वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताई दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड कारिडोर की खासियत

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कारिडोर वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा। यही नहीं, इसके निर्माण से मानव-वन्य जीव संघर्ष में कमी की प्रबल संभावना है। इस 12 किलोमीटर लंबे एशिया के संबसे लंबे एलिवेटेड कारिडोर को विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे और उससे जुडे़ वन और वन्य जीवों के विषय को लेकर सोमवार को वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कान्फ्रेंस की। वन मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस कॉरिडोर से वन एवं वन्य जीवों को होने वाले लाभों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
वन मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है। कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया है, जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्य जीव सरंक्षण हेतु इको रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी संपादित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है, जो विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विकसित किया गया है। इसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीवों पास का भी निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं। इसके अंतर्गत साउंड बैरियर एवं लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का न्यूनतम प्रभाव ही पडे़।
वन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान संभव होगा, जो जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि लगभग 60-68 लाख पेड़ों के द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के समान है। साथ ही 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।
वन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्रवास के साथ समय में कमी लाएगी। साथ ही, पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी । प्रेस कान्फ्रेंस में वन विभाग के पीसीसीएफ ( हॉफ ) आर के मिश्रा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

तकनीक ने बचा लिए 33,840 पेड़
-दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ कटने से बच गए। वन मंत्री के अनुसार-इस परियोजना के निर्माण 11,160 पेड़ों को काटना पड़ा, जबकि पूर्व में 45 हजार पेड़ काटे जाने की बात थी।

सीएम ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट, गंगोलीहाट, कपकोट एवं बागेश्वर से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन घोषणाओं पर अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उनके संबंध में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लंबित घोषणाओं पर अधिकतम 20 दिनों के भीतर शासनादेश जारी कर दिए जाएं, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का संबंधित क्षेत्र के विधायकगणों के साथ समन्वय स्थापित कर उनका प्रभावी समाधान निकाला जाए, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वन भूमि स्थानांतरण से जुड़े मामलों की जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाकर विकास कार्यों में बाधा को दूर किया जाए। साथ ही, इस विषय में विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत निर्मित सड़कों के रख-रखाव के लिए संबंधित विभागों की एक समन्वय समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि इस समिति द्वारा सड़कों के मेंटिनेंस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सड़कों के पैच वर्क का कार्य वर्षाकाल से पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर खेल मैदानों के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है, वहां 15 दिनों के भीतर आवश्यक धनराशि जारी की जाए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो सके और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कनालीछीना से पिपली बगड़ीगांव तक मोटर मार्ग के चौडीकरण की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कपकोट के राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट के साथ पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित करने की कार्यवाही के साथ मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बागेश्वर जिला अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और समयबद्ध तरीके से सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक कपकोट सुरेश गड़िया, विधायक बागेश्वर पार्वती दास, वर्चुअल माध्यम से विधायक गंगोलीहाट फकीर राम, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन.पाण्डेय, संबंधित विभागीय सचिव, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई, जिलाधिकारी बागेश्वर आकांक्षा कोण्डे मौजूद थे।

बाबा के जीवन पर बनी फिल्म श्रद्धा भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयासः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में श्री बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म के प्रोमो और पोस्टर का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जी का दिव्य जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक एवं निर्माता दल को इस सराहनीय एवं आध्यात्मिक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव एवं स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, फिल्म निर्देशक शरद सिंह ठाकुर एवं अन्य कलाकार मौजूद थे।

सीएम धामी ने स्वेच्छा से स्वच्छता कार्यक्रम में प्रतिभाग कर किया श्रमदान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बल्लूपुर चौक में नगर निगम, देहरादून द्वारा आयोजित “स्वेच्छा से स्वच्छता” कार्यक्रम में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं सफाई अभियान में भाग लेते हुए जनसामान्य को स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

नगर निगम, देहरादून द्वारा 7 अप्रैल से 13 अप्रैल 2026 तक चलाए गए इस विशेष सफाई अभियान का उद्देश्य शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाना है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न वार्डों में सफाई, कूड़ा निस्तारण तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। जब तक प्रत्येक नागरिक स्वेच्छा से इस दिशा में योगदान नहीं देगा, तब तक स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। हमें अपने घर, मोहल्ले और शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी।

मुख्यमंत्री ने नगर निगम, देहरादून के इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं, ताकि स्वच्छता के प्रति जागरूकता निरंतर बनी रहे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, विधायक सविता कपूर, महामंत्री संगठन अजेय कुमार एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

उत्तराखंड को मिला ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का राष्ट्रीय पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रख्यात फिल्म निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक अग्रणी गंतव्य के रूप में विकसित करने, निवेश को आकर्षित करने तथा राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के विषय में विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उत्तराखंड को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाया जाए और इसे एक सशक्त फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आधुनिक एवं उद्योगोन्मुख फिल्म नीति के अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को आकर्षक सब्सिडी, टैक्स छूट तथा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग से संबंधित सभी अनुमतियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माण प्रक्रिया को अत्यधिक सुगम बनाया जा सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अब तक व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। राज्य में अनेक हिंदी फिल्मों, क्षेत्रीय फिल्मों, टीवी धारावाहिकों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग सफलतापूर्वक संपन्न हुई है, जिससे उत्तराखंड देश के प्रमुख फिल्म निर्माण स्थलों में तेजी से उभरकर सामने आया है। यहां की वादियां, झीलें, धार्मिक स्थल एवं ऐतिहासिक लोकेशन फिल्म निर्माताओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है, जो राज्य सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फिल्म शूटिंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लोकेशन बैंक तैयार किया गया है, जिसमें पर्वतीय क्षेत्र, झीलें, वन क्षेत्र, ऐतिहासिक स्थल एवं धार्मिक धाम शामिल हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को विविध और आकर्षक लोकेशन एक ही मंच पर उपलब्ध हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म उद्योग के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों एवं युवाओं को फिल्म निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही फिल्म एवं मीडिया से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म सिटी के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे फिल्म निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया को राज्य के भीतर ही संचालित किया जा सके। इसके साथ ही फिल्म महोत्सवों एवं सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित कर राज्य की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाई जा रही है।

इस अवसर पर मधुर भंडारकर ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता एवं अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग करने की इच्छा भी व्यक्त की।

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि फिल्म उद्योग के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार फिल्म निर्माताओं को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री धामी ने नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में किया प्रतिभाग

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा देहरादून में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज दिनांक 12 अप्रैल 2026 को भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।

इस सम्मेलन के समापन के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्तिगण, उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पधारे न्यायमूर्तिगण और विधि विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास एवं महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब न्याय समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के विषय को अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने National Legal Services Authority (NALSA) द्वारा संचालित वीर परिवार सहायता योजना, लीगल सर्विस क्लीनिक, स्प्रुहा, जागृति एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल समाज के वंचित वर्गों तक न्याय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग तथा समान नागरिक संहिता लागू कर न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव प्रदेश एवं देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

सीएम ने नशामुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत आयोजित ‘रन फॉर अवेयरनेस’ रैली का शुभारंभ किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में नशामुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत आयोजित ‘रन फॉर अवेयरनेस’ रैली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

एमबी इंटर कॉलेज मैदान से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से पहले मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज की यह दौड़ मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और नशे से मुक्त उत्तराखंड के संकल्प की दौड़ है। जब आप सभी यहां से कदम आगे बढ़ाएंगे, तो यह संदेश पूरे प्रदेश में जाना चाहिए कि उत्तराखंड का युवा अब नशे को ‘ना’ कह रहा है और जीवन को ‘हाँ’ कह रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा एक “साइलेंट वार” की तरह फैल रहा है और इसका सबसे बड़ा निशाना हमारी युवा शक्ति है। मजाक-मजाक में युवा नशे की चपेट में आ जाते हैं और वहां से लौटना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह न सिर्फ व्यक्ति, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को संकट में डाल देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू किए गए ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार इस दिशा में मिशन मोड पर काम कर रही है। वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा हजारों आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी की गई है। साथ ही एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) केंद्रों का संचालन किया जा रहा है और सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी एटीएफ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए ‘दगड़िया क्लब’ बनाए गए हैं, जो युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि नशे के विरुद्ध यह लड़ाई केवल कानून बनाने से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज की जागरूकता और युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। हम सभी संकल्प लें कि स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने मित्रों व समाज को भी जागरूक करेंगे। औपचारिकता से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से ही हम ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और ऊर्जावान युवा शक्ति के लिए जाना जाता है। यदि युवा शक्ति सही दिशा में बढ़े, तो वह पूरे भारतवर्ष के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम में डॉ. स्वामी रामेश्वरम हरि जी, आरएसएस संपर्क प्रमुख उत्तर क्षेत्र डॉ. हरीश रौतेला, श्याम अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, भारत भूषण, डॉ. अशोक पाल, किसान आयोग के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नामधारी, शंकर कोरंगा, शांति महरा, डॉ. अनिल कपूर डब्बू, रेनू अधिकारी, ध्रुव रौतेला, सुरेश भट्ट, पूर्व मेयर योगेंद्र सिंह रौतेला सहित आयुक्त कुमाऊं व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत,जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ मंजूनाथ टी सी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी समाधान और जवाबदेही तय करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्किट हाउस, हल्द्वानी में जनपद नैनीताल के वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस, वन एवं विकास विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष, आगामी पर्यटन सीजन की तैयारियों तथा कानून-व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, सिंचाई एवं जमरानी बांध परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में आयुक्त कुमाऊं एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने जानकारी दी कि आगामी आदि कैलाश यात्रा के लिए 1 मई से पिथौरागढ़ जिला प्रशासन द्वारा इनर लाइन पास जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आदि कैलाश मार्ग वर्तमान में सुचारू है। इसके अतिरिक्त कैंचीधाम बाईपास का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा 30 मई तक इसे चालू करने का लक्ष्य है। मेट्रोपोल पार्किंग का निर्माण कार्य भी आगामी 10 दिनों में प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी समाधान खोजा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि लोगों को जागरूक करने के साथ ही ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं जिससे उन्हें जंगलों में जाने की आवश्यकता कम हो। साथ ही विभाग के प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग लगाने तथा वन विभाग और पुलिस की संयुक्त क्विक रिस्पॉन्स टीम को 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल जनपद प्रदेश का प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहां पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ वन क्षेत्रों से सटे गांवों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने रामनगर, हल्द्वानी, कालाढूंगी और नैनीताल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए |

आगामी पर्यटन सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों को गड्ढा-मुक्त रखने, ट्रैफिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने, शटल सेवा एवं वैकल्पिक पार्किंग स्थलों को सक्रिय करने पर जोर दिया।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत पर्यटन स्थलों पर हुड़दंग, नशाखोरी एवं ओवरचार्जिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने 24×7 निगरानी रखने, नियमित चेकिंग अभियान चलाने तथा पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जमरानी बांध परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस परियोजना से तराई एवं भावर क्षेत्र में पेयजल समस्या का समाधान होगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी तथा बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाए जाने के संबंध में भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कुमाऊं आयुक्त एवं जिलाधिकारी नैनीताल को आवश्यक कार्यवाही करते हुए प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए।

विद्युत व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल एवं मानसून को ध्यान में रखते हुए सभी विद्युत स्टेशनों में आवश्यक उपकरण एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल संकट से निपटने के लिए भी समुचित व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई विभाग एवं अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी कार्य समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी जनपद की विभिन्न समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विभिन्न जनप्रतिनिधि, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने भीमताल में उप-तहसील बनाए जाने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद के भीमताल स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज में तीन दिवसीय तकनीकी एवं सांस्कृतिक वार्षिकोत्सव ‘स्पेक्ट्रम 2026’ का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन तथा नव-निर्मित भवन से संस्थान के छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य प्रतिभाशाली और संकल्पवान युवाओं के सुरक्षित हाथों में है।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को स्मरण करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और उचित दिशा देने की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान का प्रबंधन इसी भावना के साथ कार्य करते हुए युवाओं की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान की स्थापना के समय पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी द्वारा व्यक्त अपेक्षाओं के अनुरूप यह संस्थान दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मेधावी एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का कार्य निरंतर कर रहा है। उन्होंने संस्थान द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, अनुशासन और संस्कारों की परंपरा को सराहनीय बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन किया तथा उनकी नवाचारी सोच और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिड़ला संस्थान वर्षों से उत्तराखंड के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यहां से शिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं तथा कई युवा प्रशासनिक सेवाओं, भारतीय सेना और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को सशक्त बनाने हेतु स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा योजना, अटल इनोवेशन मिशन और पीएम युवा योजना जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं, जो युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब एवं परीक्षा भवनों का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘शेवनिंग उत्तराखंड छात्रवृत्ति’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं तथा ‘इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड’ के सहयोग से आधुनिक कंप्यूटर आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ और मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना के माध्यम से नवाचार एवं शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है और पिछले चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।

उन्होंने भीमताल विधानसभा क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं और कई परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिड़ला इंस्टीट्यूट में ड्रोन प्रयोगशाला की स्थापना, कंप्यूटर विभाग के उन्नयन तथा ऑडिटोरियम के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराने हेतु 50-50 लाख रुपये की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रीय विकास से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, विभिन्न जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडेय सहित संस्थान के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर महिला आयोग की अध्यक्ष ने की प्रेस वार्ता

उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” के संबंध में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। कुसुम कंडवाल ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज “नारी शक्ति” केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के कारण महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का वास्तविक विकास “महिला नेतृत्व वाले विकास” से ही संभव है और यह अधिनियम उसी विश्वास को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

*महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*

कंडवाल ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं संचालित की गई हैं, जिन्होंने महिलाओं के जीवन के हर पहलू को सशक्त किया है।

उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को प्रदान किए गए हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता की ओर अग्रसर हुई हैं। वहीं, 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से सामाजिक चेतना में सकारात्मक बदलाव आया है और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन बढ़कर 80.2 प्रतिशत तक पहुंचा है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जो बेटियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन के अंतर्गत 14.45 करोड़ घरों में नल से जल की उपलब्धता तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण ने महिलाओं के जीवन में गरिमा और सुविधा सुनिश्चित की है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्रदान की गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।

*राजनीतिक भागीदारी में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त*

कुसुम कंडवाल ने कहा कि सितंबर 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में 22 से बढ़कर 2024 में 75 हो गई है, किंतु अभी भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व प्राप्त करना शेष है। यह अधिनियम उस दिशा में एक ठोस कदम है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि महिला नेतृत्व से आर्थिक विकास को गति मिलती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है। पंचायत स्तर पर 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व से शिक्षा, जल और पोषण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

उत्तराखण्ड की प्रतिबद्धता कुसुम कंडवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है, बल्कि नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य सरकार एवं महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं की नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी से विकास अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ होगा। यह अधिनियम “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अंत में, कंडवाल ने समाज के सभी वर्गों एवं मातृशक्ति से इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने का आह्वान किया।