धामी सरकार में पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब नियमित एवं संविदा पर तैनात फैकल्टी को वेतन के अतिरिक्त 50 प्रतिशत भत्ता दिया जायेगा। धामी सरकार के इस निर्णय से जहां एक ओर पर्वतीय जनपदों के मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फैकल्टी मिल पायेगी वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक भी मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं देने के लिए आसानी से उपलब्ध हो पायेंगे।
धामी सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि काफी प्रयासों के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेन्ट प्रोफेसर अपनी सेवाएं देने के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे जिसका एक कारण कम वेतनमान एवं पर्याप्त सुविधाएं न मिल पाना सामने आया था जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात नियमित एवं संविदा दोनों ही श्रेणी के फैकल्टी को मेडिकल टीचर्स डेफिसेन्सी कम्पनसेटरी स्कीम के अंतर्गत 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया।
डॉ रावत ने बताया कि वर्तमान में यह अतिरिक्त भत्ता पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा में लागू होगा तथा भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किये जाने वाले सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में तैनात संकाय सदस्यों, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर तथा असिस्टेन्ट प्रोफेसर को भी उक्त भत्ता देय होगा। उन्होंने बताया कि इस अतिरिक्त भत्ते के भुगतान हेतु एक कॉरपस फण्ड बनाया जायेगा जिसका संचालन संबंधित कॉलेज के प्राचार्य द्वारा किया जायेगा। संकाय सदस्यों को मिलने वाला 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता फैकल्टी के पे स्लिप पर अंकित नहीं होगा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ रावत ने कहा कि काफी प्रयासों के बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर तथा अल्मोड़ा में पर्याप्त फैकल्टी नहीं मिल पा रही थी लेकिन राज्य सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ते की स्वीकृति के बाद इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

धामी सरकार में छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ बनेगा हेल्थ कार्ड

उत्तराखंड के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग जल्द ही शुरु होने जा रही है। यह बात प्रदेश के प्रभारी सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा राज्य स्तरीय पोषण, जीवन शैली व प्रबंधन बैठक में जानकारी देते हुए साझा की गई। देहरादून स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में आयोजित बैठक में विशेषज्ञों द्वारा बदलते जीवनशैली के मद्देनजर स्कूल के छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ-साथ हेल्थ कार्ड बनाने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आहूत बैठक में सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि खानपान के गलत प्रचलन व मानसिक/शारीरिक परामर्श ना होने के कारण ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डायबिटीज (गैर संचारी रोगों) जैसी बीमारियों में तेजी आई है। इसीलिए यह आवश्यक है कि रोजमर्रा के जीवन में सही जीवनशैली को अपनाया जाए, ताकि इन गैर संचारी रोगों के प्रभाव को कम किया जा सके।
बैठक में चर्चा की गई कि स्वास्थ्य विभाग, अन्य विभागों के साथ सभी हितधारकों द्वारा ऐसी नीतियों का निर्माण किया जाए जिन नीतियों के अंतर्गत मानसिक रोगों, तनाव, डिप्रेशन, तम्बाकू नियंत्रण, कैंसर, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, आदि (गैर-संचारी रोगों) का आकलन करते हुए, जनजागरुकता को बढ़ावा दिया जाए।
जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. वर्तिका सक्सेना द्वारा बताया गया कि पिछले एक दशक में महिलाओं में मोटापे के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। किशोरियों में शारीरिक गतिविधियों, खेल-खूद को बढाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने की भी जरुरत है जिससे की डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापे को कम किया जा सके।
बैठक के दौरान प्रदेश में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम हेतु स्वस्थ जीवनशैली, ईट राइट, मानसिक स्वास्थ्य, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, तनाव प्रबंधन, आदि विषयों पर विभन्न विभागों के प्रतिनिधियों द्वारा विचार साझा किए गए। इस बैठक के दौरान बिहेवियर चेंज, सामूहिक आई.ई.सी., इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, आदि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के काउंसलर के रुप में आशा कार्यकत्रियों को तैयार किए जाने पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग को विद्यालय स्तर पर प्रारंभ किए जाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रभारी) डॉ. विनीता शाह, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सरोज नैथानी, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. फरीदुज़फ़र, डॉ. सुजाता, ड़ॉ. पंकज सिंह, डॉ. कुलदीप मर्ताेलिया, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अभय कुमार, डॉ. मंयक बड़ोला, डॉ. तुहीन कुमार, डॉ. अमलेश कुमार सिंह, डॉ. अमित शुक्ला, उपायुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन जी.सी. कंडवाल, डॉ. नीतू कोचर, आदि मौजूद रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिये, जन आरोग्य अभियान’ में तेजी लाने के दिये निर्देश

राज्य स्तरीय जन आरोग्य अभियान के अंतर्गत मार्च 2023 तक प्रदेश भर के 18 लाख लोगों के स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान में तेजी लाने के लिये विभागीय अधिकारियों को ठोस निर्देश गये गये हैं साथ ही ऐसे जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को विशेष हिदायत दी गई है जहाँ अभियान की रफ्तार बेहद सुस्त है। अभियान के तहत अभी तक 4 लाख लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग (स्वास्थ्य परीक्षण) की जा चुकी है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य स्तरीय ‘जन आरोग्य अभियान’ की सफलता को देखते हुये इस अभियान के तहत मार्च 2023 तक प्रदेश भर के 18 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के ठोस निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि कुछ जनपदों में जन आरोग्य अभियान की रफ्तार बेहद धीमी है जिसमें तेजी लाने के लिये सम्बंधित सीएमओ को जरूरी निर्देश दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने कहा कि अब तक प्रदेश भर में जन आरोग्य अभियान के तहत 483682 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 45101, बागेश्वर में 19297, चमोली में 33614, चंपावत में 21499, देहरादून में 52144, हरिद्वार में 87535, नैनीताल में 54823, पौड़ी में 22255, पिथौरागढ़ में 15720, रुद्रप्रयाग में 17487, टिहरी गढ़वाल में 13863, ऊधमसिंह नगर में 84898 और उत्तरकाशी में 15446 लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग की गई है।
रावत ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत 285956 लोगों की सामान्य स्वास्थ्य जांच जबकि 221109 लोगों का रक्तचाप (बीपी) परीक्षण, 165093 लोगों की शुगर (डायबिटीज) जांच, 202550 लोगों का ओरल कैंसर स्क्रीनिंग, 112002 महिलाओं के स्तन कैंसर स्क्रीनिंग, 168884 नेत्र परीक्षण, 155520 लोगों की टीबी जांच और 163549 लोगों को तम्बाकू मुक्त अभियान के प्रति जागरूक किया गया।
रावत ने बताया कि इसके अलावा अभियान में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लोगों के आयुष्मान कार्ड और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड भी बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान में प्रदेश भर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर तैनात 940 सीएचओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है जो गांव गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर अभियान को सफल बनाने में जुटे हैं। रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को आरोग्य उत्तराखंड बनने के लिये संकल्पित है। उन्होंने लोगों से अपना स्वास्थ्य परीक्षण करा कर जन आरोग्य अभियान का लाभ उठाने की अपील भी की।

स्वास्थ्य संबंधी कार्डों की सही मॉनिटरिंग के लिए तैयार किया जाए प्लेटफॉर्म

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि अस्पतालों में मरीजों को रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाईनों में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन एवं टोकन की व्यवस्था के लिए सिस्टम विकसित किया जाए। टेलीमेडिसिन की सुविधा के लिए हेल्पलाईन नम्बर 104 को जन जगारूकता के लिए व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए। उत्तराखण्ड को जल्द क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए क्षय रोगियों को गोद लेने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को प्रेरित किया जाए, अगर किसी कार्य से लोग मन से जुड़ते हैं, तो उसमें सफलता प्राप्त होती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जारी होने वाले आयुष्मान कार्ड, गोल्डन कार्ड, श्रम विभाग द्वारा जारी होने वाले कार्ड तथा स्वास्थ्य संबंधी अन्य कार्डों की सही मॉनिटरिंग के लिए उन्हें एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अभिनव पहल की जरूरत हैं, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्य करने के लिए डॉक्टरों को प्रेरित किया जाए। ब्लॉक एवं तहसील स्तर तक स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएं। ऐसी व्यवस्था की जाए कि नवजात शिशु के अस्पताल में जन्म होने पर उनके जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल से ही निर्गत हों।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी अस्पतालों में स्वच्छता की उचित व्यवस्था हो। मरीजों को अस्पतालों में गुणवत्तायुक्त भोजन मिले। उन्होंने कहा कि वर्षाकाल के बाद वायरल, डेंगू एवं मलेरिया का प्रकोप अधिक रहता है, इससे निपटने के लिए अस्पतालों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। नगर निगम एवं नगर पालिका क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। त्योहारों के सीजन के दृष्टिगत विशेष सतर्कता बरती जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिन निर्माण कार्यों में विलंब हो रहा है, सबंधित कार्यदाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाया जाए एवं संबंधितों जिम्मेदारी भी तय की जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब होने से लागत में भी वृद्धि होती है। उत्तराखण्ड को 2025 तक ड्रग्स फ्री राज्य बनाने के लिए सभी विभागों को सुनियोजित प्लानिंग करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में प्रतिमाह बैठक की जाए।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में रोगी पंजीकरण शुल्क की समान व्यवस्था की जाए। ब्लॉक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस को भी ध्यान में रखना होगा।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने राज्य में स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव अरूणेन्द्र चौहान, अमनदीप कौर, प्रभारी महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विनीता शाह, प्रधानचार्य दून मेडिकल कॉलेज डॉ. आशुतोश सयाना, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सरोज नैथानी एवं स्वास्थ्य विभाग के सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।
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स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर मंकीपॉक्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एसओपी

देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरों के बीच सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने विभागीय उच्चाधिकारियों को मंकीपॉक्स को लेकर पहले ही सर्तकता बरतने एवं गाइडलाइन जारी करने को कहा है। विभागीय मंत्री के एक्शन पर स्वास्थ्य विभाग ने मंकीपॉक्स से बचाव हेतु तत्काल हेल्थ एडवाजरी जारी कर सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को एक्टिव रहने को कहा है। जनपद स्तर पर मंकीपॉक्स के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये कड़ी निगरानी करने व सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को दिये गये हैं।
डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि देश में बढ़ते मंकीपॉक्स के खतरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड़ में रहने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अंतर्गत मंकीपॉक्स से बचाव एवं सर्तकता बरतने के लिये स्वास्थ्य विभाग ने एसओपी जारी कर दी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि जनपद स्तर पर मंकीपॉक्स के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये कड़ी निगरानी रखी जायेगी, जिसके लिये विभागीय अधिकारियों को सर्विलांस सिस्टम मजबूत करने को कहा गया है।
रावत ने बताया कि सूबे की प्रत्येक चिकित्सा इकाईयों एवं मेडिकल कॉलेजों में मंकीपॉक्स हेतु पृथक से आइसोलेशन की व्यवस्था एवं नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है, इसके साथ ही चिकित्सालयों में रोगियों की जांच एवं उपचार हेतु पर्याप्त दवाएं उपलब्ध करने के निर्देश भी विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य में मंकीपॉक्स के एक मामले को भी प्रकोप माना जायेगा। स्वास्थ्य मंत्री रावत के निर्देश पर प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार ने विभाग को अलर्ट मोड़ में रहने को कहा है। इसके साथ ही सभी जनपदों में जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को मंकीपॉक्स को लेकर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। उन्होंने बताया गया कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सभी जिला निगरानी इकाइयों के माध्यम से संक्रमण के मामलों, समूहों की तेजी से पहचान करने एवं संक्रमण के प्रसार को तुरंत रोकने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि संदिग्ध मामले मिलने पर इसकी सूचना तत्काल उच्च स्तरीय अधिकारियों को दी जायेगी, जांच नमूनों को नामित प्रयोगशालाओं को भेजने एवं संदिग्धों को अलग वार्ड और आईसोलेशन में रखे जाने सहित अन्य जरूरी निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

एनएचएम के तहत शत-प्रतिशत खर्च करें धनराशि-धन सिंह रावत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी धनराशि को समय पर शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुये शीघ्र वेतन निर्गत करने को कहा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये। उन्होंने वर्तमान वित्तीय वर्ष में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि को शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। डॉ रावत ने बताया कि सूबे में एनएचएम के अंतर्गत हुये बेहत्तर कार्यों के आधार पर भारत सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष रूपये 1129.5 करोड़ का बजट उपलब्ध कराया गया है जो कि जो कि विगत वित्तीय वर्ष में मिले बजट के मुकाबले रूपये 280 करोड़ अधिक है। जिसे तय समय के भीतर शत-प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया जा सके। बैठक में विभागीय मंत्री ने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाकर सभी निर्माण कार्यां को निश्चत समय सीमा के भीतर पूरा करें। डॉ रावत ने बताया कि ई0आर0सी0पी0 के अंतर्गत 08 चिकित्सा इकाईयों में प्रीफैब्रिकेटेड 42 बेड एवं 10 चिकित्सा इकाईयों में 32 बेड का निर्माण किया जायेगा जिसके लिये शासन ने रूपये 5073.12 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी है। इसके अलावा इस वित्तीय वर्ष में 7 क्रिटिकल केयर यूनिट (सी0सी0यू0) की स्थापना की जायेगी, जिसके लिये कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है, शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। एनएचएम कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर डॉ रावत ने विभागीय अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार को व्यवस्थाएं ठीक कर शीघ्र वेतन निर्गत करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिक अल्प वेतनभोगी हैं और उनका कई महीनों तक बिना किसी कारण वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है।
बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ शैलजा भट्ट, संयुक्त निदेशक डॉ आर0पी0 खंडूडी, वित्त अधिकारी दीपाली भरणे, वित्त नियंत्रक एनएचएम खजान चन्द्र पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कोरोना केसों में बड़ा उछाल, आज मिले 282 नए मरीज

उत्तराखंड में कोरोना के 282 नए मरीज मिले और 223 ठीक हुए। इसके बाद एक्टिव मरीजों की संख्या 1180 हो गई है। राज्य में कोरोना संक्रमण की दर 13.08 प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को देहरादून में 137, नैनीताल में 35, अल्मोड़ा में 18, बागेश्वर में एक, हरिद्वार में 22, पौड़ी में तीन, रुद्रप्रयाग में दो, टिहरी में 19, यूएस नगर में 32 और उत्तरकाशी जिले में 13 मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्ठि हुई है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 2699 सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 1874 सैंपल की जांच रिपोर्ट आई है। राज्य में संक्रमण की दर 13 प्रतिशत से अधिक हो गई है जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 94 प्रतिशत रह गई है। कोरोना के बढ़ते केसों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।

स्वास्थ्य विभाग ने एडवायजरी जारी कर सावधानी बरतने के दिये निर्देश

उत्तराखंड में कोरोना ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए एडवायजरी जारी की है। प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ राजेश कुमार ने जिला अधिकारियों को दिए कोरोना को लेकर दिशा निर्देश दिए हैं।
बता दें, प्रदेश में बीते 24 घंटे के भीतर प्रदेश में 142 नए संक्रमित मिले हैं। जबकि 38 मरीज ठीक हुए हैं। सक्रिय मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में फिलहाल 1140 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रविवार को 914 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है।
वहीं, देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 94, हरिद्वार में छह, नैनीताल में 15, अल्मोड़ा और पौड़ी में दो-दो, चमोली व चंपावत में एक-एक, टिहरी में सात, ऊधमसिंह नगर में तीन व उत्तरकाशी में 11 संक्रमित मरीज मिले हैं। प्रदेश की रिकवरी दर 94.96 प्रतिशत और संक्रमण दर 3.45 प्रतिशत दर्ज की गई।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई एडवायजरी
-सामाजिक दूरी का पालन करना और मास्क पहनना जरूरी।
-कोरोना के लक्षण वाले रोगियों को होम आइसोलेशन में रखा जाए।
-कोविड-19 टीकाकरण कवरेज को बढ़ाया जाए।
-सभी जिलों को संक्रमित मरीजों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजने के निर्देश।
-जिलाधिकारियों को आरटी-पीसीआर टेस्ट बढ़ाने के लिए कहा गया।
-बुखार फैल रहा तो तुरंत कोरोना जांच कराए।
-फ्लू और सांस की शिकायत वालों के टेस्ट किए जाने की सलाह भी दी गई है।
-आईसीयू बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
-आक्सीजन प्लांट की क्रियाशीलता सुनिश्चित की जाए।

राज्य में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 1140 हुई

उत्तराखंड में रविवार को कोरोना के 142 नए मरीज मिले और 38 संक्रमित इलाज के बाद ठीक हुए। इसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 1140 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार रविवार को देहरादून में 94, नैनीताल में 15, उत्तरकाशी में 11, अल्मोड़ा में दो, चमोली में एक, चम्पावत में एक, हरिद्वार में छह, पौड़ी में दो, टिहरी में सात, यूएस नगर में तीन नए मरीज मिले हैं।
रविवार को राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 1018 सैंपल जांच के लिए भेजे गए और 914 सैंपल की रिपोर्ट आई। राज्य में संक्रमण की दर 13.45 प्रतिशत जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 95 प्रतिशत से नीचे गिर गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करें।

राज्य में एक्टिव केस का आंकड़ा 1 हजार के पार

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। शनिवार को राज्य में 260 नए मरीज मिले और 103 मरीज ठीक हुए। इसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों का आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच गया है। जबकि संक्रमण की दर 14 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को राजधानी देहरादून में सबसे अधिक 149 नए मरीज मिले जबकि नैनीताल में 51, अल्मोड़ा में 14, हरिद्वार में 12, रुद्रप्रयाग में 13, टिहरी में तीन, यूएस नगर में छह, उत्तरकाशी में चार, पिथौरागढ़ में छह और चम्पावत में दो नए संक्रमित मिले हैं। राज्य के विभिन्न अस्पतालों और होम आईसोलेशन में रह रहे 103 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया। जिसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 1040 हो गई है। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 2060 मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 1626 के सैंपल की रिपोर्ट आई। राज्य में शनिवार को कोरोना संक्रमण की दर 13.76 प्रतिशत जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 95 प्रतिशत के करीब थी।