उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्रः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार में इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए। कुंभ शुरू होने से पहले यह कार्य पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग इसमें नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देश दिये कि इस संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए। बैठक में संस्थान में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने कहा कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक के दौरान संस्थान में भारतीय विद्या शाखाओं के गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यटन, आयुर्वेद ज्योतिष और योग शिक्षा के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जायेगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार, रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित मौजूद थे।

शक्ति, भक्ति, साहस और सेवा के प्रतीक हैं बजरंग बलिः धामी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को चकराता रोड़ स्थित, प्राचीन श्री हनुमान मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान बजरंगबली से प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए प्रदेश की उन्नति, विकास और जनकल्याण की कामना की।

उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान शक्ति, भक्ति, साहस और सेवा के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। भगवान हनुमान की उपासना से भय, संकट और नकारात्मकता का नाश होता है तथा जीवन में साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भगवान हनुमान के आदर्शों को अपनाकर समाज में एकता, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करने का भी आह्वान किया है।

उत्तराखंड मॉडल से प्रभावित भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया है यूसीसी

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को मिली प्रचंड जीत में ‘उत्तराखंड मॉडल’ की भी छाप नजर आती है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के घोषणा पत्र में, उत्तराखंड की तर्ज पर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। जिसे मतदाताओं ने अपना समर्थन दे दिया है। इस तरह गंगोत्री (उत्तराखंड) से निकली यूसीसी की गंगा अब गंगा सागर ( पश्चिम बंगाल) तक पहुंचती नजर आ रही है।

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी अब देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। यूं तो ये मुद्दा आजादी के समय ही राष्ट्रीय विमर्श में छाया हुआ था, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की पहल, 2022 के विधानसभा चुनाव के समय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। इसी क्रम में जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के बाद भाजपा अब दूसरे राज्यों में भी इसे चुनावी एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में बंगाल और असम के चुनावी घोषणा पत्र में यूसीसी को प्रमुखता से शामिल किया गया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने यूसीसी को नागरिक समानता, महिला अधिकार जैसा व्यापक आधार देकर, मतदाताओं के बड़े वर्ग तक पहुंचा दिया है। खासकर शहरी वर्ग और महिला तथा युवा मतदाताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा देखने को मिल रही है। राजनीतिक रूप से भाजपा इसे अपने बड़े वैचारिक एजेंडे के तौर पर देख रही है। पार्टी पहले ही अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों को पूरा कर चुकी है। अब यूसीसी को अगले बड़े राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस तरह असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली जीत ने यूसीसी के उत्तराखंड मॉडल की कामयाबी पर मुहर लगा दी है। जो अगले साल उत्तराखंड में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

उत्तराखंड बना भाजपा का “मॉडल स्टेट”
उत्तराखंड आजाद भारत का का पहला राज्य है जहां यूसीसी लागू हुआ है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशन जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया। भाजपा लगातार इसे महिला अधिकार और समानता से जोड़कर प्रचारित कर रही है। उत्तराखंड के बाद गुजरात की भाजपा सरकार भी यूसीसी लागू करने की दिशा में काम शुरु कर चुकी है। गुजरात में यूसीसी पर गठित समिति अपनी रिपोर्ट वहां के को सौंप चुकी है। गुजरात का मसौदा काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है।

केदारनाथ धाम में किसी भी दशा में वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगीः पांडेय

आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय तथा आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप द्वारा आज रुद्रप्रयाग पहुंचकर श्री केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में यात्रा व्यवस्था नोडल अधिकारियों, संबंधित विभागीय अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ जिला कार्यालय सभागार रुद्रप्रयाग में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में गढ़वाल आयुक्त द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने गढ़वाल आयुक्त महोदय को अब तक की यात्रा संचालन स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि अब तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए हैं। 31 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं तथा 11 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने हेली सेवाओं का उपयोग किया है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के माध्यम से यात्रा की गई है।

उन्होंने बताया कि यात्रा कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी की जा रही है, गैस सिलेंडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, सभी अस्पताल पूर्णतः क्रियाशील हैं तथा म्यूल टास्क फोर्स तैनात है। 8 हजार से अधिक घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण एवं बीमा किया गया है। निर्धारित मानकों के उल्लंघन पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा रही है तथा अतिक्रमण वाले डेरे हटाए गए हैं। पशु चिकित्सालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं रेंडम चेकिंग भी कराई जा रही है।

यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था की गई है तथा गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड पर महिला एवं पुरुषों के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त विद्युत, पेयजल, सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट एवं शटल सेवाओं की जानकारी भी दी गई।

पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर द्वारा यात्रा रूट प्लान, ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग एवं आपातकालीन सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

गढ़वाल आयुक्त ने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई, कार्मिकों की पर्याप्त तैनाती, सफाई सामग्री एवं पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यम से शौचालयों की रेंडम चेकिंग कराने के निर्देश देते हुए कहा कि यात्रा में स्वच्छता सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने यात्रा से संबंधित भ्रामक खबरों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा संबंधित विभागों को तत्काल अपना पक्ष जारी करने के निर्देश दिए, ताकि अफवाहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

हेली सेवाओं में टिकटों का निर्धारित दरों पर ही विक्रय सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा गया कि यदि मनमाने तरीके से टिकट बिक्री या वसूली की शिकायत मिलती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सोनप्रयाग में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भीड़ नियंत्रण हेतु विशेष प्लान लागू करने के निर्देश भी दिए गए।

धाम क्षेत्र में फायर ऑडिट कराने तथा सभी आवश्यक अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जनप्रतिनिधियों से भी लिए सुझाव
आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंडल के सदस्यों के साथ बैठक कर श्री केदारनाथ धाम यात्रा के सुगम संचालन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त की। बैठक में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल ने यात्रा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए तुना-बौंठा मोटर मार्ग के डामरीकरण, तुंगनाथ-चोपता में पार्किंग निर्माण, शौचालय व्यवस्था तथा प्रमुख मंदिर मार्गों पर साइन बोर्ड लगाने की मांग रखी। जिलाधिकारी द्वारा एक सप्ताह में साइन बोर्ड लगाने का आश्वासन दिया गया।

जिला पंचायत सदस्य अमित मैंखंडी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा भी विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन पर आयुक्त द्वारा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

गढ़वाल आयुक्त ने बताया कि उन्होंने ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक सड़क मार्ग का निरीक्षण किया है, जिसमें अधिकांश स्थानों पर मार्ग की स्थिति संतोषजनक पाई गई है तथा आवश्यक स्थलों पर सुधार हेतु निर्देश जारी किए गए हैं।

18 किलोमीटर पैदल मार्ग पर शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने हेतु हर समय सफाई कर्मियों एवं पर्यावरण मित्रों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। केदारनाथ धाम में अग्नि सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद हेतु ₹5 लाख की धनराशि पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग को आवंटित की गई है।

सुरक्षा के दृष्टिगत रात्रि 10रू00 बजे से प्रातः 4रू00 बजे तक यात्रा मार्ग पर यात्री वाहनों एवं पैदल आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। केवल आवश्यक सामग्री के परिवहन को अनुमति दी जाएगी तथा उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि पुलिस एवं सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई है तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वे सोनप्रयाग एवं गौरीकुंड का स्थलीय निरीक्षण करेंगे तथा यात्रियों से संवाद स्थापित करेंगे। मौसम अनुकूल होने पर केदारनाथ धाम तक पैदल निरीक्षण भी प्रस्तावित है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दशा में वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौसम की प्रतिकूलता के कारण हेली सेवाओं में आ रही बाधाओं का संज्ञान लेते हुए हेली कंपनियों को पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यदि यात्रा मार्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो आवश्यकतानुसार यात्रा को रोका जा सकता है। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को परिस्थिति के अनुसार 2-3 घंटे के लिए यात्रा रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में आज भी यात्रा को कुछ समय के लिए रोका गया।

उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा सुरक्षित एवं सुगम यात्रा संचालन सरकार की प्राथमिकता है, जिसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य कर रहे हैं।

बैठक में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, अगस्तमुनि ब्लॉक प्रमुख भुवनेश्वरी देवी, जिला पंचायत सदस्य अमित मैंखंडी, जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन कांडपाल, नगर पालिका अध्यक्ष रुद्रप्रयाग संतोष रावत, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत, अधिशासी अभियंता एनएच ओंकार पांडे, जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे, जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार, जिला पूर्ति अधिकारी के.एस. कोहली, एआरटीओ धर्मेंद्र सिंह, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र महेश प्रकाश, सुलभ इंटरनेशनल से धनंजय पाठक, जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा, अधिशासी अभियंता डीडीएमए राजविंद सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के बिना तैयारी के उपस्थित होने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस प्रकार की बैठकों में बिना पूरी तैयारी के आना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सभी अधिकारी पूर्ण तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ ही बैठक में उपस्थित हों।

मुख्यमंत्री ने विभागों एवं अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में विभागीय तालमेल के अभाव के कारण विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित हो रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं की एक बार पुनः गहन समीक्षा करने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता का विषय हैं और जनता से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किस विभाग में कितने प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी लंबित हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी लंबित घोषणाओं के संबंध में 15 जून तक शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन कार्यों के शासनादेश जारी हो चुके हैं, उन पर तत्काल कार्य प्रारंभ सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि कई स्थानों पर घोषणाओं के अनुरूप कार्य प्रारंभ होने के बावजूद शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यस्थलों पर शिलापट्ट लगाना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित जिलाधिकारी इसकी जिम्मेदारी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो विषय जिला स्तर पर हल हो सकते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस स्तर पर कार्य लंबित है, उसी स्तर पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि 15 जून से पहले सभी लंबित घोषणाओं की पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाए और प्रत्येक कार्य की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की जाए।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जनपद के विधानसभा क्षेत्र सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर एवं जागेश्वर से संबंधित विभिन्न विकास घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता से किए गए सभी वादों और घोषणाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए तथा विकास कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं पर शासनादेश जारी हो चुके हैं, उनके कार्यों में तेजी लाई जाए तथा लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा के दौरान विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की कुल 90 घोषणाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें बड़ी संख्या में घोषणाओं पर शासनादेश जारी किए जा चुके हैं तथा अनेक कार्यों पर तेजी से कार्यवाही चल रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पेयजल, सिंचाई, चिकित्सा-स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, ऊर्जा, कृषि एवं कृषक कल्याण सहित विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित मामलों में शीघ्र प्रगति लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र सल्ट की कुल 69 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अनेक घोषणाओं पर शासनादेश जारी कर कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने धर्मस्व, ग्राम्य विकास, चिकित्सा-स्वास्थ्य, पर्यटन, लोक निर्माण, शिक्षा एवं शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र रानीखेत की कुल 33 घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाएं स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपूर्ण एवं लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

वहीं विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर की कुल 48 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यटन, पेयजल, युवा कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, आवास और धार्मिक महत्व की योजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रदेश के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा का उद्देश्य यही है कि आम जनता को समय पर योजनाओं का लाभ मिले और उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सल्ट, रानीखेत एवं जागेश्वर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

देवभूमि का देवत्व और सांस्कृतिक मूल्य हर हाल में सुरक्षित रहेंगेः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून जनपद के सेलाकुई स्थित आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य मां भगवती जागरण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर मां भगवती की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के स्वर्णिम पुनर्जागरण का काल प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस दृढ़ संकल्प के साथ राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देशभर में सनातन संस्कृति को सशक्त करने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान सहित अनेक धार्मिक स्थलों का विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ा और आज केदारपुरी एक नए दिव्य एवं भव्य स्वरूप में विश्व के सामने है। उन्होंने कहा कि अभी 22 अप्रैल से चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई है और अब तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार सहित चारधामों में दर्शन कर चुके हैं, जो उत्तराखंड के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024 से उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं इस पहल का समर्थन किया और इसकी शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शीतकालीन यात्रा का उद्देश्य यह है कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहे, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद वहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस दौरे ने सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान दी है तथा स्थानीय पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिला है। राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर तेजी से कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं कुछ दिन पूर्व मात्र ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंचे, जो इस परियोजना की उपयोगिता को दर्शाता है। इससे पर्यटन, व्यापार और तीर्थाटन को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सिख श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजना भी एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना के पूर्ण होने से श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी और यात्रा अधिक सुगम एवं सुरक्षित बनेगी। साथ ही यह क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में जन्म लेना बहुत बड़े सौभाग्य की बात है, लेकिन जिन लोगों का जन्म यहां नहीं हुआ और जिन्होंने इस भूमि को अपनी कर्मभूमि बनाया है, वे भी उतने ही सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि देवभूमि का देवत्व बना रहे, यहां के सांस्कृतिक मूल्य सुरक्षित रहें और हमारी परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि उत्तराखंड की भावी पीढ़ियों और आने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाया जाए। इसके लिए सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का विकास, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के मंत्र के साथ विकास और विरासत दोनों को समान प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं तथा युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं।

इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, अन्य जनप्रतिनिधिगण, आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सीएम धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याओं को सुना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याओं को सुना। जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि संबंधी मामलों तथा अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी शिकायतों एवं मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए तथा प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब न किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों को तत्काल प्रेषित करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसकी समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान प्राप्त हो। जनसुनवाई जैसे कार्यक्रम शासन और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम हैं, जिनके माध्यम से सरकार को जमीनी स्तर की समस्याओं की जानकारी प्राप्त होती है और उनके समाधान के लिए प्रभावी निर्णय लिए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण, सुशासन और समग्र विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश के दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सरलता एवं समयबद्ध रूप से लोगों को प्राप्त हो।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर उत्तराखण्ड में चारधाम यात्रा में श्रद्धालु के लिए की गई बेहतर व्यवस्थाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन बेहतर यात्रा व्यवस्थाओं के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। आंगनबाड़ी कर्मियों ने भी उनकी समस्याओं और मांगों पर सकारात्मक आश्वासन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

सीएम धामी ने आंगनबाड़ी संगठन के प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगों के लिये आश्वस्त किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन, उत्तराखण्ड के प्रतिनिधिमंडल ने संगठन की अध्यक्ष रेखा नेगी के नेतृत्व में भेंट कर अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कर्मियों की समस्याओं एवं मांगों पर प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।

बैठक में सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय वृद्धि के संबंध में भारत सरकार से भी अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन के उपरांत संगठन के प्रतिनिधियों ने हड़ताल को स्थगित किए जाने पर सहमति व्यक्त की।

इस अवसर पर सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव चन्द्रेश कुमार तथा विभागीय निदेशक बी.एल. राणा भी उपस्थित रहे।

मानसून से पहले उत्तराखण्ड को बड़ी सौगात, सफल हुआ सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम परीक्षण

देहरादून। राष्ट्रीय स्तर पर आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा सी-डॉट द्वारा उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से सफल परीक्षण अलर्ट जारी किया गया। प्रातः 11 बजकर 46 मिनट पर यह अलर्ट संदेश प्रसारित किया गया।

उत्तराखण्ड ने लगातार इस आधुनिक तकनीक को जल्द से जल्द लागू किए जाने के लिए केंद्र सरकार एवं संबंधित एजेंसियों के समक्ष प्रभावी पैरवी की थी। इस उपलब्धि पर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।

इस सफल परीक्षण के साथ ही राज्य में आपदाओं के दौरान आम जनमानस तक त्वरित एवं लक्षित चेतावनी संदेश पहुंचाने हेतु सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ हो गया है। इस तकनीक के माध्यम से अब उत्तराखण्ड में किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में स्थित मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ अलर्ट भेजे जा सकेंगे।

बता दें कि उत्तराखण्ड में आगामी मानसून सीजन से पहले ही इस तकनीक को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष अनुरोध पर इस प्रणाली का प्रथम परीक्षण भी उत्तराखण्ड में ही किया गया था। राज्य द्वारा उस परीक्षण के आधार पर महत्वपूर्ण तकनीकी एवं व्यवहारिक फीडबैक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा सी-डॉट को उपलब्ध कराए गए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तकनीक उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए अत्यंत उपयोगी एवं वरदान सिद्ध होगी। विशेष रूप से चारधाम यात्रा एवं आगामी मानसून सीजन के दौरान इस प्रणाली का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे यात्रियों एवं स्थानीय निवासियों को समय रहते सटीक एवं प्रभावी चेतावनी उपलब्ध कराई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर यह प्रयास किया गया कि मानसून प्रारंभ होने से पूर्व यह तकनीक राज्य को उपलब्ध हो, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति जनमानस को समय रहते सचेत किया जा सके।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस पहल को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग से राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुंचाना अब संभव हो सकेगा, जिससे आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी और जनहानि में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में, प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय सभी मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को सेल ब्राडकास्टिंग तकनीक के माध्यम से स्वतः अलर्ट प्राप्त होगा। यह प्रणाली स्थान- विशिष्ट चेतावनी प्रसारण को सक्षम बनाती है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों को ही संदेश प्राप्त होता है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा इस तकनीक से एलर्ट भेजे जाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यूएसडीएमए के विशेषज्ञों द्वारा एनडीएमए व सी-डॉट के दिशा-निर्देशन में प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया गया है तथा अब इस तकनीक से एलर्ट भेजे जाएंगे और इसका प्रदेश में व्यापक तौर पर उपयोग किया जाएगा।

15 जून 2026 तक सीएम घोषणाओं के लंबित शासनादेश जारी करने के निर्देश

मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा उनकी प्रभावी निगरानी के लिए प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्निक (पी.ई.आर.टी.) चार्ट तैयार किया जाए। बिजली, पेयजल, वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा सड़क से संबंधित समस्याओं का विभागों द्वारा यथाशीघ्र समाधान किया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। विधायकगणों द्वारा अपने क्षेत्रों की जिन समस्याओं को उठाया जा रहा है, अधिकारी उन्हें गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करें। जिन घोषणाओं के अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उन्हें 15 जून 2026 तक जारी किया जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से जनसमस्याओं का समाधान करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्रों यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ये निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में छात्राओं की सर्वाधिक संख्या वाले विद्यालयों को चिन्हित करते हुए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए। उन्होंने कहा कि रघुनाथ मंदिर, कोट ब्लॉक स्थित लक्ष्मण मंदिर तथा फलस्वाड़ी स्थित सीता माता मंदिर को धार्मिक सर्किट के रूप में भव्यता से विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगणों द्वारा केंद्रीय विद्यालय संगठन खोलने के लिए दिए जा रहे प्रस्तावों पर शिक्षा विभाग तथा संबंधित जिलाधिकारी केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने पर उन्हें शीघ्र स्वीकृति मिल सके।युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पौड़ी में मल्टीपरपज हॉल बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा बैठक में उठाई गई समस्याओं का संबंधित विभागीय सचिव प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित रोपवे प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाए। साथ ही पार्किंग की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए तथा सरकारी कार्यालयों में नियमित रूप से सोलर पैनल लगाए जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, विधायक रेनू बिष्ट, राजकुमार पोरी, दलीप सिंह रावत, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, रणवीर सिंह चौहान, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय और जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति भदौरिया उपस्थित थे।