उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही सरकार, चारधाम यात्रा ने बनाए नए कीर्तिमान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोरारी बापू केवल श्रीराम कथा के वाचक नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, विचारों और जीवन-दर्शन के जीवंत संवाहक हैं, जिन्होंने विश्वभर में भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और अध्यात्म का संदेश पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत की सनातन संस्कृति का ष्वसुधैव कुटुम्बकम्ष् का संदेश पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है और उत्तराखंड सरकार देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर तथा प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राओं ने इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा में पिछले सभी रिकॉर्ड टूट रहे हैं और दो माह के भीतर ही 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसी प्रकार हेमकुंड साहिब यात्रा में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा में 55000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जहाँ पहले पूरे वर्ष में सीमित संख्या में ही यात्रियों को भेजा जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को रवाना करने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड में विकसित हो रहे बेहतर बुनियादी ढांचे, सुरक्षित यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि कुंभ केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का महापर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास भी और विरासत भी के मंत्र के साथ देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक गरिमा और सनातन परंपरा के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संतों के आशीर्वाद और जनसहभागिता से उत्तराखंड आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री सुनील सैनी, देशराज कर्णवाल, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, आदेश सैनी, जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम के आदेश पर बदरीनाथ धाम चढ़ावा मामले पर उच्चस्तरीय समिति गठित

श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे आदि के संबंध में प्राप्त कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, एनएचएम संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।

जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।

सीएम धामी ने वन क्लिक से 9.80 लाख लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ की पेंशन राशि की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाएं केवल वर्तमान आवश्यकताओं को नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं ऐसी हों जो समय के साथ निरंतर प्रभावी बनी रहें तथा अन्य राज्यों के लिए भी बेस्ट प्रैक्टिस का उदाहरण बनें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, डोईवाला (देहरादून), बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, पाइनस (नैनीताल) तथा बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास, सोमेश्वर (अल्मोड़ा) के निर्माण कार्य हर हाल में अक्टूबर माह तक पूर्ण किए जाएं, ताकि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को शीघ्र बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का इंटीग्रेशन किया जाए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों में वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही पात्र नागरिक स्वतः वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में आ जाएं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और समय पर पेंशन का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की माह जून-2026 की देय पेंशन राशि का डीबीटी (वन क्लिक) के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कुल 9,80,950 लाभार्थियों को लगभग ₹145 करोड़ 42 लाख की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की। इसमें केंद्र सरकार का अंश लगभग ₹7 करोड़ 2 लाख तथा राज्य सरकार का अंश लगभग ₹138 करोड़ 40 लाख रहा।

माह जून-2026 में वितरित इस राशि में वृद्धावस्था पेंशन के 6,11,245 लाभार्थियों को ₹91.69 करोड़, विधवा पेंशन के 2,35,850 लाभार्थियों को ₹35.38 करोड़, दिव्यांग पेंशन के 88,787 लाभार्थियों को ₹13.32 करोड़, किसान पेंशन के 27,207 लाभार्थियों को ₹3.26 करोड़, परित्यक्ता पेंशन के 8,258 लाभार्थियों को ₹99.10 लाख, भरण-पोषण अनुदान के 7,297 लाभार्थियों को ₹51.08 लाख, तीलू रौतेली पेंशन के 2,179 लाभार्थियों को ₹26.15 लाख तथा बौना पेंशन के 127 लाभार्थियों को ₹1.52 लाख की सहायता प्रदान की गई।

बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की भी समीक्षा की गई। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रति छात्र ₹3.25 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है तथा आवश्यकता होने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि देकर आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण छात्रावासों का निर्माण सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है जो आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करे। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उत्तराखण्ड में ऐसा सुशासन मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हों।

बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण सचिव सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राहतः 220.90 मीटर लंबे धनगढ़ी सेतु से वर्षभर सुगम होगा आवागमन, बरसात में मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या से मिलेगी स्थायी राहत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-121 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग-309) पर धनगढ़ी नाले के ऊपर 29.65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 220.90 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड गर्डर सेतु (धनगढ़ी पुल) का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया।

यह राष्ट्रीय राजमार्ग काशीपुर-रामनगर-मार्चुला-बुवाखाल मार्ग पर स्थित है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत तथा पौड़ी गढ़वाल सहित लाखों लोगों के दैनिक आवागमन, व्यापार, पर्यटन एवं आवश्यक सेवाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

धनगढ़ी नाले में बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ जाने से मार्ग अक्सर बाधित हो जाता था, जिससे आमजन, पर्यटकों तथा आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नव निर्मित सेतु के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। साथ ही, वन क्षेत्र में यातायात सुचारु होने से वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि धनगढ़ी सेतु का लोकार्पण केवल एक पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के वर्षों के संघर्ष, धैर्य और अपेक्षाओं की सार्थक परिणति है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान धनगढ़ी नाले में जलस्तर बढ़ने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता था, जिससे जनजीवन, व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती थीं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धनगढ़ी सेतु सम्पूर्ण उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण पुल है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को सुदृढ़ रूप से जोड़ता है। इस सेतु के निर्माण से दोनों मंडलों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा तथा पर्यटन, व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ष्सेवा, सुशासन और विकासष् के पाँच वर्ष पूर्ण करते हुए प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक विकास पहुँचाने का कार्य किया है। सरकार की प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना रही है। इसी सोच के अनुरूप राज्य में आधुनिक सड़कें, मजबूत पुल, विस्तृत रेल नेटवर्क, रोपवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कार्यसंस्कृति ष्सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टिष् पर आधारित है। इसी के अनुरूप जिन योजनाओं का शिलान्यास किया जाता है, उनका समयबद्ध ढंग से निर्माण पूर्ण कर लोकार्पण भी सुनिश्चित किया जाता है, ताकि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होना केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है। राज्य सरकार विकास की गति को और तेज करते हुए उत्तराखण्ड को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि धनगढ़ी सेतु के निकट लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 175.60 मीटर लंबे पनौद पुल का निर्माण कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में इस पुल पर यातायात संचालित हो रहा है तथा डामरीकरण का अंतिम कार्य शीघ्र पूर्ण कर इसे भी जनता को समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धनगढ़ी सेतु और पनौद पुल इस पूरे क्षेत्र के विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होंगे तथा संतुलित विकास, सुरक्षित आवागमन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के सशक्त प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामनगर क्षेत्र के वन खत्तों में निवासरत परिवारों की समस्याओं पर भी उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि रामनगर-रानीखेत मोटर मार्ग सहित अन्य महत्वपूर्ण मोटर मार्गों के चौड़ीकरण हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार में प्रस्ताव प्रेषित किए जा चुके हैं तथा आवश्यक कार्यवाही प्रगति पर है।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि धनगढ़ी सेतु के निर्माण से वर्षभर सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा। बरसात के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या समाप्त होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह सेतु कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ व्यापार, कृषि, पर्यटन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति प्रदान करेगा। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पनौद पुल का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गर्जिया देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने नव निर्मित धनगढ़ी सेतु का पैदल भ्रमण किया तथा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा पर पुल के समीप आए वन्यजीवों का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर विधायक रामनगर दीवान सिंह बिष्ट, विधायक सल्ट महेश जीना, विधायक रानीखेत प्रमोद नैनवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री शंकर कोरंगा, संजय डॉर्बी, जेड. ए. वारसी, गणेश रावत, रंजन बरगली सहित अन्य जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता (राष्ट्रीय राजमार्ग) मनोहर सिंह धर्मशक्तू तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

चंपावत में सेवा पखवाड़ा के तहत लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टाल, लाभार्थियों ने उठाया लाभ

जनपद चम्पावत के बूमघाट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद की दो महत्वपूर्ण बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने ₹60.21 करोड़ की लागत से बूम से टनकपुर तक शारदा नदी के तट पर बाढ़ सुरक्षा (तटबंध) निर्माण कार्य तथा ₹5.74 करोड़ की लागत से पूर्णागिरी तहसील के ग्राम छीनीगोठ की सुरक्षा हेतु हुड्डी नदी पर बाढ़ सुरक्षात्मक दीवार निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।

कार्यक्रम में आगमन पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक टीका, पटका, कुमाऊँनी टोपी, पुष्पवर्षा तथा छोलिया नृत्य के साथ स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं एवं क्षेत्रवासियों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया।

कार्यक्रम स्थल पहुंचने से पूर्व मुख्यमंत्री ने शारदा नदी पर संचालित बाढ़ सुरक्षा निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मंदिर प्रबंधन समितियों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों, खिरद्वारी जनजाति समूह, व्यापार मंडल, कृषक बंधुओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने सेवा पखवाड़े के अंतर्गत लगाए गए विभागीय स्टॉलों का भी व निरीक्षण किया। कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, एनआरएलएम सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर मुख्यमंत्री ने योजनाओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए। महिला स्वयं सहायता समूह के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से रोटी एवं चटनी तैयार की, जिससे महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री के सहज एवं सरल व्यवहार ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य शिविर में निक्षय योजना के अंतर्गत पांच लाभार्थियों को पोषण किट भी वितरित की तथा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा तटबंध केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और क्षेत्र के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि माँ शारदा नदी लाखों परिवारों के जीवन एवं आजीविका का आधार है। जहाँ जल होता है, वहीं जीवन होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी उन्हें माँ पूर्णागिरि धाम आने का अवसर मिलता है, यहां की जनता का स्नेह उन्हें अपने परिवार जैसा अपनापन देता है। उन्होंने कहा कि चम्पावत की जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शारदा कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से क्षेत्र को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं बपर्यटन की नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग ₹3300 करोड़ की लागत से विकसित की जा रही इस परियोजना के अंतर्गत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित अनेक धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बेटियों को विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु लगभग ₹257 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज तथा ₹58.52 करोड़ की लागत से आधुनिक साइंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि महाविद्यालय, गौशालाओं के विकास तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ष्विकास भी और विरासत भीष् के मंत्र को आत्मसात करते हुए मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत माँ पूर्णागिरि धाम, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर तथा माँ वाराही धाम सहित अनेक धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर में लगभग ₹237.74 करोड़ की लागत से आधुनिक आईएसबीटी तथा लगभग ₹14 करोड़ की लागत से मीडिया सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लोहाघाट में पर्यावरण मित्रों के लिए आवासीय भवन, बनबसा में सैनिक स्मारक तथा पाटी में सैनिक बहुउद्देशीय केंद्र की स्थापना की दिशा में भी कार्य तेजी से चल रहे हैं।


उन्होंने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, वे केवल निर्माण कार्य नहीं बल्कि विकसित चम्पावत, सुरक्षित भविष्य और समृद्ध उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से भेंट की तथा पूर्णागिरी एवं बनबसा क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी किया।

इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामंत, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख आंचल बोरा, जिला महामंत्री मुकेश कलखुड़िया, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी एवं दीपक राजवार, जिला प्रभारी गुंजन सुखीजा, जिला सहप्रभारी हिमांशु बिष्ट, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, मुख्य विकास अधिकारी जी.एस. खाती सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं लाभार्थी उपस्थित रहे।

देवभूमि उत्तराखंड से शिवधाम की पावन यात्रा का शुभारंभ, श्रद्धा, संस्कृति और आतिथ्य का अद्भुत संगम

उत्तराखंड से संचालित पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ टनकपुर से हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदा पर्यटक आवास गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय एवं सफल यात्रा की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक छोलिया नृत्य से स्वागत किया गया तथा पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं का रुद्राक्ष की माला एवं भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया और उनसे आत्मीय संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही किसी श्रद्धालु को इस पवित्र यात्रा का अवसर प्राप्त होता है। यात्रा के दौरान आने वाली प्रत्येक चुनौती का सामना श्रद्धा और धैर्य के साथ करना चाहिए, क्योंकि शिव में अटूट विश्वास ही सभी कठिनाइयों को सरल बना देता है।

उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत क्षेत्रों के लिए विकास और समृद्धि का माध्यम भी है। यह यात्रा सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवन से देशभर के लोगों को जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीद कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देशभर में प्राचीन मंदिरों का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी की सुखद एवं सफल यात्रा की प्रार्थना की।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भी राज्य सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की। सातवीं बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु अनिल कुमार जैन सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए बेहतर प्रबंध किए गए हैं।

शनिवार सायंकाल टनकपुर पहुंचे प्रथम दल का देवभूमि की परंपरा के अनुरूप छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं।

शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रथम दल में चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष एवं 15 महिला श्रद्धालु हैं। दल में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के श्रद्धालु सम्मिलित हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

दल के साथ तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार चिकित्सक के रूप में शामिल हैं। राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल दल के सबसे वरिष्ठ तीर्थयात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं। यह यात्रा सभी आयु वर्ग के लोगों की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है। इससे सीमांत जनपद चम्पावत को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिली है तथा स्थानीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन, होटल व्यवसाय एवं रोजगार के अवसरों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिल रहा है।

हर-हर महादेव एवं बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान टनकपुर में प्रथम दल के प्रस्थान के साथ ही पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि सत्कार की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मंडल आयुक्त कुमाऊं एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं मंडल निवेदिता कुकरेती, प्रबंध निदेशक कुमाऊं मंडल विकास निगम विनीत तोमर, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक चम्पावत रेखा यादव, जीएम कुमाऊं मंडल विकास निगम मनोज कुमार, उपजिलाधिकारी टनकपुर प्रमोद कुमार, जनप्रतिनिधिगण, आईटीबीपी, सेना, एसएसबी एवं ग्रेफ के अधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु, जिला स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने ग्राफिक एरा कौशल ज्योति योजना का शुभारंभ कर मेधावी छात्रों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद के भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में नवनिर्मित अकादमिक ब्लॉक एवं आधुनिक ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्राफिक एरा कौशल ज्योति योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों का शुभारंभ भी किया। साथ ही संस्थान के मेधावी छात्र-छात्राओं एवं ग्राफिक एरा कौशल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत निःशुल्क सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए यह अवसर विशेष महत्व का है, क्योंकि आज उत्तराखण्ड सरकार ने सेवा, सुशासन और विकास के पाँच वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाँच वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, रोजगार तथा युवाओं के सशक्तीकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखण्ड को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों को विश्वास दिलाया कि सरकार भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए राज्य को विकास के नए आयामों तक ले जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसकी सड़कों या इमारतों से नहीं, बल्कि उसके विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के सपनों से तय होता है। उन्होंने कहा कि ग्राफिक एरा ने शिक्षा, शोध, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में जो पहचान बनाई है, वह केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने यह सिद्ध किया है कि यदि संकल्प, गुणवत्ता और दूरदृष्टि का समन्वय हो, तो उत्तराखण्ड जैसा पर्वतीय राज्य भी विश्वस्तरीय शिक्षा का केंद्र बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान में निर्मित नया अकादमिक ब्लॉक एवं आधुनिक ऑडिटोरियम विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को नई उड़ान देगा तथा शोध, नवाचार और रचनात्मक सोच को और अधिक गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि ग्राफिक एरा द्वारा भीमताल में परिसर की स्थापना कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुँचाना संतुलित एवं समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क होटल मैनेजमेंट एवं इंजीनियरिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ मंडल में ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को शिक्षा, नवाचार एवं अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देहरादून में साइंस सिटी, हल्द्वानी में एस्ट्रो पार्क तथा अल्मोड़ा में साइंस सेंटर जैसे संस्थानों के माध्यम से राज्य में वैज्ञानिक सोच एवं अनुसंधान की संस्कृति को भी सशक्त किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विश्व तेजी से बदल रहा है और नई तकनीकें निरंतर नए अवसर प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही युवा सफल होगा, जो सीखने की क्षमता, नवाचार की सोच तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को ढालने का साहस रखेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल डिग्री प्राप्त करने तक स्वयं को सीमित न रखते हुए नेतृत्व क्षमता, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बने। इसी उद्देश्य से राज्य में स्टार्टअप, नवाचार एवं उद्यमिता को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं की प्रतिभा किसी भी नकल माफिया की भेंट न चढ़े, इसके लिए उत्तराखण्ड में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है और पिछले पाँच वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्राप्त हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए कठिन परिश्रम करने का आह्वान करते हुए कहा कि असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वही सफलता की मजबूत नींव बनती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संस्थान के विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक, चिकित्सक, अभियंता, शिक्षक, प्रशासक, उद्यमी एवं उत्कृष्ट नागरिक बनकर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।

इस अवसर पर धामी सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्राफिक एरा परिवार की ओर से केक भी काटा गया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक सरिता आर्या, विधायक प्रताप सिंह बिष्ट, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) डॉ. अनिल कपूर डब्बू, ध्रुव रौतेला, शंकर कोरंगा, दिनेश आर्या, शांति मेहरा, हुकुम सिंह कुंवर, देवेन्द्र सिंह ढेला, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे, ग्राफिक एरा ग्रुप के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला, निदेशक अनिल कुमार नायर, ओबीसी आयोग के सदस्य डॉ. ज़ेड. ए. वारसी, प्रकाश आर्य सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

ऋषिकेश में आयोजित सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में 3.5 हजार से अधिक लोगों ने उठाया जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया एवं मुख्यमंत्री को उनके कार्याकाल के सफलतम 5 साल होने पर बधाई दी।

सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में देहरादून, हरिद्वार एवं टिहरी जनपदों के विभिन्न विभागों ने समन्वित रूप से सेवाएं प्रदान कीं। इंटीग्रेटेड एफर्ट (एकीकृत प्रयास) के तहत आमजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया तथा पात्र लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर आमजन को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया गया। इससे नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक विभागों की सेवाएं प्राप्त हुईं।

कार्यक्रम में आयोजित विशाल स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गंभीर एवं पुरानी बीमारियों की 1009 मरीजों की जांच एवं उपचार किया गया। शिविर में 212 हड्डी रोगियों, 70 स्त्री रोगियों तथा 81 नेत्र, नाक एवं कान संबंधी रोगियों का परीक्षण एवं उपचार किया गया। इसके अतिरिक्त 13 बच्चों का टीकाकरण किया गया, 15 आयुष्मान कार्ड एवं 20 आभा कार्ड बनाए गए। 95 एक्स-रे एवं 70 रक्त जांचें की गईं। आयुष विभाग द्वारा 310 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क औषधियों का वितरण भी किया गया। इसके अतिरिक्त 23 लोगों के विकलांग प्रमाण पत्र ऑनलाइन पंजीकरण किए गए।

समाज कल्याण विभाग द्वारा विधवा वृद्धावस्था दिव्यांग सहित 75 लोगों की पेंशन मौके पर स्वीकृत की गई तथा 10 लोगों के यूडीआईडी कार्ड भी निर्गत किए गए। वही 280 दिव्यांगजनो को सहायक उपकरण वितरित किए गए। शिविर में कृषि, उद्यान, उद्योग, डेयरी, मत्स्य, रेशम, पशुपालन, लीड बैंक ने करीब 1200 से अधिक लाभार्थियों को विभागीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

पुरस्कार /सम्मान
राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लघु उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न विभागों की योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंजीकृत पांच स्वयं सहायता समूहों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक समूह को ₹5 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

इसके अतिरिक्त कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अल्मोड़ा, देहरादून तथा टिहरी जनपद के तीन युवाओं का जापान में रोजगार हेतु चयन होने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। चयनित युवाओं को लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के पैकेज पर रोजगार प्राप्त हुआ है, जिसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताया गया।

कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के एक, उद्यान विभाग के एक, उद्योग विभाग के तीन तथा डेयरी विभाग के एक लाभार्थी को भी अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

धामी नेतृत्व में उत्तराखण्ड विकास और निवेश का नया केंद्र बनकर उभराः राज्यपाल

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में आयोजित ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पणरू जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद की ₹219 करोड़ से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष से अधिक समय तक दायित्व निभाने की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जनता के विश्वास, लोकतांत्रिक स्थिरता और विकास की निरंतरता का प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड ने पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अनेक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जिसने समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा प्रभावी भू-कानून जैसे निर्णय जनहित और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य की विकास यात्रा में महिलाओं, युवाओं, किसानों और सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राज्यपाल ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्य, पर्यटन और होमस्टे योजना के विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नवाचार आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा’ का संदेश राज्य की क्षमता और संभावनाओं पर उनके विश्वास का परिचायक है। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के माध्यम से इस संकल्प को साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व उन्हें देवभूमि उत्तराखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ था और यह यात्रा जनसेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश की जनता का विश्वास, स्नेह एवं आशीर्वाद ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए यह अवसर उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन एवं जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उत्तराखण्ड को विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, पर्यटन, उद्योग, निवेश, स्वरोजगार एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। नई स्टार्टअप नीति, एक जनपद-दो उत्पाद, होमस्टे योजना, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। चारधाम यात्रा, शीतकालीन यात्रा, राष्ट्रीय खेलों एवं जी-20 बैठकों के सफल आयोजन से राज्य को नई पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। राज्य की जीएसडीपी में वृद्धि, प्रतिव्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट, नए उद्योगों की स्थापना तथा स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या उत्तराखण्ड की प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स पलायन को भी गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अनेक ऐतिहासिक एवं साहसिक निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी भावना के साथ ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी, सेवा और विकास के संकल्प के साथ उत्तराखण्ड को वर्ष 2035 तक विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रदेशवासियों के सहयोग से उत्तराखण्ड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, डॉ धन सिंह रावत, खजान दास, भरत चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, मुन्ना सिंह चौहान, बृज भूषण गैरोला, सुरेश गड़िया, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, विनोद चमोली, सहदेव सिंह पुंडीर, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय,महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे।

जनता ने विकास और सुशासन पर लगाई मोहर, देशभर में ट्रेंड करता रहा #DhamiKe5Saal

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोशल मीडिया पर #DhamiKe5Saal देश का नंबर-1 पॉलिटिकल ट्रेंड बन गया। एक्स (X) पर यह हैशटैग राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर पहुंचा, जो मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व, सरकार के कार्यों और जनता के व्यापक समर्थन को दर्शाता है।

पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐसे ऐतिहासिक निर्णय देखे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाई। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने से लेकर सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून, मदरसा बोर्ड की समाप्ति तथा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था जैसे निर्णयों ने उत्तराखंड को सुशासन का मॉडल बनाने की दिशा में नई मिसाल पेश की।

इसी अवधि में प्रदेश में चारधाम यात्रा, पर्यटन, सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सीमांत विकास तथा बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले, जबकि मातृशक्ति, किसानों, सैनिकों और गरीब कल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।

सोशल मीडिया पर #DhamiKe5Saal के नंबर-1 ट्रेंड बनने को राजनीतिक विश्लेषक केवल डिजिटल अभियान नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सहभागिता का प्रतीक मान रहे हैं। हजारों लोगों ने पोस्ट, वीडियो, ग्राफिक्स और संदेशों के माध्यम से मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को साझा किया।

#DhamiKe5Saal का राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष ट्रेंड बनना इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की विकास यात्रा और सुशासन की चर्चा अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।