खेल विभाग के स्तर पर तैयार हो रहे लेगेसी पॉलिसी के ड्राफ्ट में खेल अकादमी का प्रस्ताव

38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए अवस्थापना सुविधाओं के व्यापक विस्तार के बाद अब उसके दीर्घकालिक उपयोग को लेकर भी काम शुरू हो गया है। जहां-जहां खेल सुविधाएं बढ़ाते हुए आधारभूत ढांचे तैयार हो रहे हैं, वहां खेल अकादमी खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ताकि राष्ट्रीय खेलों के बाद भी खेल गतिविधियां बेहतर ढंग से संचालित होती रहें। खेल विभाग के स्तर पर तैयार किए जा रहे लेगेसी पॉलिसी के ड्राफ्ट में खेल अकादमी के प्रस्ताव को शामिल किया जा रहा है। मंजूरी के लिए इसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।

उत्तराखंड में खेलों के लिए इन दिनों व्यापक स्तर पर आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। देश-विदेश से अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए गए हैं। कई खेल उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानक वाले हैं। इस बीच, यह भी विचार किया गया है कि राष्ट्रीय खेलों के बाद अवस्थापना सुविधाओं का संचालन किस तरह से किया जाएगा। रांची समेत देश के कई जगहों के उदाहरण सामने हैं, जहां पर राष्ट्रीय खेल समाप्त होने के बाद आधारभूत ढांचे का सही इस्तेमाल नहीं किया जा सका। नतीजतन, देख-रेख के अभाव में महंगे उपकरण खराब हो गए और आधारभूत ढांचा उपयोगी साबित नहीं हो पाया।

उत्तराखंड ने दूसरे राज्यों के अनुभवों से सबक लिया है। राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के बीच ही लेगेसी पॉलिसी के ड्राफ्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है। विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा के अनुसार-खेल अवस्थापना सुविधाओं का उत्तराखंड को लंबे समय तक लाभ मिलता रहे, इसलिए लेगेसी पॉसिली का ड्राफ्ट तैयार कराया जा रहा है। कोशिश ये ही है कि जल्द से जल्द इसे तैयार कर इसकी मंजूरी ले ली जाए।

इसलिए जरूरी हैं खेल अकादमी

देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम व कॉलेज से लेकर खटीमा, हरिद्वार, हल्द्वानी समेत तमाम शहरों में खेल अवस्थापना सुविधाएं व्यापक स्तर पर बढ़ी हैं। राष्ट्रीय खेलों के बाद इन जगहों पर आधारभूत ढांचे और अत्याधुनिक उपकरणों की देख-रेख के लिए खेल अकादमी को जरूरी माना जा रहा है। इसके साथ ही, खेल अकादमी शुरू होने के बाद खिलाड़ियों के लिए संबंधित खेलों में प्रशिक्षण लेने की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी। विभाग को खेल अकादमी संचालित करने के लिए प्रशिक्षण और प्रबंधन से जुड़े मानव संसाधन की आवश्यकता पडे़गी।

राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से उत्तराखंड में खेल अवस्थापना सुविधाओं का बडे़ स्तर पर विस्तार हो रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि खेल सुविधाएं किसी एक जगह पर नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बढ़ने जा रही हैं। यह उत्तराखंड के खेल विकास के लिए अति महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खेल अवस्थापना सुविधाओं से खिलाड़ियों को लगातार लाभ मिलता रहे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल पर राष्ट्रीय खेलों का लोगो लगाए जाने का सीएम ने किया आग्रह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेलों को लेकर चल रही तैयारी के बीच राज्य में प्रदेशवासियों से सामूहिक रूप से देवभूमि आ रहे खिलाड़ियों के स्वागत में विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स की क्च् पर राष्ट्रीय खेलों का लोगो लगाए जाने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी करने का जो गौरव प्राप्त हुआ है, वो ऐतिहासिक है। आगामी राष्ट्रीय खलों में देशभर के विभिन्न राज्यों से लगभग 10,000 खिलाड़ी देवभूमि आ रहे हैं। उन्होंने जनता से निवेदन करते हुए कहा कि हमारी श्अतिथि देवो भवःश् की संस्कृति का पालन करते हुए, सभी खिलाड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत करना है। और उनके उत्साहवर्धन हेतु अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की क्च् पर राष्ट्रीय खेलों का लोगो लगाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता सामूहिक तौर पर सभी खिलाड़ियों का स्वागत करेगी। सभी ने मिलकर आगामी राष्ट्रीय खेलों को विशेष और ऐतिहासिक बनाना है। हमारा यह कर्तव्य है कि देवभूमि आ रहे खिलाड़ी, हमारे राज्य से बेहतर यादें और अनुभव लेकर जाएं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक बनाए जाने के संकल्प में राष्ट्रीय खेल भी सहायक सद्ध होंगे।

सीएम धामी पहनते हैं मलारी और मुनस्यारी सहित पहाड़ के अन्य क्षेत्रों के ट्वीड से बनी जैकेट, मफलर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मलारी, मुनस्यारी सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में बने ट्वीड से बनी जैकेट पहनकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। लगातार सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनको राज्य के बने उत्पाद दे तैयार वस्त्रों के पहने हुए देखा जा सकता है। यह पहल राज्य के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने और उनकी ब्रांडिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।

मुख्यमंत्री ने इसके पूर्व राज्य के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता दें। यह कदम न केवल राज्य के पारंपरिक कारीगरों और उत्पादकों को आर्थिक समर्थन प्रदान करेगा, बल्कि उत्तराखंड के अनूठे हस्तशिल्प और उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी मदद करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, हमारा लक्ष्य है कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देकर उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा को जीवित रखें। मुनस्यारी के ट्वीड जैसे उत्पाद हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं। सरकार हर संभव प्रयास करेगी कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को बढ़ावा मिले।

सरकार के इस कदम से स्थानीय उद्योगों को नया जीवन मिलेगा और राज्य में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इस पहल से राज्य के पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि स्थानीय उत्पाद पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों से भी अपेक्षा की है सभी लोग स्थानीय उत्पाद का उपयोग करें और कपड़े व स्थानीय ऊन से तैयार वस्त्रों को पहन कर इस अभियान को बढ़ावा दें।

टिहरी में मेले का शुभारंभ कर क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने की कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मलेथा टिहरी गढ़वाल में वीर शिरोमणि माधोसिंह भंडारी की स्मृति में आयोजित 5 दिवसीय राजकीय औद्योगिक कृषि विकास मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर विभिन्न स्कूलों एवं एनसीसी कैडेट्स द्वारा निकाली गई मार्च पास्ट रैली को सलामी दी। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने मलेथा में वीर शिरोमणि माधोसिंह भंडारी के स्मारक में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनके द्वारा निर्मित ऐतिहासिक गूल का अवलोकन कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मलेथा चौराहे का नाम वीर शिरोमणि माधोसिंह भण्डारी के नाम पर किए जाने, वीर शिरोमणि माधोसिंह भण्डारी मेला स्थल का विस्तारीकरण किए जाने, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिल्काखाल के भवन निर्माण, सूर्य देवी मन्दिर पलेठी बनगढ का सौन्दर्यकरण किए जाने, रैतासी सड़क का निर्माण तथा ललूडीखाल-फरस्वाणगांव मोटर मार्ग एवं भैंसकोट मोटर मार्ग का डामरीकरण करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने वीर शिरोमणि माधोसिंह भण्डारी के अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि यह सामान्य मेला नहीं अपितु एक विशेष त्यौहार है, जो अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का काम कर रहा है तथा भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा शौर्य शक्ति में नहीं अपितु सेवा ओर समर्पण में निहित होता है, जिसकी बानगी वीर शिरोमणि माधोसिंह भण्डारी के कार्यों से मिलती है। उनके द्वारा क्षेत्र की खुशहाली के लिए कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों में जो सिंचाई गूल बनाई गई वह आज भी लोगों को लाभान्वित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के विकास और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, हर क्षेत्र में काम कर रही है। जनपद टिहरी गढ़वाल में सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत 170 किमी. में क्रेश बैरियर निर्माण किया जा रहा है। मुयालगांव में आपदा में बहे पुल के स्थान पर 18 मीटर लंबा बेली ब्रिज बनाया गया। टिहरी झील रिंग रोड़ निर्माण किया जा रहा है। पलायन रोकने, पर्यटन, रोजगार और व्यापार बढ़ाने हेतु नौकरी सृजन के साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने हेतु किसानों को एक 3 लाख तक का ऋण बिना ब्याज दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। आज स्वयं सहायता समूह अपनी आजीविका को बढ़ाने के साथ ही अन्य को भी रोजगार देने का काम कर रहे हैं। हाउस ऑफ़ हिमालय ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सख्त नकल विरोधी कानून बनाया गया, जिससे प्रतिभावान नौजवानों का विश्वास बढ़ा है और वे अपनी क्षमता के अनुसार नौकरी पा रहे हैं। 19 हजार से अधिक नौकरी देने का काम राज्य सरकार ने किया है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता कानून बनाने का काम किया जा रहा है। शीघ्र ही राज्य में सख्त भू कानून बनाने का काम भी किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अपना उत्तराखंड बहुत जल्द अग्रणीय राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा।

इस अवसर पर उद्यान, पशुपालन, राजस्व, बाल विकास, चिकित्सा, उद्योग, कृषि, समाज कल्याण, पर्यटन, ग्राम्य विकास, पंचायत राज आदि विभागों द्वारा विभागीय स्टालों के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार करने के साथ ही जन शिकायतों का निस्तारण किया गया। विभिन्न स्कूली बच्चों द्वारा भारतीय संस्कृति पर आधारित झांकियों का प्रदर्शन किया गया।

विधायक देवप्रयाग विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए हुए क्षेत्र के विकास से संबंधित मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।

इस अवसर पर निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक सोना साजवाण, जिलाध्यक्ष भाजपा राजेश नौटियाल, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद देवप्रयाग ममता देवी, एसएसपी आयुष अग्रवाल, एएसपी जे.आर. जोशी, डीजीएम आरवीएनएल राजेश अरोड़ा सहित अन्य गणमान्य एवं क्षेत्रीय जनता मौजूद रहे।

शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने के बाद से करीब छह हजार यात्री कर चुके हैं दर्शन

ज्योर्तिमठ। नए साल के पहले दिन, बुधवार को ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) स्थित भगवान नृसिंह मंदिर और शंकाराचार्य गद्दी स्थल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस साल शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने के बाद से करीब छह हजार श्रद्धालु नृसिंह मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।
ज्योर्तिमठ स्थित नृसिंह मंदिर, वासुदेव मंदिर, दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था के केंद्र रहते हैं। साथ ही शंकराचार्य की शीतकालीन गद्दी भी यहीं पर स्थित है। इसलिए बुधवार को नए साल के पहले दिन साढ़े तीन सौ अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंच, नृसिंह भगवान मंदिर में दर्शन किए। बीकेटीसी के प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट ने बताया कि अब तक करीब छह हजार श्रद्धालु नृसिंह मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। बीते दिनों औली में बर्फवारी के बाद, पयर्टकों की भीड़ बढ़ी है। इसलिए औली आने वाले पयर्टक भी नृसिंह मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ लोग पांडुकेश्वर में स्थित योग ध्यान बद्री के दर्शन करने भी पहुंच रहे हैं। इस तरह शीतकाल में लोग पयर्टन स्थलों के नजारे लेने के साथ ही बिना किसी भीड़ भाड़ के धार्मिक महत्व के मंदिरों के भी दर्शन कर रहे हैं। कुलदीप भट्ट ने बताया कि इस साल पहली बार शीतकालीन यात्रा संचालित हो रही है, इस कारण आने वाले वर्षों में शीतकाल के दौरान भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी संख्या गद़दी स्थलों पर पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए रहने खाने की पर्याप्त व्यवस्था है, कहीं भी किसी को कोई परेशानी नहीं है।
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शीतकालीन यात्रा को लेकर देशभर के लोगों में उत्साह नजर आ रहा है। इस कारण सभी जगह शीतकालीन गद्दी स्थलों पर अच्छी खासी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

नए वर्ष के दौरान ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उचित यातायात प्रबंधन होः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि नव वर्ष के आगमन पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा जाय।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए वर्ष के दौरान ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उचित यातायात प्रबंधन किया जाए। पर्यटन स्थलों पर ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। रात्रि में सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख रास्तों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न घटे। मुख्यमंत्री ने शराब पीकर गाड़ी चलाने, तेज गति से वाहन चलाने और अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधों के तहत घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए तकनीकी उपायों का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, विनय शंकर पांडेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए. पी. अंशुमन और उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

सीएम ने शीतलहर से बचाव को समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

प्रदेश में शीतलहर से बचाव के लिए सभी प्रभावी उपाय किये जाएं। शीतलहर से बचाव के लिए पूरी सतर्कता बरती जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जनपदों में रैन बसेरों में ठहरने वालों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। शासन के वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक रैन बसेरों की व्यवस्थाओं का समय-समय पर निरीक्षण करें। शीतलहर के दृष्टिगत जरूरतमंदों को कंबल, दस्ताने, मौजे और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई जाए। जनपदों में रात्रिकाल में जिन स्थानों पर अलाव की व्यवस्थाएं की गई हैं, उसकी लोगों को विभिन्न माध्यमों से जानकारी भी दी जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश सचिवालय में शीतलहर से बचाव के लिए विभागों द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बर्फवारी के कारण सड़के अधिक देर तक बाधित न हों, जिन क्षेत्रों में बर्फवारी अधिक होती हैं, उन स्थानों पर सड़कों से बर्फ हटाने के लिए आवश्यक संसाधनों का उचित प्रबंधन किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि शीतकाल के दृष्टिगत जनपदों में गर्भवती महिलाओं का सम्पूर्ण डाटा रखा जाए, ताकि किसी भी आपात परिस्थिति में उन्हें, यथाशीघ्र चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। शीतलहर के दृष्टिगत निराश्रित पशुओं के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाई जाए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शीतलहर से बचाव के लिए जनपदों में की गई व्यवस्थाओं के बारे में सभी जिलाधिकारियों से जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों को ही मिले। सभी जिलाधिकारी भी सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाओं का कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से फायदा न उठाये। बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के शीतकाल प्रवास स्थलों और उसके आस-पास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उत्तराखण्ड में आयोजित होने वाले 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के लिए उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और विभागों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिये हैं।

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने शीतलहर से बचाव के लिए राज्य में किये जा रहे विभिन्न कार्यों की प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी।

बैठक में राज्य आपदा प्रबधंन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख वन संरक्षक धनजंय मोहन, सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुदंरम, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत और सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम से मेजर जनरल मनोज तिवारी ने की भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मेजर जनरल मनोज तिवारी ने भेंट की। उन्होंने कहा कि अग्निवीर भर्ती में उत्तराखंड से 4500 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। 2000 रिक्त पदों पर भी जल्द भर्ती की जाएगी। मेजर जनरल मनोज तिवारी ने कहा कि आने वाली भर्तियों में भी राज्य से अधिक से अधिक युवा प्रतिभाग कर सकें, इसके लिए राज्य और जनपद स्तरों पर कैंप लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सैनिक बहुल प्रदेश है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में होने वाली भर्तियों में सेना को पूरा प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा। सेना द्वारा राज्य में जो कैंप लगाए जाएंगे, उसमें राज्य सरकार द्वारा हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

सीएम से मिलने पहुंचे जर्मनी सांसद राहुल कंबोज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास पर फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) के संसद सदस्य श्री राहुल कुमार कंबोज ने भेंट की। इस अवसर पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री और फ्रैंकफर्ट के संसद सदस्य के बीच प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अंतर्गत प्रदेश के युवा जापान में रोजगार के अवसर प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जर्मनी में स्किल्ड लेबर फोर्स की मांग के दृष्टिगत प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के युवाओं को विदेश में रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर फ्रैंकफर्ट सांसद सलाहकार सौरभ भगत, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, अपर सचिव सी रविशंकर, हेल्थ केयर के डायरेक्टर कपिल कुमार उपस्थित थे।

राज्य सरकार ने शुरू की नई पहल, शीतकालीन चारधाम यात्राः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने 2022 में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता के सामने संकल्प रखा कि नई सरकार का गठन होते ही राज्य में समान नागरिक संहिता लाने के लिए कार्यवाही शुरू करेंगे। इसके लिए कमेटी बनाई गई। कमेटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद विधानसभा में विधेयक पारित कर इसे राष्ट्रपति को भेजा। राष्ट्रपति महोदय द्वारा भी इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ा है, इसकी असली श्रेय की हकदार उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकाल में श्री केदारनाथ की ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में, बदरीनाथ की पाण्डुकेश्वर और नर्सिंग मंदिर ज्योर्तिमठ में, यमुनोत्री की खरसाली और गंगोत्री की मुखवा में पूजा अर्चना होती है। राज्य सरकार द्वारा इन स्थलों पर शीतकाल यात्रा शुरू करने के साथ ही इनके आस-पास के पौराणिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत भी प्रथम चरण में 16 मंदिर क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष राज्य में इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया। जिसमें 3.56 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू किये गये। इनकी ग्राउंडिंग भी तेजी से हो रही है। राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाने के लिए 30 से अधिक नीतियां बनाई गई हैं। अनेक नीतियों का सरलीकरण किया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अनुमतियां दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजतोत्सव वर्ष मे प्रवेश कर गया है। राज्य हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो इसके लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में आगामी 25 सालों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं की प्लानिंग पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने में उत्तराखण्ड अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।