ऋषिकुल कॉलेज के उच्चीकरण की डीपीआर तैयार, गुरूकुल पर थोड़ा इंतजार

उत्तराखंड में सौ वर्ष पुराने दो आयुर्वेद कॉलेजों की जल्द ही कायाकल्प होगी। इसमें से एक ऋषिकुल कॉलेज के उच्चीकरण का मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार को भेजने के लिए उत्तराखंड ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। केंद्र सरकार का रुख इस संबंध में बेहद सकारात्मक है। इसी तरह, सौ वर्ष पुराने गुरुकुल आयुर्वेद कॉलेज पर भी सरकार की नजर है। हालांकि अभी इसका विचार बेहद प्राथमिक स्तर पर है।

इन स्थितियों के बीच, वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं एक्सपो-2024 का देहरादून में आयोजन उत्तराखंड के पक्ष में माहौल बनाने वाला साबित हो रहा है। सौ वर्ष पुराने आयुर्वेद कॉलेजों के उच्चीकरण की उत्तराखंड लगातार पैरवी कर रहा है। हालांकि उत्तराखंड ने ऋषिकुल कॉलेज को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र ने उत्तराखंड से इसके स्थान पर उच्चीकरण का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था। उत्तराखंड के आयुष विभाग ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर ली है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग ने उच्चीकरण से संबंधित डिटेल प्रोजेक्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली है। शासन स्तर जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाना है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एके त्रिपाठी के अनुसार-केंद्र के सकारात्मक रुख को देखते हुए पूरी उम्मीद है कि जल्द ही ऋषिकुल कॉलेज का उच्चीकरण हो जाएगा। दूसरी तरफ, केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा का कहना है कि उत्तराखंड के प्रस्ताव पर कार्रवाई गतिमान है और मंत्रालय का रुख सकारात्मक है।

पूरे देश में दर्जन भर है ऐसे कॉलेजों की संख्या

आयुर्वेद के सौ वर्ष पुराने कॉलेज पूरे देश में दर्जन भर हैं। उत्तराखंड इस मामले में भाग्यशाली है कि उसके पास हरिद्वार में ऋषिकुल और गुरुकुल के रूप में दो ऐसे आयुर्वेद कॉलेज हैं, जो सौ वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। इनमें भी ऋषिकुल कॉलेज सबसे ज्यादा पुराना है, जिसकी स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि महामना मदन मोहन मालवीय ने इसकी स्थापना की थी। गुरुकुल कॉलेज की स्थापना वर्ष 1921 में स्वामी श्रद्धानंद ने की थी।

ऋषिकुल में सात मंजिला हॉस्पिटल का प्रस्ताव

उच्चीकरण के लिए जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, उसके ऋषिकुल में सात मंजिला हॉस्पिटल का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डा एके त्रिपाठी के अनुसार-ऋषिकुल कॉलेज में मौजूद पुराने हॉस्पिटल को तोड़कर यह हॉस्पिटल बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। ऋषिकुल कॉलेज के पास 25 एकड़ जमीन उपलब्ध है। वर्तमान में यहां पर 11 विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई जा रही है।

उत्तराखंड में आयुष से जुड़ी हर गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार का भी इस संबंध में राज्य को पूर्ण सहयोग मिल रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि आयुष के संबंध में उत्तराखंड के जो भी प्रस्ताव है, उन पर जल्द ही मुहर लग जाएगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राज्य की प्रगति से केंद्र संतुष्ट, उत्तराखंड से ही सबसे ज्यादा उम्मीद

केंद्र सरकार के बेहद महत्वपूर्ण प्रकृति परीक्षण अभियान में उत्तराखंड के कदम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आयुर्वेद के जरिये हर एक नागरिक के उत्तम स्वास्थ्य के संकल्प वाले इस अभियान में राज्य की प्रगति से केंद्र सरकार संतुष्ट है। आयुर्वेद के मामले में प्रदेश की विशिष्ट स्थिति की वजह से केंद्र सरकार सबसे ज्यादा उम्मीद उत्तराखंड से ही लगाए हुए हैं।

वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 की रोशनी में उत्तराखंड में प्रकृति परीक्षण अभियान के और तेज होने की उम्मीद की जा रही है। दरअसल, केंद्रीय आयुष मंत्रालय इन दिनों पूरे देश में प्रकृति परीक्षण अभियान चला रहा है। इसमें किसी भी व्यक्ति की प्रकृति को आयुर्वेद के नजरिये से परखा जा रहा है। यानी किसी व्यक्ति में वात, पित्त और कफ या आयुर्वेद के त्रिदोष सिद्धांत के आधार पर स्वास्थ्य की क्या स्थिति है, इसका आंकलन किया जा रहा है। यह अभियान 29 अक्टूबर से शुरू हुआ है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में किया। यह अभियान 25 दिसंबर तक चलेगा। इस अभियान के तहत पूरे देश में एक करोड़ लोगों के प्रकृति के परीक्षण का संकल्प प्रकट किया गया है।

वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो में भाग लेने के लिए आए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव के अनुसार-उत्तराखंड देवभूमि है और आयुर्वेद के लिहाज से सबसे समृद्ध है। प्रकृति परीक्षण अभियान के जरिये देवभूमि के लोगों के आरोग्य के लिए कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कुटेचा के अनुसार-प्रकृति परीक्षण अभियान के पूरे देश में अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। उत्तराखंड भी इस अभियान में देश के साथ अच्छे से कदमताल कर रहा है।

उत्तराखंड की आयुर्वेद के मामले में विशिष्ट स्थिति है। इसलिए हमें उत्तराखंड से खास उम्मीद है। अभी तक हमने जो पाया है, उसके अनुसार, उत्तराखंड की प्रगति बहुत अच्छी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आयुष के जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। इस अभियान के शुरू होने से पहले ही उन्होंने लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए कई अच्छे कदम उठाए हैं।
डा आशुतोष गुप्ता, सचिव, देश का प्रकृति परीक्षण अभियान।

मै हमेशा यह कहता हूं कि उत्तराखंड आयुर्वेद की प्रारंभ से ही प्रज्ञा भूमि रही है। आयुर्वेद केवल उपचार की चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे बढ़कर जीवन जीने की विशिष्ट कला है। प्रकृति परीक्षण अभियान और केंद्र की आयुष संबंधी सभी योजनाओं के मार्फत लोगों का उत्तम स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
(पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री)

सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक का राज्यपाल सहित सीएम ने किया विमोचन

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित ‘सिलक्यारा विजय अभियान’ प्रथम वर्षगाँठ एवं 19वाँ राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन-2024 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक एंव अन्य पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान पर बनी लघु फिल्म का अवलोकन भी किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह अभियान राज्य आपदा प्रबंधन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। विश्व के पर्वतीय देशों के लिए यह उदाहरण है कि किस प्रकार से सिलक्यारा टनल में फँसने के बाद किस प्रकार 41 श्रमिकों को बचाव कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। यह धैर्य, लीडरशिप, कॉर्डिनेशन और अपने संकल्प को पूरा करने का बहुत बड़ा उदाहरण है। पूरे विश्व ने देखा है कि किस 17 देशों के एक्सपर्ट्स 41 फँसे हुए श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य जिसमे एक भी श्रमिक को खरोंच तक नहीं आई। उन्होंने कहा कि इस विजय अभियान का डॉक्यूमेंटेशन किया जाना भी एक ऐतिहासिक कार्य है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। राज्यपाल ने कहा कि भारतीयों के अंदर जो क्षमता है, जिसे पूरी दुनिया ने कोविड के दौरान भी देखा था। इसके बाद सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का बचाव कार्य भी इसका एक और उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश को ईश्वर ने बहुत से प्राकृतिक संसाधनों से नवाजा है। अब इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है। उन्होंने कहा कि राजभवन में वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम दिख रहे हैं। उन्होंने आम जन से अपने आस-पास नौले धारों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि हमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना है जल प्रबंधन में ग्राम पंचायतों और नागरिक संगठनों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमसे आग्रह किया है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम लगाकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों में कुछ भी कर गुजरने की एक अद्भुत क्षमता है। हमें अपनी बहनों को आगे बढ़ाने में उनका साथ देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्ष सिलक्यारा के सफल बचाव अभियान ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा था। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से 17 दिनों के अथक प्रयासों से सिलक्यारा टनल में फंसे हुए 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाया गया था। उन्होंने कहा पूरा विश्व और देश के लोग सिल्क्यारा के लिए दुवा कर रहा था। जो अभियान सामूहिक समर्पण और तकनीकी दक्षता की अनुपम मिसाल बना। जिसे अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अध्ययन और शोध का विषय भी माना जा रहा है। उन्होंने सिल्क्यारा के सफल रेस्क्यू के एक वर्ष होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन बीते 19 वर्षों से प्रदेश में विज्ञान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये सम्मेलन शोध पत्रों के प्रस्तुतीकरण, सामाजिक महत्व के शोध, नवाचार और नीतिनिर्धारण जैसे गंभीर विषयों पर चिंतन का मंच भी है। हर वर्ष सम्मेलन में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, पिछले तीन वर्षों में हमने ग्रामीण विज्ञान, भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर नवाचार और शोध को प्रोत्साहित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन में उत्तराखण्ड में जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जैसे प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होगी, जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हुए जनसंख्या को देखते हुए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा हमारा राज्य जल संपदा को संजोए हुए है। उन्होंने कहा इस सम्मेलन में राज्य और देशभर से आए वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन जैसे विषयों पर भी गहन मंथन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत दशकों से नित नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है। कोरोना वैक्सीन से ब्रह्माण्ड के अबूझ रहस्यों तक, हम भारतीय विज्ञान को नए स्तर पर ले जाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं। भारत ने समय समय पर अपनी वैज्ञानिक और बौद्धिक संपदा को सिद्ध करके दिखाया है। भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, आचार्य कणाद, आचार्य नागार्जुन, महर्षि सुश्रुत जैसे अनेक लोग, भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं, जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक विज्ञान स्थापित है। दुनिया को ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा देने का काम भारत ने किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेकों कार्य हुए हैं। आज भारत में गुड गवर्नेंस के लिए विज्ञान और तकनीकी का व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से हम उत्तराखण्ड में भी नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में साइंस और इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, और ैज्म्ड लैब्स के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना में महिलाओं की अहम भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से बालिकाओं को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु विशेष प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार, राज्य की भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि और पर्यावरण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित कर रही है। हमारा प्रयास है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा इस सम्मेलन के सभी सत्रों में मिले सुझावों को प्रदेश सरकार अमल में लाकर प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगी।

इस अवसर पर सचिव नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल, डॉ विनोद एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

बिना प्रोटोकॉल और बिना सुरक्षा के गैरसैण पहुंचे धामी, करेंगे रात्रि प्रवास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव प्रचार के विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंवाद के बाद बिना किसी प्रोटोकॉल व सुरक्षा के अचानक गैरसैंण पहुंच गए।

मुख्यमंत्री के इस अप्रत्याशित आगमन की खबर जैसे ही गैरसैंण के अधिकारियों को मिली, वे हैरान रह गए। यह इसलिए भी खास है क्योंकि राज्य गठन के बाद से अब तक किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम या सूचना के गैरसैंण का दौरा नहीं किया। लेकिन मुख्यमंत्री धामी का बार-बार गैरसैंण आना उनके इस क्षेत्र के प्रति विशेष संवेदनशीलता और लगाव को दर्शाता है। यह उनके नेतृत्व की समर्पित सोच और जमीनी जुड़ाव को रेखांकित करता है।

घोड़ाखाल सैनिक विद्यालय में सिंथेटिक ट्रैक युक्त स्टेडियम और कृत्रिम घास युक्त फुटबॉल मैदान बनाने की सीएम ने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिक विद्यालय घोड़ाखाल के वार्षिक समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सैनिक विद्यालय में प्रशिक्षण और खेल अवस्थापना से जुड़ी हुई 2 घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल में सिंथेटिक ट्रैक युक्त स्टेडियम बनाया जाएगा तथा कृत्रिम घास युक्त फुटबॉल मैदान का निर्माण भी किया जाएगा।

विद्यालय द्वारा 10वीं बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में सर्वाधिक प्रविष्टियां देने का रिकॉर्ड बनाने तथा 10वीं बार रक्षा मंत्री ट्रॉफी जीतने के लिए मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक विद्यालय राष्ट्र और समाज के कर्मठ, लगनशील, अनुशासित और दृढ़ संकल्पित नागरिक तैयार करता है। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात बहुत से लोग आज देश की सेना में तथा अन्य क्षेत्रों में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि वैसे भी वीरों की भूमि है-सैनिकों की भूमि है। हमारी सरकार सैनिकों के समर्पण और जज्बे का हमेशा सम्मान करती है। सैन्य सुधार के अंतर्गत वन रैंक वन पेंशन, सेना का पुनर्गठन, स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना, सेना का आधुनिकीकरण जैसे कार्य उच्च प्राथमिकता से किए हैं। इसी का परिणाम है कि आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों का आयात कम करते हुए बहुत से देशों को रक्षा सामग्री निर्यात भी करता है।

प्रदेश सरकार भी सैनिकों और शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कृत संकल्पित हैं। हमने शहीद परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 5 गुना बढ़ाई है। शहीद के परिजन को सरकारी नौकरी हो या पूर्व सैनिकों की तरह उनको छूट देना। प्रदेश के बलिदानों की स्मृति के लिए सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने सैनिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ग्रुप कैप्टन विजय सिंह और उनके स्टाफ की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कड़े परिश्रम के चलते देश को आगे भी अनुशासित और समर्पित नागरिक मिलते रहेंगे।

सीएम ने किसान मेले का शुभारंभ किया विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पं.गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर पहुँचकर 116वां अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और हरेला उद्यान का वर्चुअल शुभारम्भ भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों से आये प्रगतिशील कृषकों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 116वां किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी की बधाई देते हुए कहा कि भारत में हरित क्रांति के अग्रदूत के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आकर उन्हें हर्ष का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के किसान मेले प्रदेश के किसान भाईयों की उन्नति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इस प्रकार के कृषि मेलों के माध्यम से वैज्ञानिक, किसान एवं उद्यमी एक ही स्थान पर कृषि सम्बन्धी नवीनतम तकनीकों तथा विभिन्न जानकारियों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। किसानों को उन्नत बीज, पौध, कृषि यंत्र और जैविक खाद सहित कृषि से जुड़ी सभी आवश्यक वस्तुएं एक ही स्थान पर मिल जाती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस मेले में उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी जानकारियों से हमारे किसान अवश्य लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह मेला वास्तव में कृषि का एक ऐसा कुंभ है, जो किसानों को आधुनिक तकनीकी का बोध कराकर उन्हें समृद्ध बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के किसानों को कुशल, समृद्ध और आधुनिक सुख-सुविधा युक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। आज एक ओर उपज बढ़ाने के लिए तकनीकी के प्रयोग और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार द्वारा किसानों को सभी प्रमुख फसलों पर बढ़ी हुई एम.एस.पी देकर किसानों की आय में बढ़ोत्तरी सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के प्रति मोदी जी की प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो सबसे पहले उन्होंने किसान भाईयों को किसान सम्मान निधि आवंटित करने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किए। किसान सम्मान निधि की योजना के जरिए आज उत्तराखंड के भी लगभग 8 लाख से अधिक किसानों को आर्थिक संबल मिल रहा है, इतना ही नहीं, मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले दिनों किसान भाईयों का जीवन स्तर बेहतर करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से करीब 14 हज़ार करोड़ रुपये की लागत वाली कुल सात नई योजनाओं को भी मंजूरी दी है। जिन योजनाओं से किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा है तथा किसानों को कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य “फार्म मशीनरी बैंक“ योजना के जरिये कृषि उपकरण खरीदने के लिए 80 फीसदी तक की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद पर कृषकों को प्रति क्विंटल 20 रू. का बोनस दिया जा रहा है, गन्ने के रेट में भी 20 रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए नहर से सिंचाई को बिल्कुल मुफ्त कर दिया गया है। चाय बागान धौलादेवी, मुन्स्यारी और बेतालघाट को जैविक चाय बागान के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए 6 एरोमा वैली विकसित करने पर कार्य किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार के बजट में 200 करोड़ रूपए का प्रावधान विशेष रूप से पॉलीहाउस निर्माण के लिए किया है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से “उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट“ भी स्वीकृत किया गया है। फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी सरकार विभिन्न स्तर पर काम कर रही है, जिसके अंतर्गत सेब और कीवी का उत्पादन व्यापक स्तर पर बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य में एप्पल और कीवी मिशन की शुरुआत की गई है। एप्पल मिशन के अंतर्गत सेब के बागान लगाने वाले किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। कीवी के बगीचे स्थापित करने में भी सरकार हर संभव मदद कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पं.गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय “उन्नत कृषि-समृद्ध किसान“ के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां पर विकसित की गई फसलों, सब्जियों एवं फलों की विभिन्न प्रजातियां और अनेक उन्नत कृषि तकनीकें ना सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के किसानों को फायदा पहुंचा रही हैं। आज आयोजित हो रहा यह किसान मेला निश्चित रूप से किसान भाईयों के उत्थान में अहम योगदान देगा।

पं.गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने सभी अतिथियों व किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश विकास की ओर अग्रसर है तथा प्रदेश की जीडीपी भी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि पूरे देश में दलहन की 28 बीज स्वीकृत हुए हैं जिसमें से 10 बीज पंतनगर विश्वविद्यालय के खाते में आये हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ग्लोबल बनने जा रहा है विगत दो वर्षों में विश्वविद्यालय द्वारा 7 एमओयू अंतरराष्ट्रीय स्तर के हुए हैं तथा विश्वविद्यालय द्वारा 300 कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गए हैं तथा ड्रोन व एआई तकनीक (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर भी विश्वविद्यालय द्वारा कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बद्री गाय का क्लोन भी विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक शिव अरोड़ा, तिलक राज बेहड़, राज्य मंत्री अनिल कपूर डब्बू, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल जिंदल, गुंजन सुखीजा, जिला महामंत्री भाजपा अमित नारंग, प्रदेश मंत्री विकास शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष विवेक सक्सेना, उप महानिदेशक यूएस गौतम, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी उदय राज सिंह, एसएसपी मणिकांत मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट आशिमा गोयल, एसपी सिटी मनोज कत्याल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण व किसान आदि उपस्थित थे।

जनता की समस्याओं को सुन सीएम ने दिए अधिकारियों को निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने निजी आवास नगला तराई में जनता की समस्याओं को सुना व संबंधित अधिकारियों को समाधान करने के निर्देश दिए। इसके उपरांत मुख्यमंत्री मेलाघाट पहुंचकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य कृष्ण पाल ऊर्फ कन्हैया के निधन पर उनके आवास पर जाकर शोक संवेदना व्यक्त की व परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रमेश चंद जोशी, जिलाधिकारी उदय राज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार, अपर जिलाधिकारी पंकज उपध्याय मौजूद थे।

नानकमत्ता साहिब पहुंचकर सीएम ने टेका मत्था

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब पहुंचकर मत्था टेका व प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि के लिए कामना की। इसके उपरांत मुख्यमंत्री डेरा कार सेवा पहुँचे जहाँ उन्होंने दिवंगत बाबा तरसेम सिंह के चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।

इस अवसर पर अध्यक्ष गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जोगिंदर सिंह, निदेशक गुरवंत सिंह, प्रकाश सिंह, गुरदयाल सिंह, उपाध्यक्ष किसान आयोग राजपाल सिंह, दर्जा राज्यमंत्री अनिल कपूर डब्बू, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल जिंदल, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, जिलाधिकारी उदय राज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा सिंह उपस्थित थे।

सीएम धामी के प्रयास निरंतर तत्परता से होते हैं शुरू

हाल के महीनों में, उत्तराखंड ने कई प्राकृतिक आपदाओं को देखा है, जो मुख्य रूप से अनियमित मौसम पैटर्न और क्षेत्र की अनूठी स्थलाकृतिक चुनौतियों के कारण हुई हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में, पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें नागरिकों की भलाई को सबसे आगे रखने वाले सक्रिय दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। सरकारी अधिकारियों के बीच सतर्कता बनाए रखने और आपात स्थितियों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की उनकी प्रतिबद्धता आपदाओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में उनके नेतृत्व को रेखांकित करती है।

मुख्यमंत्री धामी के प्रयास निरंतर तत्परता से शुरू होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को हर समय सतर्क रखने के उपाय किए हैं, खासकर अप्रत्याशित मौसम में। इस दृष्टिकोण की तात्कालिकता तब स्पष्ट हुई जब वे शुक्रवार को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार से लौटते ही अपना ध्यान राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र पर केंद्रित किया, जहां उन्होंने दो दिनों में हुई बारिश से संबंधित घटनाओं पर तुरंत अपडेट मांगा। यह तत्काल प्रतिक्रिया न केवल उनके समर्पण को दर्शाती है, बल्कि उनकी प्रशासनिक टीमों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल भी स्थापित करती है।

इसके अलावा, संभावित आपदा की स्थिति में, धामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेटों से सीधे संवाद करते हैं। यह तरीका सुनिश्चित करता है कि सूचना राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रवाहित हो। अपने निर्देशों में, वे सभी अधिकारियों को 24 घंटे तत्परता के लिए “अलर्ट मोड“ में रखने के महत्व पर जोर देते हैं। यह ऐसे राज्य में महत्वपूर्ण है, जहां अचानक और गंभीर मौसम परिवर्तन होने की संभावना होती है, जिससे सड़कें बंद हो सकती हैं और भूस्खलन हो सकता है। यह सुनिश्चित करके कि अधिकारी तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं, धामी संकट के समय में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

मुख्यमंत्री धामी का व्यावहारिक दृष्टिकोण घटनाओं के बाद आपदा स्थलों पर उनके तत्काल दौरे से स्पष्ट होता है। आपदा के स्थान पर उनकी उपस्थिति न केवल स्थानीय लोगों और आपातकालीन प्रतिक्रियाकर्ताओं दोनों के लिए मनोबल बढ़ाने का काम करती है, बल्कि उन्हें स्थिति का सीधे तौर पर आकलन करने का भी मौका देती है। यह व्यक्तिगत भागीदारी प्रतिबद्धता के स्तर को प्रदर्शित करती है जो नागरिकों के साथ प्रतिध्वनित होती है, जिससे सरकारी उपायों और नीतियों में विश्वास बढ़ता है।

जन जागरूकता की आवश्यकता को पहचानते हुए, धामी ने स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में, संभावित खतरों और सुरक्षा उपायों के बारे में सूचित करने के प्रयासों का निर्देश दिया है। जलभराव और अन्य जोखिमों के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए उनका आह्वान आपदा की तैयारियों में सभी की भागीदारी के महत्व को रेखांकित करता है। जागरूकता बढ़ाकर और सक्रिय उपायों को बढ़ावा देकर, वे आपदा प्रबंधन प्रक्रिया में नागरिकों को प्रभावी रूप से शामिल करते हैं।

अगले दिन ग्राउंड ज़ीरो में पर मौजूद होते हैं मुख्यमंत्री धामी!

6 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री धामी पहुंचे थे जोशीमठ।

जनवरी 2023 शुरुआत में ही जोशीमठ में भू-धंसाव के चलते सैकड़ों परिवारों का जीवन संकट में पड़ गया था। इस आपदा से निपटने के लिए कई प्रयास किए गए। 6 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए जोशीमठ का दौरा किया और अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने का आदेश दिए थे। इससे पहले सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। मुख्यमंत्री धामी ने नरसिंह मंदिर और मारवाड़ी इलाके का भी दौरा किया और प्रभावित परिवारों से मिलकर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने 6 जनवरी 23 तक 100 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। और रेस्क्यू अभियान को और भी तेज किया। जोशीमठ में होटल व अन्य भवन स्वामियों को सरकार की तरफ से उचित मुआवजा दिया गया।

हरिद्वार जल भराव, सीएम ने नाव से लिया जायजा!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 जुलाई 2023 को हरिद्वार का दौरा कर जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण किया और नाव से भी स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने देहरादून स्थित आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को आवश्यकताएँ, जैसे भोजन, पानी और मेडिकल सहायता, जल्द से जल्द पहुंचाई जाएं। मुख्यमंत्री धामी का यह त्वरित प्रतिक्रिया और स्थितियों का स्वयं निरीक्षण करना उनके जनता के प्रति समर्पण और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

सिल्क्यारा-बड़कोट टनल , मुख्यमंत्री ने मातली में किया कैम्प

12 नवंबर 2023 को उत्तराखंड के सिल्क्यारा-बड़कोट निर्माणधीन टनल में भूस्खलन होने की वजह से 41 श्रमिक फँस गए थे, जिनमें कंपनी के दो फ़ोरमैन भी शामिल थे। यह घटना दिवाली के दिन सुबह करीब 5 बजे हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे एक बड़ी प्राथमिकता मानते हुए तुरंत ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवाए। इसके लिए पूरी सरकारी मशीनरी को सक्रिय कर दिया गया और बचाव कार्य में दिक्कत न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने खुद भी स्थल पर विशेषज्ञ टीम और आईटीबीपी मातली उत्तरकाशी में करीब एक सप्ताह का कैम्प किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तत्परता और सक्रियता के कारण सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। यह दर्शाता है कि सरकार की तत्पर और सही समय पर राहत-बचाव कार्य की योजना और क्रियान्वयन की योग्यताएं आपात स्थिति में कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। सभी श्रमिकों को बड़े परिश्रम के 17 दिन बाद 28 नवम्बर 2023 को सुरक्षित निकाल पाने की इस सफलता पर राज्य के नागरिकों में राहत और मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना हुई थी।

खटीमा और चंपावत जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 9 जुलाई 2024 में कुमाऊं मंडल के दौरे के दौरान उधम सिंह नगर के खटीमा और चंपावत जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अतिवृष्टि के कारण हुए बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने अधिकारियों से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। खटीमा क्षेत्र में चकरपुर, अमाऊं, खटीमा बाजार, रेलवे क्रासिंग, आवास विकास और पकड़िया जैसे अनेक क्षेत्र अतिवृष्टि से प्रभावित हुए। सीएम धामी ने इन क्षेत्रों का हवाई और स्थलीय निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। सीएम धामी ने आठ जुलाई को कुमाऊं मंडल के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने और छक्त्थ्, ैक्त्थ् व जल पुलिस की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। अतिवृष्टि और बाढ़ से उत्पन्न समस्याओं से निपटने के लिए सीएम धामी ने प्रशासन की तत्परता और समर्पण की प्रशंसा की और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अधिकतम प्रयास करने का आग्रह किया।

टिहरी के तोली और तिनगढ़ त्रासदी!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 जुलाई 2024 को उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्र घनसाली, टिहरी का दौरा किया। भारी बारिश और भूस्खलन ने इस क्षेत्र में काफी तबाही मचाई थी। तिनगढ़ गांव में शनिवार को हुए भूस्खलन में 15 आवासीय मकान मलबे में दब गए थे, लेकिन प्रशासन की तत्परता से इन घरों को पहले ही खाली करा लिया गया था, जिसके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। प्रभावित ग्रामीणों को विनयखाल के राजकीय इंटर कॉलेज में अस्थायी रूप से ठहराया गया। भिलंगना ब्लॉक के तोली गांव में भूस्खलन की त्रासदी ने एक परिवार को प्रभावित किया, जहां एक मकान के अंदर मां और बेटी की मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य भाग कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। मुख्यमंत्री ने विनयखाल के आपदा शिविर में रह रहे पीड़ितों से मुलाकात की और उनके दुख-दर्द को साझा किया। उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। सीएम के सामने कई पीड़ित भावुक हो गए, खासकर बुजुर्ग महिलाओं के आंसू छलक आए, जो इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान करेगी। आपदा के मद्देनजर प्रशासन और राहत कार्यकर्ता लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। सरकार ने भी आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन और सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके और उनका सामान्य जीवन पुनः स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह दौरा पीड़ितों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ और उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

आपदाग्रस्त क्षेत्र जखन्याली टिहरी का दौरा किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को जनपद टिहरी के आपदाग्रस्त क्षेत्र जखन्याली का 1 अगस्त 2024 को स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आपदाग्रस्त क्षेत्र में यात्रा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने शोकसंवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवारों को धैर्य और साहस प्रदान करने की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार और प्रशासन इस कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय एक दूसरे का सहयोग करने का है और सबको मिलकर इस संकट का सामना करना होगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे राहत कार्यों में तेजी लाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी प्रभावित व्यक्ति सहायता से वंचित न रह जाए। उनकी उपस्थिति ने प्रभावित समुदायों को सांत्वना और उत्साह प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे इस कठिन घड़ी में एकजुट रहें और एक-दूसरे का समर्थन करें।

केदारघाटी में सफल रेस्क्यू अभियान!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारघाटी में सफल रेस्क्यू अभियान के पूरा होने की घोषणा की। केदारनाथ पैदल यात्रा पुनः शुरू होने की उम्मीद है। 6 अगस्त 2024 को रुद्रप्रयाग पहुंचकर, सीएम धामी ने राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित लोगों का हालचाल जाना। रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले चरण के पूरा होने की जानकारी देते हुए सीएम धामी ने कहा कि अब दूसरे चरण में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर केदारनाथ पैदल यात्रा को शुरू कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। चौमासी से भैरव मंदिर तक के पैदल मार्ग को वैकल्पिक रूट के रूप में बनाने का कार्य भी प्रगति पर है। मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि रिकॉर्ड समय में लगभग 15,000 यात्रियों और स्थानीय लोगों को एयरलिफ्ट और पैदल मार्गों से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। अब जहां भी मार्ग क्षतिग्रस्त हैं, उनकी मरम्मत के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

टिहरी के घुत्तु-पंजा-देवलिंग में 22 अगस्त को आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

22 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र में व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद टिहरी जिले के घुत्तु-पंजा-देवलिंग के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का महत्वपूर्ण दौरा किया। यह दौरा पिछले दिन हुई विनाशकारी घटनाओं के जवाब में था, जब 21 अगस्त को इस क्षेत्र में एक आपदा आई थी। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने चल रहे राहत और बचाव कार्यों की तात्कालिकता और महत्व को रेखांकित किया, जो प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण थे। अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री धामी ने मलेठी में प्रभावित परिवार विशाल मणि की पत्नी दुर्गा देवी से मुलाकात की। यह बातचीत महज औपचारिक नहीं थी; इसने आपदा से होने वाले मानवीय नुकसान के प्रति करुणामय समझ को प्रदर्शित किया।

पैदल मार्ग घोड़े- खच्चरों के लिए 26 दिनों के भीतर ही खुल गए हैं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की निगरानी में चले रेस्क्यू अभियान में हजारों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से पैदल मार्ग को तेजी के साथ दुरुस्त करने की चुनौती थी। इस चुनौती को भी जिला प्रशासन ने पार पा लिया जिसके बाद मार्ग को घोड़ा खच्चर संचालन के लिए भी दुरुस्त कर लिया गया है।
26 अगस्त को श्री केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर 31 जुलाई को अतिवृष्टि के चलते बंद हुए पैदल मार्ग घोड़े- खच्चरों के लिए 26 दिनों के भीतर ही खुल गए हैं। यात्रा मार्ग पर घोड़े- खच्चरों की आवाजाही के साथ ही घोड़े- खच्चरों से राशन एवं अन्य अनिवार्य सामग्री की आपूर्ति भी शुरू हो गई है।

सीएम ने मिले प्रसून जोशी और अभिनेता अनुपम खेर, फिल्म नीति पर हुई वार्ता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी तथा फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने भेट की। उन्होने प्रदेश में फिल्म निर्माण एवं फिल्मांकन से सम्बधित विभिन्न विषयों तथा प्रदेश में फिल्म निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है विभिन्न सुविधाओं पर चर्चा की। उन्होने राज्य की नई फिल्म नीति 2024 को फिल्मों को बढावा देने वाला प्रयास बताते हुए राज्य की फ़िल्म नीति के लिए मुख्यमंत्री पुष्क़र सिंह धामी का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नई फिल्म नीति से उत्तराखण्ड में फ़िल्मांकन के लिए और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में 2024 की फिल्म नीति को मंजूरी दिये जाने के बाद राज्य के पर्यटन स्थलों को देश दुनिया में नई पहचान मिलेगी। नई फिल्म नीति के तहत स्थानीय फिल्मों के लिए दो करोड रुपए का अनुदान दिया जा रहा है। फिल्मांकन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया गया है ताकि फिल्म निर्माताओं को सुविधा हो। फिल्मों और ओटीटी की शूटिंग पर भी सब्सिडी दी जा रही है। सरकार द्वारा फिल्म उद्योग को उत्साहित करने के लिए कई अन्य योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के बल पर फिल्म जगत में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सके इसके भी प्रयास किए जा रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार फ़िल्म निर्माण से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। फ़िल्म निर्माण से राज्य में प्रत्यक्ष रोज़गार की नयी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा साथ ही राज्य के पर्यटन को नयी मज़बूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि नए शूटिंग डेस्टिनशनों को भी पर्यटन विभाग के सहयोग से चिन्हित कर उनको भी शूटिंग के लिए प्रचारित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड के अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों का भी प्रचार हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2024 से अभी तक उत्तराखण्ड फ़िल्म विकास परिषद के ऑनलाइन अनुमति सिंगल विंडो सिस्टम के द्वारा मात्र 8 महीनों में 150 से भी अधिक शूटिंग अनुमतियों प्रदान की गई है। उन्होने कहा की राज्य के संरक्षित वन क्षेत्र को छोड़कर उत्तराखण्ड सरकार के अधीन आने वाले विभाग फ़िल्म शूटिंग के लिए कोई शुल्क नहीं लेंगे ऐसा फ़िल्म पालिसी में प्रावधान किया गया है। फ़िल्म पालिसी में उत्तराखंड के अनछुए शूटिंग डेस्टिनेशन को बढ़ावा देने का भी प्रावधान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड फ़िल्म नीति 2024 में प्रादेशिक भाषा की फ़िल्मों के लिए फ़िल्म प्रोडक्शन पर प्रदेश में किए गये हुए व्यय का 50 प्रतिशत तक सब्सिडी या अधिकतम 2 करोड़ तक, और हिन्दी और भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में आने वाली भाषाओं के लिये फ़िल्म प्रोडक्शन पर प्रदेश में किए गये हुए व्यय का 30 प्रतिशत या अधिकतम 3 करोड़ तक के अनुदान प्राविधान किया गया है।

अभिनेता अनुपम खेर ने उत्तराखण्ड फ़िल्म विकास परिषद द्वारा सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सरल शूटिंग अनुमति की प्रक्रिया को सराहते हुए, शूटिंग के लिए प्रदेश को संपूर्ण रूप से फ़िल्मकारों के लिए एक फ़िल्म फ्रेंडली डेस्टिनशन बताया। उन्होंने यहाँ फ़िल्म शूटिंग करना बाक़ी प्रदेशों की तुलना में बहुत ही सरल बताया, और स्थानीय लोगो द्वारा की गई सहायता को भी सराहा। उन्होंने नई फिल्म नीति को फ़िल्म निर्माताओं के अनुकूल बताया। फिल्म अभिनेता श्री खेर ने कहा कि उत्तराखण्ड में पिछले कुछ समय से फ़िल्म और वेब सीरीज शूटिंग में तेज़ी आयी है। अभी हाल ही “अनुपम खेर स्टूडियो” की फ़िल्म “तन्वी द ग्रेट” की शूटिंग भी उनके द्वारा लैंसडौन में कि गई जो 36 दिनों में पूर्ण की गई।

इस अवसर उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के सीईओ एवं महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी भी उपस्थित थे।