सीएस ने पर्यटन विभाग को पर्यटकों के लिए बेसिक सुविधाओं के विकास कार्यों को तेजी से प्रारंभ करने के निर्देश

सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर के अंतर्गत कौडियाला- व्यास घाट मोटर मार्ग किलोमीटर संख्या एक में गंगा नदी पर सिंगटाली नामक स्थान पर 150 मीटर सेतु निर्माण कार्य का समिति द्वारा अनुमोदन किया गया।

मुख्य सचिव ने 5712.55 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनने वाले सेतु के संबंध में लोक निर्माण विभाग को सेतु निर्माण के लिए संबंधित पक्षों से समन्वय करते हुए तेजी से अग्रिम कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जागेश्वर धाम के रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के कार्यों के प्रस्ताव का भी समिति द्वारा अनुमोदन किया गया।

कुल 2119.27 लाख रुपए की लागत से किए जाने वाले रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के कार्यों के संबंध में मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग को पर्यटकों के लिए बेसिक सुविधाओं के विकास कार्यों को तेजी से प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

उन्होंने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट कार्यों के अंतर्गत नदी और मंदिर परिसर के आसपास तथा मंदिर प्रांगण, मंदिर के चारों ओर बेहतर पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे, अपर सचिव लोक निर्माण विभाग विनीत कुमार, निदेशक वित्त जगत सिंह चौहान, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग राजेश शर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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सचिवालय में सीएस ने की आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विभिन्न रेखीय विभागों, संबंधित एजेंसियों और जनपदों द्वारा आपदा न्यूनीकरण से संबंधित प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों पर चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित पक्षों और जनपदों से आपदा प्रबंधन से संबंधित किए जाने वाले कार्यों की व्यावहारिकता और आवश्यकता की जानकारी लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन को आपदा प्रबंधन से संबंधित फंड को समय से और समुचित मात्रा में जारी करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों को और संबंधित पक्षों को निर्देशित किया कि आपदा प्रबंधन के कार्यों में तकनीकी समिति का सहयोग जरूर लें तथा जहां पर ज्योग्राफिक स्टडी की आवश्यकता हो उस दशा में उन संस्थानो का भी मार्गदर्शन भी प्राप्त करें।

उन्होंने आपदा प्रबंधन के कार्यों को संपादित करने के दौरान मितव्ययिता का भी ध्यान रखने तथा समय से सभी तरह की तैयारी पूरी करने के लिए बेहतर प्रबंधन करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने राज्य में आपदा प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहे कार्यों का विवरण प्राप्त करते हुए निर्देशित किया कि आपदा प्रबंधन के कार्यों में संबंधित पक्षों का आपस में बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो जिससे आपदा प्रबंधन के कार्य तेजी से पूरे हो सके।

इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव विनीत कुमार, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग राजेश शर्मा सहित संबंधित अधिकारी तथा विभिन्न जनपदों से वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

सीएस ने सचिवालय में सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने दोनों विभागों की प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आर. राजेश कुमार ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

सिंचाई विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग की बड़ी परियोजनाओं के कार्य निर्धारित तिथि के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने सभी कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई एवं जल संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कार्य शुरू होने से लेकर पूर्ण होने तक के प्रत्येक कार्य की तिथि पूर्व से निर्धारित की जाए एवं तय समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूर्ण करने हेतु सचिव एवं विभागाध्यक्ष के स्तर पर लगातार अनुश्रवण किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सिंचित एवं असिंचित क्षेत्र की माप के लिए आधुनिक तकनीक को प्रयोग किया जाए। उन्होंने नहर, नलकूप एवं लिफ्ट नहर आदि को ग्राम पंचायत समितियों के माध्यम से संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रदेश में सिंचाई क्षमता एवं अच्छी खेती वाले क्षेत्रों को चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नहरों के मरम्मत कार्यों के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित की जाएं। ऐसे क्षेत्र जहां सिंचाई की आवश्यकता अधिक है उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

मुख्य सचिव ने नलकूप एवं लिफ्ट नहर जैसी योजनाओं के लिए सौर ऊर्जा संयंत्रों पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई विभाग की खाली पड़ी जमीनों पर अपनी क्षमता के अनुसार सौर ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित किए जाने की बात कही। उन्होंने विभाग के लिए इस वर्ष 01 मेगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारित किया। कहा कि इससे विभाग के विद्युत बिलों में कमी आएगी।

लघु सिंचाई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने ड्रिप एवं स्प्रिंकल योजना पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भूजल की कमी वाले स्थानों में पानी की बचत के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकल योजना अत्यधिक लाभप्रद होगी। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली लघु सिंचाई योजनाओं को बढ़ाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि जमरानी, सौंग एवं बलियानाला लैंडस्लाईड ट्रीटमेंट जैसे बड़ी एवं महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए सचिव स्तर पर मासिक एवं विभागाध्यक्ष स्तर पर साप्ताहिक अथवा पाक्षिक अनुश्रवण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग की अल्पकालिक, मध्यकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाओं के लक्ष्य बढ़ाए जाने की बात भी कही। कहा कि लक्ष्य बढ़ाने के साथ ही कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराए जाना भी सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय के निर्माण के लिए वन एवं पर्यावरण आदि की क्लीयरेंस में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार ने कहा कि जल संचयन, संवर्धन, पेयजल, सिंचाई हेतु बांध, बैराज, जलाशय एवं चौकडैम आदि का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना का कार्य जून, 2024 को शुरू हुआ था, जिसे मार्च, 2030 तक पूर्ण किए जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि परियोजना की अनुमानित लागत ₹ 3808.16 करोड़ है। उन्होंने बताया कि सौंग बांध पेयजल परियोजना का कार्य नवम्बर, 2024 को शुरू हुआ। परियोजना को दिसम्बर, 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना की अनुमानित लागत ₹ 2491.96 करोड़ है। उन्होंने कहा कि आई.आर.आई, रूड़की को जलागम विभाग के द्वारा स्रोत एवं नदी पुनरोद्धार प्राधिकरण के अन्तर्गत विभिन्न जनपदों में वर्षा आधारित नदियों, जलधाराओं के पुनर्जीवीकरण एवं उपचार कार्यों से इन नदियों, जलधाराओं के प्रवाह में आए प्रभावों का सतत् आकलन करने हेतु कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

इस अवसर पर सिंचाई विभाग से सुभाष चंद्र पाण्डेय एवं लघु सिंचाई से बृजेश कुमार तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव को सीएम ने दिए निर्देश, नीति आयोग की बैठक में पीएम द्वारा निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए ठोस रणनीति बनें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि शनिवार को आयोजित नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जिन बिंदुओं पर राज्यों को मार्गदर्शन और निर्देश दिए गए हैं, उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर स्पष्ट और व्यवहारिक रणनीति तैयार की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत /2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए योजनाओं और नीतियों को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।

मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए कि संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए और उसकी सतत मॉनिटरिंग की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए हर स्तर पर पारदर्शिता और उत्तरदायित्व तय किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में पूर्ण निष्ठा से सहभागी है।

भारत दर्शन योजना में इस वर्ष छात्रों की संख्या का लक्ष्य 1000, अगले वर्ष के लिए दिया 5000 का लक्ष्य

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभाग के क्रियाकलापों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत परीक्षा पैटर्न एवं अन्य प्राविधानों को समाहित करने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत भारत दर्शन योजना को विस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कम से कम 1 हजार बच्चों को भारत दर्शन यात्रा करायी जाए, जिसे अगले वर्ष बढ़ाकर 5000 करने का लक्ष्य रखा जाए। यह बच्चों के अन्वेषण एवं कौशल के लिए एक महत्त्वपूर्ण योजना है। उन्होंने भारत दर्शन यात्रा के दिवसों को बढ़ाकर 7 दिन किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि भारत के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं तकनीकी संस्थानों के साथ ही सैन्य प्रतिष्ठानों के भ्रमण कार्य आयोजित कराए जाएं।

क्लस्टर स्कूल भवनों के लिए डीपीआर एक माह में तैयार करने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रस्तावित 559 क्लस्टर विद्यालयों के निर्माण में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले एक माह में सभी चिन्हित क्लस्टर विद्यालय भवनों की डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक के दौरान ही फोन के माध्यम से शिक्षा विभाग द्वारा चयनित कार्यदायी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों को एक माह में डीपीआर तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट क्लासेज एवं कम्प्यूटर लैब निर्माण कार्यों की डीपीआर भी एक माह में तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाए जाने के लिए विभागीय निदेशकों को जिलाधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं से समन्वय के लिए जनपदों का दौरा किये जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जनपदों के भ्रमण कार्यक्रमों के दौरान क्लस्टर स्कूलों में वाहन भाड़ा के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समितियों की बैठकें शीघ्र आयोजित कर ऐसे मामलों के निस्तारित किए जाने के भी निर्देश दिए।

प्रत्येक कार्य के लिए की जाए टाइम लाइन निर्धारितः मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने विद्यालयों के लिए सभी प्रस्तावित हॉस्टल फैसिलिटी की डीपीआर भी एक माह में तैयार किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट क्लासेज हेतु कम्प्यूटर लैब के लिए एक समर्पित हैड खोले जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में देरी न हो इसके लिए प्रत्येक कार्य की समयसीमा निर्धारित की जाए, साथ ही सचिव, अपर सचिव एवं महानिदेशक स्तर पर लगातार कार्यों की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भीतर आवासीय विद्यालयों को बढ़ाए जाने पर भी फोकस किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि आवासीय विद्यालयों में एक वाहन उपलब्ध कराया जाए, ताकि मेडिकल इमरजेंसी एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में होने वाली समस्याओं से बचा जा सके।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं अपर सचिव रंजना राजगुरू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने की ई-ऑफिस लागू करने में जनपद पौड़ी के प्रदर्शन की सराहना

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को अपने-अपने विभागों में ई-ऑफिस लागू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभागों एवं जनपदों में ई-ऑफिस लागू किया जाए।

मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस लागू करने में जनपद पौड़ी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए बाकी जनपदों विशेषकर देहरादून, नैनीताल एवं हरिद्वार जनपद को भी शीघ्रातिशीघ्र ई-ऑफिस के माध्यम से कार्यों को किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने ई-ऑफिस सिस्टम के अंतर्गत शासन एवं निदेशालय के मध्य समन्वय मैकेनिज्म को सरल किए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी सचिवगण अपने-अपने विभागों की वेबसाइट भी अपडेट कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने आईटीडीए के माध्यम से तैयार नए फॉर्मेट में विभागीय वेबसाईटों को अपडेट किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-ऑफिस की दैनिक गतिविधियों में विभागीय कार्मिकों को आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए आईटी विभाग द्वारा विभागीय कार्मिकों को ई-ऑफिस एवं वेबसाइट अपडेट के लिए तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगोली, नितेश कुमार झा, राधिका झा, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. नीरज खैरवाल, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन एवं रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पूर्व से चल रहे आयुर्वेदिक अस्पतालों को अपग्रेड कर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाएंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में आयुष विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड आयुर्वेद की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में अधिक लोगों को कैसे जोड़ा जाए, इसमें अधिक शोध और अनुसंधान को कैसे बढ़ावा मिले तथा आयुष चिकित्सा को आम जनमानस के बीच कैसे लोकप्रिय बनाया जाए इस पर योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुर्वेद एवं होम्योपैथी को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए शुरुआत में प्रदेश के 25 आयुष एवं वेलनेस सेंटर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी, पंचकर्मा, योगा आदि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इन केंद्रों को पर्यटन से जोड़ने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पहले से चल रहे आयुर्वेदिक अस्पतालों को अपग्रेड कर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा सकता है। उन्होंने इन्वेसटर्स समिट में आए अच्छे एवं महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों का फिर से अध्ययन कर धरातल पर उतारे जाने की भी बात कही।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत निर्माणाधीन आयुष अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने हेतु समय-सीमा निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने नए अस्पतालों के निर्माण कार्यों के साथ ही पदों के सृजन के प्रस्ताव भी साथ-साथ स्वीकृत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन आयुष एवं वेलनेस केंद्रों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ ही आत्मनिर्भर बनाने हेतु एक समुचित प्लान बनाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी एवं अपर सचिव आनन्द स्वरूप सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सिंचाई विभाग प्रदेशभर में चेक डैम की बनाए जाने की दिशा में कार्य करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में सिंचाई विभाग द्वारा जल संरक्षण हेतु बनाये जा रहे चेक डैम की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने जल स्रोत एवं नदी पुनरोद्धार प्राधिकरण के अंतर्गत प्रदेश में सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे चेक डैम प्रस्तावों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि चेक डैम्स की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में चेक डैम की बनाए जाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ से कम धनराशि वाले प्रस्तावों को जिला स्तर पर ही निस्तारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल निगम एवं जल संस्थान को इसमें शामिल किया जाए। जल संस्थान एवं पेयजल निगम से भी पानी की कमी वाले स्थानों को चिन्हित कर उन स्थानों के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने इसकी जॉइन्ट रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिन प्रस्तावों की डीपीआर तैयार हो गयी है उनके शासनादेश शीघ्र जारी किए जाएं। प्रत्येक प्रस्ताव के लिए ईसी, एफसी, टीएसी एवं ईएफसी आदि संस्तुतियों के लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए कैलेण्डर भी तैयार किया जाए एवं निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण कराए जाएं।

सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश की विभिन्न जनपदों में बैराज एवं चौक डैम बनाए जाने का कार्य गतिमान है। उन्होंने कहा कि नैनीताल, अल्मोड़ा, देहरादून एवं पौड़ी में जलाशयों का निर्माण कार्य गतिमान है। कहा कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में प्रथम वरीयता के कुल 111 स्रोतों को प्राथमिकता पर लिया गया, जिनमें से 105 पर कार्य पूर्ण कर लिया गया है, 06 स्रोतों पर कार्य गतिमान है। वर्ष 2025-26 के लिए 124 कार्य प्रस्तावित हैं, जिनकी डीपीआर तैयार करने के साथ ही प्राक्कलन गठन की कार्यवाही गतिमान है।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जल स्रोत एवं नदी पुनरोद्धार प्राधिकरण नीना ग्रेवाल, सिंचाई विभाग से जयपाल सिंह एवं लघु सिंचाई से बृजेश कुमार तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हरिद्वार कॉरिडोर के विकास कार्यों में मूल स्वरूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न होः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में हरिद्वार कॉरिडोर, ऋषिकेश मास्टर प्लान और शारदा कॉरिडोर के सम्बन्ध में बैठक ली। बैठक के दौरान उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) ने उक्त विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार कॉरिडोर के अंतर्गत सभी प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स को शीघ्र धरातल पर उतारने की आवश्यकता है, उनको प्राथमिकता पर लेते हुए कार्य प्रारम्भ किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार एवं उसका धार्मिक महत्त्व भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे लोगों की आस्था से जुड़ा है हरिद्वार कॉरिडोर के विकास कार्यों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि आस्था से जुड़े क्षेत्रों एवं उनके मूल स्वरूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ ना हो। उन्होंने योजनाओं से जुड़े हितधारकों से लगातार संवाद किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कॉरिडोर के अंतर्गत सभी प्रोजेक्ट पर बजट, कार्यदायी संस्था, उसका रखरखाव सहित समग्र प्लान शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यूआईआईडीबी को प्रत्येक प्रोजेक्ट की प्रकृति को देखते हुए, उनसे सम्बन्धित विभागों को योजना में शामिल किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने हरिद्वार कॉरिडोर के प्रोजेक्ट्स पर चर्चा के दौरान ब्रह्मकुंड और महिला घाट के क्षेत्र को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सती कुंड के पुनर्विकास कार्य में सती कुंड के ऐतिहासिक महत्त्व और उसकी थीम को बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि नदी दर्शन में अवरोध न उत्पन्न हो। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों की डीपीआर तैयार हो गयी है, उन पर आगे की कार्यवाही शीघ्र शुरू की जाए।

मुख्य सचिव ने शारदा नदी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के कार्यों की भी प्राथमिकता निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की प्रकृति के अनुसार सम्बन्धित विभाग द्वारा ही कार्यों को संपन्न कराया जाए। उन्होंने वन भूमि में ईको टूरिज्म गतिविधियों को शामिल किए जाने की भी बात कही। उन्होंने यूआईआईडीबी को जिलाधिकारी चंपावत की प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स को भी शारदा कॉरिडोर में शामिल किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना में टूरिज्म सर्किट के विकास के साथ ही कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड और हेलीपोर्ट के प्रावधान रखे जाएं।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश मास्टर प्लान पर चर्चा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋषिकेश का मोबिलिटी प्लान और पुराना रेलवे स्टेशन के आसपास प्रस्तावित कार्यों को समग्र रूप से तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवीकरण के लिए हाईड्रोलॉजी सर्वे कराया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए नितांत आवश्यक कार्यों को तत्काल शुरू कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कॉरिडोर, शारदा रिवर फ्रंट डेवेलपमेंट और ऋषिकेश मास्टर प्लान कार्यों के महत्त्व को देखते हुए शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही शुरू की जाए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम एवं मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने सिविल डिफेंस का अन्य जनपदों में भी विस्तार को दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तथा सेना व पैरा मिलिट्री फोर्सेज के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए भविष्य के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने तथा विभिन्न आपदाओं के समय त्वरित व प्रभावी रिस्पांस करने सहित अन्य विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों तथा एजेंसियों की आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। राज्य की सीमाएं चीन और नेपाल से लगी हैं, इसलिए सतर्कता और पुख्ता तैयारी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए यह आवश्यक है कि सिविल डिफेंस के दायरे को प्रदेश के अन्य जनपदों में भी विस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में अभी सिर्फ जनपद देहरादून ही सिविल डिफेंस जनपद के रूप में अधिसूचित है। उन्होंने सचिव गृह को प्रदेश के ऐसे जनपदों तथा क्षेत्रों को चिन्हित करने को कहा जिन्हें सिविल डिफेंस के रूप में नोटिफाई किया जा सकता है। उन्होंने इसे लेकर शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी प्रकार की आपदा तथा वर्तमान परिदृश्य की पुनरावृत्ति होने की स्थिति में यह आवश्यक है कि प्रत्येक स्तर पर तैयारी को पुख्ता रखा जाए। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि सिविल एडमिनिस्ट्रेशन तथा सेना व अन्य फोर्सेज के साथ आपसी समन्वय तथा तालमेल बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि निरंतर रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाए, जिससे यह पता चलता रहे कि किन-किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष में कम से कम तीन बार इस तरह की अंतर विभागीय बैठक आयोजित की जाए। इस दौरान उन्होंने बेहतर समन्वय के लिए विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों, सेना, वायु सेना और अर्द्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारियों का वाट्सएप गु्रप बनाने तथा सभी विभागों तथा एजेंसियों को सिंगल प्वाइंट कांटेक्ट नामित करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, डिप्टी जी0ओ0सी सब एरिया आर.एस. थापा, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव नितेश कुमार झा, सचिव सचिव कुर्वे, सचिव डॉ0 आर. राजेश कुमार, महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा डॉ0 पी.वी.के. प्रसाद, कमिश्नर गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, आईजी. गढ़वाल राजीव स्वरूप, महानिरीक्षक, आई.टी.बी.पी, संजय गुंज्याल, आईजी एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी, आई.जी. अग्निशमन एवं आपात सेवाएं, मुख्तार मोहसिन, महानिदेशक, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग बंशीधर तिवारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून अजय सिंह, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद थे।

विभागों के साथ बेहतर समन्वय के प्रयास किए जाएं

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न विभागों, संस्थानों तथा एजेंसियों के मध्य आपसी सामंजस्य का मजबूत होना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पेयजल, विद्युत, अग्निशमन, परिवहन, आईटी विभाग, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, बीआरओ आदि विभागों के बीच अच्छा सामंजस्य होना जरूरी है। जितना अच्छा समन्वय होगा, आपदा के समय उतना बेहतर काम किया जा सकेगा।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र मुख्य कंट्रोल रूम होगा

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि आपदाओं के दृष्टिकोण से यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र मुख्य कंट्रोल रूम रहेगा। प्रदेश में स्थापित अन्य विभागों के कंट्रोल रूम नियमित तौर पर सूचनाओं को एसईओसी के साथ साझा करेंगे। विभिन्न आपदाओं के समय समन्वय एसईओसी से किया ही जाएगा।

सायबर वॉरफेयर पर भी नजर रखी जाए

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने किसी भी आपात स्थिति के लिए संचार व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने साइबर वारफेयर से निपटने के लिए भी आईटी विभाग को हर पल एलर्ट रहने तथा समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

फेक न्यूज पर रखें निगरानी

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोशल मीडिया में फेक न्यूज की भी निगरानी करने तथा भ्रामक खबरें और सूचनाएं प्रसारित करने वाले लोगों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने सूचना तथा पुलिस विभाग को इस पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि किसी भी प्रकार की न्यूज तथा पोस्ट को प्रसारित करने से पहले जांच कर लें कि सूचना सही है या नहीं। ज्ञातव्य है कि फेक न्यूज को पोस्ट करने वाला व्यक्ति जितना दोषी है, उतना ही दोषी उसे प्रसारित और रिपोस्ट करने वाला व्यक्ति भी है और कानून तथा आईटी एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही के प्रावधान हैं।

फायर हाइड्रेंट्स की जांच की जाए

देहरादून। अग्नि संबंधित विभिन्न घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर लगे फायर हाइड्रेंट्स की जांच करने तथा आवश्यकतानुसार नए फायर हाइडें्रट्स स्थापित करने को कहा। इस संबंध में उन्होंने कमिश्नर गढ़वाल तथा कमिश्नर कुमाऊं को शीघ्र समुचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

एसईओसी में स्थापित करें सिविल डिफेंस का कंट्रोल रूम

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि सेना के साथ जुड़े सिविल डिफेंस के हॉटलाइन नंबर को एसईओसी में स्थापित किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय हो सके। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस विभाग में स्थापित सिविल डिफेंस के कंट्रोल रूम हो एसईओसी में स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि एसईओसी में 24ग्7 मैन पावर उपलब्ध है, लिहाजा यहां से बेहतर समन्वय हो सकता है।

महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा ऑडिट करें

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश के हेलीपैड तथा छोटे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को भी पुख्ता रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलीपैड तथा छोटे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस विभाग में नए पदों पर भर्ती की जाए।

संसाधनों की जानकारी एसईओसी को उपलब्ध कराई जाए
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि विभिन्न विभागों तथा एजेंसियों के पास जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, उनकी सूची तथा विवरण एसईओसी को उपलब्ध कराया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें गतिमान किया जा सके। उन्होंने जीआईएस बेस्ड डाटाबेस बनाने के भी निर्देश दिए।

महत्वपूर्ण संस्थानों तथा परिसंपत्तियों का सुरक्षा आडिट कराएं

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश के स्थापित विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों, परिसंपत्तियों तथा बांधों की सुरक्षा व्यवस्था हेतु खतरे की आशंका के आधार पर पुनः सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश दिए।

एटीएफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा उत्तराखण्ड राज्य विभिन्न प्रकार की आपदाओं को लेकर संवेदनशील है। वायु सेना के बड़े तथा आधुनिक विमानों से राहत और बचाव कार्य संचालित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वायु सेना के बड़े विमानों के लिए हेलीपैड में एटीएफ यानी विमान के ईंधन का पर्याप्त भंडारण और सुलभ उपलब्धता हो ताकि खोज एवं बचाव अभियान में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।

समुदायों की सहभागिता जरूरी, जारूकता हो प्रचार-प्रसार
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि सीमा पर हमारे देश के वीर सैनिक देश की सुरक्षा के लिए मजबूती से डटे हैं, लेकिन आम नागरिकों को भी हर पल जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि ब्लैक आउट तथा एलर्ट का सायरन बजने के दौरान लोगों को क्या करना है, इस संबंध में विस्तृत एडवाइजरी जारी की जाए तथा एसओपी बनाई जाएं। उन्होंने निरंतर अंतराल में विभिन्न प्रकार की आपदाओं से बचाव हेतु मॉक ड्रिल करने के निर्देश दिए।

शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियां शुरू करते हुए हितधारकों से भी संवाद करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली, एवं चल रहे कार्यों एवं आगामी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन प्रदेश की बैकबोन है। उन्होने निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन के साथ ही अन्य पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियां शुरू करते हुए हितधारकों से भी संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि टिहरी झील रिंग रोड परियोजना का सतत् एवं समावेशी प्लान तैयार किया जाए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले एवं रोजगार भी उत्पन्न हो।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में क्वालिटी टूरिज्म पर भी फोकस किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए साहसिक पर्यटन, ट्रैकिंग और अन्य गतिविधियों को बढ़ाए जाने के लिए योजनाएं तैयार की जाएं। सभी योजनाओं को निर्धारित समय पर पूर्ण करने के लिए कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने मानसखण्ड मंदिर माला के प्रथम चरण के कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान एक राज्य स्तरीय संग्रहालय बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लोककलाओं एवं लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेश के अभिलेखागारों को अपग्रेड करते हुए उनका डिजिटाइजेशन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र का वार्षिक कैलेण्डर तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित लोक गीत, लोक नृत्य, लोक नाटकों के वास्तविक रूप को जीवंत रखने के लिए नाट्य शिविरों के आयोजन के साथ ही रंग मंडलों की स्थापना की जाए। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के गठन किये जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे, युगल किशोर पंत, अपर सचिव अभिषेक रोहिला एवं निदेशक संस्कृति बीना भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।