डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ समारोह में पहुंचे सीएम धामी, दिया संबोधन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में आयोजित छात्रसंघ समारोह में प्रतिभाग करते हुए छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान भी हैं। उनकी ऊर्जा, संकल्प और नवाचार की सोच ही भारत के विकास की दिशा निर्धारित करती है। उन्होंने छात्र राजनीति को नेतृत्व विकास, संगठन क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों से जुड़कर युवाओं में राष्ट्र सेवा, चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि परिषद के कार्यकर्ता, शिक्षा संस्थानों से लेकर देश की सीमाओं तक राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महान समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण करना भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में युवाओं को केंद्र में रखकर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें ‘मेक इन इंडिया’, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलें शामिल हैं, जिन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसे परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना, 20 मॉडल कॉलेजों का निर्माण, महिला छात्रावास, आईटी लैब एवं परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियां भी की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डी०ए०वी० पीजी कॉलेज के अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शैक्षणिक ब्लॉक की छत पर दो अतिरिक्त तल (प्रथम एवं द्वितीय) के निर्माण की घोषणा भी की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, रामसिंह कैड़ा, विधायक उमेश कुमार, प्राचार्य डी.ए.वी पीजी कॉलेज प्रो. कौशल कुमार, छात्र संघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा, महामंत्री करन नेगी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

उत्तराखंड: मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को मिली नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अंतर्गत मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और लगन से कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद प्रदेश में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही मिलेट के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में सेब, कीवी, बागवानी एवं औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।

कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में इंजीनियर्स की मांगों के परीक्षण हेतु सब-कमेटी गठन

उत्तराखंड में चल रही डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के बीच आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारियों ने भेंट कर अपनी विभिन्न मांगों के संबंध में विस्तृत चर्चा की।

महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी 27 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें पदोन्नति, वेतनमान और पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है और उनकी सभी मांगों का समुचित परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान के लिए एक सब-कमेटी का गठन किया जाएगा, जो संबंधित बिंदुओं का गहन अध्ययन कर शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार संवाद और समन्वय के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों को सुचारू बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और राज्य के विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सभी पक्षों को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इंजीनियर्स महासंघ से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक रुख अपनाएं और वार्ता प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि शीघ्र समाधान निकल सके। उन्होंने कहा कि “राज्य सरकार डिप्लोमा इंजीनियर्स की मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। संवाद और समन्वय के माध्यम से हम सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पांडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल जनगणना में उत्तराखंड ने बढ़ाया कदम, मुख्यमंत्री ने की सक्रिय भागीदारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जनगणना 2027 के अंतर्गत अपनी स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य में इस महत्वपूर्ण अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर जनगणना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मुख्यमंत्री को डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर अग्रसर हुआ है, जो पारदर्शिता, सटीकता और जनभागीदारी को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को डिजिटल युग में एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाने वाली है।

जनगणना 2027 का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (HLO) है, जिसके अंतर्गत आवासीय स्थिति, सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जा रही है। इस बार ‘स्व-गणना’ की सुविधा के माध्यम से नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और त्रुटिरहित होगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अधिकारियों से जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह डेटा राज्य और देश की नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इसलिए इसकी शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनगणना 2027 देश के विकास की आधारशिला है। डिजिटल माध्यम से की जा रही यह जनगणना पारदर्शिता और सटीकता को सुनिश्चित करेगी। मैं प्रदेशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे स्वयं आगे आकर स्व-गणना करें और इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक स्व-गणना पोर्टल का उपयोग कर अपने परिवार की सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल आपकी भागीदारी को सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होगा।

उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान एकत्रित सभी आंकड़ों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं और इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल सशक्तिकरण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर गीता धामी, निदेशक (जनगणना संचालन) ईवा श्रीवास्तव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी: धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में नैनीताल एवं ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनका त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगण अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना शासन व प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अल्पकालिक प्रकृति के कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए, जबकि दीर्घकालिक योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि ऐसी योजनायें, जिनमें एक से अधिक विभागों की सहभागिता है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और समय पर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। इससे न केवल समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि उनके समाधान में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यों में गुणवत्ता और प्रगति दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात से पूर्व सभी बरसाती नालों की सफाई, सिल्ट हटाने तथा जल निकासी से संबंधित अन्य आवश्यक कार्य समय रहते पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध जल और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न समस्याएं रखी गईं, जिनमें सड़क निर्माण एवं मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा कार्य, जलभराव की समस्या सहित अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक समस्या का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, राम सिंह कैड़ा, बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह चीमा, शिव अरोड़ा, सरिता आर्य, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत एवं संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्र से उत्तराखंड को मिली एक करोड़ की धनराशि

प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों के विकास एवं शैक्षिक अवसंरचना में सुधार आदि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार द्वारा “उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया गया था।

केंद्रीय जनजातीय कार्य श्री मंत्री जुएल ओराम द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में अवगत कराया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव पर विचार करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत “उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना से प्रदेश में जनजातीय युवाओं के कौशल विकास, शिक्षा, शोध एवं सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु प्रतिबद्ध है, इस संस्थान के माध्यम से स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड के जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

चारधाम यात्रा-2026: सीएम धामी का सख्त एक्शन प्लान तैयार

सीएम धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस वर्ष देवभूमि उत्तराखंड की जीवन रेखा चारधाम यात्रा को हर दृष्टि से अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। मुख्यमंत्री धामी ने संबंधी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि यात्रा में हर पक्ष विशेषकर हेली सेवाओं के संबंध में व्यावसायिक दृष्टिकोण की अपेक्षा मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए | देश और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालओ की सुरक्षा और सुविधा हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार, विश्वकर्मा भवन में चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ले रहे थे ।

मुख्यमंत्री धामी ने पिछले वर्ष प्रारंभ की गई ‘ग्रीन एवं क्लीन चारधाम यात्रा’ मुहिम को इस बार और अधिक प्रभावी रूप में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यात्रा मार्गों पर पर्याप्त संख्या में कलेक्शन बॉक्स स्थापित करने तथा प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से नियंत्रण करने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि चारधाम यात्रा को लेकर कोई भी भ्रामक या अफवाह फैलाने का प्रयास करेगा, उसके खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि यात्रा को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। हेली सेवाओं के संचालन को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि निर्धारित SOP का पूरी सख्ती से पालन किया जाए, सभी हेलीकॉप्टरों की नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस जांच अनिवार्य हो तथा ऑपरेशनल ओवरलोडिंग से बचने के लिए समय-समय पर सेवाओं को पर्याप्त विश्राम दिया जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए, जिससे किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने प्रमुख स्थलों पर आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और थीम आधारित इंस्टॉलेशन विकसित करने के साथ-साथ यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और साइनज को बेहतर बनाने को कहा।

आपूर्ति व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि यात्रा मार्ग पर गैस, पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जिला पूर्ति अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए और अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त कर दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त मेडिकल यूनिट्स और आवश्यकतानुसार अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जाएं। पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सालयों की संख्या और सुविधाओं को भी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही CSR और अन्य संसाधनों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री ने शौचालय, विश्राम स्थल (शेल्टर) और अन्य मूलभूत सुविधाओं के व्यापक विकास के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दर्शन के लिए लंबा इंतजार न हो, इसके लिए स्लॉट मैनेजमेंट और भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए तथा रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाए।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रणाली को और मजबूत करते हुए भीड़भाड़ वाले रजिस्ट्रेशन केंद्रों पर अतिरिक्त बूथ बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरे यात्रा मार्ग पर CCTV कैमरों को पूर्ण रूप से सक्रिय रखने और आवश्यकता अनुसार AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने को कहा गया। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी और कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में पुलिस एवं होमगार्ड्स की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि जाम की स्थिति बिल्कुल उत्पन्न न हो और इसके लिए प्रभावी ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए। स्थानीय नागरिकों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्गों की पहचान और संचालन भी सुनिश्चित किया जाए।

आपदा प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर आवश्यक संसाधनों की तैनाती करने को कहा। SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।

सीएम धामी ने यात्रा अवधि के दौरान नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की निगरानी करने और पिछले वर्षों के अनुभवों से सीख लेकर सुधारात्मक कदम तत्काल लागू करने के निर्देश दिए। यात्रा मार्गों पर गड्ढों को तुरंत भरने और सड़क व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर भी जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष भंडारों को लेकर उत्पन्न विवादों का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि प्रशासन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच समन्वय स्थापित कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले। साथ ही ओवररेटिंग पर सख्ती करते हुए सभी दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए।

परिवहन व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र, ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने आपूर्ति विभाग को निर्देशित किया कि चारधाम यात्रा मार्गों पर रसोई गैस, केरोसीन, पेट्रोल और डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, वर्चुअल माध्यम से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायकगण, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिकों को मिला तोहफा, सीएम ने किया सीएसडी कैंटीन व सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा के खेतलसंडा स्थित सीएसडी कैंटीन में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने 715.51 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीएसडी कैंटीन एवं 162.26 लाख रुपये से निर्मित सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अपने पिता स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए तथा शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने शहीदों के परिजनों एवं वीर नारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उन्होंने 60 वीर नारियों एवं 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है, क्योंकि यह आयोजन उनके पिताजी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि 6 वर्ष पूर्व का यह दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी के विचार, सिद्धांत और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी उन्हें प्रेरित करते हैं और हर कदम पर मार्गदर्शन देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी अपनी वर्दी को अत्यंत सम्मान और सलीके से रखते थे। उनसे उन्हें यह सीख मिली कि एक सैनिक के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान और जिम्मेदारी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिताजी ने उन्हें सिखाया कि राजनीति पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का मार्ग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी ने 28 वर्षों तक महार रेजिमेंट में सेवा देते हुए 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में वे अपने पिताजी से वीर सैनिकों की कहानियां सुनते थे, जिनसे उन्हें देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि भले ही वे स्वयं सेना में नहीं हैं, लेकिन सैनिकों को अपना आदर्श मानते हुए राष्ट्र सेवा के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री उपलब्ध करा रहा है, जो देश की बढ़ती सामरिक शक्ति का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, शहीदों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि की गई है तथा आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जा रही है। इसके साथ ही वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा बलिदानियों के परिवारों को सरकारी नौकरी के लिए आवेदन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है।

कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी अपने संबोधन में कहा कि सैनिकों का सम्मान करना हम सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी इस दिशा में और प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की माताजी विशना देवी, एवं मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता पुष्कर धामी भी मौजूद थे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर बैठक

मुख्य सचिव ने बुधवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्त्वपूर्ण बैठक ली। मुख्य सचिव ने पुलिस, लोनिवि, स्वास्थ्य विभाग आदि को अपने स्तर से पूर्ण तैयारियां सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पुलिस विभाग को जाम वाले स्थलों तथा स्लाईडिंग जोन का चिन्हित कर पुलिस बल तैनात किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैफिक जाम और लैंड स्लाइडिंग जैसे अन्य कारणों से मार्ग बाधित होने के कारण लगने वाले जाम से बचने के लिए बड़े होल्डिंग एरिया चिह्नित कर यात्रियों को रुकने और खाने की सम्पूर्ण व्यवस्थाएं रखी जाएं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार को असुविधा न हो। उन्होंने यातायात संकुलन और मौसम की जानकारी सहित महत्वपूर्ण जानकारियां लगातार वॉकी-टॉकी सहित एसएमएस से जानकारी उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, यात्रा के लिए रजिस्टर्ड नंबर पर वॉट्सएप चला जाए। उन्होंने कहा कि यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन के दौरान यात्रियों को ‘सचेत ऐप‘ अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराया जाए। उन्होंने पुलिस सहित अन्य सभी सम्बन्धित विभागों को अपनी विभागीय योजनाओं में नए रूट्स और कनेक्टिविटी को भी शामिल किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने आपदा प्रबन्धन विभाग के मैसेजिंग एलर्ट मैकेनिज्म का प्रयोग भी यात्रा मार्ग में यात्रियों को जानकारियां उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने आपात स्थिति में हैली सेवाओं के माध्यम से बचाव एवं रेस्क्यू का उचित प्रबन्धन सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग को चारधाम यात्रा मार्गों में विभिन्न स्थानों में सार्वजनिक सुविधाएं विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए स्थान चिह्नित करते हुए इसका प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग अपनी छोटी पब्लिक अमेनिटीज को भी विकसित कर सकता है। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्गों में साईनेज अनिवार्य रूप से लगाए जाने की बात भी कही ताकि किसी श्रद्धालु को अपने गंतव्य तक पहुंचने में किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग से चारों धामों में चिकित्सकों की तैनाती की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ एवं श्री बद्रीनाथ धाम में 15-15 दिनों के रोटेशन आधार पर चिकित्सकों की तैनाती की जाए। उन्होंने 60 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराया जाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न स्थानों पर स्क्रीनिंग पाइंट्स स्थापित करते हुए स्वास्थ्य जांच को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि ट्रेकिंग रूट्स पर आपातकालीन स्थिति में मेडिसिन और जांच उपकरणों की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन तथा लोक निर्माण विभाग के अपने-अपने परिक्षेत्रान्तर्गत आने वाले मोटर मार्गाे यात्रा प्रारम्भ होने से पूर्व दुरूस्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मरम्मत कार्य समय से पूर्ण हो इसके लिए लैबर की संख्या बढ़ायी जाए। उन्होंने डेंजर जोन, स्लाईडिंग जोन को चिन्हित कर मरम्मत किये जाने के साथ ही उन स्थलों पर मशीनें/उपकरण रखे जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग को श्री बद्रीनाथ धाम में लो-वोल्टेज की समस्या का समाधान तथा चारों धामों में निर्बाध रूप से विद्युत आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में कई बार विद्युत आपूर्ति बाधित होती है, इसके दृष्टिगत वैकल्पिक व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने चारो धामों एवं यात्रा मार्गाे पर सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के साथ ही उन्होंने जीएमवीएन को भी अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने नागरिक उड्डयन विभाग को शटल सेवा के लिए एसओपी शीघ्र जारी करने के साथ ही सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चारों धामों में हैली सेवाओं की उपलब्धता एवं ऑफलाईन/ऑनलाईन बुकिंग की सुविधा का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सूचना विभाग को यात्रा से सम्बन्धित सभी आवश्यक जानकारियों को प्रचार प्रसार सुनिश्चित किए जाने एवं उन्होंने कहा कि सूचना विभाग के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग को वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र, ग्रीन कार्ड एवं ट्रिप कार्ड ससमय उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने आपूर्ति विभाग को चारधाम यात्रा मार्गों में रसोई गैस, कैरोसीन, पैट्रोल, डीजल आदि की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपक सेठ, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, धीराज गर्ब्याल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम ने की राज्य की महत्त्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड निवेश और आधारभूत संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की चौथी बैठक के दौरान राज्य की महत्त्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरिद्वार गंगा कॉरिडोर, शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर तथा ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजनाओं के अंतर्गत कार्यों में तेजी लाई जाए और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यूआईआईडीबी के गठन का मुख्य उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना तथा आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी संबंधित विभाग गंभीरता, समन्वय और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें। उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही प्रक्रियात्मक जटिलताओं को दूर करने के लिए कार्यों के सरलीकरण पर विशेष बल दिया, ताकि परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतर सकें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी छह माह के भीतर इन परियोजनाओं के तहत कार्यों की वास्तविक प्रगति दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक परियोजना की स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की जाए तथा तय समयसीमा के भीतर कार्यों को पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा करने के भी निर्देश दिए, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शारदा कॉरिडोर योजना के कार्यों में तेजी लाए जाने हेतु परियोजना के लिए भूमि की उपलब्धता के साथ इस क्षेत्र की भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशीलता का भी अध्ययन कर सुरक्षात्मक उपायों की प्राथमिकता पर ध्यान दिए जाने को कहा। उन्होंने कहा कि शारदा नदी के किनारे रिवर फ्रंट के विकास तथा घाटों के सौंदर्यीकरण से इस क्षेत्र में आनेवाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आगामी हरिद्वार कुंभ को ध्यान में रखते हुए गंगोत्री से हरिद्वार तक गंगा स्वच्छता के साथ हरिद्वार एवं ऋशिकेश के घाटों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके और उत्तराखंड को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा और गंगा कोरिडोर का मुख्य उद्देश्य राज्य में धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा श्रद्धालुओं को सुविधा देना है। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं में अलग-अलग डिजाइन पर कार्य किये जायेंगे। शारदा कोरिडोर के तहत बुनियादी ढ़ांचे, पर्यटन और लोगों की आर्थिकी को बढ़ावा देने से संबधित अनेक कार्य किये जायेंगे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश झा, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, बृजेश संत, धीराज गर्ब्याल, रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव अजय मिश्रा एवं संबंधित अधिकारी मौजूद थे।