सीएस बोले, सभी विभाग बेस्ट प्रैक्टिसेज का प्रेजेंटेशन तैयार करें

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में सचिव स्तर की बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने बैठक में सभी अधिकारियों को उनके बेहतर विभागीय कार्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज (सफलता की कहानियां) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेस्ट प्रैक्टिसेज में ऐसा यूनिक इनिशिएटिव हो जो किसी भी राज्य द्वारा नहीं किया गया हो अथवा जो अन्य से अलग हो। बेस्ट प्रैक्टिसेज संस्थागत अथवा व्यक्तिगत जिस स्तर का भी हो उसका प्रेजेंटेशन तैयार करें।
उन्होंने सभी सचिवों से उनके विभागों में हो रहे बेहतरीन कार्यों की जानकारी लेते हुए उनका बेस्ट प्रैक्टिसेज के रूप में संकलन तैयार करने के निर्देश दिए। जिससे लोगों को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि आईटी, कृषि, उद्यान, बाल विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, सहकारिता, पशुपालन, वन विभाग, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, हायर एजुकेशन, आयुष इत्यादि विभागों में बेस्ट प्रैक्टिसेज की अधिक संभावना है।

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को निर्देशित किया कि विभिन्न विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंटेशन करें ताकि जनमानस को उसका अधिक-से- अधिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने सभी विभागों को अपनी विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक -से-अधिक ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने पर जोर देने के निर्देश दिए। जिससे एक खुली, पारदर्शी, सहज और व्यवस्थित कार्यप्रणाली और व्यवस्था डेवलप हो सके।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं

मुख्य सचिव ने संबंधित सचिवों को निर्देशित किया कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम – 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं ताकि ज्ञान और अनुभव की पूंजी हमारे वरिष्ठ नागरिक अपनी वृद्धावस्था को सम्मानपूर्वक जी सके। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इस एक्ट का कड़ाई से अनुपालन करवाने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल एल फैनई व प्रदीप पंत, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, नीतेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. श्रीधर बाबू आद्यंकी, चंद्रेश यादव, डॉ आर राजेश कुमार, दीपेंद्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान, धीराज सिंह गर्ब्याल उपस्थित थे।

साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर में बैंकर्स प्रतिनिधि की तैनाती कराएं आरबीआईः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में आरबीआई के तत्वाधान में आयोजित 25 वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आरबीआई और गृह विभाग द्वारा विगत बैठक में दिए गए निर्देशों की एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आज के डिजिटल युग में वित्तीय और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सभी बैंकर्स और इंप्लीमेंटेशन एजेंसी तथा विभागों के मध्य बेहतर तालमेल हो, वित्तीय अपराधों से संबंधित FIR, इन्वेस्टिगेशन, चार्जशीट, कंप्लायंस इत्यादि में तेजी दिखाई जाए तथा इस प्रकार के वित्तीय फ्रॉड को रोकने के लिए बड़े कारगर संस्थागत प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने इसके लिए जन सामान्य को जागरूक करने के साथ-साथ इस पर नियंत्रण पाने के लिए सुदृढ़ निकाय की भी आवश्यकता बताई।

उन्होंने निर्देशित किया कि EOU (economic offence wing) जो अभी सीबीसीआईडी के अधीन कार्यरत हैं इस एजेंसी को इंडिपेंडेंस एजेंसी बनाने के लिए कार्य करें। इस एजेंसी में एसटीएफ के अधीन काम करने वाली FFU (फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट) को भी मर्ज करने की कार्रवाई की जाय।
उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर में बैंक प्रतिनिधि की भी अनिवार्य उपस्थिति हो ताकि वित्तीय फ्रॉड करने वाले किसी भी संस्थान /फर्म की वेबसाइट/पोर्टल को तत्काल ब्लॉक किया जा सके और लोगों का वित्तीय नुकसान होने से तत्काल बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि लोगों से वित्तीय पूंजी प्राप्त करने वाले संस्थाओं /फर्म का नियमित निवेश (BUDS पोर्टल) की वेबसाइट https//www.niyamitnivesh.in पर पंजीकरण कराने के लिए सभी बैंकों की ओर से नोडल अधिकारियों की तैनाती भी की जाय। ताकि लोगों को अधिकृत वित्तीय पूंजी प्राप्त करने वाले संस्थान की जानकारी प्राप्त हो सके।

इस अवसर पर बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, महानिरीक्षक पुलिस नीलेश आनंद भरणे, रिजर्व बैंक इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार, महाप्रबंधक नीता आदि अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में देहरादून स्थित यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित प्रोजेक्ट के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई तथा ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और समस्याओं के समाधान पर भी मंथन किया गया।

मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग को निर्देशित किया कि विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित जितनी भी परियोजनाएं गतिमान हैं उनको समय से पूरा करें और उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्यों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंट करें।

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रोजेक्ट से संबंधित तकनीकी बिंदुओं के बेहतर क्लेरिफिकेशन और स्टडी के लिए निदेशक मंडल में एक तकनीकी मेंबर की नियुक्ति की जाए। उन्होंने निदेशक मंडल की बैठक में यूईआरसी (उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग) द्वारा पारित टैरिफ ऑर्डर को भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कंपनियों के बढ़े हुए ऑथराइजेशन कैपिटल की सूचना सरकार से भी साझा करने को कहा। साथ ही सितंबर 2025 तक ईआरपी (उद्यम संसाधन योजना) को पूरी तरीके से स्थिर करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सीमांत जनपदों के ऐसे सीमांत गांव जो अभी तक सोलर विद्युत से आच्छादित हैं उनको ग्रिड आधारित विद्युत आपूर्ति से भी आच्छादित करें।

ट्रांसफार्मर में कैपेसिटर बैंक लगाने का निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन

वोल्टेज की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे प्रदेश में ट्रांसफार्मर में 76 हजार से अधिक कैपेसिटर बैंक लगाए जाने हैं जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया।

बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) लगाने की सहमति

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन 100 मेगावाट की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने जा रहा है जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया। यह परियोजना उत्तराखंड के नवीनीकरण ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट से संबंधित धनराशि सस्ती ब्याज दरों पर उपलब्ध हो सके इसके लिए विभिन्न वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों का आकलन करने के पश्चात ही निर्णय लिया जाए।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अपनी उपलब्धियां को साझा करते हुए कहा कि विगत 3 वर्षों से निगम के राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हुई है। विद्युत उपभोक्ता रैंकिंग में सुधार हुआ है तथा एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉसेज में विगत 3 वर्षों में कमी आई है।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, स्वतंत्र निदेशक मंडल से बीपी पांडेय व पराग गुप्ता, प्रबंध निदेशक यूपीसीएल अनिल कुमार, पिटकुल पीसी ध्यानी व यूजेवीएनएल संदीप सिंहल उपस्थित थे।

सीएस ने जताई पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राष्ट्रीय नार्काे समन्वय पोर्टल (एन्कॉर्ड) की बैठक ली। मुख्य सचिव ने प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं पर नशे के बढ़ते प्रकोप पर काबू करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए डीएम एसएसपी को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

मुख्य सचिव ने नशे की बिक्री को रोकने के लिए प्रवर्तन को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे को रोकने के लिए पुलिस विभाग को कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह को नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने हेतु पूरी छूट देते हुए सिंगल पॉइन्ट नोडल अधिकारी नामित किया। उन्होंने कहा कि नशे की जड़ों को काटने के लिए उन्हें जो भी आवश्यकता है, उपलब्ध करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि नशे के लिए बने इस ईको सिस्टम को तोड़ने के लिए पूरे प्रदेश में एक साथ अभियान चलाया जाए, जिसमें प्रत्येक सम्बन्धित विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को ड्रग इंस्पेक्टर को भी इस अभियान में शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिमांड और सप्लाइ की चौन को तोड़ने में प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी। सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अपने जनपदों में शिक्षण संस्थानों और हॉस्टल आदि के प्रमुखों से वार्ता कर उन्हें अपने संस्थानों में मेडिकल टेस्ट करने हेतु राजी करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए उपकरण एवं टेस्ट मैटीरियल की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी इसमें सहयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का मेडिकल टेस्ट कराए जाने हेतु लगातार अभियान चलाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने वृहद स्तर पर राज्य एवं जनपदों में जागरूकता अभियान संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गृह विभाग, सूचना विभाग, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग को एक दिन निर्धारित करते हुए वृहद स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जागरूकता गतिविधियों में सोशल मीडिया एवं सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी शामिल किया जाए। प्रदेश भर में लगातार इस प्रकार के जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण एवं जिला स्तरीय समन्वय समिति की प्रत्येक माह बैठकें आयोजित करायी जाएं। उन्होंने प्रदेश में संचालित हो रहे सरकारी नशा मुक्ति केन्द्रों एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों की क्षमता बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपयोग में नहीं आ रहे सरकारी भवनों को भी नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों के रूप में संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रायवाला में ओल्ड एज होम के लिए बनाए गए भवन सहित अन्य तैयार हो चुके भवनों में अगले एक माह में नशा मुक्ति केन्द्र शुरू किए जाएं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में खाली पड़े सरकारी भवनों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि इन भवनों में आवश्यकता के अनुसार अन्य जनहित के कार्य शुरू किए जा सकें।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में संचालित हो रहे प्राईवेट नशामुक्ति केन्द्रों का भौतिक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो प्राईवेट संस्थान मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़े जाने की आवश्यकता है, ताकि वे जल्दी से जल्दी अपनी नशे की लत को छोड़ सकें।

मुख्य सचिव ने कहा कि एनसीसी, एनएसएस और महिला मंगल दलों को भी नशे के खिलाफ लड़ाई में शामिल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में वार्षिक हेल्थ चौकअप को बढ़ावा दिया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. रंजीत सिन्हा, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी. मुरूगेशन, आईजी लॉ नीलेश

सीएस ने दिया दीर्घकालिक नीति को आकार देने और लागू करने में सरकारी अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर जोर

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन एवं सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह ने विकसित उत्तराखण्ड विजन 2047 कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्रतिभाग किया।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि विजनिंग अभ्यास सभी सरकारी विभागों के लिए मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह वर्तमान के लिए एक योजना नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक निवेश है। उन्होंने दीर्घकालिक नीति को आकार देने और लागू करने में सरकारी अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेतु आयोग, यूएनडीपी के साथ मिलकर इसके परिभाषित मापदंडों और मापने योग्य परिणामों को महत्त्वपूर्ण ढांचा प्रदान करेगा।

सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह ने एक व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य पेश किया। उन्होंने पूंजी निवेश, वैश्विक तकनीकी अपनाने और समावेशी विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे उत्तराखण्ड के निम्न-मध्यम आय वाले राज्य से उच्च आय वाले राज्य में परिवर्तन की कुंजी बताया।

इस अवसर पर सचिव नियोजन डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने विजनिंग अभ्यास के दौरान प्रतिभागियों की चर्चाओं को मार्गदर्शन और प्रोत्साहित करने के लिए मुख्य क्षेत्रों में विभिन्न बेंचमार्क प्रस्तुत किए।

यूएनडीपी के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य वर्ष 2047 तक प्रदेश को विकसित करने के लिए क्रॉस-सेक्टोरल कार्य समूहों द्वारा चिन्हित 218 से अधिक “सिग्नल्स – उभरते संकेतक और रुझान“ को संरचना और प्राथमिकता निर्धारित करना था। ये सिग्नल्स जलवायु परिवर्तन, बुनियादी ढांचा विकास, अर्थव्यवस्था और रोजगार, स्थानीय स्व-शासन को सशक्त बनाने, वित्त, सुरक्षा, शांति और न्याय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करते हैं, जो एक व्यापक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

सीएस ने किया देहरादून एयरपोर्ट पर देर रात्रिकालीन लैंडिंग की सुविधा हेतु अनुरोध

उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने राज्य के विकास से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों के संबंध में भारत सरकार के विभिन्न सचिवों से भेंट की।

पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का मिला आश्वासन

छह माह के भीतर निविदा प्रक्रिया की जाएगी प्रारंभ

मुख्य सचिव ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा से भेंट की, जिसमें पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर चर्चा की। सचिव सिन्हा ने आश्वस्त किया कि आगामी छः माह में पंतनगर एयरपोर्ट का निर्माण हेतु Bidding Process प्रारंभ कर लिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने देहरादून एयरपोर्ट पर देर रात्रिकालीन लैंडिंग की सुविधा हेतु भी अनुरोध किया। साथ ही हेली एम्बुलेंस सेवा को पुनः आरंभ करने, एवं पिथौरागढ़ एयरपोर्ट के सुदृढ़ीकरण को लेकर भी आग्रह किया, जिस पर नागरिक उड्डयन सचिव ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

केदारनाथ में हुई हेलीकॉप्टर की क्रैश लैंडिंग की घटना के संदर्भ में मुख्य सचिव ने यात्रियों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से यथोचित कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

रोपवे और जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय क्लीयरेंस का किया गया अनुरोध

मुख्य सचिव ने वन एवं पर्यावरण सचिव तनमय कुमार से भेंट कर त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना, ऋषिकेश-नीलकंठ रोपवे प्रोजेक्ट, एवं सिरकारी भ्योल रूपासिया बगड़ जलविद्युत परियोजना के लिए वन स्वीकृति (wild life clearance/environment clearance) प्रदान करने का अनुरोध किया।

ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए रीजनल ट्रैफिक ट्रांजिट सिस्टम का दिल्ली मेरठ से आगे ऋषिकेश तक विस्तार का अनुरोध किया गया

मुख्य सचिव ने आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला से मुलाकात कर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को दिल्ली-मेरठ मार्ग से आगे हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तारित करने हेतु अनुरोध किया। यह प्रस्ताव परीक्षण और दृश्यता रिपोर्ट के आधार पर क्रियान्वयन हेतु दिया गया। साथ ही देहरादून शहर में ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव के लिये अनुरोध किया।

पेयजल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु राज्य सरकार को दी जाने वाली धनराशि जारी करने का आग्रह

मुख्य सचिव ने पेयजल एवं स्वच्छता सचिव अशोक केके मीणा के साथ बैठक कर राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लंबित धनराशि लगभग ₹3000 करोड़ अवमुक्त किये जाने का अनुरोध किया। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार धाम यात्रा के दौरान ठोस स्वच्छता प्रबंधन व्यवस्था हेतु विशेष ध्यान देने की बात रखी।

राज्य में आपदा के दौरान वायु सेना को अदा किए जाने वाले शुल्क में छूट की मांग की गई

मुख्य सचिव ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात कर राज्य के आपदा एवं राहत कार्यों के अंतर्गत भारतीय वायुसेना की सेवाओं के लिए देय शुल्क को माफ किए जाने का अनुरोध किया।

एमएसएमई सेक्टर को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति 90% लागत सहायता प्रदान करने का किया अनुरोध

मुख्य सचिव ने एमएसएमई सचिव सुभाष चंद्र लाल दास से मुलाकात कर, पूर्वाेत्तर राज्यों के भांति उत्तराखण्ड राज्य को एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत तक लागत सहायता धनराशि के लिय अनुरोध किया। राज्य में फ्लैट फैक्ट्री एवं टूल रूम और प्रौद्योगिकी विकास केंद्र, टेस्टिंग पैकेजिंग सेंटर जैसे केंद्रों केा विकास करने हेतु अनुरोध किया गया।

उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के अंब्रेला ब्रांड हाउस आफ हिमालय को प्रमोट करने का किया आग्रह

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह से मुलाकात कर मनरेगा के तहत 270 करोड़ रुपए की लंबित राशि को अवमुक्त करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त ‘हाउस ऑफ हिमालय’ को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि उत्तराखण्ड के हस्तशिल्प, उत्पादों और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल सके। इसके साथ ही दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के आउटलेट्स खोले जाने का अनुरोध किया गया।

उत्तराखंड को सुगम्य फिल्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए फिल्म फेस्टिवल की मेजबानी का अनुरोध किया गया

मुख्य सचिव ने सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू से भेंट कर उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल की मेज़बानी और राज्य में अधिक से अधिक फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहित करने की दिशा में समर्थन माँगा गया। इसके अतिरिक्त व्यय सचिव श्री वी. वुअलनम से मुलाकात कर आगामी हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया गया, ताकि आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित रूप में संपन्न हो सके।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सलाहकार (मा0 प्रधानमंत्री) से मुलाकात कर राज्य की विभिन्न आवश्यकता यथा कुम्भ-2027 हेतु आर्थिक सहायता, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विस्तारीकरण व सुदृढ़ीकरण आदि हेतु अनुरोध किया गया।

प्रमुख वाहन निर्माताओं को उत्तराखंड में निवेश का दिया न्यौता

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने उत्तराखंड निवास में प्रमुख वाहन निर्माताओं (टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, KIA मोटर्स, GSW आदि) के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर, देश के विभिन्न राज्यों में लागू इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस संबंध में उत्तराखण्ड राज्य में ईवी क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु निवेश संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

यूनिक और प्रभावी सर्विस, वन गेटवे तथा बेहतर मार्केटिंग के जरिए बढ़ाएं इको टूरिज्मः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में डेवलपमेंट ऑफ इको टूरिज्म की राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एच. पी. सी.) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग तथा संबंधित अधिकारियों के साथ इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि पूरे राज्य में जबरखेत मॉडल आधारित बड़े इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें। इको टूरिज्म का एक बहुत बड़ा डेस्टिनेशन हो जिसके चारों ओर छोटे-छोटे डिस्टेंस पर फॉरेस्ट टूरिज्म से संबंधित छोटे-छोटे फॉरेस्ट टूरिस्ट स्टेशन हो। जहां पर इको टूरिज्म से संबंधित विविध प्रकार की एक्टिविटी (फॉरेस्ट ट्रैकिंग, बर्ड वाचिंग, वाइल्डलाइफ सफारी, हेरिटेज ट्रेल, इको कैंपिंग, नेचर एडवेंचर, नेचर गार्डन इत्यादि) मौजूद हो। इसको एक पूरे पैकेज की भांति डेवलप करें। इस बात का भी होमवर्क करें कि इसका बेहतर संचालन कैसे संभव हो अर्थात डेस्टिनेशन के डेवलपमेंट से लेकर, उसकी मार्केटिंग और उसका प्रभावी संचालन कैसे हो इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।

यूनिक और स्मूथ सर्विस तथा वन गेटवे और बेहतर मार्केटिंग से इको टूरिज्म को बनाएं प्रभावी

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि शुरुआती चरण में 20 से 25 ऐसे इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें जिनको डेवलप करना आसान हो और जहां पर डेवलप होने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हो। उन्होंने निर्देशित किया कि इस बात की भी संभावनाएं तलाशें कि जो डेस्टिनेशन पहले से ही मौजूद हैं अथवा जिनको विकसित किया जा रहा है उनमें और अधिक वैल्यू एडिंग क्या की जा सकती है ताकि उसको और अधिक आकर्षक बनाया जा सके। बड़े और छोटे दोनों तरह के डेस्टिनेशन डेवलप करें।

उन्होंने कहा कि नंदा देवी पिक जो की 80 के दशक से बंद है वहां पर किस प्रकार से पुनः इको टूरिज्म की संभावना है तलाशी जा सकती हैं इसकी भी स्टडी करें।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों (वन एवं वन्य जीवों) का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दें।

इस दौरान बैठक में सचिव वन सी रवि शंकर, पीसीसीएफ धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक राहुल, अपर सचिव पर्यटन डॉ पूजा गर्ब्याल, अपर सचिव वन विनीत कुमार, सीसीएफ इको टूरिज्म पी के पात्रों सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव ने वन विभाग को प्रदेश में जड़ी- बूटी के विकास और संरक्षण से संबंधित वन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी लेते हुए निर्देशित किया कि स्थानीय समुदायों और वन पंचायतों को जड़ी बूटी रोपण, इको टूरिज्म एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों के माध्यम से सशक्त बनाएं। उन्होंने जड़ी बूटी के विकास के माध्यम से आजीविका सृजन, कौशल विकास एवं स्थानीय आर्थिक व बुनियादी ढांचे में सुधार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि कलस्टर लेवल फेडरेशन (स्थानीय वन पंचायत) के समन्वय से जड़ी बूटी उत्पादन के प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट करें।
निर्देशित किया कि प्रोजेक्ट के अंतर्गत जितनी वन पंचायतों को चिन्हित किया जा चुका है वहां पर कार्यों की प्रगति तेजी से बढ़ाएं।
इस दौरान वन विभाग ने अवगत कराया की गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समय अवधि 10 वर्ष की है। इसका प्रथम चरण 2024 से 2029 तक तथा द्वितीय चरण 2028 से 2033 तक का है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 628 करोड रुपए है तथा यह प्रोजेक्ट जनपद हरिद्वार एवं उधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के 11 जनपदों में इंप्लीमेंट किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 5000 वन पंचायतें लाभान्वित होंगी। इसके तहत 5000 हेक्टेयर वन पंचायत की भूमि पर तथा 5000 हेक्टेयर निजी भूमि पर जड़ी बूटी का वनीकरण किया जाना है।

सीएस ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम में हुई ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में जीएमएस रोड स्थित उत्तराखंड जल विद्युत निगम के सभागार में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में यूजेवीएनएल, पिटकुल और यूपीसीएल के तीनों कारपोरेशन के गतिमान कार्यों, उनकी वर्तमान स्थिति, उनकी प्रगति, भविष्य की रणनीतियों तथा लोगों को स्वच्छ, सुलभ और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

प्रोजेक्ट के तकनीकी, आर्थिकी और व्यवसायिक व्यवहारिकता का ध्यान रखा जाए।
महत्वपूर्ण अप्रूवल प्राप्त होने के पश्चात ही निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करें।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि किसी भी प्रोजेक्ट को बनाते समय उसके तकनीकी, आर्थिकी और व्यावसायिक सभी पहलुओं को ध्यान में रखें। साथ ही प्रशासनिक, पर्यावरणीय, वित्तीय और तकनीकी सभी तरह की महत्वपूर्ण स्वीकृतियां प्राप्त होने के पश्चात ही निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करें। ताकि बाद में परियोजनाओं को पूरा करने में किसी भी अवरोध का सामना न करना पड़े।

सभी प्रोजेक्ट को निर्धारित समयावधि में पूरा करें। केंद्र और राज्य के संबंधित मंत्रालयों तथा विभागों और एजेंसियों से समन्वय स्थापित करते हुए बाधक बिंदुओं का समाधान तलाशें।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट को पूरा करने की जो अवधि निर्धारित की जाती है उसी अवधि में प्रोजेक्ट पूरा करें।

प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के मार्ग में जो भी अवरोध सामने आते हैं चाहे केंद्र सरकार के किसी मंत्रालय से संबंधित हो अथवा राज्य सरकार के किसी विभाग अथवा एजेंसी से संबंधित उन संबंधित पक्षों से बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए उन मुद्दों का समाधान तलाशें जिससे प्रोजेक्ट समय से पूरे हो सकें।

तीनों कॉरपोरेशन अपने-अपने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत, प्रोजेक्ट के विलंब की दशा में उसकी बढ़ी हुई लागत तथा ऊर्जा दक्षता में होने वाली हानि को रोकने के लिए व्यावहारिक उपायों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि ऊर्जा विभाग के तीनों कॉरपोरेशन अपने-अपने प्रोजेक्ट का इस संदर्भ में विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें कि प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत क्या थी और किसी तरह के विलंब के चलते उसकी अंतिम लागत कितनी बढ़ी तथा उसके पीछे क्या कारण रहे। साथ ही ऊर्जा दक्षता में होने वाली हानि का क्या कारण है और उसको कैसे रोका जा सकता है।

ऊर्जा विभाग से जुड़े हुए तीनों कॉरपोरेशन आगामी मध्यकालिक और दीर्घकालिक अवधि का दूरगामी एजेंडा भी प्रस्तुत करें।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि तीनों कॉरपोरेशन आगामी 5 वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष और 25- 30 वर्षों का विस्तृत एजेंडा आगामी बैठक में प्रस्तुत करें। इस एजेंडा में भविष्य में ऊर्जा जरूरत को ध्यान में रखते हुए कारपोरेशन के क्या-क्या प्लान हैं, क्या टारगेट रहेंगे और उनको कैसे अचीव किया जा सकता है इनका विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को महत्वपूर्ण निर्देश

तराई वाले जनपदों के खंडवार विद्युत लॉस का विवरण उपलब्ध कराएं।

स्मार्ट मीटर के प्रोजेक्ट के कार्यों में तेजी लाएं और उसको समय से पूरा करें। उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्राथमिकता से विद्युत मीटर के कार्यों को पहले पूरा करें।
भूमिगत लाइनों के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन तथा संबंधित विभागों से नियमित समन्वय कर डे बाय डे प्रगति बढ़ाएं।

पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ़ उत्तराखंड लिमिटेड को महत्वपूर्ण निर्देश

भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से राज्य के पारेषण तंत्र का विस्तृत अध्ययन कराया जाए ताकि पारेषण तंत्र में सुधार लाया जा सके।

विद्युत लॉस को रोकने तथा सुरक्षा की दृष्टि से हाइटेंशन लाइन का नियमित निरीक्षण करें तथा इसके लिए नई तकनीक को भी आत्मसात करें। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ट्रांसमिशन के विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की धनराशि को बढ़ाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम को महत्वपूर्ण निर्देश

राज्य में न्यूक्लियर पावर प्लांट की संभावना की स्टडी करें।
निर्माणाधीन लखवाड बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यों में तेजी लाएं।
सभी विकासशील परियोजनाएं कब से शुरू हुई, वर्तमान में किस स्तर पर हैं तथा कब तक पूर्ण होंगी इसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन द्वारा सरकार को दी जाने वाली देनदारी का आपसी समन्वय से भुगतान करना सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि एशियाई विकास बैंक, राज्य को विशेष सहायतित अनुदान प्राप्त प्रोजेक्ट और मुख्यमंत्री की घोषणाओं से संबंधित प्रोजेक्ट सभी की प्रगति बेहतर करने के लिए नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें।
सभी प्रोजेक्ट में अनिवार्य रूप से बोर्ड की संस्तुति प्राप्त करें।

इस दौरान उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा अवगत कराया गया कि राज्य गठन के समय राज्य की स्थापित विद्युत क्षमता 1101 मेगावाट थी जो वर्तमान में बढ़कर 4264 मेगावाट हो गई है। कॉरपोरेशन द्वारा 2024- 25 में 1136 करोड़ का राजस्व जनरेट किया गया जबकि 95 करोड़ का प्रॉफिट भी किया गया।

इस दौरान ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव ऊर्जा रंजना राजगुरु, प्रबंध निदेशक उत्तराखंड जल विद्युत निगम संदीप सिंहल, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड अनिल कुमार व पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ़ उत्तराखंड लिमिटेड पीसी ध्यानी सहित ऊर्जा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता पर लिया जाएः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सीएम घोषणाओं को पूर्ण किए जाने में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता पर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित एवं राज्य हित की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने योजनाओं को पोर्टल पर लगातार अद्यतन किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि विभागों को भी पोर्टल पर अपनी अद्यतन स्थिति देखे जाने का प्राविधान किया जाए। उन्होंने विभागों को घोषणाओं की प्रगति की अद्यतन सूचना मुख्यमंत्री घोषणा सेल को समय-समय पर उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने शासन को टीएसी एवं ईएफसी आदि के लिए भेजे गए प्रस्तावों को एक माह में निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग एवं सिंचाई विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सीएम घोषणाओं पर विभागों की प्रगति पर संतुष्टि व्यक्त की।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, एस.एन. पाण्डेय एवं महानिदेशक शिक्षा अभिषेक रोहेला अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रत्येक राज्य को एक स्थान को चिन्हित कर उसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनानाः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान सभी जनपदों के जिलाधिकारी भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार से कोविड संक्रमण के विषय पर विस्तृत जानकारी ली।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण की मुख्य बातों पर ध्यान आकर्षित किया। मुख्य सचिव ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लिए विकसित ग्राम, विकसित शहर, विकसित जनपद की तर्ज पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए सभी जनपदों द्वारा अपना प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों के लिए भी सभी जनपदों द्वारा अपने लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को एक स्थान को चिन्हित कर उसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना होगा। इस दिशा में कार्य शीघ्र शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात बढ़ाने के साथ ही, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दिया जाए। इसके लिए उद्योग विभाग द्वारा योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि 21वीं सदी प्रौद्योगिकी संचालित सदी है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी योजनाओं और कार्यों में नई प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए, आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं और कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंचाना है। उन्होंने ईवी सेक्टर के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश के भीतर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दिशा में कार्य किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नई-नई तकनीकों के प्रशिक्षण को अपनी शिक्षा और कौशल विकास से जोड़े जाने की जरूरत है।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में वैदिक गणित को भी बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए उच्च शिक्षा, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा द्वारा मिलकर वैदिक गणित के क्षेत्र में कार्य किया जाए। उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए कि पांडुलिपियों को डिजिटल एवं फिजिकल दोनों प्रकार से संरक्षित किया जाए। उन्होंने गृह एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से प्रदेश में स्टेट कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम भी तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि प्रदेश में इस के लिए एक मजबूत ईको सिस्टम तैयार किया जाए।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जनपद अपने दीर्घकालिक एवं लैगेसी मुद्दों को चिन्हित कर सम्बन्धित विभागों को भेजें। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को उच्च स्तर पर निस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने 5 जून को पर्यावरण दिवस को बड़े स्तर पर मनाए जाने की बात कही। उन्होंने इसके लिए प्रमुख सचिव वन श्री आर.के. सुधांशु को इसकी जिम्मेदारी देते हुए प्रधानमंत्री जी के आह्वान ‘एक पेड़ माँ के नाम‘ का वृहद् स्तर पर आयोजन किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगोली, नितेश कुमार झा, राधिका झा, दिलीप जावलकर, रविनाथ रमन, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, दीपक रावत, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. नीरज खैरवाल, विनय शंकर पाण्डेय, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान एवं युगल किशोर पंत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।