103 गांवों की लगभग 96875 आबादी को लाभ पहुंचेगा। प्रोजेक्ट के तहत डोबरा चांटी, तिवार गांव, कोटी कॉलोनी, न्यू टिहरी, मदन नेगी तथा झील कलस्टर में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं को विकास किया जाएगा।

बैठक में सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सीएस ने उत्तराखंड में बालिकाओं को विज्ञान शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने के दिए निर्देश

सीएस राधा रतूड़ी ने प्रोजेक्ट ‘‘लैब्स ऑन व्हील्स’’ मोबाइल सांइस लैब प्रोजेक्ट की डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महानिदेशक शिक्षा को इस सम्बन्ध में सभी विद्यालयों को निर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य के ग्रामीण एवं सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं की मजबूती तथा विज्ञान व शिक्षा को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट ‘‘लैब्स ऑन व्हील्स’’ मोबाइल सांइस लैब की समीक्षा के दौरान प्रथम चरण में चम्पावत, अल्मोड़ा, देहरादून एवं पौड़ी में इसे संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के तहत विज्ञान शिक्षा हेतु बालिकाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। शासन द्वारा प्रोजेक्ट ‘‘लैब्स ऑन व्हील्स’’ मोबाइल सांइस लैब के लिए 5 करोड़ की धनराशि निर्गत की गई है। राज्य के कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों में विज्ञान, टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग तथा गणित विषयों में क्रियात्मक ज्ञान की वृद्धि हेतु 13 जिलों में लैब्स ऑन व्हील्स प्रोजेक्ट के तहत मोबाइन साइंस लैब संचालित की जाएगी। आरम्भ में चम्पावत, अल्मोड़ा, देहरादून एवं पौड़ी चार जिलों में छः माह तक कार्यक्रम के सफल संचालन के बाद सभी जनपदों में इस प्रोजेक्ट को संचालित किया जाएगा।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए हैं कि प्रोजेक्ट लैब्स ऑन व्हील्स के तहत मोबाइल सांइस लैब के माध्यम से राज्य के ग्रामीण एवं सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ किया जाए तथा विज्ञान एवं शिक्षा को पूरक बनाने के साथ-साथ विज्ञान को लोकप्रिय बनाने व विज्ञान संचार गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों में व्यवहारिक प्रदर्शनों/मॉडलों गतिविधियों और प्रदर्शनों के माध्यम से जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक और गणित पाठयक्रम में अनुभावत्मक कौशल विकसित करने तथा व्यवहारिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने लैब्स ऑन व्हील्स के तहत राज्य के दुर्गम एवं ग्रामीण पर्वतीय क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं हेतु साइंस फिल्मों के प्रदर्शन, टेलिस्कॉप से लाइव स्काई ऑब्जर्वेशन, विज्ञान मेलों एवं वर्कशॉप का आयोजन, नवाचार मेलों का आयोजन एवं शिक्षकों हेतु प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के आयोजन के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार एवं यूकॉस्ट परिषद की महत्वकांक्षी परियोजना लैब्स ऑन व्हील्स मोबाइल साइंस लैब हेतु अगस्तया फाउडेशन बेंगलुरु का सहयोग लिया जा रहा है।

बैठक में अपर सचिव रंजना राजगुरू, महानिदेशक बंशीधर तिवारी, यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो0 दुर्गेश पंत व अगस्तया फाउण्डेशन के संस्थापक उपस्थित रहे।

पर्वतीय जनपदों में वन स्टॉप सेन्टर गर्भवती महिलाओं के लिए बनेगा प्रतीक्षालय

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने गर्भवती महिलाओं तथा नवजात बच्चों के लिए आंगनबाड़ियों में वेक्सीनेशन की अनिवार्यतः व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। राज्य के पर्वतीय जिलों में दूरस्थ व दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव की सुविधा आसानी से मिले इसके लिए मुख्य सचिव ने पर्वतीय जनपदों में वन स्टॉप सेन्टर को गर्भवती महिलाओं हेतु प्रतीक्षालय के रूप में उपयोग करने की व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी (प्रसव पूर्व जांच) की जांच की अनिवार्य व्यवस्था के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने हरिद्वार जैसे उच्च मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर वाले जिलों में ग्राम एवं ब्लॉक स्तर पर कैम्प लगा कर गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच की सुविधा पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सरकारी अस्पतालों में अधिक से अधिक प्रसव करवाने हेतु एएनसी जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं की काउन्सिलिंग करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में गैर सरकारी संस्थाओं एवं सामाजिक संस्थाओं की मदद लेने के निर्देश भी दिए। हरिद्वार जैसे जिलों में संस्थागत प्रसव में कमी के कारणों की जांच के लिए उन्होंने टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव रतूड़ी ने स्वास्थ्य विभाग को सरकारी प्रयासों के साथ ही सीएसआर एवं एनजीओं के सहयोग से राज्य में मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक प्रभावी एवं ठोस प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने एनिमिया के मामलों को नियंत्रित करने, नवजात एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं एएनसी जांच हेतु आंगनबाड़ियों को सुदृढ़ करने तथा उनसे प्रभावी समन्वय के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों को दिए जा रहे भोजन में माइक्रोंन्यूट्रेन्ट की मात्रा भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सचिवालय में सत्त विकास लक्ष्यों (एसडीजी) उत्तराखण्ड की स्थिति के सन्दर्भ में लैगिंक समानता, पोषण, जीरो हंगर, स्वास्थ्य जैसे इंडीकेटर की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने स्वास्थ्य विभाग, एनएचएम तथा सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों के साथ जल्द ही हेल्थ डाटा के सम्बन्ध में एक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि जीरो हंगर के तहत उत्तराखण्ड के सभी जिलों में गर्भवती महिलाओं द्वारा टेक होम राशन स्कीम का लाभ उठाने का सौ प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। वर्ष 2019-21 में राज्य का मातृ मृत्यु दर 103, शिशु मृत्यु दर 39.1 रहा है।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य, अपर सचिव स्वास्थ्य, नियोजन, महानिदेशक स्वास्थ्य तथा सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

भागीरथी इको सेंसेटिव जोन की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक आयोजित

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भागीरथी ईको सेंसेटिव जोन की मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन कायम रखते हुए भागीरथी ईको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत तय पर्यावरणीय मानकों के अनुसार निर्माण कार्य किए जांय और मानकों की अवहेलना के मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित की जाय।

उत्तरकाशी जिले की भागीरथी घाटी में उत्तरकाशी ने लेकर गंगोत्री तक के लगभग 100 कि.मी. लंबाई में व लगभग चार हजार वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन घोषित है। जिसके दायरे में 88 गांव पड़ते हैं। भागीरथी इको सेंसेटिव जोन की मॉनिटरिंग कमेटी की आज बैठक आयोजित कर इन क्षेत्र के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न विकास योजनाओं व अन्य गतिविधियों की अनुमति देने तथा जोन के लिए अधिसूचित मानकों के अनुपालन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया।

इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि इको सेंसेटिव जोन के भीतर सड़कों के निर्माण में तय पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए डीपीआर में स्पष्ट प्राविधान किए जांय और जीएसआई जैसे किसी प्रतिष्ठित संगठन से भी स्िलीय जांच कराई जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि जोन से संबंधित प्रकरणों का तत्परता से अनुश्रवण करने के लिए मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक अब हर तीसरे महीन आयोजित होगी और इससे संबंधित कार्रवाई करने के लिए किसी विभाग को नामित करने या जिला विकास प्राधिकरण को यह जिम्मा सौंपे जाने पर भी विचार किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्थानीय लोगों के हितों व विकास के साथ ही चारधाम यात्रा पर बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए इस क्षेत्र में अनेक विकास कार्य किए जाने जरूरी हैं, लिहाजा तय नियमों व मानकों का अनुपालन कर पर्यावरण के साथ बेहतर संतुलन कायम रखते हुए कार्रवाई की जाय। नियमों व मानकों का उल्लंघन के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि इस बारे में समिति के सभी गैर सरकारी सदस्यों को भी अवगत कराया जाय और इन सदस्यों को प्रस्तावित परियोजना स्थलों का निरीक्षण भी करवाया जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि मॉनिटरिंग समिति का मुख्य कार्य जोन के लिए तय नियमों और मानकों के अनुपालन पर नजर रखना है। लिहाजा संबंधित विभाग संबंधित अनुमतियां जारी करने के साथ ही नियमों का अनुपालन भी सुनिश्चित कराएं।

बैठक में जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने भागीरथी इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना, इसके अनुपालन एवं वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जोन के अंतर्गत प्रस्तावित विकास कार्यों एवं अन्य गतिविधियों को समिति के विचारार्थ एवं अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि भागीरथी इको सेंसेटिव जोन के दायरे में सदियों पूर्व से स्थित गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास से जुड़ी परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन व पर्यटन इस क्षेत्र की आजीविका का मुख्य जरिया है और हर साल लाखों की संख्या में तीर्थयात्री व पर्यटक इस क्षेत्र में आते हैं। लिहाजा पर्यावरण से संबंधित मानकों व अन्य सभी तय नियमों का अनुपालन करते हुए इस क्षेत्र में अपेक्षित अवस्थापना सुविधाओं का विकास करने के साथ होम-स्टे, होटल आदि से जुड़े कार्यों को अनुमति दिया जाना जरूरी है। जिलाधिकारी ने जोन के अंतर्गत अधिसूचित कार्यों की अनुमति तथा नियामक कार्रवाईयों के लिए जिला विकास प्राधिकरण को जिम्मेदारी दिए जाने का प्रस्ताव भी रखा।
जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए इस क्षेत्र में अनेक उपाय किए जा रहे हैं। गंगोत्री धाम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए आधुनिक तकनीक का एक प्लांट स्थापित किया गया है। बैठक में इस प्लांट को शीघ्र संचालित करने पर सहमति व्यक्त की गई।

बैठक में भागीरथी ईको सेंसेटिव जोन में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित नौ सड़कों की अनुमति का प्रस्ताव रखा गया। इन प्रस्तावों को पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन करने पर शर्त पर अनुमोदन देने की सहमति व्यक्त करते हुए कहा गया कि सड़कों के डीपीआर में इसके लिए जरूरी प्राविधान आवश्यक रूप से शामिल किए जांएगे और जीएसआई जैसेस संगठन से भी इनका परीक्षण कराया जाएगा। जोन क्षेत्र में प्रस्तावित पॉंच लघु जल विद्युत परियोजनाओं पर विचार-विमर्श के बाद दो मेगावाट क्षमता वाली दो नई परियोजनाओं पर आगे की कार्रवाई करने और तीन निर्माणाधीन परियोजनाओं पर फिर से विचार करने की सहमति जाहिर की गई। बैठक में डाक विभाग की गंगोत्री धाम से गंगा जल भरने विषयक प्रस्ताव के साथ ही सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम नीति के अंतर्गत प्रस्तावित दो होटल इकाईयों और जेड.एल.आर. एक्ट की धारा 143 के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन के मामले भी विचार हेतु प्रस्तुत किए गए।

हाईब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में गैर सरकारी सदस्य हेम पाण्डे, मल्लिका भनोट, शांति परमार सहित विभिन्न विभागों व संगठनों के राज्य मुख्यालय देहरादून तथा उत्तरकाशी स्थित अधिकारियों ने भी भाग लिया।

समस्याओं के समाधान के लिए दिव्यांग फरियादियों के पास स्वयं पहुंचती हैं मुख्य सचिव राधा रतूड़ी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने मुख्य सचिव कार्यालय में उनसे मिलने आए दिव्यांग फरियादियों की सुविधा हेतु भूतल पर विशेष व्यवस्था की है। अब दिव्यांगजनो को अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु मुख्य सचिव से मिलने मुख्य सचिव कार्यालय के प्रथम तल पर जाने की आवश्यकता नहीं है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी स्वयं दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिदिन फरियादियों के पास पहुंचकर उनकी समस्याओं का संज्ञान लेती है।

उल्लेखनीय है कि दिव्यांगजनों के साथ ही आमजन की समस्याओं की सुनवाई के लिए मुख्य सचिव कार्यालय में प्रत्येक कार्यालय दिवस पर व्यवस्था की गई है। आमजन मुख्य सचिव से उनके कार्यालय में मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत करा सकते हैं। मुख्य सचिव कार्यालय के भूतल स्थित पर्यावरण प्रकोष्ठ में दिव्यांगजनों की सुविधा के दृष्टिगत विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

सीएस ने उर्जा सहित अन्य विभागों को दिए निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग के निर्देश


सीएस राधा रतूड़ी ने ऊर्जा एवं सम्बन्धित विभागों को निवेश प्रस्तावों की ग्राउण्डिंग के साथ ही राज्य में लगने वाले नए उद्यमों हेतु पर्याप्त मात्रा में विद्युत आपूर्ति तथा जलापूर्ति की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने राज्य में लग रहे बायोफ्यूल उद्यमों से कच्चे माल के रूप में पिरूल के उपयोग के प्रस्ताव पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्धता व लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाते हुए सभी निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में गत वर्ष आयोजित हुए उत्तराखण्ड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में किये गए निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग की समीक्षा की। आज की बैठक में उन्होंने मुख्यतः आवास, पर्यटन तथा ऊर्जा विभाग के तहत किए गए एमओयू की समीक्षा की।

बैठक में जानकारी दी गई कि आवास विभाग के तहत कुल किए गए 125 एमओयू में से 74 पर कार्य आरम्भ हो चुका है, इससे कुल 7429.85 करोड़ रूपये का निवेश आया है तथा 12318 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। पर्यटन विभाग के तहत कुल 505 एमओयू में से 140 पर कार्य आरम्भ हो चुका है, जिससे 3816.22 करोड़ रूपये का निवेश आया है तथा 5047 रोजगार सृजित हुए हैं। ऊर्जा विभाग के तहत कुल 193 यूनिट की ग्राउंडिंग हो चुकी है जिससे 28288 करोड़ का निवेश आया है तथा निर्माण कार्यों के दौरान 18119 रोजगार तथा संचालन के दौरान 4026 रोजगार सृजित हुए हैं। एरोमेटिक प्लान्टस के क्षेत्र में अभी तक कुल 32 यूनिट की ग्राउंडिंग हुई है जिससे 133.4 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है तथा 1052 रोजगार सृजित हुए हैं।

बैठक में सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड में फेसलेस चालान सिस्टम होगा लागू, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने परिवहन विभाग से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के बाद हुए डेथ ऑडिट के फलस्वरूप उठाए गए सुधारात्मक कदमों (Corrective Measures) की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने पूरी तरह से फेसलेस चालान सिस्टम को लागू करने के निर्देश दिए है। राधा रतूडी ने सम्पूर्ण राज्य सीमा एवं सभी मुख्य मार्गों पर एएनपीआर कैमरों के साथ ही शहरों में ड्रोन कैमरों से ट्रैफिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं चालान के निर्देश दिए हैं। सीएस ने शिक्षा विभाग को स्कूलों में सप्ताह में एक दिन बच्चों को सड़क सुरक्षा के सम्बन्ध में जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ट्रैफिक सिगनल को एएनपीआर तथा आरएलवीडी सिस्टम से अपग्रेड करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबन्ध समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने के दृष्टिगत मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वालों के लिए हेलमेट पहनने एव फॉर वीकल में सभी के लिए सीट बेल्ट के नियम को सख्ती से लागू करवाने के निर्देश दिए हैं।

रोड सेफटी की आज की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की ट्रैफिक व्यवस्था को हाईटेक एवं अपडेट करने के दृष्टिगत मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी 13 जिलों में ड्रोन सेवाओं की व्यवस्था, ट्रैफिक सिगनल को एएनपीआर तथा आरएलवीडी सिस्टम से इंटिग्रेट व अपडेट करने, हाई टेक मोटर बाईक, कैमरों के साथ राडार स्पीड साइन बोर्ड, डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड व वेरिएबल मेसेज डिस्पले बोर्ड लगाने, ट्रैफिक पुलिस कर्मियों हेतु बॉडी वॉर्न कैमरा, एल्कोमीटर / ब्रीथ एनालाइजर, पोर्टेबल साउण्ड सिस्टम जैसे आधुनिकतम टेक्नॉलाजी सिस्टम को लागू करने की वित्तीय एवं सैद्धान्तिक स्वीकृति दी है।

सीएस राधा रतूड़ी ने परिवहन एवं पुलिस विभाग को सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता हेतु अधिकाधिक सोशल मीडिया के माध्यम से जन जागरूकता को कार्य करने के निर्देश दिए है।

जीरो एक्सीडेंट राज्य के विजन के साथ कार्य करने की सख्त हिदायत देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूडी ने लोक निर्माण विभाग को वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु सुरक्षात्मक कार्यों के तहत क्रैश बैरियर लगाने, रोड डेलीनेटर व कैट आई, ब्लैक स्पॉट पर सुधारात्मक कार्य करने, पैरापिट एवं कॉशनरी साईन बोर्ड, रोड फर्नीचर रोड मार्किंग आदि कार्यों की वित्तीय एवं सैद्धान्तिक स्वीकृति दी।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने हिट एण्ड रन तथा गुड़ समेरिटन के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के मागों पर वैज्ञानिक तरीके से गति सीमा के निर्धारण की कार्ययोजना पर तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं ।

बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले वर्ष 67 गुड समेरिटन को 10 लाख की धनराशि आवंटित की गई है। वर्ष 2024-26 में गुड़ समेरिटन योजना हेतु 10 लाख की धनराशि प्रस्तावित है। विदित है कि गुड समेरिटन को प्रोत्साहित करने हेतु उत्तराखण्ड में Ministry of Road Transport and Highways, Government of India की Good Samaritan स्कीम को विभागीय स्तर पर लागू किया गया है, जिसमें Good Samaritan को नगद ईनाम और प्रशंसा पत्र दिया जाता है।“

उत्तराखण्ड राज्य में भी विभागीय Good Samaritans पुरस्कार योजना प्रारम्भ की गयी है, जिसके अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित कार्यों में से कोई कार्य करता है, तो उत्तराखण्ड पुलिस उसे नगद ईनाम और प्रशंसा पत्र प्रदान करेगी। सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करना। सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति/व्यक्तियों का राहत एवं बचाव कार्य कर समय से अस्पताल पहुँचाना। सड़क दुर्घटना में घायल / चोटिल व्यक्ति को एम्बुलेंस की उपलब्धता न होने की स्थिति में निजी वाहन से अस्पताल पहुँचाना।

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को आवश्यकता पड़ने पर रक्तदान करना या रक्तदान का प्रचार-प्रसार कर सम्बन्धित ब्लड ग्रुप वाले रक्तदाता (Donor) की व्यवस्था करना।

दुर्घटना में घायल व्यक्ति की आर्थिक रूप से सहायता करना आदि। सड़क दुर्घटना की रोकथाम के प्रयास में प्रभावी सहायता योगदान उपलब्ध कराना।

बैठक में पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु, सचिव अरविन्द सिंह हयाकी, वी षणमुगम सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।

सीएस ने दी अधिकारियों को मलिन बस्तिवासियों के साथ मानवीयता व संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की नसीहत

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारियों को नगर निकायों में अवस्थित मलिन बस्तियों के चिन्हीकरण के बाद सूचीबद्ध रिपोर्ट एक सप्ताह में शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि उनके विकास, पुनरूद्वार व पुनर्वासन की कार्ययोजना पर जल्द से जल्द कार्य आरम्भ किया जा सके। सीएस राधा रतूड़ी ने अधिकारियों को राज्य में मलिन बस्तियों के सुधार, विनियमितीकरण, पुनरूद्वार, पुनर्वासन तथा पुनर्व्यस्थापन के लिए अत्यन्त संवेदनशीलता एवं मानवीयता के साथ प्रभावी कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में शहरी विकास विभाग तथा आवास विभाग की एक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने शहरी विकास विभाग को सफाई कर्मियों के लिए पर्याप्त आवास एवं बीमा की व्यवस्था हेतु कार्ययोजना बनाने के भी निर्देश दिए हैं। सीएस ने मलिन बस्तियों हेतु प्राधिकरण के माध्यम से कॉर्पस फण्ड के निर्माण के भी निर्देश दिए हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि शासन की अधिसूचना संख्या 2154 दिनांक 21 दिसम्बर 2016 की विभिन्न श्रेणियों के तहत जनपद बागेश्वर में श्रेणी एक की 04 मलिन बस्तियां तथा श्रेणी दो की 02 मलिन बस्तियां, हरिद्वार में श्रेणी एक की 57 मलिन बस्तियां, श्रेणी दो की 02, श्रेणी तीन की 24, नैनीताल में श्रेणी एक की 37, श्रेणी दो की 01, श्रेणी तीन की 23, अल्मोड़ा में श्रेणी एक की 04, देहरादून में कुल 128 मलिन बस्तियों चिहिन्त की गई हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु सहित अन्य अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

जिलाधिकारियों को जनपदों में आवासीय कॉलोनियों में बाल श्रम पर पूर्णतः प्रतिबन्ध हेतु सर्कुलर जारी करने के निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जनहित में सभी निर्माण एवं कार्य स्थलों पर अनिवार्य रूप से इस सूचना के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं कि उत्तराखण्ड में अन्य राज्यों से आए श्रमिकों को भी उनके राशन कार्ड के माध्यम से राशन दिया जा रहा है। इस मामले में उत्तराखण्ड राज्य का देशभर में 6वां स्थान है, यह एक बेहतरीन रिकॉर्ड है। इसके साथ ही शुक्रवार को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में सीएस राधा रतूड़ी ने निदेशालय स्तर पर इंटिग्रेटेड डाटा बेस हेतु स्टेट रिसोर्स सेन्टर के गठन की स्वीकृति दी। यह स्टेट रिसोर्स सेन्टर रियल टाइम डाटा उन्होंने सम्बन्धित सचिव को सभी जिलाधिकारियों को जनपदों में आवासीय कॉलोनियों में बाल श्रम पर पूर्णतः प्रतिबन्ध हेतु सर्कुलर जारी करने हेतु तत्काल निर्देश जारी करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को बाल विवाह से मुक्त करवाई गई बालिकाओं हेतु आवासीय विद्यालयों एवं हॉस्टल में शिक्षा की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार जिलों में बाल विवाह व चंपावत में मानव तस्करी के अधिक मामलों को गम्भीरता से लेते हुए सीएस रतूड़ी ने विभाग को प्रत्येक जिले हेतु अलग-अलग एक्शन प्लान बनाने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के सम्बन्ध में अनिवार्यतः आन्तरिक परिवाद समिति समितियों के गठन को लेकर सभी विभागों, सरकारी संगठनों, प्राधिकरणों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, संस्थानों, निकायों, समस्त की स्थिति स्पष्ट करने वाली रिपोर्ट भी तलब की। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने बैठक में मौजूद एनजीओ, सामाजिक सेवा संस्थानों व विभागों से राज्य में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी से सम्बन्धित रिपोर्ट एवं कार्यबल में महिला हिस्सेदारी बढ़ाने हेतु कार्ययोजना बनाने के भी निर्देश दिए।

राज्य में विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा बालिका ड्रॉप आउट के प्रतिशत में आंकड़ों का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के नामों की स्पष्ट सूची जल्द से जल्द संकलित की जाय ताकि उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने की कार्ययोजना पर कार्य किया जा सके। उन्होंने इस सम्बन्ध में अधिकारियों को औपचारिकताओं से हटकर प्रो-एक्टिव होकर कार्य करने की नसीहत दी।

जनपद हरिद्वार में गर्भवती महिलाओं में एनिमिया की कमी के कारण महिलाओं व बच्चों की मृत्यु दर अन्य जनपदों से अधिक होने के मामलें को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने चिकित्सा विभाग से इस सम्बन्ध में की गई कार्यवाही की रिपोर्ट तलब की।

बैठक में सचिव चन्द्रेश कुमार, विनोद कुमार सुमन सहित गृह विभाग, वित्त विभाग, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, बचपन बचाओं आन्दोलन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्य सचिव ने राफ्टर्स के लिए मार्केट बनाने और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर बल देने की बात कही

राफ्टिंग व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए मुख्य सचिव ने खारास्रोत पार्किंग तृतीय एवं गंगा नदी में पुट इन पॉइंट ब्रह्मपुरी का निरीक्षण कर व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही राफ्टिंग की सराहना की। इस दौरान उन्होंने राफ्टर्स के लिए मार्केट बनाने, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर बल देने, राफ्टिंग की ड्रोन फुटेज लेने तथा रिवर राफ्टिंग एवं क्याकिंग नियमावली का उल्लंघन करने वालों के दंडात्मक/चालान कार्यवाही जिला प्रशासन स्तर से किए जाने हेतु अग्रिम कार्यवाही की बात कही। जिलाधिकारी ने बताया कि राफ्टर्स के लिए बनाए गए अस्थाई पार्किंग स्थल खारास्रोत में द्वितीय चरण के कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें सीसी कार्यों के साथ ही अन्य कार्य किए जाने हैं।

अपर मुख्य कार्याधिकारी (साहसिक विंग) यूटीडीबी कर्नल अश्विनी पुण्डीर ने बताया कि गंगा नदी में 263 फर्म पंजीकृत हैं तथा 576 राफ्ट्स हैं। जबकि अलकनंदा नदी में 29 फर्म पंजीकृत हैं तथा 65 राफ्ट्स हैं। उन्होंने बताया कि टिकट काउंटर के समीप सुलभ शौचालयों/चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। सड़क मार्ग से नदी में जाने वाले समस्त पैदल मार्गों का मरम्मतीकरण का कार्य किया गया है। पुट इन एवं पुल आउट पॉइंट्स यथा नीम बीच, ब्रहमपुरी, शिवपुरी, मैरीन ड्राइव में स्थाई निर्माण कार्य हेतु वन भूमि हस्तान्तरण की कार्यवाही अन्तिम चरण में गतिमान है। राष्ट्रीय जल कीड़ा संस्थान गोवा के सहयोग से लगभग 400 गाइडों को लाईफ सेविंग का प्रशिक्षण साहसिक खेल अकादमी कोटी कालोनी टिहरी में दिया गया।

इस दौरान मुख्य सचिव ने चार धाम यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए भद्रकाली में केदारनाथ/बद्रीनाथ एवं गंगोत्री/यमुनोत्री धाम यात्री पंजीकरण जांच केंद्र का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि चारधाम यात्रा का ट्राय जंक्शन पॉइंट भद्रकाली में यात्रियों के पंजीकरण की जांच करके ही गाड़ियों को आगे भेजा जा रहा है। जनपद में यातायात व्यवस्था सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही है। मुख्य सचिव ने यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के दृष्टिगत निरंतर व्यवस्थाएं बनाए रखने को कहा।

इस मौके पर डीएफओ जीवन डगाड़े, एडीएम के.के. मिश्रा, एएसपी टिहरी जे.आर. जोशी, एएसपी पौड़ी, एआरटीओ सतेंद्र राज, एसडीएम देवेंद्र नेगी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।