देहरादून में नागर विमानन सम्मेलन-2025 में मुख्यमंत्री ने किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित होटल में आयोजित नागर विमानन सम्मेलन-2025 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और उत्तर भारत के नागर विमानन मंत्रियों का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के नागर विमानन क्षेत्र में आई ऐतिहासिक प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के माध्यम से छोटे शहरों और दुर्गम क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़कर न केवल आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा सुलभ हुई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान में 18 हेलीपोर्ट्स का विकास किया जा रहा है, जिनमें से 12 पर सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हेली सेवाएं उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जीवन रेखा बन चुकी हैं। चाहे आपदा प्रबंधन हो, स्वास्थ्य सेवाएँ हों या तीर्थयात्रा, हेलीकॉप्टर सेवाओं ने इन क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुविधा प्रदान की है।

मुख्यमंत्री धामी ने केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय से पर्वतीय राज्यों के लिए एक पृथक “पर्वतीय विमानन नीति” बनाने का आग्रह किया, जिसमें विशेष वित्तीय सहायता, संचालन हेतु सब्सिडी, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एटीसी नेटवर्क, सटीक मौसम पूर्वानुमान, स्लॉटिंग और आपदा-पूर्व तैयारी जैसे प्रावधान शामिल हों। मुख्यमंत्री ने सभी ऑपरेटरों से भी पर्वतीय उड़ानों के लिए विशेष पायलट प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों का कठोर पालन और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्थान के कैबिनेट मंत्री गौतम कुमार, हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन और संबंधित राज्यों के अधिकारी उपस्थित थे।

क्षतिग्रस्त बिजली खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हुए दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को आमजन की समस्याओं को सुनने एवं उनके निराकरण पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग, पेयजल विभाग एवं अन्य ऐसे विभाग जो नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, अपने कार्यक्षेत्रों का दौरा अवश्य करें। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए हैं कि टेढ़े हो चुके बिजली के खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत का कार्य तत्काल कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी फील्ड पर नहीं उतरेंगे, आमजन की समस्याओं से अवगत नहीं होंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड का दौरा नियमित रूप से किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) रजिस्ट्रेशन की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आमजन अधिक से अधिक संख्या में अपने विवाह का पंजीकरण कराएं इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लम्बित मामलों को तेजी से निस्तारित किया जाए। उन्होंने मैदानी जनपदों में पंजीकरण के लिए विशेष अभियान संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रायः देखा जा रहा है कि ऐसे विवाह पंजीकरण, जिनमें विवाह के समय पति-पत्नी दोनों या दोनों में से कोई एक नाबालिग रहा हो, परन्तु वर्तमान में पंजीकरण के समय दोनों बालिग हो चुके हैं, को अस्वीकार किया जा रहा है, जो कि गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे विवाह के मामलों का भी पंजीकरण किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम- एबीएचआईएम) की जिलावार समीक्षा करते हुए प्रत्येक जनपद से प्रत्येक केन्द्र की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर ‘ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों‘ की स्थापना के कार्य में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जिन इकाइयों में निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है, उन इकाइयों में उपकरणों की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित करते हुए ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों को सक्रिय किया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, चंद्रेश कुमार यादव, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव रंजना राजगुरू, विजय कुमार जोगदंडे, मनुज गोयल, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नया रिकार्ड, वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में खनन से रू. 331.14 करोड़ का राजस्व प्राप्त

प्रदेश में खनन के क्षेत्र में किए गए सुधारों एवं अवैध खनन पर रोक लगाने के कारगर प्रयासों के फलस्वरूप खनन से राजस्व प्राप्ति के नित नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में खनन विभाग ने रू. 331.14 करोड़ का राजस्व अर्जित कर नया रिकॉर्ड कायम किया है, जो गत वर्ष की तुलना से 22.47 प्रतिशत अधिक है। गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी राज्य में खनन से राजस्व प्राप्ति के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ कुल रू. 1040.57 करोड़ राजस्व का अर्जन किया गया था।

राज्य में खनन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम तिमाही में रू. 146.18 करोड़, वित्तीय वर्ष 2023-24 के प्रथम तिमाही में रू. 177.27 करोड़ तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम तिमाही में रू. 270.37 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही में खनन से रू. 331.14 करोड़ का राजस्व की प्राप्ति हुई है, जो विगत वर्ष की तुलना से 22.47 प्रतिशत अधिक है तथा अन्य वर्षों की अपेक्षा कई गुना अधिक है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के द्वारा प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था हेतु राजस्व वृद्धि के उपायों पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। जिनके उल्लेखनीय परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा खनन से राजस्व वृद्धि के लिए उपखनिज परिहार नियमावली और उत्तराखण्ड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण का निवारण) नियमावली में सरलीकरण करने के साथ ही नये खनिज लॉटो का चिन्हीकरण कर ई-निविदा सह-ई नीलामी के माध्यम से आवंटित करने की व्यवस्था की गई है। अवैध रूप से किए जाने वाले खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी रोकथाम के लिए खनन निदेशालय के स्तर पर गठित प्रवर्तन दलों के माध्यम से निरन्तर कार्रवाई करने के साथ ही जिला स्तर पर भी अवैध खनन रोकने के लिए त्वरित व प्रभावी कार्रवाई करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यालय स्तर पर ई-रवन्ना पोर्टल की समय-समय पर निगरानी करते हुए ई-रवन्ना पोर्टल को उन्नत करने, पट्टा धनराशि की समय से व पूरी वसूली सुनिश्चित करने जैसे अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

राज्य सरकार ने खनन कार्य को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ बनाये जाने तथा अवैध खनन व अवैध परिवहन की प्रभावी रोकथाम तथा राजस्व वृद्धि हेतु आधुनिक खनन डिजिटल सुधार एवं निगरानी प्रणाली (एमडीटीएसएस) विकसित किये जाने हेतु राज्य सरकार के द्वारा कुल 45 माईन चौक गेट्स स्थापित किये जाने की कार्यवाही भी की जा रही है।
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राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए राजस्व प्राप्ति के संसाधनों में वृद्धि किया जाना आवश्यक है। राज्य के हित में खनिज संसाधनों का समुचित और युक्तिसंगत तरीके से उपयोग करने पर ध्यान देने के साथ ही अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण, पारदर्शी व्यवस्था, ठोस निगरानी और नियमों के सख्त अनुपालन पर जोर दिया गया है। आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर खनन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया गया है, जिससे खनिज संपदा का समुचित दोहन हो और राज्य की आय में बढ़ोतरी हो। इसके अलावा खनन उद्योग से जुड़े रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार।

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उत्तराखंड कैम्पा की उल्लेखनीय सफलता, भारत सरकार ने प्रस्तावित 439.50 करोड़ की कार्य योजना को दी मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय कैंपा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखण्ड़ राज्य की रुपये 439.50 करोड़ की कार्य योजना को शत प्रतिशत मंजूरी दिये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री का आभार व्यक्त किया।

राष्ट्रीय कैम्पा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखंड के अवशेष प्रस्तावों पर विचार किया गया तथा सभी को स्वीकृति प्रदान की गई। कैम्पा की राष्ट्रीय समिति ने पाया कि उत्तराखंड के द्वारा प्रस्तावित सभी कार्य मानकों के अनुरूप थे तथा उनसे संबंधित समस्त अपेक्षित विवरण भी समिति के समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार इस वर्ष राज्य हित में कैम्पा के अंतर्गत एक बड़ी धनराशि विभिन्न कार्यों के लिए समय से उपलब्ध हो सकेगी। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. समीर सिन्हा ने बैठक में प्रतिभाग कर अवगत कराया कि यह प्रथम अवसर है जब राज्य द्वारा प्रस्तावित वार्षिक योजना को पूरी तरह स्वीकृति मिली है।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड राज्य कैम्पा की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित संचालन समिति ने 439.50 करोड रुपए की कार्य योजना अनुमोदित कर भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रेषित की थी। प्रथम चरण में इसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा 235.30 करोड़ रुपए की धनराशि की स्वीकृति मई 2025 में जारी की गई थी। इसके सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को प्रथम किश्त की धनराशि भी जारी कर दी गई है।
प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस हेतु डॉ समीर सिन्हा की अगुवाई में उत्तराखंड कैंपा की पूरी टीम को बधाई देते हुए यह अपेक्षा की है कि उत्तराखंड वन विभाग इस धनराशि से राज्य हित में निर्धारित समय एवं मानकों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करेगा।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड कैम्पा ने बताया कि प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि अधिनियम 2016 के अन्तर्गत स्थापित उत्तराखण्ड प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत प्रदेश को वर्ष 2023-24 में 424.46 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्याेजना के सापेक्ष 383.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई, वर्ष 2024-25 में 408 करोड़ रुपए की वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष 369.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हुई थी।

गुणवत्तापूर्ण सेवाओं एवं विकास के लिए मानकीकरण अत्यंत आवश्यकः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) देहरादून शाखा के निदेशक एवं प्रमुख सौरभ तिवारी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा क्षेत्र, उद्योग जगत एवं उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।

मुख्यमंत्री धामी से भारतीय मानक ब्यूरो के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में मानकीकरण से संबंधित विविध पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में भारतीय मानकों का अनिवार्य समावेश सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण में आधारित विनियमों को अपनाने तथा विभिन्न सरकारी विभागों में प्रबंधन प्रणाली मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधित्व मंडल को उत्तराखंड में मानकीकरण को सुदृढ़ आधार प्रदान करने हेतु संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सेवाओं एवं विकास के लिए मानकीकरण अत्यंत आवश्यक है तथा यह पहल ‘विकसित उत्तराखंड’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

बैठक में अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, भारतीय मानक ब्यूरो के अधिकारी मौजूद रहे।

सीएम ने एक पेड़ मॉं के नाम अभियान के तहत हरिद्वार में किया पौधारोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेला नियन्त्रण भवन परिसर हरिद्वार में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिग तथा पर्यावण असंतुलन को रोकने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि माँ और प्रकृति दोनों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। यह अभियान समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता।

स्वच्छता अभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री

इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीसीआर के पास गंगा घाट पहुॅचकर सफाई एवं स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग करते हुए स्वंय झाड़ू लगाकर स्वच्छता का सन्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वच्छ भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कावड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां गंगा का नमन करते हुए देश व प्रदेश की सुःख, शान्ति एवं समृद्धि की कामना की।

श्रद्धालुओं से मिलकर ली यात्रा व्यवस्थाओं की जानकारी

विभिन्न राज्यों से आये श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अचानक अपने बीच पाकर आश्चर्य व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाये। श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की शालीनता, विनम्रता व सादगी की तारीफ की। मुख्यमंत्री ने बाहरी राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं से सीधे संवाद करते हुए यातायात, रूकने, खान-पान सहित विभिन्न व्यवस्थाओं तथा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। जिस पर सभी श्रद्धालुओं द्वारा अपने यात्रा अनुभव साझा करते हुए देवभूमि तथा व्यवस्थाओं को अच्छा बताया।

इस दौरान सांसद कल्पना सैनी, विधायक मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, आदेश चौहान, ममता राकेश, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर किरण जेसल, अनीता जी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, उपाध्यक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विनय रोहेला, दर्जा राज्यमंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि, शोभाराम प्रजापति, सुनील सैनी, श्यामवीर सैनी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, श्री गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, बीजेपी जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, मधु सिंह, महामंत्री बीजेपी आशु चौधरी, व्यापार मण्डल प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव नेयर, महानगर व्यापार मण्डल अध्यक्ष सुनील सेठी, मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, मण्डलायुक्त विनय शंकर पाण्डे, सचिव डॉ.पंकज कुमार पाण्डे, धीराज सिंह गर्ब्याल, युगल किशोर पन्त, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

क्लीन और ग्रीन कांवड़ यात्रा का संदेश देने का हो प्रयासः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन के लिये उत्तराखंड कांवड़ सेवा एप बनाए जाने के निर्देश दिए है इसमें कांवड़ियों की सभी डिटेल उपलब्ध कराई जाए। इस एप का उपयोग हर वर्ष आयोजित होने वाले कांवड़ यात्रा के दौरान किया जा सकेगा, इस से कांवड़ यात्रा पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगी।

मेला नियन्त्रण भवन हरिद्वार में उच्चाधिकारीयों के साथ कांवड मेला-2025 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड़ यात्रा के सकुशल एवं सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने हेतु जिला प्रशासन, पुलिस एवं अन्य सम्बन्धित विभागों को चाक चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा ऐसे राज्य जहां से अधिकांश कावड़िए आते हैं। उन राज्यों से परस्पर समन्वय, रियल टाइम डाटा शेयरिंग और सुरक्षात्मक दृष्टि से सभी आवश्यक इनपुट्स साझा किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा को आगामी कुंभ मेले का ट्रायल बताते हुए कहा कि ये अनुभव आगामी कुंभ मेले भी काम आएंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि कावड़ यात्रा मार्गाे पर किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो। उन्होंने कावड़ यात्रा से पहले सभी प्रकार के अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और होटलों में सुरक्षा ,मानकों का अनुपालन कराने के साथ ही फूड लाइसेंस और रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा यह सुनिश्चित किया जाए कि यात्रा मार्ग पर स्थित होटलों के नाम व होटल स्वामियों के नाम भी अनिवार्य रूप से लिखे हो एवं ओवर रेटिंग की शिकायत आने पर संबंधित होटल स्वामियों पर शक्ति से करवाई की जाए। उन्होंने कहा शराब तथा मीट से संबंधित एसओपी का भी इस दौरान सख्ती से पालन हो।

मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष हमने क्लीन और ग्रीन कांवड़ यात्रा का संदेश देना है। उन्होंने कहा स्वच्छता हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। जिसके लिए संपूर्ण कावड़ मार्गाे पर हर घंटे सफाई अभियान चलता रहे। हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश और आस पास के क्षेत्रों में हर 1-2 किलोमीटर पर मोबाइल टॉयलेट, कूड़ा निस्तारण के लिए विशेष गाड़ियों की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कांवड़ रूट पर हर 2 से 3 किलोमीटर के अंदर स्वास्थ्य केंद्र, एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए जाएं, जिससे आम जन को सहूलियत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कावड़ियों की सुविधा को देखते हुए स्थानीय निकायों के सहयोग से रैन बसेरों, टेंट सिटी, आश्रय स्थलों का निर्माण किया जाए। यात्रा मार्गाे पर आर.ओ टैंकर, वाटर एटीएम की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा बीते सालों के अनुभवों के आधार पर पार्किंग की अतिरिक्त व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने कावड़ यात्रा से संबंधित सोशल मीडिया में अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्ती से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं के लिए श्क्या करें और क्या नहीं करेंश् की जानकारी यात्रा मार्गों पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कावड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाए। सीसीटीवी और ड्रोन से नियमित निगरानी हो। कांवड़ रूट का जीआईएस मैपिंग आधारित ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए और ए.आई आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एस.डी.आर.एफ, एन.डी.आर.एफ की तैनाती, बारिश और भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली सक्रिय की जाए। साथ ही संवेदनशील घाटों पर एनाउंसमेंट सिस्टम भी मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा संपूर्ण हरिद्वार क्षेत्र में खोया पाया केन्द्रों की संख्या बढ़ाई जाए ।

जिला अधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित ने बताया कि इस वर्ष कावड़ मेला 11 से 23 जुलाई तक आयोजित होगा। इस वर्ष मेले को कुल 16 सुपर जोन, 37 जोन और 134 सेक्टर में बांटा गया है। यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय लोगों की सहूलियत अनुसार यातायात व्यवस्था की गई हैं। उन्होंने बताया चार धाम जाने वाले श्रद्धालु, स्थानीय लोगों एवं कावड़ यात्रियों के लिए अलग-अलग यातायात व्यवस्थाएं भी लागू की गई है।

बैठक में राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, विधायक मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, आदेश चौहान, ममता राकेश, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर किरण जेसल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, पंकज पांडेय, विनोद कुमार सुमन, विनय शंकर पांडे, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विनय रूहेला, दर्जा राज्यमंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि, शोभाराम प्रजापति, सुनील सैनी, श्यामवीर सैनी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, बीजेपी जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

फ्लोटिंग पापुलेशन हेतु सुविधाओं की व्यवस्था के लिए नीति आयोग से विशेष ग्रांट का आग्रह

सीएम धामी ने कहा कि जल्द ही दिल्ली देहरादून एलिवेटेड रोड शुरू हो जाने पर राज्य में भारी संख्या में पर्यटकों की आने संभावना को देखते हुए राज्य सरकार नियोजन की चुनौती पर अभी से पूरी सक्रियता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहर की ट्रैफिक समस्या और भविष्य की जरूरत को देखते हुए 26 किमी रिस्पना- बिंदाल एलिवेटेड रोड के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया हैद्य सीएम ने बताया कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए फ्लोटिंग पापुलेशन हेतु सुविधाओं की व्यवस्था के लिए नीति आयोग से विशेष ग्रांट का आग्रह किया गया हैद्य मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर बढ़ रहा है। हम एसडीजी इंडेक्स में पहले स्थान पर रहेद्य जीईपी लागू करने वाले सबसे पहले राज्य बने। यूसीसी लागू करने वाले भी सबसे पहले साहसी राज्य बनेद्य हम अपनी 6500 एकड़ से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त करवा चुके हैं। राज्य में निरंतर विकास के नवाचार अपनाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में फोटोग्राफर भूमेश भारती की कॉफी टेबल बुक “एरियल विस्टाज़ ऑफ उत्तराखंड” का विमोचन किया।

कार्यक्रम में उपस्थित छायाचित्रकारों, कला एवं प्रकृति प्रेमियों सहित उपस्थित सभी महानुभावों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भूमेश भारती जी ने 15 वर्षों की अथक साधना, समर्पण और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ उत्तराखंड की प्रकृति और संस्कृति को इस अद्वितीय फोटोग्राफी संकलन द्वारा साकार रूप दिया है। भूमेश जी केवल एक फोटोग्राफर नहीं हैं बल्कि वे एक ऐसे कलाकार हैं, जो प्रकृति के सौंदर्य को आत्मा की गहराई से अनुभव करके अपने कैमरे के माध्यम से दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह कॉफी टेबल बुक जो भी देखेगा, वो न केवल उत्तराखंड की नैसर्गिक सुंदरता से अभिभूत होगा, बल्कि उसे देखने के लिए उत्तराखंड की ओर खींचा चला आएगा।

नई पर्यटन नीति से डेस्टिनेशन उत्तराखंड” स्थापित होगा वैश्विक पर्यटन मानचित्र -मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी देवभूमि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में हमने डेस्टिनेशन उत्तराखंड” को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से “नई पर्यटन नीति के अंतर्गत निवेशकों को आकर्षित करने हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।

राज्य में दो स्पर्चुअल जोन हो रहे तैयार- सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म और फिल्म पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। आज जहां एक ओर केदारखंड की भांति मानसखंड कॉरिडोर को भव्य रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं ऋषिकेश और हरिद्वार को योग और आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध रूप से कार्य भी किया जा रहा है। इस वर्ष से हमने शीतकालीन यात्रा भी प्रारंभ की है जिसको प्रोत्साहित करने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दिनों हर्षिल- मुखबा के दौरे पर आए थे। हम राज्य में साहसिक पर्यटन जैसे ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, स्कीइंग और माउंटेनियरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

उत्तराखंड बना मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य में फिल्म शूटिंग को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम भी प्रारंभ किया है। साथ ही हम उत्तराखंड में शूटिंग करने पर फिल्म निर्माताओं को विशेष सब्सिडी और अन्य सुविधाएं भी प्रदान कर रहे हैं। हमारे इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखंड को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट के अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड देश-विदेश के निवेशकों के लिए एक पसंदीदा पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से हमारे चार गांवों जखोल, हर्षिल, गूंजी और सूपी को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हमारी सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण करने हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, वीसी दून विश्वविद्यालय सुरेखा डंगवाल, वरिष्ठ पत्रकार सतीश शर्मा, प्रदेशभर से आए फोटोजर्नलिस्ट मौजूद रहे।

यूपी और उत्तराखंड के बीच मामलों का उत्तर प्रदेश के अधिकारियों संग जल्द समाधान निकालेंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड राज्य के मध्य अवशेष आस्तियों एवं दायित्वों के मामलों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन मामलों में दोनों राज्यों के बीच पिछली बैठक में सहमति बनी थी, उनमें से जिन मामलों में कार्यवाही गतिमान है, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ बैठक कर उनका जल्द समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोनों राज्यों के अवशेष आस्तियों एवं दायित्वों के मामले में जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक करेंगे।

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की पिछली बैठक के बाद जिला उधमसिंहनगर एवं हरिद्वार में स्थित जलाशयों/नहरों में वाटर स्पोर्टस की अनुमति दी जा चुकी है। सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा विद्युत बिलों के रूप में 57.87 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश मत्स्य निगम द्वारा उत्तराखण्ड मत्स्य पालन विकास अभिकरण को 3.98 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। वन विकास निगम उत्तराखण्ड को दी जाने वाली देयताओं का आंशिक भुगतान किया गया है। परिवहन निगम की अवशेष राशि का भुगतान किया गया जा चुका है। आवास विभाग के अन्तर्गत आवास विकास परिषद की परिसम्पत्तियों के निस्तारण का निर्णय हुआ है।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. नीरज खेरवाल एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

कैंपा फंड का उपयोग राज्य में वनों पर आश्रित समुदायों के कल्याण को करेंः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड कैंपा (क्षतिपूर्ति वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) शासी निकाय की बैठक हुई। बैठक में कैंपा निधि के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कैंपा फंड का उपयोग राज्य में वनों के सतत प्रबंधन, वानिकी विकास, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा वनों पर आश्रित समुदायों के कल्याण के लिये किया जाए। उन्होंने कहा कि देहरादून शहर में ग्रीन बढ़ाने हेतु, कैम्पा फंड इस्तेमाल किए जाने के लिए केंद्र सरकार के स्तर से भी अनुमति प्राप्त करने की कार्यवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए प्रभावी योजना तैयार की जाए। वन क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण को शीर्ष प्राथमिकता में रखा जाए। इसके लिए वन विभाग के साथ पेयजल, जलागम, ग्राम्य विकास और कृषि विभाग संयुक्त रूप से कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने वनाग्नि रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी के जरिए व्यापक रणनीति बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के कार्य में केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर पौधों के सर्वाइवल रेट पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कैंपा निधि से संचालित परियोजनाओं की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि हरेला पर्व पर प्रदेश में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाए। इसमें फलदार, औषधीय गुणों से युक्त पौधे अधिक लगाये जाएं। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के लिए जन सहभागिता सुनिश्चित की जाए और लोगों को एक पेड़ मां के नाम लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि गौरा देवी की जन्म शताब्दी पर वन विभाग द्वारा सभी डिवीजन में फलदार पौधे लगाए जाएं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि स्थानीय लोगों को वन संरक्षण के कार्यों से जोड़ने के लिए स्वरोजगार और आजीविका आधारित कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि वन संपदा के सतत उपयोग और संरक्षण में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

बैठक में विधायक भूपाल राम टम्टा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा, सचिव राधिका झा, चन्द्रेश कुमार, एस एन.पाण्डेय, श्रीधर बाबू अदांकी और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सुविधाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना शीर्ष प्राथमिकताः धामी

सीएम धामी ने सभी चिकित्सकों का आह्वान करते हुए कहा कि डॉक्टरी का पेशा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक “नोबल प्रोफेशन“ है, जो सेवा, संवेदना और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनता के मन में डॉक्टर के प्रति जो आस्था, सम्मान और श्रद्धा है, उसे और मजबूत करें। सभी चिकित्सकों से अनुरोध है कि अपने आचरण, सेवा और समर्पण से हमेशा अपनी उस छवि को जीवित रखें, जो समाज ने डॉक्टर को ’धरती का भगवान’ कहकर दी है।

मुख्यमंत्री आवास में डॉक्टर्स डे पर आयोजित कार्यक्रम पर सभी चिकित्सकों को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आप लोग अपनी सेवा, समर्पण और करुणा से अनगिनत लोगों के जीवन को संजीवनी प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का एक अद्वितीय संगम देखने को मिलता है, हमारी संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर ही आधारित नहीं है बल्कि ये गहरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, चिंतन और शोध का परिणाम भी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आए प्रत्येक चिकित्सक से मिलकर उनसे बातचीत की तथा उन्हें सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयासरत है। हमारा प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सुविधाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा सकें। हमने आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक करीब 58 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए हैं। जिसके माध्यम से, प्रदेश के लगभग 11 लाख से अधिक मरीजों को 2100 करोड़ रुपये से अधिक के कैशलेस उपचार का लाभ प्राप्त हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राज्य के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित कर रहे हैं जिससे हमारे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को उनके जिले में ही आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगी। इनमें से पाँच मेडिकल कॉलेज पहले से ही संचालित किए जा चुके हैं, जबकि दो और मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी स्थापित किए गए हैं, जहाँ कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और यूरोलॉजी जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। इसके साथ – साथ हम राज्य के प्रत्येक क्षेत्र के लिए हेली एंबुलेंस सेवा भी प्रारंभ कर चुके हैं जो किसी भी आपात स्थिति में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निःशुल्क जांच योजना के अंतर्गत मरीजों को 207 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांचों की निःशुल्क सुविधा भी प्रदान की जा रही है। हमारी सरकार द्वारा जहां एक ओर जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का आधुनिकीकरण कर उन्हें बेहतर सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। वहीं उत्तराखंड टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज के गाँवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परामर्श सुविधा भी प्रदान की जा रही है। हम अपने सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए भी निरन्तर प्रयासरत हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की थी या महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे। यह सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्व करता है। आज आप सभी आधुनिक विज्ञान के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा को अपनी सेवा और समर्पण द्वारा जीवंत बनाए हुए हैं। डॉक्टर्स केवल बीमारियों का उपचार नहीं करते, बल्कि उस संकट की घड़ी में जीवन की सबसे बड़ी आशा भी बन जाते हैं, जब रोगी और उसके परिवार के सामने अंधकार छा जाता है। ऐसे समय डॉक्टर्स अपने धैर्य, ज्ञान और सेवा-भाव से उस अंधेरे में रोशनी की किरण बन उनका जीवन बचाने का कार्य करते हैं। मनुष्य के जन्म लेने से लेकर उसके अंतिम समय तक डॉक्टर की भूमिका निरंतर बनी रहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा विश्व गंभीर संकट से जूझ रहा था, उस समय चिकित्सक निःस्वार्थ सेवा में जुटे हुए थे। आप लोगों ने ऐसे कठिन समय में अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात मरीजों को बचाने का काम किया। आप लोग ने पीपीई किट पहनकर, खुद को संक्रमण के खतरे में डालकर और अपनों से दूर रहकर जिस सेवा भावना का परिचय दिया, वो मानवता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। यह मानव सेवा के प्रति आपके समर्पण और संकल्प का ही प्रतीक है कि आप किसी भी परिस्थिति की परवाह किए बिना, सदैव मरीजों की सेवा में समर्पित रहते हैं।

कार्यक्रम में डॉ आर के जैन, डॉ गीता खन्ना, डॉ सुनीता टमटा, डॉ कृष्ण अवतार, डॉ आर एस बिष्ट, डॉ अशोक कुमार, डॉ आशुतोष स्याना, डॉ महेश कुड़ियाल, डॉ प्रशांत, डॉ नंदन बिष्ट सहित सभी प्रमुख सरकारी व निजी अस्पतालो के चिकित्सक उपस्थित थे।