चारधाम यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत कर रही धामी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आगामी चारधाम यात्रा के दृष्टिगत महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं निदेशक कार्पाेरेट अफेयर एण्ड सी.एस.आर. हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के मध्य 50 हेल्थ ए.टी.एम. को गढ़वाल मण्डल के चिन्हित चिकित्सा इकाईयों में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग हेतु अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा में हेल्थ ए.टी.एम. की सुविधा होने से श्रद्धालुओं को काफी सुविधा होगी। चारधाम यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढीकरण के लिए यह एक अच्छा कदम होगा। मुख्यमंत्री ने मानस खण्ड स्थित पवित्र स्थानों मानसरोवर यात्रा, बैजनाथ धाम, कैंची धाम, पूर्णागिरी, चितई धाम के लिए भी हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज हेल्थ ए.टी.एम. सुविधा प्रदान करने की अपेक्षा की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केदारखण्ड की तर्ज पर मानस खण्ड हेतु भी सी.एस.आर. के अन्तर्गत ये सेवायें हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज जनहित में प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां न हो, इसके लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है।
हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के निदेशक अंकुर मल्होत्रा ने कहा कि सी.एस.आर. के अन्तर्गत उपलब्ध कराये जा रहे हेल्थ ए.टी.एम. द्वारा 70 से अधिक परीक्षण किये जा सकेंगे एवं टेली मेडिसिन सेवायें भी प्रदत्त की जायेंगी। हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के द्वारा 24 घण्टे ये सेवायें प्रदान की जायेंगी। सभी उपकरण स्थापित होने से आगामी 03 माह तक हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के इंजीनियरों द्वारा हेल्थ ए.टी.एम. की देखरेख की जायेगी। अद्यतन हेल्थ ए.टी.एम. हेतु 01 वर्षीय सी.एम.सी. सेवायें भी हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज द्वारा प्रदान की जायेंगी। हेल्थ ए.टी.एम. का शुभारम्भ 24 अप्रैल 2023 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, डा. आर.राजेश कुमार, अपर सचिव अमनदीप कौर, महानिदेशक स्वास्थ्य डा. विनीता शाह, निदेशक स्वास्थ्य डा. सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. आशुतोष सयाना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संजय जैन, संयुक्त सचिव महावीर सिंह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रतिनिधि डा. अजय नागरकर, हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के कार्पाेरेट अफेयर हेड सुशील भाट्ला, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर ईशान अग्रवाल, सी.एस.आर. एवं विवेक अग्रवाल उपस्थित रहे।

अपर सचिव स्वास्थ्य ने मौसमी इन्फ्लुएंजा की रोकथाम को लेकर बैठक ली

प्रदेश में मौसमी इन्फ्लुएंजा के नियंत्रण एवं रोकथाम की तैयारियों की जनपद स्तरीय समीक्षा अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर द्वारा वर्चुअल बैठक के माध्यम से ली गई। बैठक में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण को फैलने से रोकने की तैयारियों पर चर्चा की गई।
अपर सचिव द्वारा इन्फ्लूएंजा वायरस के मद्देनजर सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी को अलर्ट रहने के निर्देश दिए। जिसपर मुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि मौसमी इन्फ्लुएंजा जैसे एच3एन2 इन्फ्लुएंजा, एच1एन1 इन्फ्लुएंजा, इन्फ्लुएंजा बी आदि के बचाव हेतु स्वास्थ्य इकाइयों में समय रहते दवा, आईसोलेसन सुविधा, बैड, ऑक्सीजन, मास्क और अन्य जरूरतों के इंतजाम कर लिए गये हैं।
अपर सचिव ने बताया की राज्य स्तर से जनपदों द्वारा मौसमी इन्फ्लुएंजा के संबंध में किए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि मौसमी इन्फ्लुएंजा के अधिकांश रोगियों में बुखार व खांसी के सामान्य लक्षण होते हैं, जो कि स्वतरू ही ठीक हो जाते हैं। वर्चुअल बैठक के दौरान अन्य रोगों जैसे, मधुमेह, हृदय रोग, क्रोनिक रीनल और लीवर डिजीज आदि से ग्रसित लोग एवं अति संवेदनशील वर्ग जैसे वृद्ध लोग, गर्भवती महिलाएं, मोटापे से ग्रस्त एवं बच्चों आदि में विशेष सावधानियां बरतने पर भी बल दिया गया।
मौसमी इन्फ्लूएंजा (एच3एन2) के बारे मे जनमानस में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करने के लिए जागरूकता एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मौसमी इन्फ्लुएंजा (एच3एन2) से बचाव संबंधित जागरूकता के लिए आम जनमानस में क्या-करें, क्या ना करें पर आधारित सन्देशों को प्रसारित किया जाए।
बैठक के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में सामुदायिक जागरूकता जैसे- हाथ धोना, खांसी या छींक आने पर अपने मुंह और नाक को रुमाल से ढकना, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचना, भीड़भाड़ वाले वातावरण में मास्क का उपयोग करना आदि को आम जनमानस के बीच बढावा दिए जाने पर बल दिया गया।
साथ ही बैठक के दौरान सभी 13 जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों से अपेक्षा की गई कि इन्फ्लुएन्जा रोकथाम एवं बचाव हेतु जुड़ी जानकारियों को समय-समय पर अपने स्तर से मीडिया के माध्यम से जनमानस तक पुहंचाए जिससे सही सूचना सही समय पर समुदाय तक पहुंचे ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांती न फैले।
वर्चुअल बैठक के दौरान एन.एच.एम. निदेशक डॉ सरोज नैथानी, राज्य नोडल अधिकारी आई.डी.एस.पी. डॉ. पकंज कुमार सिंह, जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी, आई.डी.एस.पी. यूनिट के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री देंगे 824 एएनएम को नियुक्ति पत्र

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 824 ए.एन.एम. पदों की भर्ती पर लगी रोक को नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के निर्णय के पश्चात सरकार शीघ्र ही चयनित अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने जा रही है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा कोर्ट के फैसले के पश्चात बताया गया की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र ही आरंभ की जाएगी तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिहं रावत द्वारा रोजगार मेले के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य सचिव द्वारा बताया गया कोर्ट के निर्णय के बाद शीघ्र ही चयनित 824 ए.एन.एम. प्रदेश की स्वास्थ्य इकाइयों में नियुक्ति हो जाने से प्रदेश के चिकित्सा इकाइयों में आम जनमानस को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में तेजी आएगी। ए.एन.एम. अस्पताल, स्वास्थ्य कार्यक्रमों व परियोजनाओं के अनुरुप मरीजों को सुरक्षित एवं कारगर देखभाल के लिए नियुक्त होंगे साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी सहयोग करेंगे।
ए.एन.एम. द्वारा सही तरीके से मरीजों को इलाज का ध्यान रखना है। मरीजों को समय समय पर दवाई देना एवं उन्हें देखभाल करना है। प्रथम उपचार, नुट्रिशन, सामान्य बीमारियों का उपचार प्रदान करना व बच्चों का टिकाकरण करवाना है तथा डॉक्टर के आदेशनुसार मरीजों को दवाई देना या मरीजों को दिए गए दवाइयों को लेने के लिए प्रोत्साहित करना है साथ ही आमजनमानस में जागरुकता को बढ़ावा देने का भी कार्य ए.एन.एम. द्वारा किया जाता है।

पांच जनपदों के 38 स्वास्थ्य केन्द्रों पर संचालित की जा रही है शहरी स्वास्थ्य मिशन योजना

राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटी है। इसी क्रम में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत प्रदेश के पांच जनपदों के 38 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर शहरी गरीब आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। योजना के अंतर्गत पिछले वित्तीय वर्ष में चार लाख से अधिक मरीजों को निःशुल्क उपचार दिया गया जबकि ई-संजीवनी के माध्यम से 1 लाख 16 हजार से अधिक लोगों को टेलीकांसल्टेंसी सुविधा दी गई।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की गरीब आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये दृढ संकल्पित है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश के पांच जनपदों देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल एवं ऊधमसिंह नगर की शहरी आबादी के लिये राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही है। योजना के तहत 38 शहरी प्राथमिक केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें देहरादून, हरिद्वार, रूड़की एवं हल्द्वानी में लोक निजी सहभागिता (एनजीओ) के माध्यम से प्राथमिक केन्द्र स्थापित किये गये हैं जबकि 11 प्राथमिक केन्द्र राजकीय सहभागिता से संचालित किये जा रहे हैं। इन शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 तक चार लाख 19 हजार 714 मरीजों का इलाज किया गया। इसके साथ ही ए.एन.सी. के लिये 23 हजार 456 गर्भवतियों का पंजीकरण कराया गया, जबकि एक लाख 72 हजार 654 विभिन्न पैथालोजी जांच की जा चुकी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में भी काम कर रही हैं, जिसमें स्वास्थ्य गतिविधियों के साथ-साथ योग सत्र भी शुरू कर दिये गये हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य केन्द्रों पर ई-संजीवनी रेफरल संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत अबतक 1 लाख 16 हजार 555 टेलीकांसल्टेंसी प्रदान की जा चुकी है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 1114 महिला आरोग्य समितियां कार्यरत हैं जो शहर की मलिन बस्तियों में महिला स्वास्थ्य जागरूकता, सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन आदि विभिन्न गतिविधियों के संचालन में सहयोग करेंगी। विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत बेहतर कार्य करने के लिये सेलमपुर, रूड़की के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को वर्ष-2022 के लिये कायाकल्प गुणवत्ता पुरस्कार भी मिल चुका है। इसी योजना के अंतर्गत भूपतवाला, जनपद हरिद्वार तथा मेहूंवाला जनपद देहरादून में 30-30 बेड के शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापित की जा रही है जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत यूपीएचसी में निःशुल्क डायग्नोस्टिक सेवाएं भी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत 53 जांचों का अतिरिक्त लाभ शहरी गरीब आबादी को मिल सकेगा।

शहरी स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्य
सूबे में संचालित शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शहरी आबादी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की देखभाल, टीकाकरण, ए.एन.सी., पी.एन.सी की सेवाएं देना तथा परिवार कल्याण की स्थाई एवं अस्थाई विधियों हेतु पात्र दम्पतियों संदर्भित करना है। इसके अलावा अपने-अपने क्षेत्रों राष्ट्रीय कार्यक्रमों को संचालित कराना, सभी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के रूप में भी संचालित करना है।

तनाव और नींद विकारों को कम करने के लिए प्रशिक्षण सत्र का आयोजन

शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत गेटकीपर्स ट्रेनिंग फॉर स्ट्रेस मैनेजमेंट एंड स्लीप डिसऑर्डर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तनाव और नींद विकारों को कम करने हेतु प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।
गेटकीपर्स ट्रेनिंग का उद्देश्य सरकारी संगठनों में प्रशासनिक पद पर कार्यरत सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने आधीन कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों में मानिसक तनाव व स्लीप डिसऑर्डर के लक्षणों की पहचान कर काउंसलिंग एवं उपचार प्रदान कराया जाना है, जिससे कार्यालय में वर्क एनवायरनमेंट को बेहतर किया जा सके साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्य क्षमता को बेहतर किया जा सके। साथ ही तनाव व स्लीप डिसऑर्डर के कारण भविष्य में होने वाले रोगों से भी बचाव किया जा सके।
गेटकीपर्स ट्रेनिंग में एम्स ऋषिकेश के मनोचिकित्सकों प्रोफेसर डॉ. रवि गुप्ता व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अनिंद्या दास द्वारा आम जनमानस में तनाव के लक्षणों की पहचान कर, दुष्प्रभावों को कम करने व अत्याधिक तनाव वाले व्यक्तियों के कामकाज, व्यवहार, और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
मनोचिकित्सकों ने बताया कि मानसिक रोगियों की अधिक संख्या के उपरान्त भी मानसिक रोग की उपेक्षा की जाती है, परन्तु शारीरिक रोगों की भांति ही मानसिक रोग भी हमारे स्वास्थ्य एवं शरीर पर प्रतिकूत प्रभाव डालते हैं। चार परिवारों में से कम से कम एक परिवार के सदस्य में मानसिक विकार से ग्रस्त होने की संभावना होती है। मानसिक बीमारी व उनके लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि तनाव ग्रसित लोगों का समयान्तर्गत उपचार किया जा सके।
मनोचिकित्सकों द्वारा परस्पर संवाद आयोजित कर प्रशनावली के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक कर उनके द्वारा तनाव व अनिद्रा से संबंधित समस्याओं के निवारण करने के तरीके साझा किये गये। उक्त सत्र में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, एन.एच.एम., उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण समीति, आयुर्वेद सेवाएं उत्तराखंड, उत्तराखंड हैल्थ सिस्टम डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट व सीएमओ कार्यालय देहरादून से विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
ट्रेनिंग सत्र में एनएचएम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी, प्रभारी अधिकारी डॉ. फरीदुजफर, डॉ. अजय कुमार नगरकर, डॉ. पकंज सिंह, डॉ. मुकेश रॉय, आदि अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

गर्भवती महिलाओं को संभावित तिथि से पूर्व बर्थ वेटिंग होम में रखने का प्रस्ताव भेजने के निर्देश

डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रम हेतु सप्लीमेंट्री पी.आई.पी. (प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन प्लान) भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित करने हेतु चर्चा की गई।

बैठक में डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व बर्थ वेंटिग होम में राज्य के समस्त 13 जनपदों में स्थापित वन स्टॉप सेंटर एवं वर्किंग वुमेन हॉस्टल में रखे जाने हेतु प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किए जाने के निर्देश दिये गए। योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय देखभाल समय पर प्राप्त होगी व प्रसव के पूर्व गर्भवती महिलाओं को सहूलियत होगी। यह कदम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

सचिव द्वारा राष्ट्रीय टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में संचालित 17 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एम.एम.यू.) में पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे यूनिट स्थापित करने हेतु भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किए जाने पर भी दिशा-निर्देश दिये गए। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही है। टी.बी. रोग उन्मूलन लक्ष्यों की प्राप्ती हेतु दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों के लिए टी.बी. जांच की सुविधा और भी सुलभ हो जाएगी।

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला चिकित्सालय देहरादून व उप जिला चिकित्सालय मसूरी में आई ओटी हेतु उपकरणों की खरीद हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया गया। जनपद टिहरी गढ़वाल व पिथौरागढ़ हेतु कार्यक्रम के अंतर्गत एक-एक सचल नेत्र चिकित्सा वाहन का संचालन प्रस्ताव प्रेषित किया गया। जिसमें सूदूर क्षेत्रों में सचल चिकित्सा वाहन के माध्यम से नेत्र परीक्षण कर उपचार प्रदान किया जाएगा।

हीमोग्लोबिनोपैथी कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में जनजातीय समुदाय में सिकल सेल स्क्रीनिंग प्रारंभ किए जाने हेतु भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया गया। जिसमें राज्य में जनजातीय समुदाय के लोग लाभन्वित होंगे तथा भविष्य में सिकल सेल उन्मूलन हेतु कार्य किया जा सकेगा। साथ ही जिला चिकित्सालय बागेश्वर व बेस चिकित्सालय हल्दवानी में स्थापित रक्तकोष के सुदृढ़ीकरण हेतु भारत सरकार से उपकरणों की मांग की गई।

बैठक में अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर, निदेशक एनएचएम डॉ. सरोज नैथानी, प्रभारी अधिकारी डॉ. पंकज कुमार सिंह, डॉ. अजय कुमार नगरकर, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर, डॉ. मुकेश रॉय, आदि मौजूद रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में मीडिया की भूमिका अहमः डॉ. धन सिंह रावत

स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने लिये राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। राज्य व केन्द्र पोषित स्वास्थ्य योजनाओं का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा सके इसके लिये जनपद स्तर पर स्वास्थ्य संवाद कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर मीडिया के साथ परिचर्चा भी शामिल है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज श्रीनगर गढ़वाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आयोजित आई.ई.सी- मीडिया कार्यशाला एवं स्वास्थ्य संवाद कार्यक्रम में कही। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। विगत वर्षों में सरकार में स्वास्थ्य के क्षेत्र अनेक सुधार किये साथ ही कई स्वास्थ्यपरक योजनाओं का लाभ आम लोगों को पहुंचाया। उन्होंने कहा राज्य के प्रत्येक चिकित्सा इकाइयों में कई निरूशुल्क चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। मेडिकल कालेजों, जिला एवं उप जिला अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे मशीनें उपलब्ध करा दी गई है। डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश में अब डॉक्टरों की कमी नहीं होगी, प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को जहां 171 चिकित्सक मिल गये हैं वहीं प्रदेश की चिकित्सा इकाइयों में शीघ्र ही 372 एमबीबीएस डॉक्टर नियुक्त कर दिये जायेगे। इसके अलावा 850 एएनएम एवं 2800 नर्सों की नियमित नियुक्ति शीघ्र कर दी जायेगी। विभागीय मंत्री डॉ रावत ने कहा कि श्रीनगर मेडिकल कालेज में जल्द कैथ लैब स्थापित की जायेगी जिससे हृदय संबंधी रोगों की जांच और उपचार मेडिकल कालेज में हो सकेगा और लोगों को ऋषिकेश-देहरादून के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके साथ ही श्रीनगर में अति आधुनिक तकनीकियों से लैस ट्रामा सेंटर और 1000 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक स्थापित किया जाएगा। कार्यशाला में मीडिया के साथ संवाद करते हुये डॉ. रावत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में मीडिया की अहम भूमिका है। जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को आम जन तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम में रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर से आये पत्रकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के व्यापक सुधार के लिए दो दर्जन से अधिक सुझाव रखे, जिस पर स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकारों का आभार जताते हुए उनके द्वारा रखे सुझावों पर शीघ्र अमल करने की बात कही।

कार्यक्रम में सीएमओ पौड़ी डॉ. प्रवीन कुमार, मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय के एमएस डॉ. रविन्द्र बिष्ट ने अस्पतालों की प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराया।

इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मातबर सिंह रावत, एसीएमओ डॉ. रमेश कुंवर, वीपी सिंह बिष्ट, राजीव रावत, शकुन्तला नेगी, समीर बिष्ट, मनमोहन पटवाल, डॉ. सुरेन्द्र सिंह, डॉ. ललित पाठक, डॉ. वक्की बख्सी, डॉ. मोहित सैनी, गणेश भट्ट, अरूण बडोनी, मनमोहन सिंधवाल, संजय पांडेय, संदीप पंवार, राजेन्द्र बिष्ट आदि मौजूद थे।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलेगा पर्वतीय जनपदों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का लाभ-राजेश कुमार

प्रदेश के पर्वतीय जनपदों के लोगों को शीघ्र मिलेगा स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का लाभ यह बात स्वास्थ्य सचिव डॉ आर. राजेश कुमार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ‘यू कोट, वी पे’ के माध्यम से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के हुए साझात्कार में उत्साह को देखते हुए कही।
डॉ. आर राजेश कुमार द्वारा बताया गया कि प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में प्रायरू देखा गया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाईयां, आधुनिक चिकित्सा उपकरण की सुविधाएँ हैं पर प्रदेश के कुछ स्थानों पर स्पेशलिस्ट डाक्टरों के रिक्त पदों के कारण आमजन को पूर्णता सुविधाओं का लाभ नही मिल पा रहा था। शीघ्र ही इन रिक्त पदों पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति हो जाएगी, जिससे आम जन को गुणवत्ता पूर्ण उच्च स्वास्थ्य सुविधा अपने नजदीकी चिकित्सालय में मिल सकेगी ताकि स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का लाभ अपने ही क्षेत्र में मिल सके।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया की प्रथम चरण में 47 स्पेशलिस्ट डॉक्टर जिसमें पैथोलॉजिस्ट, गायनोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक, सर्जन, पीडियाट्रिशन, ऑर्थोपेडिक, आदि ने साझात्कार में प्रतिभाग किया गया है। शीघ्र ही ‘यू कोट, वी पे’ मॉडल का दूसरा चरण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया चयनित डॉक्टरों की सूची तैयार कर जल्द नियुक्ति दी जाएगी जिससे की आमजन को स्वास्थ्य लाभ मिल सके।

सीएस ने ली स्वास्थ्य विभाग के तहत मोबाइल हेल्थ वेन के संबंध में बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने गुरुवार को सचिवालय स्थित अपने सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मोबाइल हेल्थ वैन और टेलीमेडिसिन के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु मोबाइल हेल्थ सुविधाएं और टेलीमेडिसिन को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मोबाइल हेल्थ और टेलीमेडिसिन सुविधाओं हेतु 100 प्रतिशत सैचुरेशन प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने मोबाइल वैन सुविधा के क्षेत्र में एनएचएम, स्वास्थ्य विभाग और हंस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विश्लेषण कर गैप चिन्हित कर इसे पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन क्षेत्रों से स्वास्थ्य केंद्र अधिक दूर हैं उन क्षेत्रों में मोबाइल वैन के दौरे अधिक बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि मोबाइल वैन के दौरों की निश्चितता बढ़ाते हुए प्रत्येक क्षेत्र के लिए दिवस निर्धारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि मोबाईल वैनों की निश्चितता सुनिश्चित किए जाने हेतु एक स्थायी मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम को मजबूत किया जाए।

मुख्य सचिव ने मोबाइल वैन में ब्लड सैम्पल आदि के साथ ही पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की उपयोगिता पर मंथन किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय दूरस्थ क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के अनुरूप सुनियोजित प्लान तैयार किया जाए। साथ ही टेलीमेडिसिन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अधिक से अधिक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सम्भावनाओं को भी तलाशते हुए इसके प्रयोग की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार एवं महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विनीता शाह सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।

ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिएः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग और कौशल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ द्वितीय मुख्य सचिव सम्मेलन के बिन्दुओं के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सम्मेलन के बिन्दुओं का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश देते हुए टाईमलाइन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पोषण मिशन को सफल बनाने के लिए व्यवहारिक कदम उठाए जाएं। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक से अधिक तकनीक का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभिन्न मोबाईल ऐप के बजाय सभी ऐप्स को इंटीग्रेट कर एक ऐप तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को महिलाओं के प्रसव पूर्व और प्रसव के उपरान्त आवश्यक विभिन्न जानकारियों के सम्बन्ध में जागरूक करने हेतु वीडियो बनाकर सभी अस्पतालों में प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही विभिन्न रोगों और उनसे बचाव के सम्बन्ध में भी छोटी-छोटी वीडियो बनाकर प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाए।

मुख्य सचिव ने कौशल विकास विभाग को निर्देश दिए कि सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्रों को उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को इंडस्ट्री में भेजकर एक माह के प्रशिक्षण हेतु योजना तैयार की जाए। इसके लिए विभिन्न उद्योगों से समझौते किए जाएं। इस दौरान छात्रों के रूकने की व्यवस्था विभाग द्वारा करायी जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि छात्र-छात्राओं का 50-60 प्रतिशत से अधिक प्रशिक्षण उद्योगों के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रॉन के क्षेत्र में काफी सम्भावनाएं हैं। ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यक्रमों की पोर्टल बेस्ड मॉनिटरिंग किए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार एवं विजय कुमार यादव सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।