भारत सरकार ने राज्य के दो प्रमुख अस्पतालों की सेवाओं को किया प्रमाणीकृत

भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड के दो प्रमुख अस्पतालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रमाणीकृत (Cetrification) किया गया है। स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि एस०पी०एस चिकित्सालय ऋषिकेश तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायपुर में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का भारत सरकार की टीम द्वारा आंकलन पश्चात इन दोनो अस्पतालों की विशिष्ट सेवाओं को प्रमाणीकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि सरकारी अस्पतालों में खराब स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत Quality Assurance कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि समान्य जनमानस का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास हो सके और उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल प्रतियोगिता की भावना के साथ कार्य कर सकें।

Quality Assurance कार्यक्रम के माध्यम से अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं का मूल्यांकन स्वय अस्पताल के स्टॉफ, जनपद एवं राज्य की टीम द्वारा किया जाता है। मूल्यकान उपरान्त सुविधाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी के होने पर उसमे तुरन्त सुधार कर सुविधाओं में गुणात्मक सुधार लाने की पहल की जाती है।

स्वास्थ्य सचिव उत्तराखण्ड को भारत सरकार द्वारा प्रेषित पत्र में उल्लेख किया गया है कि एस0पी0एस0 चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित 6 विभागों द्वारा गुणवत्ता के सभी मानकों को पूर्ण किया गया है जिसके क्रम में इन विभागों को 90% स्कोर के साथ NQAS Certification (National Quality Assurance Standards) किया गया है।

इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायुपर तथा एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश के लेबर रूम की सुविधाओं को LaQshya Certification प्रदान किया गया है। LaQshya Certification के तहत एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित प्रसूति विभाग की ओ0टी0 (Maternity OT) को भी गुणवत्ता के लगभग सभी मानक पूर्ण करने पर LaQshya Certification निर्धारित शर्तों के अन्तर्गत दिया गया है।

राज्य की दो प्रमुख चिकित्सा ईकाईयों को भारत सरकार द्वारा NQAS & LaQshya Certification दिए जाने के लिए स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने संबंधित अस्पतालों के चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टॉफ तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्टेट टीम को बधाई दी है।

18 से 23 अप्रैल तक लगेंगे वृहद स्वास्थ्य मेले-धन सिंह रावत

राज्य के जिला मुख्यालयों, नगर निकायों एवं ब्लॉकों में आगामी 18 अप्रैल से 23 अप्रैल तक वृहद स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया जायेगा। सूबे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए छह माह के भीतर जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे मशीन, पैथौलॉजी जांचें एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये, जबकि दूसरे चरण में उप जिला अस्पतालों एवं ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्था सुधारने को कहा गया है। इसी क्रम में 16 एवं 17 अप्रैल को राज्यभर के हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टरों में योग एवं टेली कन्सल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
सूबे के सहकारिता, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय के सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। डॉ0 रावत ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 18 अप्रैल से 23 अप्रैल तक प्रदेश के सभी 95 ब्लॉकों सहित जिला मुख्यालयों एवं नगर निकायों में वृहद स्तर पर स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया जायेगा। जिसमें सांसद, स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर, नगर निकायों के अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख अपनी सुविधानुसार बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करेंगे। डॉ0 रावत ने कहा कि स्वास्थ्य मेलों में स्थानीय लोगों का चिकित्सकीय परीक्षण एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ टेली कान्सल्टेशन, आयुष्मान भारत डिजीटल हेल्थ मिशन के तहत यूनिक हेल्थ आईडी उपलब्ध कराये जाने के साथ ही आयुष्मान कार्ड भी बनाये जायेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य मेलों में रक्तदान कार्यक्रम, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता सहित केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी आम लोगों को दी जायेगी। इसी क्रम में 16 एवं 17 अप्रैल को राज्यभर के हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टरों में योग एवं टेली कन्सल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभागीय मंत्री ने कहा कि जिला एवं ब्लॉक स्तर के अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिए गये हैं। जिसके तहत छह माह के भीतर जिला अस्पतालों एवं अगामी एक वर्ष के भीतर उप जिला चिकित्सालयों तथा ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सूरत बदल दी जाएगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को प्रथम चरण के अंतर्गत जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे मशीन, पौथालॉजी जांच की व्यवस्था करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों गाइकनोलॉजिस्ट, चाइल्ड स्पेशिलिस्ट, ऑर्थाेपैडिक सर्जन, एनेस्थीसिया, डेनटिस्ट आदि की तैनाती के निर्देश दिये गये हैं, जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष के भीतर उप जिला अस्पतालों एवं ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पौथोलॉजी जांच, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जो चिकित्सक लम्बे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं उनके विरूद्ध एक सप्ताह के भीतर कार्यवाही की जाय।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज पाण्डेय, मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा आशीष श्रीवास्तव, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निदेशक चिकित्सा डॉ. शैलजा भट्ट, डॉ. विनीता शाह, डॉ. सरोज नैथानी, डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, वित्त नियंत्रक खजान पाण्डे, उप निदेशक, सहायक निदेशक, एनएचएम के प्रभारी अधिकारी, आईईसी अधिकारी जेसी पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

11 मरीजों की मौत, सक्रिय केस 31 हजार पार

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे के भीतर 3064 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। जबकि 11 मरीजों की मौत हुई है। सोमवार को सक्रिय मामले भी 31 हजार पार हो गए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या 403465 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सोमवार को देहरादून में 870, हरिद्वार में 485, नैनीताल में 243, ऊधमसिंह नगर में 529, अल्मोड़ा में 148, चमोली में 169, टिहरी में 58, पौड़ी में 306, बागेश्वर में 67, पिथौरागढ़ में 37, रुद्रप्रयाग में 25, उत्तरकाशी में 99 और चंपावत जिले में 28 संक्रमित मिले हैं।
अब तक 7491 मरीजों की मौत हो चुकी है। 2985 संक्रमित ठीक हुए हैं। इन्हें मिला कर 356331 मरीजों ने संक्रमण को मात दी है। वर्तमान में 31280 सक्रिय मरीजों का अस्पतालों और होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है। प्रदेश की रिकवरी दर 88.32 प्रतिशत और संक्रमण दर 11.76 प्रतिशत दर्ज की गई है।

सरकारी दफ्तरों में तेजी से पैर पसार रहा कोरोना
हरिद्वार में सरकारी दफ्तरों में कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। अधिकारियों-कर्मचारियों के पॉजिटिव होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। नया साल शुरू होते ही जनवरी के पहले सप्ताह से कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट की दस्तक और तीसरी लहर की आशंका के बीच बड़ी संख्या में संक्रमित सामने आ रहे हैं। 23 जनवरी को अधिकतम 961 केस सामने आ चुके हैं। सरकारी दफ्तरों में बड़ी तेजी से कोरोना पैर पसार रहा है।
आए दिन कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे हैं। 21 जनवरी को 45 सरकारी कर्मचारी पॉजिटिव मिले थे। 22 जनवरी को कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 68 हो गई। 23 जनवरी को तो अब तक सबसे अधिक 178 सरकारी कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। नगर निगम हरिद्वार में अकेले लगभग सौ कर्मचारी और दो सहायक नगर अधिकारी संक्रमित हो चुके हैं। विकास भवन में भी करीब 50 कर्मचारी हाल ही में संक्रमित पाए जा चुके हैं। सेल टैक्स विभाग में भी लगभग 20 कर्मचारी पॉजिटिव हो चुके हैं। 23 जनवरी को जिला कोर्ट में भी जिला जज समेत 75 कर्मचारी-अधिकारी कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इससे ये सरकारी विभाग कोरोना के हॉट-स्पॉट बनते जा रहे हैं। सीएमओ डा. कुमार खगेंद्र सिंह का कहना है कि कर्मचारियों के पॉजिटिव मिलते ही उन्हें होमआइसोलेट कर जरूरी उपचार शुरू कर दिया जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर जोर, स्वास्थ्य नीति का मसौदा तैयार

उत्तराखंड में लोगों को बेहतर और गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पहली बार उत्तराखंड की स्वास्थ्य नीति-2021 तैयार कर रही है। स्वास्थ्य विभाग ने नीति का खाका तैयार किया है। जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम, सुलभ और गुणवत्ता युक्त बनाने पर सरकार का नीति में फोकस है। माना जा रहा है कि चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार स्वास्थ्य नीति पर फैसला ले सकती है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में जहां सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। वहीं, चुनिंदा बड़े अस्पताल हैं। जिससे मरीजों को आपातकालीन सेवा में इलाज के लिए दूसरे क्षेत्रों में आना पड़ता है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने और एकरूपता लाने के लिए सरकार ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) मानकों के अनुरूप अस्पतालों को स्थापित किया है। जिसमें 13 जिला अस्पताल, 21 उप जिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 52 पीएचसी टाइप-बी, 526 पीएचसी टाइप-ए, 23 अन्य चिकित्सा इकाईयां, 1897 उप स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हेल्थ वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं। एम्स ऋषिकेश के अलावा तीन राजकीय मेडिकल कॉलेज दून, श्रीनगर, हल्द्वानी चल रहे हैं। राजकीय मेडिकल कालेज अल्मोड़ा को शुरू किया जाना है। हरिद्वार, पिथौरागढ़ और रुद्रपुर में नए मेडिकल कालेज प्रस्तावित हैं। जिनका काम चल रहा है।
सोशल डेवलपमेंट फार कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि उत्तराखंड में जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार और विभाग को फ्रेम वर्क बनाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा। कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2019 तक पिछले तीन साल में उत्तराखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे कम खर्च हुआ है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति पर 5887 रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके साथ प्रशिक्षित डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ पर ध्यान देना होगा। सरकार निजी अस्पतालों को प्रोत्साहित करे, लेकिन निजी अस्पतालों की लूट खसोट पर नकेल कसनी चाहिए। तकनीकी का इस्तेमाल कर टेलीमेडिसिन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

आज 13 नए संक्रमित मरीज मिले, सुरक्षा को नजरअंदाज ना करे

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 13 नए संक्रमित मिले हैं, जबकि 18 मरीज स्वस्थ हुए हैं। फिलहाल 231 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक प्रदेश में 344779 लोग संक्रमित हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रविवार को 06 जिलों में 13 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। बीते 24 घंटे में 18 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया है। इन्हें मिलाकर अब तक 330938 कोरोना संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं। 

डबल डोज या आरटीपीसीआर के बाद ही मिलेगा उत्तराखंड में प्रवेश 
ओमिक्रॉन वैरिएंट की दस्तक के बाद प्रदेश में जहां सख्ती लागू हो गई है। वहीं अब हरिद्वार जिले में भी सख्ती करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश की सीमा से लगे दूसरे प्रदेशों के जिलों से आने वाले बॉर्डर पर अब सख्ती से पुलिसकर्मी चेकिंग करेंगे। डबल डोज का सर्टिफिकेट या आरटीपीसीआर रिपोर्ट दिखाने के बाद ही प्रदेश में प्रवेश मिलेगा। ऐसे में अब बॉर्डर पर सख्ती बढ़ने के बाद प्रदेश में आने वाले यात्रियों की संख्या में गिरावट आएगी। 
नए साल के जश्न को लेकर धर्मनगरी के रास्ते लाखों यात्री पहाड़ी जिलों में पहुंचते हैं। वहीं इस बीच अब ओमिक्रॉन ने भी अपनी दस्तक दे दी है। इसको लेकर अब बॉर्डर पर सख्ती शुरु हो गई है। एसएसपी डॉक्टर योंगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इस महामारी के कारण आमजन का जीवन बहुत प्रभावित हुआ है। कोविड-19 के कहर में बहुत से लोगों ने अपनी जान गंवाई है। लोगों को  सावधानी बरत कर घरों में रहकर अपने तथा अपने परिवार को इस महामारी के नए वैरिएंट ओमिक्रोन की चपेट में आने से बचाना है।

नियमों का पालन करना जरुरी
महामारी के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से बचने के लिए नियमों की पालना करना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नियमों का पालन करके ही लोग महामारी के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से बच सकते हैं। ऐसे में तीन महत्वपूर्ण एहतियाती उपाय जरूरी हैं, जिनमें सामाजिक दूरी, मास्क का प्रयोग, हाथों को बार-बार साबुन व हैंड सैनिटाइजर से साफ करना शामिल है। इन एहतियातों को अपनाकर आप अपने को व परिवार को कोरोना महामारी से बचाकर प्रशासन व पुलिस का सहयोग करें। कोरोना के नए वैरिएंट की दस्तक के साथ जिला पुलिस सतर्क हो गई है और आमजन को महामारी से बचाने के लिए कोरोना के नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
जिला पुलिस द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम और समाचार पत्रों के माध्यम से भी आमजन को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद भी नियमों को ताक पर रखकर मास्क का प्रयोग न करने व कोविड के नियमों की अवहेलना करने वालों पर पुलिस द्वारा कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। वहीं अब बॉर्डर पर भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी गई है। प्रदेश में आने वाले लोगों की जांच बॉर्डर पर ही करवाई जा रही है। वहीं आरटीपीसीआर रिपोर्ट देखने के बाद ही अब प्रदेश में प्रवेश दिया जाएगा। श्यामपुर थाना क्षेत्र के चिड़ियापुर व लाहडपुर, मंगलौर के नारसन और भगवानपुर बॉर्डर भी सख्ती की जा रही है। 

त्योहारों से पहले कोविड ओर डेंगू से बचाव की जाय प्रभावी व्यवस्था-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कोविड 19 के साथ डेंगू एवं मलेरिया बीमारी की रोकथाम के लिये प्रभावी प्रयासों की जरूरत बताते हुए इस सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों एवं जिलाधिकारियों को समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिये हैं।
सोमवार को सचिवालय मे इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं शासन के उच्चाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिये हैं। सभी जनपदों के जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात के बाद डेंगू एवं मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं। इसके लिये साफ सफाई, दवा आदि के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फॉगिंग की जाए। शहरी क्षेत्रों में डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता एवं जल निकासी पर विशेष ध्यान दिया जाय। तथा व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल के बाद डेंगू जैसी बिमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसके लिये प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक प्रबन्धन पर ध्यान दिया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। इस पर प्रभावी नियंत्रण बना रहे, इस दिशा में सतर्क रहने की भी जरूरत उन्होंने बतायी।
कोविड-19 की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना का प्रभाव कम जरूर हुआ है लेकिन समाप्त नहीं हुआ है इसके लिए सभी स्तरों पर एहतियात एवं सावधानी बरती जानी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में भी व्यापक जन जागरूकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के प्रभाव को नियन्त्रित करने के लिये इस सम्बध में जारी निर्देशों एवं सावधानियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाय, लोग इसके प्रति लापरवाह न बने इस पर ध्यान दिया जाय।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये है कि राज्य सरकार द्वारा जनहित को ध्यान मे रखते हुए 207 प्रकार की पैथालॉजिकल जांचे निशुल्क उपलब्ध कराये जाने, जच्चा बच्चा को अस्पताल से निःशुल्क घर छोड़ने के लिये संचालित खुशियों की सवारी जैसी योजनाओं का भी जनता को सरल तरीके से समझाने के लिये व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि अटल आयुष्मान योजना का लाभ लोगों को मिल रहा है, इसकों और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिये स्वास्थ्य विभाग, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ ही निजि चिकित्सालयों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की जाएं।
मुख्यमंत्री ने सभी पीएचसी एवं सीएचसी मे आवश्यक उपकरणों एवं संसाधनों की व्यवस्था के साथ ही तीन नये मेडिकल कालेजों हरिद्वार, रूद्रपुर एवं पिथौरागढ़ में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री ने पीएम केयर फण्ड के तहत उपलब्ध कराये गये वेंटिलेटर आदि की भी जानकारी प्राप्त की तथा इनकी स्थापना के सम्बन्ध मे कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ0 पंकज कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कोरोना संक्रमण की रोकथाम, वैक्सीनेशन, डेंगू एवं मलेरिया आदि बीमारियों से बचाव के लिये किये जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव अमित नेगी, अपर सचिव स्वास्थ्य सोनिका, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तृप्ति बहुगुणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

आखिर किसे कहा, स्वास्थ्य मंत्री ने-नही सुधरे तो एक माह में अनुबंध खत्म

राज्यभर में पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों की समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अस्पतालों ने एक माह के भीतर जन अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो सरकार ऐसे अस्पतालों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए अनुबंध समाप्त करने की कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित आधा दर्जन विधायकों ने प्रतिभाग करते हुए अपने विधानसभा क्षेत्रों में संचालित पीपीपी मोड़ अस्पतालों में क्षेत्रीय जनता को आ रही समस्याएं गिनाई। जिस पर विभागीय मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऐसे अस्पतालों की लगातार निगरानी करने तथा शासन को मासिक रिपोर्ट भेजने को कहा।

सूबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित सभागार में प्रदेश भर में पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों के संचालकों एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित संबंधित क्षेत्रों के आधा दर्जन विधायकों ने प्रतिभाग किया। बैठक में विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में संचालित पीपीपी मोड़ अस्पतालों की समस्याएं रखी। विधायकों ने पीपीपी मोड़ में चल रहे अस्पतालों के गैरजिम्मेदाराना रवैये, डाक्टरों की कमी जैसे अन्य कई गंभीर मुद्दे बैठक में रखे। जिस पर विभागीय मंत्री डा. रावत ने पीपीपी मोड़ अस्पताल संचालकों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अस्पतालों ने एक माह के भीतर अपनी कार्यप्रणाली में जन अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार नहीं लाया तो सरकार ऐसे अस्पतालों के विरूद्ध अनुबंध समाप्त करने की कार्यवाही से गुरेज नहीं करेगी। डा. रावत ने बताया कि सरकार का मकसद पीपीपी मोड़ के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अस्पताल संचालकों की जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करें। विधायकों एवं स्थानीय जनता के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए उन्होंने अस्पताल संचालकों को संपर्क अधिकारी नियुक्ति करने के निर्देश दिये। डा. रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा वह पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों की लगातार निगरानी कर प्रत्येक माह रिपोर्ट शासन को भेजें। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान क्षेत्रवासियों ने पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पताल बीरोंखाल में अव्यवस्था की शिकायतें की तथा स्वयं उन्होंने पाया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर व टेक्निशियन गायब मिले। यही नहीं क्षेत्रवासियों ने बताया कि काफी दिनों तक अस्पताल की ओपीडी भी बंद रही जिस कारण क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक टिहरी धन सिंह नेगी, विधायक सल्ट महेश जीना, विधायक रामनगर दिवान सिंह बिष्ट, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, पूर्व विधायक एवं नगर पालिका अध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, अपर सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा, सीएमओ टिहरी संजय जैन, डा. ए.एस. चैहान, डा. रमेश कुमार, डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. रमेश सिंह राणा, डा. आशीष गुसांई, डा. एमबी पंत, डा. पीयूष, डा. संतोष कुंवर, डा. गौरव रतूड़ी, डा. प्रतिभा कोहली, दीपक गोयल, अभिषेक दुबे, अम्बेश बाजपेय सहित विभागीय अधिकारी एवं पीपीपी मोड़ अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थिति रहे।

विभाग की बेहत्तरी के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व महानिदेशकों से लिये सुझाव

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहत्तर बनाने एवं आम जनमानस तक विभाग की पहुंच बनाने के उद्देश्य से सूबे के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा में सूबे के पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशकों की बैठक बुलाई। डा. रावत ने कहा कि सूबे की स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों से सुझाव एवं सलाह ली जायेगी। जिसके लिए उन्होंने 150 दिनों का लक्ष्य विभागीय अधिकारियों को दिया है। इस क्रम आज उत्तराखंड के प्रथम महानिदेशक स्वास्थ्य डा. आई.एस.पाल सहित आधा दर्जन पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशकों ने बैठक में प्रतिभाग कर अपने सुझाव रखे।

बैठक में अपने अनुभवों को साझा करते हुए डा. पाल ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य केन्द्रों के बेहत्तर संचालन के लिए मेडिकल उपकरणों के रख-रखाव के साथ ही पैरामेडिकल स्टॉफ एवं टेक्निशियन्स को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों का बेहत्तर उपचार किया जा सकेगा। डा. आर.पी. भट्ट ने कहा कि प्रदेशभर के अस्पतालों में फिजिशियन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों की तैनाती अति आवश्यक है। डा. डी.एस. रावत ने ब्लॉक एवं जिला अस्पतालों में आपसी समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने बच्चों में होने वाले गम्भीर रोगों की पहचान हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिये जाने पर बल दिया। डा. अमिता उप्रेति ने कहा कि आशा वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण देकर गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान में लगाया जा सकता है। डा. आशा माथुर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ ही चिकित्सालयों में प्रसव की सुविधाए बढ़ाई जानी चाहिए। इस मौके पर डा. आर.सी.एस. सयाना एवं डा. आर.सी. आर्य ने भी अपने सुझाव रखे।

राज्य में स्वास्थ्य विभाग को मिले 345 चिकित्साधिकारी

कोविड महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच स्वास्थ्य विभाग को राज्य लोक सेवा आयोग से 345 नए चिकित्साधिकारी मिले हैं। जल्द ही इन चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कोविड के बीच इन चिकित्सकों के मिलने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और भी सुदृढ़ होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार विस्तार प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन चिकित्सकों के आने से कोविड महामारी से निपटने में सरकार को मदद मिलेगी।

पौड़ी में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए महिलाओं को जाना होगा पुरूष चिकित्सालय

अनिल बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार।
नोबोदित उत्तराखण्ड प्रदेश में पौड़ी जिले और शहर का दुर्भाग्य ही रहा है कि किसी भी आंदोलन के बूते जीती गई चीज पौड़ी के काम नहीं आई। अब महिलाओं के जिला चिकित्सालय को ही ले लीजिये, इस अस्पताल के भवन को अस्तित्व में लाने के लिये पौड़ी और 9 गांव की महिलाओं ने अबिभाजित उत्तराखंड के दौरान एक बड़े जन आंदोलन के जरिये अपने लिये अलग से महिला जिला अस्पताल का निर्माण करवा दिया था।

इस अस्पताल के अस्तित्व में आने के बाद महिलाएं अपने रोजमर्रा की शाररिक दिक्कतों को खुले मन से चिकित्सकों बता पाती थी इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान होने वाली शाररिक बदलावों की झेंप से भी उनको निजात मिल जाती थी।

अबच्च्च् मोड़ में चले जाने के बाद पौड़ी जिला अस्पताल के संचालन कर्ताओं ने जिला महिला अस्पताल को पुरूष अस्पताल में मिला दिया है। अब इसी चिकित्सालय में महिलाओं का इलाज भी किया जायेगा। अस्पताल को च्च्च् मोड़ पर चलाने वाले ब्यापारियों ने अपने खर्चो को कम करने के लिये इस तरह की चाले चली है। हालांकि इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष शान्ति देवी और पौड़ी विद्यायक मुकेश कोली ने महिला अस्पताल के अस्तित्व को खत्म करने पर गंभीर आपत्ति जताई है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने इस संबंध में कमिश्नर गढ़वाल और जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को पत्र लिखा है।

प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के लिए विशेष प्रयास किये जाय। स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों के लिए शीघ्र अधियाचन भेजे जाय। जिन पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है, उनमें तेजी लाई जाय।

मुख्यमंत्री ने 75 दिनों के अंतर्गत चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा के सभी संवर्गों की सेवा नियमावली बनाने तथा रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिये। न्याय पंचायत स्तर तक एएनएम की व्यवस्था की जाय एवं उन्हें आवश्यक दवाइयों का किट भी उपलब्ध कराया जाय। मातृ मुत्यु दर एवं शिशु मृत्युदर में और कमी लाने के प्रयास किये जाय। राज्य के जिन जनपदों में बाल लिंगानुपात में पिछले कुछ सालों में कमी आई है, ऐसे जनपदों में बाल लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जाय। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए ऐसे क्षेत्रों में चिकित्सकों की नियुक्ति की जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि सीएचसी, पीएचसी तक दवाइयों का पर्याप्त उपलब्धता हो।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आगामी 100 दिनों के अन्दर टेलीमेडिसिन की व्यवस्था की जाय। मेडिकल कॉलेज में जल्द भर्तियां की जाय। कोविड टीकाकरण में और तेजी लाई जाय। चारधाम यात्रा के दृष्टिगत यात्रा मार्गों पर 108 एम्बुलेंस सेवा की पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाय। जिन परिवारों के अभी तक आयुष्मान कार्ड नहीं बने हैं, उनके भी जल्द कार्ड बनाये जाय। जिला अस्पतालों में सुपर स्पेशिलिस्ट-स्पेशिलिस्ट डॉक्टरर्स की नियुक्ति की जाय। सभी को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा मिले इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाय। डेंगू, मलेरिया तथा अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए वर्षाकाल से पूर्व सभी आवश्यक तैयारियां कर ली जाय।

मुख्यमंत्री तीरथ ने केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की कार्य प्रगति की विस्तार से जानकारी ली। बैठक में जानकारी दी गई की। अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत अभी तक 43 लाख 16 हजार गोल्डन कार्ड जारी किये जा चुके हैं। 02 लाख 55 हजार से अधिक लोगों ने अभी तक इस योजना का लाभ लिया है। अस्पतालों का भुगतान एक सप्ताह के अन्दर किया जा रहा है।

बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, प्रभारी सचिव डॉ. पंकज पाण्डेय, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तृप्ति बहुगुणा, अपर सचिव-मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूणेन्द्र सिंह चैहान, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एसके गुप्ता, एनएचएम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।