ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित करें, जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म के संबंध में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म की सम्भावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित किए जाएं जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें।

मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी 15 जनवरी तक फाइनल करते हुए शासन को प्रस्तुत किए जाने की बात कही। कहा कि पॉलिसी तैयार किए जाने से पूर्व प्राईवेट स्टैक होल्डर्स से भी संवाद कर लिया जाए, ताकि पॉलिसी बनने के बाद आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोले जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी एसओपी भी जारी किए जाने की बात भी कही है।

मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को समय से कार्य पूर्ण करने हेतु सभी कार्यों की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो सके इसके लिए कार्यदायी संस्था को लक्ष्य दिए जाएं। मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने की बात कही। कहा कि इनको और ससमय पूर्ण किए जाने के लिए संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को टास्क प्रदान किए जाएं कि वे किस प्रकार से अपने क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने 10 चिन्हित साइट्स का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इसके लिए इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड को मजबूत करने, मैन पावर बढ़ाने एवं बजट में प्रावधान किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए, ताकि यूटीडीबी की भांति ईटीडीबी को भी ग्रांट दी जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन हेतु शीघ्र ही एमओयू भी किया जाए।

मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन को एक ही जगह एंकर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से भी इसके लिए सुझाव लिए जाएं।

इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ ईको टूरिज्म पी.के. पात्रो एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कृषि, उद्यान और वन विभाग आपसी सामंजस्य से जड़ी बूटी के उत्पादन और मार्केटिंग पर कार्ययोजना तैयार करें: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वन विभाग की ”गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म परियोजना“ के अन्तर्गत राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने वन विभाग को शीघ्र इस हेतु पीएमसी गठित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जड़ी-बूटी उत्तराखण्ड की यूएसपी है। उन्होंने जड़ी-बूटी को प्रदेश की आर्थिकी से जोड़े जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि, उद्यान और वन विभाग आपसी सामंजस्य से जड़ी बूटी के उत्पादन और मार्केटिंग आदि पर कार्ययोजना तैयार करें। साथ ही कहा कि अभी बजट बन रहा है, यदि बजट में इसके प्रावधान की आवश्यकता पड़ेगी तो वो भी किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने हर्बल नर्सरियों को हर्बल एवं एरोमा पार्क के रूप में विकसित करते हुए इसे पर्यटन गतिविधियों से भी जोड़े जाने की बात कही। उन्होंने देवबंद, खिर्सू, जागेश्वर, सेलाकुईं, मुन्स्यारी आदि स्थानों में नर्सरियों को विस्तारित कर हर्बल-एरोमा पार्क के रूप में विकसित करने हेतु तत्काल कार्यवाही शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए शीघ्र ही एक नर्सरी प्लान तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने जड़ी बूटियों के विकास के लिए एक कोर ग्रुप तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस कोर ग्रुप में कृषि, उद्यान, हर्बल विकास एवं अनुसंधान संस्थान, सगन्ध पौधा केन्द्र सहित वन एवं वन निगम को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि ये सभी जड़ी बूटी के क्षेत्र में अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। अब इन्हें आपसी सामंजस्य से कार्य करने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म परियोजना के तहत् 10 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए शीघ्र ही प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जाए। उन्होंने सगन्ध पौधा केन्द्र को प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेन्सी के रूप में विकसित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि योजना को सफल बनाए जाने के लिए जिला स्तरीय अनुश्रवण समितियों का गठन कर नियमित रूप से अनुश्रवण बैठकें आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि जड़ी बूटी उत्पादन के साथ ही मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विभागों को आयुर्वेदिक फार्मा कम्पनियों और मांगकर्ताओं से उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप् उत्पादन पर फोकस किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, पीसीसीएफ (हॉफ) रंजन कुमार मिश्र, पीसीसीएफ (वन पंचायत) वी.पी. गुप्ताअपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे एवं हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रत्येक जनपद में वन्य जीवों के खोले जाएंगे रेस्क्यू व रिहैबीलीटेशन सेण्टर: धामी

राज्य में मानव वन्य जीव संघर्ष के मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस चुनौती से निपटने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की घोषणा की है। जिसके तहत सोलर फेंसिग एवं सेंसर बेस्ड अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाएगा। साथ ही आधुनिक वन्यजीव बंध्याकरण (नसबन्दी) केन्द्र एवं जिलों में रिहैबीलीटेशन सेण्टर खोले जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य में मानव जीवन संघर्ष के कई मामले सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखण्ड राज्य के उन क्षेत्रों में जहाँ वन्य जीव जैसे हाथी, नीलगाय, भालू, गुलदार एवं बंदर आदि के द्वारा कृषि एवं उद्यान फसलों, भौतिक अवस्थापनाओं, मानव जीवन आदि की क्षति की जाती है, वहाँ चरणवार एवं योजनाबद्ध रूप में सोलर फेंसिग एवं सेंसर बेस्ड अलर्ट सिस्टम से सुरक्षा तंत्र विकसित कर मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव लंगूर, बन्दर, सुअर, भालू आदि के जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रत्येक जनपद में वन विभाग के अंतर्गत आधुनिक वन्यजीव बंध्याकरण (नसबन्दी) केन्द्र की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश के समस्त जनपदों में मानव, वन्य जीव संघर्ष में चिन्हित वन्य जीवों के रेस्क्यू व रिहैबीलीटेशन सेण्टर खोले जायेंगे। इस हेतु पर्वतीय वन क्षेत्र में न्यूनतम 10 नाली व मैदानी वन क्षेत्र में न्यूनतम 1 एकड़ भूमि आरक्षित की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपरोक्त सभी कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए इन्हें शीर्ष प्राथमिकता से किया जाएगा एवं 2 सप्ताह की अवधि में उक्त योजनाओं को क्रियान्वित करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने कहा इसके लिए वन विभाग को जाल, पिंजरा, ट्रेकुलाईजेशन गन आदि संसाधन की उपलब्धता के लिए ₹ 5 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी रोकथाम हेतु केन्द्रीय वन्य जीव अधिनियम के सुसंगत प्राविधानों में हिंसक जीवों को निषिद्ध करने हेतु अधिकारों के विकेन्द्रीकरण कर वन विभाग के रेंजर स्तर के अधिकारियों को सशक्त बनाया जाएगा। इस हेतु नियमों में आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से भी गतदिवस वार्ता हुई है।

सीएम ने वनाग्नि पर लापरवाही बरतने पर वन विभाग के 10 कार्मिकों को निलंबित किया

सीएम धामी ने सचिवालय में वनाग्नि, पेयजल, मानसून सीजन के साथ ही चार धाम की तैयारियों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वनाग्नि को रोकने के लिए की जा रही कार्यवाही और आगामी मानसून सीजन के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा की। वनाग्नि को रोकने और जन जागरूकता के लिए मुख्यमंत्री फायर लाईन बनाने की कार्यवाही में प्रतिभाग करेंगे। उन्होंने कहा कि इसमें जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये वनाग्नि पर पूर्णतः रोकने के लिए सभी सचिव को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी जाय। सभी सचिव संबंधित जनपदों में जाकर वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करें और वनाग्नि को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठायें।

वनों से पिरूल एकत्रीकरण के लिए प्रभावी योजना बनाई जाय
मुख्यमंत्री के निर्देश पर वनाग्नि को रोकने में लापरवाही बरतने वाले वन विभाग के 10 कार्मिकों को निलंबित किया गया है। अन्य कुछ कार्मिकों पर भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि वनाग्नि पर प्रभावी रोकथाम के लिए जन सहयोग लिया जाए। जंगलों में आग लगाने की घटनाओं में जो भी लिप्त पाये जा रहे हैं, उन पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाय। वनाग्नि को रोकने के लिए रिस्पांस टाईम कम से कम किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों से पिरूल एकत्रीकरण के लिए प्रभावी योजना बनाई जाय। पिरूल संग्रहण केन्द्र बनाए जाएं। इसमें सहकारिता विभाग का भी सहयोग लिया जाए। पिरूल एकत्रीकरण के लिए दी जाने वाली धनराशि को बढाई जाय।

मानसून से पूर्व सभी तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाए
आगामी मानसून सीजन की तैयारियों के संबंध में बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मानसून से पहले नालियों की सफाई, ड्रेजिंग और चौनलाईजेशन की कार्यवाही पूर्ण की जाय। नदी किनारे सुरक्षा दीवारों के निर्माण और मरम्मत के कार्य समय पर पूर्ण किये जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि सभी पुराने ब्रिजों का सेफ्टी ऑडिट किया जाए। वर्षाकाल के दृष्टिगत संवेदनशील क्षेत्रों में वैली ब्रिज की पूर्ण व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी डैम की गहराई और क्षेत्रफल की वर्तमान स्थिति जानने के लिए संबंधित विभागों की एक कोर्डिनेशन कमेटी बनाई जाए। यह भी आंकलन किया जाए कि डैम के बनने से वर्तमान समय तक डैम की गहराई और क्षेत्रफल की स्थिति क्या है।

प्रो एक्टिव एप्रोच से काम करें अधिकारी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले डेंगू, मलेरिया और अन्य जल जनित रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता के साथ ही पूरी तैयारी की जाए। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाय। आपदा के दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग की रैपिड एक्शन टीम तैयार रखी जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रो-एक्टिव एप्रोच के साथ कार्य करें। पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। स्वच्छ पेयजल के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाएं रखी जाय। जहां पेयजल की समस्या है वहाँ टैंकर और खच्चर से पीने के पानी की आपूर्ति की जाये । इसके लिए सभी कार्यदायी संस्थाएं समन्वय के साथ कार्य करें।

चारधाम यात्रियों को मौसम अलर्ट की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि राज्य में चारधाम यात्रा के दृष्टिगत भी सभी व्यवस्थाएं सुचारू रखी जाए। यह सुनिश्चित किया जाय कि मौसम की जानकारी से संबंधित अलर्ट एसएमएस के माध्यम से लोगों को मिले। चारधाम और मौसम से संबंधित अन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए सूचना तंत्र को मजबूत बनाया जाए। श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत सभी विभाग अपने स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीकि का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दृष्टिगत संवदनशील स्थलों और चारधाम यात्रा मार्गों पर जेसीबी की पर्याप्त व्यवस्था की जाय।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, अरविंद सिंह ह्यांकी, रंजीत सिन्हा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, एडीजी ए.पी अंशुमान, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

गुलदार से हो रही घटनाएं रोकने को प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर गम्भीर चिंता प्रकट की है। उन्होंने गुलदार और बाघों के हमले की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए वन सचिव एवं वन्यजीव प्रतिपालक को प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाए और प्रशिक्षित वनकर्मियों की क्विक रिस्पांस टीम गठित कर उसे तत्काल मौके पर भेजा जाए। जंगली जानवरों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए गांव और जंगल की सीमा पर सोलर फेंसिंग (तार बाड़) लगाई जाए।
सीएम धामी ने कहा कि लंबे समय से यह देखने में आ रहा है कि राज्य के अलग अलग हिस्सों में वन्य जीवों के हमलों को रोकने में वन विभाग बेबस हो रहा है। इसे दृष्टिगत रखते हुए इन घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालीन योजना बनाई जाए। प्रशिक्षित पशु चिकित्सक मानव वन्यजीव संघर्ष की दृष्टि से इलाक़ों में चौबीस घंटे तैनात रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर गुलदार और बाघों से भरे पड़े हैं। अब वहां अन्य पकड़े गए वन्य जीवों को रखने की जगह नहीं है, लिहाजा इसके लिए भी तुरंत कार्ययोजना बनाई जाए।
यहां बता दें कि सीएम धामी ने बीते माह आला अफसरों की आपात बैठक लेकर वन्य जीव प्रतिपालक को निर्देश दिए थे कि राज्य के रेस्क्यू सेंटर के गुलदार और बाघों को दूसरे राज्यों के चिड़ियाघर/ वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट करने के लिए वहां के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि यह समस्या हल हो सके। इस दिशा में अभी तक कोई अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने आज शुक्रवार को पुनः इस सम्बंध में तत्काल कार्रवाई के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वन्यजीव संघर्ष की घटना की स्थिति में स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। इस मामले में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जंगलों से सटे गांवों में शत प्रतिशत शौचालय और गैस कनेक्शन दिए जाने की योजना बनाई जाए ताकि लोग जंगलों का रुख न करें।

मुख्य सचिव ने वन व पशुपालन विभाग के अधिकारियों संग की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने सचिवालय में वन एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि बन्दरों और जंगली सुअरों के द्वारा प्रदेश में खेती को अत्यधिक नुकसान हो रहा है। इसके लिए बन्दरों की संख्या को सीमित करने हेतु बन्दरों का बन्ध्याकरण किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बन्दरों के बन्ध्याकरण के लिए बन्दर बन्ध्याकरण केंद्रों की संख्या बढ़ायी जाए। इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा पशुचिकित्सकों एवं अन्य सहायक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने फसलों को जंगली सुअरों से होने वाले नुकसान की रोकथाम के लिए भी योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि होगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव ने पिरूल से ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाले पैलेट्स तैयार करने और ईको पार्क योजना की प्रगति की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की निरन्तर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, वन विभाग प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक एवं सचिव पशुपालन डॉ. बीवीआरसी पुरूषोत्तम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कैंपा के तहत शोध कार्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ.एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड कैंपा की संचालन समिति की 7वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को उत्तराखण्ड कैंपा के अन्तर्गत शोध कार्यों पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा प्रदेश से सम्बन्धित विषयों और मुद्दों पर शोध किए जाने की आवश्यकता है जिससे प्रदेश और प्रदेशवासियों को लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के लिए वनाग्नि एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि को किस प्रकार से काबू किया जा सकता है, इस पर शोध किया जाए। इसी प्रकार फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए शोध किए जा सकते हैं। जंगली सूअर, हाथी और बंदरों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किस प्रकार से बायो फेंसिंग कारगर साबित हो सकती है, इन विषयों पर शोध हमारी उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बायो फेंसिंग सेल गठित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारी को इसका दायित्व दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कार्यक्रम संचालन की वार्षिक योजना (एपीओ) को दिसंबर माह तक केंद्र सरकार को भिजवा दिए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए। समस्त कार्यों को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पूर्ण कर लिया जाए।
बैठक के दौरान बताया गया कि कार्यक्रम संचालन की वार्षिक योजना (एपीओ) के लिए 411.88 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। बैठक में उत्तराखण्ड कैंपा की संचालन समिति द्वारा संस्तुति प्रदान की गयी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पीसीसीएफ (हॉफ) अनूप मलिक, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

वनाग्नि रोकने को आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि की रोकथाम के संबंध में समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि वनाग्नि को रोकने के लिए वनाग्नि से प्रभावित जनपदों में शीघ्र वन विभाग के उच्चाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया जाय। जनपदों में डीएफओ द्वारा लगातार क्षेत्रों का भ्रमण किया जाए।
वन विभाग, राजस्व, पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ ही जन सहयोग लिया जाए। महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूहों एवं आपदा मित्रों से भी वनाग्नि को रोकने में सहयोग लिया जाय। वनाग्नि को रोकने के लिए आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए। रिस्पांस टाइम कम से कम किया जाए। चारधाम यात्रा के दौरान वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए शीतलाखेत (अल्मोड़ा) मॉडल को अपनाया जाय। शीतलाखेत के लोगों ने जंगलों और वन संपदा को आग से बचाने के शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे पूरे फायर सीजन में वे अपने खेतों में कूड़ा और कृषि अवशेष नहीं जलायेंगे। इस क्षेत्र में ग्रामीणों महिला मंगल दल और युवक मंगल दल ने ओण दिवस के रूप में जंगल बचाओ, पर्यावरण बचाओ की शपथ ली। वनाग्नि को रोकने के लिए दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक दोनों योजनाएं बनाई जाए। दीर्घकालिक योजनाओं के लिए अनुसंधान से जुड़े संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों से समन्वय स्थापित कर योजना बनाई जाए। इकोनॉमी और ईकॉलॉजी का समन्वय स्थापित करते हुए कार्य किये जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए एक नई कार्य संस्कृति एवं कार्य व्यवहार से सभी को कार्य करना होगा। वन सम्पदाओं के संरक्षण के साथ ही वन सम्पदाओं से लोगों की आजीविका को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पिरूल के एकत्रीकरण एवं उससे लोगों की आजीविका कैसे बढ़ाई जा सकती है, इसके लिए ठोस नीति बनाई जाए। राज्य में वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया जाए कि इसका संदेश देश-दुनिया तक जाए। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयासों की जरूरत है। वनाग्नि को रोकने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता के लिए स्कूलों में करिकुलर एक्टिविटी करवाई जाए।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारी जन सहभागिता पर विशेष ध्यान दें। वन सम्पदाओं से लोगों की आर्थिकी को जोड़ने के लिए सुनियोजित रणनीति बनाई जाए। वन पंचायतों में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार एवं सभी जनपदों से जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं डीएफओ उपस्थित थे।

वनाग्नि रोकने के लिये किए जाएं समेकित प्रयासः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड कैम्पा की बैठक आयोजित हुयी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि वनों के विकास के लिए वनाग्नि रोकने के लिये प्रभावी प्रयास किये जायें। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाय।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि वन प्रहरियों की व्यवस्था, स्वयं सेवी संस्थाओं, वन पंचायतों तथा इको डेवलपमेंट कमेटी के माध्यम से की जाय। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि वन रक्षक चैकियों, रेस्क्यू सेन्टरों के निर्माण तथा अन्य अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण कार्यों में आरईएस तथा आरडब्लूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया जाय ताकि निर्माण कार्यों में तेजी लायी जा सके। उन्होंने हाथियों के आवागमन के रास्तों पर विद्युत तारों को अण्डर ग्राउण्ड करने अथवा उनकी ऊंचाई बढ़ाये जाने पर बल दिया ताकि बिजली के तारों से होने वाली दुर्घटनाओं से उनका बचाव हो सके।

उन्होंने कहा कि कैम्पा के तह सृजित कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार सृजन के क्षेत्र में प्रभावी पहल की जाय। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने हेतु जल संरक्षण, पौधारोपण, नर्सरी विकास एवं वन सम्पत्ति की सुरक्षा के क्षेत्र में रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भेला, ढेला, सुसवा, पिलखर, नन्धौर तथा कल्याणी नदियों में अग्रिम मृदा कार्य के तहत जल संरक्षण एवं जल संवर्द्धन से सम्बन्धित कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाय। मुख्यमंत्री ने बुग्यालों के संवर्द्धन के लिए कॉयर नेट और पिरूल चेकडैम के साथ ही भीमल के इस्तेमाल पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वन्य पशुओं से सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग बहुत ही कारगर है परन्तु सोलर फेंसिंग की सुरक्षा के लिए लोगों को भी जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वन विभाग द्वारा वनों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कैम्पा के तहत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने के लिये भी उन्होंने निर्देश दिये।

कैम्पा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे.एस.सुहाग ने बताया कि कैम्पा के तहत इस वर्ष की कार्य योजना में 225 करोड़ की धनराशि उपलब्ध करायी गई है। जबकि अगले वर्ष के लिये कैम्पा के तहत 675 करोड़ प्राविधानित है।

इस अवसर पर पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एवं सलाहकार मुख्यमंत्री एस.एस.नेगी, प्रमुख सचिव वन आनन्द वर्धन, प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी एवं वन विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

बाघ बाड़े का निरीक्षण कर स्पीकर ने जानी वनाधिकारियों से बाघों को लाने की प्रक्रिया

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने राजाजी नेशनल पार्क मोतीचूर रेंज में बन रहे बाघ बाड़े का निरीक्षण किया। उन्होंने वन अधिकारियों से बाघ बाडे की प्रगति के बारे में जानकारी ली।

अवगत करा दें कि राजाजी नेशनल पार्क का 550 वर्ग किमी का मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र वीरान सा है। वहां पिछले सात साल से सिर्फ दो बाघिनें ही हैं। दरअसल, पार्क से गुजर रहे हाइवे और रेल लाइन के कारण बाघों की आवाजाही एक से दूसरे क्षेत्र में नहीं हो पाती। यही वजह है कि गंगा के दूसरी तरफ के चीला, गौहरी और रवासन से बाघ मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में नहीं आ पाते।इस सबको देखते हुए कॉर्बेट या दूसरे क्षेत्रों से मोतीचूर- धौलखंड क्षेत्र में बाघ शिफ्ट करने की योजना बनी। जिसके मद्देनजर मोतीचूर रेज में बाघ बाड़ा बनाया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा निरीक्षण के दौरान पूछने पर रेंजर महेंद्र गिरी ने बताया कि बाघ शिफ्टिंग के मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बाघों को यहां लाकर मोतीचूर में बनाए गए बाड़े में रखा जाएगा। वहां इनके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी और फिर इन्हें मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। रेडियो कॉलर से इन पर निरंतर नजर रखी जाएगी। बताया कि बाघ बाड़े की हाथियों से सुरक्षा के दृष्टिगत इसके चारों तरफ सोलर पावर फेंसिंग भी की जा रही है।रेंजर ने बताया कि बाड़े में पाँच बाघों को लाने की योजना बनायी गई है जिन्हें चरणबद्ध तरीके से बाड़े में लाया जाएगा।

स्पीकर ने जंगल सफारी का लुप्त भी उठाया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने वन अधिकारियों से राजाजी नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों एवं पर्यटक की संख्या के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर मोतीचूर रेंज के रेंजर महेंद्र गिरी, वन दरोगा देवी प्रसाद, वन दरोगा उदय सिंह, वन दरोगा नरेंद्र सिंह, वन आरक्षी नवीन ध्यानी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।