प्रातः काल भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री, गांव वासियों से की बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पौड़ी स्थित रावत गांव के होम स्टे में रात्रि विश्राम करने के बाद सोमवार सुबह रावत गाँव (चन्दोला राँई) का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम वासियों से मुलाकात कर उनका हाल चाल जाना एवं गांव के विकास से संबंधित लोगों की राय ली। गांव में मौजूद पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभवों को मुख्यमंत्री से साझा किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गांव में ही हमारे राज्य की आत्मा बसी है। ग्राम सभाओं के विकास से ही देश का विकास संभव है। हमारे गांव पुरातन संस्कृति के धरोहर हैं, इन्हें जीवित रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने गांव में पौधारोपण भी किया। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर योग एवं ध्यान भी किया।

मुख्यमंत्री अन्त्योदय निःशुल्क गैस रिफिल योजना का पौड़ी से शुंभारभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा रविवार को पौड़ी गढ़वाल के कण्डोलिया मैदान से मुख्यमंत्री अन्त्योदय निःशुल्क गैस रिफिल योजना का शुंभारभ किया गया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और डॉ० धन सिंह रावत की उपस्थिति में 23 महिलाओं को गैस रिफिल का लाभ देकर योजना की शुरूआत की गयी। इस योजना के तहत अन्त्योदय परिवारों को 01 वर्ष में 03 निःशुल्क गैस रिफिल का लाभ दिया जायेगा तथा पूरे प्रदेश में लगभग 1 लाख 76 हजार अन्त्योदय कार्ड धारकों को इसका लाभ मिलेगा। इस योजना के शुभांरभ के अवसर पर प्रदेश भर से मंत्रीगण और विधायकगण भी ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा जनपद के विकास कार्यों से संबंधित कुल 94 करोड़ 28 लाख रूपये के विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण किया गया जिसमें 53 करोड 65 लाख रूपये की धनराशि के 9 विकास कार्यो का शिलान्यास और 40 करोड 63 लाख रूपये की धनराशि के विकास कार्यो का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा जिन विकास कार्यो का शिलान्यास किया गया उनमें सिचाई खण्ड दुगड्डा के यमकेश्वर और कोटद्वार क्षेत्र से संबंधित कुल 05 कार्यों, निर्माण खण्ड लोनिवि श्रीनगर के श्रीनगर के अंतर्गत 02 मोटर मार्ग निर्माण कार्यों तथा उत्तराखंड पेयजल निगम पौड़ी से संबंधित 02 योजना शामिल है। इसी प्रकार जिन विकास कार्यो का लोकार्पण किया गया उनमें 04 विकास कार्यो में लोनिवि पौड़ी के लैंसडोन और पौड़ी में सुरक्षा सुधारीकरण व सुरक्षा कार्य तथा उत्तराखण्ड पेयजल निगम पौड़ी के पौड़ी व कोटद्वार क्षेत्र में पेयजल योजना और बाढ सुरक्षा से संबंधित कार्य शामिल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि इस योजना से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन धुआं रहित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए बल मिलेगा और महिलाओं का जीवन अधिक स्वस्थ्य और आसान हो जायेगा। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का उत्थान और सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता में है और इसी को ध्यान में रखते हुए हमनें राजकीय सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण, गौरा शक्ति एप्प पंजीकरण, तीलू रौतेली सम्मान, लखपति दीदी योजना, नंदा-गौरा देवी योजना आदि योजनाओं का क्रियान्वयन किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य 2025 तक उत्तराखण्ड को अग्रणी राज्यों की पक्ति में लाना है। इसके लिए हम अवसंरचना निर्माण और कनेक्टिविटी पर अधिक फोकस कर रहे है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से भारत के साथ-साथ उत्तराखण्ड भी विकास की नई उंचाईयां हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें युवाओं के हितों की भी चिंता है इसी कारण हमनें प्रदेश में ऐसा मजबूत और सख्त नकल विरोधी कानून बनाया है जिससे अब कोई भी असामाजिक तत्व भर्ती परीक्षाओं में नकल करने की जहमत नही उठायेगा। हमनें इस कानून में नकल कराने वाले गिरोह की संपति जब्त करने, जेल भेजने से लेकर उन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नकल करने वाले अभ्यर्थी को भी 10 वर्ष तक किसी भी भर्ती के लिए अयोग्य घोषित किया जायेगा। भर्ती घपलों में जितने भी अपराधी होंगे उनको बिल्कुल भी नही बक्शा नही जायेगा।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान पौड़ी बस अड्डा के निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने हेतु धनराशि स्वीकृत करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कई घोषणाएं भी कि जिनमें पौड़ी में बहुमंजिला पार्किग का निर्माण कार्य, ऐतिहासिक नगर पौड़ी के मुख्य बाजार का सौन्दर्यीकरण कर उसे धारा रोड से एजेंसी चैक तक हैरीटेज रोड के रूप में विकसित करने, यमकेश्वर विधानसभा के विकासखण्ड दुगड्डा ग्राम सकाली के समीप खोह नदी पर 42 मीटर सेतु का निर्माण कार्य, विकासखण्ड यमकेश्वर क्षेत्र में नीलकंठ क्षेत्र के अंतर्गत कांवड को मेला क्षेत्र घोषित करने, श्रीनगर में सीवर लाइन के कार्यो को पूर्ण करने, थलीसैंण में उपजिला चिकित्सालय बनाने, धारी देवी श्रीनगर में पार्किग निर्माण और त्रिपालीसैंण में पार्किग का निर्माण कार्य किया जायेगा। उन्होंने कहा कि खाद्य विभाग में पहले से ही गेहूं चावल दिया जाता रहा है। चीनी व नमक को भी सस्ती दरों पर जल्दी ही प्रारभ करने की बात कही। साथ ही तेल एवं मसालों को सस्ती दरों पर देने की कार्य योजना बनाने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन के अंर्तगत जनपद में कुल 2100 लक्ष्य के सापेक्ष 2136 ऋण स्वीकृत करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान पाने तथा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जनपद में लक्ष्य 500 के सापेक्ष 636 ऋण स्वीकृत करके राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी।
इस अवसर पर खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रेखा आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार द्वारा जन धन योजना, निशुल्क राशन, गैस, स्वच्छता, आवास, आदि सुविधाऐं जनता को प्रदान की है। हमारा उद्देश्य स्वच्छ ईधन बेहतर जीवन देने का है जिसमें सरकार लगातार प्रयासरत है। कहा कि हमने महिलाओं की पीड़ा को समझकर उनके कल्याण से जुडी हुई अनेक योजनायें क्रियान्वयन कर रहे है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अन्त्योदय निशुल्क गैस रिफिल योजना से उत्तराखड की महिलाओं के जीवन में कल्याणकारी परिवर्तन आयेगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी, लैंसडोंन महंत दिलीप रावत व यमकेश्वर रेणु बिष्ट, सचिव खाद्य एवं आपूर्ति मामले बृजेश कुमार संत, जिलाधिकारी पौडी डॉ० आशीष चैहान, एसएसपी श्वेता चैबे सहित संबंधित अधिकारी, कर्मचारी व जनमानस उपस्थित रहे।

अलकनंदा में नहा रहे थे चार बच्चे, दो सगे भाई बहे

नदी किनारों पर बच्चों की जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। रविवार को देवप्रयाग में अलकनंदा नदी में नहाने गए बच्चों के साथ भी ऐसा ही हादसा घटित हो गया। यहां पैर फिसलने से दो सगे भाई नदी में बह गए। एसडीआरएफ के द्वारा व्यापक स्तर पर बच्चों की तलाश में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर कविंद्र सजवाण ने बताया कि घटना धनेश्वर मंदिर देवप्रयाग थाना देवप्रयाग (पौड़ी गढ़वाल) की है। यहां अलकनंदा नदी के किनारे दोपहर के वक्त 4 बच्चे खेलने के लिए गए। जिसमें से दो बच्चे शाम 5 बजे के आसपास घर वापस आ गए। बच्चों ने बताया कि उनके साथ गए दो लड़के आदेश पुत्र हीरालाल उम्र 12 वर्ष अभिषेक पुत्र हीरालाल उम्र 8 वर्ष निवासी ग्राम पुंडल देवप्रयाग पौड़ी गढ़वाल नदी के पास खेल रहे थे। खेलते समय अभिषेक का पैर फिसल गया जिससे वह नदी में गिर गया। अभिषेक को बचाने के लिए उसका बड़ा भाई आदेश पानी में बह गया।

इस घटना से दो अन्य बच्चे डरकर घर भाग आए और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। घटना की सूचना पर एसडीआरएफ श्रीनगर ने रात को सर्च ऑपरेशन शुरू किया। डाइविंग टीम और जल पुलिस के जवानो के साथ सर्चिंग जारी रही लेकिन बच्चों का कुछ पता नहीं चल सका। सोमवार को ढालवाला से एसडीआरएफ की डीप डाइविंग टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। एसडीआरएफ द्वारा राफ्ट व डीप डाइविंग उपकरणों के माध्यम से संभावित जगहों पर सर्चिंग की जा रही है।

प्रभावितों से लिया जा रहा सुझाव, जोशीमठ में पुनर्वास को बेहतर पैकेज दिया जा रहाः अजेंद्र अजय

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष और जोशीमठ आपदा के पर्यवेक्षण के लिए मुख्यमंत्री के विशेष प्रतिनिधि अजेंद्र अजय ने कहा कि पहली बार आपदा प्रभावितों की सलाह और सुझाव के आधार पर विस्थापन व पुनर्वास का पैकेज तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ को लेकर शासन स्तर पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) द्वारा सोमवार को आयोजित बैठक में प्रभावितों के लिए संस्तुत किया गया पैकेज अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ आपदा पैकेज है। कुछ लोग दुष्प्रचार का सहारा लेकर चारधाम यात्रा में बाधा पैदा करना चाहते हैं।

एचपीसी की बैठक में शामिल रहे अजेंद्र ने कहा कि प्रभावितों के पैकेज तैयार करने से पूर्व चमोली के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की एक समिति गठित की गई थी। समिति के सुझावों को जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजा गया था। शासन में एचपीसी ने स्थानीय जनप्रतिनधियों व प्रभावितों की ओर से प्राप्त सुझावों पर अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा की यह पहली बार है जब आपदा प्रभावितों की ओर से प्राप्त सुझावों के आधार पर विस्थापन व पुनर्वास का पैकेज तैयार किया जा रहा है। जोशीमठ के लिए घोषित पैकेज इससे पहले प्रदेश में आई किसी भी आपदा में नहीं मिला।

उन्होंने कहा की यह धामी सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता ही है कि प्रभावितों के लिए तेजी के साथ तात्कालिक राहत पहुंचाई गई। प्रभावितों के अस्थायी आवास, भोजन, चिकित्सा सुविधा हो या ठंड से बचाव के लिए हीटर, ब्लोवर, इलेक्ट्रिक केटल, अलाव आदि की व्यवस्थाएं युद्धस्तर पर सुनिश्चित की गईं। एक भी प्रभावित को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने दी गई। इसके विपरीत केदारनाथ आपदा के समय प्रभावितों को सर छुपाने के लिए दर- दर की ठोकरें कहानी पड़ी थीं।

अजेंद्र ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रभावितों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रख कर कार्य कर रही है। जोशीमठ को लेकर विषेशज्ञों की रिपोर्ट मिलते ही विस्थापन व पुनर्वास के कार्यों के साथ नगर के संरक्षण व उपचार के कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रभावितों को भ्रमित कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग प्रभावितो के हितैषी नहीं हो सकते हैं। ये लोग दुष्प्रचार का सहारा लेकर भय व दहशत का वातावरण तैयार कर चारधाम यात्रा में बाधा पैदा करना चाहते हैं। ऐसे लोग प्रदेश के बाहर यह सन्देश देना चाहते हैं कि उत्तराखंड में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ है। उसमें किसी प्रकार की बाधा पैदा नहीं होने दी जाएगी।

धामी सरकार के निर्देश पर शासन ने जारी किया वेतनवृद्धि का आदेश

वेतनवृद्धि की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 368 संविदा कार्मिकों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई है। कॉलेज की स्थापना से लेकर अब तक अल्प वेतन में काम कर रहे कार्मियों ने इसका श्रेय धामी सरकार को दिया। कार्मिकों का कहना है कि वेतनवृद्धि को लेकर उनकी मांग को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने तवज्जो दी और वर्षों पुरानी समान कार्य-समान वेतन की मांग को अमलीजामा पहनाया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में स्थापना के समय से ही विभिन्न श्रेणी के शिक्षणेत्तर पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार संविदा, दैनिक एवं नियत वेतनमान के आधार पर तैनात कार्मिक अल्प मानदेय पर कार्य करते आ रहे थे। जबकि उन्हीं के समकक्ष उपनल के माध्यम से तैनात कार्मिक उनसे दुगने मानदेय पर कार्य कर रहे थे। जिसको लेकर मेडिकल कॉलेज के अल्प मानदेय प्राप्त कार्मिकों में शासन व कॉलेज प्रशासन के विरूद्ध काफी असंतोष व्याप्त था। इसका खामियाजा स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत को भी अपने विधानसभा चुनाव के दौरान कार्मिकों के विरोध के रूप में भुगतना पड़ा। मामला संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री को कॉलेज प्रशासन द्वारा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा। शासन द्वारा प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा गया तथा राज्य कैबिनेट के द्वारा कार्मिकों की वर्षों पुरानी उपनल कार्मिकों के समान मानदेय दिये जाने की मांग पर मुहर लगा दी गई। आखिरकार कैबिनेट की स्वीकृति के उपरांत चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वर्षों से प्रशासनिक अधिकारी, नर्सिंग अधिकारी, लैब टेक्नीशियन सहित 38 विभिन्न श्रेणी के पदों पर संविदा, दैनिक व नियत वेतनमान पर तैनात कार्मिकों का वेतनमान उपनल कार्मिकों के समान बढ़ाने का शासनादेश जारी कर दिया। शासनादेश जारी होते ही मेडिकल कॉलेज के अल्प वेतनभोगी कार्मिकों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुये आपस में मिठाईयां बांटकर खुशी जाहिर की।

सीएम ने सेना के जवानों, वैज्ञानिकों के साथ की जिला स्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनील आइटीबीपी कैंप में सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, और भूधंसाव की जांच में लगे विभिन्न प्रतिष्ठानों के वैज्ञानिकों, जिला प्रशासन, पुलिस एवं आवश्यक सेवाओं से जुड़े जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। सीएम ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा हमारी सबसे बडी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी इंतेजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने भूधंसाव की जांच में लगे विभिन्न प्रतिष्ठानों के वैज्ञानिकों से भी वार्ता की और जोशीमठ में भूधंसाव कारणों में चल रहे अध्ययन और शोध के बारे में जानकारी ली। जिसमें वैज्ञानिकों ने अब तक की जांच के बारे में अवगत कराया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी को आपदा की घड़ी में शासन प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रभावित हैं, उनकी जान माल की सुरक्षा करते हुए उनके लिए आगे का रास्ता बनाना हमारी प्राथमिकता है।
सीएम ने कहा की जिन लोगों के मकान, दुकान, व्यवसाय प्रभावित हुए है उन सभी को अंतरिम सहायता के रूप में 1.50 लाख तत्कालीक रूप से दिए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी। कतिपय लोग जोशीमठ को लेकर गलत माहौल बना रहे है। इससे हमारे लोगों का नुकसान हो रहा है उनकी आर्थिकी प्रभावित हो रही है।

सीएम आवास के बजाए, सर्द रात में जोशीमठ में प्रभावितों का हाल जान रहे सीएम

देहरादून। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने अभी तक के कार्यकाल में अपने कामकाज में आम जन के बीच एक विश्वास पैदा कर दिया है। ये भरोसा उन्होंने ऐसे ही नहीं जीता, बल्कि इसके लिए उन्होंने सीएम आवास के आराम तलब माहौल को छोड़ हर मुश्किल परेशानी में अपनी जनता के बीच ग्राउंड जीरो पर रहना ज्यादा बेहतर समझा। आपदा देहरादून के मालदेवता में आई हो या जोशीमठ, हर मौके पर सीएम धामी जनता के बीच नजर आए। वो राज्य के पहले ऐसे सीएम बन गए हैं, जिसने हालात को अफसरों के भरोसे छोड़ने की बजाय खुद आगे आकर कमान संभाली। यही वजह है, जो सीएम धामी सीएम आवास में ब्लोवर की गर्माहट के बीच हालात का जायजा लेने की बजाय सर्द रात में जोशीमठ में आपदा प्रभावितों के बीच पहुंच कर काम कर रहे हैं। लोगों में विश्वास जगा रहे हैं कि राज्य का मुख्य सेवक हर पल उनके साथ है।

उत्तराखंड में जब कभी भी बड़ी आपदाएं आईं, तो मुख्यमंत्रियों ने एकबार मौके पर जाकर औपचारिकता निभाई। बाकि समय सचिवालय और सीएम आवास से ही अफसरों के भरोसे रह कर आम जनता को उनके हालात पर ही छोड़ने का काम किया। सरकार के आला अफसर भी सचिवालय से ही अपने अधीनस्थों को निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते रहे। लेकिन पुष्कर राज में हालात पूरी तरह जुदा हैं। जोशीमठ आपदा में सीएम धामी ने खुद आगे बढ़ कर नेतृत्व किया। न सिर्फ खुद एक सप्ताह के भीतर ही दूसरी बार जोशीमठ पहुंच चुके हैं, बल्कि सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुंदरम तक को मौके पर झोंक रखा है।

खुद बुधवार को मौसम खराब होने के बावजूद जोखिम उठाते हुए जोशीमठ पहुंचे। जोशीमठ पहुंच कर भी बंद कमरे में अफसरों से मंत्रणा करने की बजाय उन्होंने मौके पर जनता के बीच जाना बेहतर समझा। सीएम धामी को अपने बीच मौजूद देख एक बूढ़ी मां को उनमें अपना बेटा नजर आया। तो युवाओं को लगा कि उनका बड़ा भाई साथ खड़ा है। बच्चों को अहसास कराया कि उनका भविष्य सुरक्षित है। किसी को भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। शाम को लोगों का हाल जानने के बाद रात में भी सीएम धामी शांत नहीं बैठे। बल्कि सर्द रात में भी 11 बजे के बाद भी लोगों के बीच पहुंचने का सिलसिला जारी रखा। राहत कैंप में पहुंच कर उन्होंने जाना कि लोगों को खाना कैसा मिल रहा है। किसी को ये अहसास न हो कि आपदा के इस समय में उन्हें अपने घर जैसा खाना नहीं मिल रहा।

बुधवार देर रात तक लोगों के बीच रहने के बाद गुरुवार सुबह फिर उसी उत्साह के साथ जोशीमठ में लोगों के बीच मौजूद रहे। भगवान बदरीविशाल, नृसिंह से प्रार्थना की। अपने राज्य की सुख समृद्धि खुशहाली को लेकर प्रार्थना की। न सिर्फ लोगों के बीच पहुंच कर बल्कि राहत कार्यों में तेजी लाने को लेकर भी सीएम धामी फ्रंट फुट पर काम कर रहे हैं। राहत पैकेज तैयार करने से लेकर फौरी तौर पर तत्काल राहत देने को लेकर भी मिशन मोड पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है। लोगों को तत्काल अंतरिम राहत राशि के रूप में डेढ़ लाख की राशि दी जा रही है। तात्कालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया रहा है। उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग चल रही है।

आपदा के इन विपरीत हालातों के बावजूद सीएम धामी आम जनता में ये विश्वास जगाने में शत प्रतिशत कामयाब रहे हैं कि उनके रहते हुए राज्य की जनता को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। अपने कामकाज, सक्रियता से उन्होंने विपक्षियों को भी अपना मुरीद बना दिया है। विपक्ष के सबसे बड़े नेता हरीश रावत तक को बार बार सोशल मीडिया के सार्वजनिक मंच पर सीएम पुष्कर की तारीफ करने को मजबूर होना पड़ रहा है। सीएम पुष्कर इन विपरीत हालातों में भी न तो विपक्ष और न ही मीडिया से दूरी बना रहे हैं, बल्कि आगे आकर वे मोर्चा संभाल रहे हैं। यही वो तमाम वजह हैं, जो सीएम पुष्कर धामी को बाकि सभी नेताओं से अलग बनाए हुए हैं। उनके रूप में दशकों बाद राज्य को एक मजबूत और युवा नेतृत्व मिला है।

जोशीमठ में एसडीआरएफ की टीम बढ़ा रही लोगों का मनोबल

जोशीमठ में हो रहे हैं भू धंसाव की वजह से घरों में दरारों के दृष्टिगत एसडीआरएफ टीमें अलर्ट मोड़ पर है। पुलिस महानिरीक्षक एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल के दिशा निर्देशन में एसडीआरएफ की आठ टीमों को प्रथम चरण में जोशीमठ में तैनात किया गया है। एसडीआरएफ की यह टीमें अन्य इकाईयों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जहां एक ओर भूधंसाव वाले क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रही है वहीं दूसरी ओर दिन व रात प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी नजर रखते हुए प्रभावित लोगों का मनोबल बढ़ाने में भी प्रयासरत है।

सेनानायक एसडीआरएफ मणिकांत मिश्रा द्वारा स्वयं मौके पर पहुंचकर सम्पूर्ण स्थिति का जायज़ा लिया गया व जोशीमठ में ही कैम्प कर ग्राउंड जीरो पर एसडीआरएफ की कमान संभाली जा रही है। वस्तुस्थिति देखने के उपरान्त स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल एसडीआरएफ टीमों को प्रभावित क्षेत्र में दिन के साथ साथ रात्रि में भी कड़ी निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया। जिसके अनुपालन में रात्रि में भी एसडीआरएफ टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी गश्त के माध्यम से निगरानी करते हुए स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आकस्मिक स्थिति होने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने में सहायता भी प्रदान की जा रही है। साथ ही वाहिनी मुख्यालय जॉलीग्रांट से एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें मय आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के जोशीमठ में प्रभावित क्षेत्र पहुंच गई है,जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में कम से कम समय में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके।
इसके साथ ही आसपास की अन्य पोस्टों पर भी एसडीआरएफ के जवानों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अकस्मात स्थिति के उतपन्न होने पर सभी टीमें कम से कम समय मे त्वरित राहत और बचाव कार्य कर सके।
वाहिनीं मुख्यालय, जॉलीग्रांट में भी समस्त फ़ोर्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी प्रकार के बैक अप की आवश्यकता पड़ने पर टीमें त्वरित रिस्पांस हेतु पूर्णतः तैयारी हालत में है। समस्त रेस्क्यू उपकरणों की भी क्रियाशीलता को जांचकर तैयारी हालत में रखा गया है।
एसडीआरएफ कंट्रोल रूम भी हाई अलर्ट पर है व समस्त स्टाफ को निर्देशित किया गया है कि समस्त सूचनाओं का आदान प्रदान त्वरित हो व प्रत्येक सूचना को गम्भीरता से लिया जाए और किसी भी अक्समात स्थिति पर त्वरित रिस्पांस सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने जोशीमठ भू धंसाव के संबंध में ली उच्चाधिकारियों की बैठक

जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव को देखते हुए हमारे लिए एक-एक मिनट बहुत महत्त्वपूर्ण है। प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को अविलम्ब सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में जोशीमठ भू-धंसाव के सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर यह निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र को अविलम्ब खाली कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, लोगों को जिस स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है, वहां पेयजल आदि की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल विभाग को भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र में टूटी पेयजल लाईनों, सीवर एवं विद्युत लाईनों आदि को भी दुरूस्त करने के निर्देश देते हुए कहा कि भू-धंसाव के कारण पेयजल की टूटी लाइनों से भू-धंसाव बढ़ने और विद्युत लाईनों से प्रभावित क्षेत्र में जानमाल का नुकसान न हो इसके लिए लगातार क्षेत्र पर नजर बनाए रखते हुए उच्चाधिकारियों को भी क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने भू-धंसाव क्षेत्र में टॉ इरोजन को रोकने के लिए आज से ही कार्य शुरू किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन भवनों में दरारें आ चुकी हैं और जर्जर हो चुके हैं, उन्हें शीघ्र ध्वस्त किया जाए ताकि वे भवन और अधिक नुकसान न करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विशेषज्ञों आदि को प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने में समय न लगे इसके लिए चॉपर से पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने मैन पावर को बढ़ाकर कार्यां को शीघ्र पूर्ण किए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव नितेश झा एवं डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा सहित अन्य सभी सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

जोशीमठ के स्थलीय निरीक्षण के बाद आपदा प्रबन्धन केन्द्र में सीएम ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ भू धंसाव क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण एवं पीडितो से मुलकात के बाद वापस देहरादून पहुंचने पर सचिवालय स्थित आपदा प्रबन्धन केन्द्र में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जोशीमठ भू धंसाव से पीडित लोगों की मदद एवं राहत एवं बचाव के साथ विकास कार्याे के अनुश्रवण हेतु अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शासन स्तर पर तथा आयुक्त गढ़वाल की अध्यक्षता में स्थानीय स्तर पर समन्वय समिति का गठन तत्काल किया जाय। यह समिति क्षेत्र में किये जा रहे सभी कार्यों का निरन्तर अनुश्रवण करेगी ताकि पीडितो की हर सम्भव मदद तथा क्षेत्र के विकास कार्यों में तेजी लायी जा सके।

सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुन्दरम और आयुक्त गढवाल मण्डल सुशील कुमार कल से जोशीमठ में कैम्प करेंगे।
मुख्यमंत्री ने पीडितों की मदद के लिये आपदा मानको से हट कर भी मदद किये जाने तथा सी.एस.आर के तहत भी राहत की व्यवस्था के निर्देश दिये। उन्होंने आपदा प्रबन्धन के अन्तर्गत कार्यों की स्वीकृति आदि के लिये उच्चाधिकार समिति के गठन की भी बात कही ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी से कार्य हो सके। जोशीमठ को भूस्खलन एवं भूधंसाव क्षेत्र घोषित करने के साथ जिलाधिकारी चमोली का आपदा मद में 11 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करायी गयी है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर निदेशक राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द (एन.आर.एस.सी) हैदराबाद तथा निदेशक भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) से जोशीमठ क्षेत्र का विस्तुत सेटलाइट इमेज के साथ अध्ययन कर फोटोग्राफस के साथ विस्तुत रिर्पाेट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही उप महानिदेशक भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान से कोटी फार्म, जड़ी बूटी संस्थान, उद्यान विभाग की जोशीमठ स्थित भूमि एवं पीपलकोटी की सेमलडाला स्थित भूमि की पुनर्वास की उपयुक्कता हेतु भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अपेक्षा की गई है।

इसके साथ ही निदेशक आईआईटी रूड़की, निदेशक वाडिया इंस्टियूट आफ हिमालयन ज्योलाजी, निदेशक नेशनल इंस्टीटयूट आफ हाइड्रोलॉजी रूड़की एवं निदेशक सी.एस.आई.आर., सेन्ट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टियूट रूड़की से भी जोशीमठ क्षेत्र का अपने स्तर से विस्तृत सर्वेक्षण एवं अध्ययन कर रिर्पाेट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये है कि जोशीमठ क्षेत्र के सर्वेक्षण अध्ययन के लिये केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थानों का आपसी समन्वय भी सुनिश्चत किया जाय ताकि इस सम्बन्ध में त्वरित ढंग के स्थायी कारगर प्रयास सुनिश्चित किये जा सके। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबन्धन केन्द्र को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के भी निर्देश दिये हैं।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आपदा प्रबन्धन डॉ. रणजीत सिन्हा, अपर मुख्य कार्यालय अधिकारी आपदा सविन बंसल, आईजी एस.डी.आर.एफ. रिद्धिम अग्रवाल के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित थे।