कुंभ 2027 से पहले अतिथि गृहों की बदलेगी सूरत, आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों से होंगे सुसज्जित

राज्य में आने वाले विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों को उच्च स्तरीय आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने शनिवार को देहरादून से लेकर हरिद्वार तक विभिन्न राजकीय गेस्ट हाउसों का व्यापक निरीक्षण किया। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर परखने और उन्हें आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने की ठोस पहल के रूप में सामने आया। सचिव ने गेस्ट हाउसों की संरचना, अनुरक्षण, स्वच्छता, सुरक्षा, फर्नीचर, विद्युत एवं अग्निशमन व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की।उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य की छवि इन अतिथि गृहों से भी जुड़ी होती है, इसलिए यहां ठहरने वाले अतिथियों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलना अनिवार्य है। रिनोवेशन कार्यों की गुणवत्ता, किचन की साफ-सफाई, फायर सेफ्टी सिस्टम की मजबूती और समग्र सौंदर्यीकरण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए। साथ ही आगामी कुंभ मेला 2027 को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध और मानक अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि अतिथि गृह केवल भवन नहीं, बल्कि राज्य की आतिथ्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

*बीजापुर गेस्ट हाउस में तीन चरणों में होगा उन्नयन*
देहरादून गढ़ी कैंट स्थित राज्य अतिथि गृह बीजापुर का संयुक्त निरीक्षण आवास एवं राज्य संपत्ति सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। निरीक्षण में राज्य संपत्ति अधिकारी, मुख्य व्यवस्थाधिकारी तथा आवास एवं सिविल/विद्युत अनुरक्षण इकाई के अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान सचिव ने भवन की सिविल एवं विद्युत व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। प्रथम चरण में संपूर्ण रिपेयरिंग, वीवीआईपी कक्षों के उन्नयन, पुराने एवं क्षतिग्रस्त फर्नीचर के प्रतिस्थापन तथा फायर सेफ्टी सिस्टम को अत्याधुनिक बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। द्वितीय चरण में सभी कक्षों एवं बालकनियों में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने और भवन के समग्र सौंदर्यीकरण पर जोर दिया गया। तीसरे चरण में ड्रॉइंग रूम, गार्ड कक्ष तथा खुले प्रांगण की मरम्मत के साथ समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों और गुणवत्ता सर्वोपरि रखी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य अतिथि गृह बीजापुर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर इसे एक आदर्श अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाएगा।

*ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल में 2.95 करोड़ से अधिक के कार्यों को मिली रफ्तार*
बीजापुर गेस्ट हाउस के निरीक्षण के बाद सचिव रेसकोर्स स्थित ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल पहुंचे, जहां संयुक्त निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर सचिव/राज्य संपत्ति अधिकारी, वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी, परियोजना प्रबंधक, अधिशासी अभियंता उत्तराखंड पेयजल निगम तथा विद्युत यांत्रिक खंड लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा में बताया गया कि हॉस्टल में 2 करोड़ 33 लाख 78 हजार रुपये की लागत से भवन की रंगाई-पुताई, शौचालयों के नवीनीकरण, क्षतिग्रस्त टाइल्स के प्रतिस्थापन एवं जलापूर्ति मरम्मत जैसे अनुरक्षण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त 2 करोड़ 95 लाख 12 हजार रुपये की लागत से फर्नीचर, फर्निशिंग, विद्युत एवं सिविल कार्यों को गति दी गई है। बैठक में पुरानी लिफ्ट को हटाकर नई आधुनिक लिफ्ट स्थापित करने, छत पर टिन शेड निर्माण, प्रथम से तृतीय तल तक गैलरी में पीवीसी/मेटल फॉल्स सीलिंग, नई इलेक्ट्रिकल वायरिंग और सीलिंग लाइट लगाने का निर्णय लिया गया। सुविधाओं के विस्तार के तहत पार्किंग स्थल के समीप 9 नए डबल/सूट कक्षों के निर्माण की योजना भी स्वीकृत की गई है। सभी कमरों में टीवी हेतु डेटा केबलिंग और नया इंटरकॉम सिस्टम स्थापित किया जाएगा। सचिव ने स्पष्ट किया कि हॉस्टल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर अधिकारियों और अतिथियों को उच्चस्तरीय आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।

हरिद्वार स्थित अटल बिहारी वाजपेई राजकीय अतिथि गृह, मायापुर का निरीक्षण करते हुए सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने आगामी कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के दृष्टिगत व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान भवन की छत से पानी टपकने और कुछ कमरों में सीलन की समस्या सामने आई, जिस पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग को तत्काल मरम्मत कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। विद्युत व्यवस्था में आवश्यक सुधार, वायरिंग की जांच और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। सचिव ने पुराने एवं अनुपयोगी फर्नीचर को नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया से हटाने को कहा, ताकि परिसर को सुव्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने रूम, डोरमेट्री, पार्किंग, डाइनिंग हॉल, किचन, मीटिंग हॉल एवं वीआईपी कक्षों का निरीक्षण कर साफ-सफाई एवं व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया। सचिव ने कहा कि कुंभ मेला 2027 अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, ऐसे में हरिद्वार के अतिथि गृहों को उच्च मानकों के अनुरूप तैयार करना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान अपर सचिव राज्य संपत्ति लक्ष्मण सिंह, अधिशासी अभियंता दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता पंकज नयाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम की निरीक्षण जांच का त्वरित संज्ञान, ऋषिकेश उप निबंधक निलम्बित

जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने बड़ा एक्शन लेेते हुए उप निबन्धक ऋषिकेश को निलिम्बत करते हुए मुख्यालय सम्बद्ध कर दिया है। विगत माह आमजन को रजिस्ट्रार कार्यालय में आ रही समस्याओं एवं शिकायतों के सम्बन्ध में जिलाधिकारी सविन बसंल ने सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया था।
आमजन की पीड़ा व शिकायतों से प्रेरित डीएम सविन बसंल के सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश के औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमिताएं उजागर हुई थी जिनमें गहन स्टाम्प चोरी, फर्जी कार्मिक व सब रजिस्ट्रार के बगैर ही लिपिक द्वारा अनाधिकृत रूप विलेख पंजीकरण कार्यवाही सम्पादित करना,  कार्यालय में वर्षों से आमजन के मूल अभिलेख लम्बित पाये जाना,सम्पति मूल्य आंकलन का कोई ज्ञान न होना, करोड़ो की स्टाम्प चोरी हुई, औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंड के छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रीयां बरामद हुई थी। निरीक्षण के दौरान उपस्थित फरियादियों ने आपबीती सुनाते हुए  बताया कि मूल अभिलेख लौटाने; रजिस्ट्री की नकल देने में आमजन को कर रहे परेशान किया जा रहा है। कार्यालय में कई महीनों से मूल अभिलेख आवेदकों को वापिस नही किए गए तथा ना ही मुख्यालय को सूचना प्रेषित की गई। जबकि अधिकतम तीन दिन है सीमा, परंतु सैकड़ों मूल विलेख अलमारी में धूल खा रहे थे अर्जेंट रजिस्ट्री नकल अनुमन्य 24 घंटे के सापेक्ष महीनों/वर्षों से मिली लम्बित मिले। जिस पर यह एक्शन लिया गया। इस एक्शन से अन्य रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।

जिलाधिकारी सविन बसंल ने स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अन्तर्गत उप निबंधक कार्यालय, ऋषिकेश का उप जिलाधिकारी, ऋषिकेश एवं जिला शासकीय अधिवक्ता (रा०) देहरादून की उपस्थिति में औचक निरीक्षण किया, जिसके परिणामस्वरूप उप जिलाधिकारी, ऋषिकेश एवं जिला शासकीय अधिवक्ता (रा०) की संयुक्त जॉच आख्या के आधार पर हरीश कुमार, उप निबंधक, ऋषिकेश के बिना किसी सूचना के अनुपस्थिति, संदर्भगत कार्यालय में तत्समय तैनात निबंधक लिपिक द्वारा पंजीकरण की कार्यवाही सम्पादित करना पाया गया। तथा फर्जी कर्मचारी से अनाधिकृत तौर से विलेखों का पंजीकरण निष्पादित कराया जाना, पंजीकृत दस्तावेजों को कार्यालय में महिनों / वर्षों तक विधि विरूद्ध तरीके से धारित/लंबित रखना, ग्राम माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला में दून घाटी विशेष महायोजना 2031 के अंतर्गत आरक्षित औद्योगिक भूमि का आवासीय दरों पर पंजीकरण की कार्यवाही चल रही थी। उप निबन्धक हरीश कुमार द्वारा वर्तमान में प्रचलित / विद्यमान नियमों / अधिनियमों का यथा-भारतीय स्टाम्प (उत्तराखण्ड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47क, भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, नियम 195 व 196, सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा अनुभाग, उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना संख्या 368/28.04.2016 का संज्ञान नहीं लिया गया है, जिससे स्टाम्प अपवंचना के दृष्टिगत सरकार को गहन राजस्व क्षति हुई है।
निरीक्षण के दौरान पंजीकरण प्रक्रिया में खुलेआम कानून उल्लंघन, फर्जी कर्मचारी से रजिस्ट्रियां कराना तथा वर्षों से संगठित रूप से स्टांप चोरी किए जाने के प्रमाण सामने आए हैं।  उप निबंधक की अनुपस्थिति में अवैधानिक रूप से रजिस्ट्रियां की जा रही थीं तथा पंजीकृत दस्तावेज महीनों-वर्षों तक कार्यालय में दबाकर रखे गए। कार्यालय में बाहरी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रेशन कार्य कराए जाने से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। जांच में दून घाटी विशेष महायोजना-2031 के अंतर्गत औद्योगिक भू-उपयोग वाली भूमि को आवासीय दर्शाकर दर्जनों छोटे भू-खण्डों में रजिस्ट्री कराए जाने का मामला भी उजागर हुआ है, जिससे न केवल स्टांप अपवंचना हुई बल्कि भूमि क्रेताओं के साथ भी धोखाधड़ी की गई।
निरीक्षण दौरान पाई गई कमियों पर जिला प्रशासन द्वारा उप निबन्धक के निलम्बन एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति शासन को प्रेषित की गई थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन द्वारा उप निबन्धक को निलिम्बित करते हुए मुख्यालय से सम्बद्ध करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। जिला प्रशासन के इस एक्शन को राजस्व हितों से खिलवाड़, भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत देखा जा रहा है तथा भविष्य में भी इस तरह के एक्शन देखने को मिल सकते हैं।

बिन पिता की बेटियां शिक्षारूपी पंख से अब पूरे कर सकेंगी अपने सपनो की उड़ान

कलेक्ट्रेट परिसर में प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’ के 13वां संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी सविन बसंल ने बाालिकाओं को चैक वितरित किये। 34 बालिकाओं की शिक्षा 9 लाख धनराशि से पुनर्जीवित की गई। अब तक लगभग 62 लाख से अधिक धनराशि से 126 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने कहा कि सभी बालिकाएं नंदा-सुनंदा देवियों के समान है हमने नंदा-सुनंदा देवियों को नही देखा। बालिकारूपी इन देवियों की शिक्षा पुनर्जीवित कर उन्हें योग्य बनाना ही असली ‘‘नंदा-सुनंदा’’ की स्तुति करना है। उन्होंने बालिकाओं से कहा की अपनी शिक्षा की ललक जीवित रखें। जिलाधिकारी ने बालिकाओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि बालिकाएं अपने जीवन में महापुरूषों की बायोग्राफी पढे छात्र जीवन के लिए इससे अधिक आईडल और कुछ नही है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि आप सफल होकर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनें।
इस अवसर पर बालिकाओं के परिजनों ने मा0 मुख्यमंत्री एवं जिलाप्रशासन का उनकी खराब आर्थिक स्थिति में बच्चों की शिक्षा पुनर्जीवित रखने के लिए आभार व्यक्त किया। शदब की माता मन्नो ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि स्कूल वालों ने फीस न भरने के कारण होनहार बालिकाओं को 15-15 दिन स्कूल नही आने दिया, परीक्षा से भी वंचित रखने की चेतावनी दी ऐसे में बालिका के भविष्य की चिंता सता रही थी ऐसे में जिला प्रशासन की नंदा-सुनंदा योजना से बालिका की शिक्षा पुनर्जीवित हुई। जिया की माता ने कहा कि फीस न भर पाने के कारण बेटी की शिक्षा बीच में ही रोकनी पड़ी पारिवारिक आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, जिला प्रशासन ने बेटी की शिक्षा जारी रखने में मदद की इसके लिए मा0 मुख्यमंत्री जी एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। वहीं खुशी कौर की माता ने कहा कि वह घरों में काम कर बच्चों को शिक्षित कराने में समस्या हो रही थी जिस कारण बच्चों की पढाई छूट रही थी उन्होंने जिला प्रशासन का सहायता हेतु आभार व्यक्त किया। कु0 सृष्टि जिनके पिता कैंसर पीड़ित हैं की बीसीए 5वें सेमस्टर की शिक्षा पारिवारिक खराब आर्थिक स्थिति के कारण बधित हो रही थी जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से शिक्षा को पुनर्जीवित कर दिया है। खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रहे बिन पिता की बेटी अलाईना रावत बीएससी नर्सिंगं की शिक्षा पुनर्जीवित, आकृति बडोनी बी-कॉम की शिक्षा जिनके पिता की मृत्यु 2023 में हो गई थी। कु0 तनिका कक्षा 10वीं पिता की मृत्यु होने उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी। कु0 लावण्या पिता की मृत्यु उपरान्त 9वीं की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु के उपरान्त दिव्या की 6वीं की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु उपरांत नंदनी की यूकेजी की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु उपरान्त ईशिका कक्षा 3 की शिक्षा बाधित हो गई थी। इसी प्रकार कु0 शिवांगी जिनके माता निजी चिकित्सालय में सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत है की आर्थिक स्थिति खराब है बीएजे एंड एमसी डिजिटल द्वितीय सैमस्टर की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। यूकेजी की शिक्षा ग्रहण कर रही मानवी की पारिवारिक आर्थिक स्थिति खराब है। इन सभी 34 बालिकाओं की शिक्षा नंदा-सुनंदा योजना से पुनर्जीवित की गई।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित बालिकाओं के अभिभावक उपस्थित रहे।

ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति, पीएम आवास योजना, लैण्ड पूलिंग स्कीम और डिकंजेशन पॉलिसी पर व्यापक समीक्षा: सचिव आवास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में सुनियोजित शहरी विकास, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीक आधारित सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में आवास विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में सचिव, आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने आज उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

सचिव आवास ने डिस्पेन्सरी रोड स्थित राजीव गांधी बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स में संचालित उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद, नगर नियोजन विभाग तथा रेरा कार्यालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयों की कार्यप्रणाली, जनसुविधाओं, लंबित प्रकरणों और सेवा वितरण प्रणाली का गहन अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

*समीक्षा बैठक में समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर*
उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आवास/मुख्य प्रशासक एवं आयुक्त के रूप में डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के विज़न के अनुरूप योजनाओं का प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए। विकास कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जानी चाहिए।

*‘ईज एप’ को और अधिक सरल व एकीकृत बनाने के निर्देश*
सचिव आवास ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली ‘ईज एप’ का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि इस एप को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ एकीकृत किया जाए ताकि पूरे राज्य में एक समान डिजिटल व्यवस्था लागू हो सके। उन्होंने नागरिकों की सुविधा के लिए चैटबॉट विकसित करने तथा एक सप्ताह के भीतर एप को और सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के सुझावों सहित विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

*लैण्ड पूलिंग एवं टाउन प्लानिंग स्कीम को प्राथमिकता*
डॉ. आर. राजेश कुमार ने लैण्ड पूलिंग स्कीम एवं टाउन प्लानिंग स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ऐसे क्षेत्रों का चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए जहां इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनियोजित शहरी विस्तार के लिए इन योजनाओं का प्रभावी संचालन अत्यंत आवश्यक है।

*प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा*
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए सचिव आवास ने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूर्ण की जाएं। उन्होंने अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। लाभार्थियों को ऋण प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों के समाधान हेतु बैंकर्स के साथ शीघ्र बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे।

*पार्किंग परियोजनाओं और डिकंजेशन पॉलिसी पर सख्ती*
सचिव आवास ने पार्किंग परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए तथा पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं के संचालन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने डिकंजेशन एंड रिडेवलपमेंट पॉलिसी को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने को कहा, ताकि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव और अव्यवस्थित निर्माण की समस्या का समाधान किया जा सके।

*जीआईएस आधारित महायोजनाओं पर जोर*
महायोजनाओं के निर्माण में अनिवार्य रूप से जीआईएस प्रणाली लागू करने तथा यूसेक के माध्यम से उसके सत्यापन के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से ही सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास संभव है।

*लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश*
डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पारदर्शी, उत्तरदायी और समयबद्ध कार्यसंस्कृति अपनाने पर विशेष बल दिया।

*आलयम आवासीय योजना का स्थलीय निरीक्षण*
समीक्षा बैठक के उपरांत सचिव आवास ने सहस्त्रधारा रोड स्थित मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की आलयम आवासीय योजना का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने तथा निर्माण गुणवत्ता एवं आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर वित्त नियंत्रक परवीन कौर, संयुक्त सचिव गौरव कुमार चटवाल, वरिष्ठ नगर नियोजक शालू थिन्ड, अधीक्षण अभियन्ता राजन सिंह, अधिशासी अभियन्ता सुनील कुमार, प्रभारी अधिशासी अभियन्ता विनोद कुमार चौहान, कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश चन्द्र पाण्डेय एवं पीएमयू के विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सचिव, आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को सुनियोजित, सुव्यवस्थित और नागरिक-अनुकूल शहरी विकास का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में विभाग पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की अवधारणा केवल आधारभूत संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी प्रशासन, तकनीक आधारित सेवाएं और जनसुविधाओं का सुदृढ़ विस्तार भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। सभी विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेही के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल सिस्टम, जीआईएस आधारित महायोजनाएं, ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति और आवासीय योजनाओं के माध्यम से आम नागरिकों को सरल एवं त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। विभाग का लक्ष्य है कि शहरीकरण संतुलित, पर्यावरण-संवेदनशील और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

धामी सरकार का राज्य आंदोलनकारियों व आश्रितों को पेंशन में वृद्धि कर दिया तोहफा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान एवं कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर राज्य सरकार ने विभिन्न श्रेणियों में दी जा रही पेंशन राशि में वृद्धि को स्वीकृति प्रदान की है।

निर्णय के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान 07 दिन जेल गये अथवा आंदोलन के दौरान घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन ₹6000 से बढ़ाकर ₹7000 कर दी गई है। इसी प्रकार, जेल गये या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन ₹4500 से बढ़ाकर ₹5500 प्रतिमाह कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त, राज्य आंदोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त (Bedridden) हुए आंदोलनकारियों की विशेष पेंशन ₹20,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, राज्य आंदोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन ₹3000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रतिमाह कर दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों का त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राज्य सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के प्रति सरकार की कृतज्ञता का प्रतीक है।

स्वस्थ पत्रकार, सशक्त लोकतंत्र की पहचान: धामी

पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे पत्रकारों की जीवन शैली और कार्य की अधिकता एवं अनियमित दिनचर्या को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पत्रकारों हेतु विशेष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जाने के निर्देशों के क्रम में गुरुवार को हल्द्वानी मीडिया सेंटर में सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक दिवसीय चिकित्सा शिविर का आयोजन कराया गया।

शिविर में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल एवं संयुक्त निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय ने शामिल होकर उपलब्ध कराई गई स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया गया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि स्वस्थ पत्रकारिता ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है, क्योंकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाते हुए समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मीडिया प्रतिनिधियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के प्रति संवेदनशील है और उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनकल्याणकारी दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित इस शिविर में एक्स-रे, ईसीजी, बीपी, शुगर, थायराइड एवं विभिन्न रक्त जांच सहित आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक एवं फिजिशियन द्वारा लाभार्थियों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच के उपरांत आवश्यक औषधियों का निःशुल्क वितरण भी किया गया।
शिविर में जनपद के हल्द्वानी, रामनगर, लालकुआं, कालाढूंगी सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया प्रतिनिधियों तथा उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लगभग 100 से अधिक पत्रकारों एवं उनके परिजनों ने शिविर का लाभ उठाया।

शिविर में उपस्थित संयुक्त निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर समय समय पर सभी क्षेत्रों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक मीडिया कर्मियों एवं आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
यह शिविर राज्य सरकार की उस दूरदर्शी सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके अंतर्गत “सबका स्वास्थ्य, सबका विकास” की भावना के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

इससे पूर्व प्रातः जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरीश चन्द्र पंत एवं संयुक्त निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय द्वारा संयुक्त रूप से चिकित्सा शिविर का शुभारंभ किया गया।

शिविर में डॉ0 आर एस कुॅवर फिजीशियन, डॉ0 सुधांशु सिंह हद्दय रोग विशेषज्ञ, डॉ0 पीएस खोलिया, हड्डी रोग विशेषज्ञ, डॉ0 अनीता पवार, स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ0 विजय नेत्र रोग विशेषज्ञ, डॉ0 दीप्ति, दंतरोग विशेषज्ञ तथा दीपा सुनारी फार्मेसिस्ट के साथ ही मेडिकल टीम, जिला सूचना अधिकारी गिरिजा जोशी, सूचना अधिकारी अहमद नदीम सहित विभिन्न मीडिया प्रतिनिधि व अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम के अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश, पुलिस को सक्रिय एवं परिणामोन्मुखी कार्यवाही के आदेश

मुख्यमंत्री धामी ने सख्त शब्दों में कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने डीजीपी को निर्देश दिए कि सभी प्रकार के अपराधों पर तत्काल मुकदमे दर्ज किए जाएं और अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उच्च स्तरीय बैठक ले रहे थे ।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आदतन एवं संगठित अपराध में संलिप्त अपराधियों पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में कानून का भय स्थापित हो और आमजन स्वयं को सुरक्षित महसूस करें।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पुलिस पूरी सक्रियता, सतर्कता और जवाबदेही के साथ कार्य करे। थानों और चौकियों की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। कानून हाथ में लेने वालों, असामाजिक तत्वों और प्रदेश की शांति भंग करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि परिणाम दिखने चाहिए और जनता को सुरक्षा का अनुभव होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार “अपराध मुक्त उत्तराखण्ड” के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश की शांति, सुरक्षा और सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए, ताकि प्रदेश में कानून का राज और अधिक सशक्त हो सके।

बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस, सचिव गृह, एडीजीपी ( लॉ एन्ड आर्डर), गढ़वाल कमिश्नर सहित पुलिस एवं शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

देहरादून में लगी गोदान, सीएम सहित तमाम हस्तियां देखने पहुंची

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून स्थित सेन्ट्रियो मॉल, हाथीबड़कला में गाय संरक्षण पर आधारित फिल्म ‘गौदान’ का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने फिल्म की विषयवस्तु को भारतीय संस्कृति, ग्राम्य जीवन और गौ-संवर्धन की परंपरा से जुड़ा अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायी प्रयास बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता को विशेष स्थान प्राप्त है। गाय केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि, पोषण एवं पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला भी है। ‘गौदान’ जैसी फिल्में समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आधारित इस फिल्म को राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड में टैक्स फ्री किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस फिल्म को देख सकें और गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता का व्यापक प्रसार हो सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समाज में सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण, निराश्रित गोवंश के संरक्षण, पशुपालकों को प्रोत्साहन तथा दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि गौ आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाए।

फिल्म के निर्माता विनोद कुमार चौधरी सहित पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की पावन भूमि कला, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध धरोहर रही है। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रभावी फिल्म नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को आकर्षक सब्सिडी, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, शूटिंग हेतु सरल अनुमति प्रक्रिया तथा स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। नई फिल्म नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और राज्य में फिल्मांकन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण, पर्वतीय संस्कृति एवं विविध लोकेशन फिल्मांकन के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अधिकाधिक फिल्में प्रदेश में शूट हों, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों और पर्यटन को भी नई गति मिले।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म विकास परिषद को सशक्त किया गया है तथा फिल्म स्टूडियो एवं आधारभूत संरचना के विकास की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि ‘गौदान’ जैसी प्रेरक फिल्में समाज को सकारात्मक संदेश देंगी, गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगी तथा उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, रेखा आर्य सहित अन्य जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

कानून व्यवस्था पर राजधानी के क्षेत्राधिकारियों को सख्त निर्देश, जवाबदेही होगी तय

डालनवाला में गोलीकाण्ड की गंभीर घटना के संबंध में राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र द्वारा घटनास्थल पर पहुँचकर विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने घटनास्थल की परिस्थितियों, उपलब्ध भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्यों तथा अब तक की गई पुलिस कार्यवाही की गहन समीक्षा की।

पुलिस महानिरीक्षक द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को निर्देशित किया कि *घटना में संलिप्त आरोपियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करते हुए विशेष टीमों का गठन किया जाए तथा गिरफ्तारी के लिए सभी आवश्यक विधिक, तकनीकी एवं सर्विलांस संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।* उन्होंने स्पष्ट किया कि *अपराधियों को अतिशीघ्र गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस रणनीति तैयार की जाए।*

▪️उक्त संवेदनशील घटना के दृष्टिगत *परिक्षेत्रीय कार्यालय में जनपद देहरादून के समस्त क्षेत्राधिकारियों (सीओ) के साथ गोष्ठी आयोजित की गई।* बैठक में जनपद में *हाल के दिनों में घटित आपराधिक घटनाओं की समीक्षा करते हुए उनके त्वरित अनावरण एवं प्रभावी रोकथाम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। -:*

▪️ सभी क्षेत्राधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में *नियमित रूप से भ्रमणशील रहेंगे तथा पुलिस बल की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।* वे अधीनस्थ थाना एवं चौकी प्रभारियों को नियमित रूप से ब्रीफ करते हुए कानून व्यवस्था के प्रति सजग बनाए रखेंगे।

▪️ ऐसे *विवादित मामलों, जिनसे शांति एवं कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, उन्हें प्राथमिकता पर लेते हुए उनका निस्तारण क्षेत्राधिकारी अपने निकट पर्यवेक्षण में कराना सुनिश्चित करेंगे।*

▪️समस्त क्षेत्राधिकारी *संदिग्ध व्यक्तियों की धरपकड़ के लिए नियमित चेकिंग अभियान चलाएं तथा रूटीन चेकिंग के साथ विभिन्न स्थानों पर आकस्मिक (रैंडम) चेकिंग भी की जाए, जिससे आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके। आपसी रंजिश, भूमि विवाद अथवा अन्य संवेदनशील मामलों में समय रहते निरोधात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।*

▪️*सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाश में आने वाले मामलों में विलंब न करते हुए तत्काल संज्ञान लेकर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।* सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को सुदृढ़ करते हुए अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाएगा।

▪️क्षेत्राधिकारी समय-समय पर *अपने क्षेत्र के बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करें* तथा विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सुरक्षा एवं साइबर अपराध संबंधी जानकारी प्रदान करें।

▪️*किसी भी क्षेत्र में इस प्रकार की आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी के साथ-साथ संबंधित क्षेत्राधिकारी की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी।*

उन्होंने सभी अधिकारियों को *कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने, आमजन में सुरक्षा की भावना स्थापित करने तथा अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण सतर्कता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने की घोषणा, शी फॉर स्टेम के तहत हर जनपद में पांच छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, सुद्धोवाला (प्रेमनगर, देहरादून) में आयोजित ‘शी फॉर स्टेम उत्तराखण्ड’ विषयक कार्यशाला में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस’ के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा कार्यशाला में उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने ‘शी फॉर स्टेम’ विशिष्ट कार्यक्रम के माध्यम प्रदेश की 20 प्रतिभाशाली बेटियों को 50-50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि शी फॉर स्टेम के तहत हर जनपद में पांच छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी |इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्टेम हेतु स्टार्टअप आरंभ करने के लिए में छात्राओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे | महिला प्रौद्योगिकी केंद्रों में स्वयं सहायता समूहो को जोड़ा जाएगा |

मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस कार्यक्रम के माध्यम से होनहार बेटियों को STEM अर्थात साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स के क्षेत्रों में शिक्षा एवं करियर के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए इन-मोबी, विज्ञानशाला इंटरनेशनल, यूकॉस्ट तथा उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित सभी आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस दूरदर्शी पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय इतिहास साक्षी है कि नारीशक्ति केवल सामाजिक या पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विज्ञान, दर्शन, खगोलशास्त्र एवं चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी रही है। वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियाँ दार्शनिक विमर्श में अग्रणी थीं, जबकि लीलावती ने गणित के क्षेत्र में विश्व को दिशा प्रदान की। उन्होंने उल्लेख किया कि चरक-संहिता और सुश्रुत-संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों के विकास में भी स्त्रियों के योगदान के प्रमाण मिलते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक काल में भी अनेक महिलाओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर देश का गौरव बढ़ाया है। स्वतंत्रता से पूर्व के समय में, जब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, अन्ना मणि ने भारत की पहली महिला मौसम वैज्ञानिक बनकर इतिहास रचा और ‘वेदर वुमन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने मौसम विज्ञान और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में अमूल्य योगदान दिया। इसी प्रकार कमला सोहोनी विज्ञान के क्षेत्र में पीएचडी प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला बनीं और यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी बंधन की मोहताज नहीं होती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत में डॉ. टेसी थॉमस, जिन्हें ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, ने अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी महत्वपूर्ण मिसाइल परियोजनाओं का नेतृत्व कर देश की सामरिक शक्ति को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। साथ ही ‘रॉकेट वुमन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. ऋतु करिधल ने मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी महान विभूतियों का जीवन यह संदेश देता है कि जब नारी को अवसर मिलता है तो वह न केवल अपने लिए मार्ग बनाती है, बल्कि पूरे राष्ट्र को नई दिशा देने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं है कि आज भारत में STEM क्षेत्रों से स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में लगभग 42–43 प्रतिशत छात्राएँ हैं, जो कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है। यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत की बेटियाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित के क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं तथा नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूर्णतः तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि बेटियों को अवसर, संसाधन और विश्वास देकर उनके सपनों को उड़ान दी जाए, ताकि वे अपने भविष्य के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प को भी साकार करने में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मत है कि इक्कीसवीं सदी में भारत की प्रगति विज्ञान और तकनीकी नवाचार पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। कोरोना वैक्सीन निर्माण, चंद्रयान-3, आदित्य L1 और गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों ने देश को नए कीर्तिमान स्थापित करने का अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी आधी आबादी तकनीकी रूप से कितनी सक्षम है और नवाचार के क्षेत्र में कितना योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ महिलाओं और बेटियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से महिलाओं की डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया गया है। STEM शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं को प्रेरित किया जा रहा है, जबकि प्रगति छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एवं डिग्री प्राप्त करने वाली छात्राओं को प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इंस्पायर योजना के माध्यम से प्रतिभाशाली छात्राओं को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जा रही है। अटल इनोवेशन मिशन के अंतर्गत स्थापित अटल टिंकरिंग लैब्स में बालिकाओं को रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। महिला वैज्ञानिक योजना के अंतर्गत महिलाओं को अनुसंधान हेतु फैलोशिप प्रदान की जा रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी महिलाओं एवं बालिकाओं की उच्च शिक्षा तथा STEM में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखंड में विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित है। राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है तथा टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं विकास के अनुरूप सुदृढ़ इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। राज्य में साइंस एवं इनोवेशन सेंटर्स, लैब्स ऑन व्हील्स, जीएसआई डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र और स्टेम लैब्स के माध्यम से विश्वस्तरीय अवसंरचना तैयार की जा रही है। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और प्री-इनक्यूबेशन लैब की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो शीघ्र पूर्ण होकर राज्य को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान देगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साइंस सिटी उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बेटियाँ बिना किसी बाधा के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और देश-प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 में बाबा केदार की पावन भूमि से प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त कथन—“21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा”—का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ इसे साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संकल्प तभी सिद्ध होगा जब उत्तराखंड की प्रत्येक बेटी सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश के समग्र विकास में समान रूप से सहभागी बनेगी।

मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि ‘शी फॉर स्टेम’ जैसे प्रयास प्रदेश की बेटियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे तथा वे अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से देश और प्रदेश की प्रगति एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

कार्यक्रम में विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव रंजीत सिन्हा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।